भांजी की चुत की सफाई

Kuwari Bhanji ki chudai sex story, Mama ne choda sex story: मेरा नाम करुना है। अभी मेरी उम्र 24 साल की है। अभी तक कुवारीं हूँ। लेकिन इसका मतलब ये नहीं की मैं कुँवारी चूत वाली हूँ। ये तभी चुद गयी थी जब मेरी उम्र 18 साल हुई थी।

तब मैं बारहवीं कक्षा में पढ़ती थी। उस दिन घर में मेरी मम्मी भी नहीं थी। मैं और मेरा भाई जो कि मुझसे छोटा था, घर पर अकेले थे। उस दिन स्कूल की छुट्टी थी। इसलिए मैं घर के काम कर रही थी। मेरा छोटा भाई पड़ोस में खेलने चला गया था। मैं बाथरूम में नहाने चली गई। अपने सारे कपड़े मैंने हॉल में ही छोड़ दिए और पूरी तरह नंगी होकर बाथरूम में प्रवेश कर गई।

क्योंकि घर में कोई और नहीं था, इसलिए किसी के देखने का बिल्कुल भी डर नहीं था। मैंने शावर खोल लिया और गुनगुने पानी की बौछारों के नीचे खड़ी हो गई। पानी मेरे कंधों, मेरी छातियों और मेरी कमर से नीचे बह रहा था। मैंने अपनी उँगलियों को पहले अपनी गर्दन पर फिराया, फिर धीरे-धीरे नीचे अपनी भरी हुई छातियों पर ले आई। मेरे गुलाबी निप्पल पहले से ही सख्त हो चुके थे। मैंने उन्हें हल्के से पिंच किया, जिससे एक मीठी सी सिहरन मेरे पूरे शरीर में दौड़ गई।

फिर मेरी दायीं हाथ धीरे-धीरे मेरी नाभि के नीचे सरकने लगी। मैंने अपनी चूत के ऊपरी हिस्से पर उँगलियों से हल्के-हल्के घुमावदार गति से सहलाना शुरू किया। मेरी चूत की त्वचा पहले से ही गीली और गर्म हो चुकी थी। जैसे ही मैंने अपनी क्लिटोरिस को छुआ, एक तेज झटका सा लगा और मेरी साँसें तेज हो गईं। मैंने अपनी मध्यमा उँगली को अपनी चूत की दरार में डाल दिया। उँगली आसानी से अंदर चली गई क्योंकि मैं पहले से ही बहुत गीली हो चुकी थी। अंदर की गर्म, नरम और गीली दीवारें मेरी उँगली को लपेट रही थीं। मैंने उँगली को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर बार जब उँगली अंदर जाती, मुझे अपनी चूत की गहराई में एक सुखद दबाव महसूस होता।

मुझे लगा कि अभी भी बहुत जगह खाली है। मैंने बाथरूम में रखा हुआ पुराना टूथब्रश उठाया। उसका हैंडल पतला लेकिन काफी लंबा और चिकना था। मैंने उसे उलटकर पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर रखा। पहले मैंने सिर्फ हैंडल का सिरा अपनी क्लिटोरिस पर रगड़ा। ठंडा प्लास्टिक मेरी गर्म और संवेदनशील त्वचा पर छूने से एक अलग ही सिहरन हुई। फिर मैंने धीरे से दबाव बढ़ाया और हैंडल को अपनी चूत में प्रवेश कराना शुरू किया। पहले सिर्फ एक इंच, फिर दो इंच, और धीरे-धीरे और गहराई तक। मेरी चूत की दीवारें हैंडल को कसकर पकड़ रही थीं। मैंने अपनी दोनों टांगों को पूरी तरह फैलाकर जमीन पर बैठ गई। मेरी पीठ दीवार से टिकी हुई थी और मेरी टांगें चौड़ी खुली हुई थीं।

