टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए

बॉयफ्रेंड छोड़ दीदी बनी मेरे लंड की दीवानी

Neighbor girl massage fuck sex story, Neighbor didi fuck sex story: फ्रेंड्स, मैं यूपी के बलिया का रहने वाला हूं. मेरा नाम विक्की है और मैं बीएससी फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट हूं.

यह कहानी मेरी और मेरे पड़ोस में रहने वाली एक लड़की की है जिसका नाम सोनम है.

वो मेरे से उम्र में बड़ी है.

मैं उसको सोनम दीदी बोलता हूं.

उसकी उपस्थिति में हमेशा एक गर्मजोशी भरी भावना उभरती थी.

बलिया की संकरी गलियों में जहां धूल भरी हवाएं चलती रहती हैं और आसपास के खेतों की हरी चादर फैली रहती है, उसकी मुस्कान और देखभाल करने वाली नजरें मुझे अपने घर जैसा महसूस कराती थीं.

वह अभी बीएससी कर चुकी है और एमएससी कर रही है.

सोनम का घर मेरे घर के बिल्कुल बगल वाला ही है.

तो हम दोनों के घरवालों में अच्छी जमती है.

दोनों घरों की दीवारें इतनी पास हैं कि रात को छत से एक दूसरे की बातें साफ सुनाई दे जाती हैं और हल्की हवा में उनके आंगन की खुशबू आ जाती है.

अच्छे व्यवहार की वजह से मेरा हमेशा उसके घर आना जाना होता रहता है.

मैं उसके घर जाता हूं तो उससे अपनी पढ़ाई के बारे में चर्चा होती रहती है.

उसके कमरे की ठंडी हवा और किताबों की महक के बीच हम घंटों बैठे रहते.

उसकी आवाज में एक मिठास होती जो मेरे मन को शांत कर देती.

एक दिन उसने कहा, तुम रोज कॉलेज से आने के बाद मेरे घर आ जाया करो.

तो तुम्हारे सब्जेक्ट्स को अच्छे से समझा दिया करूंगी.

मैंने हामी भर दी.

और अब मैं रोज कॉलेज से आने के बाद उसके घर चला जाता था.

कॉलेज की थकान उतारते हुए मैं उसके आंगन में कदम रखता ही महसूस करता कि वहां की शांति मेरी सांसों को सुकून दे रही है.

हम दोनों छत पर जाकर थोड़ा स्टडी करते.

और उसी दौरान हम दोनों के बीच हल्का फुल्का मजाक भी हो जाता.

छत की गर्मी भरी ईंटों पर बैठकर सूरज की किरणें हमारे चेहरे पर पड़तीं.

हवा में दूर से आती गायों की आवाजें और उसके बालों की हल्की खुशबू मेरे आसपास फैल जाती.

कुछ ही समय में यह हो गया था कि स्टडी कम होती और मजा ज्यादा होने लगा था.

हम दोनों अब बिल्कुल पक्के दोस्तों की तरह एक दूसरे के साथ व्यवहार करने लगे थे.

उसकी हंसी की धुन छत पर गूंजती और मेरी आंखें उसके चेहरे पर टिक जातीं.

उसके शरीर की हल्की हरकतें जैसे उसके कूल्हों का थोड़ा सा झुकाव या ब्लाउज का हल्का सा खिंचाव मुझे अंदर ही अंदर एक अनजानी उत्तेजना देता.

उसके दो भाई भी हैं.

वे दोनों बाहर रहकर स्टडी करते हैं.

सारा दिन वह अपने घर पर अकेली ही रहती है.

उसकी मम्मी की मृत्यु हो गई थी और पापा अभी विदेश में जॉब करने गए हैं.

तो घर का सारा काम उसी को करना पड़ता था.

जिसकी वजह से उसके चेहरे पर कभी थकान के निशान दिखते लेकिन फिर भी वह हमेशा मुस्कुराते हुए मेरा स्वागत करती.

उसके नरम हाथों से बनाया चाय का कप मेरे हाथ में थमाते हुए वह मेरी पढ़ाई की बातें पूछती.

