Sali chudai sex story, Jija sali chudai sex story: कुछ ही महीने पहले मुझे ऐसी कहानियाँ पढ़ने का शौक हो गया। जब मैंने ऐसी मस्त सेक्सी स्टोरी पढ़ी तो मेरी चूत बिलकुल गीली हो गई। इसलिए मैंने फैसला किया कि जो कांड मैंने अभी तक किया है उसके बारे में आप लोगों को जरूर बताऊँगी।
पाँच महीने पहले मेरे जीजा जी मेरे घर आए। वो एक बड़ी कंपनी में इंजीनियर हैं। गर्मी की छुट्टी में मेरी दीदी और बच्चों को लेकर वो हमारे घर आए। जब जीजा मुझे देखते तो मुझसे चिपकने लग जाते। तरह-तरह के कॉम्प्लिमेंट मुझे देते।
“तृप्ति! साली जी! तुम बहुत सुंदर हो। मेरी शादी तुम्हारी दीदी से नहीं बल्कि तुमसे होनी चाहिए।” जीजा बोले। फिर वो मुझे रोज़ कहीं न कहीं घुमाने ले जाते। कभी आइसक्रीम खाने ले जाते।
धीरे-धीरे जीजा मुझे पसंद आने लगे। अब वो घर के सदस्यों से छुपकर मुझे छूने लगे। कभी मेरी कमर पर हाथ फेरते, कभी मेरी बाँह को सहलाते और कभी मेरे नए-नए छोटे-छोटे बूब्स को हल्के से हाथ लगा देते। उनकी उँगलियाँ मेरी छातियों के ऊपर से गुजरतीं तो मेरे शरीर में एक अजीब-सी सिहरन दौड़ जाती। मैं शरमा जाती पर रोक नहीं पाती थी।
फिर एक दिन जब मेरे सारे घर वाले किसी मंदिर के दर्शन करने गए थे, घर में सिर्फ मैं और जीजा रह गए। जीजा ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और अचानक अपनी बाहों में जकड़ लिया। उनका गर्म शरीर मेरे पीछे लगा हुआ था। उन्होंने मुझे अपनी ओर घुमाया और कसकर गले लगा लिया। उनकी साँसें मेरे गाल पर पड़ रही थीं। मुझे भी ये सब बहुत अच्छा लग रहा था। दिल की धड़कन तेज हो गई थी।
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मैंने भी जीजा को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उनका आलिंगन करने लगी। हम दोनों एक-दूसरे से चिपक गए। धीरे-धीरे हम अपनी मर्यादा भूल गए। जीजा ने मेरे गाल पर पहले हल्का-सा चुंबन किया। फिर मेरे नाजुक गुलाब के पंखुड़ी जैसे होठों को अपनी उँगलियों से छुआ। उनकी उँगलियाँ मेरे होंठों पर रेंग रही थीं। फिर उन्होंने अपने होठ मेरे होठों पर रख दिए। पहले हल्के से, फिर गहराई से। जीजा मुझे चूमने लगे। उनके होठ मेरे होंठों को चूसने लगे, जैसे कोई मीठा फल हो। मैं भी उनके साथ होंठ मिलाकर जवाब देने लगी। हम दोनों की साँसें एक हो गईं।
जैसे मैं उनके वश में आ गई थी। जीजा ने मेरे कान के पास अपना मुँह ले जाकर हल्के से कान की लौ को चूमा। फिर धीरे-धीरे उसे चबाने लगे। मुझे गुदगुदी होने लगी। शरीर में खुजली-सी हो रही थी। बड़ा अच्छा लग रहा था। मैं हल्के से सिसकारी लेने लगी। जीजा ने मेरे गले की पतली खाल पर होंठ रखे। पहले चूमते रहे, फिर हल्का-हल्का दाँत से कुतरने लगे। उनकी जीभ मेरे गले पर फिसल रही थी। मुझे पूरे शरीर में झुनझुनाहट होने लगी। मेरी साँसें तेज हो गईं। जीजा आगे बढ़ने लगे। मुझे उनको इसी वक्त रोक देना चाहिए था पर ना जाने क्यों मैं कमजोर हो गई थी।