Bhanji ki chut me brush
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अब मैं हैंडल को पूरी तरह से अंदर-बाहर करने लगी। हर बार जब हैंडल अंदर जाता, मेरी चूत से चिकचिक की हल्की आवाज निकलती। मेरी साँसें तेज और भारी हो गई थीं। इतना ज्यादा आनंद आ रहा था कि मेरी मूत्राशय पर दबाव पड़ने लगा। अचानक एक गर्म धारा मेरी चूत से निकलकर हैंडल के साथ बाहर बहने लगी। मैं पेशाब कर रही थी लेकिन रुक नहीं पा रही थी। पेशाब की गर्म धारा मेरे हाथों, मेरी जांघों और फर्श पर गिर रही थी। मैंने हैंडल को और तेजी से चलाना जारी रखा। लगभग आधे घंटे तक मैंने इसी तरह मजे लिए। कभी मैंने शैंपू की कुछ बूंदें अपनी चूत पर डालीं और उँगलियों से फैलाकर चिकनाहट बढ़ाई। कभी नारियल तेल लिया और उसे अपनी चूत में डालकर हैंडल के साथ मिलाया। तेल की चिकनाहट से हैंडल और आसानी से अंदर-बाहर होने लगा। मैं बार-बार अपनी चूत की अंदरूनी दीवारों को रगड़ती रही, अपनी जी-स्पॉट पर दबाव डालती रही। मेरी छातियाँ उछल रही थीं, मेरे निप्पल और भी सख्त हो गए थे।

थोड़ी देर बाद मैंने नहाकर खुद को साफ किया और वापस अपने कमरे में आ गई। थोड़ी देर के बाद मेरा छोटा भाई भी बाहर से आ गया।

उसी शाम मेरी मम्मी के दूर के रिश्ते में भाई लगने वाले एक रिश्तेदार मेरे यहाँ आ धमका। उसकी उम्र रही होगी कोई 20-21 साल की। उनको मेरी मम्मी से कुछ काम था। लेकिन मम्मी तो कल शाम में आने वाली थी। मैंने मम्मी को फोन करके उसके बारे में बताया तो मम्मी बोली आज रात को उसे अपने घर में ही रुकने के लिए बाहरी कमरा दे देना।

रात को खाना-पीना खाकर सभी चुपचाप सो गए। रात 11 बजे मुझे पेशाब लग गया। मैं बाथरूम गई तो मुझे फिर से वही सुबह वाली घटना याद आ गई। मुझे फिर से अपने बुर में ब्रश डालने का मन करने लगा। मैंने अपने सारे कपड़े खोल कर अपने बुर में ब्रश डाल कर मजे लेने लगी। मुझे अपने बाथरूम का दरवाजा बंद करने का भी याद नहीं रहा। मैं दीवार की तरफ मुंह करके अपने चूत में ब्रश डाल कर मजे ले रही थी।

तभी पीछे से आवाज आई – ये क्या कर रही हो करुना?

ये सुनकर मैं चौंक गई। मेरे हाथ में अभी भी ब्रश था, और मैं घुटनों के बल बैठी हुई बाथरूम की टाइलों पर झुकी हुई थी। मैंने तुरंत पलटकर देखा तो मेरा मामू नरेश ठीक मेरे पीछे खड़ा था। उसने सिर्फ एक सफेद तौलिया अपनी कमर के चारों ओर लपेट रखा था, जो इतना ढीला था कि बस-बस गिरने को था। उसकी चौड़ी छाती पर पानी की बूंदें अभी भी चमक रही थीं, और उसकी मजबूत जांघों पर भी नहाने के बाद की हल्की नमी दिख रही थी।

मैंने हड़बड़ी में कहा – आप यहां क्या कर रहे हैं मामू?

वो शांत स्वर में बोला – मुझे पेशाब लगा था इसलिए मैं यहां आया था, तो देखा कि तुम कुछ कर रही हो। मैं अब क्या कहूं क्या नहीं?

मेरे गालों पर लालिमा छा गई। हड़बड़ी में मैंने तपाक से कह दिया – देखते नहीं, ये साफ कर रही हूं। इसकी सफाई भी तो जरूरी है न? वैसे तुम यहां पेशाब करने आए हो ना, तो करो और जाओ।

उसने मेरी ओर देखते हुए कहा – मैं तो यहां पेशाब करने आया था।

मैंने जल्दी से कहा – ठीक है, तुम तब तक पेशाब करो, मैं अपना काम कर रही हूं।

दरअसल मेरे मन में एक ही बात चल रही थी – मैं उसका लंड देखना चाहती थी। सोच रही थी कि जब इसने मेरा चूत देख लिया है, तो मैं भी इसके लंड को देखकर हिसाब बराबर कर लूं। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, और मेरी सांसें तेज हो गई थीं।

नरेश ने फिर पूछा – तुम यहीं रहोगी?