हम दोनों ऐसे ही पढ़ाई के साथ मजाक आदि करने लगे थे.

और यह सब रोजाना चलने लगा था.

हर शाम छत पर बैठकर हमारा समय बीतता.

सूरज डूबने की नारंगी रोशनी में उसके चेहरे की चमक बढ़ जाती.

हवा में उसकी सांसों की हल्की गर्मी महसूस होती.

एक दिन उसने मुझसे पूछा, तुम्हारी कोई जीएफ है?

मैंने बोला, नहीं.

उसने तपाक से कहा, अरे तो कब बनाओगे.

क्या जब बूढ़े हो जाओगे तब?

मैंने कहा, यार कोई ढंग की लड़की मिलती ही नहीं है तो ऐसे किसे गर्लफ्रेंड बना लूं.

उसने पूछा, तुमको ऐसी कैसी लड़की चाहिए जो तुम्हें कोई नहीं मिल रही है.

मैंने कहा, वह कम से कम तुम्हारी तरह हो तो ही सोचूंगा.

तो उसने पूछा, मेरी तरह का क्या मतलब है?

मैंने बोला, केयरिंग हो, हॉट हो, सेक्सी हो और इंटेलिजेंट भी हो तो जरूर बना लेता.

इस पर उसने बोला, अच्छा यह मसला है.

मैंने उससे पूछा, हां यह मसला है.

अब तुम बताओ तुम्हारा कोई बीएफ है क्या?

उसने बोला, हां है.

तो मैंने कहा, उससे मिलती हो?

वह बोली, यार बात तो हो जाती है पर मिलना नहीं हो पाता.

फिलहाल उससे मिले चार महीने हो गए हैं.

तब से अब तक हम नहीं मिल सके हैं.

मुझे बाहर जाने का टाइम ही नहीं मिलता है तो कहां से मिलूं.

मैंने पूछा, अच्छा कहां कहां घूमी हो उसके साथ?

उसने कहा, यार वह मुझे लेकर तो कई बार गया पर घूमने का टाइम ही नहीं मिला.

मैंने कहा, इसका क्या मतलब हुआ.

जब साथ जाती हो तो और कैसा घूमना चाहती हो?

उसने कहा, अरे वह सब छोड़ो.

मैंने कहा, ओके और बताओ उसके साथ क्या चल रहा है?

उसने बताया, वह घर आ जाता है.

खाने पीने के बाद हम दोनों का ऐसा रहता है कि थोड़ा सा रेस्ट किया और उसके बाद जरा सा भी टाइम नहीं मिलता.

मैंने कहा, अरे तो रेस्ट क्यों करते हो.

उसी समय घूम लेना चाहिए ना.

उसने कहा, जब तुम्हारी जीएफ होगी और बाहर घूमने ले जाओगे ना तब सब पता लग जाएगा कि रेस्ट क्यों करना होता है.

मैं समझ गया कि ये क्या बात करना चाह रही है.

फिर उसने पूछा, अच्छा बाहर घूमने कितनी बार गई हो?

उसने कहा, गई तो कई बार हूं पर घूम नहीं पाते.

मैंने कहा, अच्छा घूम नहीं पाती हो.

कुछ हुआ भी है उसके साथ या बस ऐसे रेस्ट ही हो पाता है?

उसने मेरी बात पकड़ ली और बोली, चुप रहो तुम अब बस करो ज्यादा मत बोलो.

मैं हंस दिया.

उस दिन के बाद हम दोनों में एकदम से खुली बातें होने लगी थीं.

एक दिन मैं उसके घर गया था.

उस वक्त वह लेटी हुई थी और उसकी तबीयत ठीक नहीं थी.

मैं धीरे से उसके कमरे में घुसा तो देखा सोनम दीदी बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई थीं.

उनका चेहरा थोड़ा पीला पड़ा हुआ था और आंखें आधी बंद थीं.

कमरे में पंखे की हल्की फटफटाहट के साथ दवा की महक फैली हुई थी.

बलिया की दोपहर की गर्मी बाहर से आ रही थी लेकिन अंदर हवा ठंडी थी.

