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दोस्त की माँ को पटाकर चोदा

Dost ki maa sex story, Aunty chudai sex story, Dost ki ammi sex story: कैसे हो दोस्तो? मैं आशीष हूं, मस्त चूत वाली लड़कियों, भाभियों और सेक्सी आंटियों को मेरे लंड का सलाम।

मेरी उम्र 25 साल है और मैं दिखने में स्मार्ट सा लड़का हूं, मैं इंदौर शहर का रहने वाला हूं।

मेरी यह कहानी मेरे और मेरे दोस्त की अम्मी के बीच बने शारीरिक संबंध की कहानी है, जिसमें हर पल की गर्माहट और उत्तेजना को मैंने महसूस किया था।

यह बात आज से करीब आठ महीने पहले की है, हमारी कॉलोनी में खेल का एक मैदान बना हुआ है, वहां पर मैं कई बार क्रिकेट खेलने के लिए चला जाया करता था, मेरी ही तरह वहां पर मेरी ही कॉलोनी और आस-पास के बच्चे भी क्रिकेट खेलने के लिए आ जाया करते थे, ऐसे ही खेल खेल में मेरी दोस्ती इमरान नाम के एक लड़के के साथ हो गई, हम दोनों की हंसी-मजाक और खेल की वजह से दोस्ती गहरी होती गई।

मैंने यहां पर उस लड़के का असली नाम नहीं लिखा है, मैंने उसका नाम बदल दिया है क्योंकि कहानी उसकी मॉम के बारे में है इसलिए मैं नहीं चाहता कि उसकी मॉम की पहचान किसी को पता चले, उनकी इज्जत मेरे लिए बहुत मायने रखती है।

उससे दोस्ती होने के बाद हम दोनों कई बार साथ में ही बाहर घूमने के लिए भी चले जाते थे, इसी तरह एक दिन उसने मुझे अपने घर पर बुला लिया, जब मैं उसके घर गया तो उसकी मां को देख कर मैं हैरान रह गया, उसकी मां की उम्र लगभग 42 साल के करीब रही होगी, मगर चेहरे पर ऐसी चमक थी कि मैं हैरान था, उनकी त्वचा इतनी नरम और चिकनी लग रही थी कि छूने का मन कर रहा था।

वो देखने में एक 30 या 35 साल की भाभी के जैसी दिख रही थी, उसकी मां का नाम तबस्सुम था, यहां पर मैंने उसकी मां का नाम भी बदल दिया है, उसका फीगर करीब 36-32-39 का था, मुझे उसके फीगर का नाप बाद में पता चला था जब मैंने उसके साथ सेक्स किया था, मगर मैं आपकी जानकारी के लिए उसके फीगर का नाप अभी बता दे रहा हूं ताकि आपको पता लग सके कि वो दिखने में कैसी रही होगी, उनकी चूचियां भारी और गोल थीं, कमर पतली और गांड मटकती हुई जो देखने वाले को मदहोश कर दे।

तो जब मैं उसके घर पर गया तो मेरी नजर उसकी मां से नहीं हट रही थी, मैं इस तरह से उसकी मां के बारे में नहीं सोचना चाहता था क्योंकि इमरान मेरा दोस्त था लेकिन फिर भी उसकी मां के बदन में बहुत ही गजब का आकर्षण था जो बार-बार मुझे उसके बारे में सेक्स के लिए सोचने पर मजबूर कर रहा था, उनकी खुशबू, वो हल्की सी परफ्यूम की महक जो कमरे में फैली हुई थी, वो सब कुछ मुझे अपनी ओर खींच रहा था।

वैसे तो उसकी मां ने भी मुझे देख लिया था कि मैं उसी पर नज़र रखे हुए हूं लेकिन वो कुछ नहीं बोल रही थी, वो भी कई बार मेरी तरफ देख लेती थी क्योंकि हम दोनों आमने-सामने ही बैठे हुए थे, उनकी आंखों में एक हल्की सी चमक थी जो मुझे लग रहा था कि वो भी मेरी नजरों को महसूस कर रही हैं।

