नमस्ते दोस्तों, आज तक अन्तर्वासना पर मैंने बहुत सारी सेक्स स्टोरी पढ़ी हैं। कुछ कहानियाँ बहुत पसंद आईं तो कुछ ठीक ठाक लगीं। लेकिन एक बात पक्की हुई कि मेरा लंड सभी कहानियों को पढ़ कर झूमा।
इस पोर्टल को देख कर मुझको भी मेरी कहानी लिखने का विचार आया लेकिन किसी वजह से लिख नहीं पाया। अब जाकर आप लोगों के सामने मेरी कहानी पेश कर रहा हूँ।
मैं पहले अपने बारे में बता देता हूँ। मेरा नाम आसिफ है। मैं पूना, महाराष्ट्र का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 24 वर्ष है। मैं हमेशा से फुर्तीला रहा हूँ। कद 6 फीट का है जिसे जिम जाकर एकदम गठीला बनाया हुआ है। रंग गेहुआ है। बातें बहुत अच्छे से करता हूँ और खुशमिजाज हूँ।
यह कहानी मेरे और मेरे चाची के बीच की है। मेरी चाची और चाचा अपनी फैमिली के साथ गाँव में ही रहते थे। मैं सिर्फ गर्मी और सर्दी की छुट्टियों में ही गाँव जाता था। मैं जब स्कूल में था तब चाचा की शादी हुई थी। इसलिए मैं जब भी चाचा के घर जाता तो चाची मेरे साथ ही वक्त बितातीं और मेरे साथ ही खेलती रहती थीं। उस वक्त तो मुझे सेक्स के बारे में कुछ खास पता नहीं था। ऐसे ही साल बीतते गए और मेरा स्कूल भी खत्म हो गया।
मैं अब गबरू जवान हो गया था। इस बार गर्मियों की छुट्टियों में सीधा गाँव अपने चाचा के घर चला गया। सबने मेरा बड़े अच्छे से स्वागत किया। अब चाची को 4 साल की लड़की और 1 साल का लड़का हो गया था। चाची का बदन अब भर गया था। वो काफी सेक्सी लग रही थीं और अब मुझे भी सेक्स के बारे में बहुत कुछ पता चल गया था। तो चाची का जिस्म मेरे आँखों के सामने से हट ही नहीं रहा था।
अरे मैं तो अपनी चाची के फिगर के बारे में आपको बताना ही भूल गया। मेरी चाची जो खुद भी पूना के एक गाँव से ही थीं। उनकी उम्र कुछ 28 के आस पास थी। चाची के बाल लंबे घने हैं और कमर तक लहराते हैं। उनके 36 इंच के नुकीले मम्मे हैं। पेट एकदम अन्दर है और गांड बाहर निकली हुई है। उनकी हाइट भी 5 फीट 5 इंच की है जिससे उनकी सुन्दरता बहुत बढ़ जाती है। चाची का रंग एकदम गुलाबी है और नैन तीखे हैं। उनकी चाल ऐसी मतवाली है कि किसी को भी घायल कर दें। उनका नाम यास्मीन है। उनकी अदाएं बहुत ही कातिलाना हैं। कुल मिलाकर चाची ऐसी माल हैं कि उनको कोई भी एक बार देख भर ले तो उसके मुँह और लंड से पानी न निकल आए तो कहना।
हुआ यूँ कि मैं गाँव गया तो सिर्फ चाची से ही बातों में लग जाता था। वैसे तो मैंने उनको पहले ऐसे नज़र से देखा नहीं था। पर एक दिन चाची और चाचा दोनों कहीं बाहर गए थे और मैं घर पर अकेला ही था। मैं बहुत बोर हुआ तो सोचा कोई किताब होगी तो देख लूँ। इसलिए मैं उनके कमरे में किताब ढूँढने लगा। पर कोई ढंग की किताब नहीं मिली तो बेड पर लेट गया। तभी मेरी नज़र अलमारी के ऊपर गई। मुझे लगा उधर कोई किताब रखी है इसलिए मैं बेड से उठा और अलमारी के पास जाकर ऊपर हाथ करके वो किताब निकाल ली।
मैंने किताब देखी तो वो कोई मैजेस्टिक नाम की मैगज़ीन थी। उसे खोल कर देखा तो मेरे सामने सिर्फ नंगे लड़के और लड़कियों की चुदाई की तस्वीरें थीं। पूरी किताब में कोई 50 से 60 तस्वीरें थीं और कुछ दसेक कहानियां भी थीं। उसे देख कर मैं बहुत उत्तेजित हो गया और मैंने पैंट में से अपना लंड निकाल कर हिलाना शुरू कर दिया। फिर कुछ ही देर में उस किताब के ऊपर ही अपना सारा माल निकाल कर निढाल होकर बेड पर पड़ा रहा। कुछ देर बाद जब याद आया कि चाचा और चाची आते होंगे तो उठ कर खुद को साफ किया और किताब को भी उसके पहले वाली जगह पर रख दिया। उस दिन चाची को मैंने गौर से देखा। उनके हर एक अंग का नाप आँखों में भर लिया।
