Didi shaadi chudai sex story, Cousin bur chusai sex story: हैलो दोस्तो। मेरा नाम रेहान है। मैं मथुरा से हूं। इस वक्त मेरी उम्र 19 साल की है। मेरी हाइट 5 फुट 11 इंच है। लंड औसत से अधिक लंबा और मोटा है।
यह घटना जिस लड़की के साथ हुई, उसका नाम रहीमा है। उसका रंग बिल्कुल साफ है। फिगर 32-30-32 की है। मस्त उठी हुई गांड का तड़का किसी को भी मदहोश कर दे।
यह बात आज से करीब दो माह पहले की है। दीदी की विदाई के बाद रात को हम सारे भाई-बहन बाहर आंगन में बैठे थे। मुझे नींद आने लगी।
मैंने सबसे कहा- तुम लोग बातें करो, मैं सोने जा रहा हूं। सबने मुझे रोकना चाहा लेकिन मैं बहुत थका हुआ था। मैं नहीं रुका और अंदर आ गया।
लेकिन अंदर देखा तो सोने के लिए जगह ही नहीं थी। मैं लेट कर किसी तरह अपने लायक जगह बनाई। तो अचानक से मेरा हाथ किसी ने पकड़ा।
मैं डर गया। मैंने देखा तो वो रहीमा थी, मेरी रिश्तेदारी में से।
उसने कहा- मुझे भी सोना है।
मैंने कहा- तू भी जगह बना ले और सो जा। मेरे मन में अब तक कोई गलत बात नहीं थी।
उसने कहा- नहीं, मैं तो तेरे साथ ही सोऊंगी।
मैंने कहा- पागल है क्या, जगह ही नहीं है।
उसने कहा- मुझे नहीं पता, मैं तो तेरे साथ ही सोऊंगी।
मैंने कहा- रुक, जगह बनाने दे।
मैंने देखा बिस्तर के नीचे मेहमानों के जूते और बैग रखे थे। मैंने उनको सरका कर जगह बनाई और हम दोनों लेट गए।
हम दोनों के पास ना तो ओढ़ने के लिए कुछ था और ना ही बिछाने के लिए कोई अच्छी चादर या रजाई। वहां सिर्फ कुछ पुरानी दरियां पड़ी हुई थीं। हमने उन्हीं को जमीन पर बिछा लिया और एक पतली सी दरिया ऊपर ओढ़ ली।
उस वक्त फरवरी का महीना था और रात में ठंड काफी तेज हो गई थी। हम दोनों लेट गए। मैंने बातें शुरू कीं ताकि माहौल हल्का रहे। हम धीरे-धीरे एक-दूसरे के करीब आते चले गए।
मुझे और उसे दोनों को बहुत ठंड लग रही थी। ठंड से कांपते हुए मैंने सोचा कि किसी ने एक बार बताया था कि लड़की से लिपटने से शरीर की गर्मी बढ़ जाती है। मैंने बिना ज्यादा सोचे उसी तरह किया। मैंने धीरे से अपना शरीर उसके शरीर से सटा लिया और अपनी बाहों में उसे कसकर पकड़ लिया।
उसने थोड़ा चौंकते हुए कहा, “ये क्या कर रहे हो?”
मैंने मुस्कुराकर जवाब दिया, “गर्मी ले रहा हूं। ठंड बहुत लग रही है।”
वो शर्मा गई। उसके गाल लाल हो गए और उसने नजरें नीचे कर लीं, लेकिन कहीं दूर भी नहीं हटी।
फिर मैंने धीरे से अपना चेहरा उसके चेहरे के पास ले जाकर उसके गाल पर एक हल्का सा किस कर दिया। उसने कुछ नहीं कहा, न रोका, न हटाई। बस आंखें बंद कर लीं। मेरी हिम्मत और बढ़ गई।
मैंने अब उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो हल्के से छुआ, फिर धीरे-धीरे किस गहरा होने लगा। उसके होंठ नरम और गर्म थे। उसने भी जवाब दिया। उसकी सांसें तेज हो गईं और वो भी मुझे किस करने लगी। जोश इतना बढ़ गया कि मैं होश खोने लगा था। हम दोनों के होंठ एक-दूसरे में ऐसे घुल गए जैसे सालों से इंतजार था।
धीरे-धीरे मेरा हाथ उसके शरीर पर सरकने लगा। मैंने उसके ऊपरी हिस्से पर हाथ फेरा और सलवार सूट के ऊपर से ही उसके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया। वो मुलायम और भरे हुए थे। दबाते ही वो सिसकारियां लेने लगी। “आह… उम्म…” उसकी आवाजें छोटी-छोटी लेकिन बहुत कामुक थीं। मैंने धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया, मसलते हुए, निचोड़ते हुए। वो और करीब आ गई।