मैंने थोड़ी सख्त आवाज में कहा – हां। तुम्हें इससे क्या? ये मेरा घर है। मैं कहीं भी रहूं।

उसने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा – ठीक है।

और फिर उसने अपनी कमर पर लिपटा हुआ तौलिया धीरे-धीरे खोल दिया। तौलिया फर्श पर गिरा, और वो पूरी तरह नंगा मेरे सामने खड़ा हो गया। उसका लंड मेरी आंखों के ठीक सामने था। मेरे अनुमान से कहीं ज्यादा मोटा और लंबा। उसकी चमड़ी हल्की गुलाबी थी, और लंड का सिरा अभी भी थोड़ा सिकुड़ा हुआ था, लेकिन उसकी मोटाई देखकर मेरी सांस रुक सी गई। वो किसी मोटे सांप की तरह ढीला-ढाला झूल रहा था, और नीचे लटके हुए भारी अंडकोष हल्के से हिल रहे थे। उसके लंड के ऊपर काले, घने बाल थे जो जड़ तक फैले हुए थे।

वो मेरे ठीक सामने वाले कमोड पर धीरे से बैठ गया। उसकी जांघें फैल गईं, और लंड अब भी नीचे लटक रहा था। उसने दाहिने हाथ से अपने लंड को पकड़ा – उसकी उंगलियां पूरी तरह उसके मोटे तने के चारों ओर नहीं लपेट पा रही थीं। उसने लंड को थोड़ा ऊपर उठाया, सिरे को हल्का सा दबाया, और फिर पेशाब की धार निकलने लगी। सुनाई देने लगा – छर्र… छर्र… की तेज आवाज, जैसे कोई मोटी नली से पानी तेजी से निकल रहा हो। पीले रंग की धार कमोड के पानी में जा गिर रही थी, और उसकी तीखी गंध हवा में फैल गई। मैं चुपचाप देखती रही कि इतने मोटे और मांसल लंड से इतनी जबरदस्त धार कैसे निकल रही है। पेशाब की धार बीच-बीच में थोड़ी रुकती, फिर फिर तेज हो जाती।

आखिरकार जब पेशाब खत्म हुआ, तो उसने लंड को दो-तीन बार जोर से झाड़ा। लंड का सिरा हिलता हुआ कुछ बूंदें फर्श पर गिरा गया। फिर उसने उसी हाथ से लंड को सहलाना शुरू किया – धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करते हुए, जैसे उसे जगा रहा हो। लंड अब थोड़ा सख्त होने लगा था, सिरा बाहर निकल आया और उसकी चमड़ी पीछे खिंचने लगी।

उसने मेरी ओर देखकर पूछा – तुम अपने चूत की सफाई ब्रश से करती हो?

मैंने हल्के से सिर हिलाते हुए कहा – हां।

उसने फिर पूछा – क्या तुम अपने चूत के बाल भी साफ करती हो?

मैंने थोड़ा हैरान होकर कहा – चूत के बाल? मेरे चूत में बाल तो नहीं हैं।

वो मुस्कुराया और बोला – चूत के अंदर नहीं, चूत के ऊपर बाल होते हैं। जैसे मेरे लंड के ऊपर बाल हैं ना, उसी तरह।

कहते हुए उसने अपने लंड के ऊपर वाले घने काले बालों को उंगलियों से पकड़ा और हल्का सा खींचा। बाल खिंचने की हल्की सी आवाज आई, और उसके लंड का तना हल्का सा उछला।

मैंने उत्सुकता से पूछा – तुम्हारे लंड पर ये बाल कैसे हो गए हैं?

वो बोला – जब तुम बड़ी हो जाओगी तो तुम्हारे चूत पर भी बाल हो जाएंगे।

मैंने उसकी ओर देखते हुए कहा – तुम्हारा लंड तो इतना बड़ा है कि लटक रहा है। क्या मेरा बुर भी बड़ा होने पर इतना ही बड़ा और लटकने लगेगा?