फिर उसकी मां के साथ मेरी भी कुछ बात हुई, बातों ही बातों में पता चला कि उसके पापा बैंक में काम करते हैं, वो दिन में घर पर नहीं रहते हैं, फिर कुछ देर के बाद उसकी मॉम से बात करने के बाद इमरान और मैं ऊपर छत पर खेलने के लिए चले गये, लेकिन खेल में मेरा मन नहीं लग रहा था, मैं उसकी मां के बारे में ही सोच रहा था, उसकी मां के गोरे बदन के बारे में सोच कर मेरे लंड में हलचल सी होने लगी थी, वो गोरी त्वचा की चमक, वो मुलायम लगने वाला स्पर्श जो मैंने अभी सिर्फ कल्पना में महसूस किया था।

उस दिन घर जाने के बाद मैंने उसकी मां के बारे में सोच कर मुठ मारी तब जाकर मेरे लंड को शांति मिली, वो गर्म माल निकलते वक्त की उत्तेजना जो उनकी याद से और बढ़ गई थी।

अब तो रोज मेरा मन इमरान के घर जाने के लिए करने लगा था, मैं उसके घर पर जाने के लिए इमरान को उकसाता रहता था ताकि उसकी मां को देख सकूं, मैं उसकी मां को पटाने के चक्कर में था, उसके ख्याल मेरे मन से निकल ही नहीं रहे थे, रातों में सपनों में भी वही आतीं।

जब भी मैं इमरान के घर जाता था तो मेरी नजर उसकी मां के बदन को ऊपर से नीचे तक पूरा नाप लेती थी, कभी उसकी चूचियों को घूरने लगता था तो कभी उसकी गांड को, मैं सोच रहा था कि जब ये बाहर से देखने में इतनी मस्त माल लग रही है तो अंदर से तो ये बिल्कुल कयामत ही लगती होगी, मैं उसकी मां के नंगे बदन को देखने के लिए तरस जाता था लेकिन अभी मुझे ऐसी कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही थी कि मैं उसकी मां को नंगी देख सकूं, उनकी हर मूवमेंट में वो मटकती गांड की थिरकन मुझे पागल कर देती थी।

उसकी माँ भी मेरी तरफ देखती तो थी लेकिन उसकी तरफ से मुझे अभी कुछ इस तरह का कोई भी संकेत नहीं मिल पा रहा था जिससे कि मुझे पता लग सके कि वो भी मेरे साथ कुछ करना चाहती है या नहीं, इसीलिए मैं उसके मन को टटोलने में भी लगा हुआ था, उनकी सांसों की गर्माहट जब पास से महसूस होती तो दिल तेज धड़कता।

मैं हमेशा तबस्सुम आंटी के आस-पास ही मंडराता रहता था, कभी कभी तो मैं उसको बहाने से छू भी लेता था, वैसे मुझे जहां तक लग रहा था कि वो भी मेरे मन की इच्छा को जान चुकी थी लेकिन कुछ कह नहीं रही थी, उनका स्पर्श इतना गर्म और नरम था कि छूते ही लंड में करंट दौड़ जाता।

मैं जब भी उसको छूने की कोशिश करता तो ऐसे बर्ताव करता था कि वह सब मैंने जानबूझ कर नहीं किया है और गलती से ही उसको टच हो गया है, मेरी हरकतों पर वो भी हल्के से मुस्करा कर बात को टाल देती थी, उनकी मुस्कान में वो शरारत जो मुझे और उकसाती थी।

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इस तरह से आंटी के लिए मेरी प्यास हर दिन बढ़ती ही जा रही थी, मैं उसको नंगी करके चोदने की फिराक में था लेकिन पता नहीं था कि वो दिन कब नसीब होने वाला है, हर रात उनकी कल्पना में मुठ मारकर सोता लेकिन वो प्यास कम नहीं होती।

एक दिन की बात है जब मैं इमरान के घर गया हुआ था, खेल के बीच में ही इमरान के किसी दोस्त का फोन आ गया और वो मुझे घर पर उसकी मां के साथ ही छोड़ कर चला गया, उस पल दिल की धड़कन इतनी तेज थी कि लग रहा था बाहर निकल आएगी।

उस दिन पहली बार ऐसा हुआ था कि मैं उसकी मां के साथ घर पर अकेला ही था, मेरा मन था कि जाकर आंटी के चूचे दबा दूं लेकिन अभी मेरी इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी, फिर मैं इमरान के कमरे में चला गया, वहां की शांति में उनकी खुशबू अभी भी महसूस हो रही थी।