मैं बैठ गया और पूछा, क्या हुआ क्या समस्या है?

उसने कराहते हुए बताया, यार कमर दर्द हो रही है.

मैंने कहा, लाओ मैं दबा दूं.

उसने कहा, चुप रहो मजाक मत करो.

सच में कमर दर्द हो रहा है.

मैंने कहा, मैंने भी सच में दबाने को ही बोला है.

वह बोली, अच्छा?

मैंने बोला, हां यार.

वह बोली, ठीक है.

पहले खिड़की दरवाजा बंद कर लो.

फिर तेल लगा कर थोड़ी मालिश कर दो.

मैंने ऐसा ही किया.

मैंने उठकर कमरे की सारी खिड़कियां और मुख्य दरवाजा बंद कर दिया.

अब कमरा पूरी तरह से अंधेरा और निजी हो गया था.

बाहर की आवाजें बंद हो गईं और सिर्फ हमारे सांसों की आवाज रह गई थी.

उसने लोअर पहना था और ऊपर टीशर्ट डाली थी.

मैंने उसके पास बैठकर धीरे-धीरे उसकी टीशर्ट को ऊपर की तरफ खींच दिया.

उसकी नरम गर्म पीठ पूरी तरह नंगी हो गई.

मैंने उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया ताकि मालिश आसानी से हो सके.

उसकी पीठ की चिकनी त्वचा पर मैंने तेल की बोतल से अच्छा खासा तेल डाला.

फिर दोनों हाथों से मैंने उसकी पीठ पर मालिश शुरू कर दी.

अब वह मुझे लेटी हुई अजीब सी नजरों से देखने लगी थी.

मैंने पूछा, क्या देख रही हो?

वह बोली, यार सच में तुम्हारे जैसा बॉयफ्रेंड होना चाहिए.

कितनी अच्छी मालिश करते हो.

मैंने थोड़ी लाइन मारी, मैं सब अच्छे से करता हूं मैडम.

आप मौका कहां देती हो.

वह भी समझ रही थी कि मैं क्या इशारा कर रहा हूं.

उसने अब अपने लोअर को थोड़ा सा नीचे खिसका कर जगह बनाते हुए इशारा किया.

मैंने उसकी पीठ से होते हुए कमर को थोड़ी देर तक सहलाया.

मेरे तेल लगे हाथ उसकी निचली कमर पर फिसल रहे थे.

तेल की चिकनाहट के कारण मेरे हाथ आसानी से नीचे सरकने लगे थे.

उसका लोअर लूज होने से मेरा हाथ थोड़ा नीचे तक जाने लगा था.

मुझे उसके मांसल चूतड़ों का स्पर्श मिल रहा था.

वे गोल, नरम और बहुत गर्म थे.

मेरी उंगलियां उनके ऊपर दबाव डाल रही थीं और तेल के साथ वे फिसल रहे थे.

मैं उसके मादक जिस्म का अहसास करते हुए मालिश कर रहा था.

उसके शरीर की गर्मी मेरे हाथों में समा रही थी.

मेरा ध्यान नहीं था कि मेरा हाथ कब उसकी पैंटी में चला गया.

अचानक मुझे एक गर्म चिपचिपी नमी का स्पर्श हुआ.

उसकी चूत की नमी ने मेरे हाथ को एक अलग सा फील दिया.

वह तरल गर्म और थोड़ा चिपचिपा था.

मैंने महसूस किया कि मेरे हाथ के चूत पर लग जाने से उसने कुछ भी नहीं बोला.

वह बस अपनी सांसें थोड़ी तेज ले रही थी.

मैं मस्ती से लगा रहा.

थोड़ी देर तक मैं चूत के इर्द गिर्द मालिश करता रहा.

मेरी उंगलियां उसके बाहरी होंठों को हल्के-हल्के छू रही थीं.

वे गीले और सूजे हुए थे.

मैं उन्हें ऊपर-नीचे घुमा रहा था और हल्का दबाव बढ़ा रहा था.