उस रात को मैं उनके नाम की मुठ मार के सो गया। उसके अगले दिन भी ऐसा ही किया। उस किताब को पढ़ा और उसमें ही अपना माल गिरा कर वापस उसको उसकी जगह पर रख दी। यह सिलसिला कुछ 3 से 4 दिन तक ऐसे ही चला। मुझे लगा किसी को कुछ पता ही नहीं चलता।
एक दिन चाचा को किसी काम से शहर जाना था तो वो शहर में हमारे घर रुकने वाले थे। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं 2 दिन बाद ही आऊंगा तब तक सबका ध्यान रखना। मैंने भी हां में सर हिला दिया और सहमति दे दी।
चाचा चले गए। दोपहर को चाची, बच्चे और मैंने साथ में ही खाना खाया। उसके बाद चाची बच्चों को सोने के लिए लेकर गईं और थोड़ी देर बाद मेरे साथ में आकर बैठ गईं। मुझे तो इसी मौके का इंतजार था कि मैं कब चाची को अपने पास महसूस करूँ। उनके चुचे और गांड को नजदीक से देखूँ। चाची और मैं बातें करने लग गए।
आज चाची कुछ अलग लग रही थीं। उन्होंने आज गहरे गले वाला सलवार सूट पहना था। वो भी लाल रंग का। उसमें वो और भी खूबसूरत लग रही थीं। मेरा दिल तो कर रहा था कि अभी उनको पकड़ लूँ और जी भर के प्यार करूँ। पर मैं डर भी रहा था। मैं पहल नहीं करना चाहता था इसलिए चुप रहा। फिर हम दोनों में बातों का दौर शुरू हुआ।
चाची बोलीं कि तेरी कोई फ्रेंड है। मैंने कहा हां बहुत फ्रेंड हैं। चाची ने पूछा कि मेरा मतलब है कोई लड़की। मैंने कहा नहीं। मैंने चाची का मिजाज रंगीन होते हुए देखा तो पूछा। मैंने कहा चाची मैं आपसे एक बात पूछूँ। वो आपकी अलमारी के ऊपर कौन सी किताब है। चाची ने कहा कौन सी वाली। मैं भी कहां मानने वाला था। मैं सीधा कमरे में से वो किताब लेकर आया और चाची को नासमझे अंदाज में बोल दिया कि ऐसा क्या कर रहे हैं। इन्होंने कपड़े क्यों नहीं पहने। छी ये कितने गंदे लोग हैं। इन्हें शर्म नहीं आती क्या। ये क्या गंदा काम कर रहे हैं।
पर उसी समय मेरी पैंट में तंबू बन गया था। चाची को वो समझने में जरा भी देर न लगी। उन्होंने मुझसे कहा ये तुम नहीं जानते। यह प्यार कर रहे हैं। ऐसे ही प्यार करते हैं। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या तुम ये सब करके देखना चाहोगे। मैं बोला पर मेरे साथ करेगा कौन। मुझे तो ये सब नहीं आता। पहले किसी को सिखाना तो चाहिए न। इस पर चाची बोलीं अरे मैं हूँ न। मैं तुम्हें सब कुछ सिखा दूंगी पर आज रात को सब सो जाने के बाद।
अब मैं बस रात के इंतजार में था। रात हुई सबने खाना खाया। मैं रूम में जाकर बैठ गया। रात के 10 बजे होंगे तब चाची बच्चों को सुला कर मेरे कमरे में आ गईं और दरवाजा बंद कर दिया। वो बोलीं कि जिस तरह मैं बोलूँ तुम वैसे ही करना। फिर उन्होंने मुझे किस करने के लिए बोला। मैं पहली ही बार में ठीक से किस की तो वो बोलीं बहुत जल्दी सीख जाते हो। फिर हम दोनों करीब 20 मिनट तक एक दूसरे को चूमते रहे। इसी बीच उन्होंने मेरे हाथ अपने चूचों पर रख दिए और अपने खुद के हाथ से मेरा लौड़ा टटोलने लगीं। मेरा लौड़ा तो पहले से ही रॉड की तरह कड़क हुआ पड़ा था।
फिर उन्होंने मेरे और मैंने उनके कपड़े निकाल दिए। मैं धीरे धीरे चाची के पूरे शरीर को चूमने लगा। बीच बीच में उनके मम्मों को चाट भी लेता। उम्मह वाह क्या महक थी उनके अंगों की। बयान करना मुश्किल है। मैं उनके मम्मों को चूसता। कभी धीरे धीरे उनकी जांघों को सहला देता। वो भी मेरे लौड़े को मसल रही थीं और उसको सहला रही थीं।