फिर मैंने और नीचे जाना शुरू किया। मैंने उसकी कमर पर हाथ रखा और सलवार का नाड़ा ढीला कर दिया। नाड़ा खुलते ही सलवार ढीली हो गई। मैंने हाथ अंदर डाला और पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को छुआ। लेकिन जल्दी ही पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया। वाउ यार, वो अंदर से कितनी गर्म और नम थी। मेरी उंगलियां उसकी गर्मी से तप गईं। उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे और वो पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने उंगली से उसके क्लिट को सहलाया। वो सिहर उठी और जोर से सिसकारी ली।
मामला अब बहुत तेजी से बढ़ रहा था। ठंड अब बिल्कुल भूल चुके थे। हम दोनों इतने गर्म हो चुके थे कि शरीर जल रहा था। हमने खुद को 69 की पोजीशन में लपेट लिया। मैं उसके नीचे की तरफ मुंह करके लेट गया और उसने मेरे ऊपर।
मैंने उसकी चूत पर जीभ रख दी। पहले हल्के से चाटा, फिर जीभ को ऊपर-नीचे सरकाया। क्लिट को जीभ की नोक से छेड़ा। वो कांप रही थी। मैंने जीभ को अंदर डालने की कोशिश की। ये सब मैंने ब्लू-फिल्म देखकर सीखा था और अब असल में कर रहा था। मजा इतना आ रहा था कि मैं सातवें आसमान पर पहुंच गया था। उसकी चूत का स्वाद नमकीन-मीठा था। मैं जीभ को तेजी से अंदर-बाहर कर रहा था, जैसे चूत को चोद रहा हूं।
उधर वो मेरा लंड मुंह में ले चुकी थी। वो धीरे-धीरे चाट रही थी, फिर पूरा मुंह में लेकर चूसने लगी। ऐसा लग रहा था जैसे वो कोई लॉलीपॉप चूस रही हो। उसकी जीभ मेरे लंड के सुपारे पर घूम रही थी, फिर नीचे तक। वो कभी तेज चूसती, कभी धीरे। मेरे लंड पर उसकी लार चमक रही थी।
हम दोनों एक-दूसरे को ऐसे चाट रहे थे जैसे दुनिया में सिर्फ हम ही बचे हैं। उसकी सिसकारियां और मेरी सांसें तेज हो गईं। अचानक वो एकदम से अकड़ गई। उसकी चूत सिकुड़ने लगी और वो जोर से झड़ गई। उसका गर्म रस मेरे मुंह में आया। मैंने उसे पूरा पी लिया। स्वाद बड़ा टेस्टी था, मीठा-नमकीन।
फिर दो मिनट बाद मेरी भी बारी आई। मैंने जोर से धक्का दिया उसके मुंह में और मैं भी झड़ गया। वो मेरा सारा रस पी गई। उसने लंड को अच्छे से चाट-चाटकर साफ कर दिया।
अब मैं उसके ऊपर आ गया। अपना शरीर उसके शरीर पर हल्के से टिका लिया ताकि ज्यादा वजन न पड़े। मैंने अपना लंड हाथ में पकड़ा। वो पहले से ही पूरी तरह खड़ा और सख्त था, सुपारा चमक रहा था उसकी लार और मेरे प्रीकम से। मैंने धीरे-धीरे लंड का सिरा उसकी चूत के मुंह पर रखा।
उसकी चूत एकदम गीली थी, बाहर से ही चिपचिपी और गरम महसूस हो रही थी। लेकिन अंदर से बहुत टाइट थी, क्योंकि वो आज तक किसी से नहीं चुदाई थी। उसकी चूत की दीवारें सिकुड़ी हुई लग रही थीं। मैंने लंड को हल्के से रगड़ा, ऊपर-नीचे सरकाया ताकि वो और गीली हो जाए और एंट्री आसान हो। उसकी सांसें तेज हो गईं, वो थोड़ी कांप रही थी।
आस-पास सब लोग गहरी नींद में सो रहे थे। हल्की-हल्की खर्राटों की आवाजें आ रही थीं। मुझे बहुत डर लग रहा था। अगर वो चीख पड़ी या कोई आवाज हुई तो सब उठ जाएंगे। हम दोनों को पकड़ लिया जाएगा और सबके सामने बेइज्जत हो जाएंगे। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, लेकिन लंड की वजह से रुकना मुश्किल हो रहा था।
