Bhai bahan chudai sex story, First fuck sex story, Holi sex story: मैं आज आपको तीन साल पुरानी अपनी वो आपबीती सुनाने जा रही हूं, जो मेरे साथ सच में हुई थी, वो घटना जिसने मेरी जिंदगी को एक नई दिशा दी और मेरे मन में ऐसी उथल-पुथल मचा दी कि आज भी याद करके बदन में सिहरन सी दौड़ जाती है। ये भाई-बहन के बीच की चुदाई की पूरी कहानी है, जिसमें हर पल की गर्माहट और उत्तेजना को मैं महसूस करके बता रही हूं।
मेरा नाम सीमा साहू है और मैं सेक्सी हिंदी स्टोरी को नियमित रूप से पढ़ती हूं, उन कहानियों में डूबकर मैं अक्सर कल्पना करती हूं कि मेरे साथ भी कुछ ऐसा हो, और वो कल्पनाएं मुझे रातों में गर्म करके सोने नहीं देतीं। मेरी उम्र 26 साल है और जहां तक मेरे साइज की बात है वो 32-30-36 है, मेरी चूचियां इतनी भरी हुई हैं कि टॉप में भी उभरकर दिखती हैं, कमर पतली और गांड उभरी हुई जो चलते वक्त लहराती है। मेरा रंग बहुत गोरा है, त्वचा इतनी मुलायम कि छूने से ही सिल्क जैसा अहसास होता है। अब मैं आपको अपने परिवार के बारे में बता देती हूं, जिसमें हर सदस्य की अपनी जगह है लेकिन हमारे बीच का रिश्ता अब पहले जैसा नहीं रहा। मेरे घर में मेरी मम्मी, पापा, भाई और मैं ही हूं। मैं बी.कॉम के फाइनल ईयर में पढ़ाई कर रही हूं, कॉलेज के दिन व्यस्त लेकिन मन में हमेशा कुछ न कुछ उत्तेजक विचार घूमते रहते हैं।
हमारे घर में 2 कमरे हैं और एक बाथरूम है, जो इतना छोटा है कि अंदर की गर्माहट बाहर तक महसूस होती है, साथ में ही रसोई बनी हुई है जहां मम्मी रोजाना खाना बनाती हैं और उसकी खुशबू पूरे घर में फैल जाती है। एक कमरे में मेरे मां और पापा सोते हैं, जहां रात की शांति में कभी-कभी उनकी सिसकारियां सुनाई दे जाती हैं जो मुझे और उत्तेजित कर देती हैं, और दूसरे में मैं और भाई सोते हैं, एक ही बिस्तर पर जहां रातें अब पहले से ज्यादा गर्म हो गई हैं। मेरे भाई की उम्र 23 साल है। वो बीए फर्स्ट ईयर में है, उसका बदन मजबूत और मसल्स उभरे हुए हैं, जो मुझे अब आकर्षित करने लगे हैं।
बात मार्च महीने की है, होली आने वाली थी, वो मौसम जब हवा में रंगों की महक फैल जाती है और लोग बेफिक्र होकर एक-दूसरे को छूते हैं, जिससे मन में वासना जाग जाती है। हम लोग कॉलोनी में बहुत ही धूमधाम से होली मनाते हैं, संगीत बजता है, रंग उड़ते हैं और लोग एक-दूसरे पर रंग मलते हुए छूने के बहाने ढूंढते हैं।
होली के एक दिन पहले की बात है। सभी लोग होलिका जला कर घर पर आकर हाथ मुंह धोकर सोने जा रहे थे, आग की गर्माहट अभी भी बदन पर महसूस हो रही थी और हवा में जलती लकड़ियों की खुशबू फैली हुई थी। मम्मी-पापा अपने रूम में सोने चले गये थे और मैं भी हाथ मुंह धोने अपने बाथरूम में जा रही थी, मेरी सांसें तेज थीं क्योंकि बाहर की मस्ती से बदन में एक अजीब सी गुदगुदी हो रही थी। बाथरूम का दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था, जैसे कोई जल्दबाजी में बंद करना भूल गया हो।
मैंने जैसे ही दरवाजे को धक्का दिया दरवाजा खुल गया, अंदर की नमी वाली हवा मेरे चेहरे पर लगी और मैंने देखा कि मेरा भाई अपने लंड को हाथ में लेकर सू-सू करने की पोज में खड़ा हुआ था लेकिन वो सू-सू करने की बजाय अपने लंड को आगे और पीछे की तरफ किये जा रहा था, उसका लंड इतना सख्त और बड़ा लग रहा था कि मेरी नजरें वहां से हट ही नहीं रही थीं।