वो हंस के बोला – अरे नहीं पगली, भला बुर भी कहीं लटकता है? हां वो कुछ बड़ा हो जाएगा।

फिर बोला – तुम एक जादू देखोगी? अगर तुम मेरे इस लंड को छुओगी तो ये कैसे और भी बड़ा और खड़ा हो जाएगा।

मुझे बहुत ही आश्चर्य हुआ। मेरी आंखें फैल गईं, और दिल की धड़कनें और तेज हो गईं। मैं अभी भी घुटनों के बल बैठी हुई थी, ब्रश मेरे हाथ में था, लेकिन अब सारा ध्यान उसके लंड पर केंद्रित हो गया था।

मैंने उत्सुकता और थोड़े डर के मिश्रण से कहा – ठीक है। दिखाओ जादू।

वो कमोड पर से धीरे-धीरे उठ गया। उसकी नंगी जांघें फैली हुई थीं, और लंड अब भी आधा सख्त होकर थोड़ा ऊपर की ओर उठ रहा था। वो मेरे ठीक सामने आ खड़ा हुआ, इतने करीब कि मुझे उसकी शरीर की गर्मी महसूस हो रही थी। उसने दाहिने हाथ से अपने लंड को बीच से पकड़ा, उंगलियां उसके मोटे तने के चारों ओर लपेटकर, और थोड़ा सा ऊपर उठाकर कहा – अब इसको छुओ।

मैंने धीरे से अपना दायां हाथ आगे बढ़ाया। मेरी उंगलियां कांप रही थीं। जैसे ही मेरी हथेली उसके लंड के गरम, मुलायम लेकिन सख्त हो रहे तने को छुई, मुझे लगा जैसे कोई जीवित, गरम सांप मेरे हाथ में आ गया हो। उसकी चमड़ी इतनी नरम और गर्म थी कि मेरी उंगलियां उस पर फिसल रही थीं। लंड का वजन मेरे हाथ में महसूस हो रहा था – भारी, मांसल, और नीचे से ऊपर की ओर धीरे-धीरे फूल रहा था।

उसने तुरंत मेरे हाथ को अपने बाएं हाथ से ढक लिया, अपनी उंगलियों से मेरी उंगलियों को दबाया, और धीरे-धीरे मेरे हाथ को ऊपर-नीचे करने लगा। उसकी हथेली मेरी हथेली पर थी, और वो मेरे हाथ को गाइड कर रहा था – पहले धीरे-धीरे, फिर थोड़ा तेज। लंड मेरे हाथ में और सख्त होता जा रहा था। मैं महसूस कर रही थी कि उसका तना फूल रहा है, नसें उभर रही हैं, और सिरा अब पूरी तरह बाहर निकल आया था – गुलाबी, चमकदार, और थोड़ा गीला।

थोड़ी ही देर में मैंने देखा कि उसका लंड अब सांप से किसी लकड़ी के टुकड़े जैसा हो गया था – एकदम कड़ा, सीधा खड़ा, और इतना मोटा कि मेरी उंगलियां पूरी तरह चारों ओर नहीं लपेट पा रही थीं। लंबाई अब मेरे हाथ से काफी बाहर निकल रही थी, और सिरे पर एक छोटी सी बूंद चमक रही थी।

उसे बड़ा ही आनंद आ रहा था। उसकी सांसें तेज और भारी हो गई थीं, छाती ऊपर-नीचे हो रही थी, और मुंह से हल्की-हल्की कराह निकल रही थी। अचानक उसने मेरा हाथ छोड़ दिया, लेकिन मैं रुक नहीं पाई। मैं उसके लंड को खुद ही घसती रही – अब मेरी उंगलियां उसके तने पर फिसल रही थीं, ऊपर से नीचे, फिर नीचे से ऊपर। मैं सिरे को हल्का सा दबा रही थी, और फिर पूरी लंबाई को सहला रही थी। उसका लंड मेरे हाथ में और सख्त हो रहा था, जैसे लोहे की छड़ हो।

थोड़ी देर में मैंने देखा कि उसके लंड के सिरे से चिपचिपा, पारदर्शी सा पानी निकल रहा था – धीरे-धीरे, बूंद-बूंद करके। वो शेम्पू की तरह गाढ़ा और चिकना था, मेरी उंगलियों पर फैल रहा था, और उसकी चमक बढ़ा रहा था। वो जोर-जोर से कराहने लगा – “आह्ह… हाय… करुना…” उसकी आवाज भारी और कांपती हुई थी। उसकी जांघें हल्के से कांप रही थीं, और अंडकोष ऊपर की ओर सिकुड़ रहे थे।

मैंने हैरानी से पूछा – ये क्या है?