उसकी सांसें भारी हो गई थीं और वह बिस्तर पर अपनी कमर को थोड़ा-थोड़ा उठा रही थी.

मैं उसे कसमसाने पर मजबूर करता रहा.

उसके शरीर में हल्की-हल्की सिहरन दौड़ रही थी.

मैंने समझ लिया था कि यदि मैं उसकी चूत उंगली भी कर दूं तब भी यह कुछ नहीं कहेगी.

अंत में मैंने एक बार जानबूझ कर अपना हाथ चूत पर डाल दिया.

इस बार मैंने अच्छे तरीके से चूत को जोर से दबाते हुए मसला.

मेरी पूरी हथेली उसके गीले चूत पर दब गई.

गर्म नमी मेरी उंगलियों के बीच फैल गई.

तो इस बार वह मचल गई और बोली, बस करो.

तुम्हारा इरादा ठीक नहीं लग रहा है.

तुम बदतमीजी कर रहे हो.

मैंने कहा, यार एक तो मैंने तुम्हारी कमर की मालिश की और तुम इसे बदतमीजी बोल रही हो.

चलो अब मुझे मेरा मसाज का चार्ज दो.

वह इठला कर बोली, अच्छा कितना चार्ज लेते हो?

मैंने उसकी आंखों में आंखें डालकर कहा, जितना तुम दे सको पर चार्ज मैं पैसे में नहीं लूंगा.

उसने पूछा, फिर कैसे लोगे?

वह भी इशारा समझ रही थी.

मैं मुस्कुरा दिया तो वह झट से बोली, अभी मैं कुछ भी चार्ज नहीं दे सकती क्योंकि अभी सर्विसिंग चल रही है.

तुम दो तीन दिन के बाद अपनी सर्विस का चार्ज ले लेना.

तभी मैं समझ गया कि इसकी चूत से माहवारी का पानी बह रहा है इसलिए दो तीन दिन बाद की कह रही है.

मैं उससे अलग हो गया और हम दोनों के बीच ऐसे ही उल्टी सीधी बात होने लगी.

मस्ती चढ़ती जा रही थी.

फिर तीन दिन कब निकल गए कुछ पता ही नहीं चला.

अब चार्ज लेने का दिन आ गया.

मैं अपने टाइम से पहले ही पहुंच गया.

मतलब जिस टाइम पर मैं रोज जाता था उससे जरा पहले आ गया.

वह संडे का दिन था तो मैं फ्री था.

मैं उसके रूम में गया वह नहीं दिखी.

मैं समझ गया कि वह पक्का बाथरूम में होगी.

मैंने ध्यान दिया तो बाथरूम से पानी गिरने की तेज आवाज आ रही थी.

वह कुछ गुनगुना रही थी.

उसकी गुनगुनाहट हल्की और मधुर थी.

जैसे कोई पुराना गाना याद आ रहा हो.

मैंने बिस्तर पर देखा तो उसके कपड़े रखे थे.

उसकी साड़ी का ब्लाउज और लोअर बेड पर बिखरे पड़े थे.

मैं उधर ही बेड पर बैठ गया.

उसे पता नहीं था कि मैं कमरे में आ गया हूं और बेड पर बैठा हूं.

वह नहा कर एकदम से बाथरूम से निकली.

उसने बस एक छोटा सा तौलिया लपेटा हुआ था.

तौलिया उसके घुटनों तक ही पहुंच रहा था.

उसके गीले बाल कंधों पर लटक रहे थे.

पानी की बूंदें उसकी गर्दन से नीचे सरक रही थीं.

जैसे ही उसकी नजर मेरे ऊपर पड़ी वह घबरा गई.

मैं उसके कपड़ों पर ही बैठा था.

उसने खुद को संयत करते हुए कहा, मेरे कपड़े दे दो.

मैंने उसके मदमस्त यौवन का रस पीते हुए कहा, आओ खुद ही ले जाओ.

उसके चेहरे पर शर्म और आश्चर्य का मिश्रण था.

जब वह कपड़े लेने आई और कपड़े खींच कर निकालने की कोशिश की तो वह नहीं निकाल पाई.

