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पति के घर में छुपकर पुराने यार से चुदाई की

Meri randi biwi sex story – Cheating wife sex story – Cuckold sex story: दोस्तों, बहुत दिन हो गए थे जब मैंने कोई नई कहानी लिखी थी, लेकिन आप लोगों के मेल और कमेंट्स पढ़कर दिल में फिर से वही जोश जग जाता है कि कुछ लिखूं और आपके साथ शेयर करूं। पिछली बार आपने मेरी बीवी स्वाति के बारे में पढ़ा था कि कैसे वो मेरे ऑफिस की सबसे बड़ी रंडी बन चुकी थी, जहां उसे किसी भी मर्द से मेरे सामने चुदवाने में अब बिल्कुल भी शर्म नहीं आती थी। कई बार तो विजय सर घर आते और मुझे सामने खड़ा करके स्वाति की चूत चटवाते, उसके बाद कभी-कभी शराब के नशे में मुझे उनका मोटा लंड भी चुसवाते, और स्वाति तब मुझे गालियां देकर ताने मारती कि ओए गांडू, चूत चाट भोसड़ी के, साले अपने बॉस की इज्जत कर, इनके लंड की वजह से ही तो तेरी तनख्वाह आती है और घर चलता है। अब स्वाति का रंडीपन इतना खुल चुका था कि वो किसी भी मौके पर तैयार रहती थी, लेकिन इस बार की कहानी थोड़ी अलग है, क्योंकि इसमें उसने छुप-छुपाकर मजा लिया, जैसे पुराने दिनों की यादें ताजा कर रही हो।

कहानी का पिछला भाग: पत्नी ऑफिस की सार्वजनिक रंडी बनी

यह एक सीरीज है, इस सीरीज की पहली कहानी: बीवी की चूत की सर्विसिंग

ये कहानी है स्वाति के पुराने यार अमित की, जो मुंबई में रहता है और एक अच्छी कंपनी में जॉब करता है। अमित तीस साल का है, लंबा चौड़ा कद, गोरा रंग लेकिन काला सा लंड जो मोटा और लंबा है, जैसे कोई सांड का। स्वाति के कॉलेज के दिनों का बॉयफ्रेंड था ये, तब दोनों घंटों फोन पर बातें करते, मिलते और चुदाई के खेल खेलते। शादी के बाद भी वो कभी-कभी फोन पर बातें कर लेते, एक-दूसरे की यादों में खो जाते, और मिलने की प्लानिंग बनाते रहते, लेकिन कभी मौका नहीं मिला। अमित की आवाज में वही पुरानी शरारत होती थी, जो स्वाति को गीला कर देती थी।

एक शनिवार की शाम को अचानक अमित का फोन स्वाति के मोबाइल पर आया, और मैं ठीक उसके पास सोफे पर बैठा टीवी देख रहा था, जहां से हर शब्द साफ सुनाई दे रहा था। स्वाति ने फोन उठाया और स्पीकर पर रख दिया ताकि मैं भी सुन सकूं। अमित की आवाज आई, जो थोड़ी थकी लेकिन उत्साहित लग रही थी, बोला कि स्वाति मैं तुम्हारे शहर में हूं, कल एक इंटरव्यू है, आज रात और कल शाम तक यहीं रुकूंगा, मिलना चाहता हूं, बाहर कहीं डिनर करेंगे, ताकि पुरानी यादें ताजा हो जाएं। उसकी आवाज में वो गर्माहट थी जो स्वाति को हमेशा पिघला देती थी, और मैंने देखा कि स्वाति की आंखों में चमक आ गई, उसके होंठों पर हल्की मुस्कान खेलने लगी।

स्वाति ने मेरी तरफ देखा, मैंने हां में सिर हिला दिया क्योंकि मुझे लगा कि घर पर ही मिल लेते हैं, क्या बुराई है। वो मुस्कुराकर बोली कि बाहर क्यों, घर पर ही आ जाओ अमित, घर में ही डिनर करेंगे, समीर भी है, सब साथ में खाएंगे, बातें करेंगे, और मजा आएगा। अमित खुश हो गया, उसकी आवाज में जोश आ गया, बोला कि ठीक है, शाम आठ बजे पहुंचता हूं, और फोन रख दिया। स्वाति ने फोन रखा और किचन में चली गई, लेकिन मैंने देखा कि उसके कदमों में एक अलग सी लचक थी, जैसे वो पहले से ही अमित के आने की कल्पना में खो गई हो।

