बहकती बहू-27

Sasural me Bahan ki chudai – कहानी का पिछला भाग: बहकती बहू-26

सन्नी ने काम्या की धकापेल चुदाई शुरू कर दी। ब्लोजॉब के बाद वो और खूंखार हो गया था। वो जबरदस्त शॉट मार रहा था, जिससे काम्या के अस्थि-पंजर ढीले होने लगे। वो इस रात को काम्या के लिए यादगार बनाना चाहता था—ऐसी रात जो वो बार-बार चाहे। काम्या भी मुस्तैदी से मजे लूट रही थी। उसने सन्नी की कमर में अपने पैर लपेट लिए और उसकी चुदाई का लुत्फ उठाने लगी। मगर सन्नी के साथ चल पाना उसके लिए मुश्किल था। एक घंटे में सन्नी का ये तीसरा राउंड था, और वो झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।

दस मिनट में ही काम्या दो बार ऑर्गेज्म पा चुकी थी। अब उसकी योनि में दर्द होने लगा। सन्नी का मजा देने वाला लंड अब उसे सजा दे रहा था। काम्या: भैया, प्लीज अब बस करो ना! सन्नी: बस, मेरी रानी, बस माल तो निकल जाने दे!

‘रानी’ सुनकर काम्या लजा गई। काम्या: भैया, और कितना समय लोगे? सन्नी: बस जरा-सा रुक जा! तू टेंशन क्यों ले रही है? मजा ले ना! काम्या: भैया, खाक मजा लूं? अब तो दर्द दे रहा है! तुम्हारा कितना मोटा है? लग रहा है, जैसे अंदर पूरा छिल गया! सन्नी: बस, जान, दो मिनट की बात है! ये रात तू कभी नहीं भूलेगी, ना मुझे भूल पाएगी? काम्या: हाँ, इतने बेरहम आदमी को कौन भूल सकता है?

सन्नी ने ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। ऐसा लग रहा था, जैसे कोई फौजी दुश्मन पर भयानक हमला कर रहा हो। कमरे में सिर्फ काम्या की हल्की कराहें और सन्नी के ठप-ठप की आवाज गूंज रही थी। जबरदस्त कुटाई के बाद सन्नी ने एक बार फिर काम्या की कोख को अपने बीज से लबालब भर दिया। वो कुछ देर काम्या के ऊपर पड़ा रहा, फिर बगल में लेट गया। काम्या बेसुध-सी पड़ी थी।

जब मदनलाल ने पहली बार उसे चोदा था, तब उसे पता चला था कि मर्द किसे कहते हैं। आज उसे समझ आया कि जवान मर्द की चुदाई क्या होती है। जवान और बूढ़े का फर्क अब साफ था। आधे घंटे बाद उसने सन्नी से अपने कपड़े मांगे और किसी तरह पहने। बिस्तर से उतरकर चलने की कोशिश की, तो वो लड़खड़ा गई। सन्नी ने फौरन उसे अपनी बाहों में थाम लिया। काम्या बहुत थक चुकी थी, और उसकी योनि में दर्द हो रहा था। सन्नी: दीदी, तुम ठीक तो हो? काम्या: देख ले, कितना बुरा हाल कर दिया अपनी दीदी का? अपनी बहन को कोई इतना सताता है? सन्नी: सॉरी, दीदी! थोड़ा आराम कर लो, फिर जाना।

उसने काम्या को बिस्तर पर अपनी बाहों में सुला दिया। एक घंटे बाद काम्या लड़खड़ाती हुई अपने कमरे में गई और बेसुध-सी सो गई। जो काम्या पापबोध के साथ सन्नी के कमरे में गई थी, अब वो बेफिकर थी। रात भर उसे सुंदर सपने आए—कभी फूलों के बगीचे में, कभी पहाड़ों पर, कभी बच्चों के साथ खेलते, तो कभी चहचहाते पक्षियों के बीच। सुबह उठकर वो इन सपनों का अर्थ नहीं समझ पाई। फिर उसे पापा की बात याद आई कि जब जिंदगी में कुछ अच्छा होता है, तो सुंदर सपने आते हैं। उसने सोचा, “तो क्या कल जो हुआ, वो अच्छा था?” सन्नी की चुदाई याद आते ही उसकी योनि में दर्द का अहसास हुआ। “हे भगवान, कितना उतावला है सन्नी! कितना स्टैमिना है—बिल्कुल घोड़े जैसा, थकता ही नहीं!”

