beta ne maa ki gaand chati sex story: दोस्तों मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं। मेरी उम्र छब्बीस साल है और मेरी माँ की उम्र सैंतालीस साल है। उसकी हाइट सिर्फ चार फीट छह इंच है जिसकी वजह से उनका कद काफी छोटा लगता है लेकिन उनकी शारीरिक बनावट बेहद आकर्षक और उत्तेजक है। उनके स्तन ३८ इंच से कम नहीं हैं जो हमेशा भारी भरे हुए और गद्देदार दिखते हैं तथा ब्लाउज को तान कर रखते हैं। हां उनकी एक खासियत उनकी गांड है जो पूरे तैंतालीस इंच की है। उसकी नंगी झलक देखकर धीरे धीरे मेरे मन में माँ के प्रति गलत और वासना भरे ख्याल पैदा होने लगे थे जो अब मेरे दिमाग पर पूरी तरह हावी होने लगे थे तथा रात रात भर मुझे जागने पर मजबूर कर देते थे।
फिर एक बार मेरी नौकरी रांची में लग गई। जब मैं वहां चला गया तो कुछ दिनों बाद मेरी माँ मेरा सामान ठीक से सेट करने के लिए वहां पहुंच गईं। जैसे ही उन्होंने घर में कदम रखा मेरे दिल में एक अजीब सी उत्तेजना और खुशी की लहर दौड़ गई जिससे मेरा पूरा बदन गर्म होने लगा। मेरा मन करने लगा कि आज मैं उन सभी कहानियों को हकीकत में आजमाकर देखूंगा जिन्हें मैंने छुप छुप कर पढ़ा था। इस ख्याल मात्र से ही मेरा लंड अपने आप उछलने और सख्त होने लगा था तथा पैंट के अंदर फड़कने लगा था।
फिर मैं ऑटो लेकर माँ को स्टेशन से घर ले जाने गया। वे साड़ी में बेहद खूबसूरत लग रही थीं। उनकी साड़ी उनके भारी स्तनों और चौड़ी कमर को अच्छे से उभार रही थी तथा हर उछाल पर उनके स्तन हल्के से हिल रहे थे। मैं उन्हें देखकर अपने पुराने गंदे ख्यालों में पूरी तरह खो गया। मुझे याद आ गया वह पहला मौका जब मैंने गांव में छत से उनकी गांड देखी थी। वह सुबह का समय था जब सूरज की हल्की रोशनी चारों तरफ फैली हुई थी।
और जब वे शौचालय के लिए आई थीं तो उनकी बड़ी गोरी मोटी गांड मेरे सामने पूरी तरह खुले में थी। उन्होंने अपनी साड़ी को कमर तक ऊपर उठा लिया था जिससे उनकी दोनों गोल गोल निचली गांड की लोइयां पूरी तरह नजर आ रही थीं तथा उनकी चमकदार सफेद त्वचा पर सुबह की रोशनी पड़ रही थी। उनकी गांड के बीच की गहरी खाई साफ दिख रही थी और जब वे झुककर लोटे से पानी लेकर अपनी गांड धोने लगीं तो उनकी गांड की मांसलता और भी उभर आई। पानी की ठंडी धार उनके गांड के बीच से बह रही थी तथा छोटी छोटी बूंदें उनकी जांघों पर गिर रही थीं।
उनकी गांड की नरम मांसपेशियां हर हलचल के साथ हिल रही थीं। बस इतना देखकर मेरी उत्तेजना चरम पर पहुंच गई मेरा लंड पैंट में पूरी तरह तन गया तथा मैंने वहीं छत पर खड़े खड़े अपना लंड निकालकर जोर जोर से मुठ मार ली थी। मेरी मुट्ठी लंड पर ऊपर नीचे तेजी से चल रही थी शिराएं फूल रही थीं और कुछ ही पलों में मेरा गर्म वीर्य जोरदार फुहारों में छत पर गिर गया था लेकिन अब वह सपना सच करने का सुनहरा मौका आ गया था।
