Horny devar bhabhi sex story, Devar fucked bhabhi hard Antarvasana sex story: मेरा नाम नवीन है और मैं सिंगरौली से हूँ। अभी के ज़माने में सेक्सी रिश्तों की कोई कमी नहीं होती है जहां हर रोज़ नई इच्छाएं जाग उठती हैं और शरीर की गर्मी मन को बार बार उत्तेजित करती रहती है। मैं इंजीनियर हूँ और मैं अपने कज़िन की बीवी मतलब भाभी के साथ चालू कैसे हुआ? ये उसकी कहानी है। इंडियन लड़की के प्यार में पड़ना बहुत आसान है और जब उसके बूब्स और गांड मस्त हो तो बात ही बन जाए।
मेरी भाभी एकदम परी जैसी थी और उसका नाम रानी था। उसका साइज 32-24-36 था और वो बहुत गोरी थी। उसकी त्वचा दूध जैसी सफेद और चिकनी थी जिस पर सूरज की रोशनी पड़ते ही चमक उठती थी। उसकी उम्र 27 साल थी लेकिन कोई कह नहीं सकता कि वो 22 साल की भी होगी। उसकी आंखों में नशीला आकर्षण था और होंठों की नरमी देखकर कोई भी फिदा हो जाता था। वो एक हाउसवाईफ है और मैं अक्सर उनके घर जाया करता था जहां उसकी मुस्कान और फ्रेंडली बातचीत मुझे हमेशा खींच लेती थी। वो भी मुझसे काफ़ी फ्रेंडली थी और मैं उसको सोचकर कई बार मुठ मारता था। अकेले कमरे में लेटकर मैं अपनी आंखें बंद कर लेता और उसके नंगे शरीर की कल्पना करता जिसमें उसके भरे हुए बूब्स मेरे हाथों में दबते महसूस होते उसके गुलाबी निप्पल सख्त हो जाते और उसकी मोटी गांड मेरे लंड को रगड़ती हुई लगती जिससे मेरा लंड फनफना कर खड़ा हो जाता और मैं जोर जोर से हिलाकर अपना गर्म पानी निकालता।
एक दिन मुझे उनके घर के नज़दीक एक बैंक में काम था तो मैं उस काम से गया। सुबह से ही गर्मी का माहौल था और सड़क पर पसीना बह रहा था जिससे मेरा शरीर पहले से ही थका हुआ और उत्तेजित महसूस कर रहा था। बैंक वालों ने मुझे 2 घंटे तक इंतजार करने को कहा तो मैं रानी के घर चला गया जहां जाने का विचार ही मेरे दिल की धड़कनों को तेज कर रहा था। फिर मैंने दरवाजा खटखटाया लेकिन काफ़ी देर तक किसी ने दरवाजा नहीं खोला जिससे मेरी उत्सुकता और बढ़ गई और मन में अजीब सी बेचैनी फैल गई। फिर उनकी मीठी और नरम आवाज आई कि नवीन ज़रा रुक जाओ मैं आती हूँ।
फिर जब वो आई तो मैं तो शॉक रह गया। अब उन्होंने सिर्फ एक टावल पहना हुआ था। ताजा नहाने के बाद उनका बदन अभी भी नम था और टावल उनके गीले शरीर पर कसकर लिपटा हुआ था जिससे उनके 32 साइज के भरे हुए बूब्स उभरकर दिख रहे थे और गहरी खाई में पानी की छोटी छोटी बूंदें सरक रही थीं। उनके निप्पल हल्के से टावल के कपड़े पर उभरे हुए थे और उनकी पतली कमर तथा मोटी गोरी जांघें आधे खुले हुए थे जिनकी नम चमक देखकर मेरा मुंह सूख गया। साबुन की ताज़ी खुशबू उनके शरीर से निकलकर मेरे नाक तक पहुंच रही थी और उनके गीले बाल कंधों पर लिपटे हुए थे। फिर मैंने उनको सारी बात बताई तो उन्होंने कहा कि नो प्रॉब्लम तुम यहां रुक सकते हो। जब भैया ऑफिस गए हुए थे तो अब मुझसे रहा नहीं गया। मेरे शरीर में तेज गर्मी दौड़ रही थी मेरा लंड पैंट के अंदर पूरी तरह तन चुका था और उसकी फड़कन मुझे छुपाने नहीं दे रही थी। मैंने कहा कि मुझे बाथरूम जाना है और मैं सीधा बाथरूम में जाकर हिलाने लगा।
