Bhabhi ne chudai sikhai sex story: मेरा नाम इन्द्रेश है। मैं 29 साल का एक बहुत ही आकर्षक लड़का हूँ। मेरी यह कहानी करीब 9 साल पहले की है, तब मैं पढ़ता था। यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है जो मैं आप लोगों से बताने जा रहा हूँ। मैं अपने परिवार के बारे में बता दूँ, जिसमें उस वक्त छह सदस्य थे। हम 3 भाई, एक बहन, एक भाभी और माँ थे।
जब मैं मात्र छह साल का था तभी पापा का अचानक देहांत हो गया था। उस समय से घर की जिम्मेदारी बड़े भाई पर आ गई थी। भाइयों में मैं सबसे छोटा था और मेरी बहन अनीशा मुझसे दो साल छोटी थी। बड़े भाई की शादी हो चुकी थी और नई-नई भाभी घर में आई थीं। सब कुछ मजे से चल रहा था।
मैं और मेरी बहन अनीशा काफी खुश थे क्योंकि भाभी हम दोनों को बहुत ज्यादा प्यार करती थीं और हर समय हमारे साथ मस्ती करती रहती थीं। हम सब खूब हंसी-मजाक और खेलकूद करते थे। गर्मी की छुट्टियाँ चल रही थीं। एक दिन मैं अकेला ही भाभी के कमरे में भाभी के साथ लूडो खेल रहा था। अनीशा माँ के साथ बाजार गई थी। हम दोनों घर पर पूरी तरह अकेले थे। कमरे में पंखा चल रहा था लेकिन फिर भी गर्मी से हल्की पसीना आ रहा था।
अचानक भाभी ने हंसी-मजाक में मुझे पीछे की ओर हल्का सा धक्का दे दिया। मैं संभल नहीं पाया और पीठ के बल उनके नरम गद्देदार पलंग पर लेट गया। क्योंकि हम उनके ही पलंग पर खेल रहे थे। मुझे गुस्सा आ गया। मैं तुरंत उठ खड़ा हुआ और उन्हें पीछे की ओर धक्का देने लगा। भाभी मुझसे काफी ज्यादा मजबूत और ताकतवर थीं। मैं उन्हें गिराने में सफल नहीं हो पा रहा था।
भाभी को गिराने की कोशिश में मेरे दोनों हाथ उनके कंधों से फिसल कर उनकी नरम और भरी-पूरी चूचियों पर आ गए थे। मैं धक्का देने के लिए उन्हें उसी अवस्था में जोर से धकेल रहा था जिससे उनकी गोल और मुलायम चूचियाँ मेरी हथेलियों के नीचे दब रही थीं। मैं उनकी चूचियों की गर्माहट और नरमी साफ महसूस कर रहा था। मेरे कंधे को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ कर भाभी ने मुझे पीछे की ओर जोर से धकेल दिया।
मैं फिर से गिर पड़ा लेकिन मैं भी हार मानने वाला नहीं था। मैं तेजी से उठा और इस बार मैंने भाभी को अपनी बांहों में भर लिया और उन्हें गिराने की पूरी ताकत से कोशिश करने लगा। इस बार मैं कामयाब हो गया। वो पीठ के बल पलंग पर गिर गईं। भाभी के दोनों हाथ मेरी बांहों में पूरी तरह कैद हो गए थे। वो छटपटाने लगीं।
मैं भाभी के ऊपर सीधा लेटा हुआ था। तभी मैंने अपने पैरों को फैलाकर भाभी के दोनों पैरों को अपने पैरों के बीच जकड़ लिया। अब उनके गोल-गोल और चिकने पैर भी मेरे पैरों के बीच पूरी तरह कैद हो गए थे। उनकी भारी और नरम चूचियाँ मेरे सीने से पूरी तरह दब रही थीं। मैं उनकी चूचियों की गर्माहट, नरमी और लचक को अपने सीने पर महसूस कर रहा था।
वो अब भी ताकत लगाकर छुटकारा पाने की कोशिश कर रही थीं। मैंने उन्हें कस कर पकड़े रखा था। तभी भाभी ने अपने दोनों हाथों को मेरी पकड़ से आजाद कर लिया। अब उनके हाथ मेरे कंधों के ऊपर से होते हुए मेरी पीठ पर आ गए थे और वो मेरे सिर को पीछे से पकड़कर अपनी चूचियों पर जोर से दबाने लगीं।