वो कराहते हुए बोला – हाय करुना, ये लंड का पानी है। बड़ा ही मज़ा आता है। तू भी अपने चूत से ऐसा ही पानी निकालेगी तो तुझे भी बड़ा मज़ा आएगा।

मैंने उत्सुकता से कहा – लेकिन कैसे?

वो बोला – आ इधर मैं तुझे बता देता हूं।

मैंने कहा – ठीक है, बता दो।

मुझे कमोड पर बैठा दिया और मेरी दोनों टांगों को फैला दिया। मामू मेरे बुर को अपने मुंह से चूसने लगा। उसने पहले मेरे बुर के ऊपरी हिस्से को होंठों से हल्के से चूमा, फिर जीभ से चाटना शुरू किया। उसकी गरम, गीली जीभ मेरे क्लिटोरिस पर घूम रही थी, धीरे-धीरे गोल-गोल घुमाते हुए, कभी तेजी से, कभी धीमे। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। मेरी सांसें तेज हो गईं, शरीर में एक अजीब सी कंपकंपी दौड़ रही थी, और मेरी कमर खुद-ब-खुद ऊपर उठ रही थी। मामू ने मेरी बुर की सिलवटों को जीभ से अलग-अलग चाटा, हर नुकीले हिस्से को सहलाया, और फिर अचानक अपनी जीभ को मेरी बुर के अंदर डाल दिया। जीभ अंदर-बाहर हो रही थी, गहराई तक पहुंचकर मेरी दीवारों को चाट रही थी।

मेरे से रहा नहीं गया और मेरे बुर से पेशाब निकलने लगा। गर्म, तेज धार निकली, लेकिन मामू हटा नहीं। उसने मुंह और करीब लगा लिया और मेरे पेशाब को पीने लगा। मैं उसकी जीभ पर पेशाब की धार महसूस कर रही थी, वो उसे निगल रहा था, और साथ ही मेरे क्लिटोरिस को चूसता रहा। मैं तो एकदम पागल सी हो गई। मेरे पूरे शरीर में झुनझुनी दौड़ रही थी, आंखें बंद हो गईं, और मुंह से हल्की-हल्की कराह निकल रही थी। उस समय तो मेरी चूची भी नहीं निकली थीं, लेकिन मामू ने अपना एक हाथ ऊपर बढ़ाकर मेरी निप्पल को पकड़ लिया। उसने मेरी छोटी-छोटी निप्पल को उंगलियों से ऐसे मसलना शुरू किया जैसे वो मेरी पूरी चूची मसल रहा हो – निप्पल को पिंच करता, खींचता, फिर हल्के से रगड़ता। दर्द और मजे का मिश्रण था, और मेरी बुर से और ज्यादा गीलापन निकलने लगा।

पेशाब हो जाने के बाद भी मामू मेरे बुर को चूसता रहा। उसकी जीभ अब और गहराई तक जा रही थी, मेरी बुर की दीवारों को चाट रही थी, और क्लिटोरिस को बार-बार चूसकर उसे और सख्त कर रहा था।

फिर अचानक बोला – आ नीचे लेट जा।

मैंने हैरानी से कहा – क्यों मामू?

वो बोला – अरे आ ना। तुझे और मस्ती करना बताता हूं।

मैं चुपचाप बाथरूम के फर्श पर लेट गई। फर्श ठंडा और गीला था, मेरे ही पेशाब की कुछ बूंदें अभी भी वहां पड़ी हुई थीं, जो मेरी पीठ और नितंबों को छू रही थीं। मामू ने मेरे दोनों पैरों को उठाकर अपने कंधों पर रख दिया। मेरी टांगें ऊपर उठी हुई थीं, बुर पूरी तरह खुली हुई और उसके मुंह के सामने थी। उसने अपनी उंगली मेरे बुर में डाली – पहले सिर्फ एक उंगली, धीरे से अंदर-बाहर करते हुए। मुझे मजा आ रहा था। फिर उसने उंगली को घुमाना शुरू किया, मेरी बुर की दीवारों को सहलाते हुए, हर कोने को छूते हुए।

वो बोला – अरे तेरा बुर तो बहुत बड़ा है। ये ब्रश से थोड़े ही साफ किया जाता है? आ इसकी मैं सफाई अपने लंड से कर देता हूं।