लेकिन जल्दी में मैंने दरवाजा बंद नहीं किया तो अचानक पीछे से मेरी भाभी ने मुझे देख लिया। बाथरूम का दरवाजा आधा खुला छूट गया था और मैं वहां खड़ा पैंट घुटनों तक सरकाए हुए मेरा लंड हाथ में कसकर पकड़े जोर जोर से ऊपर नीचे हिला रहा था। मेरी सांसें तेज थीं और लंड पूरी तरह फनफनाता हुआ खड़ा था जिसकी नसें उभरी हुई थीं और सिरे पर चमकदार पूर्व स्राव टपक रहा था। अचानक पीछे से उनकी हल्की सी सांस और कदमों की आवाज सुनाई दी तो मेरा पूरा शरीर झटके से सिहर उठा। मैंने घूमकर देखा तो रानी भाभी वहां खड़ी थीं। उनके चेहरे पर हैरानी का भाव था लेकिन आंखें मेरे हाथ और तने हुए लंड पर जमी हुई थीं। टावल अभी भी उनके गीले शरीर पर कसकर लिपटा था जिससे उनके भरे बूब्स उभरे हुए दिख रहे थे और गीले बाल कंधों पर बिखरे हुए थे।
फिर उन्होंने कहा कि ये तुम क्या कर रहे हो? उनकी आवाज में आश्चर्य के साथ एक अजीब सी गर्माहट और कमांड थी जो मेरे कानों में गूंज गई। अब मैं तो डर गया था कि अब मर गए लेकिन उन्होंने मुझे बाहर बुलाया और कहा कि जो तुम अंदर कर रहे थे वो मेरे सामने करो नहीं तो मैं तुम्हारी मां को सब बता दूंगी कि तुम क्या कर रहे थे। उनका चेहरा अब गंभीर था लेकिन उनकी आंखों में एक चमक थी जो मुझे और भी घबरा रही थी। मेरे हाथ अभी भी लंड पर थे और दिल की धड़कन इतनी तेज थी कि लग रहा था छाती फट जाएगी। पसीना मेरी पीठ पर बह रहा था और शर्म के मारे मेरा चेहरा लाल हो चुका था।
मेरा लंड अभी भी तना हुआ था तो मैंने कहा कि मुझे शर्म आ रही है। मेरी आवाज कांप रही थी और मैं उनकी नजरों से बचने की कोशिश कर रहा था। वो बोली कि बेटा अंदर तो कुछ शर्म नहीं आ रही थी। उनकी इस बात ने मुझे और भी शॉक में डाल दिया। उनकी आवाज में हल्की सी हंसी और उत्तेजना थी जो मेरे कान तक पहुंच रही थी। मैं उनके मुंह से सुनकर शॉक हो गया। फिर मैंने सोचा कि आज उसको मेरा लंड दिखा ही देता हूं। फिर मैंने जींस की चेन खोल दी और मेरा लंड सीधा फनफनाता हुआ तन गया। लंड अब पूरी तरह बाहर आ गया था। उसकी 7 इंच लंबाई और 2 इंच मोटाई साफ दिख रही थी। थोड़ा सांवला रंग था लेकिन सिरा चमकदार गुलाबी था और उस पर नसें फूली हुई थीं।
मेरा लंड 7 इंच लंबा और 2 इंच मोटा है और थोड़ा सांवला है। उसकी मोटी शाफ्ट मेरे हाथ में फड़क रही थी और सिरे से एक छोटी बूंद पूर्व स्राव निकलकर टपक रही थी। फिर थोड़ी देर तक देखने के बाद वो बोली कि अब इसे हिलाओ तो सही। उनकी नजर मेरे लंड से हट ही नहीं रही थी और उनके होंठों पर हल्की मुस्कान खेल रही थी। अब मुझे पता चल गया था कि यह चुदने के मूड में है। मैंने कहा अभी हिला देता हूं मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। मेरी सांसें अभी भी तेज थीं लेकिन अब डर के साथ एक नई उत्तेजना भी शामिल हो गई थी।