मेरा चेहरा उनकी दोनों बड़ी और गर्म चूचियों के बीच में पूरी तरह दब गया था। मुझे उनकी चूचियों की मुलायमता, गर्मी, हल्की पसीने की महक और उनकी सांसों की गति साफ महसूस हो रही थी। मुझे लगा जैसे मेरा दम घुट जाएगा। इस बार मैं उनकी पकड़ से छूटने के लिए जोर-जोर से छटपटाने लगा। जब नहीं छूट पाया तो मैं जोर से चिल्लाने लगा।
इससे घबरा कर भाभी ने मुझे छोड़ दिया। मैं उठ कर खड़ा हो गया और लंबी-लंबी सांस लेने लगा। भाभी मुझे देख कर मुस्कुरा रही थीं, जबकि मुझे गुस्सा आ रहा था। मैं गुस्से से उन्हें घूर रहा था और वो मुस्कुराते हुए उठ कर बाथरूम में घुस गईं।
दोपहर का वक्त था। बाहर तेज धूप थी। मैं जाकर टीवी देखने लगा। कुछ देर में ही माँ और अनीशा भी बाजार से आ गईं। फिर सबने मिल कर खाना खाया। माँ खाना खाकर अपने कमरे में आराम करने के लिए चली गईं। मैं भी अपने कमरे में जाकर आराम करने लगा।
तभी अनीशा आ गई और कहने लगी, भाभी ने तुझे बुलाया है। मैं अनीशा के साथ भाभी के कमरे में पहुँचा तो देखा कि भाभी सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट पहने पलंग पर लेटी थीं। हालांकि यह कोई नई बात नहीं थी कि भाभी मेरे सामने इस रूप में थीं। कभी-कभी तो वो मेरे सामने कपड़े भी बदल लेती थीं, क्योंकि मुझे उस वक्त सेक्स का कोई ज्ञान नहीं था। मुझे नहीं पता था कि औरत और मर्द आपस में मिल कर क्या-क्या करते हैं। मेरे लिए ये सामान्य बात थी। मुझे देखते ही वो उठ कर बैठ गईं।
मैंने उनसे पूछा, क्या बात है? तो उन्होंने कहा, चलो तीनों लूडो खेलते हैं। मैं तैयार हो गया और हम तीनों लूडो खेलने लगे। कुछ ही देर में मुझे नींद आने लगी तो मैंने कहा, मैं अब नहीं खेलूँगा। मुझे नींद आ रही है। मैं सोने जा रहा हूँ। तो भाभी ने कहा, यहीं सो जाओ।
मैं वहीं पलंग पर एक किनारे सो गया और वो दोनों लूडो खेलने लगीं। कुछ देर में मेरी नींद खुलने लगी थी, क्योंकि मुझे अपने लंड पर नर्म सा कुछ महसूस हो रहा था। मैं नींद में ही अपने हाथ को अपने लंड पर ले गया तो मैं चौंक गया क्योंकि मेरे लंड पर दो हाथ फिसल रहे थे। मैं आँखें बंद किए लेटे रहा। मुझे भी बहुत मजा आ रहा था।
मेरा लंड कड़ा होने लगा था और मेरे पूरे जिस्म में सिहरन हो रही थी। आखिर मुझसे सहा नहीं गया और मैं उठ कर बैठ गया। तो मैंने देखा कि भाभी और अनीशा दोनों ही नंगी पलंग पर बैठी हैं और एक-दूसरे की चूत को सहला रही थीं। साथ ही मेरे लंड को भी सहला रही थीं। मेरे उठ जाने से अनीशा घबरा कर बिना कपड़े पहने ही भाग कर बाथरूम में घुस गई।
मैं भाभी की तरफ देख कर बोला, आप लोग नंगे क्यों हो और मेरे लंड को क्यों सहला रही थीं? तो वो मुस्कुरा कर बोलीं, हम लोग एक नया खेल खेल रहे थे। मैंने कहा, यह कौन सा खेल है जो नंगे होकर खेलते हैं? भाभी बोलीं, यह खेल नंगा ही खेला जाता है। तभी इस खेल में मजा आता है। क्या तुम्हें मजा नहीं आ रहा था?
