Pyasi Bhabhi Sex Story: हाय दोस्तों, मैं अभय मौर्या, जनपद गाजीपुर का मूल निवासी हूं। मेरी उम्र करीब २९ वर्ष है। मैं औसत शरीर का हूं, दिखने में स्मार्ट लगता हूं। मैं मिर्जापुर में सरकारी नौकरी करता हूं। मैं अन्य लोगों की तरह यह नहीं कहूंगा कि मेरा लंड ८ इंच या १० इंच लंबा है। मेरा लंड सात इंच लंबा और काफी मोटा है।
यह हॉर्नी भाभी फक स्टोरी वर्ष २०१५ की है। मेरा ट्रांसफर जनपद मिर्जापुर में हुआ। मैं अपना सामान लेकर मिर्जापुर पहुंचा। वहां एक दुकानदार से किराए के रूम के बारे में पूछा तो उसने एक नंबर दिया। मैंने कॉल किया तो एक सुंदर सी मधुर आवाज आई। मैंने किराए के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि मेरे यहां एक सिंगल रूम खाली है।
मैं उनके बताए पते पर पहुंचा और घंटी बजाई। कुछ पल बाद भाभी “आती हूं” कहती हुई बाहर आने की आवाज देने लगीं। थोड़ी देर में दरवाजा खुला। सामने खड़ी थीं एक बेहद गोरी, लंबी कद-काठी वाली, पतली कमर की भाभी। उनकी उम्र लगभग ३२ साल रही होगी। हल्के गुलाबी रंग की साड़ी पहने हुए थीं, जिसमें उनका फिगर और भी खूबसूरत लग रहा था। साड़ी का पल्लू कंधे पर हल्का सा लहरा रहा था। मैं उन्हें देखता ही रह गया।
उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा, “जी कहिए?”
मैंने हड़बड़ाते हुए कहा, “आपसे फोन पर बात हुई थी… किराए के रूम के बारे में।”
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उन्होंने कहा, “हां-हां, याद आ गया। चलिए, रूम दिखा देती हूं।”
वे मुड़ गईं और मुझे अंदर आने का इशारा किया। मैं उनके पीछे चल पड़ा। चलते समय उनकी पतली कमर और गोल, भरी हुई गांड साड़ी के नीचे साफ नजर आ रही थी। हर कदम के साथ उनकी गांड हल्के-हल्के ऊपर-नीचे हो रही थी, जिससे मेरा ध्यान बार-बार वहां जा रहा था। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, जिससे उनकी नाजुक कमर और पीठ की गोरी चमक दिख रही थी।
उन्होंने एक कमरे का दरवाजा खोला। कमरा साफ-सुथरा था, लेकिन मेरा ध्यान भाभी पर ही टिका हुआ था। वे रूम दिखाते हुए आगे-पीछे घूम रही थीं। जब वे मुड़ीं तो उनके बड़े-बड़े, गोल स्तनों का उभार ब्लाउज से साफ झलक रहा था। ब्लाउज के ऊपरी हिस्से में दो बटन ऐसे दबे हुए थे मानो किसी भी वक्त टूट जाएं। उनकी साड़ी नीचे से थोड़ी ऊपर उठी हुई थी, जिससे उनकी पिंडलियां और गोरी टांगें दिख रही थीं।
मैंने बिना ज्यादा सोचे कहा, “रूम बहुत अच्छा है भाभी, मैं ले लेता हूं।”
उन्होंने मुस्कुराकर कहा, “अच्छा लगा आपको तो ठीक है। चलिए, बैठक में बैठिए। पानी पी लीजिए, गर्मी बहुत है।”
