Pregnant karne ki sex story, cousin sex story: मेरा नाम शाहिद है, और मैं अपनी इस गुप्त लेकिन बेहद उत्तेजक कहानी को साझा कर रहा हूं जहां हर पल की गर्माहट और स्पर्श की सिहरन अभी भी मेरे शरीर में महसूस होती है। मेरी कज़न नदा, जिसकी उम्र बाईस साल है, उसकी शादी को दो साल हो चुके हैं लेकिन उसे बच्चा नहीं हुआ, और ये बात उसे अंदर ही अंदर खाए जा रही थी, जबकि उसकी आंखों में वो उदासी साफ दिखती थी जो मैं अपनी दोस्ती की वजह से महसूस कर पाता था। मेरी नदा से बहुत दोस्ती थी और उसकी बड़ी बहन सना भी मुझसे बहुत फ्रैंक थी, पर कभी गंदी बातें या गंदी सोच हम कज़नों में नहीं आई थी, लेकिन अब वो सब बदलने वाला था, एक ऐसी लहर जो हम सबको बहा ले जाने वाली थी।
नदा उन दिनों अपने मायके आई हुई थी और लॉकडाउन की वजह से सना भी मायके आई हुई थी, घर की हवा में एक अजीब सी शांति थी लेकिन हमारे बीच की हंसी-मज़ाक उस शांति को तोड़ती रहती थी। हंसी-मज़ाक और लूडो खेलने में टाइम गुज़र रहा था, हर खेल में नदा की मुस्कान और सना की चालाकी हमें बांधे रखती थी, वो पल जहां हमारी उंगलियां कभी-कभी छू जातीं और एक हल्की सी सिहरन दौड़ जाती। एक दिन सना ने कहा, “शाहिद, आप नदा को फलां जगह ले चलो,” उसकी आवाज़ में एक रहस्य था जो मैंने नोटिस किया। मैंने कहा, “खैर तो है?” सना बोली, “आपको पता है नदा के बच्चा नहीं हो रहा तो मेडिसिन खा रही है, ये तो उसी सिलसिले में जाना है मेडिसिन लेने,” और उसके चेहरे पर वो चिंता थी जो परिवार की हर बड़ी बहन में होती है। मैंने मज़ाक में कहा, “छोड़ो मेडिसिन, उसका शौहर कुछ करता नहीं है, आप ख़ामख्वाह अंकल का खर्चा करवा रहे,” और उस पल सना और नदा मुस्करा दीं, उनकी मुस्कान में एक शरारत थी जो मेरे दिल को छू गई। मैंने कहा, “मेहनत करो आप दोनों,” और ये शब्द हवा में लटक गए, जैसे कोई संकेत दे रहे हों। ख़ैर, नदा की मेडिसिन लाकर दी और अगले दिन लूडो खेलने गया तो सना ने कहा, “शाहिद, आपसे एक बात करनी है,” उसकी आंखों में वो गंभीरता थी जो मुझे अंदर तक हिला गई। मैंने कहा, “बोलो तो।” सना ने कहा, “मुझे शर्म आ रही लेकिन मैं बड़ी हूं आप दोनों से, बात तो करनी पड़ेगी,” और उसकी आवाज़ कांप रही थी, जैसे कोई बड़ा राज खोलने वाली हो। मैंने कहा, “हम दोस्त हैं आपी, आप बोलो क्या बात है,” और मैंने उसका हाथ पकड़कर उसे हौसला दिया, वो स्पर्श जो अब सब कुछ बदलने वाला था।