इस पर मैं बोला, मजा तो आ रहा था पर मैंने तो कपड़े पहने हुए थे। भाभी बोलीं, कपड़े उतार कर खेलोगे तो और मजा आएगा। खेलोगे? मैं और मजा लेना चाहता था क्योंकि ये मजा मेरे लिए एकदम नया था। फिर भी मैं भाभी से बोला, पर अनीशा मेरी बहन है। मैं उसके सामने कैसे नंगा हो सकता हूँ?
इस पर भाभी मुझे समझाते हुए बोलीं, अरे पगले, अपनों के सामने नंगा होने में कैसी शर्म। कोई बाहर वाला थोड़े ही देख रहा है। हम तीनों तो अपने ही हैं और यहाँ कोई है भी तो नहीं। यह कहते हुए भाभी मेरे कपड़े उतारने लगीं और मुझे भी पूरा नंगा कर दिया। उन्होंने मेरे लटके लंड को हाथों से पकड़ लिया और मसलने लगीं।
मुझ पर अजीब सा नशा छाने लगा था। मेरा लंड फिर से कड़ा होने लगा था और लंबा भी होने लगा था। मस्ती से मेरी आँखें बंद हो गईं। तभी मुझे अपने लंड पर कुछ गीला-गीला सा महसूस हुआ। तो मेरी आँखें खुल गईं। मैंने देखा भाभी मेरे लंड को अपने मुँह में डाल कर चूसने लगी थीं।
मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरा लंड किसी गर्म हवा भरे गुब्बारे में घुसा हुआ हो। मैं भाभी के पूरे नंगे जिस्म को गौर से देख रहा था। पूरा मस्त जिस्म। उनकी गोल-गोल गोरी सी मचलती चूचियाँ। उस पर छोटे-छोटे लाल रंग से उनके निप्पल। पतली सी कमर। उभरी और चौड़े गोल-गोल चूतड़। चिकनी मोटी जांघें। और चिकनी जांघों के बीच में काले-काले घुंघराले झांट के बाल।
तभी मेरा जिस्म अकड़ने लगा। ऐसा लगा जैसे मैं आसमान में उड़ रहा होऊँ और मेरे लंड के रास्ते मेरे जिस्म से जैसे जान ही निकल जाएगी। मैंने झटके से अपना लंड भाभी के मुँह से बाहर खींच लिया और उनका हाथ भी अपने लंड से अलग हटा दिया। मैं अपनी सांसों को संयमित करने की कोशिश करने लगा, जो जोर-जोर से जल्दी-जल्दी चल रही थीं।
मेरा लंड भी झटके मार रहा था। मैंने लंड को भी हाथ से पकड़ लिया ताकि वो हिल ना सके। तभी भाभी मेरे ऊपर चढ़ गईं और मेरे लंड को अपनी जांघों के बीच में झांटों से रगड़ने लगीं। उनके मुँह से ‘आह.. आह.. आह इस्स आ’ की आवाजें आ रही थीं। भाभी ने जैसे ही अपने पैरों को फैलाया, मेरे लंड को झांटों के बीच में हल्का गर्म-गर्म पानी सा लगा।
मैंने उत्सुकतावश हाथ से उस जगह को स्पर्श किया। तो भाभी एकदम से उछल गईं और मुझे चूमने लगीं। मैंने भाभी से पूछा, वो क्या है? तो भाभी मुस्कुराते हुए चूमकर बोलीं, मेरे इन्द्रेश राजा, उसे चूत कहते हैं, जिसमें मर्द अपना लंड घुसा कर चोदते हैं। मैंने ये सब पहले कभी नहीं सुना था।