मैंने रांची में दो कमरों का एक घर लिया था जो काफी सुनसान इलाके में स्थित था। कोई आस पास में पड़ोसी भी नहीं थे तथा चारों तरफ शांति छाई हुई थी। फिर मेरी माँ नहाने के लिए बाथरूम में चली गईं। बाथरूम से पानी की आवाज आ रही थी तथा मैं कल्पना कर रहा था कि वे नंगी खड़ी होंगी। जब वे बाहर आईं तो उन्होंने दोपहर का स्वादिष्ट खाना बनाया। हम दोनों ने साथ बैठकर खाना खाया और फिर अपने अपने कमरों में सोने चले गए। उस रात मैंने माँ के बारे में सोच सोच कर कम से कम चार बार मुठ मारी। हर बार मैं अपनी आंखें बंद करके उनकी नंगी गांड और भारी बूब्स की कल्पना करता था मेरा लंड पूरी ताकत से फड़कता था और मेरा वीर्य तेजी से बाहर निकल रहा था। तब जाकर मुझे नींद आई। मैंने मन में प्लान भी बना लिया कि अब मैं उनकी भोसड़ी वाली चूत को अच्छे से चोदूंगा तथा हर तरीके से उनका मजा लूंगा।
तो सुबह होते ही मैं झट से उठ गया। मैंने एक पतला तौलिया अपने मुंह पर रख लिया ताकि मैं आंखें बंद करके भी सब देख सकूं। मैंने अपना पैर कंप्यूटर की तरफ रखा जिससे कंप्यूटर स्क्रीन पर रिफ्लेक्शन में मुझे कमरे का पूरा नजारा दिख सके कि कोई आ रहा है या नहीं। फिर मैंने अपना लंड पूरी तरह खड़ा करके लेट गया। मेरा लंड तना हुआ था मोटी शिराएं उभरी हुई थीं तथा सिर पर से चिपचिपा प्री कम निकल रहा था और बाहर की तरफ सलामी दे रहा था।
लेकिन मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी क्योंकि माँ के ख्याल आते ही मेरा लंड अपने आप ही पूरा सख्त और लंबा हो जाता था। साथ ही सुबह का समय भी था जब लंड अपने आप ही खड़ा रहता है। मेरा मोटा लंड माँ की शान में खड़ा होकर पूरी ताकत से सलामी दे रहा था तथा हल्के से फड़क रहा था। तभी माँ मेरे कमरे में आईं। जैसे ही उनकी नजर मेरे खड़े और फड़कते लंड पर पड़ी वे हड़बड़ा गईं। उनकी आंखें फैल गईं चेहरा लाल हो गया तथा वे जल्दी से कमरे में झाड़ू मारने लगीं फिर बाहर निकल गईं।
लेकिन वे दरवाजे के पास खड़ी होकर चुपके से मेरे खड़े लंड को देख रही थीं। यह मुझे कंप्यूटर की बंद स्क्रीन के रिफ्लेक्शन में साफ दिख रहा था। मैं मन ही मन बहुत खुश था कि शायद अब मेरे लंड की किस्मत खुलने वाली है। फिर मैंने लगातार दो दिन तक उन्हें अपना खड़ा लंड बार बार दिखाया। एक बार तो मैंने मुठ मारते हुए अपनी दोनों आंखें बंद कर लीं लेकिन चोरी चोरी देखता रहा कि वे क्या कर रही हैं।
जैसे कि मैं किसी सपने में हूं उन्होंने मेरा पूरा काम देख लिया। मैंने अपना लंड धीरे धीरे ऊपर नीचे करके मुठ मारी। मेरी उंगलियां लंड की मोटी शिराओं पर दब रही थीं सिर पर से चिपचिपा पानी निकल रहा था तथा मेरी सांसें तेज हो रही थीं। आखिरकार जब मेरा वीर्य बाहर निकला तो वह जोरदार फुहारों के रूप में बाहर छूटा तथा जमीन पर गिर गया। फिर तीन दिन बाद अचानक मुझे सिर में तेज दर्द होने लगा। शायद बुखार आने वाला था।
माँ बोली कि मैं तेरे सारे बदन पर तेल लगा देती हूं और तेल गरम करके लाने चली गई।
फिर जब वो आई तब मैं लुंगी में था और मेरे लंड ने लुंगी का टेंट बना दिया था। मेरी लुंगी पूरी तरह तनी हुई थी और मोटा खड़ा लंड उसके अंदर से साफ उभरा हुआ दिख रहा था जिसकी वजह से कपड़े पर एक बड़ा सा टेंट बन गया था। माँ गरम तेल की छोटी शीशी लेकर कमरे में आईं उनकी साड़ी अभी भी नहाने के बाद थोड़ी नम थी और उनके भारी स्तनों पर ब्लाउज चिपका हुआ था। उन्होंने तेल की शीशी खोली और पहले मेरे पैरों पर तेल डाला फिर अपनी छोटी हथेलियों से धीरे धीरे मालिश करने लगीं। उनकी उंगलियां मेरी जांघों