उसका चेहरा दमक रहा था, और आँखों में अजीब-सा नशा था। सुबह वो नहा-धोकर बन-ठनकर निकली। मदनलाल उसकी चमक देखकर सोच रहा था कि कल कई दिन बाद वो बहू के पास गया था, शायद इसलिए वो खुश है। वो नहीं जानता था कि उसने बहू को मंझधार में छोड़ दिया था, और सन्नी ने उसकी नैया पार लगाई।

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काम्या सन्नी के कमरे में गई। वो खर्राटे मार रहा था। काम्या: सन्नी, उठ! दिनभर सोता रहेगा? सन्नी: दीदी, सोने दो, नींद आ रही है। काम्या: नहीं, उठ! नौ बज गए। मैं तेरे लिए चाय लाती हूँ। सन्नी: दीदी, बहुत थका हुआ हूँ। काम्या: किसने बोला था थकने को? खुद ही रातभर उल्टे-सीधे काम करता रहा!

काम्या ने कनखियों से उसे देखा और किचन में चली गई। जब वो चाय-नाश्ता लेकर आई, सन्नी सामान पैक कर रहा था। उसे देखकर वो रुक गया। साड़ी में वो बेहद सुंदर लग रही थी। उसके चेहरे पर खुशी और होंठों पर मुस्कान थी। काम्या: सन्नी, ये पैकिंग क्यों कर रहा है? सन्नी: दीदी, आज घर जाना है।

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सन्नी जाना नहीं चाहता था, मगर काम्या का मन ले रहा था। काम्या: इतनी जल्दी क्या है? पहली बार आया है, थोड़ा रुक नहीं सकता? सन्नी: दीदी, मेरा काम तो कल हो गया। अब रुककर क्या करूँगा?

उसने काम्या की ओर अर्थपूर्ण नजर डाली। काम्या: तो क्या हुआ? दो-तीन दिन रुक, फिर जाना। तुझे शहर भी दिखा दूँगी। सन्नी: दीदी, रहने दो। मैं तुम्हें परेशान नहीं करना चाहता। काम्या: परेशानी वाली क्या बात? ये तेरा ही घर है। सन्नी: दीदी, मैंने कल रात तुम्हें परेशान कर दिया था।

सन्नी ने इतनी बड़ी बात हल्के ढंग से कही, जैसे कुछ हुआ ही न हो। काम्या ने शर्म से आँखें नीची कर लीं। काम्या: तो क्या हुआ? मैंने कोई शिकायत की? कल तू बड़ा कह रहा था कि मुझे बचपन से प्यार करता है, फिर अब दीदी को छोड़कर इतनी जल्दी क्यों जाना चाहता है? काम हो गया, तो दीदी अच्छी नहीं लग रही? सन्नी: नहीं, दीदी, ऐसा कैसे हो सकता? तुम तो इतनी अच्छी हो! काम्या: चुपचाप नाश्ता कर, फिर लंच के बाद मार्केट जाएँगे। ये पैकिंग खोल दे!

काम्या चली गई। सन्नी खुशी से चहक उठा। काम्या ने उसे स्वीकार कर लिया था। अब उसकी बल्ले-बल्ले थी।

लंच के बाद काम्या सन्नी के साथ मार्केट निकली। उसने सेक्सी लाल ट्राउजर और टी-शर्ट पहनी थी, जो सुनील लाया था, मगर उसने पहले कभी नहीं पहने थे। वो बेहद हॉट लग रही थी। शांति और मदनलाल भी उसके मॉडर्न रूप को देखकर हैरान थे। मदनलाल इसे अपना असर मान रहा था। शांति उसे कभी नहीं टोकती थी।

सन्नी गाड़ी चला रहा था, और काम्या पीछे बैठी थी। घर से दूर होते ही वो सन्नी से चिपक गई। उसके बूब्स सन्नी की पीठ से लगे। उसने ब्रा भी नहीं पहनी थी। सन्नी का लंड बगावत पर उतर आया। एक ब्रेकर पर गाड़ी उछली, तो काम्या के बूब्स उसकी पीठ में धंस गए। सन्नी: आह! काम्या: क्या हुआ, सन्नी? सन्नी: दीदी, गड़ रहे हैं। काम्या: क्या गड़ रहा है? सन्नी: आपके वो। काम्या: चुप, बदमाश! बहुत मारूँगी! इतनी सॉफ्ट चीज तुझे गड़ रही है, और जब तुम लोग अपना खंजर घोंप देते हो, तब नहीं गड़ता? सन्नी: दीदी, तब तो मजा आता है।

काम्या ने उसे चिकोटी काट दी। दोनों एक पार्क में बैठ गए। सन्नी ने पूछा, सन्नी: आपसे कुछ पूछना है। काम्या: क्या? सन्नी: दीदी, आपका और अंकल का संबंध कैसे बना?