उसकी आंखें बंद थीं, चेहरे पर पसीना चमक रहा था और वो तेजी से अपने लंड को अपने हाथ में लेकर हिला रहा था, उसकी सांसें तेज थीं और बदन की मांसपेशियां कस रही थीं। उसको मेरे आने के बारे में पता नहीं लगा, वो अपनी मस्ती में खोया हुआ था।
मैंने एक पल के लिए उस नजारे को देखा और वापस अपने कमरे में आ गई, मेरे पैर कांप रहे थे, दिल इतनी जोर से धड़क रहा था कि लग रहा था बाहर निकल आएगा, और मेरी चूत में एक अजीब सी नमी महसूस हो रही थी। मेरा दिल जोर से धड़क रहा था। मैंने पहली बार इस तरह से लंड को देखा था, वो इतना मोटा और लंबा था कि कल्पना करके ही बदन गर्म हो रहा था। इससे पहले मैंने कभी भी किसी मर्द के लंड को नहीं देखा था। इसलिए मेरी हालत खराब हो रही थी, सांसें ऊपर-नीचे हो रही थीं और मन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी।
कुछ देर के बाद मेरा भाई बाथरूम से निकल कर बाहर आ गया और बिस्तर पर आकर सो गया, लेकिन मैं उसके चेहरे को देख रही थी जो अभी भी लाल था।
उस दिन रात को मुझे नींद नहीं आई, बिस्तर पर करवटें बदलती रही और पसीने से चादर गीली हो गई। मुझे बार-बार अपने भाई का लंड अपनी आंखों के सामने खड़ा हुआ दिखाई दे रहा था, उसकी नसें उभरी हुईं, टोपा चमकता हुआ। मैंने इससे पहले कभी अपने भाई को उस नजर से नहीं देखा था लेकिन आज उसका लंड देखने के बाद मेरे मन में कुछ अलग ही फीलिंग आ रही थी, एक चाहत जो मुझे छूने को मजबूर कर रही थी। फिर भाई के लंड के बारे में ऐसे ही सोचते हुए मुझे नींद आ गई, लेकिन सपने में भी वही दृश्य घूमते रहे।
अगले दिन मैं अपने भाई के साथ गली में होली खेलने के लिए चली गई, रंगों की महक से हवा भरी हुई थी और लोग हंसते-खेलते हुए एक-दूसरे पर रंग फेंक रहे थे। मेरे साथ मेरी सहेलियों के बॉयफ्रेंड भी आये हुए थे। वो उनके साथ होली खेलने में लगे हुए थे। वो बहाने से उनके टॉप में हाथ डाल कर रंग लगा रहे थे, हाथों की गर्माहट से सहेलियां सिहर रही थीं। कई बार तो उन्होंने नीचे टांगों के बीच में भी उनको रंग लगा दिया था, जिससे सहेलियों के चेहरे पर शर्म और मजा दोनों दिख रहे थे।
बहुत देर तक होली खेलने के बाद मैं अपने घर वापस आ गई, बदन पर रंग चिपका हुआ था जो त्वचा को चिपचिपा बना रहा था। मुझे अब नहाने के लिए बाथरूम में जाना था। मैं बाथरूम में चली गई और अंदर जाकर नहाने लगी, गर्म पानी बदन पर गिरता हुआ रंगों को धो रहा था और मेरी त्वचा को और संवेदनशील बना रहा था। उसके बाद मैं बिना कपड़े पहने हुए ही बाहर आ गई, पानी की बूंदें मेरी त्वचा पर मोतियों की तरह चमक रही थीं। मुझे नहीं पता था कि मेरा भाई भी रूम में आ चुका है।
जब मैं बाहर निकली तो मेरा भाई अपने बेड पर लेटा हुआ था। मैंने देखा कि वो मेरे नंगे बदन को ध्यान से देख रहा था, उसकी नजरें मेरी चूचियों पर टिकी हुई थीं जो ठंड से कड़ी हो गई थीं।
