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मां की चूत में अंकल का मोटा लंड घुसता देखा

Beta ne dekhi maa ki chudai sex story, Village wedding maa chudai sex story: दोस्तों, मेरा नाम इरफ़ान है। आज मैं आपको वो सारी बातें बताने जा रहा हूँ जो मैंने कभी किसी को नहीं बताईं, लेकिन अब मन में इतना बोझ हो गया है कि बता ही देता हूँ। मेरी मां सलमा बेगम की उम्र अभी ५० साल है, लेकिन सच में वो ३५-३६ की लगती हैं। उनका फिगर ३४-३०-३६ का है। गोरी चिट्ट चमड़ी, भरे हुए स्तन जो साड़ी में भी उभार दिखाते हैं, कमर पतली और गांड गोल-मटोल, ऐसी कि देखने वाला आंखें नहीं हटा पाता। अब्बू के जाने के बाद से वो घर में उदास रहती थीं, चुप-चुप रहतीं, लेकिन अंदर से उनकी चाहतें अभी भी जिंदा थीं, वो आग बुझी नहीं थी।

छह महीने पहले अब्बू का देहांत हुआ था। हम सब दुखी थे, घर में सन्नाटा छा गया था। इसी बीच गांव में एक दूर के रिश्तेदार की शादी का न्योता आया। हम बस से गए। रास्ते में पापा के एक पुराने दोस्त अंकल मिले। नाम था शाहिद अंकल। लंबे, चौड़े कंधे, मजबूत शरीर, हमेशा सफेद धोती-कुर्ता पहनते थे। थोड़े नशेड़ी टाइप लगते थे, लेकिन बातें बहुत मीठी करते थे। बस में ही मां से काफी देर बातें कीं, पुरानी यादें ताजा कीं, हंसते-बोलते रहे। मुझे लगा पुरानी दोस्ती है, इसलिए ज्यादा कुछ नहीं सोचा।

शादी वाले घर पहुंचे तो सबने बहुत प्यार किया। रस्में चल रही थीं, घर में हलचल थी। मैंने देखा अंकल बार-बार मां के पास आते, कोई न कोई बहाना बनाकर बात करते, कभी पानी मांगते, कभी कुछ पूछते। मां भी हंस-हंसकर जवाब देतीं। उनकी आंखों में वो चमक थी जो अब्बू के जाने के बाद मैंने कभी नहीं देखी थी। वो चमक मुझे अजीब लग रही थी, लेकिन समझ नहीं पा रहा था।

रात को मैं घर के पीछे बाथरूम जाने निकला। अंधेरा था, सिर्फ चांद की रोशनी। खेत की तरफ से पहले मां आईं। उनकी साड़ी थोड़ी सिलवटों में थी, पल्लू ठीक से नहीं लिपटा हुआ, बाल बिखरे हुए लग रहे थे, चेहरा थोड़ा लाल, सांसें तेज चल रही थीं। वो तेजी से घर की तरफ आईं और अंदर घुस गईं। फिर ठीक दो मिनट बाद अंकल निकले। वो अपनी धोती को कमर पर कसते हुए, कुर्ता ठीक करते हुए आ रहे थे। दोनों के चेहरे पर एक अजीब सी संतुष्टि की मुस्कान थी, जैसे कोई राज पूरा हो गया हो।

मां घर में घुसीं तो एक ताई ने पूछा, “अरे सलमा, इतनी देर कहां थीं बेटी?” मां अंकल की तरफ देखकर बोलीं, “किसी को कुआं दिखाना था, डुबकी लगाने के लिए ले गई थीं।” फिर हंसते हुए कहा, “हां, उसने बहुत गहरी डुबकी लगाई, पूरा भीग गया!” अंकल भी जोर से हंस पड़े। फिर बोले, “कुएं का पानी सच में बहुत मीठा था, एक बार पीया तो मन नहीं भरा।” मां शरमाकर मुस्कुराईं, नजरें नीचे कर लीं। अंकल ने जेब से मां की पैंटी निकाली, वो गीली लग रही थी, और सामने ही थमा दी। मां ने जल्दी से ले ली और ब्लाउज के अंदर छिपा ली। मैं पेड़ के पीछे छिपकर सब देख और सुन रहा था। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, हाथ-पैर ठंडे पड़ गए थे।