की मांसपेशियों पर दबाव डाल रही थीं हर दबाव के साथ तेल की गर्माहट मेरी त्वचा में घुस रही थी और मेरे बदन में एक सुन्न सी खुशगवार गर्मी फैलने लगी थी। वे नीचे से ऊपर की तरफ लगातार मालिश करती गईं और आखिरकार पेट तक पहुंच गईं जहां उनका हाथ मेरे नाभि के पास रुक गया। उनकी हाइट कम होने की वजह से जब वे खड़ी होकर मेरे सिर पर तेल लगाने लगीं तो उनका बदन मेरे चेहरे के बहुत करीब आ गया। मेरा सिर उनके गद्देदार भारी बूब्स से दबने लगा उन बूब्स की नरम गर्माहट और ब्लाउज के नीचे छिपी मांसलता मेरे गालों और माथे पर पूरी तरह महसूस हो रही थी। हर सांस के साथ उनके स्तन हल्के से ऊपर नीचे हो रहे थे और मेरा लंड लुंगी के अंदर जोर जोर से झटके देने लगा था जैसे वह किसी भी पल फटने को तैयार हो।
जो माँ एक दो बार पहले ही देखते हुए तेल लगा रही थी और फिर तेल लगाने के बाद वो मुझसे बोली कि मैं एक सप्ताह तक लगातार तेल लगा दूंगी तो सब ठीक हो जाएगा। तो मैं खुशी से पागल होकर उछलकर बाथरूम में गया और सारी भड़ास निकाल दी।
फिर दूसरे दिन मैंने लुंगी के अंदर अंडरवियर पहना था। तो मैंने बोला कि मैं लुंगी हटा देता हूं यह तेल की मालिश से गंदी हो जाएगी और मैंने उसे हटा दिया तो मेरा लंड अंडरवियर में तना हुआ था और झांटें साइड से दिख रही थीं। माँ ने उसे देखा और तेल लगाने लगी और आज वो मालिश करते करते मेरी जांघ तक गई।
बस फिर क्या था तीसरे दिन मेरी हिम्मत बढ़ते हुए मैंने माँ से कहा कि माँ आपको बुरा तो नहीं लगता कि मेरा लंड ऐसे खड़ा रहता है मैं इसका क्या करूं यह रोज सुबह ऐसे ही खड़ा रहता है। तो वो बोली कि इस उम्र में अक्सर ऐसा होता है कोई बात नहीं।
तभी मैं झट से बोला कि मुझे दर्द हो रहा है क्या मैं इसे अंडरवियर से बाहर निकाल दूं और वैसे भी आपने बचपन से मुझे पाला है और आपने ना जाने कितनी बार देखा होगा। तो वो कुछ ना बोल पाई और मैंने अपना लंड बाहर निकाल दिया और मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा।
लंड पूरे जोश में सांप की तरह खड़ा होकर डोल रहा था। मेरा मोटा लंड लंबा और सीधा खड़ा था उसकी मोटी शिराएं फूली हुई थीं और सिर पर से पारदर्शी चिपचिपा प्री कम निकल रहा था जो धीरे धीरे नीचे बह रहा था। वो आज लंड के बहुत करीब तक तेल लगाने लगी। उनकी उंगलियां अब लंड की जड़ से शुरू होकर ऊपर तक तेल फैला रही थीं हर उंगली के स्पर्श से मेरे बदन में बिजली सी दौड़ रही थी। मैंने माँ से फिर कहा कि क्या मैं एक बात कहूं आप बुरा तो नहीं मनोगी। तो वो बोली कि अब क्या है फिर मैं बोला प्लीज इस पर भी थोड़ा तेल लगा दो ना मुझे अंडरवियर की वजह से बहुत दर्द हो रहा है।
तभी वो बहुत हैरान थी। मैंने उसके दोनों हाथ पकड़कर लंड पर रख दिए तो वो बोली कि तुझे क्या हो गया है। तो मैंने कहा कि प्लीज माँ मुझे बहुत दर्द हो रहा है और उसने अपने हाथ से लंड को ऊपर नीचे कर दिया और फिर वो मालिश करती ही गई। उनकी हथेली गर्म तेल से चिकनी हो चुकी थी उन्होंने लंड को पूरी मुट्ठी में पकड़ लिया और धीरे धीरे ऊपर से नीचे की तरफ खींचने लगीं। हर स्ट्रोक के साथ उनकी उंगलियां लंड की मोटी शिराओं पर दब रही थीं सिर का चिपचिपा भाग उनकी हथेली में घिस रहा था