फिर जब उसने देखा कि मैं उसको देख रही हूं तो उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और जैसे सोने का नाटक सा करने लगा, लेकिन उसकी सांसें तेज बताती थीं कि वो जाग रहा है। फिर मैंने एक तरफ जाकर अपने कपड़े पहन लिये, लेकिन मन में एक अजीब सी उत्तेजना थी कि वो मुझे देख रहा था।
रात को खाना खाने के बाद मुझे नींद भी जल्दी आ गई थी। मैं उस दिन होली खेलने के बाद काफी थकी हुई थी, बदन में दर्द था लेकिन मन खुश था। फिर रात को करीब 12 बजे के करीब मुझे अपने पेट पर कुछ महसूस हो रहा था, जैसे कोई मुलायम हाथ सरका रहा हो। मैंने आंख खोल कर देखा तो मेरे भाई का हाथ मेरे नंगे पेट पर फिर रहा था, उसकी उंगलियां हल्के से दबा रही थीं और गर्माहट फैला रही थीं।
मैंने सोचा कि शायद सोते हुए मेरा टॉप ऊपर हो गया होगा। मैं वैसे ही लेटी रही और सोने का नाटक करती रही, मेरी सांसें रुक सी गई थीं। मैंने भाई को ये अहसास नहीं होने दिया कि मैं नींद से जाग चुकी हूं और मैं उसकी हरकत को महसूस कर रही हूं, हर स्पर्श से मेरी त्वचा पर झुरझुरी हो रही थी।
अपने भाई के हाथ को हटाये बिना ही मैं ऐसे ही लेटी रही। मुझे भी कुछ अच्छा लग रहा था, वो गर्माहट जो धीरे-धीरे नीचे की तरफ बढ़ रही थी। फिर धीरे-धीरे मेरा भाई मेरे टॉप को अपने हाथ से और ऊपर करने लगा, उसकी उंगलियां मेरी त्वचा को सहला रही थीं। मैंने नीचे से ब्रा भी नहीं पहनी हुई थी। मेरी आदत थी कि मैं रात को सोते वक्त ब्रा पहन कर नहीं सोती थी, इसलिए चूचियां आजाद थीं। टॉप ऊपर होते ही मेरी चूचियां नंगी हो गईं। अब मेरे अंदर भी सेक्स उठने लगा था, निप्पल कड़े हो गए थे। मेरे भाई का हाथ मेरे चूचों पर आकर उनको दबाने लगा था, वो हल्के से मसल रहा था और निप्पल को उंगलियों से रगड़ रहा था। मुझे अब हल्का हल्का मजा सा आने लगा था, सिसकारी दबानी पड़ रही थी।
वो मेरे चूचों को दबाते हुए मेरे निप्पल भी छेड़ रहा था, कभी चुटकी काटता तो दर्द के साथ मजा आता। अब मैं गर्म होने लगी थी, मेरी चूत में नमी बढ़ रही थी। अब मेरे भाई की हिम्मत बढ़ने लगी थी। कुछ देर तक मेरे निप्पलों को छेड़ने के बाद मेरे भाई ने मेरी लोअर में हाथ डाल दिया, उसकी उंगलियां मेरी जांघों को छू रही थीं। वो मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत को सहलाने लगा, हल्के से दबाकर रगड़ रहा था जो मुझे पागल कर रहा था।
अब मैं गर्म हो गई और मेरे मुंह से हल्की सी आह्ह निकल गई। भाई ने देखा कि मैं जाग चुकी हूं तो अपने हाथ को हटाने लगा लेकिन मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और अपनी चूत पर रखवा लिया, मेरी उंगलियां उसकी उंगलियों पर दबा रही थीं।
अब उसको कोई डर नहीं था। वो भी समझ गया कि मुझे भी उसकी हरकतों में मजा आ रहा है, उसकी आंखों में चमक आ गई थी। वो अपनी बहन की चूत को अब जोर से सहलाने लगा, पैंटी के ऊपर से क्लिट को रगड़ रहा था। उसके बाद मुझसे भी रहा नहीं गया। मैंने अपने भाई के लंड को अपने हाथ से टटोलते हुए उसके लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया, वो इतना गर्म और सख्त था कि हाथ में पकड़ते ही मेरी चूत और गीली हो गई।