अगले दिन शादी थी। मां ने लाल सिल्क की साड़ी पहनी थी। ब्लाउज गहरा कट वाला था, जिससे स्तनों की गहराई साफ दिख रही थी, वो भी थोड़े नीचे सरककर और उभार दिखा रहा था। पेटीकोट नीचे से चमक रहा था, साड़ी का पल्लू कंधे पर लहरा रहा था। वो दुल्हन के साथ रस्में निभा रही थीं, हंस रही थीं, लेकिन आंखें बार-बार अंकल की तरफ जा रही थीं। अचानक अंकल आए। मां के बहुत पास गए, कान में कुछ फुसफुसाए, इतने धीमे कि मुझे सुनाई नहीं दिया। फिर वो हॉल के पीछे चले गए। थोड़ी देर बाद मां भी चुपके से उनकी तरफ देखकर गईं। मुझे बहुत शक हुआ। मेरा दिल तेज धड़कने लगा। मैं भी पीछे-पीछे चला गया।

हॉल के पीछे एक पुराना स्टोर रूम था। दरवाजा अंदर से बंद था। लेकिन एक छोटी खिड़की थी, जिसकी जाली थोड़ी टूटी हुई थी। मैंने चुपके से झांकने की कोशिश की। सांस रुक गई।

अंकल ने मां को गोद में उठा लिया था। मां ने शरमाते हुए उनकी गर्दन के पीछे बाहें डाल दीं और अपना चेहरा उनके कंधे पर छिपा लिया। अंदर कमरे में पहुंचते ही अंकल ने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और मां को धीरे से दीवार से सटा दिया। दोनों की सांसें तेज हो चुकी थीं। अंकल ने मां के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले हल्के किस, फिर गहरे। जीभ अंदर डालकर मां की जीभ को चूसने लगे, दोनों की लार मिल रही थी। मां की सांसें और तेज हो गईं, उन्होंने धीरे से कहा, “आह… शाहिद… धीरे… कोई देख लेगा…” अंकल ने मां के होंठों से मुंह हटाकर कान में फुसफुसाया, “कोई नहीं आएगा सलमा, सब बाहर नाच रहे हैं, ढोल-नगाड़े की आवाज में तुम्हारी कराहें भी दब जाएंगी।”

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अंकल की एक हाथ मां की कमर पर थी, दूसरा हाथ धीरे-धीरे साड़ी के नीचे सरक गया। पहले उन्होंने पेटीकोट के ऊपर से पैंटी पर हाथ फेरा, फिर उंगलियां पैंटी के किनारे से अंदर डाल दीं। मां की चूत पहले से ही गीली थी। अंकल ने उंगली से चूत के होंठों को सहलाया, क्लिट पर हल्का दबाव डाला। मां की कमर हिलने लगी, उन्होंने आंखें बंद कर लीं और बोलीं, “उफ्फ… आह… कितना अच्छा लग रहा है… उंगली अंदर डालो ना…” अंकल ने एक उंगली धीरे से अंदर डाली, फिर दूसरी। अंदर-बाहर करने लगे, उंगलियों से चूत की दीवारों को रगड़ते हुए क्लिट को अंगूठे से दबाते रहे। मां की सांसें रुक-रुक कर आने लगीं, “आह्ह… शाहिद… और गहराई तक… ओह्ह… उंगलियां तेज करो…”

अंकल ने मां को गोद से उतारा और कमरे में रखी पुरानी लकड़ी की मेज पर बैठा दिया। मां की साड़ी पहले से ही ऊपर चढ़ी हुई थी। अंकल ने साड़ी को और ऊपर सरकाया, पेटीकोट को कमर तक उठाया और पैंटी को धीरे-धीरे खींचकर उतार दिया। पैंटी पैरों से निकलकर फर्श पर गिर गई। मां की चूत अब पूरी तरह नंगी थी – साफ शेव्ड, गुलाबी होंठ, क्लिट उभरी हुई और रस से चमक रही थी। अंकल घुटनों पर बैठ गए। उन्होंने मां की टांगें थोड़ा फैलाईं और मुंह चूत पर लगा दिया। पहले जीभ से बाहर के होंठों को चाटा, फिर क्लिट पर जीभ घुमाई। मां की कमर उठ गई, “आह्ह… ओह्ह… शाहिद… चाटो जोर से… मेरी चूत जल रही है…” अंकल ने जीभ को अंदर डाला, चूत के रस को चाटते हुए क्लिट को होंठों से चूसा। जीभ तेजी से अंदर-बाहर करने लगे। मां की कराहें बढ़ गईं, “इह्ह… हां ऐसे ही… आह्ह… और गहराई तक जीभ डालो… ओह्ह…”