फिर वो हंसने लगी और बोली कि ऐसे मेरे सामने खड़ा है तुझे शर्म नहीं आती। उनकी हंसी में शरारत थी और आंखें मेरे लंड को घूर रही थीं। मैंने कहा कि कैसी शर्म? अब मैं तुझे भी नंगी करूंगा ना। फिर तो उसने सीधा मेरा लंड पकड़कर मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और ऐसे चाटने लगी जैसे उसने कभी लंड देखा ही नहीं हो। उनकी नरम गर्म उंगलियां मेरी मोटी शाफ्ट को कसकर जकड़ लीं। हथेली की गर्मी मेरी त्वचा में समा गई और लंड और भी सख्त हो गया। वो धीरे से घुटनों के बल बैठ गईं और मुंह मेरे लंड के सिरे के ठीक सामने ला दिया। उनकी गर्म सांस पहले मेरे लंड पर पड़ी जिससे मैं सिहर उठा। फिर उन्होंने जीभ बाहर निकाली और लंड के सिरे को धीरे से चाटा। जीभ की नोक सिरे की चमकदार जगह पर घूमी और पूर्व स्राव को चाटकर स्वाद लिया।
उसके बाद उन्होंने मुंह खोलकर लंड का पूरा सिरा अंदर ले लिया। गर्म नम होंठों ने शाफ्ट को कसकर दबाया और चूसना शुरू कर दिया। जीभ अंदर से लंड की नसों पर ऊपर नीचे घूम रही थी। वो धीरे धीरे और गहराई तक लेने लगीं। लंड का आधा हिस्सा उनके गर्म मुंह में चला गया और गले तक पहुंचने की कोशिश में उनकी सांस रुकने लगी। गैगिंग की हल्की आवाज निकली लेकिन वो रुकी नहीं। लार उनके मुंह से बहकर मेरे लंड पर और अंडों तक टपक रही थी। वो आंखें बंद करके पूरी तरह मजे ले रही थीं और सिर को आगे पीछे करके लंड को चूस रही थीं। अब मैं तो सीधे सातवें आसमान में पहुंच गया था और सोफे पर जाकर लेट गया।
अब वो आराम से मेरा लंड चाट रही थी। रानी भाभी घुटनों के बल बैठी हुई थीं और उनका गर्म नम मुंह मेरे लंड के चारों तरफ धीरे धीरे घूम रहा था। उनकी जीभ लंड की पूरी शाफ्ट पर ऊपर से नीचे तक लपेट रही थी और हर चाट के साथ लार की गर्म बूंदें मेरे अंडों पर टपक रही थीं। मैं सोफे पर लेटा हुआ था और उनकी गीली जीभ का हर स्पर्श मेरी रीढ़ में बिजली दौड़ा रहा था। लंड का सिरा उनके होंठों के बीच दबता और छूटता जिससे चूसने की चटचट आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। उनकी सांसें तेज थीं और नाक से निकलती गर्म हवा मेरे लंड की त्वचा को और उत्तेजित कर रही थी।
फिर मैंने उसके गले तक मेरा लंड घुसा दिया। मैंने दोनों हाथों से उनके सिर को पकड़ लिया और कमर उठाकर एक झटके में पूरा 7 इंच लंड उनके मुंह में धकेल दिया। लंड का मोटा सिरा सीधे उनके गले तक पहुंच गया और उनकी गर्म गले की दीवारें मेरे लंड को कसकर दबा रही थीं। अब उस साली से सांस भी नहीं ली जा रही थी वो अब कुछ बोल भी नहीं पा रही थी। उनकी आंखें आंसुओं से भर गई थीं और चेहरा लाल हो चुका था। गले से गैगिंग की गहरी आवाज निकल रही थी लेकिन वो मुंह नहीं खोल पा रही थीं। उनके नथुने फड़क रहे थे और सांस लेने के लिए संघर्ष कर रही थीं। लार उनके मुंह के कोनों से बहकर मेरे अंडों और जांघों पर रिस रही थी।
थोड़ी देर के बाद मैंने उसको छोड़ दिया और फिर मैंने उससे कहा कि सिर्फ मेरा लंड ही चूसेगी या मेरे अंडों को भी अपने मुंह में लेगी। मैंने सांस लेने का मौका दिया तो वो जोर जोर से हांफ रही थीं और मुंह से लार की लंबी लकीर टपक रही थी।