मैंने थोड़े शरमाते हुए कहा – अच्छा मामू, लेकिन ठीक से करना।

मामू ने कहा – हां करुना, देखना कैसी सफाई करता हूं।

उसने बगल से नारियल तेल की छोटी बोतल उठाई, ढक्कन खोला, और मेरे चूत के अंदर थोड़ा-थोड़ा तेल उड़ेलने लगा। ठंडा तेल मेरी गर्म बुर में गया, और फिर उसने उंगली डालकर उसे अंदर फैलाना शुरू किया। उसकी उंगली तेल से चिकनी हो गई थी, और वो मेरी चूत का मुठ मारने लगा – तेजी से अंदर-बाहर, घुमाते हुए। मस्ती के मारे मेरी तो आंखें बंद थीं। पहले उसने एक उंगली डाली, फिर दो उंगलियां, और फिर तीन उंगलियां डालकर मेरी चूत को चौड़ा करने लगा। मैं महसूस कर रही थी कि मेरी बुर की दीवारें खिंच रही हैं, तेल से चिकनी होकर और ज्यादा जगह बन रही है। दर्द कम था, मजा ज्यादा।

थोड़ी ही देर में उसने मेरे चूत के छेद पर अपना लंड रखा। लंड का गरम, सख्त सिरा मेरे बुर के मुंह पर दबाव डाल रहा था। उसने धीरे-धीरे अंदर घुसाने की कोशिश की। मुझे हल्का सा दर्द हुआ, जैसे कुछ फट रहा हो, तो मैं कराह उठी।

वो रुक गया और बोला – क्या हुआ करुना?

मैंने कहा – तेरा लंड बहुत बड़ा है। ये मेरी बुर में नहीं घुसेगा।

वो बोला – रुक जा करुना। तू घबरा मत। बस मेरे लंड को देखती रह।

हालांकि मेरी हिम्मत नहीं थी कि इतने मोटे लंड को अपनी बुर में घुसवा लूं लेकिन मैं भी मजे लेना चाहती थी। इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा। मेरी सांसें तेज चल रही थीं, आंखें आधे बंद थीं, और मैं बस उसके अगले कदम का इंतजार कर रही थी।

अब उसने मेरे बुर के छेद पर अपना लंड रखा। लंड का गरम, सख्त सिरा मेरी चूत की नरम, तेल से चिकनी सिलवटों पर दबाव डाल रहा था। मामू ने धीरे-धीरे, रुक-रुक कर अपने लंड को अंदर धकेलना शुरू किया। पहले सिर्फ सिरा अंदर गया – मुझे महसूस हुआ कि मेरी बुर की दीवारें खिंच रही हैं, फैल रही हैं। थोड़ा दर्द हुआ, जैसे कोई मोटी चीज मेरे अंदर घुस रही हो, लेकिन नारियल तेल की वजह से वो दर्द सहन करने लायक था, ज्यादा तेज नहीं। मैंने अपनी उंगलियां फर्श पर कस लीं और सांस रोककर सहन किया।

मामू ने धीरे-धीरे और आगे बढ़ाया। लंड का मोटा तना अब मेरी बुर में आधा घुस चुका था। मैं महसूस कर रही थी कि मेरी कुँवारी चूत की झिल्ली खिंच रही है, फट रही है, लेकिन तेल ने इसे चिकना बनाकर दर्द को कम कर दिया था। उसने रुककर मुझे देखा, फिर फिर धीरे से और अंदर धकेला। आखिरकार उसने पूरा लंड मेरी कुँवारी चूत में डाल दिया। लंड की पूरी लंबाई और मोटाई अब मेरे अंदर थी – मैं महसूस कर रही थी कि मेरी बुर पूरी तरह भरी हुई है, दीवारें उसके चारों ओर कसकर लिपटी हुई हैं। मुझे बहुत आश्चर्य हो रहा था कि इतना मोटा और बड़ा लंड मेरे छोटे से कुँवारी चूत में कैसे चला गया। मेरी बुर अब उसके लंड के आकार में ढल गई थी, और अंदर गहराई तक वो भराव महसूस हो रहा था।

मामू मेरी बुर में अपना लंड डालकर थोड़ी देर रुका रहा। उसकी सांसें भारी थीं, छाती ऊपर-नीचे हो रही थी, और वो मेरी आंखों में देख रहा था। उसका लंड मेरे अंदर पूरी तरह स्थिर था, सिर्फ हल्की-हल्की धड़कन महसूस हो रही थी।

फिर बोला – दर्द तो नहीं कर रहा ना?