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उनके इस कहने पर मुझे लगा कि शायद वे मेरी नजरों को समझ रही हैं। उनके हुस्न को देखकर सच में मेरा गला सूख गया था। मैं उनके पीछे-पीछे ड्राइंग रूम में आ गया। उन्होंने मुझे सोफे पर बैठने को कहा और खुद किचन की तरफ चली गईं।
मैं बैठकर उन्हें देखता रहा। किचन जाते समय उनकी कमर की मटक और गांड की लहरें देखकर मेरा लंड पैंट के अंदर तनने लगा। उनकी साड़ी पीछे से चिपकी हुई थी, जिससे गांड के दोनों गोल हिस्से साफ उभर रहे थे। कुछ ही पल में वे एक गिलास ठंडा पानी लेकर लौटीं।
वे मेरे सामने सोफे पर बैठ गईं और गिलास मेरी तरफ बढ़ाया। बैठते वक्त उनका पल्लू थोड़ा और सरका, जिससे उनके गहरे क्लिवेज की झलक मिली। मैंने गिलास लिया और पानी पीते हुए उनकी आंखों में देखा। वे भी मुझे देख रही थीं और हल्की मुस्कान लिए हुए थीं।
फिर बातचीत शुरू हुई। उन्होंने मेरा नाम, उम्र, परिवार, नौकरी के बारे में पूछा। मैंने सब बता दिया। फिर उन्होंने पूछा, “आपकी शादी नहीं हुई क्या?”
मैंने कहा, “नहीं भाभी, अभी नौकरी लगी है। कोई अच्छी लड़की नहीं मिली, इसलिए टालता रहा।”
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उन्होंने हंसते हुए कहा, “अरे अच्छा लड़का हो, अच्छी लड़की जल्दी मिल जाएगी।”
फिर मैंने उनके बारे में पूछा। उन्होंने अपना नाम मानसी बताया। बताया कि उनके पति ठेकेदारी करते हैं और ज्यादातर समय चुनार की पहाड़ी पर रहते हैं, जहां उनका काम चलता है। दिन भर वहीं रहते हैं, शाम को ही घर आते हैं।
मैंने बच्चों के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, “अभी बच्चे नहीं चाहिए थे। जिंदगी के मजे ले रही हूं। बाद में देखेंगे।”
उनके इस कहने पर मेरे मन में कुछ और ही ख्याल आने लगे। मैंने आगे पूछा कि घर में और कौन है। उन्होंने बताया कि वे चुनार के मूल निवासी हैं। गांव में सास-ससुर और देवर रहते हैं, लेकिन यहां मिर्जापुर में सिर्फ वे और उनके पति रहते हैं।
अंत में मैंने कहा, “भाभी, रूम मुझे बहुत पसंद आया। शाम को अपना सामान लेकर शिफ्ट हो जाऊंगा।”
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शाम को मैं सामान लेकर पहुंचा। भाभी घर पर अकेली थीं, पति अभी नहीं आए थे। मैं सामान सेट करने लगा। काफी देर हो गई। तभी भाभी आईं और पूछने लगीं, “आप खाना कहां खाएंगे?” मैंने कहा कि टिफिन लगवा लूंगा। इस पर उन्होंने कहा, “आज देर हो गई है, आज हमारे यहां खा लीजिएगा, कल से टिफिन लगवा लीजिए।” मैंने थैंक्यू कहा।
देर शाम को उनके पति आए। वे मेरे कमरे में आए। उनका नाम राजेश था। उम्र करीब ४० वर्ष। लेकिन वे इतनी खूबसूरत बीवी के पति नहीं लग रहे थे। पेट निकला हुआ था और सिर पर आधे से ज्यादा बाल गायब। थोड़ी बात के बाद उन्होंने कहा, “चलो अभय, खाना खा लेते हैं!”