शाम ठीक आठ बजे डोरबेल बजी, और मैंने दरवाजा खोला। अमित सामने खड़ा था, ब्लैक शर्ट और जींस में, जो उसके मजबूत बदन पर फिट बैठ रही थी, हाथ में एक छोटा सा बैग था, जिसमें उसके कपड़े और सामान थे। उसकी आंखों में वो पुरानी शरारत थी, और चेहरे पर मुस्कान जो बताती थी कि वो स्वाति से मिलने के लिए कितना उतावला है। मैंने उसे अंदर बुलाया, और वो सोफे पर बैठ गया, जहां से किचन का नजारा साफ दिखता था। स्वाति किचन में थी, नीली साड़ी पहने हुए जो उसके गोरे बदन पर चमक रही थी, ब्लाउज इतना टाइट कि उसके बड़े बोबे उभरे हुए लग रहे थे, साड़ी का पल्लू थोड़ा सा सरका हुआ था, और बाल खुले जो उसकी कमर तक लहरा रहे थे। वो अमित को देखकर मुस्कुराई, उसकी आंखों में वो गर्माहट थी जो अमित को बुला रही थी, और बोली कि आओ अमित, बैठो, पानी लाती हूं, और वो पानी का ग्लास लेकर आई, झुककर रखा तो उसके ब्लाउज से बोबों की झलक दिख गई, जो अमित की आंखों को चुभ गई।

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हम तीनों सोफे पर बैठकर बातें करने लगे, अमित ने बताया कि वो अभी होटल नहीं गया है, इधर से जाने के बाद देखेगा, लेकिन रात हो चुकी है। उसकी आवाज में थकान थी, लेकिन स्वाति की तरफ देखते हुए उसकी आंखें चमक रही थीं, जैसे वो उसके बदन को छूने की कल्पना कर रहा हो। मैंने कहा कि अरे होटल में रात को रूम मिलना मुश्किल है, आज रात यहीं रुक जाओ, गेस्ट रूम है, आराम से सो जाना। अमित ने शुक्रिया कहा, और हम सबने साथ में डिनर किया। स्वाति ने बहुत अच्छा खाना बनाया था, मसालेदार चिकन करी, गर्म रोटियां, और सलाद, जिसकी खुशबू पूरे घर में फैली हुई थी। अमित तारीफ करता रहा कि स्वाति तू तो वही पुरानी स्वाद वाली बनी हुई है, और स्वाति हंसकर बोली कि हां अमित, तेरे लिए तो स्पेशल बनाया है, और दोनों की आंखों में वो नजरें मिल रही थीं जो मुझे थोड़ा असहज कर रही थीं।

खाने के बाद अमित गेस्ट रूम में चला गया, बोला कि इंटरव्यू की तैयारी करनी है, थोड़ा पढ़ लूंगा, और दरवाजा बंद कर लिया। मैं और स्वाति हॉल में अकेले हो गए, और शनिवार की रात मेरे लिए हमेशा मतलब होता था लेट नाइट सेक्स का, जहां मैं स्वाति को पकड़कर उसके बदन का मजा लेता। मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया, उसकी कमर में हाथ डाले, जहां उसकी साड़ी की सिलवटें छूने से गर्माहट महसूस हो रही थी, और बोबे दबाने लगा, जो मुलायम और भरे हुए थे, निप्पल सख्त हो चुके थे। स्वाति भी साथ देने लगी, उसकी सांसें तेज हो गईं, वो मेरे लंड पर हाथ फेर रही थी, जो पैंट में तन चुका था, और उसकी उंगलियां इतनी नरम थीं कि मुझे और जोश आ रहा था। मैंने उसे सोफे पर लिटाया, किस करने लगा, उसके होंठों का स्वाद मीठा था, जैसे शहद की तरह, और जीभ से जीभ मिलाकर चूसने लगा, जबकि मेरे हाथ उसके ब्लाउज के अंदर घुसकर निप्पल मसल रहे थे, जो सख्त होकर उभर आए थे। स्वाति की कराहें निकल रही थीं, आह्ह.. समीर.. और जोर से.. उसके बदन से पसीने की हल्की खुशबू आ रही थी, मिश्रित उसकी परफ्यूम से, जो मुझे मदहोश कर रही थी।