सना ने कहा, “आप करोगे मेहनत नदा पर?” मैं शर्म से सर्ख़ हो गया, मेरे शरीर में एक गर्म लहर दौड़ गई, दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं जैसे कोई तूफ़ान आने वाला हो। मैं इस तरह का अचानक सरप्राइज़ को कबूल करने से पानी-पानी हो गया था, मेरी सांसें रुक सी गईं, हाथ ठंडे पड़ गए लेकिन अंदर एक आग सुलग रही थी। मैंने कुछ बोलना था कि सना बोली, “देखो शाहिद, औलाद मेरी भी नहीं है और अब नदा भी दो साल से ऐसे ताने बरदाश्त कर रही सास और शौहर के, हर दिन की वो पीड़ा जो मैं समझ सकती हूं। लॉकडाउन भी है, वक़्त भी है, आप लोग कोशिश जारी रखो,” और उसके शब्दों में वो दर्द और उम्मीद मिश्रित थी जो मुझे हिला गई। मैंने कहा, “नदा मान जाएगी तो?” सना ने कहा, “उसे मैंने मना लिया है, वो भी तैयार है लेकिन शर्माती है। मैं बाहर बैठती हूं, आप उसके पास जाओ अंदर,” और घर में हम तीनों ही थे, हवा में एक तनाव था जो उत्तेजना से भरा हुआ था। मैं अंदर चला गया, सना बाहर बैठ गई, और कमरे की वो गर्माहट मुझे महसूस हो रही थी। मैंने जाते ही नदा से हाथ मिलाया, वो शर्मा रही थी, उसकी आंखें नीची थीं लेकिन चेहरे पर लाली छाई हुई थी जो उसे और आकर्षक बना रही थी।
अंदर जाकर मैंने नदा का हाथ पकड़कर सहलाना शुरू कर दिया, उसकी उंगलियां नरम और गर्म थीं, हर स्पर्श में एक电流 सी दौड़ रही थी जो मेरे शरीर को जगा रही थी। नदा ने काला सूट पहना हुआ था, उसकी शक्ल इंडियन अदाकारा नीरो बाजवा से मिलती थी, आज भी नदा नीरो बाजवा लग रही थी, उसकी त्वचा की वो चमक और खुशबू जो मुझे मदहोश कर रही थी। मैंने नदा को सीने से लगा लिया, वो शर्म से लाल हो रही थी और मुझे आज इतना अच्छा माल मिल गया था, उसकी सांसें मेरे कानों में गूंज रही थीं, उसके शरीर की गर्मी मेरे सीने को छू रही थी।
मैंने अपने होंठ नदा के होंठों के पास लाया और उसने मुंह फेर लिया, लेकिन मैंने धीरे से उसके गाल को चूमा, उसकी त्वचा की नरमी ने मुझे और उकसाया। दरवाज़े पर सना ने आवाज़ दी, “कमिनी, क्यों शाहिद का साथ नहीं दे रही? शाहिद कोई गैर तो नहीं है, आप भी तो उसे पसंद करती थी, अब क्या हुआ?” सना की बातों ने नदा पर जादू सा असर किया, उसने अब हार तस्लीम कर ली थी, उसकी आंखों में वो हिचकिचाहट थी लेकिन अब वो तैयार लग रही थी। मैंने फिर से मैदान संभाला और होंठ चूसना शुरू कर दिया, उसके होंठों की मिठास और नरमी ने मुझे पागल कर दिया, हमारी जीभें आपस में लिपट रही थीं, वो गहरा किस जो मिनटों तक चला।
नदा की आंखें बंद थीं, मैं उसके गोल-मटोल मम्मों को प्रेस कर रहा था कमीज के ऊपर से ही, उनके आकार और कठोरता ने मेरे हाथों को भर दिया, मैं धीरे-धीरे दबा रहा था जिससे नदा की सांसें तेज़ हो गईं। कुछ देर किस करने के बाद मैंने उसकी कमीज उतार दी, अब मैंने उसकी ब्रा को ऊपर सरकाया और उसके ब्राउन निप्पल को देखा, वो कठोर हो चुके थे, मैंने उन्हें मुंह में लेकर चूसा, जीभ से घुमाया, नदा अब मस्त हो गई थी, उसके मुंह से हल्की सी सिसकारियां निकल रही थीं, “आह, शाहिद,” और उसका हाथ मेरे बालों में फिर रहा था।
