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गोद में मीनू भाभी

Car mein bhabhi chudai sex story, Pati ke saamne chudai sex story, Risky car fuck sex story: अगस्त का महीना था। अमित की पूरी सुबह मीनू भाभी और उनके पति का सामान उनकी गाड़ी में रखवाने में निकल गई थी। मीनू भाभी अमित के पड़ोस में ही रहती थी। वो और उनके पति आज अपना कुछ सामान थोड़ी दूर ही एक शहर में लेकर जा रहे थे क्योंकि उनके पति का तबादला हो गया था, तो उनके ज़रूरत की कुछ चीज़ें वहीं लेकर जा रहे थे। सामान कुछ ज़्यादा था इसलिये उन्होंने अमित को भी साथ चलने को कहा ताकि वहाँ जाकर सामान गाड़ी से उतारकर रखवाने में ज़्यादा दिक्कत ना हो। रविवार का दिन होने के कारण अमित के स्कूल की छुट्टी थी और वैसे भी अमित मीनू भाभी का कहा हुआ कभी नहीं टालता था। उनका बात करने का तरीका ही इतना लुभावना था की जब भी वो प्यार से कोई भी काम कहती, अमित मना ना कर पाता था।
मीनू भाभी पंजाबी परिवार से थीं और गज़ब की सुन्दर थीं। उनका गोरा रंग, नीली आँखें, गदराया बदन और गुलाबी होंठ किसी भी उम्र के लड़के को पागल कर दें, और फ़िर अमित तो एकदम जवान था। उस पर मीनू भाभी का जादू चलना लाज़मी था। वो अमित के पड़ोस में काफ़ी सालों से रह रही थीं, इसलिये इतने समय में अमित और मीनू भाभी काफ़ी घुलमिल गये थे। अमित तो पहले दिन से ही मीनू भाभी के हुस्न का दीवाना था।
उस दिन सुबह से ही अमित, मीनू भाभी और उनके पति गाड़ी में सामान रखते-रखते पसीने से लथपथ हो चुके थे। गाड़ी सामान से लगभग भर ही चुकी थी। ऐसा लग रहा था जैसे सारा सामान रखने के बाद किसी और के बैठने की जगह ही नहीं बचेगी। तभी मीनू भाभी के पति घर के अन्दर गये ताकि आखिरी बचाकुचा सामान ला सकें।
अमित और मीनू भाभी ने जैसे ही उन्हें घर से बाहर आते हुए सुना तो पलट कर देखा तो दोनों हैरान रह गये। वो अपना 42 इंच का टीवी उठाये आ रहे थे।
“आप इस टीवी को कहाँ रखेंगे?” अमित ने मीनू भाभी को बोलते सुना।
“मुझे नहीं पता, पर इसके बिना मेरा काम नहीं चलने वाला। इसे तो मैं लेकर ही जाऊँगा। थोड़ा बहुत सामान इधर-उधर खिसका कर जगह बन ही जायेगी।” भाभी के पति बोले।
अमित ने पिछली सीट पर देखा और कहा- “पीछे तो जगह नहीं है। मेरे खयाल से आगे वाली सीट पर ही रखना पड़ेगा।”
“अच्छा! तो फ़िर तुम्हारी भाभी कहाँ बैठेंगी?” भाभी के पति बोले। उनके चेहरे से लग रहा था जैसे वो गहन चिंतन में डूबे हुए हैं और कोई न कोई रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने टीवी आगे वाली सीट को लेटाकर इस तरह से रखा कि आधा टीवी आगे ड्राईवर के साथ वाली सीट पर और आधा ड्राईवर के ठीक पीछे वाली सीट पर आ गया। फ़िर अमित से पीछे वाली सीट पर बैठने को कहा। अमित के बैठते ही उन्होंने मीनू भाभी को भी अमित के साथ बैठने को कहा और गाड़ी का दरवाज़ा बन्द करने की कोशिश करने लगे, पर काफ़ी कोशिश करने के बाद भी दरवाज़ा बन्द नहीं हुआ। भाभी कहने को मोटी तो नहीं थी पर जगह ही इतनी कम थी कि किसी भी हालत में 2 लोग वहाँ नहीं बैठ सकते थे।
