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प्रेग्नेंसी की समस्या (सेक्सी समझौता)

Bhabhi pregnancy sex story – Banjh behan sex story – God bharai sex story: मेरा नाम राजेश कुमार शर्मा है। मैं विधुर हूँ, मेरी पत्नी कुसुम प्रेग्नेंसी के दौरान ही चली गई थी। मेरे एक छोटी बहन और एक छोटा भाई है। मेरा छोटा भाई सुरेश कुमार शर्मा शादीशुदा है और एक नामी बैंक में नौकरी करता है। उसकी पत्नी रिया शर्मा भी उसी बैंक में उसके साथ काम करती है। मेरी बहनें शादीशुदा हैं और अपने पतियों के साथ इसी शहर में रहती हैं।

मैं, सुरेश और रिया अपने खुद के घर में रहते हैं। असल में मैं उत्तर प्रदेश के वाराणसी का रहने वाला हूँ। पिछले दस साल से दिल्ली में बस गया हूँ। मैं सरकारी स्कूल में मैथ्स का टीचर हूँ। अपनी जिंदगी से बहुत खुश हूँ और दोबारा शादी करने का मन बिल्कुल नहीं है क्योंकि मैं अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था, लेकिन हाँ, मैं काफी सेक्सी और हॉट मिजाज का आदमी हूँ।

मेरी बहन बबीता मुझसे छोटी है और सुरेश से थोड़ी बड़ी। उसका पति सुनील कुमार शर्मा एक अस्पताल में क्लर्क की पोस्ट पर काम करता है। लेकिन शादी के पांच साल बीत गए, फिर भी वो माँ नहीं बन पाई। इसके सास-ससुर उसे नफरत करने लगे। उन्हें हर हाल में पोता चाहिए था। सास बबीता को खूब मारती-पीटती थी। सुनील कुछ बोलता नहीं, बस अपनी माँ-बाप का साथ देता रहता। ये समस्या इतनी गंभीर हो गई कि हम सब परेशान थे। दो भाइयों में बस एक ही बहन थी। मैंने उसे बेटी की तरह पाला था, मेरी पत्नी भी उसे अपनी बेटी मानती थी। लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। उनके आगे किसकी चलती है। यही कहानी का मुख्य किरदार है।

शनिवार की शाम राजेश अपनी बहन बबीता के घर पहुँचा। बबीता घर पर नहीं थी, बाजार गई हुई थी। सास-ससुर ने उसे आदर-सत्कार से बैठाया। थोड़ी देर बाद बबीता आई। भाई को देखते ही वो दौड़कर आई और गले लग गई। राजेश ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। बबीता फूट-फूटकर रोने लगी। राजेश घबरा गया, बोला, “क्या हुआ? क्यों रो रही हो?” पास खड़ी सास ने कहा, “कल इसके पेट में दर्द था, इलाज करा दिया, अब ठीक है।” फिर सास-ससुर वहाँ से चले गए।

जब बबीता थोड़ी शांत हुई तो राजेश ने कहा, “खुलकर बताओ क्या बात है। पहले कुछ खा-पी लो। उसकी चिंता मत करो, मैं सब ले चुका हूँ। चलो मेरे कमरे में।” दोनों कमरे में चले गए।

कमरे में पहुँचते ही बबीता रोते हुए बोली, “भैया, मुझे यहाँ से ले चलो। यहाँ मैं पागल हो जाऊँगी। मैं क्या करूँ? यहाँ के लोग सही नहीं। रोज ताने देते हैं, मारते हैं, भला-बुरा कहते हैं। कहते हैं तुम बांझ हो। शादी के छह साल बाद भी बच्चा नहीं हुआ। मैं अपने बेटे की दूसरी शादी कराऊँगा, वगैरह-वगैरह। मैं आपको फोन करना चाहती थी, लेकिन डर लगता था कि आप क्या सोचेंगे, इसलिए नहीं कहा।”

राजेश बोला, “अरे इसमें घबराने की क्या बात है? आज नहीं तो कल बच्चा हो जाएगा। तुम बूढ़ी तो हुई नहीं, वक्त पर सब ठीक हो जाएगा।”

बबीता बोली, “पर ये नहीं समझते। कहते हैं तुम यहाँ से जाओ और तब आना जब गोद में बच्चा हो।”

राजेश बोला, “क्या बेवकूफी है? लाओ, मैं दामाद जी से बात करता हूँ।”

बबीता बोली, “कोई फायदा नहीं। वो भी इनके साथ देते हैं। कम से कम आपकी बदनामी हो जाएगी।”