ये मेरा नदा के साथ पहला सेक्स था, अब नदा मेरा साथ दे रही थी, वो भी मेरे होंठों को चूस रही थी, हमारी सांसें मिश्रित हो रही थीं। नदा की शलवार भी उतर चुकी थी, मैंने धीरे से उसकी पैंटी को छुआ, वो गीली हो चुकी थी, मैंने उंगलियां चलाईं जिससे नदा का शरीर कांप उठा। वो लेट गई, मैं उसके ऊपर आ गया था और उसके बत्तीस साइज़ के मम्मों को चूस रहा था, एक को मुंह में लेकर जीभ से खेल रहा था, दूसरे को हाथ से मसल रहा था, नदा की आंखें बदस्तूर बंद थीं और उसकी नाभि इतनी सेक्सी, मैंने उसमें उंगली डाल दी, धीरे-धीरे घुमाई जिससे नदा का पेट सिकुड़ गया।
नदा, “आह शाहिद, आह मत करो ऐसा, आह,” लेकिन उसकी आवाज़ में वो मज़ा था जो रोकने का नहीं था। मैंने अब उसकी चूत सहलाना शुरू कर दिया था, क्या चूत थी, आह, चूत के लाल होंठ आपस में मिले हुए थे, मैंने उंगलियां चलाईं, क्लिट को रगड़ा जिससे नदा की कमर ऊपर उठ गई, वो गीली हो रही थी, उसकी खुशबू कमरे में फैल रही थी। मैंने नदा की टांगें उठाईं और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया, आह, आह, लंड का स्पर्श पाकर नदा मचल रही थी, उसकी सांसें तेज़ थीं, काफी टाइट चूत थी और गीली हो चुकी थी।
मैंने चूत के होंठ खोलकर लंड सुराख पर रखा और एक झटका मारा, आह, आह, क्या लज़्ज़त थी, चूत की गर्मी और टाइटनेस ने लंड को घेर लिया। पहली बार नदा की चूत में लंड डालने का मज़ा ही अलग था, वो दर्द और मज़े का मिश्रण। मैंने एक और धक्का मारा, नदा की चूत का रंग मेरे लंड को जकड़े हुए था।
नदा, “आह शाहिद, रुक जाओ,” उसकी आवाज़ में दर्द था लेकिन आंखों में वासना। मैंने कहा, “क्या हुआ?” नदा बोली, “बहुत दर्द हो रहा शाहिद।” मैंने कहा, “आप तो शादीशुदा हो।” नदा बोली, “वो तो है पर आपका लंड मोटा है और सेक्स को काफी दिन भी हो गए हैं, आह शाहिद, आराम से करो, मैं आपके नीचे हूं, कहीं जा तो नहीं रही,” और मैंने उसे चूमकर शांत किया, उसके मम्मों को फिर से सहलाया। मैंने नदा को प्यार करना शुरू कर दिया, लंड अभी आधा गया था, मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ा रहा था, हर इंच के साथ नदा की सिसकारी बढ़ रही थी।
अंदर नदा अब मेरी आंखों में आंखें डालकर देख रही थी, प्यार से मुझे उसके मम्मे प्यारे लग रहे थे, उनकी कठोरता और गर्मी हाथों में महसूस हो रही थी। नदा नॉर्मल हुई तो एक शानदार स्ट्रोक मारा मैंने, चूत में सारा लंड डाल दिया, “आह शाहिद, मार डाला ज़ालिम हो आप, बहुत दर्द हो रहा, ओई मां, मैं मर गई, आह,” लेकिन अब वो मेरे कंधों को पकड़कर करीब खींच रही थी। नदा शादीशुदा होने के बावजूद मस्त माल थी, उसकी चूत की टाइटनेस ने मुझे पागल कर दिया। मैंने अब स्ट्रोक्स मारने चालू कर दिए, लंड नदा की तंग चूत में फंस के जा रहा था और घिसे मारने में मज़ा आ रहा था, हर धक्के के साथ पच-पच की आवाज़ और नदा की सिसकारियां कमरे को भर रही थीं।