पर कहते हैं ना, लंड खड़ा होने से पहले इंसान उसका गुलाम होता है, लेकिन जब लंड खड़ा हो जाता है तो इंसान लंड का गुलाम बन जाता है। मैं भी ठीक वैसा ही हो गया था। मेरा लौड़ा बार-बार अपने आप उसकी चूत के मुंह पर जा रहा था, जैसे खुद-ब-खुद अंदर घुसना चाहता हो।
मैंने हिम्मत करके एक जोरदार झटका मारा। लंड का सुपारा अचानक से उसके टाइट होल में दबाव डालते हुए अंदर घुसने लगा। वो एकदम से चीखने को हुई, मुंह से “आह्ह्ह…” जैसी तेज आवाज निकलने वाली थी। मैं तुरंत डर गया। फौरन मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और जोर से चूसने लगा। उसकी चीख दब गई मेरे मुंह में। मैंने धीरे से उसके कान में कहा, “शांत रह… थोड़ा दर्द होगा, लेकिन उसके बाद बहुत मजा आएगा। बस थोड़ा सह ले।”
उसकी आंखों में आंसू छलक आए थे। वो दर्द से कराह रही थी, लेकिन मेरे होंठों से अलग नहीं हो रही थी। मैंने उसे और गहराई से किस किया, जीभ अंदर डालकर उसकी जीभ से खेलने लगा ताकि उसका ध्यान दर्द से हटे।
फिर मैंने थोड़ा पीछे खींचा और फिर से एक मजबूत झटका मारा। इस बार आधा लंड अंदर चला गया। उसकी चूत की दीवारें लंड को इतनी जोर से कस रही थीं कि मुझे भी दर्द हो रहा था, लेकिन मजा अलग ही था। वो सिहर उठी, उसके नाखून मेरी पीठ में गड़ गए।
मैं थोड़ा रुक गया। एक मिनट तक ऐसे ही रहा, उसे सांस लेने का मौका दिया। उसकी सांसें धीमी हुईं, आंसू बह रहे थे लेकिन वो अब चुप थी। मैंने उसके माथे पर किस किया और धीरे से कहा, “अब बस थोड़ा और…”
फिर मैंने एक तेज और गहरा धक्का मारा। इस बार पूरा लंड एक झटके में उसके अंदर समा गया। उसकी चूत ने लंड को पूरी तरह निचोड़ लिया। वो तो जैसे मर ही जा रही थी। उसने दर्द से कराहते हुए कहा, “उह्ह… बहुत दर्द हो रहा है… निकालो इसे… नहीं तो मैं मर जाऊंगी…” उसकी आवाज कांप रही थी, आंसू बह रहे थे।
मैंने उसे फिर से किस करना शुरू कर दिया। उसके होंठ चूसते हुए, गालों पर किस करते हुए, मैंने कहा, “जान, दर्द सह लो… बस थोड़ी देर… उसके बाद जन्नत की सैर कराऊंगा। तू देखना, कितना अच्छा लगेगा।” मैंने उसके मम्मों को हल्के से दबाया, निप्पल्स को सहलाया ताकि दर्द कम हो।
धीरे-धीरे मैंने धक्के मारने शुरू किए। पहले बहुत धीमे, छोटे-छोटे धक्के। बाहर-भीतर करते हुए। हर धक्के के साथ उसकी चूत थोड़ी और ढीली होती गई, गीली होती गई। दर्द अब कम होने लगा था। उसकी सिसकारियां अब दर्द की नहीं, मजा की लगने लगीं। “आह… उम… हां…” वो धीरे-धीरे गांड उठाने लगी, मेरे धक्कों के साथ ताल मिलाने लगी।
हम दोनों को अब बहुत मजा आने लगा था। लंड अब आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। उसकी चूत गर्म और नरम हो चुकी थी। हर धक्के पर वो सिहर रही थी, मैं भी सातवें आसमान पर था।
वो भी अब पूरी तरह जोश में आ चुकी थी। वो गांड उठा-उठा कर मेरे हर धक्के का जवाब दे रही थी। जैसे-जैसे मैं अंदर-बाहर करता, वो अपनी कमर ऊपर उठाती और लंड को और गहराई तक लेने की कोशिश करती। उसकी चूत अब पूरी तरह ढीली और गीली हो चुकी थी, हर धक्के पर चपचप की आवाज आ रही थी। वो छोटी-छोटी सिसकारियां ले रही थी, “आह… हां… और जोर से…” उसकी आवाजें दबी हुई थीं क्योंकि हमें डर था कि कोई सुन न ले।