इसलिए पूछने लगा, वहाँ क्या इतना बड़ा छेद होता है जो इतना बड़ा और मोटा लंड भी उसमें घुस जाता है? मेरे इस सवाल पर भाभी कुछ बोली नहीं। सिर्फ मुस्कुराईं और मेरी कमर पर बैठ गईं और अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ने लगीं। उनकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी, जिससे मेरा लंड भी गीला हो गया था।
भाभी की आँखें बंद हो रही थीं और मेरी भी। तभी भाभी ने अपने चूतड़ों को थोड़ा ऊपर उठाया और एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ कर चूत के मुँह से लगा कर लंड पर बैठने लगीं। जब मेरा लंड भाभी की चूत के अंदर घुस रहा था तो मैं बता नहीं सकता कि मुझे कैसा लग रहा था। मेरी आँखें बंद हो गई थीं और भाभी अपने चूतड़ों को हिला-हिला कर मेरे लंड को अपनी चूत में अंदर-बाहर कर रही थीं।
हम दोनों के मुँह से ‘आह आह आ आ अहहा’ की आवाज निकल रही थी और साथ ही साथ लंड और चूत के मिलन से भी ‘फक फक.. पछ.. पछ’ की आवाजें आ रही थीं। करीब 5 मिनट बाद भाभी अचानक एकदम जल्दी-जल्दी अपने चूतड़ों को मेरे लंड पर हिलाने लगीं और अपने हाथों से अपनी चूचियों को मसलने लगीं। तभी मेरा जिस्म अकड़ने लगा और मैंने भाभी के चूतड़ों को कस कर पकड़ लिया।
मुझे लगा जैसे मेरे लंड से कुछ निकल रहा है। उधर भाभी भी मेरे ऊपर लेट गईं और अपनी एक चूची को मेरे मुँह में डाल कर अजीब-अजीब सी आवाजें निकालते हुए जल्दी-जल्दी मुझे चोदने लगीं। उनकी गर्म और नरम चूची मेरे होंठों के बीच पूरी तरह भर गई थी। मैं उसकी मुलायमता और हल्की पसीने की नमकीन महक को अपने मुंह में महसूस कर रहा था। भाभी के चूतड़ तेजी से ऊपर-नीचे हिल रहे थे और उनका गीला चूत मेरे लंड को पूरी ताकत से निचोड़ रहा था।
अचानक उन्होंने मुझे कस कर पकड़ लिया और मेरे होंठों को चूमते हुए अपनी चूत को मेरे लंड पर जोर-जोर से दबाने लगीं। उनके होंठ मेरे होंठों पर गर्म और भीगे हुए थे। उनकी जीभ मेरे मुंह के अंदर घुस रही थी और वो जोर-जोर से चूस रही थीं। उनका पूरा जिस्म झटके ले रहा था। मेरे लंड को भी महसूस हो रहा था कि गर्म-गर्म सा कुछ पानी सा मेरे लंड को भिगोता हुआ उनकी चूत से बाहर निकल रहा था।
हम दोनों का जिस्म पसीने से पूरी तरह भीग गया था। उनकी चूचियों से निकलता पसीना मेरे सीने पर बह रहा था। अभी तक मेरे लंड को भाभी अपनी चूत से कस कर पकड़े हुए थीं और मुझे चूमे जा रही थीं। उनकी सांसें तेज और गर्म थीं। मैं उनके जिस्म की हर कंपकंपी को अपने लंड के जरिए महसूस कर रहा था।
कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद भाभी मेरे ऊपर से उठीं और वैसे ही चूतड़ों को मटकाती हुई बाथरूम में घुस गईं। मुझे अब काफी हल्कापन महसूस हो रहा था। मैं आँखें बंद किए गहरी-गहरी सांस ले रहा था।