१०-१५ मिनट तक अंकल लगातार चाटते रहे। कभी क्लिट को तेजी से चाटते, कभी होंठों को चूसते, कभी जीभ अंदर घुमाते। मां की चूत से रस बह रहा था, अंकल के होंठ और ठोड़ी गीली हो गई थी। मां की कमर बार-बार उठ-उठकर हिल रही थी, हाथ अंकल के सिर पर थे, बालों को कसकर पकड़े हुए। “ओह्ह… मैं झड़ जाऊंगी… आह… मत रुको… बस ऐसे ही चाटते रहो…” अंकल ने और तेज किया, क्लिट पर जीभ से तेज-तेज थपकियां दीं। मां का शरीर कांपने लगा, “आआह्ह… ओह्ह… आ रहा है… मैं झड़ रही हूँ…” और उन्होंने जोर से कमर उठाकर झड़ दिया। रस अंकल के मुंह में बह गया।

फिर मां ने थोड़ी सांस ली और अंकल को ऊपर खींचा। उन्होंने अंकल की धोती की गांठ खोली। धोती गिर गई और लंड बाहर आया – करीब ७ इंच लंबा, मोटा, नसें उभरी हुईं, सिरा लाल और चमक रहा था। मां ने हाथ में पकड़ा, धीरे-धीरे सहलाया, ऊपर-नीचे किया। फिर झुककर मुंह में लिया। पहले सिरे को जीभ से चाटा, फिर धीरे-धीरे पूरा मुंह में लिया। गग्ग… गग्ग… जीभ घुमातीं, सिरे को चाटतीं। अंकल ने मां के बाल पकड़े, “चूस सलमा… पूरा अंदर ले… आह… कितना अच्छा लग रहा है…” मां ने गले तक लिया, गी… गी… गों… गों… आवाजें आने लगीं। लार मुंह से बहकर लंड पर गिर रही थी। अंकल की सांसें तेज हो गईं। काफी देर चूसने के बाद अंकल कांपे, “आ रहा है… ले ले पूरा…” और मुंह में झड़ गए। गर्म पानी मां के मुंह में भरा। मां ने सब निगल लिया और लंड को जीभ से चाटकर पूरी तरह साफ कर दिया।

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अंकल फिर मां को किस करने लगे। उनकी जीभ मां के मुंह में थी। एक हाथ से साड़ी फिर से ऊपर की। दो उंगलियां चूत में डालीं। अब चूत और ज्यादा गीली थी। उंगलियां अंदर-बाहर तेजी से करने लगे, क्लिट को अंगूठे से रगड़ते रहे। मां तड़प रही थीं, “आह्ह… उंगली और तेज… ओह्ह… चूत में आग लग रही है… डालो लंड जल्दी…” मां ने खुद लंड पकड़ा, सहलाया। लंड फिर से सख्त हो गया। अंकल ने मां का एक पैर अपने कंधे पर रखा। मां ने लंड को चूत के मुंह पर रखा। अंकल ने कमर पकड़कर जोर से धकेला। पूरा लंड एक झटके में अंदर चला गया। मां चीखीं, “आआह्ह… ओह्ह… इतना मोटा… फट जाएगी चूत… धीरे…” लेकिन अंकल रुके नहीं। धीरे-धीरे धक्के शुरू किए, फिर तेज हो गए। थप… थप… थप… कमरे में आवाज गूंज रही थी। बाहर ढोल-नगाड़े बज रहे थे, मां की कराहें उनमें मिल रही थीं, “आह… चोदो… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… ओह्ह… हां ऐसे ही…”

खड़े होकर चुदाई से मां की टांगें कांपने लगीं। अंकल ने दूसरा पैर भी उठा लिया। अब मां पूरी तरह हवा में थीं, अंकल के लंड पर लटकी हुईं। अंकल उन्हें मजबूती से पकड़े हुए नीचे-ऊपर कर रहे थे। मां ने अंकल की गर्दन में बाहें जकड़ लीं, “आह्ह… ऊं… ऊईई… कितना गहरा जा रहा है… ओह्ह… मेरी चूत में पूरा घुस गया… और जोर से…” ५-७ मिनट तक ऐसे चुदाई चली। हर धक्के में लंड सबसे गहराई तक जाता। मां की कराहें तेज हो गईं, “आआह्ह… मैं फिर झड़ रही हूँ… ओह्ह…”