भाभी ने अपने पति को समझाने की कोशिश की- “एक काम करते हैं। आज टीवी यहीं छोड़ दीजिये। आप जब अगली बार जायेंगे तो ले जाना।”
“बिल्कुल भी नहीं। कल से क्रिकेट के मैच शुरू होने वाले हैं, मेरा काम नहीं चलने वाला टीवी के बिना।” वो बिल्कुल भी मानने को तैयार नहीं थे।
भाभी पहले ही गरमी से परेशान थीं, उनके चेहरे पर गुस्सा साफ़ दिखाई देने लगा था। उन्होंने झल्लाकर कहा- “देखिये, फ़टाफ़ट फ़ैसला कीजिये। इतनी कम जगह में दो लोग नहीं आ सकते। या तो आप अपना टीवी छोड़ दीजिये, या फ़िर अमित को मेरी गोद में बैठना पड़ेगा और मुझे नहीं लगता कि मैं अमित का वज़न झेल लूँगी।”
इतना सुनते ही उनके पति ने झट से कहा- “अरे हाँ! ये तो मैंने सोचा ही नहीं था। एक काम करो तुम अमित की गोद में बैठ जाओ। वैसे भी तुम हल्की सी ही तो हो, अमित को ज़्यादा दिक्कत नहीं होगी। वैसे भी रास्ता इतना लम्बा नहीं है। बस कुछ घण्टों की तो बात है।” मीनू भाभी के पति अमित को बच्चा ही समझते थे, इसलिये उन्हें इस बात से कोई दिक्कत नहीं थी कि उनकी बीवी अमित की गोद में बैठे।
“आपका दिमाग तो ठीक है? इतनी गरमी में वो परेशान हो जायेगा।” भाभी ने अपने पति को गुस्से से घूरते हुए कहा।
“कोई दिक्कत नहीं है भाभी। वैसे भी रास्ता इतना लम्बा नहीं है और ऊपर से दूसरा कोई तरीका नहीं है।” अमित ने कहा।
तभी भाभी के पति भी बोले- “सही बात है मीनू। मान जाओ ना।”
मीनू भाभी के पास यह बात मान लेने के सिवा कोई चारा नहीं था। उन्होंने कहा- “चलो ठीक है। अगर अमित को दिक्कत नहीं है तो ऐसा ही कर लेते हैं। लेकिन अगर रास्ते में अमित को दिक्कत हुई तो थोड़ी देर गाड़ी रोक लेंगे।” भाभी ने अमित की ओर देखा तो उसने ‘हाँ’ में सिर हिला दिया।
भाभी ने कहा- “तो ठीक है। चलो सब नहा लेते हैं, गरमी बहुत है। फ़िर चलेंगे।”
अमित अपने घर गया और फ़टाफ़ट नहा-धोकर वापिस आ गया। रास्ता 3-4 घण्टे का था और काफ़ी गरमी होने वाली थी इसलिये अमित ने थोड़े आरामदायक कपड़े पहनने का फ़ैसला किया और अपनी टी-शर्ट और निकर ही पहन ली। भाभी और उनके पति भी थोड़ी देर में तैयार होकर आ गये। भाभी ने भी गरमी को ध्यान में रखते हुए एक पतला सा कुर्ता और सलवार ही पहने थे। भाभी के पति ड्राईवर सीट पर बैठ गये और अमित पीछे की सीट पर बैठ गया। भाभी भी पीछे वाली सीट पर अमित की गोद में बैठ गई और गाड़ी का दरवाज़ा बन्द कर दिया।
“तुम ठीक से बैठे हो ना?” भाभी ने अमित से पूछा।
“जी भाभी। आप चिन्ता मत करो। मुझे कोई दिक्कत नहीं है। आप तो एकदम हल्की सी हैं!” अमित ने जवाब दिया तो भाभी मुस्कुराये बिना न रह सकी। तभी उन्होने अपने पति को चलने को कहा। अनके पति को सिर्फ़ उनका सिर ही दिखाई दे रहा था क्योंकि सारी जगह उनके टीवी ने घेर रखी थी।
“तुम ठीक से बैठी हो ना?” उनके पति ने पूछा।
भाभी अपनी जगह पर थोड़ा हिली और बोली- “हाँ! एकदम ठीक हूँ।”