मैंने उसके कम्प्यूटर में टाइम पास करना शुरू किया, ऐसे ही देखते देखते मुझे उसके कम्प्यूटर में ब्लू फिल्म मिल गई, मैंने देखा कि आंटी अपने किसी काम में बिजी थी तो मैंने सोचा कि इमरान के आने तक ब्लू फिल्म देख लूं, वैसे भी मैंने बहुत दिनों से ब्लू फिल्म नहीं देखी थी, मैं उसके रूम का दरवाजा बंद करके ब्लू फिल्म देखने लगा, मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया, स्क्रीन पर चलती गर्म सीन से मेरी सांसें तेज हो गईं।

मैं अपने लंड को लोअर के ऊपर से ही सहलाने लगा, फिर एकदम से आंटी दरवाजा खोल कर अंदर आ गई और उन्होंने मुझे ब्लू फिल्म देखते हुए अपने लंड को हिलाते हुए देख लिया, उनके हाथ में चाय का कप था, उस पल की शर्म और उत्तेजना का मिश्रण कुछ ऐसा था कि मैं स्तब्ध रह गया।

उन्होंने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर ऐसे रिएक्ट किया जैसे वो मेरी इस हरकत पर गुस्सा हो गई हो; वो चाय को रख कर वापस चली गई, उनकी आंखों में वो झलक जो गुस्से से ज्यादा कुछ और थी।

मैंने सोचा कि इससे पहले कि बात इमरान तक पहुंचे मुझे कुछ करना चाहिए, अगर आंटी ने मेरी यह हरकत इमरान को बता दी तो शायद मैं इमरान के घर पर भी नहीं आ पाऊँगा उसके बाद, इसलिए मैं आंटी को सॉरी बोलने के लिए चला गया, दिल जोरों से धड़क रहा था।

आंटी रसोई में कुछ काम कर रही थी, जब उन्होंने मुड़ कर मुझे देखा तो वो नॉर्मल ही लगी, फिर मैंने हिम्मत करके खुद ही कहा- आंटी मुझसे गलती हो गई, मुझे ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए थी, मेरी आवाज में कंपकंपी थी।

आंटी बोली- कोई बात नहीं इस उम्र में लड़के ऐसे ही काम किया करते हैं, उनकी आवाज में वो नरमी जो मुझे राहत दे रही थी।

मैं आंटी की बात सुन कर हैरान था इसलिए मेरी हिम्मत और बढ़ गई, मैंने आंटी की गांड को ताड़ना शुरू कर दिया और मेरा लंड वहीं पर ही खड़ा होने लगा, फिर पता नहीं क्या हुआ कि मैंने आंटी की गांड को दबाने के लिए हाथ बढ़ाए लेकिन मैं डर के मारे रुक गया कहीं बात बिगड़ न जाये, उनका बदन की गर्मी पास से महसूस हो रही थी।

फिर आंटी ने कहा- तुम यहां पर क्या कर रहे हो, बाहर हॉल में चले जाओ, आंटी मेरे लंड को देख रही थी, आंटी ने एक बार मेरे लंड की तरफ देखा और फिर बोली- मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने के लिए लेकर आती हूं, उनकी नजर में वो शरारत जो मुझे उकसा रही थी।

मैं निराश होकर बाहर चला गया, लेकिन मन में एक उम्मीद जाग गई थी।

फिर कुछ देर के बाद आंटी चाय लेकर बाहर आ गई, वो मेरे सामने जब चाय का कप रखने के लिए झुकी तो मैंने आंटी की चूचियों को देख लिया, मेरे मन में एक आह्ह सी निकल गई, आंटी की चूचियों की दरार बहुत मस्त थी, वो गहरी क्लीवेज जो मुझे मदहोश कर रही थी, आंटी ने भी मुझे ऐसा करते हुए देख लिया था, फिर वो मेरे सामने ही बैठ गयी, उनकी परफ्यूम की महक फिर से कमरे में फैल गई।

चाय पीते हुए आंटी ने पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या? मैंने आंटी को कहा- मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। मैंने कहा- आंटी आप तो बहुत सुंदर हो, अगर मैं आपका पति होता तो … कहते हुए मैं रुक गया। आंटी बोली- क्या? मैंने कहा- कुछ नहीं। वो बोली- बता दो, कोई बात है तो। मैंने कहा- आंटी आप तो बहुत सुंदर हो, अगर मैं आपका पति होता तो आपको बहुत प्यार करता और आपको किसी बात की कमी नहीं होने देता, मेरी बातों से उनकी आंखें चमक उठीं।