और मैंने जबरदस्ती अपने अंडों को उसके मुंह में डाल दिया और फिर से उसका मुंह पूरी तरह से भर गया। मैंने एक अंडा पहले उनके मुंह में ठूंस दिया फिर दूसरे को भी जबरदस्ती दबाकर अंदर कर दिया। अब उनके मुंह में दोनों अंडे एक साथ थे और गाल फूल गए थे। अब वो इस बार मजे ले रही थी शायद उसको मेरे लंड के अंडे पसंद आ गए थे। उनकी जीभ अब अंडों के नीचे घूम रही थी और वो धीरे धीरे चूस रही थीं। उनकी आंखें बंद थीं और चेहरे पर पूरा मस्ती का भाव था। अब वो अपने मुंह से मेरे लंड को निकाल ही नहीं रही थी। वो लंड को फिर से मुंह में ले रही थीं और सिर को तेज तेज हिला रही थीं। अब मेरा पानी निकलने वाला था क्योंकि वो आधे घंटे से मेरे लंड को चूस रही थी। मेरी कमर में तनाव बढ़ रहा था और अंडों में गर्मी उबल रही थी। लंड की नसें फूल गई थीं और सिरा फड़क रहा था।
फिर मैंने पूछा पानी कहां निकालूं? तो वो बोली मेरे मुंह में ही डाल दो मुझे इसका टेस्ट बहुत पसंद है। उनकी आवाज भारी और उत्तेजित थी। फिर मैंने एकदम से उसके मुंह में लंड घुसाया और पिचकारी छोड़ने लगा। मैंने सिर को उनके गले तक धकेला और पहली पिचकारी जोर से उनके मुंह में छोड़ी। मेरा इतना पानी आज तक नहीं निकला था। गर्म गाढ़ा पानी उनके गले में सीधा उतर रहा था। अब वो मेरा सारा पानी पी गई। वो हर पिचकारी को चूस रही थीं और गले में उतार रही थीं। फिर उसने मेरे लंड को भी मस्त चाट लिया। लंड का आखिरी बूंद तक चाटकर साफ कर दिया और जीभ से सिरे को बार बार चाटती रहीं।
अब मैं उसके बॉल्स के साथ खेलने लगा और उसके निप्पल एकदम सख्त थे और उसके बूब्स तो एकदम लचीले थे। मैंने अपने अंडों को हाथ में लेकर मसलना शुरू किया और उनकी सख्त निप्पल को उंगलियों से दबाया। अब मैं तो उस पर टूट पड़ा। मैंने उन्हें सोफे पर धकेल दिया और उनके ऊपर चढ़ गया। फिर मैंने सोचा कि अब चलो इसको हैरान किया जाए। मैंने धीरे से एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी। वो तुरंत ही मोआन करने लगी। उनकी चूत पहले से ही गीली थी और उंगली आसानी से अंदर चली गई। उनकी चूत की दीवारें मेरी उंगली को कसकर पकड़ रही थीं और गर्म तरल पदार्थ उंगली पर चिपक गया।
फिर मैंने धीरे-धीरे से उंगली डाली तो उसको मजा आने लगा। उंगली को अंदर बाहर करना शुरू किया और उनकी चूत के अंदर की नरम जगह को रगड़ने लगा। फिर मैंने एक साथ उसमें 4 उंगली डाल दी और वो चिल्लाने लगी और बोली कि भड़वे निकाल तेरी उंगलियां। उनकी चूत अब फैल रही थी और दर्द के साथ मजा भी मिल रहा था। लेकिन मैंने उसको दबोच लिया और मैंने उसे छोड़ा ही नहीं। अब उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे थे। उनके चेहरे पर दर्द और उत्तेजना का मिश्रण था।
फिर मैंने कहा कि शांत रहो मैं आज तेरी हर बॉडी पार्ट को लचीला कर दूंगा और उंगली के साथ लंड भी घुसा दिया और वो तो अब मानो बेहोश सी हो गई थी। मैंने चार उंगलियों के साथ अपना लंड भी उनके मुंह में ठूंस दिया। अब मैं इतने से नहीं रुका और फिर मैंने अपना लंड उसके मुंह में घुसा दिया और पूरा हाथ उसकी चूत में डालकर जोर से हिलाने लगा अब उसका पानी निकलने लगा था। मेरी पूरी हथेली उनकी चूत के अंदर थी और मैं उसे तेज तेज घुमा रहा था। उनकी चूत का गर्म पानी मेरे हाथ पर बह रहा था और फर्श पर टपक रहा था।