राजेश बोला, “अरे नहीं-नहीं, मैं बात करता हूँ। तुम बैठो।” वो कमरे से निकला और सीधे सास-ससुर के पास गया। विनम्र स्वर में बोला, “बाबूजी, ये क्या है? बबीता जो बोल रही है क्या सच है?” ससुर चुप रहे, सास बोली, “जो कह रही है ठीक कह रही है। हम अपने बेटे की दूसरी शादी करवाएँगे। वो बांझ है। शादी के छह साल हो गए, कोई बच्चा नहीं। हम कब तक रुकें? हमें भी भगवान के पास जाना है। अपनी बहन को ले जाओ, मैं अपने बेटे की दूसरी शादी करवाऊँगी।” स्वर में कठोरता थी।

राजेश बोला, “और दूसरी से भी बच्चा नहीं हुआ तो तीसरी शादी करेंगे? है न?”

सास बोली, “जब-तब देखी जाएगी।”

राजेश बोला, “आप लोग पागल हो गए हो। भावनाओं में कभी बहना नहीं चाहिए। और वैसे भी छह साल ही हुए हैं, सारी जिंदगी तो नहीं। आप ऐसा नहीं कर सकते।”

सास बोली, “मेरी बेटी को देखो, चार साल में दो-दो बच्चे की माँ बन गई, और ये? हम्म्म्म।”

राजेश बोला, “तो क्या हुआ? हर इंसान का हिसाब अलग होता है। प्लीज ऐसा मत करो।”

इस बार ससुर बोला, “हम प्लान कर चुके हैं। मेरे दोस्त की बेटी है, सुंदर है, पैसे भी दे रहे हैं। अपनी बहन ले जाओ, शादी में जो दिया था दे देंगे। जाओ।”

राजेश निराश हो गया। मन में दो थप्पड़ मारने का इरादा था, लेकिन रिश्ते की गरिमा समझकर चुप रहा। वो बबीता के कमरे में लौटा। बबीता ने पूछा, “भैया क्या हुआ?”

राजेश बोला, “घबराओ मत, कोई न कोई रास्ता निकाल लूँगा। तुम चलने की तैयारी करो। एक घंटे में चलते हैं। सामान लपेट लो। तब तक एक फोन करता हूँ।”

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वो बाहर निकला और बबीता के पति संतोष को फोन लगाया। संतोष घर आने की तैयारी कर रहा था। फोन उठा।

संतोष: “हैलो।”

राजेश: “हाँ मैं बोल रहा हूँ। कैसे हो?”

संतोष: “ठीक हूँ। आप बताओ।”

राजेश: “ये मैं क्या सुन रहा हूँ? अपनी माँ-बाप को क्यों नहीं समझाते? ऐसी बेहूदा बातें करते हैं। बच्चा नहीं होता तो सारी गलती सिर्फ लड़की की? क्या समझ लिया है? मैं इसलिए फोन किया कि क्या माजरा है?”

संतोष: “जी मम्मी पुराने ख्याल की हैं। उन्हें बच्चा चाहिए और वो जिद पर अड़ी हैं। मैंने बहुत समझाया, लेकिन क्या करूँ। घर जाते ही शुरू हो जाती है। एक तरफ माँ, दूसरी तरफ बीवी।”

राजेश: “अरे समझाया भी तो जा सकता है। और ये दूसरी शादी की बात?”

संतोष: “उन्हें कहने दीजिए। मैं दूसरी शादी नहीं करूँगा। मैं बबीता से बहुत प्यार करता हूँ। आप फिक्र मत करो, समय पर समझा दूँगा।”

राजेश: “मैं बबीता को अपने घर ले जा रहा हूँ, अभी।”

संतोष: “ले जाइए। दरअसल मैंने ही कहा था कि कुछ दिनों के लिए मायके चली जाओ, तबीयत बदल जाएगी।”

फोन के बाद राजेश थोड़ा नॉर्मल हुआ। फिर बोला, “अच्छा एक बात बताओ। छह साल शादी को हुए, मैरिटल लाइफ में कोई प्रॉब्लम तो नहीं?”

संतोष: “कैसी प्रॉब्लम?”