और हल्की सी चिकचिक की आवाज निकल रही थी। मेरी सांसें तेज हो गईं आंखें बंद हो गईं और मैं पूरी तरह जन्नत में पहुंचने लगा था। उनकी गर्म सांसें मेरे पेट पर पड़ रही थीं और उनका चेहरा लंड के बहुत करीब था। जब मेरा वीर्य निकलने वाला था तो उसने लंड को पकड़कर तिरछा कर दिया और पूरा वीर्य नीचे जमीन पर गिरा दिया। गर्म गाढ़ा वीर्य जोरदार फुहारों में बाहर निकला पहली फुहार जमीन पर दूर तक जा पहुंची दूसरी और तीसरी भी तेजी से छूटकर पूरे फर्श पर बिखर गईं। मैं तो खुशी से झूम उठा। तभी वो बोली कि मैं तेरी परेशानी को समझ गई हूं और अब मैं रोज तेरा जब जब यह खड़ा होगा मैं इसका वीर्य निकाल दूंगी।
मैं तो खुशी से झूम उठा और अगला दिन शनिवार रविवार का था और दोनों दिन छुट्टी में पूरे दिन मैं घर में नंगा घूमने लगा और मेरा लंड खड़ा होते ही वो तेल लगाकर मेरा वीर्य निकाल देती। अब माँ के किचन में बर्तन धोते वक्त पीछे से गांड में लंड सटा देता हूं और फिर एक बार जब वो लंड से माल निकाल रही थी।
तो मैंने उससे उसके बूब्स से दूध आने की बात पूछी। तो वो बोली कि इस उम्र में दूध थोड़े ही आता है वो तो जब बच्चा होता है तब आता है। तो मैंने कहा कि मैं देखूंगा और मैंने अपने हाथ से बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से दबा दिया।
लेकिन उसने ज्यादा विरोध नहीं किया और मैं जोर जोर से बूब्स को दबाने लगा और दबाते दबाते ब्लाउज में हाथ डाल दिया और वो मुठ मार रही थी और मैं उसके बूब्स दबा रहा था। मेरी उंगलियां उनके नरम गर्म स्तनों की गोलाई पर दब रही थीं मैंने ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर सीधे उनकी त्वचा को छुआ और दोनों बूब्स को पूरी ताकत से मसलने लगा। उनके निप्पल मेरी हथेली में सख्त होकर उभर आए थे मैं उन्हें उंगलियों से दबाता और घुमाता रहा। वो मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में ऊपर नीचे कर रही थीं उनकी उंगलियां तेजी से चल रही थीं और हर स्ट्रोक के साथ मेरी कमर उठ रही थी। तभी मेरे लंड से एक जोरदार पिचकारी निकली और दरवाजे तक गई। गर्म वीर्य की मोटी धार जोर से छूटी और लंबी दूरी तक फर्श पर फैल गई। तो वो बोली कि वाह यह तो बंदूक की तरह गोली चल रहा है।
फिर मैं जब भी जहां भी रहता उसके बूब्स दबा देता और किचन में तो गांड पर लंड सटाकर बहुत बूब्स दबाता और मजे लेता। तो वो बोलती कि चल रूम पर मैं तेरा वीर्य निकाल देती हूं। फिर एक दिन मैंने भांग खाई और उसे गोद में उठाया और उसे किचन से रूम पर ले आया और मेरा लंड उसकी गांड को उसकी साड़ी के ऊपर से छू रहा था और उसे दीवार की तरफ मुंह करके खड़ा कर दिया और लंड रगड़ने लगा वो गर्म होने लगी मैं बूब्स को मसले जा रहा था और पीछे से साड़ी को उठाने लगा तो वो बोली कि क्या कर रहा है।
लेकिन उसकी आवाज में कोई जान नहीं थी और उसने कोई विरोध नहीं किया। उसकी आवाज में बस एक हल्की सी थरथराहट थी जैसे वह खुद अपनी बढ़ती उत्तेजना को छुपा नहीं पा रही हों। मैंने तुरंत पीछे से उनकी साड़ी का किनारा पकड़ा और उसे धीरे धीरे उनकी कमर तक पूरी तरह ऊपर खींच दिया। उनकी मोटी तैंतालीस इंच की गोरी गांड अब पूरी तरह नंगी और मेरे चेहरे के ठीक सामने थी। साड़ी और पेटीकोट कमर पर लिपटे हुए थे और उनकी जांघों के बीच की गीली चूत की हल्की गुलाबी झलक भी दिखने लगी थी। उनकी गांड की दोनों भारी गोल लोइयां हल्के से हिल रही थीं और बीच में गहरी खाई साफ नजर आ रही थी।