उसका लंड पूरा खड़ा हुआ था। मैंने उसके लंड को पकड़ कर दबा कर देखा, नसें फड़क रही थीं। मैंने पहली बार किसी मर्द का लंड अपने हाथ में पकड़ा था। मुझे बहुत मजा आया, वो स्पर्श जैसे电流 दौड़ा रहा था। मेरा कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं था इसलिए मेरे अंदर लंड को लेकर काफी जिज्ञासा हो रही थी, मैं उसे सहलाती रही।
मैं अपने भाई का लंड अपने हाथ में लेकर उसकी लोअर के ऊपर से ही सहला रही थी, ऊपर-नीचे हिला रही थी। इसी बीच में मेरे भाई ने मेरी लोअर को निकाल कर उसको नीचे कर दिया। अब मैं नीचे से भी नंगी हो रही थी। मेरी चूत पर केवल मेरी पैंटी रह गई थी। मेरी चूत से पानी सा छूटना शुरू हो चुका था, पैंटी गीली हो गई थी। फिर मेरे भाई ने मेरी पैंटी को भी निकाल दिया। उसके बाद उसने मेरी पैंटी को खींच कर मेरी टांगों को भी पूरी नंगी कर दिया, हवा मेरी गीली चूत पर लग रही थी।
मैं अपने भाई के सामने पूरी की पूरी नंगी लेटी हुई थी और उसके लंड को अपने हाथ में पकड़ कर जोर से सहलाते हुए मजा ले रही थी, उसकी गर्माहट मेरे हाथों में फैल रही थी।
मेरी पैंटी को निकालने के बाद मेरे भाई ने मेरी चूत को अपने हाथ रगड़ना शुरू कर दिया, उंगलियां लेबिया पर फिसल रही थीं। मैंने अपने भाई की लोअर में हाथ डाल दिया। वो भी समझ गया कि मैं उसके लंड को बाहर निकाल कर हाथ में लेना चाह रही हूं। उसने अपनी लोअर को नीचे कर दिया और उसके अंडरवियर को भी सरका दिया, उसका लंड बाहर आकर लहराया।
मेरे भाई का लंड पूरा का पूरा तना हुआ था। मैंने उसके गर्म लंड को अपने हाथ में भर लिया, वो इतना मोटा था कि हाथ में पूरा नहीं आ रहा था। उसके बाद वो मेरी चूत को सहलाने लगा और मैं उसके लंड को पकड़ कर सहलाने लगी। अब मेरे मुंह से कामुक सिसकारियां भी निकलने लगी थीं, आह्ह, ह्ह्ह, इह्ह, जो कमरे में गूंज रही थीं।
मेरे भाई का लंड बहुत ही मोटा और लंबा था। उसने मेरे मुंह में अपना हथियार डाल दिया, वो गर्म और नमकीन स्वाद वाला था। मैं उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। मैंने लंड का स्वाद पहली बार लिया था। मुझे वो अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन कुछ देर के बाद मुझे फिर लंड को चूसने में भी मजा सा आने लगा, मैं जीभ से टोपे को चाटती, मुंह में गहराई तक लेती।
मैं धीरे-धीरे उसके लंड को मुंह में ले रही थी, जीभ से उसके टोपे को चाट रही थी, और हाथ से नीचे की स्किन को हिला रही थी, उसका स्वाद मेरे मुंह में घुल रहा था। भाई की सांसें तेज हो रही थीं, वो बोला, “दीदी, कितना अच्छा चूस रही हो, आह्ह, और तेज,” उसकी आवाज में उत्तेजना थी। मैंने स्पीड बढ़ाई, मुंह में पूरा लेने की कोशिश की लेकिन गले तक जाते ही गग्ग, गग्ग की आवाज आई, मुझे खांसी सी आई लेकिन मैं रुकी नहीं, गों गों करके चूसती रही, लार उसके लंड पर फैल रही थी। भाई के हाथ मेरे बालों में थे, वो हल्के से दबा रहा था, मुझे हेजिटेशन हो रहा था कि कहीं मम्मी-पापा सुन न लें लेकिन मजा इतना था कि रुक नहीं पा रही थी, मैंने उसके अंडकोष को भी सहलाया, जीभ से चाटा जो उसे और पागल कर रहा था।
