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भाभी गैर मर्द से चुदाई करती पकड़ी गई

Bhabhi chudai sex story, Gair mard sex story, Pakdi gayi sex story, Husband caught sex story: यह कहानी एक भाभी की कामुकता की कहानी है, सेक्स से भरपूर है, जहां हर पल की गर्माहट और इच्छाओं की तीव्रता को महसूस किया जा सकता है, जैसे हवा में फैली हुई उत्तेजना की खुशबू जो दिल की धड़कनों को तेज कर देती है.

रात के आठ बजे थे, बहुत दिन हो चुके थे वंदना भाभी ने बल्लू से ठुकवा कर चुदाई नहीं करवाई थी, और उसकी बॉडी में वो जलन सी महसूस हो रही थी जो सिर्फ बल्लू की छुअन से ही शांत हो सकती थी, उसका पति वीजू भी घर में ही था इसलिए वह ज्यादा गुस्सा हो रही थी और उसने बल्लू से बात करने के लिए दुकानदार को फोन लगवाकर बल्लू को बुलाया, फोन की घंटी बजते ही उसके मन में वो पुरानी यादें ताजा हो गईं जब बल्लू की मजबूत बाहें उसे घेर लेती थीं.

वंदना भाभी बोली, “हैलो … बल्लू को बुलाएंगे क्या एक बार?” उसकी आवाज में वो बेचैनी साफ झलक रही थी जो दिनों की प्यास से उपजी थी.

उधर से आवाज आई, “आप कौन बोल रही हैं?” दुकानदार की आवाज सुनकर वंदना थोड़ी झिझकी लेकिन जल्दी संभल गई.

वंदना भाभी बोली, “बोल देना कि वंदना का फोन है.” और वो इंतजार करने लगी, उसके हाथ फोन पर कसकर पकड़े हुए थे मानो वो बल्लू की बॉडी को छू रही हो.

दुकानदार ने बल्लू को बुलाने के लिए एक लड़के को भेजा, जो दौड़कर गया और बल्लू को आवाज लगाई.

लड़के ने कहा, “बल्लू सेठ, किसी वंदना का फोन है आपके लिए.” बल्लू के चेहरे पर मुस्कान फैल गई, वो जानता था ये कॉल क्या मायने रखती है.

बल्लू ने जो काम था, वो बाजू में रख कर तुरंत जाकर फोन लिया और बोला, “हैलो भाभी, बोलो?” उसकी आवाज में वो गर्माहट थी जो वंदना को और उत्तेजित कर देती थी.

वंदना भाभी बोली, “बल्लू कहां पर हो तुम, मेरी याद आती है या नहीं?” वो फोन पर ही अपनी उंगलियां चलाने लगी थीं, जैसे बल्लू की छाती पर फेर रही हो.

बल्लू बोला, “ओह जानेमन, तुम्हें कैसे भूल सकता हूं मैं. बिस्तर पर जब भी जाता हूं तुम्हारे बदन की वो याद और महक लेकर ही सोता हूं, तुम ही हो जो मेरे सपनों में आकर हमेशा वो नॉटी वाली तकलीफ दे कर मेरी नींद हराम कर देती हो.” उसकी बातें सुनकर वंदना की सांसें तेज हो गईं, वो अपनी जांघों को रगड़ रही थी धीरे से.

वंदना भाभी बोली, “सच्ची बल्लू, मेरे नॉटी बल्लू… गुन्डाराज … मैं भी तुम्हें और तुम्हारी गर्माहट को मिस जो कर रही हूं.” उसकी आवाज में वो कामुक कंपन था जो बल्लू को और जोश दिला रहा था.

बल्लू बोला, “ओह भाभी, तुम भी ना… आज रात तुम्हारे घर पर आता हूं मैं. लेकिन भाभी तेरा पति भी तो घर पर है. रात को भी तू बाहर नहीं निकल पाती है.” वो सोच रहा था कैसे मिलें, लेकिन वंदना का प्लान सुनकर उत्साहित हो गया.

वंदना भाभी बोली, “बल्लू, मेरे पास एक आइडिया है. आज ये शराब पीने के मूड में है. तुम ऐसा करना कि रात के ग्यारह बजे तक आना. मैं रात को दरवाजा खुला ही रखूंगी. तुम चुपके से मेरे घर में अंदर आकर बिजली का मेन स्विच बंद कर देना. मैं लाइट जाने का बहाना करके तुम्हारे पास आ जाऊंगी और तुम्हारी बांहों में खुद को सौंप दूंगी.” उसने ये कहते हुए कल्पना की कि बल्लू की बाहें उसे कैसे घेरेंगी, और उसकी चूत में हल्की सी गुदगुदी महसूस हुई.