फिर अंकल ने मां को मेज पर घोड़ी बनाया। मां ने दोनों हाथ मेज पर टिका दिए। अंकल ने पीछे से लंड चूत पर रखा और धीरे से घुसाया। फिर कमर पकड़कर जोरदार धक्के मारने लगे। थप-थप-थप… मां की गांड लहरा रही थी। “आह्ह… पीछे से बहुत अच्छा लग रहा है… और जोर से… मेरी चूत को चीर दो… इह्ह… ओह्ह…” अंकल और तेज हो गए। कमर कसकर पकड़ी। झड़ने का समय आया तो बोले, “सलमा… ले मेरा पानी… पूरा अंदर…” पूरा लंड अंदर डालकर झड़ गए। गर्म पानी चूत में भर गया। मां भी साथ झड़ गईं, “आआह्ह्ह… भर दो अंदर… ओह्ह… कितना गर्म पानी है…”

लंड धीरे-धीरे सिकुड़कर बाहर आया। अंकल का पानी चूत से बहकर मां के पैरों पर गिर रहा था। मां ने फर्श पर पड़ी अपनी पैंटी उठाकर चूत और पैरों को साफ किया। अंकल अभी भी उत्तेजित थे। उन्होंने मां की सहेली को फोन किया, “अरे रुखसाना, सलमा मेरे साथ है। अगले ३ घंटे तक तू बाहर संभाल लेना।” फिर मां को पूरी तरह नंगा कर दिया। साड़ी, ब्लाउज, पेटीकोट सब उतारकर एक तरफ फेंक दिया। मां अब पूरी तरह नंगी खड़ी थीं, उनके स्तन लहरा रहे थे।

अगले तीन घंटों में अंकल ने मां को तरह-तरह से चोदा, हर पोजीशन में उन्हें नया मजा देते हुए। सबसे पहले दोनों फिर से खड़े हो गए। मां अभी भी पूरी नंगी थीं, उनका शरीर पसीने से चमक रहा था। अंकल ने मां की कमर पकड़ी, उन्हें दीवार से सटा दिया। मां ने खुद अपना एक पैर अंकल की कमर पर लपेट लिया। अंकल ने लंड फिर से चूत के मुंह पर रगड़ा, सिरा गीला करके धीरे-धीरे अंदर डाला। मां की सांस रुक गई, “आह्ह… शाहिद… फिर से… कितना सख्त हो गया है…” अंकल ने धीमे धक्के शुरू किए, हर धक्के के साथ गहराई बढ़ाते हुए। थप… थप… थप… आवाजें कमरे में गूंजने लगीं। मां की गांड दीवार से टकरा रही थी, “ओह्ह… हां… ऐसे ही… गहरा डालो… मेरी चूत में पूरा घुसाओ…” अंकल ने स्पीड बढ़ाई, मां की दोनों टांगें अब उनकी कमर पर लिपटी हुईं। मां की कराहें तेज हो गईं, “आह… ऊं… ऊईई… चोदो जोर से… फाड़ दो चूत को…” करीब दस मिनट बाद अंकल ने पहली बार झड़ दिया, पूरा पानी मां की चूत के अंदर ही छोड़ दिया। मां भी साथ में झड़ गईं, उनकी चूत सिकुड़ती हुई लंड को दबा रही थी, “आआह्ह… भर दिया अंदर… कितना गर्म है…”

थोड़ी देर दोनों ऐसे ही सांस लेते रहे। फिर अंकल ने मां को उठाकर पास की पुरानी मेज पर लिटा दिया। मिशनरी पोजीशन में। मां की टांगें फैलाकर रखीं, फिर कंधों पर उठा लीं। इससे चूत पूरी तरह खुल गई। अंकल ने लंड फिर से घुसाया, इस बार बहुत गहराई तक। मां की आंखें बंद हो गईं, मुंह से लगातार कराह निकल रही थीं, “ओह्ह… कितना गहरा… आह्ह… मेरी चूत का तल छू रहा है… शाहिद… मत रुको…” अंकल जोर-जोर से धक्के मार रहे थे, हर धक्के में मेज हिल रही थी। मां के स्तन उछल-उछल रहे थे। अंकल ने एक हाथ से स्तनों को मसलना शुरू किया, निप्पल को पिंच किया। मां तड़प उठीं, “आह… दबाओ जोर से… चूसो इन्हें…” अंकल झुककर एक स्तन मुंह में लिया, चूसते हुए धक्के जारी रखे। मां की कमर उठ रही थी, “इह्ह… ओह्ह… मैं फिर झड़ रही हूँ… आह्ह…” दूसरी बार अंकल ने पानी बाहर निकाला, मां के पेट पर छोड़ दिया। गर्म-गर्म माल मां की नाभि में भर गया। मां ने हाथ से उसे फैलाया, मुस्कुराते हुए कहा, “कितना ज्यादा है… अभी भी ठंडा नहीं हुआ…”