नदा ने मुझे अब दबोच लिया था, वो बोल रही थी, “आह शाहिद, और तेज़, क्या स्पीड है, आह शाहिद, और डाल दो,” और उसकी कमर मेरे साथ ताल मिला रही थी। और वो फ़ारिग़ हो गई और मैंने लंड बाहर निकाला जो नदा की चूत के पानी से गीला था, वो चमक रहा था, मैंने उसे चाटा जिससे नदा शर्मा गई।
साफ़ करके मैंने फिर डाल दिया अंदर, आह, क्या मज़ा था, चूत की गर्मी फिर से महसूस हुई। नदा अब मुझे प्यार से देख रही थी लेटी हुई और अपनी चूत को ऊपर उठाकर मेरा साथ दे रही थी, उसके नाखून मेरी पीठ पर गड़ रहे थे। चूत में लंड अंदर-बाहर हो रहा था, चूत टाइट होने की वजह से मेरा भी पानी निकलने लगा था, वो दबाव बढ़ रहा था। मैंने कहा, “नदा, पानी निकलने वाला है, कहां निकालूं?” नदा, “शाहिद, अंदर ही निकाल, और आह, आह,” उसकी आवाज़ में वो आग्रह था।
मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा और मेरा सारा पानी नदा की चूत में निकल रहा था, आह, आह, वो गर्म तरल अंदर बह रहा था, नदा की चूत उसे सोख रही थी। ऊपर से सना आ गई और बोली, “शाहिद, दो मिनट ऐसे ही रहो उसके ऊपर,” और वो हमें देखकर मुस्करा रही थी।
नदा अब मेरे नीचे थी और लंड काफी सारा पानी नदा की चूत के अंदर छोड़ चुका था, वो गर्माहट अभी भी महसूस हो रही थी, चूत की दीवारें लंड को निचोड़ रही थीं। सना दरवाज़े पर खड़ी देख रही थी, बोली, “शाहिद, चंद मिनट ऐसे ही रहो उसके ऊपर,” और उसने नदा के बालों को सहलाया। और फिर बोली, “नदा, पहले कौन फ़ारिग़ हुआ है?” नदा ने कहा, “मैं,” उसकी आवाज़ अभी भी कांप रही थी। और सना ने मुझे कहा, “वेरी गुड शाहिद, अब कुछ टाइम बाद आप एक राउंड और लगा लो, मैं जाती हूं बाहर,” और वो बाहर चली गई लेकिन उसकी नज़रों में वो उत्सुकता थी।
मैंने नदा को कहा, “अब आप ऊपर आजाओ,” और मैंने उसे प्यार से देखा। वो बोली, “मुझे शर्म आ रही है,” लेकिन उसके होंठ मुस्करा रहे थे। मैंने कहा, “शर्म वाला तो आपके अंदर चला गया, अब कैसी शर्म, हा हा हा,” और हम दोनों हंस पड़े, वो हंसी जो तनाव को कम कर रही थी। नदा कहती, “बेशर्म कहीं का,” लेकिन अब वो मेरे ऊपर आने को तैयार थी।
मैंने कहा, “चलो मैं आंखें बंद कर लेता हूं, आप ऊपर आजाओ,” और मैंने आंखें बंद कीं लेकिन चुपके से देख रहा था। नदा अब मेरे ऊपर आ गई थी, वो मुझे सीने पर किस कर रही थी और नीचे जा रही थी, उसके होंठ मेरी गर्दन से होते हुए नीचे सरक रहे थे, हर चुम्बन में एक सिहरन दौड़ रही थी, फिर अचानक उसने मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया, उसकी उंगलियां लंड को सहला रही थीं, साइज़ महसूस कर रही थीं।
