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मौलवी ने भाभी की चूत में बीज बो दिया

कहानी का पिछला भाग: मौलवी ने भाभी की चूत में बीज बो दिया – Part 1

मैंने कहा, “मैं किसी से नहीं डरती हूं। मैं आपका हाल-चाल पूछने आई हूं। कल मेरे पति ने आपके साथ झगड़ा किया था।”

हम बातें करने लगे। उनका ध्यान बार-बार मेरे बूब्स के गहरे क्लिवेज पर जा रहा था। मैंने जानबूझकर साड़ी का पल्लू थोड़ा और सरका दिया। मेरे गोरे, भरे हुए बूब्स का आधा हिस्सा अब खुलकर दिख रहा था, निप्पल के उभार और साफ। हम दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे, आंखों में वासना साफ झलक रही थी।

मैंने पूछा, “आपका परिवार कहां है?” वो बोले, “मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है। बीवी काफी साल पहले मर गई थी। दो बेटे सऊदी अरब में रहते हैं।”

मैंने उनके सिर पर लगी चोट देखी। उठकर उनके बहुत पास गई और जानबूझकर इतना चिपक गई कि मेरे नरम, गरम बूब्स उनके मुंह और गाल से पूरी तरह सट गए। मेरे खड़े निप्पल उनके होंठों को छू रहे थे। मैंने कहा, “कोई बात नहीं है, चोट जल्दी ठीक हो जाएगी।”

मौलवी से अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने दोनों हाथ मेरी कमर पर कसकर रख दिए और धीरे-धीरे पेट मसलने लगे। उनकी उंगलियां मेरी नाभि में घुसकर गोल-गोल घुमाने लगीं, कभी अंदर दबाकर, कभी बाहर खींचकर। मैं मदहोश हो रही थी, मेरी सांसें तेज, चूत से रस टपकने लगा था। मेरी टांगें कांप रही थीं।

जब मैंने कोई विरोध नहीं किया तो उनका हौंसला पूरी तरह बढ़ गया। उन्होंने ब्लाउज के ऊपर से ही मेरे बूब्स को दोनों हाथों से जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया। मेरे खड़े निप्पल उनकी हथेलियों में दब रहे थे। मैं चुप रही, बस कराह रही थी। वो उठे, मेरे चेहरे को दोनों हाथों में पकड़ा और होंठों पर गहरा, लंबा किस कर दिया। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई, मेरी जीभ से खेलने लगी। मैं भी उनका पूरा साथ देने लगी, उनकी जीभ चूसने लगी, होंठ काटने लगी।

उन्होंने मेरी गर्दन पर चूमते हुए गालों पर कई गीले किस दिए। मुझे कसकर अपनी चौड़ी छाती से चिपका लिया। पीछे से ब्लाउज के सारे हुक एक-एक करके खोल दिए। ब्लाउज उतारकर फेंक दिया, फिर ब्रा के हुक खोलकर ब्रा भी उतार दी। मेरे बड़े-बड़े गोरे बूब्स पूरी तरह आजाद हो गए, निप्पल गुलाबी और सख्त, जैसे किसी ने चिमटा लगा दिया हो। उन्होंने एक बूब मुंह में लिया और जोर से चूसने लगे, जीभ से निप्पल को गोल-गोल घुमाते, दांत से हल्का-हल्का काटते। दूसरे बूब को हाथ से मसलते, निप्पल को अंगूठे से रगड़ते। मैं कराह उठी, “आह्ह.. ओह्ह.. मौलवी साहब.. धीरे.. दर्द हो रहा है.. लेकिन छोड़ना मत.. आह्ह.. और चूसो.. मेरे बूब्स तुम्हारे हैं..”

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फिर उन्होंने मेरे पेटीकोट का नादा खींचकर खोल दिया। मैंने खुद पैंटी नीचे सरका दी और पैरों से उतार फेंकी। अब मैं पूरी नंगी उनके सामने खड़ी थी, मेरी चूत के बाल गीले, होंठ फूले हुए, रस टपक रहा था। उन्होंने अपनी धोती उतारी, अंडरवीयर भी उतार दी। उनका 9 इंच लंबा, 3 इंच मोटा लंड सीधा तना हुआ, सुपाड़ा चमकदार, नसें फूली हुईं।

उन्होंने कहा, “भाभी, इसे चूसो।” मैं घुटनों के बल बैठ गई। मुंह खोला और टोपा मुंह में लिया। “ग्ग्ग.. गी.. गी.. गों..” गले तक लेने की कोशिश की। जीभ से सुपाड़ा चाटती रही, हाथ से लंड की जड़ को मसलती रही, दूसरा हाथ उनके गोले दबाती रही। वो मेरे बाल पकड़कर मुंह में धकेल रहे थे। मैं गले तक ले रही थी, लार बह रही थी, आंखों में आंसू आ गए। पांच मिनट तक चूसने के बाद उन्होंने मुझे उठाया और बेड पर लिटा दिया। दरवाजा बंद कर दिया।

वो मेरे ऊपर चढ़ गए। फिर से गहरा किस किया, जीभ मुंह में घुसाई। फिर गर्दन चूमते, कान में जीभ डालकर चाटते, बूब्स चूसते, पेट पर किस करते हुए नाभि में जीभ घुमाई। नीचे पहुंचे तो मेरी टांगें फैलाकर चूत पर जीभ फेरी। मैं पूरी कांप उठी। “आह्ह.. ओह्ह.. क्या कर रहे हो मौलवी साहब.. आह्ह..” लेकिन उन्होंने क्लिट को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। दो उंगलियां मेरी चूत में डालकर तेजी से अंदर-बाहर करने लगे, कभी घुमाकर G-स्पॉट दबाते। मेरी चूत से रस बहने लगा, चादर पर धब्बा बन गया। “ऊऊ.. हां.. और तेज.. उंगलियां और अंदर.. मैं पागल हो रही हूं.. आह्ह.. ओह्ह.. चाटो और जोर से..”