राजेश: “यही कि…”

संतोष: “मैं समझा नहीं।”

राजेश: “यही कि सेक्सुअल प्रॉब्लम…” चुपके से कहा।

संतोष: “नो-नो, हम परफेक्टली ऑल राइट हैं। वैसे हमने डॉक्टर चेकअप भी करवाया है। बबीता का रिपोर्ट आ चुका है, मेरा कल तक आएगा।”

शाम को छह बजे राजेश घर आया। संतोष पहले से था, चेहरे पर उदासी, हाथ में कागज। राजेश समझ गया कुछ गड़बड़ है।

राजेश: “क्या हुआ? चेहरा उतरा हुआ क्यों है?”

संतोष: “कुछ नहीं, रिपोर्ट आ गई है।”

राजेश: “डॉक्टर को दिखाया?”

संतोष: “वहीं से आ रहा हूँ। कह रहे हैं सुक्राणु की कमी है, जिससे बच्चा होता है। लेकिन इलाज से ठीक हो सकता है।” वो सीना तानकर बोला।

राजेश: “तो कोई नहीं, हम इलाज कराएँगे। एक से एक डॉक्टर हैं। डोंट वरी।”

बबीता चाय ले आई। तीनों चाय पीने लगे। चाय के बाद संतोष उठा तो राजेश बोला, “आज यहीं रुक जाओ, कल संडे है।”

संतोष चाहता था, लेकिन माँ-बाप की वजह से बोला, “नहीं, अगले हफ्ते आऊँगा।”

राजेश: “अरे यार भूल जाओ उस बात को, मैं हूँ ना। सब ठीक हो जाएगा। बबीता, खाना बना।”

संतोष कुछ न बोल सका। उसने माँ को फोन किया, “मैं जरूरी काम से ऑफिस में हूँ। देर हुई तो गेस्ट हाउस में रुक जाऊँगा।” फोन काट दिया। बबीता खुश थी कि आज पति रात भर उसके साथ रहेगा। वो सब करेगी जो सोच रखा था।

किचन में सामान तैयार कर बबीता बाथरूम गई, तैयार होकर खाना बनाने लगी। राजेश और संतोष डाइनिंग में टीवी देख रहे थे। राजेश विधुर था, भावनाओं पर काबू रखता था। पत्नी के बाद किसी को नहीं छुआ। कई ऑफर आए, लेकिन इग्नोर कर दिया। घाव ताजा था। लेकिन अब कंट्रोल मुश्किल हो रहा था। उसे छोटे भाई की बीवी रिया बहुत पसंद थी। वो उसके एक इशारे पर कुछ भी कर देता। लेकिन रिया अपने पति के साथ रहती थी। छुट्टियों में दिल्ली आती थी। वो भी दिल्ली की ही थी।

रिया की शादी से पहले किसी लड़के से अफेयर था। उसी से शादी तय थी, लेकिन वो लड़का क्राइम में फँस गया, सात साल की सजा हुई। माँ-बाप को कुवारी रखना पसंद नहीं, तो सुरेश से शादी हो गई। शादी की खबर सुन मलखान सिंह (रिया का दीवाना) ने जबरदस्ती करने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा। वो मर्डर के केस में था, अनजाने में हुआ था। उसकी कहानी बाद में।

आज भी राजेश रिया के बारे में सोच रहा था। तभी फोन बजा। रिया का था। वो मुस्कुराया, “हैलो।”

राजेश: “हाय रिया, कैसी हो?”

रिया: “जी भाई साहब, ठीक हूँ। आपको एक खुशखबरी देनी थी।”

राजेश: “कैसी खुशखबरी? बताओ ना।”

रिया: “वो आप इनसे सुन लीजिए, मैं नहीं बता सकती।”

राजेश: “अरे ऐसी क्या बात है? प्लीज, पहेलियाँ मत बुझाओ।”

रिया ने फोन सुरेश को दिया।

सुरेश: “हैलो भैया, कैसे हैं?”

राजेश: “कैसे हो भाई? आज क्या बात है? आज ही बबीता आई है।”

सुरेश: “छोटी आई है? क्या बात है?”