जीजा ने मेरा दुपट्टा मेरे सीने से धीरे से निकालकर हटा दिया। अब मेरी छातियाँ सिर्फ सूट और ब्रा के नीचे थीं। उनके हाथ मेरे यौवन पर आ गए। मेरी छातियों पर उनके हाथ ना जाने कहाँ से आ गए। उन्होंने पहले हल्के से दबाया। मुझे ये सब बहुत अच्छा लग रहा था। धीरे-धीरे जीजा आगे बढ़ते चले गए। अब वो जोर-जोर से मेरे नीबू जैसे छोटे दूध दबाने लगे। उनकी हथेलियाँ मेरी छातियों को पूरी तरह से ढक रही थीं। मैंने उनको कुछ नहीं कहा जबकि मुझे उनको इसी समय रोक देना चाहिए था।
हम दोनों अपनी-अपनी हदें पार कर गए। जीजा ने मुझे उठाकर बिस्तर पर ले गए। हमारे घर में कोई नहीं था क्योंकि सभी लोग मंदिर दर्शन करने गए थे। जीजा मेरी चूत का दर्शन करना चाहते थे। सायद मैं भी ये सब चाहती थी। उन्होंने मेरे दोनों हाथ ऊपर कर दिए। मैं जानती थी क्यों।
फिर जीजा ने मेरा सफेद रंग का सूट धीरे-धीरे निकाल दिया। पहले बाजू से हाथ निकाले, फिर कमर से खींचकर उतारा। जैसे ही सूट उतरा मैंने दोनों हाथों से अपने दूध छुपाने की कोशिश की। मैंने लाल रंग की ब्रा पहन रखी थी। तीस साइज़ था इसका। जीजा मुझे चूमने लगे। पहले गाल, फिर गर्दन, फिर छाती के ऊपरी हिस्से पर। मैं सब समझ रही थी। वो चाहते थे कि मैं अपने हाथ अपनी कड़क छातियों से हटा लूँ पर मैंने ऐसा नहीं किया। जीजा मुझे लाख चूमते-चाटते रहे। उनकी जीभ मेरी ब्रा के ऊपर से छातियों को छू रही थी। पर मैंने अपने हाथ नहीं हटाए।
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“साली जी! क्या तुम चुदाई के बारे में कुछ जानती हो?” जीजा ने मेरे कान में फुसफुसाकर बोला। उनकी गर्म साँस मेरे कान में जा रही थी। मैं कुछ नहीं बोली पर मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैंने ना में सिर हिला दिया।
“अरे साली जी! चुदाई दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ होती है! ज़िंदगी में तुमको एक बार ज़रूर चुदवाना चाहिए। दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ को क्या तुम नहीं पाना चाहती हो?” जीजा बोले।
“हाँ जीजा जी! मैं चुदवाना चाहती हूँ।” मैंने धीमी आवाज में कहा।
“…तो साली जी! अपने हाथ हटाओ अपनी नर्म-नर्म छातियों से।” जीजा बोले।
तो मुझे ना चाहते हुए भी अपनी नर्म-नर्म नई-नई कड़क छातियों से हाथ हटाने पड़े। जीजा ने मेरी पीठ में हाथ डाल दिया। उनकी उँगलियाँ मेरी ब्रा की हुक पर गईं। एक क्लिक की आवाज हुई और ब्रा खुल गई। मेरे हाथ तुरंत मेरी दोनों नंगी बेहद नर्म मलाई जैसी खूबसूरत छातियों को छिपाने दौड़े पर जीजा के हाथ वहाँ पहले पहुँच गए। उन्होंने मेरी छातियों पर अपने हाथ रख दिए। मेरा जिया धक्क से हो गया।
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जीजा धीरे-धीरे मेरी नंगी नर्म छातियों पर हाथ फेरने लगे। उनकी हथेलियाँ मेरी छातियों को गोल-गोल घुमा रही थीं। उन्होंने मेरे हाथ नीचे कर दिए। ये सब रंगरेलियाँ चलती रहीं। बड़ी देर बाद मैं नॉर्मल फील कर पाई। अब मैंने पाया कि जीजा धीरे-धीरे मेरे दूध को दबा रहे थे। पहले हल्के से, फिर थोड़ा जोर से। उनकी उँगलियाँ मेरे निप्पल के आसपास घूम रही थीं। एक अजीब-सी झनझनाहट पूरे बदन में हो रही थी।
