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मेरे पति ने कहा चुदवा लो तो भैया से चुद गई

दोस्तों मेरा नाम पल्लवी है। मैं चंडीगढ़ में रहती हूं। मेरी शादी को अभी सिर्फ छह महीने ही हुए हैं। हम दोनों ही सरकारी नौकरी में इंजीनियर हैं। खूब पैसे हैं, अच्छी जिंदगी है, लेकिन एक चीज जो नहीं है वो है सेक्स का सुख। मेरे पति मुझे ठीक से संतुष्ट नहीं कर पाते। आज मैं आपको अपनी वो कहानी सुनाती हूं जिसमें मैंने अपनी वासना को पति के सामने ही अपने चचेरे भाई से चुदवाकर शांत किया। ये मेरी पहली कहानी है, लेकिन मैं ऐसी गरमागरम कहानियां रोज पढ़ती हूं और उसी से अपनी आग बुझाती हूं।

मेरी पोस्ट मेरे पति से ज्यादा है और सैलरी भी ज्यादा है। मैं काफी सुंदर, हॉट और सेक्सी हूं। मैं शहर की लड़की हूं, जबकि मेरा पति छोटे शहर से आता है। नौकरी तो पढ़-लिखकर मिल गई, लेकिन रहन-सहन का स्तर मेरा जैसा नहीं। आजकल सरकारी नौकरी के चक्कर में ऐसी शादियां हो जाती हैं, जहां जोड़ी नहीं जुटती। इसका असर सीधा सेक्स लाइफ पर पड़ता है। मैं गोरी हूं, वो काफी काले हैं। धीरे-धीरे हमारे बीच दूरी बढ़ने लगी। सेक्स बहुत कम हो गया। मैं परेशान रहने लगी कि आगे क्या होगा। कोई बच्चा भी नहीं है। मैं सोचती कि अगर पति मुझे खुश नहीं कर सकता तो मैं क्या करूं।

धीरे-धीरे मैं गालियां देने लगी, गुस्सा करने लगी। वो चुप रहता क्योंकि उसे पता था गलती उसकी है। अगर वो मुझे संतुष्ट नहीं करेगा तो मैं गुस्सा तो करूंगी ही। लेकिन एक दिन सब उल्टा हो गया। मैंने अपने चचेरे भाई के साथ उसके सामने ही चुदाई कर ली और वो चुपचाप देखता रहा। लगातार दस दिन तक हमने उसके सामने संबंध बनाए, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। शायद उसे लगा कि अच्छा ही हो रहा है।

एक दिन की बात है। मेरा चचेरा भाई राकेश चंडीगढ़ आया था। घर में सिर्फ हम तीनों थे। शनिवार था। शाम को पार्टी का प्लान बना। मेरे पति और राकेश मार्केट गए और खाने-पीने का सामान के साथ दो बोतल व्हिस्की ले आए। मैं सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर हूं, कॉरपोरेट कल्चर में पीना सीख गई हूं। शनिवार-रविवार को जरूर पीती हूं। पार्टी शुरू हुई। खाना खाते गए, दारू पीते गए। बातें आगे बढ़ीं और सेक्स तक पहुंच गईं। मैंने साफ-साफ बोल दिया कि मेरा पति मुझे खुश नहीं कर पाता। तभी पति बोला, “मैंने कब मना किया? अगर मैं खुश नहीं कर पाता तो तुम किसी और से भी सेक्स कर सकती हो, मैं मना नहीं करूंगा।”

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ये सुनकर मैंने कहा, “तो क्या मैं अपने भाई से कर लूं?” उसने कहा, “बना लो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।”

सच कहूं तो शादी से पहले जब मैं छोटी थी, तब राकेश ने मुझे खूब चोदा था। छत पर कई बार मजा लिया था, वो मुझे गोद में उठाकर लंबे-लंबे धक्के मारता था और मैं चीख-चीखकर मजे लेती थी। वो यादें अचानक दिमाग में घूम गईं। मैं मचल गई। दारू का नशा अब पूरी तरह चढ़ चुका था। हम तीनों ने खूब पी ली थी, आंखें लाल हो गई थीं, शरीर गर्म हो रहा था। मेरे पति सोफे पर लेट गए और धीरे-धीरे उनकी आंख लग गई, वो हल्की-हल्की खर्राटे लेने लगे।

मैं उठी। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने अपना टॉप धीरे से उतार दिया, ब्रा अभी भी लगी थी। राकेश की आंखें मेरी तरफ टिकी थीं, वो भी नशे में था लेकिन उसकी सांसें तेज हो रही थीं। मैं उसके पास गई और उसकी गोद में बैठ गई, मेरी जांघें उसकी जांघों पर टिकीं। उसने तुरंत मेरी कमर पकड़ी, मुझे अपनी तरफ खींचा।

राकेश ने मेरी ब्रा के हुक खोल दिए, ब्रा ढीली हो गई। मैंने खुद उसे उतार फेंका। मेरी चुचियां अब खुली थीं, निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने अपना पजामा भी जल्दी से उतार दिया, अब सिर्फ पैंटी बची थी। हम दोनों वाइल्ड हो चुके थे। राकेश ने मुझे जोर से चूमना शुरू किया। उसके होंठ मेरे होंठों पर दबे, जीभ अंदर डालकर मेरी जीभ से खेलने लगा। मैं भी उसे चूम रही थी, हमारे मुंह से सिसकारी निकल रही थी। वो मेरे गालों पर दांत काट रहा था, हल्का-हल्का दर्द और मजा एक साथ हो रहा था। फिर उसकी जीभ मेरी गर्दन पर सरक गई, चाटते हुए नीचे आ रही थी।

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उसके दोनों हाथ मेरी चुचियों पर थे। वो उन्हें जोर-जोर से मसल रहा था, निप्पल्स को उंगलियों से पकड़कर खींच रहा था। “आह्ह… राकेश… हल्के से…” मैं सिसक रही थी, लेकिन शरीर और ज्यादा गर्म हो रहा था। मेरी चूत से पानी बहने लगा था, पैंटी गीली हो चुकी थी। मैं पागल हो रही थी, मेरी वासना अब काबू से बाहर थी। अब बस राकेश के मोटे लंड की तलब थी।

मैं नीचे सरकी, उसके पैंट की जिप खोली। उसने खुद पैंट उतार दी। जांघिया में उसका लंड तनकर खड़ा था, बड़ा और मोटा। मैंने जांघिया नीचे खींची, लंड बाहर आया। मोटा, लंबा, सिरा लाल और चमकदार। मैंने उसे हाथ में पकड़ा, ऊपर-नीचे किया। राकेश लेट गया। मैंने झुककर लंड मुंह में लिया। पहले सिरे को चाटा, फिर धीरे-धीरे पूरा मुंह में ले लिया। ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… मैं आइसक्रीम की तरह चूस रही थी। मुंह से लार बह रही थी, लंड पूरा गीला हो रहा था। वो आह… आह… ऊंह्ह… कर रहा था। उसके हाथ मेरी चुचियों को सहला रहे थे, कभी मसलते, कभी निप्पल्स को पिंच करते।

फिर राकेश ने मुझे पटक दिया। मैं सोफे पर लेट गई। उसने मेरी पैंटी उतारी, मेरे पैर फैलाए। मेरी चूत अब खुली थी, गीली और गुलाबी। उसने जीभ निकाली और क्लिट पर रख दी। जीभ से गोल-गोल घुमाने लगा। मैं सिहर उठी। “आह्ह… ओह्ह… इह्ह… राकेश… और जोर से…” मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ रहा था। वो जीभ अंदर डाल रहा था, चूत चाट रहा था, क्लिट को चूस रहा था। मैं कमर उठा-उठाकर उसका मुंह अपनी चूत पर दबा रही थी। पानी बह रहा था, उसके मुंह पर लग रहा था।

पति जाग गए थे। वो सोफे पर बैठे हमें देख रहे थे, लेकिन कुछ नहीं बोल रहे थे। उनकी आंखें फटी की फटी थीं।

राकेश ने अब मेरे पैर कंधों पर रखे। अपना मोटा लंड मेरी चूत पर रगड़ा। सिरा चूत के मुंह पर टिका। फिर एक जोरदार धक्का। पूरा लंड अंदर चला गया। “ओह्ह्ह… आह्ह्ह… कितना मोटा है…” मैं चीख पड़ी। दर्द और मजा दोनों थे। वो धक्के देने लगा, धीरे-धीरे तेज। मेरी चुचियां उछल रही थीं। वो उन्हें मसलता रहा, निप्पल्स चूसता रहा। लंड जोर-जोर से अंदर-बाहर। चप-चप… चप-चप… की आवाज आ रही थी। मैं गांड उठा-उठाकर उसका साथ दे रही थी। पति की तरफ देखती, वो बस देख रहे थे, हाथ उनकी पैंट पर था लेकिन कुछ करते नहीं।

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मैंने राकेश को गले लगाया। अपनी चुचियां उसके मुंह में ठूंसीं। वो एक चुची चूस रहा था, दूसरी मसल रहा था। उसकी उंगली मेरी गांड के छेद पर गई, हल्के से अंदर डाली। “आह… ह्ह… ओह्ह… ऊं… ऊई… राकेश… और जोर से…” मैं चीख रही थी।

फिर उसने मुझे घुमाया। मैं घोड़ी बनी। पीछे से लंड घुसाया। अब और गहरा जा रहा था। हाथ मेरी कमर पर, धक्के तेज। मेरी चुचियां लटक रही थीं, उछल रही थीं। हर धक्के पर करंट। “आह्ह… ओह्ह… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…” मैं चिल्ला रही थी। वो और तेज पेलने लगा।

फिर मैं ऊपर चढ़ गई। उसकी गोद में बैठी, लंड अंदर लिया। उछलने लगी। ऊपर-नीचे। चुचियां उछल रही थीं। वो नीचे से धक्के मार रहा था। साइड में लेटे, एक पैर उठाकर चोदा। हर पोजिशन में लंड पूरा अंदर-बाहर। चूत गर्म हो रही थी, पानी बह रहा था।

करीब दो घंटे तक चुदाई चलती रही। हम दोनों पसीने से तर, नशे में। आखिरकार राकेश की सांसें तेज हुईं। “पल्लवी… आ रहा है…” वो बोला। मैंने कहा, “अंदर डाल दो…” उसने जोर से धक्का मारा और पूरा माल मेरी चूत में उड़ेल दिया। गर्म-गर्म महसूस हुआ। हम दोनों थककर लेट गए। पति अभी भी देख रहे थे। हम तीनों वहीं सो गए।

सुबह पति बोला, “रात को तो तुमने अपनी वासना शांत कर ली।” मैं हंसकर बोली, “हां, तुमने ही तो कहा था चुदवा लो।”

दोस्तों, आपको मेरी कहानी कैसी लगी?

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