मैं उनके साथ नीचे आया। थोड़ी देर बाद भाभी खाना लेकर आईं। मानसी भाभी झुकीं तो गहरे गले के सूट से उनकी भरी-भरी चूचियां साफ दिख रही थीं। ब्लाउज का गला इतना नीचा था कि दोनों स्तन ऊपर से आधे तक नंगे होकर उभरे हुए थे, गहरी दरार साफ दिख रही थी। उनकी चूचियां इतनी गोल और मुलायम लग रही थीं कि बस मन कर रहा था कि अभी हाथ बढ़ाकर उन्हें दबा लूं और मुंह में लेकर चूस लूं। मेरे लंड ने तुरंत हरकत शुरू कर दी। वह पैंट के अंदर सख्त होकर उभरने लगा। मैंने जैसे-तैसे नजरें नीचे करके खाना खाया, लेकिन बार-बार उनकी चूचियों की तरफ नजर चली जाती। खाना खत्म करके मैं कमरे में लेट गया। अभी भी दिमाग में मानसी भाभी की वही चूचियां घूम रही थीं। मैंने पैंट नीचे की, लंड बाहर निकाला और उसे जोर-जोर से मलने लगा। कुछ ही देर में झटके के साथ वीर्य निकल गया। मैं थककर सो गया।
सुबह तैयार होकर ऑफिस चला गया। यही रोज की दिनचर्या बन गई। लगभग १० दिनों बाद की बात है। उस दिन ऑफिस में सिर दर्द होने लगा। छुट्टी लेकर रूम पर आया। मेन गेट खुला था। मैं अंदर अपने रूम में गया। प्यास लगी। पानी खत्म था। बोतल लेकर मानसी भाभी को आवाज लगाने लगा। कई बार जोर-जोर से आवाज देने के बाद भी जवाब नहीं आया तो मैं उनके बेडरूम के पास पहुंचा।
दरवाजा थोड़ा खुला था। मैंने हल्का सा धक्का दिया तो दरवाजा पूरा खुल गया। अंदर का नजारा देखकर मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं। मानसी भाभी पूरी तरह नंगी बिस्तर पर लेटी थीं। उनकी दोनों टांगें फैली हुई थीं। एक हाथ में मोबाइल था, कान में इयरफोन लगे हुए थे। दूसरे हाथ से वे एक मोटा, काला डिल्डो अपनी चूत में धीरे-धीरे अंदर-बाहर कर रही थीं। डिल्डो पर उनकी चूत का रस चमक रहा था। मोबाइल की स्क्रीन पर एक लड़की नंगी लेटी हुई थी और वही डिल्डो अपनी चूत में जोर-जोर से डाल रही थी, कराह रही थी। मानसी भाभी की आंखें बंद थीं और मुंह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं। उनकी चूचियां ऊपर-नीचे हो रही थीं। निप्पल सख्त और खड़े हुए थे। उनकी चूत के बाल साफ किए हुए थे, सिर्फ एक पतली लकीर बची थी। डिल्डो हर बार अंदर जाते ही उनकी चूत से चटकने की आवाज आ रही थी।
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दरवाजा खुलते ही उनका ध्यान मेरी तरफ गया। उन्होंने झटके से मोबाइल बिस्तर पर फेंका, डिल्डो चूत से बाहर निकाला और तेजी से चादर खींचकर अपने शरीर को ढक लिया। डिल्डो अभी भी उनकी जांघों के बीच चमक रहा था। मैं पत्थर की तरह खड़ा रह गया। तभी उन्होंने कांपती आवाज में कहा, “क्या हुआ? तुम बाहर चलो, मैं आती हूं!”
मैं बाहर सोफे पर जाकर बैठ गया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। थोड़ी देर बाद भाभी हल्की नीली नाइटी पहनकर आईं। नाइटी इतनी पतली थी कि उनके शरीर की हर आकृति साफ दिख रही थी। शर्म से उनकी नजरें नीचे थीं। उन्होंने धीरे से कहा, “तुम्हें दरवाजा खटखटाकर या जोर से आवाज देकर बुलाना चाहिए था… तुम ऐसे अंदर क्यों आ गए?” मैंने कहा, “भाभी, मैंने कई बार आवाज लगाई, आपने नहीं सुनी तभी अंदर आ गया।”
वे चुप रहीं। मैं समझ गया कि वे काफी चुदासी हैं। एक पल सोचकर मैंने साफ-साफ कहा, “भाभी, राजेश भैया आपकी अच्छे से चुदाई नहीं कर पाते क्या, जो आप डिल्डो से चूत की चुदाई कर रही थीं?”