गाड़ी चल पड़ी और चलते ही भाभी के पति ने गाने चला दिये। सफ़र लम्बा था। करीब 1 घण्टा बीत गया था और गाड़ी अपनी पूरी रफ़्तार से चली जा रही थी। भाभी आराम से बैठी गाने सुन रही थी कि तभी उन्हें अपने नीचे कुछ चुभता हुआ महसूस हुआ। उन्होंने खुद को थोड़ा हिलाकर ठीक करने की कोशिश की पर अभी भी उन्हें कुछ चुभ रहा था। वो थोड़ा ऊपर उठी और फ़िर ठीक से बैठ गई, पर अभी भी भाभी को अपने नीचे कुछ महसूस हो रहा था। अमित साँस रोके चुपचाप बैठा था कि अब तो भाभी को पता लग ही जायेगा कि क्या हो रहा है।
“मैं जब बैठी थी तब तो यहाँ ऐसा कुछ नहीं था तो अब कहाँ से…” भाभी खुद से बातें कर रही थी और तभी अचानक से उन्हें अंदाज़ा हुआ कि वह चुभने वाली चीज़ क्या है। भाभी के गोद में बैठने के कारण अमित के लंड में तनाव आ रहा था और वही भाभी की गांड पे चुभ रहा था।
“हे भगवान! अमित का लंड मेरे बैठने के कारण खड़ा हो गया है।” भाभी ने मन ही मन सोचा, “मुझे उम्मीद नहीं थी के आज भी मेरी वजह से किसी जवान लड़के का लंड खड़ा हो सकता है। कितना बड़ा होगा अमित का लंड? क्या सोच रहा होगा वह मेरे बारे में मन ही मन? क्या उसे भी मेरे चूतड़ों के बीच की खाई महसूस हो रही है?” भाभी का मन ऐसे रोमांचक सवालों से प्रफ़ुल्लित हो उठा था। भाभी ने नीचे कि ओर देखा तो उनका कुर्ता भी खिसक कर ऊपर उठ गया था और उनकी नाभि साफ़ दिखाई दे रही थी। एक बार तो भाभी ने सोचा कि कुर्ता नीचे कर लिया जाये, पर फ़िर भाभी ने अमित को थोड़ा तंग करने के इरादे से उसे वैसा ही रहने दिया। भाभी को यह विचार बड़ा रोमांचित कर रहा था कि उनकी वजह से अमित उत्तेजित हो रहा है। अमित के हाथ उनके दोनों तरफ़ सीट पर टिके हुए थे। चलते-चलते एक घण्टे से ज़्यादा हो चुका था, पर अभी भी कम से कम 2 घण्टे का सफ़र बाकी था। भाभी जानती थी कि उनके पति को उनके सिर के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था कि नीचे क्या हो रहा है। उनके टीवी के आड़ में सबकुछ छुपा हुआ था। तभी भाभी ने महसूस किया कि अमित थोड़ा उठकर अपने आप को व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहा था। जैसे ही दोबारा बैठा तो उसका लंड ठीक भाभी के चूतड़ों के बीच में आ गया। भाभी का मन इस एहसास से और भी रोमांचित हो उठा और वो मन ही मन कामना करने लगी कि अमित कुछ ना कुछ और करे।
“तुम ठीक से बैठे हो ना अमित?” भाभी ने पूछा।
“हाँ भाभी! मैं तो एकदम ठीक हूँ। आपको तो कोई दिक्कत नहीं हो रही ना?” अमित ने इस उम्मीद में पूछा कि अगर भाभी को उसके लंड की वजह से कोई दिक्कत होगी तो वो इशारों में कुछ कहेंगी।
लेकिन भाभी ने कहा- “बिलकुल नहीं! बल्कि मुझे तो अच्छा ही महसूस हो रहा है ऐसे बैठकर। तुम्हारे दोनों हाथ एक ही जगह रखे-रखे थक तो नहीं गये ना?”
अमित को भरोसा नहीं हो रहा था कि भाभी ने सच में वो सब कहा है। उसने जवाब दिया- “हाँ भाभी, थोड़ा सा..”
“एक काम करो। तुम अपने दोनों हाथ यहाँ रख लो।” कहकर भाभी ने अमित के दोनों हाथ अपनी दोनों जांघों पर रख लिये। “अब ठीक है?”