मैंने उसे जोर से खींच लिया तो वह मेरे ऊपर आ गिरी.

उसकी तौलिया उसके शरीर से हट गई.

वह बिल्कुल नंगी हो गई थी.

उसके बड़े-बड़े गोल मम्मे हवा में लहरा रहे थे.

गुलाबी-काले निप्पल सख्त होकर खड़े थे.

उसकी चिकनी पेट की त्वचा पर पानी की बूंदें चमक रही थीं.

उसकी चूत पर हल्के बाल थे जो अभी भी गीले थे.

उसके मोटे जांघ एक दूसरे से सटे हुए थे.

उसने झपट कर अपने मम्मों के ऊपर तो तौलिया को ले लिया लेकिन हड़बड़ाहट में तौलिया सही से नहीं लगी थी.

तो उसका एक स्तन साफ दिखने लगा.

मैंने उसके दूध पर अपना हाथ रख दिया.

उसकी नरम और गर्म त्वचा मेरी हथेली में दब गई.

निप्पल मेरी उंगलियों के बीच सख्त हो गया.

वह सहम गई और शर्मा भी गई.

वह बोली, छोड़ो कोई देख लेगा.

मैंने कहा, इधर कोई नहीं देखेगा.

दरवाजा बंद है और खिड़की भी.

अब मैंने उसे खींचा और किस करने लगा.

मेरे होंठ उसके होंठों से चिपक गए.

मैंने उसकी निचली होंठ को चूसा.

फिर अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी.

उसकी गर्म और नम जीभ मेरी जीभ से लिपट गई.

कुछ पल बाद वह भी मेरा साथ देने लगी.

उसकी सांसें तेज हो गई थीं.

वह कामुक भाव से बोली, जल्दी से अपना चार्ज ले लो नहीं तो कोई दूसरा आ जाएगा तुम्हारी जगह.

मैंने यह सुनते ही उसकी चूत पर मुंह लगा दिया.

मैंने उसके जांघों को फैला दिया.

उसकी गीली चूत मेरे चेहरे के सामने थी.

उसकी गंध मीठी और मादक थी.

मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसके बाहरी होंठों को चाटना शुरू किया.

फिर क्लिटोरिस को चूसने लगा.

वह बोली, पागल हो तुम.

मैं उसकी बात को अनसुना करते हुए चूत को जोर जोर से चाटने लगा.

मेरी जीभ उसके अंदर घुस रही थी.

उसके रस की मीठी चिपचिपाहट मेरी जीभ पर फैल रही थी.

वह भी अब पूरे मूड में आ गई थी.

उसकी कमर ऊपर-नीचे हिल रही थी.

उसके हाथ मेरे बालों में उलझ गए थे.

कुछ ही समय में उसका रस निकल गया.

उसके शरीर में तेज सिहरन दौड़ी.

वह जोर से कराह उठी.

उसके चूत से गर्म तरल बाहर निकला.

मैंने उसे चाट-चाट कर साफ कर दिया.

वह मुझसे छूट कर हट गई और अपनी चूत को उसी तौलिया से पोंछने लगी.

थोड़ी देर बाद मैंने उसे फिर अपने पास खींचा.

अपना लंड उसको मुंह में लेने को बोला.

वह मना करने लगी.

मेरे बहुत बोलने के बाद उसने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया.

उसके गर्म और नरम होंठ मेरे लंड के सिरे को घेर गए.

वह मजे से चूसने लगी.

उसकी जीभ लंड के नीचे वाले हिस्से को चाट रही थी.

उसके मुंह से सलाइवा की आवाज आ रही थी.

थोड़ी देर चूसने के बाद बोली, अब इसे इसकी सही जगह पर लगा दो.

मैंने उसको चुदाई की पोजीशन में लिटाया और अपना लंड उसकी चूत पर रख कर एक ही झटके में पेल दिया.