नदा अब लंड का साइज़ देख रही थी, उसकी आंखें चौड़ी हो गईं। अब उसने अपने होंठ मेरे लंड पर रख दिए थे, वाओ, क्या एहसास था, उसके मुंह की गर्मी और जीभ की नरमी ने मुझे झकझोर दिया। पहली बार किसी लड़की ने लंड चूसा था, आह, आह, वो जीभ से चाट रही थी, मुंह में लेकर चूस रही थी, गग गग की आवाज़ आ रही थी। नदा ने लंड साफ़ कर दिया था, अब उसने लंड की सवारी करने की ठान ली थी, वो उठी और मेरे ऊपर बैठ गई।
हम जल्द ही लोंग और लाइची बन गए थे, वो मेरे लंड को अपनी चूत पर रगड़ रही थी, गीली चूत की गर्मी महसूस हो रही थी। नदा ने लंड का सुपाड़ा अपनी चूत के सुराख पर रखा और आराम-आराम से दबाव डालना शुरू कर दिया लंड पर, हर इंच के साथ उसकी सिसकारी बढ़ रही थी। मेरा आधा लंड अंदर चला गया था, नदा के मुंह से चीख निकल गई, “आह, मार डाला, आह, सो हॉट शाहिद, उम उम, आह, वाओ,” क्या एहसास था, चूत की टाइटनेस फिर से महसूस हुई।
चूत के गोल रंग ने लंड को अभी भी जकड़ रखा था, नदा अब गर्म हो चुकी थी, वो अब लंड की सवारी कर रही थी, ऊपर-नीचे हो रही थी, उसके मम्मे उछल रहे थे, मैंने उन्हें पकड़कर दबाया। नदा बोली, “शाहिद, ऐसा मैं पहली बार कर रही ऊपर आकर,” उसकी आवाज़ में शर्म और उत्तेजना थी। मैंने कहा, “सच?” कहने लगी, “हां,” और मैंने हंसकर कहा, “तो और मज़ा लो।” मैंने नदा के गांड के नीचे हाथ ले जाकर उसे ऊपर-नीचे होने में मदद की, वो थक न जाए, उसके गांड की नरमी हाथों में महसूस हो रही थी। नदा ने सारा लंड अपने अंदर ले लिया था और हम दोनों प्यार से एक-दूसरे को देख रहे थे, आंखों में वो वासना थी।
नीरो बाजवा अब तेज़-तेज़ लंड अंदर-बाहर कर रही थी, पच पच की आवाज़ तेज़ हो गई थी। इसी दौरान फिर से उसकी चूत पानी छोड़ चुकी थी, वो साफ़ करने लगी तो मैंने उसे चुदाई जारी रखने को कहा, मैंने कहा, “रुको मत, जारी रखो।” वो अब शानदार झटके मार रही थी, उसकी कमर की लय ने मुझे मदहोश कर दिया। अब मैं नदा के एक बार फिर ऊपर आ गया और चूत साफ़ करके फिर चुदाई स्टार्ट कर दी, लंड को धीरे से डाला और फिर तेज़ किया। नदा की टाइट चूत में लंड बहुत फंसकर जा रहा था, सारा कमरा पच पच पच कर रहा था, हवा में सेक्स की खुशबू फैली हुई थी। अब एक बार फिर मेरी जान निकलने वाली हो गई थी, वो दबाव बढ़ रहा था।
नदा ने कहा, “शाहिद, मैं भी फ़ारिग़ होने वाली हूं,” और उसकी बात ने मुझे और उकसाया। नदा की बात सुनकर मुझे फिर से जोश आ गया और मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी थी, हर धक्का गहरा और तेज़। अचानक मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी जो नदा की बच्चेदानी तक गई होगी, लंड मसलसल नदा की चूत में पानी छोड़ रहा था, नदा भी अब चिमट गई थी, वो भी मेरे साथ ही फ़ारिग़ हो गई थी, आह, आह, वाओ, उसकी चूत सिकुड़ रही थी, हमारी सांसें मिश्रित हो गईं। बरसात अब दोनों तरफ़ से जारी थी, वो गर्म तरल हमें एक कर रहा था।