थोड़ी देर में तो मेरा पूरा हाथ गीला हो गया। अब वो भी एंजॉय कर रही थी तो रानी बोली कि अब बस भी करो और अपना लंड मेरी चूत में पेल दो। फिर मैंने कहा हां अभी तो मैंने सिर्फ हाथ डालकर तेरी चूत फाड़ी है। अब मैं लंड से उसे फाड़ता हूं और तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा।
अब वो नॉर्मल पोजिशन में आ गई और अब उसने मेरे सामने अपनी चूत फैला दी। रानी भाभी सोफे पर पीठ के बल लेट गईं और दोनों पैरों को पूरी तरह चौड़े करके घुटनों से मोड़ लिया। उनकी गोरी मोटी जांघें फैल गईं और उन्होंने दोनों हाथों की उंगलियों से अपनी चूत के बाहर वाले होंठों को जोर से खींचकर फैला दिया जिससे अंदर का गुलाबी और चमकदार हिस्सा पूरी तरह खुल गया। उनकी चूत पहले से ही बहुत गीली और सूजी हुई थी जहां से पारदर्शी रस की मोटी धार बह रही थी और छोटा सा क्लिटोरिस सख्त होकर बाहर निकला हुआ था। चूत के अंदर की नरम दीवारें फड़क रही थीं और हर फड़कन के साथ एक नई बूंद रस बाहर आ रही थी जिसकी मीठी गंध पूरे कमरे में फैल गई थी।
फिर मैंने पहली बार अपने लंड को उसकी चूत में डालने के लिए तैयार किया और धीरे से उसके चूत पर लगाया और अंदर डालने लगा लेकिन उसकी चूत के पानी की वजह से मेरा लंड बार-बार फिसल रहा था। मैंने लंड का गर्म और फड़कता सिरा उनकी चूत के ऊपर वाले हिस्से पर रखा और धीरे से दबाया। लंड का सिरा उनकी चूत की नरम और गीली सतह पर रगड़ खा रहा था जहां से गर्म रस मेरे लंड की पूरी शाफ्ट पर चिपक गया। हर बार आगे धकेलने की कोशिश में लंड फिसलकर ऊपर की तरफ चला जाता या क्लिटोरिस पर रगड़ता हुआ निकल जाता और उनकी चूत के रस से पूरी तरह चिपचिपा हो जाता। मैंने कई बार कोशिश की लेकिन हर बार फिसलन के कारण सिर्फ सिरा ही अंदर जा पाता और फिर बाहर निकल आता जिससे रानी भाभी की सांसें और तेज हो गईं और उनकी चूत की मांसपेशियां उत्तेजना से सिकुड़ रही थीं।
फिर मैंने कहा कि रंडी अपना टावल दे कितना पानी निकालेगी? और फिर उसकी चूत पर से सारा पानी साफ किया और फिर से अपना लंड उसकी चूत पर लगाकर एक धक्का दिया। मैंने टावल लेकर उनकी चूत के बाहर वाले हिस्से को जोर से पोंछा और अंदर के रस को भी साफ करने की कोशिश की लेकिन फिर भी कुछ रस बचा हुआ था। फिर मैंने लंड का सिरा फिर से उनकी चूत पर सेट किया और एक जोरदार धक्का दिया। वो आधे लंड में ही फिर से चिल्लाने लगी कि धीरे करो फिर मैं बोला साली एक तो तुझे चूत की प्यास बुझानी और मुझे धीरे से करने के लिए कह रही है। उनका चेहरा दर्द से मुड़ गया था और मुंह से तेज चीख निकली लेकिन उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर जकड़ रही थीं।
अब मैं बहुत गर्म मूड में आ गया था फिर मैंने एक झटके में पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया और उसके मुंह को लिप किस करके बंद कर दिया। मैंने कमर पीछे खींची और फिर एक तेज झटके में पूरा 7 इंच लंड उनकी चूत के अंदर तक धकेल दिया जहां मेरा लंड की मोटी शाफ्ट उनकी चूत की दीवारों को पूरी तरह फैला रही थी। उनके मुंह को मैंने अपने होंठों से कसकर चिपकाकर लिप किस कर लिया जिससे उनकी चीख दब गई। फिर उसे दर्द तो हुआ लेकिन कुछ ही मिनटों में उसको मजा आने लगा। शुरू में उनकी चूत की मांसपेशियां दर्द से