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जब मैं पूरी तरल हो गई, तब उन्होंने मेरी दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं। लंड का टोपा मेरी चूत के मुंह पर रगड़ा, धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया। बूब्स जोर से मसले और एक ही जोरदार धक्का मारा। “आह्ह्ह्ह्ह!!” मेरी तेज चीख निकल गई। लंड एक झटके में आधा अंदर चला गया। दर्द से मैं दोहरी हो गई, आंसू निकल आए। लेकिन वो रुके नहीं। धीरे-धीरे धक्के बढ़ाने लगे, हर धक्के के साथ लंड और गहरा जाता, मेरी चूत की दीवारें फैल रही थीं।

मैं हिल रही थी। “ओह्ह.. आह्ह.. हां.. और जोर से.. फाड़ दो मेरी चूत.. आह्ह..” उनकी स्पीड बढ़ती गई। कमरा मेरी सिसकारियों से भर गया। “आह.. आह.. ऊऊ.. हां राजा.. चोदो मुझे.. और तेज.. मेरी चूत तुम्हारी है..”

फिर उन्होंने मुझे पलटकर घोड़ी बनाया। पीछे से लंड घुसाया और तेज-तेज धक्के देने लगे। मेरे बट्स पर थप्पड़ मार रहे थे। “पट.. पट.. पट..” की आवाज गूंज रही थी। मैं पीछे धक्के मार रही थी। “हां.. ले लो.. मेरी चूत तुम्हारी है.. और जोर से.. आह्ह.. मेरे बट्स लाल कर दो..”

उसके बाद वो खुद लेट गए और मुझे ऊपर बिठा लिया। मैं उनके लंड पर उछलने लगी। मेरे बूब्स हवा में उछल रहे थे, निप्पल और सख्त। वो नीचे से धक्के दे रहे थे, हाथों से बूब्स दबा रहे थे, निप्पल चूस रहे थे। “हां.. मेरी रानी.. तेज.. मेरे लंड पर नाचो.. आह्ह.. कितनी टाइट है तेरी चूत.. कितना गरम पानी बह रहा है..”

आखिरकार उन्होंने मुझे फिर नीचे लिटाया और मिशनरी में ऊपर चढ़ गए। वो बोले, “क्यों जान-ए-मन मजा आ रहा है?”

मैंने कहा, “हां मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है साला कितने सालों बाद एक औरत को चोद रहा हूं जब से बीवी मरी थी तब से तड़प रहा था आज सारी कसरें निकलूंगा।”

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मैंने कहा, “निकाल लो मैं अब तुम्हारी हूं चोद दो मुझे फाड़ दो ले लो अपना बदला मेरे पति से।”

उन्होंने कहा, “बदला ऐसे पूरा नहीं होगा जब तक तेरे अंदर अपना बीज ना डाल दूं तुमारा पेट अपने बच्चे से फूला हुआ देखना चाहता हूं।”

मैंने कहा, “ठीक है।”

उन्होंने मुझे पूरे 40 मिनट तक अलग-अलग पोजीशन में बुरी तरह चोदा। मैं चार बार जोर-जोर से झड़ चुकी थी, हर बार चूत सिकुड़कर लंड को दबाती, पूरा शरीर कांप जाता। आखिरकार वो मेरे ऊपर गिरे, लंड गहराई तक दबाया और अपना गाढ़ा, गर्म वीर्य मेरी चूत में उड़ेल दिया। “ऊऊ.. हां.. भर दो.. सारा माल अंदर..” बहुत सारा वीर्य निकला, मेरी चूत से बहकर चादर पर गिरने लगा, मेरी टांगों तक पहुंच गया।

फिर मैं उठी और कपड़े पहनने लगी। जाते वक्त उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और बोले, “फिर कब आओगी?” मैंने कहा, “कल आऊंगी। पीछे वाला दरवाजा खुला रखना।”

उसके बाद जब भी मौका मिलता, हम जमकर चुदाई करते। मैं चोर दरवाजे से अंदर आ जाती। जल्दी ही मैं गर्भवती हो गई। जब मैंने मौलवी को बताया तो वो बहुत खुश हुए और बोले, “अपने पति को छोड़कर मुझसे शादी कर ले। तुझे रोज-रोज बहुत मजा दूंगा और हर साल एक बच्चा दूंगा।”

मैंने कहा, “नहीं ये नहीं हो सकता लेकिन मैं तुमसे ही अपनी मरवाऊंगी। ये मेरा वादा है।”

बच्चे का पति को शक न हो इसलिए मैंने दो-तीन बार पति से भी चुदवा लिया। जब मैं छह महीने प्रेग्नेंट थी तो मैंने अपना फूला हुआ पेट मौलवी को दिखाया तो वो बहुत खुश हुए। मैंने एक खूबसूरत लड़के को जन्म दिया। अब वो एक साल का हो गया है। लेकिन मौलवी गांव से पता नहीं कहां चले गए। फिर भी उनके प्यार की निशानी मेरे पास है।

ये है मेरी कहानी। आपको कैसी लगी?

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