मेरे भाई ने मेरी चूत में उंगली करना शुरू कर दिया। वो मेरी चूत में उंगली कर रहा था, एक उंगली अंदर-बाहर करके गहराई नाप रहा था। उसका लंड मेरे मुंह में था। उसका लंड मेरे गले तक जा रहा था, दम घुटने लगता लेकिन मजा दोगुना हो जाता। फिर मेरा दम घुटने लगा तो मैं उसको अपने ऊपर से हटाने लगी। उसके बाद वो सीधा हो गया। उसने मेरी चूत से उंगली निकाल ली, लेकिन उंगली गीली हो चुकी थी।
फिर वो मेरी चूत को चाटने लगा। बहन की चूत पर जब भाई की गर्म जीभ लगी तो मुझे बहुत मजा आया, वो जीभ की नोक से क्लिट को छेड़ रहा था। अब मैं समझने लगी थी कि मेरी सहेलियों ने अपने बॉयफ्रेंड क्यों बना रखे थे। वो भी अपनी चूत को उनकी जीभ से शांत करवाती होंगी, वो गर्माहट और चूसने का अहसास अवर्णनीय था।
उसने मेरी टांगें फैलाईं, जीभ से क्लिट को चाटा, ऊपर-नीचे फिराया, मैं तड़प उठी, आह इह्ह ओह्ह ओह, आह.. ह्ह्ह.. इह्ह, मेरी कमर ऊपर उठ रही थी, वो हाथों से मेरी जांघें दबाए रखा, जीभ अंदर डालकर चूसने लगा, मेरी चूत गीली हो चुकी थी, रस बह रहा था, वो चाटता रहा, मैं बोली, “भाई, रुक मत, आह्ह.. ऊऊ.. ऊउइ, और चाटो,” मेरी आवाज कांप रही थी। वो और जोर से चाटने लगा, उंगली भी डाल दी, इन-आउट करने लगा, मुझे लग रहा था जैसे स्वर्ग मिल गया, लेकिन डर भी था कि कहीं आवाज ज्यादा न हो जाए, मैंने उसके सिर को अपनी चूत पर दबाया, जीभ की गहराई महसूस की, उसकी सांसें मेरी जांघों पर लग रही थीं।
उसके बाद कुछ देर तक मेरे भाई ने मेरी चूत को चाटा और फिर उसने मेरी टांगों को फैला दिया। मैं उसकी हर एक हरकत को देख रही थी, उसकी आंखें मेरी चूत पर टिकी थीं।
उसने मेरी चूत पर लंड को रख दिया और फिर मेरी चूत पर लंड को रख कर उसको मेरी चूत पर रगड़ने लगा। पहली बार मैंने अपनी गर्म चूत पर किसी मर्द के लंड के स्पर्श को महसूस किया था, वो गर्मी और सख्ती मुझे जलाती हुई लग रही थी। चूत से लंड छुआ तो मेरे बदन में जैसे आग लग गई। मैं बिस्तर पर लेटी हुई तड़पने लगी, कमर हिलाने लगी।
मेरा भाई अपने लंड के शिश्न को मेरी चूत के मुंह पर रगड़ रहा था, ऊपर-नीचे फिसला रहा था जो मेरी क्लिट को उत्तेजित कर रहा था। मेरी चूत बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी। अब मेरा खुद ही मन कर रहा था कि वो अपने लंड को मेरी चूत के अंदर डाल दे। अब मेरे भाई से भी नहीं रहा जा रहा था। उसने मेरी चूत पर थूक दिया, जो गीला करके और चिकना बना रहा था। फिर उसने अपने लंड को मेरी चूत के ऊपर सेट कर दिया और धक्का देने लगा तो मेरी चीख निकल गई ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’, दर्द इतना तेज था कि लगा चीर जाएगी।
लेकिन साथ ही उसने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया, उसकी हथेली गर्म थी।
मेरी आंखों से आंसू निकल आये। उसके लंड ने मेरी चूत में बहुत दर्द कर दिया था, जैसे कोई गर्म रॉड अंदर घुस रहा हो। बगल वाले कमरे में ही माँ और पापा सो रहे थे। इसलिए मैं चीख भी नहीं सकती थी, सिर्फ आंसू बहा रही थी। फिर कुछ देर तक वो मेरे ऊपर ऐसे ही लेटा रहा, उसकी छाती मेरी चूचियों पर दब रही थी। उसके बाद उसने धीरे से मेरी चूत में लंड को हिलाया तो मुझे फिर से दर्द हुआ, लेकिन अब थोड़ी राहत भी मिल रही थी।