“हाँ, अब तो पहले से बहुत बेहतर है।” अमित ने खुश होकर कहा। भाभी ने नीचे की ओर देखा तो पाया अमित ने अपनी दोनों हथेलियाँ उनकी दोनों जांघों पर रख ली थी और उसके दोनों अँगूठे भाभी की चूत के बहुत पास थे। भाभी मन में सोचने लगी के अगर अमित थोड़ा सा भी अपने अँगूठों को अन्दर की ओर बढ़ाये तो उनकी चूत को सलवार के ऊपर से छू सकता है, पर भाभी जानती थी कि अमित इतनी आसानी से इतनी हिम्मत नहीं करने वाला। अमित की छुअन से भाभी की चूत से रस निकलने लगा था और उनकी पैंटी भीगने लगी थी। उन्हें लग रहा था की थोड़ी ही देर में यह गीलापन उनकी सलवार तक पहुँच जायेगा और तब अगर अमित ने उसे छू लिया तो वह समझ जायेगा भाभी के मन में क्या चल रहा है और वो कितनी गरम हो चुकी हैं।
मीनू भाभी ने खुद ही हिम्मत करके बात आगे बढ़ाने की सोची और अपने दोनों हाथ अमित के हाथों पर रख लिये। देखने में भाभी की यह हरकत बड़ी ही स्वाभाविक सी लग रही थी। फ़िर उन्होंने अमित के हाथों को ऊपर से धीरे-धीरे मसलना शुरू किया। भाभी ने एक बार सिर उठाकर अपने पति की ओर देखा। अपने पति के इतनी पास होते हुए अमित के साथ ऐसी हरकतें करना उन्हें बड़ा ही रोमांचित कर रहा था। भाभी ने अमित के हाथों को मसलते-मसलते उन्हें धीरे-धीरे ऊपर की ओर खिसकाने की कोशिश की ताकि अमित के हाथों को अपने चूत के ठीक ऊपर ला सके। अमित भी अब तक समझ चुका था कि भाभी क्या चाह रही हैं, वह खुद भी वासना से भर कर पागल हुआ जा रहा था। भाभी ने नीचे की ओर देखा तो अमित अपने दोनों हाथ भाभी की टाँगों के ठीक बीच में ले आया था और अपने दोनों अँगूठों से भाभी की चूत को उनकी सलवार के ऊपर से हल्के-हल्के सहलाने लगा था। भाभी ने अमित का एक हाथ पकड़कर अपनी चूत के बिल्कुल ऊपर रख लिया और अपनी टाँगों को थोड़ा और चौड़ा कर लिया जिस से अमित अच्छे से भाभी की चूत को उनकी गीली हो चुकी सलवार और पैंटी के ऊपर से सहला पा रहा था। भाभी ने अमित का हाथ पकड़कर ज़ोर से अपनी चूत पर दबा दिया तो अमित ने भी भाभी की चूत को थोड़ा और ज़ोर से रगड़ना शुरू कर दिया। अब भाभी भी वासना की आग में बुरी तरह जल रही थी। उन्होंने अपने हाथ अमित के हाथों के ऊपर से हटा लिये थे, पर अमित ने अपने हाथ वहीं रखे और भाभी की चूत को रगड़ना बन्द कर दिया। भाभी बेसब्री से इंतज़ार करने लगी कि अमित कुछ करे, पर शायद अमित आगे बढ़ने में अभी भी डर रहा था। लेकिन भाभी जानती थी कि उसका डर कैसे दूर करना है।
मीनू भाभी ने अमित का एक हाथ पकड़ा और उसे उठाकर अपने पेट पर अपनी सलवार के नाड़े के ठीक ऊपर रख दिया और उसके हाथ को दबा दिया और दूसरे हाथ से अपना नाड़ा खोलने लगी। नाड़ा खोलते ही भाभी ने अमित का हाथ अपनी सलवार के अंदर की ओर कर दिया जिससे अमित का हाथ भाभी की बुरी तरह भीग चुकी पैंटी पर आ गया। अमित ने भाभी की चूत को गीली पैंटी के ऊपर से रगड़ना शुरू किया। वह अब भाभी की चूत की फ़ाँकों को अच्छे से महसूस कर सकता था। भाभी ने थोड़ी देर तक तो उसी तरह अमित के हाथ का मज़ा लिया, फ़िर उसे पकड़कर अपनी पैंटी की