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मामू नामर्द था तो मैंने मामी को चोदा

Virgin aunt sex story, Indian mami chudai sex story, Desi aunt nephew sex story: यारों मेरा नाम इमरान है, उम्र अट्ठाईस साल, अच्छा दिखता हूं और मैं एक डॉक्टर हूं, आज मैं आपको अपनी जिंदगी का एक सच्चा वाकया सुनाने जा रहा हूं, जिसमें हर पल की यादें मेरे दिल में बसी हुई हैं, जैसे गर्म सांसों की महक और नरम स्पर्श की गहराई।

यह बात उन दिनों की है जब मैं मेडिकल कॉलेज का स्टूडेंट था, मेरे एक मामू हैं जो अपनी हरकतों के कुछ ठीक नहीं, बचपन से ही वो कुछ गलत सोहबत में पड़ गए थे और अपनी जवानी तक पहुंचते पहुंचते वो तकरीबन नामर्द ही हो चुके थे, चूंकि वो इकलौते थे इसलिए घरवालों ने उनकी शादी जबरदस्ती कर दी, और वो शादी का हर पल मुझे बाद में याद आता रहा जब मैंने उसकी गहराई को महसूस किया।

जिस लड़की से उनकी शादी हुई वो उम्र में उनसे काफी छोटी थी और बेहद खूबसूरत थी, उसकी मुस्कान में एक मासूमियत थी जो दिल को छू जाती थी, खैर मैं उन्हीं दिनों में एमबीबीएस पूरा करके मजीद पढ़ने के लिए यूके चला गया, वहां अपनी पढ़ाई पूरी करके चार साल बाद लौटा, सोचा अब अपनी प्रैक्टिस शुरू करनी है, किसी अच्छी लोकेशन की तलाश में मुझे अपने मामू के घर के पास ही एक जगह पसंद आ गई, मैंने वहां अपना क्लिनिक खोल लिया, और हर दिन उस रास्ते से गुजरना मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गया जहां हवा में उनकी मौजूदगी की खुशबू महसूस होती थी।

मेरे मामू का घर रास्ते में ही था इसलिए रोज आते जाते सलाम दुआ होने लगी, मामू कहीं नौकरी करते थे और रात को बहुत देर से घर आते थे, एक दिन मैं उनके घर के आगे से गुजर रहा था तो मामी दरवाजे पर खड़ी दिखीं, उनकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी जो मुझे रोक लेने वाली थी, उन्होंने मुझे अंदर आने का इशारा किया, मैं बिना सोचे उनके घर में चला गया, मामी बहुत खुशमिजाज थीं, फौरन मेरे लिए चाय बना लाईं, हम बैठकर बातें करने लगे, चाय की गर्म भाप मेरे चेहरे पर लग रही थी और उनकी नजरें मुझे एक अलग ही दुनिया में ले जा रही थीं।

बातों ही बातों में मैंने पूछ लिया कि शादी को चार साल हो गए अभी तक कोई बच्चा क्यों नहीं, वो बात टाल गईं और बोलीं ये अल्लाह की देन है इंसान इसमें क्या कर सकता है, लेकिन उनकी आवाज में एक दर्द छिपा था जो मुझे महसूस हो रहा था, मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, जाते वक्त उन्होंने अपना नंबर दिया और कहा इमरान अगर बुरा न मानो तो मैं तुम्हें फोन कर लिया करूं, तुम्हारे मामू सुबह जाते हैं रात देर से आते हैं मैं घर में बहुत बोर हो जाती हूं, मैंने कहा जब जी चाहे फोन कर लिया करें, और उस पल उनकी उंगलियां मेरे हाथ को छू गईं जो एक झुरझुरी सी पैदा कर गई।

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चंद दिनों बाद उनका फोन आने लगा, बातें लंबी होने लगीं, वो मुझे अपना दोस्त समझने लगीं, वैसे भी वो मेरी मामी तो थीं पर उम्र में मुझसे तीन साल छोटी थीं, फोन पर घंटों बातें होतीं, उनकी हंसी की आवाज कान में गूंजती रहती और रातों को नींद नहीं आती, एक दिन उन्होंने कहा कल संडे है तुम्हारे मामू सुबह ही कराची जा रहे हैं, क्यों न तुम सुबह ही आ जाओ हम सारा दिन खूब बातें करेंगे, मैंने हामी भरी और रात भर उस मुलाकात की कल्पना करता रहा।

अगले दिन मैं सुबह सुबह उनके घर पहुंच गया, हल्की सर्दी के दिन थे, मैंने बेल बजाई, दरवाजा खोलते ही मैं उन्हें देखता रह गया, वो क्या खूबसूरत लग रही थीं बिल्कुल परी जैसी, लाइट ब्लू जॉगिंग सूट और जॉगर्स पहने हुए थे, उनकी त्वचा पर सर्द हवा की वजह से हल्की गुलाबी चमक थी, मैं उन्हें घूर रहा था, उनकी खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी, उन्होंने हंसते हुए कहा अंदर भी आओगे या यहीं घूरते रहोगे, मैं शर्मा कर अंदर चला गया, उन्होंने मुझे मजेदार नाश्ता करवाया, गर्म परांठों की खुशबू और उनकी उंगलियों का स्पर्श प्लेट देते वक्त, फिर हम दोनों टीवी लॉन्ज में एक ही सोफे पर बैठकर टीवी देखने लगे, हमारे शरीर एक दूसरे से छू रहे थे और गर्माहट फैल रही थी।