जीजा आगे बढ़ने लगे। मेरी छोटी छातियों को दबाने लगे। उनकी हथेलियों में मेरे पूरे बूब्स आ रहे थे। वो उन्हें निचोड़ रहे थे। “जीजा! क्या दीदी ने भी आपसे अपनी नर्म छातियाँ इसी तरह दबवाई थीं?” मैंने झुकी पलकों से पूछ लिया। जीजा को मुझ पर प्यार आ गया। उन्होंने मेरी खूबसूरत आँखें चूम लीं।
“हाँ साली जी! सुहागरात में तुम्हारी दीदी ने अपनी नर्म छातियाँ मुझसे इसी तरह दबवाई थीं।” जीजा बोले।
ये जानने के बाद मैं थोड़ा कम्फर्टेबल फील कर रही थी। मैं जीजा के साथ खुल गई थी। मैंने अपने हाथ नीचे कर लिए जिससे जीजा मेरे बूब्स दबा सकें। फिर क्या था जीजा ने मेरे छोटे-छोटे नीबू अपने ताकतवर हाथ में पकड़ लिए और जोर-जोर से दबाने लगे। मेरे पूरे बदन में झुनझुनी होने लगी।
जीजा के हाथ फौलाद जैसे थे। मेरे छोटे-छोटे नीबू को उन्होंने दोनों हाथों में मजबूती से पकड़ लिया। जैसे कोई नरम फल निचोड़ रहा हो, वैसे ही वो मेरे बूब्स को निचोड़ने लगे। पहले हल्के दबाव से, फिर धीरे-धीरे जोर बढ़ाते हुए। उनकी उँगलियाँ मेरे निप्पल्स को बीच में दबाकर घुमा रही थीं। दर्द और सुख का ऐसा मिश्रण हो रहा था कि मेरी साँसें रुक-रुककर आने लगीं। जीजा मेरे साथ फुल रोमांस करना चाहते थे। वो जोर-जोर से मेरे टिकोरे को दबा रहे थे। उनकी हथेलियाँ मेरी छातियों को पूरी तरह से भर रही थीं। साथ ही मेरे गोरे-गोरे गालों पर बार-बार चूमने लगे। पहले एक गाल, फिर दूसरा, फिर ठोड़ी पर। उनकी होंठ मेरे गालों पर गीले निशान छोड़ रहे थे।
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फिर सारी हदें जब पार हो गईं, तब उन्होंने मुझे धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया। मैं पीठ के बल लेट गई। जीजा मेरे ऊपर झुक गए। एक साथ वो मेरे होठ पीने लगे। उनके होंठ मेरे होंठों को गहराई से चूस रहे थे। जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। साथ ही उनकी दोनों हथेलियाँ मेरी नर्म-नर्म छातियाँ अपने पंजे में भरके दबाने लगीं। वो मेरे बूब्स को ऐसे दबा रहे थे जैसे उन्हें पूरा निचोड़ना चाहते हों। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। सुख की लहरें पूरे शरीर में दौड़ रही थीं। इसलिए मैं चाहकर भी उनको रोक नहीं पाई। मुझे शर्म भी बहुत आ रही थी कि मैं अपनी दीदी की तरह अपने जीजा से चुदवाने जा रही थी। पर वो शर्म अब सुख में बदल रही थी।
जीजा बड़ी देर तक मेरी नंगी छोटी-छोटी छातियों को दबा-दबाकर मजा लेते रहे। कभी दोनों हाथों से एक साथ दबाते, कभी एक हाथ से दबाकर दूसरे से निप्पल को उँगली से रगड़ते। उनकी उँगलियाँ मेरे निप्पल्स को पकड़कर हल्का खींचतीं, फिर छोड़ देतीं। हर बार ऐसा करने पर मेरे शरीर में बिजली-सी दौड़ जाती। इस दौरान मैंने भी ज़िंदगी का मजा लिया। मेरी साँसें तेज हो गईं। छातियाँ दबवाने के दौरान मेरी चूत धीरे-धीरे ढीली होकर गीली होने लगी। मैं महसूस कर रही थी कि नीचे गर्माहट बढ़ रही है। मेरी चूत से रस टपकने लगा था।