इलास्टिक की तरफ़ ले जाकर उसके अन्दर की ओर धकेल दिया। भाभी की पैंटी अमित और भाभी दोनों के हाथों के लिये बहुत छोटी थी, इसलिये भाभी ने अपना हाथ बाहर ही रखा और सिर्फ़ अमित के हाथ को ही आगे बढ़ने दिया। अमित ने भाभी की चूत के होंठों को पहली बार छुआ तो उसके पूरे शरीर में गर्मी सी आती हुई महसूस हुई। अमित ने भाभी की चूत की दोनों फ़ाँकों के ठीक बीच में अपनी उँगलियों से सहलाना शुरू किया तो भाभी के मुह से ज़ोर की सिसकारी निकल गई। पर गाड़ी के शोर में और गानों की आवाज़ में भाभी की आवाज़ दब कर रह गई। भाभी की चूत एकदम गरम होकर तप रही थी और पूरी तरह से भीगकर चिकनी हो चुकी थी।
तभी भाभी ने अपने चूतड़ ऊपर की ओर उठाये और अपनी पैंटी की इलास्टिक के दोनों ओर अपने दोनों हाथों के अँगूठे फ़साकर उसे नीचे की ओर खिसका दिया जिससे उनकी पैंटी और साथ ही उनकी सलवार उनके घुटनों तक नीचे खिसक गई। भाभी के ऐसा करते ही अमित ने एक बार भाभी के चूतड़ सहलाये और फ़िर अपने दूसरे हाथ की उँगली भाभी की चूत में घुसा दी और उसे धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा, पर पैंटी के कारण भाभी की टाँगें ज़्यादा खुल नहीं पा रही थी। इसलिये भाभी अपनी पैंटी पूरी तरह उतारने के लिये थोड़ा नीचे झुकने ही लगी थी कि अमित ने अपने दूसरे हाथ से उनकी पैंटी को पकड़कर नीचे की ओर खींच दिया जिससे वो भाभी के टखनों तक आ गई। तभी भाभी ने अपने पाँव ऊपर उठाये ताकि अमित उन्हें पूरी तरह निकाल दे। अमित ने भाभी की पैंटी के साथ-साथ उनकी सलवार भी खींचकर नीचे उतार दी। अब भाभी ने आराम से अपनी टाँगें पूरी खोल ली थीं, जितना वो खोल सकतीं थीं। अमित को तो जैसे इसी मौके का इंतज़ार था, उसने तुरन्त अपनी दो उँगलियाँ भाभी की चूत में घुसा दीं। भाभी के मुँह से हल्की सी “आह” निकल गई।
“तुम ठीक तो हो ना?” अचानक भाभी के पति ने पूछा। वो भाभी के चेहरे को ही देख रहे थे। भाभी मुस्कुराई और बोली- “मैं तो एकदम ठीक हूँ। मुझे लगा था अमित की गोद में बैठने से दिक्कत होगी, पर ऐसा कुछ भी नहीं है। मुझे लगता है यह सफ़र काफ़ी अच्छा जाने वाला है।” भाभी अपने पति से बड़े आराम से बात कर रही थी और अमित की उँगलियाँ भाभी की चूत को चोद रही थी। “और कितनी देर चलने के बाद विराम लेना है?” भाभी के पति ने पूछा।
“मैं अभी रुकना नहीं चाहती, थोड़ा और आगे बढ़ना चाहती हूँ।” भाभी ने जवाब दिया। “तुम्हारा क्या विचार है अमित?” उन्होंने अमित से पूछा।
“हाँ भाभी, मेरा भी अभी और आगे चलते रहने का मन है।” अमित ने कहा।
“अच्छा है। जितना आगे तक चलें, उतना की बेहतर है।” भाभी मुस्कुराते हुए बोली। “ठीक है ना?” भाभी ने अपने पति से पूछा।
“हाँ मुझे भी लगता है बिना रुके जितना आगे पहुँच जायें, उतना ही बेहतर है।” उन्होंने जवाब दिया।
भाभी पीछे की ओर मुड़ी और अमित की ओर देखते हुए बोली- “मुझे भी! मैं नहीं चाहती की तुम्हें रुकना पड़े।” भाभी ने धीमी आवाज़ में कहा।
“अमित?” भाभी के पति बोले, “तुम्हें कोई दिक्कत तो नहीं ना तुम्हारी भाभी के गोद में बैठने से?”