सिकुड़ रही थीं और आंखों से आंसू निकल आए लेकिन धीरे धीरे उनकी चूत गर्म और नरम हो गई और हर धक्के के साथ वो भी कमर उठाकर जवाब देने लगीं। अब वो भी सामने से झटके देने लगी थी। उनकी जांघें मेरी कमर को जकड़ लीं और वो अपने हाथों से मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं। अब मैं अचानक से लेट गया और उसको मेरे ऊपर ले लिया और बोला कि चल मेरी घोड़ी अब तू मेरे लंड पर सवारी कर। मैंने पीछे लेटकर उन्हें अपने ऊपर खींच लिया और लंड अभी भी उनकी चूत के अंदर गहराई तक दबा हुआ था।
अब उसे भी बहुत मजा आ रहा था और अब वो मेरे लंड पर जोर-जोर से उछलने लगी थी। रानी भाभी मेरे लंड पर बैठकर दोनों हाथों से मेरे सीने पर टेक लगाकर ऊपर नीचे उछलने लगीं। हर उछाल में उनका पूरा वजन मेरे लंड पर पड़ता और लंड उनकी चूत के सबसे गहरे हिस्से तक पहुंच जाता। उनकी भरी हुई गांड मेरी जांघों पर जोर से टकराती और बूब्स ऊपर नीचे उछल रहे थे जिनके सख्त निप्पल हवा में फड़क रहे थे। हमारा दूसरा राउंड करीब एक घंटे तक चला। पूरे एक घंटे तक वो तेज तेज राइडिंग करती रहीं और हर कुछ मिनट में उनका शरीर कांप उठता। अब उसका तो 3-4 बार पानी निकल गया था लेकिन मेरा पानी अभी तक नहीं निकला था। पहली बार जब वो झड़ गईं तो उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर दबाईं और गर्म रस की फुहार मेरे लंड और जांघों पर छूट गई। दूसरी और तीसरी बार भी उनका शरीर लहराया और वो चीखकर चरम सुख पर पहुंच गईं लेकिन मैं अभी भी कंट्रोल में था। वो अब बहुत थक गई थी। उनकी सांसें हांफ रही थीं पसीना उनकी गोरी त्वचा पर चमक रहा था और चूत अब पूरी तरह लाल और सूजी हुई थी। फिर मैंने उसको एक टेबल पर लेटाया और अब मैं खड़े-खड़े उसे चोदने लगा। मैंने उन्हें टेबल के किनारे पर लेटा दिया उनकी टांगें मेरे कंधों पर रखीं और खड़े होकर लंड को फिर से उनकी चूत में घुसाया। दोस्तों उसकी चूत तो मानो जन्नत थी। हर धक्के में उनकी चूत की गर्मी और नरमी मेरे लंड को लपेट रही थी और हर बार पूरा लंड अंदर बाहर होता तो चटचट की आवाज गूंज रही थी।
अब वो तो मोआन किए जा रही थी कि पेलते रहो मेरे राजा अब आखिरकार मेरा निकलने वाला था तो मैंने सारा माल उसकी चूत में ही गिरा दिया। उनकी चूत अब इतनी गीली और ढीली हो चुकी थी कि हर झटके में रस बाहर निकल रहा था। मैंने तेज तेज धक्के मारे और अंडों में जमा सारा तनाव छोड़ दिया। गर्म गाढ़ा पानी की पहली पिचकारी उनकी चूत के अंदर गहराई तक पहुंची फिर दूसरी और तीसरी पिचकारी भी जोर से छूटी और उनकी चूत पूरी तरह भर गई। अब उसे बहुत मजा आया और मेरा मन अभी भी नहीं भरा था तो मैंने उसको बेड पर लेटाया और कहा कि अपने बूब्स पकड़ लो और मुझे तेरी बूब्स गली में लंड की सैर करनी है।
अब मेरा लंड ढीला हो गया था लेकिन उसके बूब्स देखकर मेरा लंड फिर से थोड़ा-थोड़ा जागने लगा तो मैंने रानी से कहा कि चल उसको जगा। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत के रस से चिपचिपा था और धीरे धीरे सिकुड़ रहा था लेकिन रानी भाभी के भरे हुए 32 साइज के गोरे बूब्स देखकर जो अभी भी सांस लेने के साथ ऊपर नीचे हिल रहे थे उनकी लचीली त्वचा पर पसीने की चमक और सख्त गुलाबी निप्पल देखकर मेरे लंड में फिर से खून दौड़ने लगा। लंड का सिरा हल्का फड़क उठा और धीरे धीरे मोटा होने लगा। मैंने रानी से कहा कि चल उसको जगा। उनकी आंखें अभी भी आधी बंद थीं और चेहरा चरम सुख के बाद लाल था।