फिर उन्होंने मुझे 69 की पोजीशन में आने को कहा। जब उन्होंने मेरा लौड़ा मुँह में लिया तो मानो मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था। उनके मुँह की गर्माहट में एक अलग ही जादू था। मेरा लंड किसी खीरे की तरह मोटा हो गया था। मैं उत्तेजना के सागर में गोते लगा रहा था। साथ ही मैं भी अपनी जीभ से उनकी चूत और गांड चाटने में लगा हुआ था।
क्या मस्त मखमली चूत थी चाची की। छोटी छोटी झांटें थीं। उनकी चूत के रस का नमकीन सा टेस्ट था। मैं जब भी चूत में अन्दर तक जीभ को ले जाता तो वह एकदम से सिहर जातीं। कभी अपने चूत के लबों को मेरे मुँह पर कभी जोर से दबा देतीं तो कभी हल्का छोड़ देतीं। इसी तरह 15 से 20 मिनट तक हमारा चाटने और चूसने का खेल चला। हम दोनों एक एक बार झड़ चुके थे।
फिर हम थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहे। चाची अपने हाथों से मेरा लंड सहला रही थीं जिस वजह से वो जल्दी ही अपनी औकात पर आ गया। मेरा लंड अब फिर से कड़क हो गया था। चाची ने मुझसे कहा जल्दी से अब इसे मुझमें घुसा दो। मुझे और तड़पाओ मत। मैंने भी उनकी बात मानी। उनको चित्त लेटा दिया और उनके सामने जाकर चुदाई की पोजीशन में हो गया। अपने लंड को चाची की चूत पर सेट किया और जोर का धक्का दे मारा। लंड लपलपाता हुआ धक्के के साथ चूत को चीरता हुआ अन्दर घुसा ही था कि उनके मुँह से एक गरम आह निकली। मैं और दबाव बढ़ा दिया।
वो थोड़ा चीखी और बोलीं अबे भोसड़ी के थोड़ा धीरे से डाल। थोड़ा थोड़ा घुसा। मादरचोद एक साथ ही पूरा मत घुसेड़। दर्द होता है। मैंने चाची के मुँह से गालियां सुनीं तो मेरा लंड और मस्त हो गया। फिर मैंने भी उनके बताए तरीके से धक्के लगाने शुरू किए।
वो धक्कों का मजा ले रही थीं। साथ ही साथ आह भरते हुए बड़बड़ा रही थीं आह चोद चोद अपनी चाची को। जोर चोद आह फाड़ दे मेरी चूत को। जब से तू आया है तब से तेरे लंड की प्यासी थी मेरी ये चुत। आह अब इसे अच्छे से चोद बेटा। इसमें बहुत खुजली होती है। आह जब भी तुझे देखती हूँ तो बस चुदने का जी करता था मेरा। आह अब इसे जी भर के प्यार कर ले। आह आह हम्म आह आह करते रह। हम्म मजा आ रहा है।
मैंने भी बोल दिया आह चाची ले। मैं तो आपके मम्मों और गांड का दीवाना हूँ। आह क्या रसीली गांड है आपकी। आह क्या मस्त चुचे हैं। आह मजा आ गया मेरी जान। आज तो आज मैं पहली बार किसी को चोद रहा हूँ। आह कसम से क्या सुख है इसमें। जन्नत है जन्नत चाची आपकी चूत बहुत मस्त है।
मैंने चाची को 4 पोजीशनों में 15 से 20 मिनट तक हचक कर चोदा। जिसके बीच में ही चाची एक बार झड़ चुकी थीं। फिर एक सैलाब आया और हम दोनों साथ में ही झड़ गए। मैंने मेरा पूरा माल चाची की चूत में ही छोड़ दिया और ऐसे ही निढाल हो कर उन पर पड़ा रहा। करीब 5 मिनट बाद हम अलग हुए। चाची ने मुझे खूब प्यार किया।
उस रात मैंने और चाची ने मिलकर 2 बार और चुदाई की और फिर हम सो गए। उसके दूसरे दिन भी जमकर चाची की चुदाई की। फिर चाचा शहर से आ गए तो 2 दिन बाद मैं भी घर वापस आ गया।
इस तरह चाची की चूत की आग और मेरी कामवासना की संतुष्टि हुई। अब तो जब भी मौका मिलता है तो हम दोनों चुदाई का मजा करते हैं। चाची की मदद से कैसे उनकी बहन की सील तोड़ी वो भी आपको बताऊंगा जिसके बदले उन्होंने अपनी गांड भी मुझसे मरवाई। यह सब आपको बताऊंगा।
Related Posts