मैंने हल्की, कांपती आवाज में कहा – थोड़ा-थोड़ा।

फिर उसने थोड़ा सा लंड को बाहर निकाला – धीरे से, सिर्फ आधा बाहर आया, मेरी बुर की दीवारें फिर से सिकुड़ने लगीं। फिर धीरे से अंदर कर दिया। इस बार दर्द कम था, और जगह-जगह एक अजीब सा सुकून और गुदगुदी महसूस हुई। मुझे मजा आने लगा। वो धीरे-धीरे यही प्रक्रिया कई बार करता रहा – बाहर निकालता, फिर अंदर धकेलता, हर बार थोड़ा गहरा, थोड़ा तेज। मेरी बुर अब तेल और मेरे अपने रस से पूरी तरह गीली हो चुकी थी, और हर धक्के के साथ चिकचिक की हल्की आवाज आ रही थी।

अब मुझे दर्द नहीं कर रहा था। बल्कि हर धक्के के साथ एक गहरा सुख फैल रहा था, मेरी कमर खुद-ब-खुद ऊपर उठ रही थी, और मुंह से हल्की कराह निकल रही थी। थोड़ी देर के बाद उसने अचानक मेरे बुर को जोर-जोर से धक्के मारने लगा। अब वो तेजी से अंदर-बाहर हो रहा था – पूरा लंड बाहर निकालकर फिर जोर से अंदर धकेलता, मेरी बुर की गहराई तक पहुंचता। हर धक्के से मेरी टांगें कांप रही थीं, और फर्श पर मेरी पीठ रगड़ रही थी।

मैंने हैरानी और सुख के मिश्रण से पूछा – ये क्या कर रहे हो?

वो बोला – तेरे बुर की सफाई कर रहा हूं।

मुझे आश्चर्य हुआ – अच्छा! तो इसको सफाई कहते हैं?

वो बोला – हां मेरी जान। ये चूत की सफाई भी है और चुदाई भी।

मैंने कहा – तो क्या तुम मुझे चोद रहे हो?

वो बोला – हां। कैसा लग रहा है?

मैंने सांस लेते हुए कहा – अच्छा लग रहा है।

वो बोला – पहले किसी को चुदवाते हुए देखा है?

मैंने कहा – देखा तो नहीं है, लेकिन अपने स्कूल में सीनियर सेक्शन की लड़कियों के बारे में सुना है कि वो अपने दोस्तों से चुदवाती हैं। तभी से मेरा मन भी कर रहा था कि मैं भी चुदवा लूं। लेकिन मुझे पता ही नहीं था कि कैसे चुदवाऊं?

वो बोला – अब पता चल गया ना?

मैंने कहा – हां मामू।

थोड़ी देर में उसने मुझे कस के अपनी बाहों में पकड़ लिया। उसकी मजबूत भुजाएं मेरी कमर और पीठ के चारों ओर लिपट गईं, मुझे इतनी जोर से दबाया कि मेरी छाती उसके सीने से सट गई। उसकी सांसें मेरे कानों के पास गर्म और तेज थीं। उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और गहरी, लंबी कराह निकाली – “आह्ह्ह… करुना…” उसकी आवाज कांप रही थी। मुझे अपने चूत में गरम-गरम सा कुछ महसूस हो रहा था – जैसे कोई गाढ़ा, उबलता हुआ तरल अंदर फैल रहा हो। उसका लंड मेरे अंदर धड़क रहा था, और हर धड़कन के साथ वो गरम तरल मेरी बुर की दीवारों पर छिटक रहा था। मैं महसूस कर रही थी कि मेरी चूत पूरी तरह भरी हुई है, वो गरमाहट अंदर तक फैल रही है, और मेरी बुर की मांसपेशियां उसके लंड को कसकर पकड़े हुए हैं।

मैंने थोड़ी घबराहट से पूछा – क्या हुआ मामू? मेरे चूत में गरम सा क्या निकाला आपने?