राजेश: “हाँ। और बताओ, बहू क्या सुना रही थी? बीच में फोन तुम्हें दे दिया।”

सुरेश: “जी भैया, आप चाचा बनने वाले हैं। यही बोलना चाहती थी।”

राजेश: “अरे भाई, मुबारक हो! बहुत-बहुत मुबारक! तुम दोनों कल यहाँ आ जाओ। पार्टी करते हैं। बहू की गोद भराई भी होगी। पहला बच्चा है। बबीता भी है। प्लीज आ जाओ।”

सुरेश: “ठीक है भैया, प्लान करते हैं।”

फिर बोला, “लो बबीता से बात करो।” फोन बबीता को दिया।

बबीता: “हैलो सुरेश, कैसे हो? बहुत मुबारक। जल्दी आओ भाभी को लेकर। कल संडे है, शाम को पार्टी करेंगे।”

सुरेश: “जी दीदी, कोशिश करूँगा। रिया का भी मन था। दिल्ली से उसके मम्मी-पापा का फोन आया था, वो भी बुला रहे हैं। कल आ जाएँगे।” फोन ऑफ कर दिया।

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रिया और सुरेश सुबह छह बजे न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन पर थे। राजेश का इंतजार कर रहे थे। राजेश दिखा तो दोनों खुश हो गए। रिया ने सिर पर अंचल रखा, दोनों ने प्रणाम किया। राजेश ने कंधों से उठाकर माथा चूमा। फिर रिया की तरफ देखा। वो बहुत सुंदर लग रही थी। गोरा मुखड़ा कमल के फूल जैसा। प्रेग्नेंसी में औरतें और खूबसूरत हो जाती हैं। राजेश उसकी गांड देख रहा था, जो जरूरत से ज्यादा उभरी हुई थी। उसका लंड खड़ा हो गया। फिर उसके थोड़े उभरे पेट को देखा। रिया शर्मा गई, नजर हटा ली। राजेश को होश आया, स्टेशन पर है। टैक्सी ली, बोला, “ब बहू चलो, तुम दोनों पीछे बैठो, मैं सामान लोड करता हूँ।”

घर पहुँचते ही रिया का स्वागत हुआ। बबीता थाली लेकर आई, फूल-माला, रोली, लोटा पानी। रिया की आरती उतारी, दोनों कपल को माला पहनाई। “वेलकम भाभी, वेलकम।” सब घर में आए। बबीता किचन में चाय बनाने गई। राजेश और सुरेश बातें करने लगे। रिया बोर हुई तो किचन गई। पीछे से बबीता को पकड़ा, बोली, “बताओ मेरी जान, कैसी हो? कुछ इम्प्रूवमेंट हुआ या नहीं?”

बबीता: “क्या भाभी, अब आप जैसा मेरा नसीब तो है नहीं।”

रिया: “क्या मतलब?”

बबीता: “मतलब साफ है, खेत तब भिंगता है जब पाइप में पानी हो।”

रिया: “क्या मतलब? तो क्या जमाई जी…” चुप हो गई। सामने से सुरेश आ रहा था।

दोनों चुप हो गईं।

सुरेश: “बबीता, सिर फट रहा है, चाय दे दो।”

बबीता: “तुम बैठो, मैं सबके लिए लाती हूँ।”

सुरेश: “ओके, मैं बाथरूम जाता हूँ, फ्रेश होने। टॉवल दे दो।”

बबीता: “वहीं हैंगर पर है, ले लो।”

सुरेश चला गया। फिर दोनों की बात शुरू हुई।

रिया: “तो बताओ, क्या बात है? खुलकर बताओ।”

बबीता: “आप फ्रेश हो लो, बाद में बताती हूँ।”

बबीता चार प्याले चाय लेकर डाइनिंग में आई। राजेश और सुरेश बबीता की ही बात कर रहे थे। रिया अपने कमरे में थी। बबीता प्लेट रखकर रिया को बुलाने गई। झाँककर देखा, रिया साड़ी पहन रही थी। बबीता पीछे से चुपके से पकड़ा, एक चूची दबाई, बोली, “क्या बात है, ये तो मालदा आम हो गए हैं। लगता है रोज पेलाई होती होगी।” कभी-कभी दोनों ऐसी बातें करती थीं।

रिया: “अरे तुम अपना देखो। तुम भी तो कश्मीर की कली लग रही हो।”

बबीता: “हाँ, पर ये फूल कब बनेंगे पता है?”

रिया: “हाँ अब बताओ क्या बात है? और जेठ जी भी कुछ अजीब बातें कर रहे हैं।”

बबीता: “जी, मेरी सास हमेशा ताने देती है कि मैं बांझ हूँ, बच्चा नहीं पैदा कर सकती।”

रिया: “किसने कहा? कोई औरत अकेले बच्चा नहीं पैदा कर सकती। मर्द के बिना। अगर मर्द ही खराब हो तो औरत क्या करे?”

बबीता: “हमने बहुत समझाया, पर अम्मा नहीं मानती। बस एक बात कहती है, दूसरी शादी।”

रिया: “और दूसरी से भी नहीं हुआ तो तीसरी?”