यह सुनकर भाभी ने मुझे देखा। उनकी आंखों में शर्म के साथ-साथ एक अजीब सी चमक थी। शायद मैं उनके लिए अब एक संभावना बन गया था। वे मुझे कुछ पल निहारती रहीं। फिर उदास स्वर में बोलीं, “तुम्हारे भैया अक्सर लेट आते हैं और थक-हारकर सो जाते हैं।” मैंने सवालिया नजरों से देखा तो वे आगे बोलीं, “और सेक्स?” उन्होंने गहरी सांस लेकर कहा, “महीने में दो-तीन बार से ज्यादा नहीं कर पाते!”
अब मैं उन्हें प्यासी निगाहों से देख रहा था तो वे और खुल गईं। “यदि सेक्स करते भी हैं तो चार-पांच मिनट में काम तमाम कर सो जाते हैं। मैं तड़पती रह जाती हूं। इसलिए मैंने यह डिल्डो मंगवाया है। मेरे बच्चे न होने का कारण भी यही है… वे मेरी चूत ठीक से नहीं चोद पाते!” इतना कहकर भाभी रोने लगीं।
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मैंने मौका देखा और उन्हें सहारा दिया। जैसे ही हाथ लगाया, उन्होंने मुझे कसकर गले लगा लिया। मैंने भी उन्हें बांहों में भरकर कहा, “भाभी, यदि बुरा न मानें तो एक बात कहूं?” उन्होंने गर्म सांसें छोड़ते हुए कहा, “हां, बताओ!”
मैंने कहा, “भाभी, आप यदि बुरा न मानें तो मैं आपको इस डिल्डो से ज्यादा मजा दे दूंगा।” भाभी ने कहा, “यदि राजेश को पता चल गया तो बहुत बुरा होगा, वे मेरी जान ले लेंगे!” मैंने कहा, “आप मत बताना और मैं भी नहीं बताऊंगा तो कैसे पता चलेगा?”
भाभी चुप रहीं। मैंने उनकी मौन स्वीकृति मान ली। उनकी पीठ पर हाथ फेरने लगा, चूतड़ दबाने लगा। मेरी उंगलियां उनकी नरम पीठ पर धीरे धीरे ऊपर नीचे घूम रही थीं। फिर मैंने दोनों हाथों से उनके मोटे चूतड़ों को जोर से दबाया और मसलने लगा। मेरा लंड पूरी तरह अकड़कर खड़ा हो गया था और भाभी की चूत के पास चुभ रहा था। भाभी को इसका पूरा अहसास हो गया। उन्होंने तुरंत मुझे किस करना शुरू कर दिया। मैं भी उन्हें चूमने लगा। हम दोनों के होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे। मेरी जीभ उनकी जीभ से खेल रही थी। गर्म सांसें एक दूसरे के मुंह में जा रही थीं।
लगभग ५ मिनट किस करने के बाद उन्होंने कहा, “चलो, बेडरूम में चलते हैं!” मैंने उन्हें सोफे पर धकेला और नाइटी उतार दी। कसम से भाभी बिल्कुल कांटा माल लग रही थीं। उनकी गोरी चमकदार त्वचा, बड़े बड़े गोल चूचे, पतली कमर और मोटी गोल चूतड़। नाइटी के नीचे कुछ नहीं पहना था। उनकी चूत पूरी तरह नंगी और रस से भीगी हुई थी। मैंने कहा, “भाभी, आप तो काम की देवी लग रही हो!” उन्होंने कहा, “मुझे भाभी मत कहो, मानसी कहो।”