धीरे-धीरे जीजा मुझे चोदने की तैयारी करने लगे। मेरा कलेजा धक-धक करने लगा। डर और उत्सुकता दोनों साथ थे। जीजा का हाथ धीरे-धीरे मेरी टांग से होता हुआ मेरी जाँघों पर चला गया। पहले घुटने के पास सहलाया, फिर जाँघ के अंदरूनी हिस्से पर। उनकी उँगलियाँ मेरी नरम जाँघों की त्वचा पर फिसल रही थीं। वो मेरी जाँघ सहलाने लगे। हल्के-हल्का दबाते, फिर सहलाते। वो मेरे ऊपर चढ़ गए। उनका वजन मेरे शरीर पर महसूस हो रहा था। फिर उन्होंने मेरी नर्म-नर्म छातियाँ अपने मुँह में भरके मेरी चूचियाँ पीने लगे।
मुझे बड़ा अजीब-सा सुख मिला। जीजा मेरी छोटी नीबू आकार की छातियाँ पीने लगे। पहले एक को मुँह में लिया, जीभ से चारों ओर घुमाया। निप्पल को होंठों से दबाकर चूसा। फिर हल्का काटा। फिर दूसरी छाती पर। मैंने आँखें बंद कर लीं। एक अजीब-सा नशा मुझे चढ़ गया। जीजा हपर-हपर करके मेरी चुचुक पीने लगे। जैसे कोई बच्चा दूध पी रहा हो, वैसे ही वो जोर-जोर से चूस रहे थे। उनकी जीभ मेरे निप्पल्स पर घूम रही थी। हर चूसने पर मेरी छाती ऊपर उठती और नीचे आती।
धीरे-धीरे जीजा मेरी गोरी चिकनी जाँघें सहला रहे थे। उनकी हथेलियाँ मेरी जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर ऊपर-नीचे हो रही थीं। कभी हल्का दबाते, कभी नाखूनों से हल्का खुरचते। वो एक के बाद एक चुचि अपने मुँह में भर लेते थे। बारी-बारी से दोनों छातियों को चूसते। इस दौरान मुझे पूरे शरीर में सनसनी होने लगी थी। मेरी साँसें तेज हो गईं। मेरी चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी। अब तो यही मन था कि जीजा मुझे जल्दी से चोदें। मैं बेचैनी से तड़प रही थी।
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उनका हाथ धीरे-धीरे मेरी कमर से नीचे सरकता हुआ मेरी सलवार के नारे तक आ पहुँचा। जीजा की उँगलियाँ नारे की डोरी को छू रही थीं। उन्होंने डोरी को पकड़ा और एक झटके में खींच दिया। डोरी सर्रर्र की तेज आवाज़ करते हुए खुल गई। सलवार अब ढीली हो गई थी। जीजा मेरी सलवार को धीरे-धीरे नीचे करने लगे। पहले कमर से, फिर कूल्हों से। मैंने हल्की आवाज में मना किया, “जीजा… नहीं…” पर जीजा ने मेरी बात नहीं सुनी। वो मेरे नर्म-नर्म दूध पीते-पीते ही सलवार को मेरी जाँघों तक सरका देते रहे। सलवार अब मेरी घुटनों तक आ गई थी।
मैंने गुलाबी रंग की पेंटी पहन रखी थी। वो पतली और हल्की थी, जो मेरी चूत की आकृति को हल्का-सा उभार रही थी। जीजा ने उसे देखा और मुस्कुरा दिए। उनकी आँखों में सिर्फ वासना भरी हुई थी, जैसे अब कुछ भी रोक नहीं सकता। उनका दायाँ हाथ मेरी पेंटी पर आ गया। पहले हल्के से पेंटी के ऊपर से मेरी चूत को छुआ। फिर जोर-जोर से उँगली रगड़ने लगे। उनकी उँगली पेंटी के कपड़े के ऊपर से मेरी चूत की दरार पर आगे-पीछे हो रही थी। मेरी तो माँ चुदने लगी। मुझे बिजली के झटके लगने लगे। हर रगड़ के साथ मेरी कमर ऊपर उठ जाती, साँसें फूल जातीं।
बड़ी देर तक यही करते रहे। वो बदल-बदलकर मेरे नर्म-नर्म दूध पीते रहते। कभी एक छाती मुँह में लेकर चूसते, कभी दूसरी को हाथ से दबाते। साथ ही पेंटी के ऊपर से मेरी चूत को घिसते रहते। उनकी उँगली अब तेज हो गई थी। पेंटी गीली होकर मेरी चूत के रस से चिपक गई थी। फिर जीजा ने मुझे कुछ सेकंड के लिए छोड़ दिया। वो उठे और एक-एक करके अपने सारे कपड़े उतार दिए। शर्ट, पैंट, फिर अंडरवियर भी। उनका लंड पहले से ही खड़ा और सख्त था।