वो तो जैसे इसी का इंतजार कर रही थी वो फिर से मेरे लंड और अंडों को चाटने लगी। रानी भाभी मुस्कुराते हुए नीचे झुकीं और घुटनों के बल बैठकर मेरे अभी भी अर्ध खड़े लंड को दोनों हाथों में पकड़ लिया। उनकी गर्म नरम हथेलियां लंड की शाफ्ट को कसकर जकड़ लीं और उन्होंने मुंह खोलकर पहले लंड के सिरे को पूरी जीभ से चाटा। जीभ का गर्म स्पर्श लंड को तुरंत सख्त कर रहा था और वो लंड की पूरी लंबाई पर ऊपर से नीचे तक बार बार चाट रही थीं। फिर उन्होंने मुंह आगे बढ़ाकर मेरे दोनों अंडों को एक एक करके मुंह में ले लिया। हर अंडे को वो चूस रही थीं और जीभ से नीचे वाले हिस्से को रगड़ रही थीं जिससे मेरे अंडों में फिर से गर्मी उबलने लगी। लंड अब पूरी तरह 7 इंच तनकर खड़ा हो चुका था और उनकी लार से चमक रहा था।
फिर मैंने उसके बूब्स की गली में लंड को बहुत सैर करवाई और फिर मैंने उसे तीसरे राउंड में डॉगी बनाकर चोदा। मैंने उन्हें बेड पर लिटाया और उनके दोनों बूब्स को दोनों हाथों से कसकर दबाकर बीच में एक गहरी गली बना दी। फिर लंड को उस गली में डालकर जोर जोर से आगे पीछे करने लगा। उनके लचीले बूब्स लंड को चारों तरफ से दबा रहे थे और हर धक्के में निप्पल मेरी जांघों से रगड़ खा रहे थे। लंड की पूरी शाफ्ट उनके बूब्स के नरम मांस में फिसल रही थी और गर्म लार और पसीने से चिपचिपी हो गई थी। फिर मैंने उन्हें घुटनों और हाथों के बल डॉगी स्टाइल में खड़ा कर दिया। उनकी मोटी गोरी गांड मेरे सामने थी और चूत अभी भी सूजी हुई और रस से टपक रही थी। मैंने लंड का सिरा उनकी चूत पर लगाया और एक झटके में पूरा लंड अंदर ठोक दिया। अब वो तो अभी मानो बेहोश सी हो गई थी और एक बार डॉगी स्टाइल करते-करते वो तो गिर भी गई थी। उनके हाथ थककर लड़खड़ा गए और वो बेड पर मुंह के बल गिर पड़ीं लेकिन लंड अभी भी उनकी चूत के अंदर था।
फिर भी मैंने उसको छोड़ा नहीं और उसको पीछे की तरफ बेड पर लेटा दिया और उस पर पीछे से ही लंड पेलने लगा। मैंने उन्हें पीठ के बल लेटाकर दोनों टांगों को कंधों पर उठा लिया और फिर से पीछे से लंड घुसाया। उनकी चूत अब पूरी तरह ढीली और गर्म हो चुकी थी लेकिन मेरे हर तेज धक्के में वो कसकर सिकुड़ रही थी। अब उसे मजा तो आ रहा था लेकिन मैंने उसकी सारी एनर्जी खत्म कर दी थी। उनकी सांसें बहुत तेज थीं और शरीर पसीने से तरबतर था। उनकी आंखें आधी बंद थीं और मुंह से सिर्फ हल्की मोआन निकल रही थी। फिर आखिरकार मैंने तीसरी बार अपना पानी उसकी गांड पर छोड़ दिया और फिर मैंने उससे कहा कि चलो अब मैं अपने काम के लिए निकलता हूं। वो बोली कि बैंक का काम तो होता ही रहेगा लेकिन ये काम हर हफ्ते में 2-3 बार मेरे लिए करना पड़ेगा। अब हफ्ते में दो या तीन बार तो मैं उसको चोद ही देता हूं।
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