मैंने गर्दन उठा कर देखा तो मेरी चूत से खून निकल आये थे। अपनी चूत से निकले हुए खून को देख कर मैं डर गई, दिल तेज धड़कने लगा। फिर भाई ने बताया कि घबराओ नहीं तुम्हारी चूत की सील टूट गई है। फिर वो मेरे चूचों को दोबारा से पीने लगा, जीभ से निप्पल चाटता हुआ।
मैं आराम से नीचे लेट गई। दो या तीन मिनट तक वो मेरे चूचों को पीता रहा और उसके बाद उसने मेरी चूत में लंड को चलाना शुरू किया, धीरे-धीरे अंदर-बाहर।
अब मुझे थोड़ा अच्छा लगने लगा, दर्द कम होकर मजा में बदल रहा था। फिर वो अपनी गति को तेज करने लगा। उसका मोटा लंड मेरी चूत में फंस गया था लेकिन पहली बार चूत में लंड को लेकर मुझे बहुत मजा आ रहा था, वो भराव का अहसास अद्भुत था।
उसके बाद उसने मेरी चूत में तेजी के साथ धक्के लगाने शुरू कर दिये। अब मुझे काफी मजा आने लगा और मैं अपने भाई के लंड से अपनी चूत की चुदाई का मजा लेते हुए चुदने लगी, पच पच की आवाज आने लगी, मैं सिसकारियां ले रही थी, आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह।
कुछ देर के बाद मैंने अपनी चूत में अपने भाई के लंड को और अंदर लेने के लिए अपनी टांगों को उसकी कमर पर लपेट लिया। भाई का लंड मेरी चूत की गहराई में पूरा जाने लगा। अब मुझे बहुत ज्यादा मजा आने लगा। मेरी चूत में उसके लंड से ठोकर लग रही थी तो ऐसा लग रहा था कि मैं चूत में लंड को लेकर चुदती ही रहूं, हर धक्के से बदन कांप जाता।
आज मुझे पता चल रहा था कि मेरी सभी सहेलियां अपने यारों के साथ चुदाई करके इतनी खुश कैसे रहती हैं। लंड जब चूत में जाता है तो बहुत मजा देता है। इस बात का पता आज मुझे लग गया था। मेरा भाई मेरी चूत की चुदाई तीस मिनट तक करता रहा। उसके लंड ने मेरी चूत को फैला कर रख दिया, वो इतना मोटा था कि चूत की दीवारें खिंच रही थीं।
उसके बाद मुझे ऐसा लगा जैसे मैं मर ही जाऊंगी। मैंने अपने भाई को अपनी बांहों में कस कर पकड़ लिया और मेरा पूरा बदन अकड़ने लगा। मेरी चूत से एक दरिया सा छलक उठा और मैं धीरे-धीरे शांत होने लगी, वो रस बहकर चादर गीली कर रहा था।
उसके बाद भाई की स्पीड के कारण मेरी चूत से पच-पच आवाज होने लगी। उसकी गति पहले से भी और ज्यादा तेज होती जा रही थी। अब मेरी चूत में दर्द होने लगा था। मैंने उसको हटाने की कोशिश की लेकिन वो नहीं रुक रहा था, बोला “दीदी, बस थोड़ा और, आह्ह”।
फिर दो मिनट के बाद उसकी गति धीमी पड़ने लगी। मेरे भाई ने मेरी चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया। पूरा वीर्य मेरी चूत में गिराने के बाद वो भी शांत हो गया, उसका गर्म वीर्य अंदर महसूस हो रहा था।
उस रात को भाई ने दो बार मेरी चूत की चुदाई की। भाई का मोटा लंड चूत में लेकर चुदने के कारण सुबह मुझसे चला भी नहीं जा रहा था। मैं बड़ी मुश्किल से चल फिर पा रही थी। उस दिन के बाद से भाई ने मेरी चूत की चुदाई शुरू कर दी।
जब तक मेरी शादी नहीं हो गई मेरा भाई मेरी चूत को चोदता रहा।
अपने भाई से चूत की पहली चुदाई कराने के बाद मुझे भी लंड लेने का चस्का लग गया था। उसके बाद मैंने अपनी चूत में किस किस के लंड लिये और शादी से पहले मैं और किन लंडों से चुदी वो सब मैं आपको अपनी अगली कहानियों के माध्यम से बताऊंगी।
आपकी सीमा साहू
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