तभी अमित पानी लेने बाहर आया, और उसने हमें देख लिया, जहां मैं स्वाति के ऊपर था, उसके बोबे दबा रहा था। हम दोनों झटके से अलग हुए, मेरी सांसें तेज थीं, और स्वाति का चेहरा लाल हो गया। अमित ने जैसे कुछ नहीं देखा, स्वाति से बोला कि पानी मिलेगा, और स्वाति पानी लेने गई, उसकी गांड हिलती हुई, जो अमित की नजरों में कैद हो गई। अमित उसकी गांड देखकर अपना लंड पैंट के ऊपर से सहलाने लगा, जो उभर चुका था, और उसकी आंखों में लालसा साफ दिख रही थी। फिर वो पानी पीकर वापस कमरे में चला गया, लेकिन मैं जानता था कि वो अब और उतावला हो चुका है।

मैंने स्वाति को उठाकर बेडरूम में ले जाया, लेकिन जल्दबाजी में दरवाजा बंद करना भूल गया। लाइट बंद की, जहां अंधेरे में सिर्फ बाहर से हल्की रोशनी आ रही थी, और स्वाति के सारे कपड़े उतारे, उसकी साड़ी फर्श पर गिर गई, ब्लाउज खुला तो बोबे बाहर आ गए, गोरे और रसीले, निप्पल गुलाबी। वो नंगी होकर बिस्तर पर लेट गई, उसकी चूत पहले से गीली थी, जहां से हल्की गर्माहट और नमी महसूस हो रही थी। मैंने उसे डॉगी स्टाइल में पकड़ा, उसकी गांड को सहलाया, जो नरम और भरी हुई थी, उंगलियां उसकी गांड की दरार में फिसलीं, और फिर लंड डाला उसकी चूत में, जो गर्म और टाइट लग रही थी, धक्के मारने लगा, लेकिन दो मिनट में ही मेरा झड़ने लगा, क्योंकि अमित को देखकर मेरा जोश ज्यादा था। मैंने कहा कि स्वाति मुंह में ले ले, और वो नाराज हो गई, बोली कि इतनी जल्दी, इससे अच्छा तो उंगली से काम चला लूं, लेकिन फिर नीचे बैठी, मेरा लंड मुंह में लिया, उसके होंठों की गर्माहट और जीभ की चालाकी से मैं और उत्तेजित हो गया। तभी मैंने दरवाजे की तरफ देखा, अमित खड़ा था, अपना लंड बाहर निकालकर हिला रहा था, उसका लंड काला और मोटा चमक रहा था अंधेरे में। उसे देखकर मुझे और जोश आया, मैंने स्वाति के मुंह को चूत समझकर जोर-जोर से चोदा, ग्ग्ग्ग.. गी.. गों.. की आवाजें आ रही थीं, और एक मिनट में मुंह में ही झड़ गया, माल गरम और चिपचिपा उसके गले में उतर गया।

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स्वाति नाराज होकर लेट गई, अपनी चूत में उंगली करने लगी, उसकी उंगलियां गीली चूत में फिसल रही थीं, और वो कराह रही थी, आह्ह.. इह्ह.. अभी भी प्यासी हूं। मैं सो गया, लेकिन आधा घंटा बाद नींद खुली, स्वाति बिस्तर पर नहीं थी। मैं उठा, किचन की तरफ गया, जहां हल्की रोशनी जल रही थी, लेकिन किचन खाली था। तभी गेस्ट रूम से फुसफुसाहट सुनाई दी, जो मेरे कानों में गूंज रही थी।