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अब अंकल ने मां को गोद में उठा लिया। पास में एक पुरानी लकड़ी की कुर्सी थी। अंकल कुर्सी पर बैठ गए, लंड सीधा खड़ा। मां को गोद में बिठाया, चूत लंड पर सेट की। मां धीरे-धीरे नीचे बैठीं, पूरा लंड अंदर ले लिया। “आह्ह… ऊं… कितना मोटा… भर गया अंदर…” अंकल ने मां की कमर पकड़ी, उन्हें ऊपर-नीचे करने लगे। मां खुद भी उछल रही थीं, गांड पटक-पटक कर। थप-थप-थप… आवाजें तेज। मां की कराहें अलग हो गईं, “ओह्ह… ऐसे उछालो… मेरी चूत में घिस रहा है… आह… और तेज… शाहिद… चोदो मुझे…” अंकल ने मां के स्तनों को मुंह में लिया, चूसते हुए उछालते रहे। मां की सांसें फूल गईं, “ऊईई… मैं थक गई… लेकिन रुकना मत… ओह्ह…” इस बार अंकल ने मां के मुंह में झड़ने का फैसला किया। मां नीचे उतरीं, लंड मुंह में लिया। गग्ग… गग्ग… तेज चूसने लगीं। अंकल ने बाल पकड़कर धकेला, मुंह में ही झड़ गए। मां ने पूरा निगल लिया, जीभ से साफ किया।

आखिरी राउंड के लिए अंकल ने मां को फर्श पर लिटाया। घोड़ी बनाकर। मां घुटनों और हाथों के बल पर थीं, गांड ऊपर। अंकल ने पीछे से लंड घुसाया, एक झटके में पूरा। मां चीखीं, “आआह्ह… पीछे से… बहुत जोर से लग रहा है…” अंकल ने कमर कसकर पकड़ी, तेज-तेज धक्के मारने लगे। थप-थप-थप… मां की गांड लहरा रही थी, लाल हो गई थी। “आह… चोदो… मेरी गांड मारो… चूत फाड़ दो… ओह्ह… हां ऐसे…” अंकल ने एक हाथ से क्लिट रगड़ना शुरू किया। मां पागल हो गईं, “इह्ह… ओह्ह… क्लिट मत छेड़ो… झड़ जाऊंगी… आह्ह…” अंकल ने आखिरी जोर लगाया, कमर पकड़कर पूरा लंड अंदर डालकर चौथी बार झड़ गए, चूत के अंदर ही। मां भी जोर से झड़ीं, उनकी चूत से रस और पानी मिलकर बहने लगा। “आआह्ह… कितना मजा… शाहिद… तुमने मुझे तृप्त कर दिया…”

मां की हालत खराब हो गई थी, सांसें तेज, शरीर कांप रहा था, लेकिन चेहरे पर गहरी संतुष्टि थी। आंखें बंद, मुस्कान बनी हुई। अंकल ने उन्हें गले लगाया, कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे।

आखिर में दोनों ने कपड़े पहने। चुपके से हॉल में आ गए। जैसे कुछ हुआ ही नहीं। मां की सहेली रुखसाना पास आई, कुछ कान में कहा। मां शरमा गईं, दोनों हंस पड़ीं। आसपास लोग फुसफुसा रहे थे, “देखा उस बुड्ढे ने इस माल को कैसे चोदा… अभी भी चूत मार के आया है!” सब हंस रहे थे। मैं अंदर से खुश था। मां को आखिरकार वो सुकून मिल गया था।

अब जब भी मां को जरूरत होती है, अंकल को फोन कर गांव बुला लेती हैं। अंकल ३-४ दिन रुक जाते हैं। दिनभर घर में बंद कमरे में चुदाई का मजा लेते हैं। मैं चुपचाप देखता हूँ और खुश होता हूँ कि मां अब खुश हैं।

दोस्तों, मेरी ये कहानी आपको कैसी लगी? क्या आपने कभी ऐसी कोई घटना देखी या सुनी है? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं। क्या आप चाहेंगे कि मैं अगली बार और डिटेल में बताऊं कि अंकल घर आकर क्या-क्या करते हैं? आपकी कमेंट का इंतजार रहेगा।

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