मैंने उन्हें गोद में उठाया और बेड पर लिटा दिया। उनकी नंगी चूत मेरे सामने थी। सफाचट चूत रो रही थी। मैंने मुंह लगा दिया और चाटने लगा। पहले मैंने अपनी जीभ से उनकी चूत की दोनों लेबिया को ऊपर से नीचे चाटा। फिर क्लिटोरिस को हल्के से चूसा। मानसी भाभी ने मेरा सिर चूत पर दबाया। मैंने जीभ अंदर डालकर बेताबी से चाटना शुरू किया। मेरी जीभ उनकी चूत के अंदर बाहर हो रही थी। मैं चूत के रस को पी रहा था। थोड़ी देर में भाभी आह आह करने लगीं। “आह्ह… अभय… और जोर से… ओह्ह… कितना अच्छा लग रहा है…” मैंने और तेज चाटा, दो उंगलियां भी अंदर डाल दीं और अंदर बाहर करने लगा। कुछ ही पलों में वे अकड़कर झड़ गईं। “आआह्ह्ह… हाय… मैं झड़ गई… ओह्ह…” उनका पूरा शरीर कांप उठा और चूत से झरना सा बह निकला।
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मैंने उनकी चूत चाटकर साफ कर दी। भाभी बोलीं, “मुझे आज तक इतना मजा नहीं आया था!” मैंने कहा, “अभी तो शुरुआत है मेरी जान, अभी तुमने मेरा लंड भी नहीं देखा।” मैं उन्हें किस करने लगा, चूचियों से खेलने लगा। मैंने एक चूची मुंह में ले ली और चूसने लगा। दूसरे को हाथ से दबा रहा था। भाभी फिर गर्म हो गईं।
उन्होंने मेरे कपड़े उतारे। मेरा लंड देखकर बोलीं, “तुम्हारा लंड मेरे पति से काफी मोटा और लंबा है… आज मेरी चूत फाड़ दो… आज मुझे ऐसा चोदो कि स्वर्ग का अनुभव हो जाए!” मैं उनकी दोनों चूचियों को बारी बारी चूसता रहा, एक हाथ से दबाता रहा। मानसी भाभी मेरे लंड से ऐसे खेल रही थीं जैसे पहली बार देखा हो। उन्होंने लंड को हाथ में लिया और ऊपर नीचे रगड़ने लगीं।
मैंने इशारा किया कि लंड चूसो। भाभी ने तुरंत मुंह में लिया और चूसने लगीं। पहले उन्होंने लंड के सिरे को चूसा, जीभ से चाटा। फिर धीरे धीरे पूरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगीं। “ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गोग…” वे मजे से चूस रही थीं, सिर ऊपर नीचे कर रही थीं। मैं सातवें आसमान पर था। उन्होंने कहा, “एक साथ करें!” मैं ६९ की पोजीशन में आ गया। मैं नीचे लेट गया, भाभी ऊपर आ गईं। मैं उनकी चूत चाट रहा था, वे मेरा लंड चूस रही थीं। मेरी जीभ उनकी चूत में घुस रही थी और वे मेरे लंड को गले तक ले जा रही थीं।
कुछ देर बाद भाभी बोलीं, “जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डाल दो!” मैंने पोज सेट किया और लंड चूत पर लगाया। लंड के सिरे को उनकी चूत की लेबिया पर रगड़ा। फिर एक तगड़ा धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। भाभी की चूत बहुत गीली थी तो पूरा लंड आराम से अंदर चला गया। “आह्ह… ओह्ह… कितना मोटा है… भर गया मेरी चूत… आह्ह…” मैंने एक पल रुक कर महसूस किया, उनकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़े हुए थी।