काम्या चुप रही, फिर सब विस्तार से बताने लगी। एक दिन की चुदाई में ही वो सन्नी से इतनी प्रभावित हो गई थी कि उसे भाई नहीं, प्रेमी मानने लगी। उसने बताया कि सुनील बिस्तर में कमजोर है। काम्या: सन्नी, अगर तेरे जीजू पूरे मर्द होते, तो मुझे ये सब नहीं करना पड़ता। सन्नी: चलो, दीदी, मेरे लिए तो अच्छा हुआ। काम्या: चुप, मारूँगी! मैं तुझे कितना शरीफ समझती थी, मगर मुझे क्या पता था कि तेरी नियत बचपन से मुझ पर खराब थी! सन्नी: दीदी, नियत मत बोलो। मैं तुमसे मन ही मन प्यार करता था। काम्या: पर तूने कभी बताया नहीं। सन्नी: कैसे बताता, दीदी? तुम बहन लगती हो, और मुझसे उम्र में बड़ी थी। बस घुट-घुटकर जी रहा था। काम्या: और मेरी नहाने की वीडियो देखकर काम चला रहा था, है ना? सन्नी: दीदी, एक बात बोलूँ, बुरा तो नहीं मानोगी? काम्या: अब तेरे-मेरे बीच बुरा मानने को कुछ बचा ही नहीं। बोल! सन्नी: दीदी, मैंने तुम्हारी वीडियो देखकर ही जिंदगी में पहली बार मास्टरबेट किया था। काम्या: क्या?! हे भगवान, सन्नी, तू कितना गंदा है! कोई अपनी बहन को देखकर ऐसा करता है? सन्नी: दीदी, तुम्हें नहीं पता, ज्यादातर लड़के अपनी बहन को याद कर ही पहली बार मास्टरबेट करते हैं। काम्या: ऐसा कैसे हो सकता है? लड़के ऐसा क्यों करेंगे? सन्नी: दीदी, बाहर की लड़कियों का शरीर देखना मुश्किल होता है। घर में बहनें लापरवाह रहती हैं। लड़के उन्हें नहाते, सोते, ड्रेस चेंज करते देखते हैं, और वो सीन चैन नहीं लेने देते।

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काम्या सन्न रह गई। उसे अपनी सहेली पिंकी याद आई, जो अपने कजिन से चिपकी रहती थी। सन्नी: दीदी, मैं तुम्हें कैसा लगा? काम्या: चुप, बेशरम! तुझमें शर्म तो है ही नहीं, कुछ भी बोल देता है!

दोनों फिल्म देखने चले गए। काम्या: सन्नी, कौन-सी फिल्म देखनी है? सन्नी: दीदी, जहाँ ज्यादा पब्लिक न हो। काम्या: तुझे पब्लिक से क्या लेना-देना? सन्नी: दीदी, मुझे न पब्लिक से लेना-देना है, न फिल्म से। मुझे तो बस तुमसे लेना-देना है। काम्या: धत, पगला!

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सिनेमाहॉल में काम्या सन्नी का हाथ पकड़कर ऐसे चल रही थी, जैसे पति-पत्नी हों। सुनील का हाथ तो वो बाहर कभी नहीं पकड़ती थी। सन्नी ने रातभर ऐसा जादू किया कि वो उसकी दीवानी हो गई। बालकनी में मुश्किल से चार-पाँच जोड़े थे, सभी यंग। लाइट बुझते ही सन्नी काम्या के संतरों पर टूट पड़ा। उसने उसकी शर्ट ऊपर की और बूब्स चूसने लगा। काम्या: सन्नी, प्लीज मत कर! कोई देख लेगा। सन्नी: दीदी, कोई नहीं देखेगा। तुम्हें दिख रहा है कोई?

काम्या ने देखा, किसी का सिर कुर्सी पर नहीं दिख रहा। इसका मतलब सब लड़कियाँ वही कर रही थीं। सन्नी उसके बूब्स का रस पी रहा था। काम्या की चूत से धार बह रही थी। 15 मिनट तक सन्नी दूध पीता रहा। फिर उसने अपना किंग कोबरा निकाला और काम्या के हाथ में पकड़ा दिया। काम्या ने मुट्ठी कस ली। वो सन्नी के कोबरा से खेलने लगी, कभी स्ट्रोक करती, कभी जोर से भींचती, मगर वो दबता नहीं था। सन्नी: दीदी, ब्लो करो ना। काम्या: क्या?! सन्नी, तू पागल है? ये पब्लिक प्लेस है। सन्नी: दीदी, चारों तरफ देखो, सब लड़कियाँ यही कर रही हैं।