अचानक मुझे ध्यान आया कि अनीशा भी तो यहीं थी। क्या उसने ये सब कुछ देख लिया है, क्योंकि मुझे इतना तो पता था कि दो नंगे जिस्म का आपस में मिलना गलत होता है। यह सोच कर मुझे डर सा लगने लगा था कि अनीशा किसी को यह बात बता ना दे।
मुझे पेशाब करने की इच्छा हो रही थी तो मैंने बाथरूम के पास जाकर भाभी को आवाज लगाई। तो भाभी ने बाथरूम का दरवाजा खोल दिया। मैंने कहा, मुझे पेशाब करना है। आप बाहर जाओ।
इस पर भाभी बोलीं, हम बाहर नहीं आएंगे। तुम अंदर आ जाओ और पेशाब कर लो। कुछ नहीं होगा। मुझे शर्म महसूस हो रही थी क्योंकि अंदर मेरी बहन अनीशा भी थी और इधर मुझे जोर से पेशाब भी लगी थी। मैंने एक बार फिर से कहा, तो इस बार भाभी बाहर आईं और मेरा हाथ पकड़ कर बाथरूम के अंदर ले गईं और मुझसे बोलीं, अब करो पेशाब।
मैंने देखा अंदर भाभी और अनीशा दोनों ही नंगी थीं। मुझे देख कर अनीशा ने भी शर्म से नजरें नीचे की हुई थीं और अपनी चिकनी सुडौल जांघों से अपनी नंगी चूत को ढकने की कोशिश कर रही थी, जो हो नहीं पा रहा था।
अनीशा की चूत के चारों ओर भूरे रंग के छोटे छोटे रेशमी बाल उग आए थे, जो उसकी चूत को चार चांद लगा रहे थे। अनीशा अपने हाथों से अपनी संतरे के आकार की अपनी चूचियों को ढके हुए थी।
तभी भाभी बोलीं, ऐसे क्या देख रहा है। चोदेगा क्या इसे भी। यह भी चुदना चाहती है पर शर्मा रही है और तुम पेशाब क्यों नहीं कर रहे हो?
मैंने जैसे ही पेशाब करने के लिए निक्कर से लंड को बाहर निकाला, भाभी ने मुझे रोक दिया और बोलीं, रुक। एक नए तरीके से पेशाब करो, जिससे तुम दोनों की शर्म खत्म हो जाएगी।
मैंने पूछा, कैसे? तो वो बोलीं, कुछ नहीं। वे अनीशा को मेरे सामने ले आईं और मुझे निक्कर उतारने को कहा। मैंने निक्कर उतार दिया। अब मैं भी उनके जैसा ही नंगा था।
भाभी ने अनीशा को कमोड पर बैठा दिया और उसके सामने मुझे ले गईं। इतना करीब कि अगर मैं एक कदम और आगे बढ़ जाता तो मेरा लंड अनीशा के होंठों को स्पर्श कर जाता। फिर भाभी ने अनीशा के दोनों पैरों को उठा कर फैला दिया और मुझसे बोलीं, चल अब इसकी चूत से लंड को सटा कर पेशाब कर।
इस तरह अनीशा के पैर फैलने से उसकी चूत का मुंह खुल गया। मैं तो उसकी गोरी-गोरी जांघों के बीच रेशमी भूरे-भूरे बालों से घिरी गुलाबी रसीली चूत को देख कर पेशाब करना ही भूल गया था। मेरा लंड दुबारा से ऐसी चूत को देख कर खड़ा हो गया था और झटके मार-मार कर अनीशा की चूत को सलामी देने लगा था।
यह देख कर भाभी और अनीशा भी अब बेशर्म बन कर मुस्कुरा रही थीं। मुझसे नहीं रहा गया और वहीं अनीशा के सामने फर्श पर उकडू बैठ गया और अनीशा की चूत को हाथों से फैला कर देखने लगा।
मैं अपनी जिंदगी में पहली बार किसी कुंवारी चूत को छू कर देख रहा था, वो भी अपनी ही बहन की चूत। जैसे ही मेरे हाथों ने अनीशा की चूत को छुआ, अनीशा सिसक उठी और प्यासी नजरों से मुझे देखने लगी। उसकी चूत गीली थी।