मैं धीरे धीरे धक्का लगाने लगा। पहले धीमी गति से लंड अंदर बाहर कर रहा था। भाभी बोलीं, “पहले धीरे… फिर गाड़ी भगाना!” मैंने रसीला करते हुए धीरे चुदाई की। फिर धीरे धीरे जोर जोर से धक्के मारने लगा। भाभी नीचे से अपनी गांड उठाकर लंड ले रही थीं। हर धक्के पर उनकी चूत से पच पच की आवाज आ रही थी। “आह… इह्ह… ओह्ह… और जोर से अभय… फाड़ दो मेरी चूत… ह्ह्ह… ओह्ह…” मैंने उनकी कमर पकड़ ली और तेज तेज ठोकने लगा।
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करीब १० मिनट चुदाई के बाद भाभी फिर झड़ गईं। “आआह्ह्ह… हाय… फिर झड़ गई… ओह्ह…” उनकी चूत मेरे लंड को दबा रही थी। मैं लगा रहा। थोड़ी देर बाद भाभी बोलीं, “अब तुम लेट जाओ, मैं ऊपर आती हूं!” मैं चित लेट गया। भाभी ने लंड मुंह में लेकर अच्छे से गीला किया। फिर अपनी चूत को मेरे लंड पर सेट करके धीरे से बैठ गईं। लंड पूरा अंदर चला गया। वे कूदने लगीं। ऊपर नीचे उछल रही थीं। “ऊं… ऊं… आह्ह… कितना गहरा जा रहा है… ओह्ह…” उनकी चूचियां उछल रही थीं। मैंने उन्हें पकड़कर दबाया।
फिर हमने अलग अलग स्टाइल में चुदाई की। मैंने उन्हें कुत्ते की पोजीशन में किया। पीछे से लंड डाला और तेज चोदा। फिर साइड में लेटकर एक टांग उठाकर चोदा। आधा घंटा तक विभिन्न तरीकों से चुदाई चली। मेरा माल निकलने को हुआ तो मैंने कहा, “जान, मेरा माल निकलने वाला है!” भाभी ने चूत खींची, उकड़ू बैठकर मुंह खोल दिया। मैंने लंड उनके मुंह के पास रखा और सारा माल उनके मुंह में गिरा दिया। गाढ़ा वीर्य उनके मुंह में भरा। भाभी ने मजे से चाट लिया और लंड साफ कर दिया।
हम दोनों लेट गए। भाभी मुझे चिपकाकर सोई रहीं। बाद में बोलीं, “मुझे आज तक चूत की चुदाई का ऐसा सुख नहीं मिला था।” शाम तक हमने चार बार चुदाई की। फिर पति के आने का टाइम हुआ तो मैं अपने कमरे में चला गया।
इस तरह मेरी और मानसी भाभी की चुदाई शुरू हुई। रोज शाम ५ बजे ऑफिस से आता तो सीधा उनके पास चला जाता और रोज चुदाई करता। भाभी पहले से खुश रहने लगी थीं। एक दिन मैंने गांड मारने को कहा तो बोलीं कि किसी खास मौके पर यह तोहफा मिलेगा।
बाद में एक दिन राजेश भैया अचानक घर लौट आए। वे बाहर से ही आवाज़ लगा रहे थे, लेकिन हम दोनों अंदर बेडरूम में थे। मैं मानसी भाभी को पीछे से पकड़े हुए था, उनकी कमर पर हाथ रखकर जोर-जोर से धक्के मार रहा था। भाभी की साड़ी कमर तक ऊपर चढ़ी हुई थी, पेटीकोट भी उठा हुआ था और उनकी चूत मेरे लंड से पूरी तरह भरी हुई थी। हर धक्के के साथ भाभी के मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं, “आह्ह… अरमान… और जोर से… हाय राम…”
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तभी दरवाज़ा खुला और राजेश भैया अंदर आ गए। एक पल के लिए सब रुक गया। मैं और भाभी दोनों एकदम सन्न रह गए। मेरा लंड अभी भी भाभी की चूत के अंदर था, धड़क रहा था। राजेश भैया की आंखें फैल गईं। उनका चेहरा लाल हो गया, गुस्से से कांपने लगे।