बबीता चुप हो गई। “समझ नहीं आता क्या करूँ। संतोष जी कहाँ हैं?”

बबीता: “वो कभी मेरी तरफ, कभी अम्मा की तरफ हो जाते हैं।”

रिया: “संतोष जी से मैं बात करती हूँ। नंबर दे।”

रिया ने फोन लगाया।

संतोष: “गुड मॉर्निंग भाभी, आ गईं? वेलकम टू दिल्ली।”

रिया: “थैंक्स। बताइए क्या चल रहा है?”

संतोष: “सब ठीक है।”

रिया: “सुना है आप दूसरी शादी कर रहे हैं।”

संतोष घबरा गया, बोला, “नहीं-नहीं, ऐसी बात नहीं। कुछ प्रॉब्लम है, ठीक हो जाएगा।”

रिया: “बहुत बड़ी प्रॉब्लम है।”

संतोष: “जी मैं जानता हूँ। मैं क्या कर सकता हूँ?”

रिया: “प्रेग्नेंट… आप प्रेग्नेंट कर सकते हैं?”

संतोष शरमाते हुए: “प्रेग्नेंट?”

रिया: “हाँ। और मुझे लगता है आप हिजड़ा हैं।” दिल पर चोट की।

संतोष: “क्या मतलब?”

रिया: “ठीक कह रही हूँ। जो अपनी बीवी को खुश नहीं रख सकता, उसे शादी का कोई हक नहीं।”

संतोष: “आप ठीक हैं, पर मैं इलाज करा रहा हूँ। सेक्स में बिल्कुल फेल नहीं हूँ। पूरी ताकत है औरत को खुश करने की। लेकिन सुक्राणु का प्रॉब्लम है। रिपोर्ट आई है सुक्राणु डेड हैं। इलाज से ठीक हो सकता है। आज शाम को आ रहा हूँ, बात करता हूँ। ओके एंड आउट।”

फोन कट गया। रिया बबीता से बोली, “देखा, हकीकत पता चल गई ना? फिक्र मत करो, मैं तेरी अम्मा से भी बात करूँगी, तेरे पति से भी। दुनिया में कोई कखम नहीं जिसका इलाज न हो। बस विश्वास होना चाहिए।”

चले…? दोनों चाय पीकर उठीं और शाम की जश्न की तैयारी करने लगीं। शाम छह बजे गोद भराई शुरू हुई। मोहल्ले की औरतें आईं। बबीता और कुछ दोस्त। औरतों की पार्टी चल रही थी। राजेश, सुरेश, संतोष मेहमानों का स्वागत कर रहे थे। करीब 200 लोग थे। रिया कुर्सी पर बैठी थी। बबीता और एक अधेड़ औरत ने आरती उतारी, चादर ओढ़ाई। सबने बलैयाँ लीं। रिया को बहुत अच्छा लग रहा था। वो आगे बढ़कर बबीता से गले लगी। गाने-बजाने चले। कुछ अश्लील इशारे से गाने बजे। कई औरतों की चूत गीली हो गई। मर्द अलग प्रोग्राम में थे। एक घंटे बाद खाना, नौ बजे प्रोग्राम खत्म।

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अब घर में सिर्फ राजेश, रिया, सुरेश, बबीता और संतोष थे। सुरेश ने पी रखी थी, राजेश नहीं पीता। सुरेश को नींद आ रही थी। राजेश बोला, “सुरेश जाओ सो जाओ। बहू तुम भी जाओ, थक गई होगी। सुबह बात करेंगे।” बबीता और संतोष भी चले गए। राजेश रिया के बारे में सोचता रहा। कितनी सुंदर है। प्रेग्नेंट औरतें और खूबसूरत हो जाती हैं। मुस्कुराया, माथे पर थप्पड़ मारा, शर्मा गया और कमरे में सोने चला गया।

सुबह आठ बजे डाइनिंग टेबल पर सब इकट्ठा हुए। रिया फ्रेश लग रही थी। वो फ्रैंक थी। घर में अंचल नहीं रखती। सूट में थी, लेकिन दुपट्टा नहीं। चूचियाँ साफ दिख रही थीं। राजेश का लंड खड़ा हो गया। वो एक हाथ से दबाते हुए चाय-नाश्ता कर रहा था।

सुरेश ने चुप्पी तोड़ी, “हाँ तो जीजा जी, क्या सोचा?”