जीजा ने मेरी पेंटी को आखिर में उँगली से पकड़ा। पेंटी की किनारी को दोनों तरफ से पकड़कर धीरे-धीरे नीचे खींचा। पेंटी मेरी जाँघों से सरककर उतर गई। अब मैं अपने जीजा के सामने पूरी तरह नंगी थी। मेरी चूत पूरी तरह खुले में थी। जीजा ने मेरी चूत देखी तो उनकी आँखें चमक उठीं। वो आँखों से ही मेरी चूत को चोदने लगे। बड़ी देर तक मेरी चूत के दर्शन करते रहे। उनकी नजर मेरी गुलाबी भूरी चूत की दरार पर टिकी हुई थी, जहाँ से रस टपक रहा था।
फिर उन्होंने मेरी दोनों टाँगें धीरे से फैलाकर खोल दीं। मैं शर्म से मर रही थी। मैंने दोनों हाथ अपनी आँखों पर रख लिए, जैसे कुछ देख न सकूँ। जीजा मेरे पैरों के बीच बैठ गए। उन्होंने अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया और मेरी चूत पीने लगे। उनकी गर्म साँसें मेरी चूत पर पड़ रही थीं। मेरे पूरे जिस्म पर आग की लपटें उठ रही थीं।
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जीजा ने अपनी जीभ निकाली और मेरी चूत को लपलपाकर चाटने लगे। पहले बाहर की तरफ, फिर दरार के अंदर। उनकी जीभ मेरी क्लिटोरिस पर घूम रही थी। हर चाट के साथ मैं सिहर उठती। मेरी चूत बिलकुल पानी-पानी हो गई थी। रस उनकी जीभ पर चिपक रहा था। फिर उन्होंने उँगली से मेरी नाजुक चूत को हल्का खोलकर देखा। उनकी उँगली अंदर सरकी, धीरे से अंदर-बाहर होने लगी।
जीजा ने अपना लौड़ा सेट किया। हाथ से दो-चार बार जोर से मुठ मारने लगे। उनका लंड अब और सख्त हो गया था। कोई आठ इंच लंबा और दो इंच मोटा। जीजा ने मेरी चूत पर लंड का सिरा रख दिया। पहले हल्का दबाया, फिर एक जोरदार धक्का मारा। उनका लोहे जैसा सख्त लंड मेरी चूत में अंदर घुस गया। दर्द इतना तेज था कि मेरी आँखें फट पड़ीं।
मैं दर्द से चीखना चाहती थी पर जीजा ने मेरे छोटे से मुँह पर अपना ताकतवर हाथ रख दिया। उनकी हथेली मेरे होंठों पर दब गई। जीजा मुझे दनादन चोदने लगे। उनका लंड तेजी से अंदर-बाहर हो रहा था। मेरी आँखों से आँसू बह रहे थे। मेरी चूत पर खून लगा हुआ था, जो उनके लंड पर चढ़ गया था।
पूरे पंद्रह मिनट तक जीजा ने मेरे मुँह पर हाथ दबाए रखा और मुझे चोदते रहे। हर धक्के के साथ दर्द बढ़ता जा रहा था। मुझे बहुत दर्द हो रहा था। आधे घंटे बाद जीजा ने आखिरकार हाथ निकाल लिया और लंड भी कुछ देर के लिए निकाल लिया। मैं हाँफ रही थी।
“क्यों साली जी… मजा आया कि नहीं?” जीजा बोले।
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“हाँ जीजा मजा तो आया पर दर्द बहुत हुआ।” मैंने रोते हुए कहा।
“कोई बात नहीं। धीरे-धीरे तुम्हारा दर्द खत्म हो जाएगा।” जीजा बोले।
फिर वो मेरी चूत पीने लगे। जीजा का मुँह फिर से मेरी चूत पर लगा हुआ था। उनकी जीभ अब और गहराई से काम कर रही थी। वो मेरी चुदी हुई चूत के रस को चाटते हुए अंदर तक जीभ डाल रहे थे। मेरी चूत अब पहले से ज्यादा संवेदनशील हो चुकी थी। हर चाट के साथ मेरी कमर ऊपर उठ जाती, पैर काँपने लगते। जीजा की जीभ मेरी क्लिटोरिस पर घूम रही थी, कभी तेज-तेज लपलपाकर, कभी धीरे से दबाकर।