बातें करते करते बच्चों के टॉपिक पर आ गए, मैंने पूछा गुड न्यूज कब सुना रही हो, वो अचानक सीरियस हो गईं और बोलीं आज हम दोनों सच बोलेंगे और एक दूसरे से की गई हर बात राज रखेंगे, मैंने वादा किया, फिर उन्होंने बताया कि तुम्हारे मामू का लंड जवानी में चोट लगने से बेकार हो चुका है और मैं अब तक कंवारी हूं, मैं सुनकर हैरान हुआ और हंसने लगा, वो गुस्सा हो गईं बोलीं हमने वादा किया था झूठ नहीं बोलेंगे, फिर रोने लगीं, उनके आंसू मेरे दिल को चीर रहे थे।

मैं उन्हें चुप कराने के लिए आगे बढ़ा, वो मेरे कंधे पर सर रखकर फूट फूट कर रोने लगीं, हमें पता ही नहीं चला कब हम एक दूसरे के बहुत करीब आ गए, उनकी गर्म सांसें मेरे गले पर लग रही थीं, आहिस्ता आहिस्ता मुझ पर शैतान सवार हो गया, मैंने उनका सर सहलाते हुए हाथ उनकी कमर तक ले गया, उनकी कमर की नरमी मुझे पागल कर रही थी, वो और करीब आ गईं, मैंने सोचा ये गलत है पर वो मुझे और जोर से पकड़ लिया, अब मैं उनकी बाहों में था, उनकी गर्म सांसें मेरे सीने से टकरा रही थीं, मुझे नशा सा चढ़ने लगा, उनके शरीर की गर्माहट मेरे हर हिस्से में फैल रही थी।

मैंने कहा मामी तो उन्होंने मेरे होंठों पर उंगली रख दी और बोलीं सिर्फ हुनैजा कहो मामी नहीं, फिर उन्होंने शेर सुनाया

अपने एहसास से छू कर मुझे संदल कर दो मैं तो सदियों से अधूरी हूं मुकम्मल कर दो ना तुम्हें होश रहे ना मुझे होश रहे इस तरह टूट कर चाहो कि मुझे पागल कर दो धूप ही धूप हूं इस तरह टूट के बरसो मुझ पर मैं तो सहारा हूं मुझे प्यार का बादल कर दो

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फिर हम दोनों एक दूसरे में खो गए, हुनैजा मुझे खींचती हुई बेडरूम ले गईं, मैं कटी पतंग की तरह उनके पीछे चला गया, कमरे की हल्की रोशनी में उनकी आंखें चमक रही थीं, वहां हम पागलों की तरह एक दूसरे को किस और हग करने लगे, उनके होंठ मेरे होंठों से चिपक गए, जुबान जुबान में घुल गई, “आह्ह… इमरान…” वो सिसक रही थीं, उनकी जुबान की मिठास और होंठों की नरमी मुझे दीवाना बना रही थी, मैंने उनकी गर्दन पर किस किया, उनकी त्वचा की खुशबू और स्वाद मुझे और उत्तेजित कर रहा था, उन्होंने मेरी शर्ट उतार दी और अपने होंठों व जुबान से मेरे सीने को चूमने चाटने लगीं, उनकी गर्म जुबान मेरे निप्पल्स पर घूम रही थी, मैं सिहर उठा, “ओह्ह… हुनैजा… तुम्हारी जुबान कितनी गर्म है…” मैंने कहा।

मैं भी उनको बेड पर धकेल दिया, उनका जॉगिंग सूट की जिप खोल दी, अंदर काले ब्रा में दो बेहद खूबसूरत ब्रेस्ट थे जिनके निप्पल गुलाबी थे, उन्हें देखकर मैं पागल हो गया, मैंने ब्रा हटाकर एक निप्पल मुंह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगा, उनका दूधिया स्वाद और नरम ब्रेस्ट मेरे मुंह में भर रहे थे, हुनैजा की आंखें बंद थीं, वो “ओह्ह… आह्ह… इमरान… और जोर से… मेरे ब्रेस्ट को काटो…” सिसकारियां ले रही थीं, मैंने दूसरे ब्रेस्ट को हाथ से दबाया, उसकी सख्ती और गर्माहट महसूस की, फिर मैं किसिंग करते हुए नीचे उतरने लगा, उनकी पेट की नाभि पर जुबान फेरी, उसकी गहराई में मीठा स्वाद था, हुनैजा की कमर ऐंठ रही थी, “आऊ… इमरान… वहां चाटो… मुझे पागल कर दो…”