अमित कह रहा था कि देख न, मेरा पकड़ लिया है तो अब देख, ये तेरे पति की लुल्लू से कितना बड़ा और काला सांड जैसा लंड है, और उसकी आवाज में वो लालसा थी जो स्वाति को और गर्म कर रही थी। स्वाति हंसकर बोली कि हां अमित, बहुत दिन हो गए थे इसे चखे हुए, चोद ना इस रंडी को, किसने मना किया है, और उसके हाथ में अमित का लंड था, जो वो सहला रही थी, गर्म और सख्त। अमित बोला कि साले ने तुझे खुश नहीं रखा, मैं तेरी चूत को शांति दूंगा, मेरी रंडी बन जा, और उसने स्वाति की चूत में उंगली डाली, जो गीली और गर्म थी, उंगली अंदर-बाहर करने से चपचप की आवाज आ रही थी। स्वाति कराह उठी, आह्ह.. अमित.. और जोर से.. तेरी उंगली कितनी मोटी है.. और दोनों के बदन से पसीने की खुशबू फैल रही थी कमरे में। मैं गुस्से से जल रहा था, लेकिन कुछ कर नहीं पाया, क्योंकि मेरा खुद का लंड फिर तन रहा था ये सब सुनकर। मैंने आवाज लगाई कि डार्लिंग किचन में हो क्या, ताकि वो सावधान हो जाएं।

एक मिनट बाद अमित बोला कि समीर अंदर आ जाओ, और मैं अंदर गया। अमित कुर्सी पर बैठा था, टेबल के नीचे स्वाति घुटनों पर थी, उसका लंड मुंह में लिए हुए, ग्ग्ग्ग.. गी.. गों.. चूस रही थी, उसके होंठ अमित के लंड पर फिसल रहे थे, और अमित का माल उसके मुंह में उतरने वाला था। अमित बोला कि कल के इंटरव्यू की तैयारी कर रहा हूं, और उसकी आवाज कांप रही थी। मैं जानबूझकर बातें करने लगा, ताकि देख सकूं। अचानक अमित की आंखें बंद हो गईं, आह्ह.. आह्ह.. वो टेबल के नीचे स्वाति के मुंह में झड़ गया, माल गरम और गाढ़ा उसके गले में उतर गया, और स्वाति ने सब चाट लिया, उसके होंठों पर बूंदें चमक रही थीं। अमित बोला कि किसी मच्छर ने काट लिया पैर में, साला हरामी है, और हंस पड़ा, फिर मुझे जाने को बोला।

पांच मिनट बाद स्वाति भी कमरे में आई, उसके होंठ सूजे हुए थे, मुंह से अमित के माल की हल्की महक आ रही थी, और वो सो गई। मैं चुप रहा, क्योंकि अगर कुछ कहता तो वो रात में अपना नंग नाच शुरू कर देती।

सुबह मैं उठा, स्वाति बाथरूम में नहा रही थी, जहां से पानी की आवाज आ रही थी। मैं बाहर अखबार पढ़ रहा था, लेकिन कल रात का सीन दिमाग में घूम रहा था, अमित के लंड की याद और स्वाति की कराहें। तभी बाथरूम से आवाजें आईं, आह्ह.. आह्ह्ह.. ओह्ह अमित.. जोर से.. और मैं समझ गया कि अमित अंदर है, स्वाति की चूत में उंगली या लंड डालकर फोरप्ले कर रहा है। मैंने आवाज दी कि स्वाति क्या हुआ, और वो बोली कि कुछ नहीं, पानी ठंडा है तो आवाज निकल गई, लेकिन उसकी आवाज कांप रही थी।

