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पापा ने बेटी को चुदाई की महाविद्या सिखाई

Baap beti chudai sex story, Papa ne beti ko choda sex story: मेरी मम्मी कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली गई थीं। अब घर में सिर्फ मैं और पापा रह गए थे। पिछले चार महीनों से पापा की नजरें मुझ पर टिकी रहती थीं। वो मुझे घूर-घूरकर देखते रहते थे। उनकी आंखें मेरी कमर पर टिकतीं, फिर मेरे उभरे हुए बूब्स पर रुकतीं, और फिर मेरी जांघों पर नीचे सरक जातीं। मैं अच्छी तरह समझ गई थी कि पापा अब मुझे चोदना चाहते हैं। मेरी कुंवारी चूत को अपना मोटा लंड देकर फाड़ना चाहते हैं। ये बात दोनों को पता थी, बस इंतजार था सही मौके का।

मम्मी के जाने के बाद वाली रात आई। रात के दस बज चुके थे। घर में सन्नाटा था, सिर्फ घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी। मैंने पापा के लिए खाना थाली में अच्छे से सजाया। गरम रोटी, सब्जी, दाल, चावल, सब कुछ। थाली हाथ में लेकर मैं उनके कमरे में गई। जैसे ही मैं थाली आगे बढ़ाकर रखने लगी, पापा ने थाली को एक तरफ सरका दिया। उनकी मजबूत उंगलियां मेरी पतली कलाई पर कस गईं। एक झटके में उन्होंने मुझे अपनी गोद में खींच लिया। मेरी सांसें एकदम तेज हो गईं। मेरी पीठ उनकी चौड़ी छाती से सट गई, और मेरे बूब्स उनके सीने पर दब गए।

“पापा! ये आप क्या कर रहे हैं?” मैंने हल्की, कांपती आवाज में कहा। लेकिन अंदर से मेरी चूत में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई थी। मेरी जांघें आपस में सिकुड़ गईं, और मैं महसूस कर रही थी कि मेरी पैंटी गीली होने लगी है।

“बेटी… आज मैं तुम्हें एक ऐसी गुप्त विद्या सिखाने वाला हूं जो तुम्हारी जिंदगी बदल देगी। इसे सीखने से तुम्हें परम आनंद मिलेगा, बहुत मजा आएगा,” पापा ने मेरी आंखों में गहराई से देखते हुए कहा। उनकी आवाज में एक गहरी गर्मी थी, जैसे वो सालों से ये पल इंतजार कर रहे हों। उनकी सांसें मेरे गाल पर लग रही थीं।

“पापा, इस विद्या का नाम क्या है?” मैंने गंभीर होकर पूछा। मेरे दिल की धड़कन इतनी तेज थी कि मुझे लग रहा था पापा भी सुन रहे होंगे। मेरी हथेलियां पसीने से भीग गई थीं।

“बेटी, इसे चुदाई की महाविद्या कहते हैं। आज मैं तुम्हें ये पूरी तरह सिखाऊंगा। जो मैं कहूं, वही करना। बस कभी मना मत करना। समझी?” पापा ने मेरे गाल पर धीरे से हाथ फेरते हुए कहा। उनकी उंगलियां मेरे होंठों के पास पहुंचीं, फिर मेरी ठुड्डी को हल्का सा ऊपर उठाया ताकि मैं उनकी आंखों में देखूं। उनकी आंखों में वासना साफ दिख रही थी।

मैं 23 साल की हो चुकी थी। कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर ली थी। गोरी-चिट्टी रंगत, 36-28-36 की फिगर वाली जवान लड़की। मेरे बड़े-बड़े, गोरे, गोल बूब्स टी-शर्ट में उभरे हुए थे। पतली कमर और गोल मटोल पुट्ठे किसी भी मर्द को पागल कर सकते थे। मैंने कई बार छुपकर पापा को मम्मी को चोदते देखा था। वो लंबे-लंबे धक्के मारते, मम्मी की सिसकारियां सुनाई देतीं, “आह्ह… और जोर से… ओह्ह…”। हर बार वो देखकर मेरी चूत गीली हो जाती थी, मेरे निप्पल्स सख्त हो जाते थे। अब मेरा भी मन था कि कोई मोटा, सख्त लंड मुझे भी फाड़े, मुझे भी वो सुख दे जो मम्मी को मिलता है।