“ये क्या कर रहे हो तुम दोनों?!” उनकी आवाज़ भारी और गुस्से से भरी थी।
मैंने जल्दी से अपना लंड बाहर निकाला और चादर खींचकर अपने आगे कर ली। मानसी भाभी ने भी साड़ी नीचे की और रोने लगीं। “राजेश जी… मुझे माफ़ कर दो… मैं…”
राजेश भैया कुछ देर खामोश खड़े रहे। फिर उन्होंने धीरे से दरवाज़ा बंद किया और अंदर आकर कुर्सी पर बैठ गए। उनका चेहरा अब गुस्से से ज्यादा उदास और हारा हुआ लग रहा था।
“मुझे पता था… कुछ तो गड़बड़ है। तुम दोनों की नज़रें देखकर समझ जाता था। लेकिन आज खुद देख लिया।” उनकी आवाज़ में दर्द था।
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फिर उन्होंने लंबी सांस ली और कहा, “मैं जानता हूं… मैं तुम्हें वो खुशी नहीं दे पाता जो तुम्हें चाहिए। मेरी कमजोरी है… डॉक्टर ने भी कह दिया था। लेकिन ये सब देखकर… दिल टूट गया।”
हम दोनों चुपचाप सुन रहे थे।
मानसी भाभी ने उनके हाथ पकड़े और रोते हुए कहा, “मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं… लेकिन शरीर की भूख… मैं क्या करूं?”
फिर राजेश भैया ने मेरी तरफ देखा और धीरे से बोले, “अगर तुम दोनों को एक-दूसरे में सुकून मिलता है… तो मैं बीच में नहीं आऊंगा। लेकिन ये बात घर से बाहर नहीं जानी चाहिए।”
उस दिन के बाद राजेश भैया ने कभी विरोध नहीं किया। बल्कि कुछ दिनों बाद एक रात उन्होंने खुद कमरे में आकर कहा, “मैं भी देखना चाहता हूं… और शायद… साथ भी आऊं।”
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पहली बार थ्रीसम तब हुआ जब राजेश भैया बिस्तर के किनारे बैठ गए। उनकी आंखों में एक अजीब सी हार और उत्सुकता थी। मैंने मानसी भाभी को पहले से ही पूरी तरह नंगा कर दिया था। उनकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी, होंठ फूले हुए और चिकने। चुचियां सख्त थीं, निप्पल तने हुए और गहरे भूरे। मैंने भाभी को घुटनों के बल बिठाया और अपनी दो उंगलियां सीधी उनकी चूत में डाल दीं। भाभी ने जोर से सिसकारी भरी और कमर हिलाई। राजेश भैया अपनी पैंट खोलकर बैठे-बैठे अपना लंड सहलाने लगे, लेकिन उनका लंड आधा ही तना हुआ था, जैसे शर्म और उत्तेजना दोनों साथ-साथ लड़ रहे हों।
मैंने भाभी की कमर पकड़कर उन्हें चारों हाथ-पैरों पर कर दिया। उनकी गांड ऊपर उठी हुई थी, चूत नीचे से टपक रही थी। मैंने अपना सख्त लंड निकाला और उसकी सुपारी को पहले उनकी चूत के होंठों पर कई बार रगड़ा। भाभी कराह रही थीं, “अंदर डालो ना… जल्दी…” राजेश भैया चुपचाप देख रहे थे, उनका हाथ अब भी अपने लंड पर था लेकिन वे कुछ बोल नहीं पा रहे थे।