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दस मिनट बाद स्वाति बाहर आई, सिर्फ तौलिया लपेटे, जो गीला था और उसके बदन से पानी की बूंदें टपक रही थीं, उसके बोबे उभरे हुए दिख रहे थे। वो मेरे पास आई, तौलिया गिराया, उसका नंगा बदन चमक रहा था, गीली चूत से अमित का माल टपक रहा था, और मुझे किस किया, उसके होंठ गर्म थे, जीभ से जीभ मिलाकर चूसने लगी। फिर मेरा हाथ अपनी चूत पर रखा, बोली कि कल रात का पानी अभी तक गीला है शायद, और वो गीली चूत मेरी उंगलियों पर फिसल रही थी, चिपचिपी और गर्म। वो मुझे बेडरूम में ले गई, जहां अमित बाथरूम से निकलकर गेस्ट रूम में चला गया होगा। स्वाति ने मुझे एक और किस किया, उसके बोबे मेरे सीने से दब रहे थे, और कपड़े पहनने लगी, लेकिन उसकी आंखों में वो संतुष्टि थी जो अमित ने दी थी।

नाश्ते पर हम तीनों बैठे, टेबल पर चाय की खुशबू फैली हुई थी, स्वाति दाईं तरफ, अमित बाईं तरफ। खाते वक्त स्वाति ने टेबल के नीचे अमित का लंड पकड़ लिया और हिलाने लगी, उसका हाथ अमित की पैंट में घुसा था, लंड को सहला रही थी, जो सख्त हो रहा था। मैंने नाटक किया कि बॉस का कॉल है और छत पर चला गया, लेकिन आधी सीढ़ी पर बैठकर देखने लगा, जहां से सब साफ दिख रहा था लेकिन मैं छुपा था।

मेरे जाते ही अमित ने स्वाति को किस करना शुरू किया, उसके होंठों को चूसते हुए, जीभ अंदर डालकर, और हाथ उसके बोबों पर, जो ब्लाउज के ऊपर से मसल रहा था, निप्पल पिंच कर रहा था। स्वाति की कराहें निकल रही थीं, आह्ह.. अमित.. तेरे हाथ कितने रफ हैं.. और जोर से दबा.. दो मिनट में ही उसने स्वाति को डाइनिंग टेबल पर घोड़ी बनाया, साड़ी ऊपर उठाई, निक्कर नीचे करके पीछे से लंड पेल दिया, जो गीली चूत में फिसलकर अंदर चला गया। स्वाति बोली कि यहां नहीं, समीर आ जाएगा, लेकिन उसकी आवाज में जोश था। अमित बोला कि उस नल्ले को आने दे, उसे पता चले कि असली मर्द जब आता है तो तेरी बीवी झुककर गांड से स्वागत करती है, और वो जोर-जोर से धक्के मारने लगा, टेबल हिलने लगी, स्वाति की चूत से चपचप की आवाज आ रही थी, आह्ह.. अमित.. कितना मोटा है.. पेलो जोर से.. मेरी चूत फाड़ दो.. उसके बोबे हिल रहे थे, पसीना चू रहा था।

दस मिनट तक धकाधक चोदने के बाद अमित ने उसे उठाया और हमारे बेडरूम में ले गया, जहां बिस्तर पर लिटाया, उसके बोबों को चूसने लगा, निप्पल काटते हुए, और नीचे हाथ से चूत सहला रहा था, उंगली अंदर डालकर घुमा रहा था। स्वाति कराह रही थी, आह्ह.. ऊईई.. अमित.. और जोर से.. तेरे लंड ने तो भोसड़ा बना दिया.. फिर अमित ने चोदना शुरू किया, जोर-जोर से धक्के, स्वाति की चूत से गर्माहट और नमी फैल रही थी, बदन से पसीने की महक। फिर अमित ने स्वाति का मुंह चोदा, जैसे मैंने कल रात किया था, ग्ग्ग्ग.. गी.. गों.. स्वाति गले तक ले रही थी, उसके होंठ फिसल रहे थे। कुछ मिनट बाद मुंह में झड़ गया, माल गरम और गाढ़ा उसके मुंह में उतर गया। स्वाति ने सब चाट लिया, उम्म.. कितना गरम माल.. अगली बार सिर्फ मेरी चुदाई के लिए आना.. वरना मैं तेरे शहर आकर समीर को चकमा देकर तुझसे चुदवा लूंगी।

दोनों हंस पड़े, और अमित चला गया। स्वाति ने कहा कि आते रहना, मजा लेते रहना।

ऐसा था मेरी रंडी बीवी का एक और कारनामा।

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