उसकी दोनों टांगें मैंने अपने कंधों पर रख दी थीं ताकि उसकी चूत पूरी तरह खुली और ऊपर की तरफ उठी हुई हो. मेरा मोटा और लंबा लंड उसकी गीली चूत के मुंह पर रगड़ रहा था. उसकी चूत की नमी मेरे लंड के सिरे को चिपचिपा बना रही थी. फिर मैंने कमर को जोर से आगे की तरफ धकेला. एक ही झटके में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया. उसकी चूत की दीवारें मेरे मोटे लंड को कसकर निचोड़ रही थीं. वह तड़प गई और बोली, उई साले पागल हो क्या. उसके मुंह से एक तेज चीख निकली. उसके शरीर में सिहरन दौड़ गई. तुमने तो एक ही बार में पेल दिया. आह जानते भी हो कि तुम्हारा बहुत मोटा है और लंबा भी है.

मैंने पूछा, तुम्हारे बॉयफ्रेंड का कैसा है? वह बोली, यार उसका मत पूछो वह तो बेकार है. जरा सा पुल्ल पुल्ल करके निकल जाता है. उसका सही होता तो तुमको चांस क्यों मिलता.

बस मैं अब उसे दबा कर चोदने लगा. मैंने उसके दोनों पैर कंधों पर और भी मजबूती से दबा दिए. मेरी कमर तेज-तेज ऊपर-नीचे हिल रही थी. हर झटके में मेरा लंड उसकी चूत की सबसे गहराई तक जा रहा था. उसकी चूत से चिकचिक की गीली आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी. उसके गर्म रस मेरे लंड पर फैल रहे थे. वह अपनी दोनों टांगें हवा में फैला कर आह आह करने में लगी थी. उसकी सांसें फूल रही थीं और चेहरा लाल हो गया था.

मैंने कहा, मजा आ रहा है बेबी? वह बोली, हां बहुत. पर प्लीज आराम आराम से करो न. ऐसे में दर्द हो रहा है.

मैं कहां मानने वाला. मैं उसके दोनों दूधों को जोर-जोर से दबाने लगा. मेरी उंगलियां उसके सख्त निप्पल को मसल रही थीं. उसकी चूत मेरे लंड को और भी कसकर पकड़ रही थी. थोड़ी देर बाद वह झड़ गई. उसके शरीर में तेज कंपन हुआ. उसकी चूत से गर्म रस की धार निकली. उसके बाद मेरा भी रस निकल गया. मैंने अपना माल उसके पेट पर निकाल दिया. गर्म सफेद धार उसके नाभि तक फैल गई.

कुछ पल बाद वह मुझे हटा कर उठी और अपने अंग साफ करके कपड़े पहन लिए. मैं भी अपने अंडरवियर को पहन कर ठीक से लेट गया और उसे प्यार से देखने लगा.

थोड़ी देर के बाद मेरा फिर खड़ा हो गया. वह देख रही थी. मैंने कहा, यार एक बार में मजा नहीं आया. मेरा फिर मूड बन रहा है. वह बोली, तो अब क्या करना है.

मैंने कहा, यार वह तो बस ऐसे ही स्टार्टअप था. इस बार आओ सही से मजे करते हैं. वह बोली, रुको पहले मैं देख कर आती हूं कि कोई आया तो नहीं है. फिर वह बाहर गई और दरवाजे बंद करके अंदर आ गई.

जैसे ही वह मेरे करीब आई मैंने उसका लोअर खींच दिया तो देखा कि उसने पैंटी पहनी ही नहीं थी. उसकी चूत अभी भी थोड़ी सूजी हुई और चमक रही थी. मतलब वह खुद दुबारा चुदने को मचल रही थी.

इस बार मैंने पहले सिक्स्टी नाइन में खेल शुरू किया. मैं लेट गया और उसे अपने मुंह के ऊपर बैठा लिया. उसकी गीली चूत मेरे मुंह पर थी और मेरा लंड उसके मुंह में. हम दोनों एक दूसरे को चूसने लगे. उसकी जीभ मेरे लंड को लपेट रही थी. मेरी जीभ उसकी चूत के अंदर घुस रही थी.

फिर चूत गीली होते ही मैंने अपना लंड वापस उसकी चूत में ठांस दिया और हम दोनों मस्ती करने लगे. इस बार वह खुल कर चुदवा रही थी.