चूत की गहराई नापने के लिए मैंने हाथ की एक उंगली अनीशा की चूत में घुसा दी। मेरी उंगली के घुसते ही अनीशा मचलने लगी और सिसयाने लगी – आ आ भाभी रे.. आह.. इस्स.. आह.. भैया जी.. आह.. मुझे भी आह.. चोदिए ना.. आ आह.. जैसे आह.. भाभी को.. आ आ चोद रहे थे.. इस्स.. मम्मी रे.. आह.. चोदिए…
मैं भी पेशाब करना भूल कर अपना लंड अनीशा की चूत से सटा कर घुसेड़ने की कोशिश करने लगा, पर सब बेकार। लंड बार-बार चूत से फिसल जा रहा था। मैं जैसे ही लंड को अनीशा की चूत से छुलाता, अनीशा मचल कर अपना गांड ऊपर उछालती, जैसे चूत से लंड को निगल जाना चाहती हो।
ये सब देख कर भाभी हंसने लगीं और बोलीं, ऐसे अंदर नहीं जाएगा। मेरे राजा, ला इधर ला लंड को। उन्होंने मेरे लंड को पकड़ कर उस पर ढेर सारा तेल लगाया। फिर अनीशा की चूत में भी अंदर तक उंगली घुसा कर तेल लगा दिया।
फिर बोलीं, ले अब इसकी चूत तैयार है। लौड़े को अंदर लेने के लिए। उन्होंने मेरा लंड पकड़ा और अनीशा की चूत की दरार में रगड़ने लगीं। भाभी के द्वारा लंड को अनीशा की चूत पर रगड़ने से अनीशा तड़पने लगी और अपने चूतड़ों को ऊपर उठाने लगी।
वो भाभी से कहने लगी, अहहह आ भाभी इस्स आह चोद आह.. चोद चोद दो न.. उसकी इस ‘आह इस आह’ से मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था। अनीशा की वो प्यासी और तड़पती हुई आवाजें मेरे कानों में गूंज रही थीं। उसकी चूत पहले से ही तेल से चिकनी और गीली हो चुकी थी। भाभी के हाथ में मेरा लंड था जो अनीशा की चूत की दरार पर बार-बार रगड़ रहा था।
सो मैंने अचानक अपने लंड को जोर से चूत में चांप दिया। मेरी कमर ने एक तेज झटका मारा। तेल की वजह से लंड ‘फच्च’ की आवाज के साथ पूरा का पूरा चूत में घुस गया। अनीशा का पूरा शरीर एकदम से अकड़ गया। उसकी जांघें कांपने लगीं। उसकी चूत की दीवारें मेरे मोटे लंड को निचोड़ रही थीं।
‘मांम्मय्यई… मार गई.. आईईईईईईए’। तभी भाभी ने अपने हाथ से अनीशा के मुंह को बंद कर दिया, पर अनीशा दर्द से रोने लगी। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। उसकी चूत से गर्म खून मेरे लंड के चारों ओर बहने लगा था। मैंने महसूस किया कि उसकी कुंवारी चूत की झिल्ली फट गई थी।
यह देख कर मैं डर गया और लंड को चूत से बाहर निकाल लिया। अनीशा की चूत से भी खून बहने लगा था। खून की पतली धार उसकी गोरी जांघों पर बह रही थी। मेरे लंड पर भी लाल खून लगा हुआ था।
खून देखते ही मेरे लंड का सारा जोश ही गायब हो गया और मैं बाथरूम से बाहर निकल आया और बिस्तर पर लेट कर डर के मारे मैं भी रोने लगा था। कुछ देर बाद भाभी और अनीशा भी बाथरूम से बाहर आईं। अनीशा लंगड़ा कर चल रही थी। वो अब भी रो रही थी।