काम्या ने देखा, सिर्फ लड़कों के सिर दिख रहे थे। काम्या: तुम्हारा मतलब, ये सब…? सन्नी: हाँ, दीदी, सब वही कर रही हैं। तुम भी करो। काम्या: नहीं, सन्नी, मैं खुले में ऐसा नहीं कर सकती। सन्नी: दीदी, प्लीज करो ना।

उसने काम्या का सिर नीचे झुकाने की कोशिश की। काम्या: सन्नी, नहीं, मैं नहीं करूँगी। सन्नी: दीदी, दो मिनट में हो जाएगा। काम्या: नो मीन्स नो। सन्नी: ठीक है, तो चलो घर। काम्या: ये क्या बात हुई? सन्नी: इस बोरिंग फिल्म में क्या करेंगे? काम्या: तो तू यही कराने लाया था? सन्नी: नहीं, ये कराने नहीं लाया, मगर जब सब कर रहे हैं, तो मैं यहाँ क्या करूँगा?

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काम्या ने सन्नी को नाराज देखकर उसके कंधे पर सिर रखा। काम्या: सन्नी, समझा कर। पब्लिक प्लेस में ये सब नहीं करते। कल रात तूने बोला, तो मैंने किया ना। फिर गुस्सा क्यों? सन्नी: दीदी, पब्लिक प्लेस उसे कहते हैं, जहाँ कोई देखने वाला हो। यहाँ कोई देख ही नहीं रहा। और मैं गुस्सा नहीं हूँ, गुस्सा तो ये है।

उसने फिर काम्या के हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया। काम्या ने महसूस किया कि सन्नी का लंड बेहद गर्म था। काम्या: सन्नी, ये तो बहुत गर्म है। तुझे बुखार है क्या? सन्नी: नहीं, इसे बुखार है। तुम्हारे प्यार का बुखार चढ़ गया है। प्लीज कर दो ना।

उसने फिर काम्या का सिर नीचे झुकाया। इस बार काम्या विरोध नहीं कर पाई। मर्दानी गंध ने उसे विचलित कर दिया। उसने मुँह खोलकर लंड निगल लिया। धीरे शुरू किया, मगर जल्दी ही तेजी दिखाई। वो सन्नी को जल्दी फुरसत करना चाहती थी। टॉकीज में ये करना उसे अजीब लग रहा था। वो जोर से चूसने लगी। सन्नी उसके बूब्स दबाने लगा। पब्लिक प्लेस का थ्रिल ऐसा था कि सन्नी जल्दी झड़ गया, और काम्या ने सारा पानी पी लिया।

काम होने के बाद दोनों का मन फिल्म में नहीं लगा। वो उठकर चले गए। काम्या ने एक दुकान पर गाड़ी रुकवाई और सन्नी के लिए जींस खरीदी। सन्नी ने भी जबरदस्ती काम्या के लिए ब्राइडल ब्रा-पैंटी खरीद ली।

काम्या: सन्नी, तू मधु को जानता है ना?

सन्नी: वो जो तुम्हारे पड़ोस में रहती थी?

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काम्या: हाँ, वही। उसका एक बीएफ था। वो बताती थी कि वो सिनेमाहॉल में उससे ब्लो करवाता था। तब मुझे यकीन नहीं होता था, मगर आज पता चला, वो सच बोलती थी। तुम लड़के एक जैसे ही हो, अपनी मनमानी करवाकर मानते हो।

सन्नी: दीदी, अंकल तुम्हारे साथ रोज करते हैं?

काम्या: नहीं, हफ्ते में दो-चार बार। कल कई दिन बाद आए थे।

सन्नी: एक काम करो, आज भी उन्हें एक बार करवा दो।

काम्या: क्यों, तू ऐसा क्यों बोल रहा है?

सन्नी: दीदी, करने के बाद नींद अच्छी आती है। कल रात तुम उनकी चिंता कर रही थी। अंकल कर के चले जाएँगे, तो तुम बेफिकर रहोगी।

काम्या: अच्छा, बड़ा आया मेरी फिकर करने वाला! ये बोलकर अपना रास्ता क्लियर कर रहा है?

सन्नी: जो समझो, मगर उनकी चिंता तो नहीं रहेगी।

काम्या: उसके लिए मेरे पास दूसरा रास्ता है।

सन्नी: कौन-सा?

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काम्या: बाबूजी रात को दूध पीते हैं। उसमें नींद की गोली डाल दूँगी। अब खुश?

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