मैं भी उसे प्यार करता हुआ चोद रहा था.

मेरी कमर लगातार ऊपर नीचे हो रही थी. मेरा मोटा लंड उसकी गीली चूत के अंदर बार बार घुस रहा था. हर धक्के के साथ उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर चूस रही थीं. मैं उसे प्यार भरी नजरों से देखते हुए चोद रहा था.

कभी मैं उसके बड़े-बड़े नरम दूधों को मुंह में ले लेता. उनके गुलाबी निप्पल को जोर से चूसता. मेरी जीभ उनके चारों ओर घूमती. कभी मैं उसके होंठों को चूस लेता और अपनी जीभ उसके मुंह के अंदर डाल देता. वह भी मेरी जीभ को जोर से चूसने लगती.

कुछ मिनट बाद उसका रस निकल गया पर मेरा अभी नहीं निकला था. उसके शरीर में तेज सिहरन आई. उसकी चूत मेरे लंड को और भी जोर से निचोड़ने लगी. उसके चूत से गर्म पतला रस निकलकर मेरे लंड और अंडकोष पर बहने लगा.

मैं जोर जोर से धक्के लगाने लगा. अब वह ढीली पड़ गई थी. उसकी टांगें मेरी कमर के चारों ओर ढीली पड़ चुकी थीं. फिर भी मैं रुकने का नाम नहीं ले रहा था.

मैं उस लड़की की चूत चुदाई का मजा लेता रहा. उसकी चूत की गर्मी, उसकी नमी और उसके मांसल शरीर का स्पर्श मुझे और भी उत्तेजित कर रहा था. थोड़ी देर बाद मेरा भी होने वाला था तो मैं और तेज धक्के लगाने लगा.

इससे वह चार्ज हो गई और अब वह भी धक्के देने लगी. वह अपनी कमर ऊपर उठा-उठाकर मेरे लंड को और गहराई तक लेने लगी. और बाद में मेरे साथ ही झड़ने वाली हो गई थी. हम दोनों की सांसें एक साथ तेज हो गई थीं.

मैंने पूछा, कहां निकालूं? वह बोली, अंदर ही डाल दो. मैं देख लूंगी. अभी तो एमसी से फ्री हुई हूं. कुछ नहीं होगा.

मैं उसकी चूत में ही झड़ गया. मेरा गर्म गाढ़ा वीर्य उसकी चूत की गहराई में फूट पड़ा. उसके चूत के अंदर कई बार स्पर्म की धारें छूटीं. वह भी झड़ गई. उसकी चूत मेरे लंड को और भी मजबूती से पकड़ ली.

हम दोनों नंगे ही लेट गए. हमारी सांसें अभी भी तेज चल रही थीं. पसीने से हम दोनों के शरीर भीग गए थे. कमरे में सेक्स की भारी खुशबू फैली हुई थी.

मैंने पूछा, मजा आया? उसने कहा, यार सच में अभी तक इतना मजा कभी नहीं आया था. सच में तुम बड़े खिलाड़ी निकले. मैं तो तुम्हें छोटा समझती थी.

मैंने कहा, मैं तुम्हारे जैसा ही हूं. वह हंसने लगी.

हम दोनों बाथरूम में आ गए और उधर से साफ होकर कपड़े पहनने लगे.

उस दिन से हम दोनों बिल्कुल खुल गए हैं और अब जब भी मन होता है मैं उसे चोद देता हूं. अब तो जैसे वह मेरी बीवी बन चुकी है. जब उसका मन होता है वह मेरे लौड़े को पकड़ लेती है और मैं उसे सारी सारी चोदता हूं. अब तो उसने अपने बॉयफ्रेंड को भी कॉल मैसेज करना बंद कर दिया है. उसे अब बस मेरे साथ सेक्स में मजा आता है और मुझे भी उसकी लेने में मजा आता है.

आपको कितना मजा आया है प्लीज आप मेरी कहानी पर कमेंट्स करके जरूर बताएं.

7
11 लोगों को पसंद आया • 73%
टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए