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कुंवारी गर्लफ्रेंड की चुत में सरसों तेल लगाकर लंड घुसाया

Punjabi tight chut mein lund daala khun nikala sex story: मेरा नाम गौरव है। मैं पंजाब का रहने वाला हूं। मेरी पहले बहुत गर्लफ्रेंड रह चुकी हैं लेकिन ये कहानी मैं जिस लड़की की बात कर रहा हूं उसका नाम इशिका है।

उसका फिगर 30-30-28 है। वह देखने में बहुत ही सेक्सी और हॉट लगती है। मैं उसे बहुत समय से पटाने में लगा था लेकिन वह मेरे से 2024 में पटी।

शुरुआती दिनों में मैं उससे खूब बात करता था। धीरे धीरे सेक्स चैट होने लगी। कभी वह मेरे लंड की तस्वीर देख लेती कभी मैं उसका चूत और उसके दूध देखता। हमारी चैट हवस वाली थी। हम दिन भर सेक्स भरी बातें करते थे।

हमने कई बार पार्क और दीवार के पीछे किस और टच किया था लेकिन सेक्स का मौका नहीं मिला। एक दिन मेरे घर कोई नहीं था। मम्मी दीदी कहीं गई हुई थीं। पापा की सरकारी नौकरी है तो वह कभी कभी ही घर आते थे।

ये बात मैंने अपनी गर्लफ्रेंड से बताई। सितंबर का महीना था। मैंने उसे अपने घर बुलाया लेकिन वह नखरे कर रही थी। बहुत मानने पर वह आई।

वैसे उसकी मम्मी एक स्कूल में पढ़ाती हैं। पापा उसके बिजनेस के चलते बाहर रहते हैं। वह अपनी घर से छुप कर मेरे कमरे में आई। आते ही मैंने एसी चालू किया। फिर किस करने में लग गए।

किस करते करते हम दोनों नंगे हो गए। पता ही नहीं चला। फिर मैंने उसके 30 के चूचे को खूब पिया और उसे उत्तेजित कर दिया। वह आह आह करने लगी। उसकी छोटी चूत से पानी निकलने लगा।

मैंने देखा कि उसकी चूत एकदम साफ है जैसे आज ही उसको साफ किया हो और उसकी पैंटी से मादक खुशबू आ रही थी। हम दोनों धीरे धीरे नंगे हो गए। मैं सिर्फ अंडरवीयर में था वह बिल्कुल नंगी।

मैं उसे किस किए जा रहा था जिससे वह उत्तेजित हो गई। फिर मैंने अपना लंड उसके हाथ में दिया। वैसे आपको बता दूं कि मेरी लंड की साइज 6 इंच है और मोटाई 3 इंच है जो किसी भी लड़की को खुश कर सकता है।

लंड देखकर वह डर रही थी। मैंने उसे मुंह में लेने को बोला पर उसने मना कर दिया। मैंने भी जोर जबरदस्ती नहीं की और चोदने पर ध्यान देने लगा। वह डर रही थी।

मैंने उसे समझाया और उसको किस करने लगा। फिर मैंने सरसों का तेल अपने लंड और उसके चूत में लगाया। लंड उसके चूत पर लगाया और धीरे से धक्का मारा। आधा लंड उसके छोटी सी चूत में फाड़ता चला गया।

वह रोने लगी। मैंने किस किया। जब उसको दर्द से आराम मिला वह कमर उठाने लगी। मैंने पूरी ताकत से उसके चूत में पूरा लंड डाल दिया। फिर लगातार 30 मिनट तक चोदा।

फिर मैंने उसको घोड़ी बनाने को बोला। उसके चूत से चूत का पानी और खून निकल रहा था। फिर मैंने पीछे से अपना लंड अंदर डालकर 20 मिनट चोदा।

मेरा निकलने वाला था तो मैंने पूछा कि कहां निकालूं। उसने अंदर डालने से मना कर दिया। मैंने सारा माल उसके मुंह में दे दिया और कुछ उसके पेट पर निकाल दिया।

हम दोनों थक गए थे और किस करने लगे। वह धीरे धीरे फिर गर्म हो गई। वह मेरे लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगी जिससे मैं भी मूड में आ गया।

मैंने उसकी चूत में उंगली डालने लगा। फिर घोड़ी बनाया और उसके गांड हम दोनों बाथरूम गए। उधर साफ हुए। उसने कपड़ा पहना। फिर हम किस किए और वह अपने घर चली गई।

उसे सही से चला नहीं जा रहा था तो मैंने दर्द की दवाई दे दी। अभी हम कभी कभी चुदाई कर लेते हैं।

पंजाब की इस धरती पर मेरी जिंदगी में कई उतार चढ़ाव आए और हर लड़की के साथ एक अलग अनुभव रहा लेकिन इशिका जैसी लड़की मैंने पहले कभी नहीं देखी थी।

उसका आकर्षण ऐसा था कि कोई भी उसे देखता रह जाए। जब भी वह कॉलेज या बाजार से गुजरती थी तो मेरी नजरें सिर्फ उसी पर टिक जाती थीं।

उसका चलना उसका मुस्कुराना और उसकी काया किसी को भी दीवाना बनाने के लिए काफी थी। दिन रात मैं बस यही सोचता था कि कब इशिका मेरी होगी कब मैं उससे बात कर पाऊंगा और कब वह मेरी भावनाओं को समझेगी।

मैंने उसे इम्प्रेस करने के लिए बहुत सारे जतन किए उसके दोस्तों से जान पहचान बनाई उसकी पसंद नापसंद का ख्याल रखा लेकिन वह जल्दी हाथ आने वाली नहीं थी।

बहुत पापड़ बेलने पड़े बहुत मिन्नतें करनी पड़ीं लेकिन आखिरकार मेरी मेहनत रंग लाई। जब उसने मुझे हां कहा तो मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था।

मुझे ऐसा लगा जैसे मुझे दुनिया की सबसे बड़ी नेमत मिल गई हो। हम दोनों फोन पर घंटों लगे रहते थे। शुरुआत में बातें बहुत ही साधारण और मासूमियत भरी होती थीं जैसे तुमने खाना खाया या नहीं आज का दिन कैसा रहा कॉलेज में क्या हुआ तुम्हें क्या पसंद है इत्यादि।

लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया हम दोनों एक दूसरे के करीब आते गए और हमारा भरोसा मजबूत होता गया। जब दो प्यार करने वाले एक दूसरे के बेहद करीब आ जाते हैं तो उनके बीच की झिझक खत्म होने लगती है।

हमारे साथ भी यही हुआ। हमारी सामान्य बातें अब धीरे धीरे बहककर शारीरिक आकर्षण की तरफ मुड़ चुकी थीं। रातों को जब सब सो जाते थे तो हम दोनों फोन की स्क्रीन पर उंगलियां चलाते हुए एक अलग ही दुनिया में खो जाते थे।

वह कैमरे के सामने धीरे धीरे अपनी शर्म की दीवारें गिराने लगी थी और मैं भी उसके हुस्न को देखकर पूरी तरह से बहक जाता था। उसमें कोई छुपाव नहीं था कोई बंदिश नहीं थी।

चाहे सुबह हो दोपहर हो या शाम जब भी हमें मौका मिलता हमारी बातों का रुख सिर्फ और सिर्फ शारीरिक भूख और हवस की तरफ ही मुड़ जाता था। हम एक दूसरे को बताते थे कि जब मिलेंगे तो क्या करेंगे कैसे एक दूसरे के शरीर को छुएंगे।

इस मानसिक उत्तेजना का असर यह हुआ कि हम सिर्फ फोन तक सीमित नहीं रह सकते थे। हमें मिलने की तड़प होने लगी। जब भी हम किसी सुनसान पार्क के कोने में बैठते या किसी पुरानी दीवार के पीछे अंधेरे का फायदा उठाते तो हम एक दूसरे पर टूट पड़ते थे।

मैं उसे अपनी बाहों में भींच लेता था उसके होठों को चूसता था और उसके कपड़ों के ऊपर से ही उसके अंगों को टच करता था। वह भी पूरी तरह से मदहोश हो जाती थी।

लेकिन इन सब मुलाकातों में एक बहुत बड़ी कमी थी हमें कभी भी सुकून से पूरा समय नहीं मिलता था। हमेशा पकड़े जाने का डर रहता था कोई न कोई आसपास से गुजर जाता था जिसके कारण हमें पूरा मौका नहीं मिल पाता था।

हम दोनों इस अधूरी प्यास के साथ जी रहे थे। हमारे शरीर एक दूसरे से पूरी तरह मिलने के लिए तड़प रहे थे लेकिन एक मुकम्मल जगह नहीं मिल पा रही थी जहां हम बिना किसी डर के पूरी आजादी से अपनी हवस और अपने प्यार को अंजाम दे सकें।

लेकिन किस्मत हमेशा एक जैसी नहीं रहती। एक दिन ऐसा आया जिसने हमारी इस तड़प को मिटाने का पूरा मौका दे दिया। यह एक ऐसा इत्तेफाक था जिसका मैं महीनों से इंतजार कर रहा था।

घर के सभी लोग किसी काम से बाहर गए हुए थे। वे किसी रिश्तेदारी में या बाजार के किसी बड़े काम से बाहर गई थीं और उन्हें वापस आने में पूरा दिन लगने वाला था। जहां तक पापा की बात है तो उनकी ड्यूटी ऐसी जगह थी और काम का दबाव ऐसा था कि उनका घर आना तय नहीं रहता था वह कभी कभी ही घर आ पाते थे।

इसका मतलब था कि पूरा घर खाली था चारों तरफ सन्नाटा था और मैं अपने इस विशाल घर में पूरी तरह से अकेला था। यह देखते ही मेरा दिमाग तेजी से दौड़ने लगा।

मुझे लगा कि अगर आज मैंने इस मौके का फायदा नहीं उठाया तो फिर कभी ऐसा चांस नहीं मिलेगा। मैंने तुरंत इशिका को फोन लगाया और उसे पूरी स्थिति समझाई कि आज घर पर कोई नहीं है हम पूरी तरह से आजाद हैं और कोई हमें परेशान करने वाला नहीं है।

मौसम में एक अजीब सी उमस और गर्माहट थी जो इंसानी जज्बातों को और ज्यादा भड़का रही थी। लड़कियों की आदत होती है कि वे शुरू में सीधे हां नहीं कहतीं उनके मन में डर भी होता है और थोड़ा संकोच भी।

वह कहने लगी कि नहीं मुझे डर लग रहा है अगर किसी ने देख लिया तो क्या होगा मैं कैसे आऊंगी मेरे घर वाले क्या सोचेंगे। उसने आने से साफ मना कर दिया।

लेकिन मैं भी हार मानने वाला नहीं था। मैं उसे किसी भी कीमत पर आज अपने पास देखना चाहता था। मैंने फोन पर अपनी पूरी जान लगा दी उसे प्यार से समझाया कसम दी भरोसा दिलाया कि कुछ नहीं होगा सब कुछ पूरी सुरक्षा के साथ होगा।

आखिरकार मेरा प्यार और मेरी जिद जीत गई और उसने आने का फैसला कर लिया। उसकी मां स्कूल के कामों में व्यस्त रहती थीं और उनके पास बाहर जाने या नजर रखने का ज्यादा वक्त नहीं होता था।

और उसके पिता का कारोबार ऐसा था कि उन्हें लगातार दौरों पर रहना पड़ता था शहरों से बाहर रहना पड़ता था। इस वजह से इशिका के लिए भी घर से निकलना थोड़ा आसान था क्योंकि घर पर सख्त पहरा देने वाला उस वक्त कोई नहीं था।

फिर भी समाज और पड़ोसियों के डर से वह गलियों से बचती हुई घूंघट या दुपट्टे से चेहरा छिपाती हुई बहुत ही सावधानी से मेरे घर के दरवाजे के अंदर दाखिल हुई और सीधे सीढ़ियां चढ़कर मेरे कमरे में आ गई।

जैसे ही उसने मेरे कमरे में कदम रखा उसने राहत की सांस ली लेकिन उसकी धड़कनें बहुत तेज थीं और वह बुरी तरह से कांप रही थी। कमरे में आते ही मैंने सबसे पहले कमरे का मुख्य दरवाजा अंदर से लॉक किया खिड़कियों के पर्दे पूरी तरह से गिरा दिए ताकि बाहर की धूप या किसी की नजर अंदर न आ सकें।

जैसे ही एसी की ठंडी हवा कमरे में फैलने लगी माहौल थोड़ा शांत और सुहावना होने लगा। लेकिन हमारे भीतर जो गर्मी थी उसे एसी की हवा भी ठंडा नहीं कर सकती थी।

इशिका बेड पर बैठ गई उसका चेहरा लाल हो रहा था। मैं उसके पास गया उसका हाथ अपने हाथ में लिया। वह अभी भी थोड़ी हिचकिचा रही थी।

मैंने उसके चेहरे को ऊपर उठाया और फिर हमारे होठ एक दूसरे से जुड़ गए। यह कोई साधारण चुंबन नहीं था इसमें महीनों की तड़प हवस और प्यार का मिश्रण था।

मैं उसके होंठों को पागलों की तरह चूसने लगा और वह भी धीरे धीरे अपनी आंखें बंद करके इस अहसास में डूबने लगी। जब कामुकता का भूत सर पर चढ़ता है तो कपड़ों की अहमियत खत्म हो जाती है।

चूमते चूमते मेरे हाथ उसकी कुर्ती के अंदर चले गए मैंने उसकी कुर्ती को ऊपर खींचा और उसने भी अपने हाथ ऊपर कर दिए। एक एक करके उसके सारे कपड़े फर्श पर गिरते चले गए।

मैंने भी अपनी शर्ट और पैंट उतारकर फेंक दी। हम दोनों इस कदर एक दूसरे में खोए हुए थे कि हमें समय और स्थिति का कोई होश नहीं रहा।

जब हम पूरी तरह से नंगे होने की कगार पर थे तो मैंने उसके शरीर को देखा। उसका गोरा और सुडौल बदन एसी की हल्की रोशनी में चमक रहा था। उसके स्तन बिल्कुल सुडौल और टाइट थे।

मैंने अपने मुंह में उसके चूचे को लिया और उन्हें पागलों की तरह चूसने और चबाने लगा अपनी उंगलियों से उन्हें दबाने लगा। मेरे इस आक्रामक और प्यार भरे अंदाज ने उसके भीतर की कामुकता को पूरी तरह से जगा दिया।

वह अपनी सुध बुध खो बैठी और कमरे में उसकी सिसकियों और आहों की आवाजें गूंजने लगीं। मेरी उंगलियां अब उसके पेट से नीचे खिसकते हुए उसकी जांघों के बीच पहुंचने लगी थीं।

जब मैंने वहां छुआ तो वह पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। यह इस बात का सबूत था कि वह पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी और उसके भीतर की आग चरम पर थी।

वहां एक भी बाल नहीं था सब कुछ बिल्कुल चिकना और साफ सुथरा था। शायद वह घर से आते वक्त खुद को पूरी तरह तैयार करके आई थी।

जब मैंने बेड पर पड़ी उसकी पैंटी को उठाया तो वह खुशबू किसी महंगे इत्र और उसके शरीर के प्राकृतिक स्राव का मिश्रण थी जिसने मेरे दिमाग की नसों को पूरी तरह से झकझोर दिया और मेरी हवस सातवें आसमान पर पहुंच गई।

अब शरीर पर धागा भी नहीं बचा था। वह पूरी तरह से नग्न अवस्था में बेड पर लेटी हुई थी उसकी आंखें आधी बंद थीं और वह हांफ रही थी।

मैं उसके पूरे शरीर पर उसकी गर्दन उसके पेट उसकी जांघों पर अपने होठों से निशान बना रहा था जिससे उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी। वह बिस्तर की चादर को अपने हाथों से भींच रही थी।

अब वक्त आ गया था असली खेल शुरू करने का। मैंने अपना अंडरवीयर भी उतार दिया। वह मेरे पूरी तरह से खड़े हुए अंग को देखकर दंग रह गई।

यह एक ऐसा आकार और मोटाई थी जो किसी भी लड़की को हैरान कर सकती है। जब कोई भी औरत या लड़की इस साइज को देखती है तो वह पहले तो डरती है लेकिन बाद में उसे जो आनंद मिलता है वह लाजवाब होता है।

उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। इतनी मोटाई और लंबाई देखकर वह पीछे हटने लगी। मैंने सोचा कि शुरू करने से पहले थोड़ा ओरल सेक्स हो जाए इसलिए मैंने उसके मुंह के पास अपना अंग ले जाकर उसे चूसने को कहा पर उसने मना कर दिया।

वह इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी उसे शायद इससे घिन आ रही थी या डर लग रहा था। मैं किसी भी तरह का दबाव नहीं बनाना चाहता था जिससे उसका मूड खराब हो और मेरा पूरा ध्यान अब उसकी उस छोटी सी साफ चूत में प्रवेश करने पर था।

उसका डर पूरी तरह से स्वाभाविक था क्योंकि उसका सामना पहली बार इतने बड़े और मोटे अंग से हो रहा था और वह कुंवारी जैसी ही थी।

मैंने उसे अपनी बाहों में लिया उसके माथे को चूमा उसके होठों को दोबारा चूसना शुरू किया ताकि उसका ध्यान डर से हटकर दोबारा प्यार और उत्तेजना पर आ जाए।