आंटी बोली- तुम्हें मैं इतनी पसंद हूँ क्या? मैंने कहा- हाँ आंटी! कहते हुए मैं आंटी के पास ही आकर बैठ गया, हमारी जांघें छू रही थीं, वो गर्म स्पर्श जो उत्तेजना बढ़ा रहा था।

आंटी बोली- मेरे पति तो मुझमें बिल्कुल इंटरेस्ट नहीं लेते हैं, वो कभी मेरी तारीफ नहीं करते। मैंने कहा- मैं तो आपको बहुत पसंद करता हूँ, कहते हुए मैंने आंटी की जांघ पर हाथ रख दिया, आंटी ने मेरा हाथ हटा दिया और कहने लगी- मैं तुम्हारे दोस्त की मां हूँ, तुम्हें ये सब नहीं करना चाहिए, लेकिन उनकी आवाज में वो हिचकिचाहट जो मुझे और आगे बढ़ने का इशारा दे रही थी। लेकिन अब मुझसे नहीं रुका जा रहा था, मैंने आंटी को अपनी बांहों में भर लिया और उनको किस करने की कोशिश करने लगा, उनके होंठ इतने नरम थे कि चूमते ही मीठा स्वाद महसूस हुआ।

आंटी मुझसे छुड़ाने की कोशिश करने लगी और कहने लगी- तुम उम्र में बहुत छोटे हो। मैंने कहा- मैं कुछ नहीं जानता आंटी, मैं तो आपको बहुत प्यार करता हूं, मैं बहुत दिनों से आपको ये बात कहना चाहता था लेकिन कह नहीं पा रहा था। आंटी मेरी बांहों में कसमसा रही थी, उनकी आंखों में हल्के से आंसू भी आ गये थे, मैंने आंटी का मुंह अपनी तरफ किया और आंटी को किस करने लगा, गहरा किस, जीभ से जीभ मिलाकर, उनकी सांसों की गर्मी मेरे मुंह में घुल रही थी।

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कुछ देर तो वो छूटने की कोशिश करती रही लेकिन फिर थोड़ी सी देर के बाद वो भी मेरी चुम्मी का जवाब देने लगी, मैंने अपना हाथ उनकी कमर में डाल दिया, मैं उनको जोर से किस करने लगा, फिर मेरे हाथ उनकी छाती पर उनके बूब्स को टटोलने लगे, वो मुलायम चूचियां हाथ में दबते ही उत्तेजना चरम पर पहुंच गई, लेकिन तभी इमरान की गाड़ी की आवाज आई और हम दोनों अलग हो गये। आंटी की आंखों में मुझे मायूसी साफ दिखाई दे रही थी, मुझे भी मजबूरी में आंटी से अलग होकर अपने घर वापस जाना पड़ा, लेकिन वो किस की मिठास अभी भी होंठों पर थी।

उसके बाद हम दोनों को मिलने में एक हफ्ते से भी ज्यादा का समय लग गया। आंटी ने मुझे फोन पर ये बता दिया था कि इमरान और उसके पापा दो दिन के लिए बाहर जायेंगे, इसलिए हम दोनों उसी दिन का इंतजार कर रहे थे, बहुत बेचैन रहा मैं इस दौरान आंटी से मिलने के लिए, हर पल उनकी याद में लंड सख्त होता रहता।

फिर जिस दिन इमरान और उसके पापा चले गये तो मैं आंटी से मिलने के लिए उनके घर पर पहुंच गया, मुझे देखते ही आंटी भी खुश हो गई, हम दोनों ने जल्दी से दरवाजा अंदर से बंद कर लिया, मैं जाते ही आंटी को बांहों में लेकर किस करने लगा, उनके होंठों को चूसते हुए मैंने अपनी जीभ उनके मुंह में डाल दी, वो भी मेरी जीभ को चूसने लगीं, हम दोनों की सांसें तेज हो गईं थीं, मैंने उनकी कमर को कसकर पकड़ लिया, आंटी की साड़ी की प्लीट्स मेरे हाथों में दब रही थीं, दोनों को ही मजा आने लगा, आंटी भी एंजॉय कर रही थी और साथ में हल्की सिसकारियां भी ले रही थी, “उम्म्म… आशीष, कितने दिनों का इंतजार था…” वो बोलीं, मैंने उनके गले पर किस किया, उनकी साड़ी का पल्लू धीरे से नीचे सरका दिया, अब उनकी ब्लाउज में कैद चूचियां मेरे सामने थीं, मैंने उन्हें दबाया, आंटी ने सिसकारी ली, “आह्ह… धीरे से…” लेकिन उनके चेहरे पर मुस्कान थी, मैंने उनके गले को चाटा, वो नमकीन स्वाद, उनकी त्वचा की गर्मी, सब कुछ मुझे और गर्म कर रहा था।

