आपका दोस्त राज एक बार फिर आपके सामने आया है। इस बार मैं अपनी कोई कहानी नहीं सुना रहा, बल्कि अन्तर्वासना के एक पाठक रोहन की सच्ची घटना आपको बता रहा हूँ।
मेरी कुछ पिछली कहानियाँ पढ़कर रोहन नाम के लड़के के कई मेल आए थे। मैं उसके मेल पढ़कर जवाब देता रहता था। कुछ दिन पहले उसने बार-बार मेल करके अपनी कहानी साइट पर डालने की जिद की। मैं काम में व्यस्त था, इसलिए टालता रहा।
आखिरकार उसने कहा कि पूरी कहानी लिख नहीं सकता, लेकिन मुख्य-मुख्य घटनाएँ बता देगा। आप उन्हें जोड़कर अच्छी कहानी बना देना। वक्त की कमी के बावजूद उसकी बहुत मिन्नत पर मैं मान गया। उसने जो मेल में लिखकर भेजा, उसी को मैं कहानी का रूप देकर पेश कर रहा हूँ।
रोहन करीब तेईस साल का है। अच्छी बॉडी वाला, अभी शादी नहीं हुई। घर में मम्मी-पापा के अलावा दो बहनें हैं – उन्नीस साल की पायल और इक्कीस साल की सोनम। दोनों ही एकदम ताज़ा-ताज़ा, गोरी-चिट्टी, गोल-गोल संतरे जैसी चूचियाँ, पतली कमर, चिकना पेट और कयामत वाली गांड।
पायल दिखने में सोनम से ज्यादा खूबसूरत थी, लेकिन सोनम भी कम नहीं थी। कॉलोनी के लगभग सभी लड़के दोनों बहनों को देखकर आहें भरते थे।
रोहन के पापा बिजनेस में व्यस्त रहते, अक्सर बाहर जाते। कई बार मम्मी को भी साथ ले जाते। ऐसे में घर की सारी जिम्मेदारी रोहन पर आ जाती। लेकिन इन जिम्मेदारियों के बीच भी वह अपनी सेक्सी बहनों को देखकर अपने ख्वाहिशों को दबा नहीं पाता था।
रोहन को भाई-बहन की चुदाई वाली कहानियाँ सबसे ज्यादा पसंद थीं। ऐसी कहानियाँ पढ़कर वह अपनी बहनों को याद करके मुठ मारता। यहीं से उसके मन में अपनी बहनों को चोदने की तमन्ना पनपने लगी थी।
वह कहानियाँ पढ़-पढ़कर बहनों को पटाने के तरीके सोचता, लेकिन उन्हें आजमाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। डर इंसान को बहुत रोकता है।
आखिर जब कंट्रोल करना मुश्किल हो गया, तो उसने सबसे पहले छोटी बहन पायल को पटाने का फैसला किया। मोबाइल सबसे अच्छा जरिया लगा।
उसने प्लान बनाया कि पायल को भाई-बहन की चुदाई वाली कहानियाँ पढ़ने को देगा। लेकिन कैसे?
बहुत सोचने के बाद उसने एक दोस्त की आईडी से नया सिम लिया और व्हाट्सएप पर पायल के नंबर पर चार-पाँच भाई-बहन चुदाई की कहानियाँ भेज दीं।
उस वक्त पायल रोहन के पास ही बैठी थी। अनजान नंबर से आए मैसेज को देखकर उसने चेक किया तो सेक्स कहानियाँ थीं।
पायल ने रोहन के पास बैठे-बैठे थोड़ी पढ़ी। फिर शर्म से लाल होकर मोबाइल बंद किया और अपने कमरे में चली गई।
रोहन को यकीन था कि पायल जरूर पूरी कहानी पढ़ेगी। वह चुपके से उसके कमरे के पास गया तो देखा – पायल सच में कहानियाँ पढ़ रही थी और उसकी आँखों में वासना की लाली छाई हुई थी।
रोहन को लगा उसकी चाल कामयाब हो रही है।
पायल कहानियाँ पढ़ती रही और रोहन छुपकर देखता रहा। पढ़ते-पढ़ते पायल गर्म हो गई। उसकी साँसें तेज होने लगीं। उसका दायाँ हाथ धीरे-धीरे अपनी स्कर्ट के किनारे पर पहुँचा। फिर स्कर्ट के नीचे सरक गया।
पायल ने अपनी जाँघों को हल्का सा फैलाया। उँगलियाँ पेंटी के ऊपर से चूत की लकीर पर फिसलने लगीं। वह धीरे-धीरे पेंटी के किनारे से हाथ अंदर डाल रही थी। आखिरकार उसकी मध्यमा उंगली सीधे चूत के होंठों पर आ गई।
वह उंगली को ऊपर-नीचे सरकाने लगी। चूत के होंठों को अलग-अलग करके क्लिटोरिस पर हल्का दबाव देने लगी। उसकी साँसें और तेज हो गईं। होंठ काटते हुए वह कहानी पढ़ रही थी और उंगली की रफ्तार बढ़ा रही थी।
रोहन दरवाजे की दरार से सब देख रहा था। उसका लंड बरमूडा में सख्त होकर तंबू बना रहा था। पायल की उंगली अब पूरी तरह चूत के अंदर जा रही थी। वह धीरे-धीरे अंदर-बाहर कर रही थी। दूसरी उंगली भी शामिल हो गई। अब दो उँगलियाँ चूत में घुस-बाहर हो रही थीं।
पायल की कमर हल्की-हल्की उठ रही थी। वह बेड पर लेट गई। स्कर्ट पूरी तरह कमर तक ऊपर चढ़ गई। पेंटी अब जाँघों के बीच लटक रही थी। उसने पेंटी को पूरी तरह उतार फेंका। अब उसकी चूत पूरी नंगी थी। गोरी जाँघों के बीच गुलाबी चूत चमक रही थी।
उसने एक हाथ से चूत के होंठ फैलाए और दूसरी उंगली से क्लिटोरिस को तेजी से रगड़ने लगी। उसकी आँखें बंद हो गईं। मुँह से हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकल रही थीं। “आह्ह… उफ्फ…” जैसे शब्द निकल रहे थे।
उसकी चूत से रस टपकने लगा। उँगलियाँ अब तेजी से अंदर-बाहर हो रही थीं। चूत की दीवारों को रगड़ रही थीं। पायल का बदन काँपने लगा। उसकी कमर ऊपर उठी। टाँगें फैल गईं। उँगलियाँ और तेज चलीं। आखिरकार एक लंबी सिसकारी के साथ उसकी चूत से रस फूट पड़ा। वह झड़ गई।
रोहन के मन में आया कि अभी लोहा गर्म है, मार दो हथौड़ा। लेकिन जल्दबाजी नुकसानदेह हो सकती थी, इसलिए उसने सब्र किया।
थोड़ी देर बाद उसने पायल को “हैलो” मैसेज किया। जवाब आया – “हू आर यू?”
रोहन ने लिखा – “मैं आपका दीवाना हूँ। आपको देखते ही बाहों में भरने, चूमने और चुदाई करने का मन करता है।”
पायल ने गुस्से में लिखा – “बकवास बंद करो। मैं आपको जानती भी नहीं, फिर हिम्मत कैसे हुई? दोबारा मैसेज किया तो भाई को बता दूँगी।”
रोहन ने हँसते हुए पूछा – “कहानियाँ कैसी लगीं?”
पायल का कोई जवाब नहीं आया।
रोहन ने फिर लिखा कि अगर और कहानियाँ चाहिए तो बता देना। फिर एक कहानी और भेज दी।
पायल ने फिर पढ़ना शुरू किया। इस बार रोहन ने देखा कि उसने पेंटी उतार दी, स्कर्ट ऊपर की और एक उंगली चूत में डालकर हिलाने लगी।
रोहन ने चुपके से उसका वीडियो बना लिया।
अगले दो दिन उसने कोई मैसेज नहीं किया।
तीसरे दिन पायल का “हैलो” आया। रोहन का दिल जोरों से धड़का। उसने तुरंत जवाब दिया।
पायल ने लिखा – अगर और कहानियाँ हैं तो भेज दो।
रोहन ने पूछा – पसंद आईं?
पायल ने हाँ कहा और पूछा – क्या ये सब सच होती हैं?
रोहन ने झूठ बोला – हाँ, मैं भी अपनी सगी बहन के साथ करता हूँ। बिल्कुल सेफ है, घर की इज्जत घर में ही रहती है।
पायल ने “कमीना” लिखा।
रोहन ने पूछा – क्या कहानियाँ पढ़कर तेरा मन नहीं करता कि तू भी अपने भाई के साथ मजे ले?
पायल ने मना किया और कहा – मुझे सेक्स में कोई रुचि नहीं।
रोहन ने कहा – फिर और कहानियाँ क्यों माँग रही हो?
पायल बोली – बस टाइमपास के लिए।
रोहन अब खुलकर कमीना हो गया। वह चुपके से पायल के पास बैठ गया और पूछा – क्या तूने कभी अपने भाई का लंड देखा है?
पायल ने मैसेज पढ़कर रोहन की तरफ देखा और लिखा – नहीं।
रोहन ने पूछा – दिल करता है देखने का?
पायल ने मना कर दिया।
रोहन उसके चेहरे के भाव पढ़ रहा था। पायल गर्म हो रही थी और बार-बार रोहन की बरमूडा में बने तंबू की तरफ देख रही थी। उसे पता नहीं था कि यह उसका अपना भाई है।
रोहन ने मैसेज किया – अगर तेरा भाई तुझे चोदना चाहे तो देगी?
पायल ने गालियाँ लिखीं और नेट बंद कर दिया।
रोहन उठा और पायल के बिल्कुल पास बैठ गया। उसने फनी वीडियो दिखाने के बहाने पायल से सटकर बैठा। लेकिन उसका ध्यान वीडियो पर कम, रोहन के टावर पर ज्यादा था।
रोहन ने बेशर्मी से अपने लंड को पकड़कर हल्का दबाया, जैसे सेट कर रहा हो। उसका लंड सात इंच लंबा और ढाई इंच मोटा था। बरमूडा का कपड़ा इतना पतला था कि तंबू साफ उभरकर दिख रहा था, सिरे पर गीला धब्बा भी बनने लगा था।
पायल ने नजरें फेर लीं और तेजी से अपने कमरे में चली गई।
रोहन की लगाई आग अब भड़क रही थी।
कुछ देर बाद वह पायल के कमरे के पास गया। दरवाजा बंद था, लेकिन रोहन को पता था कि खिड़की के पास एक छोटा सा छेद है जहाँ से झाँका जा सकता है। वहाँ पहुँचा तो पायल बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसकी सलवार थोड़ी नीचे खिसकी हुई थी और उसने एक हाथ अपनी चूत में डाल रखा था। वह धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर कर रही थी। उसकी साँसें तेज थीं, होंठ काट रही थी और आँखें बंद थीं। दूसरा हाथ उसने अपनी एक चूची पर रखा हुआ था, जिसे वह हल्के-हल्के मसल रही थी।
अगर घर में कोई और न होता तो शायद वहीँ घुस जाता। लेकिन मम्मी और सोनम घर पर थे।
रोहन ने फिर दो-तीन दिन कोई मैसेज नहीं किया। तीसरे दिन पायल ने फिर कहानियाँ माँगीं।
रोहन ने दो-तीन कहानियाँ भेजीं। पायल ने पढ़ीं और फिर उंगली चूत में डाल ली।
अब रोहन का मन मचल रहा था। शाम को जब मम्मी और सोनम रसोई में व्यस्त थे, तो वह पायल के कमरे में गया। पायल मोबाइल पर कहानी पढ़ रही थी।
रोहन बिल्कुल चिपककर बैठ गया और कंधे पर हाथ रखकर बोला – क्या बात है पायल, आजकल सारा दिन मोबाइल से चिपकी रहती हो। भाई से बात करने का टाइम भी नहीं?