पापा ने मुझे गोद में बिठाया और धीरे-धीरे किस करना शुरू किया। पहले उन्होंने मेरे दोनों गालों पर नरम नरम चुंबन किए। उनके गर्म होंठ मेरी नरम त्वचा पर दब रहे थे और हर किस के साथ मेरी सांस थोड़ी तेज हो रही थी। फिर वे मेरे कान के ठीक पीछे चले गए। वहां उन्होंने हल्के हल्के किस किए और अपनी गर्म सांस मेरे कान में फूंक दी। उसके बाद उनकी जीभ मेरी गर्दन पर फिसलने लगी। वे गर्दन पर लंबी लंबी चाट लगाते रहे। मुझे बहुत गुदगुदी हो रही थी लेकिन साथ ही बहुत अच्छा भी लग रहा था। मेरा पूरा शरीर हल्की हल्की सिहरन से भर गया था। मैं हल्की हल्की सांसें ले रही थी और मेरी आंखें आधे बंद हो गई थीं।

मैंने सिर्फ हल्की सफेद टी शर्ट और छोटी शॉर्ट्स पहनी थी। पापा के हाथ धीरे से मेरी टी शर्ट के अंदर सरक गए। उनकी गर्म हथेलियां मेरी पेट की नरम त्वचा पर फैल गईं। फिर वे ऊपर की तरफ बढ़े और मेरे बूब्स को बाहर से दबाना शुरू किया। मेरे निप्पल्स तुरंत सख्त हो गए थे। वो हल्के हल्के मेरे बूब्स को मसल रहे थे। उनकी उंगलियां बूब्स के गोलाई को घेर रही थीं और बीच बीच में निप्पल्स को हल्का सा दबा रही थीं।

“पापा… ये…” मैं कुछ कहने लगी लेकिन पापा ने मेरे होंठों पर अपनी उंगली रख दी।

“बेटी, विद्या सीखनी है तो चुप रहो। जो कर रहा हूं करने दो। अगर आखिर में मजा न आए तो कहना।”

मैं चुप हो गई। पापा मेरी 36 इंच की चूचियों को अच्छे से मसल रहे थे। टी शर्ट के ऊपर से ही उन्होंने मेरे निप्पल्स को उंगली से घुमाना शुरू किया। वे उन्हें हल्का सा नोच रहे थे और फिर पूरा बूब हाथ में लेकर दबा रहे थे। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। धीरे धीरे मेरी सांसें भारी होने लगीं और मेरी चूत में गर्मी फैलने लगी थी।

करीब 15 मिनट तक उन्होंने मेरे बूब्स के साथ खेला। पहले टी शर्ट के ऊपर से ही मसलते रहे। फिर उन्होंने टी शर्ट को थोड़ा ऊपर किया और सीधे मेरे नंगे बूब्स पर हाथ फेरा। उन्होंने बूब्स को दोनों हाथों से दबाया, उन्हें मथाया, निप्पल्स को उंगलियों में पकड़कर खींचा और फिर हल्का सा चुटकी ली। हर बार मेरी सांस रुक जाती थी। फिर उन्होंने मुझे किस करने लगे। गहरे गहरे किस। उनके होंठ मेरे होंठों से पूरी तरह चिपक गए। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई और मेरी जीभ को चूसने लगी। मैं भी जवाब देने लगी। मैं उनकी जीभ को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी। हमारी लार एक दूसरे में मिल रही थी। मेरा मन अब पूरी तरह चुदवाने का हो चुका था।

“अब कपड़े उतारो बेटी,” पापा ने हुक्म दिया।

मैंने टी शर्ट उतारी। ब्रा नहीं पहनी थी। मेरे बड़े बड़े गोरे बूब्स बाहर आ गए। वे थोड़ा थोड़ा हिल रहे थे और निप्पल्स पूरी तरह खड़े थे। पापा की आंखें चमक उठीं। वे उन्हें देखकर मुस्कुराए और अपनी जीभ से होंठ चाटे। फिर मैंने शॉर्ट्स का बटन खोला और उसे नीचे सरका दिया। उसके बाद मैंने पैंटी भी उतार दी। मेरी चूत पूरी तरह नंगी हो गई। उस पर हल्का हल्का रस चमक रहा था। मैं पूरी तरह नंगी हो गई। पापा भी जल्दी से अपने कपड़े उतारकर नंगे हो गए। उनका 10 इंच लंबा मोटा लंड पूरी तरह खड़ा था। लाल सुपारा चमक रहा था और उसके ऊपर हल्का प्रीकम लगा हुआ था।

पापा ने मुझे बिस्तर पर गोद में बिठा लिया। मैंने अपने दोनों पैर उनकी कमर के चारों तरफ कसकर लपेट लिए। मेरी पतली कमर उनकी चौड़ी कमर से सटी हुई थी। पापा ने मुझे कसकर बाहों में जकड़ लिया। हम दोनों एक दूसरे को गले लगाकर किस करने लगे।

“ओह सुनैना मेरी बेटी… कितनी मस्त माल बन गई है तू। आज मैं तेरी चूत का भोग लगाऊंगा। तुझे असली सेक्स का ज्ञान दूंगा,” पापा ने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा।

“पापा… आज मेरा भी आपसे चुदवाने का बहुत मन है। मेरी चूत का रास्ता बना दो। मुझे अपना लंड दो,” मैंने शरमाते हुए लेकिन उत्सुकता से कहा।

हमारे होंठ फिर मिले। पापा मेरे गुलाबी होंठों को पूरी ताकत से चूसने लगे। उनके होंठ मेरे होंठों को निचोड़ रहे थे, जैसे कोई भूखा शेर अपना शिकार चाट रहा हो। मैं भी उनकी जीभ को मुंह में लेकर जोर-जोर से चूस रही थी। हमारी जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं, लार एक-दूसरे के मुंह में मिल रही थी। मेरी चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी। चूत के होंठ फूल गए थे और अंदर से गर्म रस टपक रहा था। पापा गरम हो गए। उन्होंने मुझे अपनी चौड़ी छाती से इतनी जोर से चिपका लिया कि मेरे 36 इंच के बूब्स उनके सीने पर पूरी तरह दब गए। मेरे निप्पल्स उनके छाती की कड़ी मांसपेशियों से रगड़ खा रहे थे।

वो मेरे पूरे जिस्म को चूमने लगे। पहले गर्दन पर लंबी-लंबी चाट लगाई, फिर कंधों पर हल्के-हल्के काटते हुए चूमे। उसके बाद उन्होंने मेरे बूब्स पर होंठ रख दिए। दोनों बूब्स को बारी-बारी से चूमते रहे, कभी एक को मुंह में लेकर चूसते, कभी दूसरे को। फिर मेरे पेट पर जीभ फेरते हुए नीचे की तरफ आए। मेरी नाभि में जीभ डालकर घुमाई, जिससे मैं सिहर उठी।

फिर पापा ने मेरे बाएं बूब को मुंह में भर लिया। जोर-जोर से चूसने लगे। उनकी जीभ मेरे निप्पल के चारों तरफ गोल-गोल घूम रही थी। कभी निप्पल को जीभ से दबाते, कभी हल्का सा दांतों से काटते। मैं “आह्ह्ह… उईई… ओह्ह पापा… कितना अच्छा लग रहा है… और चूसो…” सिसकारियां लेने लगी। पहली बार कोई मर्द मेरे बूब्स चूस रहा था। मेरी चूत में आग लग गई थी। चूत के अंदर खुजली हो रही थी, जैसे कोई चीज अंदर डालने को बेताब हो।

पापा ने दाएं बूब को भी वैसा ही प्यार दिया। उन्होंने दोनों बूब्स को बारी-बारी से मुंह में लिया, चूसा, चाटा, मसला। 20 मिनट तक वो मेरे बूब्स पर लगे रहे। मेरी चूचियां फूलकर और सख्त हो गई थीं। अब वो 38 इंच की लग रही थीं। निप्पल्स लाल और खड़े हो चुके थे, जैसे दो छोटे-छोटे चेरी।

“बोल बेटी… पापा मेरी चूत आज फाड़ दो,” पापा ने मेरी आंखों में देखकर कहा। उनकी आवाज में भूख साफ झलक रही थी।

“पापा… मेरी चूत कसके फाड़ दो। मुझे चोद दो,” मैंने कांपती आवाज में कहा।

“बोल… मैं रंडी हूं, आवारा हूं, छिनाल हूं,” पापा ने और गंदी बात कहने को कहा।

“पापा… मैं तुम्हारी रंडी हूं। आवारा छिनाल हूं। जितना मन करे मुझे चोद लो,” मैंने उनकी आंखों में देखकर कहा। मेरी आवाज में अब शर्म कम और वासना ज्यादा थी।

हम दोनों गंदी-गंदी बातें करने लगे। “तेरी चूत कितनी टाइट है बेटी… आज मैं इसे ढीला कर दूंगा…” “पापा… आपका लंड कितना मोटा है… मेरी चूत फाड़ दो…” इससे हमारी वासना और बढ़ गई। पापा ने मुझे हल्का ऊपर उठाया। मेरी चूत के मुंह पर अपना लाल सुपारा सेट किया। सुपारे का गर्म स्पर्श मेरी चूत के होंठों पर लगा। दोनों हाथों से मेरे गोल मटोल पुट्ठे कसकर पकड़े और एक जोरदार धक्का दिया। मेरी कुंवारी सील फट गई। 10 इंच का मोटा लंड आधा अंदर चला गया।

“आआआह्ह्ह्ह… दर्द… पापा… ओह्ह्ह…” मैं चीख पड़ी। आंसू मेरी आंखों से बहने लगे। चूत में तेज जलन हो रही थी, जैसे कोई आग का कोयला अंदर घुस गया हो।

पापा रुके नहीं। उन्होंने धीरे-धीरे और अंदर धकेलते गए। हर इंच के साथ मुझे लग रहा था कि मेरी चूत फट रही है। आखिरकार पूरा 10 इंच का लंड मेरी चूत में समा गया। मैं उन्हें कसकर पकड़े हुई थी। मेरे नाखून उनकी पीठ में गड़ गए थे। पापा ने मुझे गोद में बिठाकर ऊपर-नीचे करने लगे। उनकी कमर पट-पट मेरे पुट्ठों से टकरा रही थी। हर धक्के के साथ मेरी चूत से पट-पट की आवाज आने लगी।

“हूंउउ… ऊं… आह्ह… पापा… कितना मोटा है… ओह्ह… अंदर तक महसूस हो रहा है…” मैं मोअन कर रही थी। लंड मेरे पेट तक महसूस हो रहा था। हर बार जब वो ऊपर उठाते और नीचे पटकते, मेरी चूत पूरी तरह भर जाती थी।

पापा मुझे उछाल-उछालकर चोद रहे थे। जैसे मैं उनकी गोद में साइकिल चला रही हूं। मेरी चूत से पट-पट की आवाज आ रही थी। कुंवारी खून चादर पर फैल गया। पापा मेरे होंठ चूसते हुए घप-घप धक्के मार रहे थे। हर धक्के के साथ मेरी चूचियां ऊपर-नीचे उछल रही थीं।

पापा ने जीभ से अच्छे से चाटा। गांड का छेद अब पूरी तरह गीला और चिकना हो चुका था। उनकी जीभ अंदर-बाहर करती रही, कभी गोल-गोल घुमाती, कभी हल्का सा अंदर डालकर चाटती। मैं सिहर रही थी, मेरी गांड की मांसपेशियां सिकुड़-फैल रही थीं।

“बेटी… तेरी गांड तो कुंवारी है,” पापा बोले, उनकी आवाज में भूख और प्यार दोनों थे।

“पापा… मैं आपसे ही गांड मराना चाहती थी। और किसी को नहीं देने वाली, चूत भी तो कुंवारी थी न,” मैंने शरमाते हुए कहा। मेरी आवाज कांप रही थी, चेहरा लाल हो चुका था। फिर मैंने थोड़ा रुककर, आंखें नीची करके आगे कहा, “पापा… मैंने सोचा था कि अगर कभी कोई लड़का मेरी गांड मांगता तो मैं मना कर दूंगी। लेकिन आप… आप तो मेरे पापा हो। आपने मेरी चूत ली, अब मेरी गांड भी आपकी है। मैं चाहती हूं कि आप ही मेरी पहली और आखिरी बनें। मुझे आपका लंड गांड में महसूस करना है… पूरा… गहरा… जितना अंदर जा सके।”

पापा की सांसें और तेज हो गईं। उनकी आंखें मेरी आंखों में टिक गईं। “सुनैना… मेरी बहादुर बेटी… तू सच में मेरी रंडी बन गई है। आज मैं तेरी गांड को भी अपना बना लूंगा। धीरे से, लेकिन पूरा अंदर तक। तुझे दर्द होगा, लेकिन फिर मजा भी आएगा… बहुत ज्यादा। तैयार है?”

“हां पापा… तैयार हूं। मुझे अपना लंड दो… गांड में… मैं सह लूंगी,” मैंने उनकी कमर पकड़कर कहा। मेरी आवाज में अब हिम्मत थी, शर्म के साथ-साथ उत्सुकता भी।

पापा ने फिर से जीभ से चाटा, इस बार और गहराई से। उनकी जीभ गांड के छेद को फैलाने की कोशिश कर रही थी। फिर उन्होंने लंड पर थूक लगाया, सुपारे को मेरे रस से गीला किया। लंड फिर से मेरी गांड के मुंह पर सेट किया। सुपारा धीरे-धीरे दबाव डालते हुए अंदर घुसने लगा। मैंने सांस रोकी, दांत भींच लिए।

“आह्ह… ओह्ह… पापा… धीरे… बहुत मोटा है… लग रहा है फट जाएगी…” मैं कराह रही थी। आंसू आंखों में आ गए, लेकिन मैं पीछे नहीं हटी।

पापा ने मेरे पुट्ठों को सहलाया, हल्का मसला। “आराम से बेटी… सांस ले… छोड़… मैं धीरे कर रहा हूं। तेरी गांड बहुत टाइट है… लेकिन मैं इसे अपना बना लूंगा।”

धीरे-धीरे, इंच-इंच करके लंड अंदर गया। हर इंच के साथ दर्द बढ़ रहा था, लेकिन साथ ही एक अजीब सा भराव महसूस हो रहा था। आखिरकार पूरा 10 इंच का लंड मेरी गांड में समा गया। पापा रुक गए, मुझे सांस लेने का मौका दिया।

“अब… अब कैसा लग रहा है बेटी?” पापा ने पूछा।

“दर्द… बहुत दर्द… लेकिन अच्छा भी लग रहा है… पापा… अब धक्के मारो… धीरे से… मुझे आपका पूरा महसूस करना है,” मैंने कांपती आवाज में कहा।

पापा ने धीमे-धीमे धक्के शुरू किए। पहले छोटे, फिर थोड़े लंबे। गांड की दीवारें लंड को कसकर जकड़े हुए थीं। हर धक्के के साथ मैं “आह्ह… उई… ओह्ह… पापा… और… और अंदर…” कर रही थी। दर्द अब मजा में बदल रहा था। मेरी चूत से रस टपक रहा था, भले ही लंड गांड में था।

30 मिनट तक उन्होंने मेरी गांड मारी। धक्के तेज होते गए। पट-पट की आवाज अब गांड से आने लगी। मैं बार-बार चिल्ला रही थी लेकिन रुकने नहीं दे रही थी। आखिर में पापा ने एक गहरा धक्का मारा और गांड के अंदर ही गर्म माल छोड़ दिया। माल की गर्माहट गांड में फैल गई। मैं “आआह्ह्ह… पापा… अंदर… कितना गर्म… ओह्ह…” चीखी।

पापा ने लंड निकाला तो गांड से माल बहने लगा। हम दोनों थककर लेट गए।

दोस्तों, हमारी ये बाप-बेटी वाली चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी? क्या आप भी ऐसी कोई फैंटसी रखते हैं? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं। अगली बार और क्या पढ़ना चाहेंगे?

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