हम दोनों दरी के नीचे लिपटे हुए थे। दरी हमें ढक रही थी, जिससे बाहर से देखने में लगता था कि सिर्फ एक ढेर पड़ा है। इस वजह से हम ज्यादा आसन नहीं बदल सकते थे। नॉर्मल मिशनरी पोजीशन में ही चुदाई चल रही थी, लेकिन वो काफी थी। मैं उसके ऊपर था, उसके मम्मों को दबाते हुए, होंठ चूसते हुए, और लगातार धक्के मार रहा था। कभी तेज, कभी धीमे, ताकि वो और ज्यादा एंजॉय करे।
मैंने उसकी हिचकिचाहट को महसूस किया। वो अब दर्द भूल चुकी थी, सिर्फ मजा ले रही थी। मैंने धक्कों की रफ्तार बढ़ाई। मेरे लंड पर उसकी चूत की दीवारें कस-कस कर निचोड़ रही थीं। हर धक्के के साथ वो सिहर उठती, उसकी सांसें तेज हो जातीं। अचानक उसका पूरा शरीर अकड़ गया। उसकी चूत सिकुड़ने लगी, जैसे लंड को जकड़ रही हो। वो जोर से कराही, लेकिन आवाज दबाकर, “आह्ह्ह… मैं… आ रही हूं…” और वो झड़ गई। उसका गर्म रस मेरे लंड पर बहा, चूत और गीली हो गई। मैंने धक्के जारी रखे ताकि उसका ऑर्गेज्म पूरा हो।
उसके झड़ने के ठीक बाद मेरी भी बारी आ गई। मैंने और जोर से धक्के मारे, कुछ ही सेकंड में मैं भी झड़ गया। मेरा गर्म रस उसके अंदर छूट गया। मैंने पूरा रस उसके अंदर डाल दिया, लंड को अंदर ही रखा रहा जब तक स्पर्म का आखिरी कतरा भी न निकल जाए। हम दोनों की सांसें तेज थीं, पसीना आ रहा था, लेकिन ठंड अब बिल्कुल नहीं लग रही थी।
फिर हम कुछ देर ऐसे ही लिपटे रहे। धीरे-धीरे सांसें सामान्य हुईं। मैंने अपना लंड बाहर निकाला। वो थोड़ा दर्द से सिहर गई, लेकिन मुस्कुरा दी। हमने कपड़े सही किए। सलवार का नाड़ा बांधा, सूट ठीक किया, और मैंने भी अपना लुंगी-पाजामा सेट किया। फिर हम दरी के नीचे ही लेट गए, एक-दूसरे से लिपटकर। थकान इतनी थी कि कुछ ही मिनटों में हम सो गए।
सुबह हुई। उसे अपने घर जाना था। वो उठी और मुझे जगाने की बहुत कोशिश करने लगी। मेरे कंधे हिलाती, कान में धीरे से बुलाती, “रेहान… उठो… मुझे जाना है…” लेकिन मैं इतना थक गया था कि नींद से जाग ही नहीं पा रहा था। आंखें खुल नहीं रही थीं। वो कई बार कोशिश करती रही, लेकिन मैं सोया ही रहा। आखिरकार वो मुझे छोड़कर चली गई।
मैं करीब 9 बजे जागा। आंखें खोलीं तो वो कहीं नहीं थी। मैंने चारों तरफ देखा, उसे खोजने लगा। घर के अंदर, बाहर, आंगन में, लेकिन वो जा चुकी थी। दिल में एक अजीब सी खालीपन महसूस हुआ। मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी। उसकी मुस्कान, उसकी सिसकारियां, उसकी गर्मी, सब कुछ याद आ रहा था।
मैंने फौरन फोन उठाया और उसे कॉल किया। वो कॉल रिसीव करते ही बोली, “हैलो… मैं अभी बस में हूं।” उसकी आवाज में भी उदासी थी। मैंने कहा, “तुम चली गईं? मुझे बताया भी नहीं…” वो बोली, “तुम तो सो रहे थे, उठ नहीं रहे थे। मैंने बहुत कोशिश की…”
मैंने धीरे से कहा, “आई लव यू…” वो थोड़ा रुकी, फिर मुस्कुराते हुए बोली, “लव यू टू… कल की रात को मैं कभी नहीं भूलूंगी। वो रात मेरी जिंदगी की सबसे खास रात थी।” हम दोनों कुछ देर चुप रहे, बस एक-दूसरे की सांसें सुनते हुए। फिर उसने कहा, “जल्दी मिलेंगे… अब रखती हूं, बस चल रही है।” और कॉल कट गई।
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