मैं तुरंत उनके पीछे घुटनों के बल बैठ गया। अपने दोनों हाथों से मैंने उनकी गांड के गोल मांसल भागों को जोर से पकड़ लिया और उन्हें दोनों तरफ फैला दिया। उनकी गांड की खाई पूरी तरह खुल गई और टाइट भूरा गांड का छेद मेरे सामने था। मैंने अपना मुंह आगे बढ़ाया और अपनी गर्म जीभ को उनकी गांड की गहरी खाई में घुसा दिया। जीभ की नोक उनके टाइट गांड के छेद पर बार बार घूमने लगी। मैं जोर जोर से चाटने लगा चूसने लगा और अपनी जीभ को उनके छेद में अंदर तक धकेलने की कोशिश करने लगा। उनकी गांड से हल्की पसीने की नमकीन और मादक गंध मेरी नाक में भर रही थी जो मेरी उत्तेजना को और बढ़ा रही थी। उनकी गांड की नरम गर्म मांसपेशियां मेरी जीभ के हर स्पर्श पर सिकुड़ रही थीं और हल्के से कांप रही थीं।
तो वो बोली कि रुको लेकिन मैं नहीं माना और चाटने लगा। मैं और भी तेजी से उनकी गांड चाटता रहा। अपनी जीभ को उनके गांड के छेद के चारों तरफ घुमाता रहा और बीच बीच में चूसता भी रहा। फिर मैंने अपना एक हाथ आगे बढ़ाया और अपनी मोटी उंगली को उनकी चूत की फुली हुई लिप्स पर रख दिया। उनकी चूत पहले से ही बहुत गीली और गरम हो चुकी थी। मैंने उंगली को धीरे से अंदर धकेला और वह आसानी से उनकी नरम चिकनी चूत के अंदर चली गई। अंदर की गर्म और मांसल दीवारें मेरी उंगली को कसकर जकड़ रही थीं।
मैं उंगली को तेजी से अंदर बाहर करने लगा और साथ ही जीभ से उनकी गांड चाटता जा रहा था। मेरी मोटी उंगली उनकी चूत के अंदर पूरी लंबाई तक तेजी से धकेल रही थी और फिर बाहर खींच रही थी। हर बार अंदर घुसते ही उनकी गर्म नरम चूत की दीवारें मेरी उंगली को कसकर जकड़ लेतीं और जब मैं उंगली को बाहर निकालता तो उनके चूत का गाढ़ा चिपचिपा रस मेरी उंगली और हथेली पर बहने लगता था जिससे हर झटके के साथ चुप चुप की जोरदार चिकचिक आवाज निकल रही थी। मेरी जीभ उनकी मोटी गोरी गांड की गहरी खाई में लगातार घूम रही थी मैं उनके टाइट गांड के छेद को जोर जोर से चाट रहा था चूस रहा था और अपनी जीभ की नोक को अंदर तक धकेलने की कोशिश कर रहा था। उनकी गांड की नरम मांसपेशियां मेरी जीभ के हर स्पर्श पर सिकुड़ रही थीं और हल्के से थरथरा रही थीं। अब वो पूरा मजा ले रही थीं और कुछ नहीं बोल रही थीं। उनकी सांसें अब भारी और तेज हो गई थीं हर सांस के साथ उनकी छाती जोर से ऊपर नीचे हो रही थी। उनके घुटने हल्के से कांप रहे थे और उनकी कमर थोड़ी थोड़ी सी उठ रही थी जैसे वह मेरी जीभ और उंगली का पूरा आनंद ले रही हों। उनकी चूत अब और भी ज्यादा गीली और गरम हो चुकी थी रस की छोटी छोटी फुहारें मेरी उंगली पर छूट रही थीं और उनकी पूरी निचली देह थरथरा रही थी।
फिर मैं उसे बेड पर लाया और पैर फैलाकर चूत पर लंड सटाकर एक झटका मारा और चूत में लंड डाल दिया और चुदाई चालू कर दी और उस रात हमने बहुत देर तक सेक्स किया और फिर मैंने पूरे 34 दिन तक मेरी माँ के साथ सेक्स किया।
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