मैं अब और मेरी कज़न नदा अब खुल चुके थे आपस में, वो हिचकिचाहट खत्म हो गई थी, हम एक-दूसरे के शरीर को जान चुके थे। नहा-धोकर हम फ्रेश हुए तो सना बोली, “कैसी लगी नदा आपको बीवी के रूप में और मज़ा आया?” उसकी आवाज़ में शरारत थी। मैंने कहा, “नदा एक खूबसूरत माल है और मुझे पसंद भी है,” और मैंने नदा को देखकर मुस्कराया। हम बातें कर रहे तो नदा आ गई दूध के दो ग्लास लेकर जो सना ने और मैंने पिया और सना ने कहा, “शाहिद, जितने दिन लॉकडाउन है नदा इधर ही है, आप उस पर मेहनत करो, अब आपकी दीवानी हो गई है नदा, मुझे रिज़ल्ट चाहिए,” और उसने आंख मारी। मैंने सर हां में हिला दिया और बाहर चला गया, लेकिन मन में वो पल घूम रहे थे। रात को नदा की कॉल आई, “शाहिद, क्या कर रहे हो?” उसकी आवाज़ मीठी थी।
मैंने कहा, “आपका ही ख्याल है,” और दिल में वो गर्मी फिर से जागी। उससे पूछा, “नदा, कैसा लगा मेरा सेक्स का अंदाज़?” नदा बोली, “शाहिद, कसम से मुझे बहुत मज़ा आया,” और उसकी सांसें तेज़ लग रही थीं। वो बोली, “आपका वो बहुत बड़ा है, मेरी तो कमर में दर्द है, आपने हालत बुरी कर दी मेरी,” लेकिन उसकी आवाज़ में शिकायत नहीं मज़ा था। मुझे अपनी तारीफ़ सुनकर बहुत जोश आया। मैंने कहा, “अब तुम मेरी बीवी बनकर रहोगी,” और वो हंस पड़ी। नदा कहने लगी, “आप तो मेरे जानू हो, मुझे पहले भी पसंद थे शाहिद और अब भी,” और हमारी बातें रात भर चलती रहीं। ख़ैर, मुझे बातें करते-करते नींद आ गई और अगले दिन मुझे कुछ काम था, नदा के घर नहीं जा सका और दोपहर को सना ने फोन किया, “शाहिद, आप आजाओ लूडो खेलेंगे,” लेकिन उसकी आवाज़ में वो संकेत था। मैंने कहा, “मैं आता हूं,” और दिल धड़क रहा था।
फ्रेश होकर मैं कज़न नदा के घर चला गया। जाते ही सना बोली, “अम्मी अब्बू खेतों में गए, आप लोग अपना काम कर लो, मैं गेट लॉक करके दो सूट रहते ही हैं वो धो लूं,” और वो मुस्कराकर चली गई। मैंने कहा, “अच्छा, आपका शुक्रिया,” और दिल में खुशी की लहर दौड़ गई। और नदा काफी मुस्करा रही थी, उसकी आंखों में वो शरारत थी। मैंने कहा, “क्या हुआ मेरी नीरो बाजवा?” तो बोली, “शाहिद, आप में काफी निखार आ गया है,” और वो करीब आ गई। मैंने कहा, “सब आपके हुस्न का नशा है,” और मैंने उसे गले लगा लिया।