मैंने धीरे-धीरे अपना पूरा लंड उनकी चूत में धकेल दिया। भाभी की चूत गर्म और कसी हुई थी। मैंने उनकी कमर दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के पर भाभी की गांड मेरे पेट से टकरा रही थी और चट-चट की आवाज कमरे में गूंज रही थी। राजेश भैया अब सामने आ गए थे। उनका लंड अब पूरी तरह खड़ा था लेकिन छोटा और पतला लग रहा था मेरे सामने। उन्होंने अपना लंड भाभी के मुंह के पास किया। भाभी ने बिना कुछ कहे मुंह खोला और उसे अंदर ले लिया। अब भाभी दोनों तरफ से भरी हुई थीं—मेरा मोटा लंड उनकी चूत में गहराई तक जा रहा था और राजेश भैया का लंड उनके मुंह में अंदर-बाहर हो रहा था।
मैंने धक्के और तेज कर दिए। “देखो राजेश भैया, आपकी बीवी कितनी जोर से चुद रही है। मेरे लंड पर कितनी चिपक रही है उनकी चूत।” राजेश भैया कुछ नहीं बोले, बस सांसें तेज हो गईं। भाभी का मुंह भरा हुआ था, वे सिर्फ गुर्र-गुर्र की आवाज निकाल पा रही थीं। मैंने एक हाथ से उनकी चुचियां मसलनी शुरू कीं, निप्पल को पकड़कर खींचा। “भाभी, बोलो ना… किसका लंड अच्छा लग रहा है?” भाभी ने मुंह से लंड निकालकर हांफते हुए कहा, “तुम्हारा… बहुत मोटा है… राजेश का तो बस… मुंह में ही ठीक लगता है।”
राजेश भैया का चेहरा लाल हो गया। वे शर्म से नीचे देखने लगे लेकिन लंड फिर भी खड़ा था। मैंने हंसते हुए कहा, “राजेश भैया, आपकी बीवी कह रही है आपका लंड सिर्फ मुंह के लिए है। चूत तो मेरी चाहिए उसे।” मैंने और जोर से पेलना शुरू किया। भाभी की चूत से रस टपक-टपक कर चादर पर गिर रहा था। राजेश भैया अब खुद को रोक नहीं पा रहे थे। उन्होंने अपना लंड तेजी से हिलाना शुरू कर दिया जबकि मैं उनकी बीवी को चोद रहा था।
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कई बार ऐसा हुआ। कभी मैं भाभी की चूत में गहराई तक पेलता और राजेश भैया सिर्फ देखते रहते, कभी वे अपनी उंगली भाभी की गांड में डालते लेकिन मैं उन्हें रोककर कहता, “नहीं भैया, गांड भी मेरी है। आप बस देखिए और हिलाइए अपना छोटा सा लंड।” कभी भाभी राजेश भैया को चूसतीं लेकिन बीच-बीच में मुंह निकालकर कहतीं, “तुम्हारा तो स्वाद भी नहीं आता… उसका तो गाढ़ा-गाढ़ा है।” और फिर मेरे लंड को चूसने लगतीं। हम तीनों एक-दूसरे के साथ पूरी तरह खुल गए थे—लेकिन राजेश भैया की जगह अब साफ थी—वे सिर्फ देखने वाले और हिलाने वाले बन गए थे।
उसके बाद मानसी भाभी मेरे बच्चे की मां बनीं। प्रेग्नेंसी के दौरान मैं उनकी चुदाई नहीं कर पाता था, तो भाभी ने अपनी दो सहेलियों को मेरे साथ भेजा। उनकी चूतें भी मैंने कई बार चोदीं। वह कहानी भी आगे सुनाऊंगा।
मैं आज भी मिर्जापुर में हूं और मानसी भाभी की चुदाई करता हूं। यह बात राजेश भैया के अलावा किसी को नहीं पता। भाभी की गांड चुदाई की कहानी भी फिर कभी बताऊंगा।
दोस्तों, यह मेरी पहली सेक्स कहानी है। उम्मीद है आपको पसंद आई होगी। कृपया कमेंट में अपनी राय जरूर दें।
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