“बिल्कुल नहीं! भाभी थोड़ी-थोड़ी देर में उठकर अपना स्थान बदल लेती हैं जिस से एक ही जगह ज़्यादा देर भार नहीं रहता और मुझे भी आसानी रहती है।” अमित भाभी के पति से बात कर रहा था और भाभी की चूत में अपनी उँगलियाँ और भी गहराई में उतारे जा रहा था।
अमित ने फ़िर से अपनी उँगलियाँ भाभी की चूत मे तेज़ी से अँदर-बाहर करनी शुरू कर दी थी। भाभी को अपनी सिसकियाँ रोके रखने के लिये अपने होंठों को कसकर दबाये रखना पड़ रहा था। भाभी ने कसकर अमित की कलाई पकड़ ली थी। ऐसा करके भाभी अमित को यह एहसास दिलाना चाह रही थी कि उन्हें कितना आनन्द आ रहा है और वे चाहती हैं कि अमित अपनी उँगलियाँ और अँदर तक घुसाता रहे। अमित भाभी का इशारा समझ कर अपनी उँगलियों को भाभी की चूत में जितनी अँदर तक घुसा सकता था, घुसाने लगा। भाभी ने अमित की उँगलियों के साथ-साथ धीरे-धीरे अपने चूतड़ भी हिलाने शुरू कर दिये। भाभी ने अपने पति की ओर देखा, खुशकिस्मती से उनके टीवी की वजह से वो कुछ नहीं देख पा रहे थे। अगर उन्हें पता होता कि अमित की उँगलियाँ उनकी बीवी की चूत में घुसी हुई हैं तो जाने क्या होता। भाभी का पूरा बदन अमित की उँगलियों की गति के हिसाब से सिहर रहा था।
तभी अमित ने अचानक से अपनी उँगलियाँ भाभी की चूत से बाहर निकाल ली। भाभी को थोड़ी निराशा हुई, पर उन्हें ज़्यादा देर इंतज़ार नहीं करना पड़ा। अमित ने तुरन्त भाभी के कुर्ते के बटन खोलने शुरू कर दिये। भाभी ने गर्मी के कारण ब्रा नहीं पहनी थी। जैसे-जैसे अमित भाभी के कुर्ते के ऊपर से नीचे तक के बटन खोल रहा था, भाभी को गाड़ी के ए.सी. की ठंडी हवा के झोंके अपनी चूचियों पर लगते महसूस हुए जिससे उनके निप्पल सख्त होने लगे। अमित ने भाभी के कुर्ते का आखिरी बटन खोलकर कुर्ता सामने से पूरा खोल दिया। अब भाभी आगे से भी बिल्कुल निर्वस्त्र हो गई थीं। अमित ने भाभी के नंगे बदन पर अपने हाथ ऊपर से नीचे तक फ़िराने शुरू कर दिये। वो भाभी की चूचियों को मसल-मसल कर उनसे खेलने लगा। भाभी ने अपनी चूचियाँ आगे की तरफ़ धकेल दी ताकि अमित अच्छे से उन्हें दबा सके।
भाभी ने अपने चूतड़ उठाये और अपना कुर्ता नीचे से निकाल कर हटा दिया। अमित भाभी का इशारा समझ गया। वह अपने हाथ नीचे ले जाकर अपनी निकर के हुक खोलने लगा। भाभी को एक बार फ़िर थोड़ा ऊपर उठना पड़ा ताकि अमित ठीक से अपनी निकर का हुक और चेन खोल सके। अमित का लंड अभी भी भाभी के चूतड़ों के ठीक बीच में सटा हुआ था। भाभी ने अपने चूतड़ थोड़े और ऊपर उठा लिये।
“सब ठीक है ना मीनू?” उनके पति ने पूछा, “क्या तुम्हें अमित की गोद में बैठने में दिक्कत हो रही है? क्या मैं गाड़ी रोक दूँ ताकि तुम दोनों को थोड़ी देर आराम मिल सके?”