पायल घबरा गई, मोबाइल साइड में रख दिया। रोहन ने उसके शरीर में कंपन महसूस किया।
रोहन ने हाथ धीरे से बगल में सरकाया और पायल को अपनी बाहों में खींच लिया। ऐसा करते ही उसका हाथ पायल की एक चूची पर पड़ गया। उसने हल्के से दबाया, चूची नरम और गर्म थी, निप्पल सख्त होकर कपड़े के ऊपर से महसूस हो रहा था।
पायल उछल पड़ी और रसोई की तरफ भाग गई।
उस दिन के बाद रोहन रोज पायल को छूने की कोशिश करता। पहले पायल झटके से उठ जाती और दूर हो जाती, लेकिन धीरे-धीरे उसे भी अच्छा लगने लगा। अब वह खुद रोहन के पास चिपककर बैठती। रोहन पहले उसके गाल पर हल्का सा चूमता, फिर माथे पर। बीच-बीच में उसकी चूचियों को कपड़े के ऊपर से दबा देता। कभी-कभी हाथ उसकी कमर पर सरकाता और हल्के से दबाता। सब कुछ मम्मी और सोनम से छुपाकर। दोनों को एक-दूसरे का स्पर्श अब अच्छा लगने लगा था। ऐसे ही पंद्रह दिन निकल गए।
और उस दिन…
रोहन शाम चार बजे कॉलेज से लौटा। घर में कोई नहीं था। मम्मी और सोनम के कमरे खाली थे।
वह सीधा पायल के कमरे के पास पहुँचा। दरवाजा थोड़ा सा खुला था। अंदर झाँकते ही उसकी साँस रुक गई। पायल बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसकी स्कर्ट पूरी तरह ऊपर चढ़ी हुई थी और पेंटी जाँघों के बीच तक नीचे खिसकी हुई थी। एक हाथ में मोबाइल था, जिसमें वह कोई कहानी पढ़ रही थी। दूसरा हाथ उसकी चूत पर था। उसकी मध्यम उंगली धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रही थी। चूत गीली हो चुकी थी, उंगली पर चमकदार रस लग रहा था। उसकी साँसें तेज थीं, होंठ हल्के से कटे हुए थे और आँखें बंद करके वह मजा ले रही थी।
रोहन को देखते ही पायल घबरा गई। उसने जल्दी से उंगली निकाली, पेंटी ऊपर खींची, स्कर्ट नीचे की और बाथरूम की तरफ भागी। दरवाजा बंद करके अंदर घुस गई।
रोहन ने आवाज दी – पायल… पायल सुन रही हो?
जवाब नहीं आया।
रोहन ने फिर कहा – पायल… अगर एक मिनट में बाहर नहीं आई तो मम्मी को सब बता दूँगा।
कुछ सेकंड बाद दरवाजा खुला। पायल डरते हुए बाहर आई। उसके चेहरे पर शर्म और डर था। आँखों में आँसू छलक आए थे।
रोहन ने उसका हाथ पकड़ा, उसे बेड पर बैठाया और पास बैठ गया। उसने प्यार से पूछा – ये क्या कर रही थी पगली?
पायल ने सिर झुका लिया और रोते हुए बोली – भैया… प्लीज मम्मी को मत बताना… ये गलती दोबारा नहीं होगी।
रोहन को सुनहरा मौका मिल गया। उसने पायल को अपनी बाहों में खींच लिया और सीने से लगा लिया। उसका एक हाथ पायल की पीठ पर फेर रहा था, दूसरा धीरे-धीरे उसकी कमर पर सरकाया। फिर उसने हल्के से पायल की चूची पर हाथ रख दिया और कपड़े के ऊपर से हल्का दबाया। पायल का शरीर काँप उठा, लेकिन इस बार वह दूर नहीं हुई।
रोहन ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा – कोई बात नहीं… इस उम्र में ऐसा होता है। तू मेरी अच्छी बहन है। मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगा।
उसने पायल के गाल पर चूम लिया। फिर माथे पर। पायल अभी भी रो रही थी, लेकिन अब उसकी साँसें थोड़ी तेज हो गई थीं।
रोहन ने पूछा – वैसे मम्मी और सोनम कहाँ हैं?
पायल ने धीमी आवाज में कहा – मार्केट गए हैं… सामान लेने…
कहानी जारी रहेगी।
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