फिर मैंने आंटी को वहीं रसोई के पास ही डिनर टेबल पर लिटा दिया और उनकी कुर्ती को निकाल दिया, वो कुर्ती पहने थीं आज, मैंने ऊपर से खींचकर उतार दिया, अब ब्रा में उनकी 36 साइज की चूचियां उभरी हुईं थीं, मैं उनके बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा, वो मुलायम थे, निप्पल्स सख्त हो चुके थे, मैंने ब्रा की स्ट्रैप्स नीचे सरका दीं, अब चूचियां आजाद थीं, मैंने एक निप्पल को मुंह में लिया और चूसने लगा, “ओह्ह… आशीष, क्या कर रहे हो, इतना जोर से मत चूसो…” आंटी बोलीं लेकिन उनकी उंगलियां मेरे बालों में थीं, मैंने दूसरे बूब को हाथ से मसल दिया, फिर उनके पेट को किस करने लगा, उनकी नाभि को अपनी जीभ से चाटने लगा, आंटी की कमर उछलने लगी, “उईई… गुदगुदी हो रही है…” वो हंसते हुए बोलीं लेकिन मैं नहीं रुका, जीभ से उनकी नाभि के चारों तरफ घुमाया, उनका पेट गोरा और चिकना था, मैंने उनके पेट पर कई किस प्लांट किए, उनकी त्वचा की खुशबू और स्वाद मुझे पागल कर रहा था, मैंने उनके पेट को चाटा, नीचे की ओर जाता हुआ, उनकी जांघों तक पहुंचा, धीरे-धीरे किस करते हुए, उनकी सांसें और तेज हो गईं, मैंने उनके पैरों को सहलाया, उंगलियां उनकी जांघों पर फेरते हुए, वो मचल रही थीं, “आशीष, और करो…” वो फुसफुसाईं।

अब मुझसे भी रुका नहीं जा रहा था, मैं उनको किस करते हुए अपने कपड़े भी उतारने लगा, मैंने अपने पूरे कपड़े निकाल दिये, अब मैं सिर्फ अंडरवियर में था, मेरा लंड तना हुआ था, आंटी की नजर उस पर गई, वो शरमा गईं लेकिन देखती रहीं, फिर मैं दोबारा से आंटी को किस करने लगा, आंटी लगातार ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ की सिसकारियां अपने मुंह से निकाल रही थी, मैंने उनकी गर्दन पर काटा हल्का सा, “आह्ह… दर्द हो रहा है…” लेकिन वो और करीब आ गईं, मैंने उनके कान में फुसफुसाया, “आंटी, आपकी बॉडी कितनी हॉट है, मैं आपको पूरा चाटना चाहता हूं…” वो बोलीं, “तुम बहुत बदमाश हो, लेकिन मुझे अच्छा लग रहा है…”, मैंने उनके कंधों को चूमा, पीठ को सहलाया, ब्रा को पूरी तरह उतार दिया, चूचियों को फिर से चूसा, हाथ नीचे ले जाकर उनकी सलवार पर फेरा, वो गीली हो चुकी थीं।

मैंने उसके बाद आंटी की सलवार भी निकाल दी और आंटी की जांघों को चाटने लगा, उनकी जांघें मोटी और गोरी थीं, मैंने एक जांघ पर किस किया, फिर जीभ से चाटा, आंटी की सिसकारियां बढ़ गईं, “ओह्ह… आशीष, वहां मत…” लेकिन उनके हाथ मुझे रोकने की बजाय सहला रहे थे, मैंने उनकी जांघों के बीच में किस किया, पैंटी गीली हो चुकी थी, मैंने पैंटी पर जीभ फेरी, वो रस का स्वाद हल्का सा महसूस हुआ।