“अरे नहीं! सब ठीक है। वो तो मैं थोड़ी जगह बदल रही थी ताकि अमित को दिक्कत ना हो। अगर मैं ठीक जगह पर बैठ जाऊँ तो हम दोनों के लिये बड़ा आराम हो जायेगा।” भाभी के यह कहते ही अमित ने अपने निकर और अंडरवियर खींच कर नीचे उतार दिये। भाभी को अमित का लंड अपने नंगे चूतड़ों के बीचोंबीच फंसता हुआ महसूस हुआ।
“अमित क्या मैं अपनी जगह थोड़ी बदलूँ ताकि तुम्हें आराम मिल सके?” मीनू भाभी ने अमित से पूछा।
अमित ने अपने दोनों हाथ भाभी के चूतड़ों के दोनों ओर रखे और कहा- “भाभी अगर आप थोड़ा ऊपर उठें तो मैं खुद को सही जगह पर ले आऊँ। फ़िर हम दोनों के लिये सब ठीक हो जायेगा।” भाभी समझ गई कि अमित ऐसा क्यों कह रहा है। वो जितना ऊपर उठ सकती थीं उतना उठ गई। अमित का एक हाथ उनके चूतड़ से हट गया। वो समझ गई अमित उस हाथ से क्या करने वाला है। अमित ने अपना लंड पकड़कर भाभी की चूत के मुँह पर सेट किया और दूसरे हाथ से भाभी के चूतड़ को नीचे की ओर धकेल कर उन्हें नीचे आने का इशारा किया। भाभी ने धीरे-धीरे अपने चूतड़ नीचे की ओर करने शुरू कर दिये। भाभी को अमित के लंड का ऊपरी हिस्सा अपनी चूत के प्रवेशद्वार पर लगता हुआ महसूस हुआ। भाभी और नीचे होने लगी तो अमित का लंड बड़ी आराम से उनकी चूत मे फ़िसलते हुए घुसने लगा। जैसे-जैसे भाभी अपने चूतड़ नीचे ला रही थी, वैसे-वैसे अमित का लंड भाभी की चूत को चौड़ा करता हुआ और अंदर घुसे जा रहा था। भाभी की गरम और चिकनी हो चुकी चूत में लंड घुसाने से होने वाले एहसास से अमित के आनन्द की सीमा ना रही। तभी भाभी खुद को रोक नहीं पाई और उनके मुँह से ज़ोर की सिसकी निकल गई- “आआह्ह्ह!!”
उनके पति ने तुरन्त उनकी ओर देखा और कहा- “मुझे लगता है हमें थोड़ी देर आराम करने के लिये रुक जाना चाहिये।”
भाभी खुद को तब तक और नीचे करती रही जब तक कि अमित का लंड पूरी जड़ तक उनकी चूत की गहराइयों में नहीं उतर गया और फ़िर अपने पति से बोली- “नहीं, नहीं, रुको मत। मैं चाहती हूँ अभी तुम चलते रहो। फ़िलहाल अगले एक घण्टे तक भी मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मैं सही कह रही हूँ ना अमित?”
“हाँ भाभी! अब जब आप दोबारा बैठने लगीं तो मैंने खुद को सही जगह पर सेट कर लिया ताकि हमें कोई दिक्कत ना हो। बस मुझे एक बार थोड़ा ऊपर और उठना है अगर आपको कोई दिक्कत ना हो तो। ठीक है ना भाभी?”
“क्या मैं भी तुम्हारे साथ-साथ ऊपर उठूँ, अमित?”
“नहीं, आप बस मेरी गोद में बैठी रहिये और मैं आपको अपने साथ-साथ खुद ऊपर उठा लूँगा।” इतना कहकर अमित ने खुद को थोड़ा ऊपर उठाया और अपना लंड भाभी की चूत में और भी गहराई में घुसा दिया। भाभी को एक बार तो लगा जैसे वो उसी पल स्खलित हो जायेंगीं।
“चलो मैं भी खुद को थोड़ा ठीक कर लेती हूँ।” कहकर भाभी ने अपनी गाँड आगे पीछे हिलाई जिस से अमित का लंड भाभी की चूत में और अच्छी तरह अँदर-बाहर हो गया। अमित के लंड की सवारी करते-करते भाभी ने अपने पति की ओर देखा। अमित अभी भी अपना लंड पूरा ज़ोर लगाकर भाभी की चूत में घुसा रहा था और पूरी गति के साथ अपनी मीनू भाभी को चोद रहा था। भाभी मन हि मन सोचने लगी- “मेरे बेवकूफ़ पति को क्या पता कि उसकी बीवी कैसे लगभग नंगी होकर, उसके इतनी पास होकर भी एक जवान लड़के से चुदाई का आनन्द ले रही है।” अपने पति के इतनी पास होते हुए अमित से चुदना मीनू भाभी को बहुत ज़्यादा रोमांचित कर रहा था।
तभी अमित ने एक ज़ोरदार धक्का लगाकर भाभी को उनके विचारों की कैद से बाहर निकाला। अमित ने धीरे से भाभी से पूछा- “आपका कितनी देर में हो जायेगा भाभी?”