जब भाभी ने मुझे भी रोता देखा तो हंसने लगीं और फिर हमें समझाया कि चुदाई क्या होती है इसमें क्या-क्या होता है और ये कैसे किया जाता है। भाभी ने मुस्कुराते हुए हमारे पास बैठकर धीरे-धीरे सब कुछ विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि मर्द का लंड औरत की चूत में घुसने पर दोनों को कितना गहरा मजा आता है। चूत कितनी गीली और गरम हो जाती है। लंड अंदर-बाहर होने से फक-फक की आवाजें निकलती हैं। चोदते वक्त चूचियों को मसलना, चूमना, काटना और गांड पर थप्पड़ मारना सब शामिल होता है। उन्होंने बताया कि चुदाई में पहली बार दर्द होता है लेकिन बाद में सिर्फ़ सुख मिलता है। जब लंड चूत के अंदर जोर-जोर से हिलता है तो शरीर में सिहरन भर जाती है और अंत में गर्म-गर्म पानी जैसा रस निकलता है जिसे झड़ना कहते हैं।
फिर उसी रात को भैया बाहर चले गए थे तो मैं और अनीशा भाभी के साथ उनके कमरे में ही सो गए। कमरे में हल्की रोशनी जल रही थी। भाभी ने दोनों को नंगा कर दिया और खुद भी पूरी तरह नंगी हो गईं। भाभी ने मुझसे चुदा कर रूप को दिखाया कि कैसे मजा लिया जाता है। उन्होंने मुझे पलंग पर लिटाया और मेरे लंड को मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसा। फिर अपनी चूत मेरे लंड पर रगड़ते हुए धीरे-धीरे उसमें बिठा लिया। उनकी चूत गर्म और चिपचिपी थी। वो ऊपर-नीचे हिल रही थीं और उनकी चूचियां मेरे मुंह के पास झूल रही थीं। अब हम दोनों को भी चुदाई में मजा आने लगा था।
भाभी ने मुझे अनीशा की चूत पर चढ़ा दिया। अनीशा लेटी हुई थी। उसकी चूत अभी भी थोड़ी सूजी हुई थी लेकिन तेल लगाकर तैयार थी। मैंने अपना लंड उसके चूत के मुंह पर रखा और धीरे से दबाया। अनीशा भी दर्द सहन करके मुझसे चुद गई। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। भाभी पास बैठकर अनीशा की चूचियों को चूस रही थीं और मुझे हौसला दे रही थीं। एक बार शुरू हुई चुदाई का खेल उस रात बार-बार चला। हम तीनों ने अलग-अलग तरीके से चोदा। कभी भाभी मुझे चोदतीं तो कभी मैं अनीशा को। कभी दोनों बहनें एक साथ मेरे लंड को चूसतीं। कभी मैं भाभी को घोड़ी बनाकर चोदता तो अनीशा उनके मुंह में चूत रख देती। पसीना, रस और आहों की आवाजें कमरे में भर गई थीं।
उस दिन के बाद हम तीनों को जब भी मौका मिलता, हम तीनों अक्सर चुदाई का मजा उठाते थे। तो दोस्तों, यह कहानी मेरे पहले संभोग के अनुभव पर एकदम सच पर आधारित है। मुझे उम्मीद है आपको अच्छी और सच्ची ही लगी होगी। आपको मेरी इस सत्य घटना से कैसा लगा..
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