मैं और नीचे गया, उनका ट्राउजर खींचा तो वो जॉगर्स में फंस गया, मैं नीचे झुककर जॉगर्स के लेस खोले और उन्हें उतार दिया, उनके जॉगर्स से हल्की मीठी महक आ रही थी, मैंने सूंघा तो मेरा लंड और सख्त हो गया, वो महक जैसे मेरे दिमाग में घुस गई, फिर मैंने उनकी सॉक्स उतारी, उनके पैरों की उंगलियां और टोज इतनी खूबसूरत थे कि मैं उन्हें चूमने चाटने लगा, हर उंगली पर जुबान फेरी, उनका नमकीन स्वाद और नरमी मुझे और उकसा रही थी, हुनैजा और बेताब हो गईं, “आह्ह… ऊऊ… इमरान… पागल हो जाऊंगी… मेरे पैरों को ऐसे चूसो जैसे कभी न रुको…” वो मेरे सिर को दबा रही थीं, मैंने उनके तलवों को चाटा, उनकी सर्द त्वचा गर्म हो रही थी।

काफी देर बाद मैं उनकी चूत पर पहुंचा, शेव्ड गुलाबी लिप्स वाली टाइट चूत थी, उसकी महक मुझे मदहोश कर रही थी, मैंने जुबान से चाटना शुरू किया, क्लिट को चूसा, वो पानी छोड़ने लगी, हुनैजा की टांगें कांप रही थीं, “ओह्ह… आऊ… इमरान… वहां… और चाटो… मेरी चूत को खा जाओ…” वो मेरे बाल पकड़कर अपनी चूत मेरे मुंह पर दबा रही थीं, उनका पानी मेरे मुंह में भर रहा था, मीठा और गर्म, मैंने उंगली से उनकी चूत को सहलाया, अंदर डाली, टाइटनेस महसूस की, “आह्ह… ऊई… इमरान… उंगली और अंदर… मुझे चोदो अब…” वो चिल्ला रही थीं, मैंने दो उंगलियां डालीं और तेजी से हिलाया, उनकी चूत गीली हो गई, सांसें तेज चल रही थीं।

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फिर वो बर्दाश्त न कर सकीं, मेरे लंड को पकड़ा और मुंह में ले लिया, “ग्ग्ग… गी… गों…” वो चूस रही थीं, उनकी गर्म जुबान मेरे लंड के टिप पर घूम रही थी, मुझे लग रहा था मैं स्वर्ग में हूं, “ओह्ह… हुनैजा… और गहरा लो… मेरे लंड को चूसो…” मैंने कहा, उन्होंने डीप थ्रोट किया, गले तक लिया, उनकी आंखें नम हो गईं, फिर उन्होंने कहा “इमरान अब आ जाओ प्लीज अब इंतजार नहीं होता।”

मैंने उन्हें सीधा लिटाया, उनकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं, लंड पर थूक लगाया और चूत पर रखकर एक जोरदार झटका दिया, “आऊउउ… दर्द… आह्ह…” हुनैजा की चीख निकल गई, आंखों से आंसू बहने लगे, मेरा पूरा लंड अंदर चला गया था, उसकी टाइट चूत की गर्माहट और कसाव मुझे पागल कर रहा था, थोड़ी देर रुका, फिर हल्का हिलाया तो लंड पर खून लगा था, उनकी सच्चाई साफ थी, अब दर्द कम हुआ, “आह्ह… अब मज़ा आ रहा है… इमरान… धीरे धीरे… तुम्हारा लंड कितना मोटा है…”

मैं धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा, हर धक्के पर वो “ओह्ह… ऊऊ… आह्ह… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…” चिल्ला रही थीं, उनकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी, मैंने स्पीड बढ़ाई, उनके ब्रेस्ट उछल रहे थे, मैंने उन्हें दबाया, थोड़ी देर में वो डिस्चार्ज हो गईं, शरीर कांपने लगा, “आह्ह… ऊईई… इमरान… मैं झड़ रही हूं…” मैं भी कगार पर था, बाहर निकालना चाहा तो उन्होंने मुझे जोर से पकड़ लिया और बोलीं “इमरान प्लीज तुम्हारी कसम अंदर ही डिस्चार्ज हो जाओ,” आखिर मैंने अंदर ही झड़ दिया, हमारा गर्म रस मिल गया, सांसें तेज चल रही थीं।

हम उसी हालत में एक दूसरे की बाहों में गिर गए, उस दिन शाम तक हमने चार बार सेक्स किया, हर बार मज़ा बढ़ता गया, शाम को साथ डिनर किया, मिलते रहने का वादा करके मैं चला आया।

वो दिन मेरी जिंदगी का सबसे यादगार दिन है जिसे मैं कभी नहीं भुला पाया।

हां सेक्स में उम्र और रिश्तों की कोई कैद नहीं होती, लंड सिर्फ फुद्दी को और फुद्दी सिर्फ लंड को पहचानती है।

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