आंटी की पैंटी को चूसने के बाद मैंने आंटी की पैंटी भी निकाल कर अलग कर दी, उनकी चूत पर छोटे-छोटे बाल थे, चूत गुलाबी और गीली थी, मैं वहीं पर घुटनों के बल बैठ गया और आंटी की चूत को जीभ से चाटने लगा, पहले ऊपर से चाटा, फिर क्लिट को जीभ से सहलाया, आंटी उछल पड़ीं, “आह्ह… इह्ह… क्या कर रहे हो, इतना मजा…” वो बोलीं, मैंने जीभ को और तेज घुमाया, उनकी चूत का रस मेरे मुंह में आ रहा था, मीठा सा था, आंटी की कमर हिल रही थी, “ओह्ह… ह्ह्ह… आशीष, चाटो और…” वो कह रही थीं, मैंने अपनी एक उंगली उनकी चूत में डाली, धीरे से अंदर-बाहर करने लगा, आंटी की सिसकारियां तेज हो गईं, “उईई… आह्ह… हां, ऐसे ही…”, मैंने दो उंगलियां डालीं, जी स्पॉट को छुआ, वो और मचलीं, चूत का रस बहने लगा।

आंटी मचलने लगी, वे बोली- क्या कर रहा है, इतनी गंदी जगह को इतनी मस्ती से क्यूं चाट रहा है। मैंने कहा- आंटी मुझे तो ये गंदी जगह पसंद है। कह कर मैंने आंटी की चूत में जीभ को अंदर डाल दिया तो आंटी और तेजी के साथ सिसकारियां लेने लगी, “आह्ह… ह्ह्ह… ओह्ह… गहराई में…” वो कह रही थीं, मैंने जीभ को घुमाया, उनकी चूत की दीवारों को चाटा, आंटी की टांगें कांप रही थीं, “इह्ह… उईई… मैं झड़ने वाली हूं…” लेकिन मैं नहीं रुका, उंगली से जी स्पॉट को छुआ, वो और मचलीं, उनका रस मेरे मुंह पर बहा, मैंने सब चाट लिया।

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वो कहने लगी- मेरे पति कभी ऐसा नहीं करते, आज मुझे पहली बार इतना मजा आ रहा है, मैंने कभी अपनी चूत में इतना मजा महसूस नहीं किया था, उनकी आवाज में वो संतुष्टि जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी।

उसके बाद मैंने अपना अंडरवियर निकाल दिया और आंटी के हाथ में अपना लंड दे दिया, मेरा लंड 7 इंच का था, तना हुआ और मोटा, आंटी पहले से ही काफी गर्म हो गई थी, आंटी ने मेरे लंड को तुरंत हाथ में पकड़ लिया और उसकी मुट्ठ मारने लगी, वो उसको प्यार से सहला रही थी, “कितना बड़ा है तेरा, आशीष…” वो बोलीं, मैंने कहा, “आंटी, इसे चूसो ना…” वो हिचकिचाईं लेकिन फिर सहमत हो गईं, मैंने उनके बालों को सहलाया, उन्हें नीचे झुकाया।

मुझे भी मस्ती सी चढ़ी जा रही थी, मैंने आंटी को अपना लंड मुंह में लेने के लिए कहा तो वो कहने लगी कि मुझसे लंड मुंह में नहीं लिया जायेगा, फिर मेरे बहुत कहने के बाद उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में भी ले लिया, पहले टॉप को चाटा, फिर मुंह में लिया, “ग्ग्ग… ग्ग्ग… गी…” आवाज आने लगी, वो धीरे-धीरे चूस रही थीं, मैंने उनके सिर को पकड़ा और थोड़ा अंदर धकेला, “गों… गों…” वो गीली चूस रही थीं, लंड पर थूक लग गया, आंटी की आंखें नम हो गईं लेकिन वो जारी रहीं, मैंने उनके चेहरे को देखा, वो उत्तेजना से लाल हो रहा था।