जब मुझे लगा कि वह थोड़ी शांत हुई है तो मैंने बिस्तर के पास रखी सरसों के तेल की बोतल उठाई। तेल लगाने से फिसलन बढ़ जाती है और प्रवेश आसान हो जाता है।

तेल की कुछ बूंदें मैंने अपनी उंगलियों से उसकी चूत के छेद पर लगाईं और बाकी अपने पूरे अंग पर मल ली। अब वह क्षण आ गया था।

मैंने उसकी दोनों जांघों को पूरी तरह से फैलाया और उसके ऊपर आ गया। मैंने अपने अंग की टोपी को उसकी छोटी सी चूत के मुहाने पर टिकाया और धीरे से धक्का मारा।

जैसे ही मैंने थोड़ा सा दबाव डाला उसकी चूत की तंग दीवारें मेरे अंग को रोकने लगीं। लेकिन तेल की वजह से अंग उसकी चूत में समाता चला गया।

वह तंग रास्ता पूरी तरह से खिंच गया और मेरा आधा अंग अंदर धंस गया। दर्द की एक तेज लहर उसके पूरे शरीर में दौड़ गई उसकी आंखों से आंसू बहने लगे और उसने मुझे पीछे धकेलने की कोशिश की।

वह चिल्ला उठी लेकिन मैंने तुरंत अपनी रफ्तार रोक दी। मैं उसके ऊपर पूरी तरह लेट गया और उसके होठों को अपने मुंह में भर लिया ताकि उसकी चीखें बाहर न निकलें और मेरा प्यार उसका दर्द कम कर सके।

जब उसकी चूत की मांसपेशियों ने मेरे आधे अंग को स्वीकार कर लिया और उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो उसके भीतर का आनंद दोबारा जागने लगा। वह खुद मेरे अंग को और अंदर लेने के लिए अपनी कमर को ऊपर की तरफ झटका देने लगी।

यह देखकर मेरा संयम पूरी तरह से टूट गया। मैंने अपनी स्थिति मजबूत की उसके पैरों को अपने कंधों के पास सेट किया और एक ही जोरदार झटके में मेरा पूरा अंग उसकी चूत की गहराइयों को छू गया।

वह एक बार फिर से छटपटा उठी लेकिन अब पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं था। मैंने अपनी कमर को एक निश्चित लय में चलाना शुरू किया। अंदर बाहर अंदर बाहर का यह सिलसिला पूरे आधे घंटे तक चलता रहा।

कमरे में केवल हमारे शरीरों के टकराने की आवाज और एसी की सरसराहट गूंज रही थी। मैं पूरी ताकत से शॉट मार रहा था और वह हर शॉट पर सिसकारियां भर रही थी।

उसकी चूत मेरे अंग को चारों तरफ से जकड़े हुए थी जिससे मुझे ऐसा आनंद मिल रहा था जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था।

आधे घंटे तक लगातार एक ही पोजीशन में रहने के बाद मैं थोड़ा थकने लगा था लेकिन मेरी हवस अभी शांत नहीं हुई थी। मुझे कुछ अलग करना था।

मैंने उसे घुटनों और हाथों के बल आने को कहा ताकि मैं पीछे से वार कर सकूं। जब वह उस पोजीशन में आई तो मैंने नीचे देखा।

उसकी पहली बार की वजह से उसकी चूत की त्वचा थोड़ी फट गई थी जिससे हल्का खून निकलकर उसके पानी के साथ मिलकर उसकी जांघों पर बह रहा था। वह दृश्य अत्यंत कामुक था।

खून और पानी के उस मिश्रण ने फिसलन को और बढ़ा दिया था। मैंने पीछे से उसकी पतली कमर को अपने दोनों हाथों से कसकर पकड़ा और अपने अंग को दोबारा उसकी चूत में पीछे के रास्ते से ठोकना शुरू कर दिया।

इस पोजीशन में मेरा अंग और ज्यादा गहराई तक जा रहा था जिससे वह पूरी तरह से हिल गई थी। वह बेड के सिरहाने को पकड़कर खुद को संभालने की कोशिश कर रही थी और मैं पीछे से बिना रुके लगातार 20 मिनट तक शॉट मारता रहा।

20 मिनट के इस ताबड़तोड़ शॉट के बाद मेरे शरीर का तापमान बढ़ गया था और मुझे महसूस होने लगा कि अब मेरा पानी निकलने वाला है।