संतोष: “कल डॉक्टर के पास जा रहे हैं, इलाज के लिए।”

सुरेश: “ठीक हो जाएगा। बेकार की बातें मत करो।”

संतोष: “मैं तो कुछ नहीं कहता, पर माँ थोड़ी कड़ी है। समझाया नहीं जाता।”

रिया: “उनकी चिंता मत करो, मैं देख लूँगी।”

संतोष: “भाभी, आपको पता है?”

रिया शरमाते हुए: “हाँ, बबीता ने सब बताया है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं। भगवान ने चाहा तो सब ठीक हो जाएगा। ठीक है?”

संतोष ने घड़ी देखी, बोला, “अब चलता हूँ। कल के लिए तैयारी है। बॉस कनाडा जा रहे हैं। शाम को नहीं आ सकूँगा। कल घर जाऊँगा।” चला गया। सबने हैरानी से देखा।

सुरेश ने बाइक निकाली, बोला, “भैया, मैं एक दोस्त से मिलकर आता हूँ, नेहरू प्लेस में है।”

राजेश: “ठीक है, लेकिन लंच तक आ जाना। हम वेट करेंगे।”

बबीता किचन गई। रिया वहाँ बैठी मैगजीन पढ़ रही थी। राजेश आया, बोला, “और बताओ, तुम्हें अब कैसा लग रहा है?”

रिया: “मतलब?”

राजेश: “यही कि पहले लड़की, फिर औरत, अब माँ बनने वाली हो। हाउ डू यू फील अबाउट इट?”

रिया: “ग्रेट। ये तो औरत का सपना होता है। आप नहीं समझेंगे।”

राजेश: “क्यों?”

रिया: “क्योंकि आप औरत नहीं हैं।”

राजेश: “तो समझा दो।”

रिया: “उसके लिए कुछ समय चाहिए।”

राजेश: “तो ठीक है। ऑफिस से छुट्टी ले लेता हूँ।”

रिया: “आज ऑफिस नहीं जाना?”

राजेश: “आज संडे है।”

रिया: “तो ये लोग?”

राजेश: “झूठ बोल रहे हैं। संतोष इसलिए गया कि कहीं मैं और न पूछूँ।”

रिया: “वाकई गलत है। बच्चा नहीं हो रहा तो लड़की क्या करे? मर्द को देखना चाहिए न।”

राजेश: “ये स्त्री प्रधान देश है।”

रिया: “अब आप ही देखो। शादी के चार साल बाद भी बच्चा नहीं। ये बात और है कि दीदी चल बसीं, पर चार साल बर्बाद हो गए।” कटाक्ष किया।

राजेश: “ऐसा नहीं है। शुरू के दो साल हम फैमिली प्लानिंग करते थे। फिर आखिरी दो साल वो बीमार रहने लगी। मैं उसे प्रेग्नेंट नहीं करना चाहता था।”

रिया: “बीमार क्यों?”

राजेश: “पेट में स्टोन था। पैनक्रियाज में। ऑपरेशन नहीं होता। दवाई से गिराना पड़ता। जब ठीक हुई, एक्सीडेंट में चली गईं।” आँखों में आँसू आ गए। रिया को भी आँसू आ गए।

रिया आगे बढ़ी, राजेश को गले लगाया। “कोई बात नहीं। भगवान के आगे किसकी चलती है। आप दूसरी शादी कर लीजिए। मेरी नजर में एक लड़की है। आप कहो तो बात करती हूँ।” राजेश को रिया की चूचियों का स्पर्श महसूस हो रहा था। लंड खड़ा था, जाँघों से दबा रहा था। तभी किचन में बर्तन गिरने की आवाज आई। दोनों अलग हुए। रिया शरमा गई। राजेश ने आँख मारी।

जी हाँ, शादी से पहले से दोनों में चक्कर था। लेकिन किसी वजह से रिया की शादी सुरेश से हो गई। फिर भी रिया राजेश को सच्चा दोस्त मानती थी। सब शेयर करती थी। अच्छी गृहिणी थी। फ्रैंक लड़की थी। इसलिए राजेश के लिए लड़की ऑफर किया।

रिया दौड़कर किचन गई। बबीता गिरी हुई थी, कराह रही थी।

रिया: “क्या हुआ? कैसे गिरी?”

बबीता: “भाभी वो… बर्तन रख रही थी कि खूँटी कवर गई और मैं धड़ाम से गिर गई।”

रिया ने सहारा देकर उठाया, स्टूल पर बिठाया। “तुम जाओ, मैं देख लेती हूँ। आराम करो।” सहारा देकर उसके कमरे तक पहुँचाया।

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