हम लोग अब अंदर चले गए थे, कमरे की वो परिचित खुशबू फिर से महसूस हुई। नदा को मैंने बांहों में ले लिया, नदा ने टाइट और शर्ट पहन रखी थी, उसकी टाइट उसके कूल्हों को आकार दे रही थी। हम दोनों एक-दूसरे पर टूट पड़े, मैंने उसके होंठों को चूमा, गहराई से, जीभ से खेला, उसके मम्मों को शर्ट के ऊपर से दबाया। नदा की शर्ट ऊपर कर दी और उसकी काले रंग की ब्रा पागल कर देने वाली थी, मैंने ब्रा को हुक खोलकर उतारा, उसके मम्मे आजाद हो गए। नदा अब जल्दी में लग रही थी, अब उसके मम्मे और निप्पल मेरे मुंह में था, आह, आह, उम उम, आह, मैं जीभ से चाट रहा था, चूस रहा था, नदा की सिसकारियां बढ़ गईं।
फिर नदा ने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और फिर मेरा लंड निकालकर चूमने लगी, आह, आह, बहुत मज़ा आ रहा था, उम, आह, वो मुंह में लेकर चूस रही थी, गहराई तक, गग गग की आवाज़ आ रही थी। क्या सीन था, लफ़्ज़ों में बयान करना मुश्किल था, उसकी जीभ की चाल ने मुझे पागल कर दिया। अब नदा ने अपनी टाइट खुद नीचे सरका दी और मैंने उसकी टांगें उठा लीं, उसकी चूत को छुआ, गीली और गर्म।
लंड की टोपी नदा की चूत पर रगड़ रही थी, वाओ, क्या एहसास था, वो रगड़ से नदा मचल रही थी, मैंने और तेज़ रगड़ा। मैंने एक ज़ोरदार शॉट मारा, सारा लंड नदा की चूत में उतार दिया। नदा की चीख निकल गई, “शाहिद, आप मार डालोगे क्या मुझे, इतनी बेदर्दी से मत चोदो,” लेकिन वो मुझे करीब खींच रही थी। मैं अब लंड को अंदर-बाहर कर रहा था, नदा की चूत का गोल सा रंग जो मेरे लंड को जकड़ रहा था, आह, मज़ा आ रहा था चोदने में, हर धक्के के साथ उसकी सिसकारियां। नदा अब अपनी चूत उठाकर मेरा साथ दे रही थी, उसकी कमर की लय परफेक्ट थी। ये हमारी चौथी चुदाई थी मगर सब कुछ नया सा था, आह, आह, जैसे पहली बार।
अब नदा ने अपनी टांगें मेरी कमर में डाल के बोली, “शाहिद, और तेज़ जानू, मेरा पानी निकलने को है,” और उसकी आंखें बंद हो गईं। मैं नदा के ऊपर आ गया था, नदा मचल रही थी, उसके नाखून मेरी पीठ पर। सना दरवाज़े पर खड़ी देख रही थी। सना हमारी सेक्स कोच थी, उसने कहा, “शाहिद, पहले चार राउंड में आप नदा के ऊपर ही रहना और फ़ारिग़ होने पर लंड अंदर ही रखना दो मिनट,” और वो निर्देश दे रही थी। मैं नदा की चुदाई जारी रखे हुए था और शॉट तेज़-तेज़ मारने लगा। मेरा लंड भी अब पानी छोड़ चुका था, नदा की चूत पानी से भर चुकी थी और सना अब नदा का पसीना साफ़ कर रही थी, उसका स्पर्श हमें और उत्तेजित कर रहा था।
फिर जब तक नदा रही तब तक ये सिलसिला चलता रहा और लॉकडाउन के बाद वो घर चली गई, हर पल की यादें मन में बसी रहीं। एक महीने के बाद वो घर आई तो पता चला कि वो उम्मीद से है, उसकी आंखों में वो चमक थी। वो बहुत खुश थी और सना भी बहुत खुश थी। इसी खुशी में मैंने नदा की और सना की लेने की फरमाइश की तो नदा ने उसका भी बंदोबस्त कर दिया, और वो नया अध्याय शुरू होने वाला था।
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