मैं नहीं चाहता था कि कोई अनचाही प्रेग्नेंसी की समस्या हो इसलिए मैंने उससे चिल्लाकर पूछा कि मैं अपना माल कहां गिराऊं। वह जानती थी कि अगर अंदर गिर गया तो बड़ी मुसीबत हो जाएगी इसलिए उसने डरते हुए कहा कि अंदर मत डालना बाहर निकालो।

मैंने आखिरी कुछ तेज झटके मारे और ठीक ऐन वक्त पर अपने अंग को उसकी चूत से बाहर खींच लिया। जैसे ही मेरा अंग बाहर आया मेरा गाढ़ा सफेद वीर्य अत्यधिक दबाव के साथ पिचकारी की तरह छूटा।

उसका कुछ हिस्सा उसके चेहरे और मुंह पर गिरा जिसे उसने झटके से बंद कर लिया और बाकी सारा गाढ़ा माल उसके पेट और नाभि के आसपास की गोरी त्वचा पर बिखर गया।

इस भयंकर और थका देने वाले खेल के बाद हम दोनों थक गए थे। हमारे शरीर पूरी तरह से पसीने और तेल से लथपथ थे सांसें धौंकनी की तरह चल रही थीं।

हम दोनों बिस्तर पर एक दूसरे के बगल में लेट गए। हम शांत होकर एक दूसरे के होठों को चूम रहे थे जैसे किसी जंग को फतह करके आए हों।

लेकिन बिस्तर की वो गर्मी और हमारा नग्न बदन हमें ज्यादा देर शांत नहीं रहने दे सकता था। थोड़ी देर के आराम ने उसके भीतर की कामुकता को दोबारा जगा दिया।

उसने अपने कोमल हाथों से मेरे शांत होते हुए अंग को पकड़ा और उसे ऊपर नीचे सहलाना और हिलाना शुरू कर दिया। उसके हाथों के इस स्पर्श ने जादू का काम किया।

मेरा अंग दोबारा से कड़ा और लोहे जैसा सख्त होने लगा। मैंने उसे अपनी तरफ खींचा। चूत अभी भी खून और पानी से गीली थी इसलिए मेरी उंगलियां आसानी से अंदर बाहर होने लगीं जिससे वह दोबारा से सिसकने लगी।

उसकी उत्तेजना को चरम पर पहुंचाने के लिए मैंने फिर उसे उसी पोजीशन में किया और हल्के हल्के थप्पड़ मारे जिससे वह पूरी तरह से मेरे वश में आ गई।

हमने कुछ देर और उस पोजीशन में आनंद लिया। जब हम पूरी तरह से संतुष्ट हो गए और हमारे शरीरों की आग पूरी तरह शांत हो गई तो हम दोनों बाथरूम गए।

बाथरूम के शॉवर के नीचे हम दोनों खड़े हुए। हमने साबुन और पानी से एक दूसरे के शरीरों पर लगे तेल खून और वीर्य के दागों को अच्छी तरह से धोया।

साफ होने के बाद कमरे में आकर उसने कपड़ा पहना। उसके कपड़े पहनने के बाद विदाई की वो घड़ी आ गई थी क्योंकि शाम होने वाली थी और उसका घर लौटना जरूरी था।

दरवाजे के पास खड़े होकर हमने एक आखिरी लंबा और भावुक चुंबन एक दूसरे के होठों पर अंकित किया। वह अपने घर चली गई।

लेकिन इस पहली बार के भीषण अनुभव के कारण उसे सही से चला नहीं जा रहा था। उसकी चाल बदल चुकी थी जांघों और चूत में तेज दर्द था।

यह देखकर मैंने अपने घर में रखी एक पेनकिलर टैबलेट उसे दी ताकि वह रास्ते में और घर जाकर चैन से रह सके और किसी को शक न हो। वह दवा लेकर चुपचाप अपने घर निकल गई।

उस ऐतिहासिक दिन के बाद हमारा रास्ता पूरी तरह साफ हो गया। अब हमारे बीच का सारा डर और झिझक हमेशा के लिए खत्म हो चुकी थी।

जब भी मुझे मौका मिलता है घर खाली होता है या कोई ऐसी सुरक्षित जगह मिलती है हम दोनों अपनी इस भूख को मिटाने के लिए दोबारा एक हो जाते हैं और वह मुझे पूरी तरह से संतुष्ट करती है।

Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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