वो कराहते हुए, आंखें अभी भी बंद करके बोला – कुछ नहीं मेरी जान। वो मेरे लंड से माल निकल गया है।

थोड़ी देर में उसने धीरे-धीरे अपना लंड मेरे चूत से बाहर निकाला। लंड अब भी आधा सख्त था, और उसके सिरे से मेरे रस और उसके माल का मिश्रण चिपचिपा सा लटक रहा था। जैसे ही लंड पूरी तरह बाहर आया, मेरी बुर थोड़ी खुली हुई रह गई, और अंदर से गरम तरल धीरे-धीरे बाहर बहने लगा। वो खड़ा हो गया, उसका लंड अब भी चमक रहा था, और नीचे से मेरे रस की बूंदें टपक रही थीं।

मैंने अपने चूत की तरफ देखा। मेरी बुर की सिलवटें लाल हो गई थीं, और उसमें से हल्का गुलाबी-लाल खून मिला हुआ तरल निकल रहा था – कुछ बूंदें मेरी जांघों पर बह रही थीं। मैं काफी डर गई और मामू को बोली – मामू, ये खून जैसा क्या निकल गया मेरे चूत से?

हालांकि वो जानता था कि मेरी चूत की झिल्ली फट गई है, लेकिन उसने झूठ बोलकर कहा – अरे कुछ नहीं। ये तो मेरा माल है। जब पहली बार कोई लड़की चुदवाती है तो उसके चूत में माल जाकर लाल हो जाता है। आ इसे साफ कर देता हूं।

मैं थोड़ा निश्चिंत हो गई। उसकी बात सुनकर डर कम हुआ, और मैंने खुद को थोड़ा संभाला।

फिर हम दोनों ने एक साथ स्नान किया। उसने मुझे अच्छी तरह से पूरा नहलाया-धुलाया। पहले उसने शावर खोला, गुनगुना पानी मेरे शरीर पर बहाया। उसने साबुन लिया और मेरी पीठ, कंधों, छाती पर हाथ फेरते हुए साफ किया। फिर मेरी बुर के पास आया – उंगलियों से धीरे-धीरे साबुन लगाया, मेरी सिलवटों को अलग करके अंदर तक साफ किया, खून और माल के मिश्रण को धो दिया। पानी के साथ सब बह गया। उसने मेरी जांघों, नितंबों को भी अच्छे से रगड़ा और साफ किया। मैं खड़ी होकर उसे ये सब करने दे रही थी, और उसकी उंगलियां मेरे शरीर पर घूमती रहीं। आखिर में उसने मुझे तौलिया से पोंछा और खुद भी नहा लिया।

और फिर हम दोनों अपने-अपने कपड़े पहन कर अपने-अपने कमरे में चले गए।

सुबह जब मेरा छोटा भाई स्कूल चला गया तो मैं उसे चाय देने गई। वो बिस्तर पर लेटा था, मैं ट्रे लेकर आई।

उसने मुझसे कहा – कैसी हो करुना?

मैंने कहा – ठीक ही हूं।

उसने कहा – तेरी चूत में दर्द तो नहीं है ना?

मैंने कहा – दर्द तो है लेकिन हल्का-हल्का। कोई दिक्कत तो नहीं होगी ना मामू?

मामू ने कहा – अरे नहीं पगली। पहली बार तूने अपने चूत में लंड लिया था न इसलिए ऐसा लग रहा है। और देख… किसी को कल रात के बारे में मत बताना। नहीं तो तुझे सब गंदी लड़की कहेंगे।

मैंने कहा – ठीक है, लेकिन एक शर्त है।

वो बोला – क्या?

मैंने कहा – एक बार फिर से मेरी बुर की सफाई करो लेकिन इस बार बाथरूम में नहीं बल्कि इसी कमरे में।

वो बोला – ठीक है आ जा।

और मैंने उसके कमरे का दरवाजा लगा कर फिर से अपनी चूत चुदवाई। वो भी दो बार। वो भी बिलकुल फ्री में। पहली बार उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया, मेरी टांगें फैलाईं, और धीरे-धीरे फिर से अंदर घुसाया। इस बार दर्द कम था, मजा ज्यादा। दूसरी बार वो पीछे से आया, मुझे घुटनों के बल करवाया, और जोर-जोर से धक्के मारे। दोनों बार उसके माल मेरे अंदर छोड़कर निकला।

दोपहर में मम्मी आ गई। मम्मी के आने के बाद भी वो मेरे यहां अगले पांच दिन जमा रहा। इस पांच दिन में मैंने आठ बार अपनी चूत उससे साफ करवाई। हर बार अलग-अलग तरीके से – कभी सुबह, कभी दोपहर में छिपकर, कभी रात को जब सब सो जाते। हर बार वो मुझे अच्छे से चोदता, माल अंदर छोड़ता, और मैं मजे लेती।

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