दो मिनट तक आंटी ने लंड चूसा और फिर बाहर निकाल लिया, उसके बाद वो कहने लगी कि बस इससे ज्यादा मैं नहीं कर पाऊंगी, मैं समझ गया कि आंटी को उनके पति ने लंड चूसने की आदत नहीं लगाई है, अगर वो अपने पति का लंड भी चूसती तो मेरे लंड को बड़े ही मजे से चूस लेती, फिर मैंने आंटी की जांघों को अपने हाथों से पकड़ कर खोल दिया और अपने लंड को आंटी की चूत के बीच में लगा दिया, लंड का सुपाड़ा उनकी चूत के होंठों पर रगड़ रहा था, आंटी बोलीं, “धीरे से डालना, आशीष…”, मैंने रगड़ा, उनका रस लंड पर लगा।

लंड को चूत के बीच में लगा कर मैंने धक्का मारा तो आंटी की सिसकारी निकल गई, “आह्ह… ह्ह्ह… दर्द हो रहा है…” लेकिन चूत गीली थी, लंड आधा अंदर चला गया, मैं रुका, फिर धीरे से बाहर निकाला और फिर धक्का मारा, पूरा लंड अंदर, “ओह्ह… इह्ह… कितना मोटा है…” आंटी बोलीं, मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाए, चूत की गर्म दीवारें लंड को जकड़ रही थीं।

फिर मैंने आंटी की चूत को चोदना शुरू कर दिया, आंटी की चूत को चोदते हुए मुझे मजा आने लगा और आंटी के मुंह से भी कामुक सिसकारियां निकलने लगीं, “आह्ह… ह्ह्ह… जोर से… आशीष, चोदो मुझे…” वो कह रही थीं, मैंने स्पीड बढ़ाई, लंड की चप चप की आवाज आ रही थी, चूत का रस लंड पर लग रहा था। आंटी बोली- मैंने पूरे एक साल बाद लंड का स्वाद चूत में लिया है, उनकी चूत की गर्मी और रस मुझे और तेज करने पर मजबूर कर रहा था।

मैं आंटी को पूरा मजा देते हुए उनकी चूत को चोदने लगा, आंटी भी अपनी चूत को चुदवाने का पूरा मजा ले रही थी, मेरे धक्कों के साथ आंटी के चूचे भी तेजी के साथ हिल रहे थे, आंटी मस्त हो गई थी, मैंने अपनी स्पीड तेज कर दी और आंटी की चूत को दस मिनट तक लगातार चोदने के बाद मेरा माल निकलने को हो गया, मैंने और तेज धक्के लगाए, लंड फूल गया। मैंने आंटी से पूछा- मैं अपने माल को कहां पर निकालूं? तो आंटी कहने लगी- मेरी चूत में ही निकाल दो, मैं तुम्हारे माल को अपनी चूत में ही लेना चाहती हूं, उनकी बात से मैं और उत्तेजित हो गया।

फिर मैंने दो धक्के लगाये और मेरे लंड का माल आंटी की चूत में गिरने लगा, मैंने आंटी की चूत को अपने माल से भर दिया, आज पहली बार मेरे लंड से इतना सारा माल निकला था, मैंने आंटी की चूत में कई पिचकारी मारी और फिर मैं आंटी के ऊपर ही लेट गया, हम दोनों की सांसें तेज चल रही थीं, आंटी ने मुझे गले लगा लिया, “बहुत मजा आया, आशीष…” वो बोलीं, हमारी पसीने से भीगी बॉडी एक-दूसरे से चिपकी हुई थी।

उसके बाद आंटी ने मुझे प्यार से उठाया और हम दोनों बाथरूम में चले गये, वहां जाकर हम दोनों ने साथ में ही स्नान किया और आंटी की चूत को मैंने अपने हाथों से ही साफ किया, रस और माल को धोया, आंटी ने भी मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर धोया, “अब ये मेरा है…” वो हंसते हुए बोलीं, पानी की बौछार के नीचे हम फिर से किस करने लगे, उनके गीले बदन को सहलाते हुए।

उस दिन आंटी ने फिर मुझे खाना खिलाया और फिर रात को दोबारा आने के लिए कह दिया, इस तरह से दो दिन तक मैं और आंटी चुदाई का मजा लेते रहे। आंटी भी मुझसे खुश हो गई और बोली- अब तुम जब चाहो मेरे घर पर आकर मेरी चूत को चोद सकते हो, अब हमें जब भी मौका मिलता है हम दोनों चुदाई का मजा लेते रहते हैं।

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