फिर उन्होंने अपनी उँगली मेरी चुदी चूत में डाल दी। पहले एक उँगली, धीरे से अंदर सरकाई। मेरी चूत अब गीली और ढीली हो चुकी थी, इसलिए उँगली आसानी से अंदर चली गई। जीजा ने उँगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया, फिर दो उँगलियाँ डाल दीं। वो फेंटने लगे। उनकी उँगलियाँ मेरी चूत की दीवारों को रगड़ रही थीं, ऊपर-नीचे, गोल-गोल। हर फेंट के साथ मेरी चूत से चटक-चटक की आवाज़ आने लगी। रस उनकी उँगलियों पर चिपक रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोई आग मेरे अंदर जल रही हो।
फिर जीजा ने अपना मुँह फिर से मेरी बुर पर लगा दिया। वो मेरी चूत को पूरा चूसने लगे। उनकी जीभ और होंठ मिलकर मेरी चूत का रस पी रहे थे। वो जोर-जोर से चूसते, जैसे सारा रस एक साथ निकालना चाहते हों। उनकी नाक मेरी क्लिटोरिस पर दब रही थी। मैं सिसकारियाँ ले रही थी, मेरे हाथ अब उनके सिर पर थे, बालों में उँगलियाँ फँसाकर उन्हें और गहराई से दबा रही थी।
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फिर जीजा ने अपना शरीर ऊपर किया। उन्होंने फिर से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया। लंड अब पहले से ज्यादा सख्त और गीला था। उन्होंने धीरे से धक्का मारा। लंड मेरी चूत में पूरा अंदर चला गया। शुरू-शुरू में फिर से हल्का दर्द हुआ, क्योंकि चूत अभी भी सूजी हुई थी और खून लगा हुआ था। पर धीरे-धीरे वो दर्द खत्म हो गया। मेरी चूत अब उनके लंड को पूरा समेट रही थी।
कुछ देर बाद जीजा मुझे ऐसे चोदने लगे जैसे मैं कोई रंडी हूँ। उनका पिछवाड़ा जोर-जोर से आगे-पीछे चल रहा था। हर धक्के के साथ उनका लंड मेरी चूत के सबसे गहरे हिस्से तक जा रहा था। गच-गच्च की तेज आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। मेरी चूत से पक-पक की गीली आवाज़ निकल रही थी। हर थप्पड़ के साथ मेरी छातियाँ हिल रही थीं। जीजा मेरे ऊपर झुके हुए थे, उनका पसीना मेरे शरीर पर टपक रहा था। वो कभी तेज धक्के देते, कभी धीमे करके मेरी चूत को रगड़ते।
मैं अब पूरी तरह उनके वश में थी। मेरी टाँगें उनके कंधों पर थीं। जीजा मेरी चूत को इस तरह पेल रहे थे जैसे कोई मशीन चल रही हो। मेरी साँसें रुक-रुककर आ रही थीं। सुख की लहरें बार-बार उठ रही थीं। मैं कई बार झड़ चुकी थी, पर जीजा रुक नहीं रहे थे। उनका लंड मेरी चूत की दीवारों को रगड़ता जा रहा था।
पैंतीस मिनट बाद जीजा की साँसें और तेज हो गईं। उनका शरीर काँपने लगा। उन्होंने आखिरी जोरदार धक्के मारे और मेरी खौलती चूत में अपना गर्म माल छोड़ दिया। उनका माल मेरी चूत के अंदर भर गया। मैं महसूस कर रही थी कि गर्म रस मेरी चूत में फैल रहा है। जीजा कुछ देर मेरे ऊपर ही लेटे रहे, फिर धीरे से अलग हुए।
पंद्रह दिन बाद मेरी एमसी रुक गई। मैंने प्रेगनेंसी टेस्ट किया। टेस्ट में दो लाइनें आईं। मालूम पड़ा कि मैं पेट से हूँ। अब मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्या करूँ।
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