“बहुत जल्द अमित, बहुत जल्द!!” भाभी ने उत्तर दिया। तभी भाभी को महसूस हुआ कि उनका स्खलन होने ही वाला है। उन्होंने अमित के दोनों हाथ अपने चूतड़ों से हटाकर अपनी चूचियों पर रख लिये और ज़ोर से दबा दिया। अमित ज़ोर से भाभी की चूचियाँ मसलने लगा और तेज़ी से अपना लंड भाभी की चूत में अंदर-बाहर करने लगा। तभी उसे महसूस हुआ भाभी का पूरा बदन अकड़ने लगा और उनकी चूत की अंदरूनी दीवारें उसके लंड को ऐसे दबाने लगीं जैसे वो उसे निचोड़ लेना चाहती हों। काफ़ी क्षणों तक ऐसे ही चलता रहा। अमित समझ गया कि भाभी स्खलित हो गई हैं। वो शायद भाभी का आज तक का सबसे लम्बे समय तक चलने वाला और सबसे आनन्ददायक स्खलन था।
थककर भाभी अमित के सहारे टेक लगाकर पीछे की ओर लेट गई। अमित अभी भी स्खलित नहीं हुआ था। वह लगातार अपने लंड को अंदर-बाहर करते हुए भाभी की चूत चोदे जा रहा था। तभी अमित ने अपनी गति बढ़ा दी और तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करते-करते एक ज़ोर का धक्का लगाकर अपना लंड भाभी की चूत की गहराई में पूरा अंदर तक घुसा दिया और अपने वीर्य का फ़व्वारा भाभी की चूत में छोड़ दिया। अमित का गर्मागरम वीर्य भाभी को अपनी चूत को पूरा भरता हुआ महसूस हुआ। भाभी तब तक ऐसे ही पड़ी रही जब तक कि अमित ने अपने लंड से वीर्य की आखिरी बूँद उनकी चूत में नहीं खाली कर दी। अमित और मीनू भाभी दोनों ही अब तक थक चुके थे।
“एक बोर्ड लगा हुआ है, जिसपर लिखा हुआ है लगभग दस किलोमीटर दूर एक रेस्टोरेंट है। क्या तुम दोनों को भूख लग गई है?” भाभी के पति ने पूछा।
“हाँ, मेरे खयाल से हमें कुछ खा लेना चाहिये।” अमित ने कहा। भाभी ने पीछे मुड़कर अमित की ओर देखा तो वह मुस्कुरा दिया। “आप क्या कहती हो भाभी?” अमित ने पूछा।
“वैसे तो मैं एकदम फ़ुल हूँ, पर मेरे खयाल से कुछ हल्का-फ़ुल्का खाया जा सकता है।” भाभी ने शरारती अंदाज़ में अमित की ओर आँख मारते हुए कहा। भाभी झुकी और अपनी पैंटी उठाने लगी जो काफ़ी देर से नीचे पड़ी थी। उसी समय अमित का लंड उनकी चूत से फ़िसल कर बाहर निकल गया। भाभी ने अपने पाँव अपनी पैंटी में डाले और उसे ऊपर की ओर खींच लिया। जैसे ही उनकी पैंटी उनकी चूत को ढकने वाली थी, तभी अमित ने एक बार फ़िर अपनी उँगली उनकी चूत में घुसा दी। भाभी ने प्यार भरे अंदाज़ में अमित के हाथ पर थपकी दी और अमित ने अपनी उँगली बाहर निकाल ली। फ़िर भाभी ने अपनी सलवार पहन कर नाड़ा बन्द किया और फ़िर अपने कुर्ते के बटन बन्द करने लगीं। अमित ने भी अपनी निकर और अण्डरवियर फ़िर से पहन लिये और अपना लंड अंदर करके चेन बन्द कर ली।
“खाना खाने के बाद कितना रास्ता और बचा है?” भाभी ने अपने पति से पूछा।
“बस आधा घण्टा और, मेरे खयाल से तब तक तो तुम दोनों काम चला ही लोगे?” उनके पति ने कहा।
“मुझे कोई दिक्कत नहीं है।” भाभी ने अपने पति से कहा, “अगर अमित को मेरे गोद में बैठने से दिक्कत ना हो तो मैं तो चार घण्टे और इस तरह से बैठ सकती हूँ।”
“तुम्हारा क्या कहना है अमित? तुम्हें तो अपनी भाभी को गोद में आधा घण्टा और बैठाये रखने में कोई दिक्कत नहीं होगी ना? मुझे लगा था तुम दोनों मे से कोई एक तो अब तक परेशान हो ही गया होगा।”
“अरे नहीं! मुझे भी कोई परेशानी नहीं है। अगर भाभी चार घण्टे और मेरी गोद में बैठी रहें तो भी मुझे कोई दिक्कत नहीं है।” यह कहकर उसने भाभी की ओर देखा, वह पहले से ही अमित की ओर देखकर मुस्कुरा रही थीं।

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