बल्लू बोला, “सच में भाभी, तुम्हारे दिमाग को तो मानना पड़ेगा. क्या दिमाग लगाती हो तुम मेरी चुदक्कड़ भाभी. मुझे भी भाभी की चूत का पानी पीने की प्यास बहुत दिनों से सता रही थी. आज रात को मैं बेसब्री से इंतजार करूंगा मेरी सेक्सी भाभी.” फोन रखते हुए बल्लू का लंड तनने लगा था, वो वंदना की महक को याद कर रहा था.

फोन को रखने के बाद बल्लू ने दुकानदार को देखा, जो मुस्कुरा रहा था मानो सब समझ गया हो.

दुकानदार बोला, “क्या माल पटा कर रखी हुई है तूने बल्लू.” उसकी आंखों में शरारत थी.

बल्लू बोला, “हां यार, क्या बताऊं, मैंने बहुत सी लड़कियों और औरतों को पटा कर चोदा हुआ है लेकिन यह जो सर्विस देती है वो कोई और नहीं देती. साली बिना कॉन्डम के ही मेरे लंड से चुदवा लेती है. कई बार तो मुझे डर भी लगता है कि कहीं कुछ हो न जाये लेकिन मैं खुशनसीब हूं कि अभी तक कुछ नहीं हुआ है.” वो हंसते हुए कह रहा था, लेकिन अंदर से वंदना की नरम त्वचा की याद उसे बेचैन कर रही थी.

दुकानदार बोला, “हां बल्लू सेठ, लेकिन एक बात का ध्यान रखना. इसके पति से बच कर रहना. वो पॉलिटिक्स वाला आदमी है.” उसकी चेतावनी में चिंता थी.

बल्लू बोला, “हां, ये बात तो है. चलो ठीक है, मैं जा रहा हूं क्योंकि रात को मुझे निकलना है.” और वो घर की तरफ चला गया, मन में रात की योजना घूम रही थी.

रात के 11 बजे बल्लू वंदना भाभी के घर पर पहुंच गया और देखा कि वंदना भाभी एक सेक्सी सा गाउन पहने हुए खड़ी हुई थी, गाउन इतना पतला था कि उसकी बॉडी की आउटलाइन साफ दिख रही थी, उसके स्तन उभरे हुए थे और गांड की गोलाई आकर्षित कर रही थी, भाभी ने बल्लू सेठ को अपने घर के पास आते हुए देख लिया था, उसकी आंखों में चमक आ गई, उसने अपने पति को बोला कि अब बंद भी करो, उसका पति दारू पीने में लगा हुआ था, शराब की महक पूरे कमरे में फैली हुई थी, वंदना का इशारा बल्लू की तरफ था, बंद तो उसको अपने घर की बिजली करवानी थी, भाभी ने बल्लू को आंख मार दी, जो इतनी कामुक थी कि बल्लू का दिल धड़क उठा, बल्लू ने बिजली बंद कर दी और भाभी ने बल्लू को दूसरे रूम में जाने के लिए चुपके से बोल दिया, उसकी आवाज फुसफुसाहट में थी जो उत्तेजना से भरी हुई थी.

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लाइट बंद होते ही वीजू की दारू में भंग पड़ गया, अंधेरा होने से उसकी आंखें भारी हो गईं, वो उठ कर अपने बेड पर चला गया, जहां गद्दे की नरमी उसे खींच रही थी, पांच मिनट के अंदर ही वीजू के खर्राटों की आवाज आना शुरू हो गई, जो कमरे में गूंज रही थी, बल्लू भी ताक में था कि कब भाभी का पति वीजू सोयेगा और वो अपना काम शुरू करेगा, वो छुपकर इंतजार कर रहा था, उसकी सांसें तेज थीं.

जैसे ही बल्लू को पता चला कि वीजू सो चुका है तो पीछे से आकर उसने भाभी को अपनी बांहों में लपक लिया और उसकी गर्दन पर चूमने लगा, उसकी गर्दन की नरम त्वचा पर उसके होंठों की गर्मी लगते ही भाभी सिहर उठी, भाभी भी बल्लू की बांहों में आते ही चुदासी हो गई, उसकी सांसें तेज हो गईं और वो हल्के से सिसक उठी, “आह्ह… बल्लू, कितने दिनों बाद…” बल्लू ने धीरे से उसके कान में फुसफुसाया, “शशश… चुप मेरी जान, अभी तो शुरुआत है,” उसने अपनी जीभ से उसके कान को चाटा, जो गीली और गर्म थी, भाभी की बॉडी में电流 सी दौड़ गई, भाभी की गांड को छूते ही बल्लू का मोटा लंड तनना शुरू हो गया और भाभी की मोटी गांड के बीच में अपनी जगह तलाशने लगा, उसकी गांड इतनी नरम और गोल थी कि बल्लू के हाथ खुद-ब-खुद दबाने लगे.

बल्लू ने अपने तने हुए लंड को भाभी की गांड की दरार के बीच में घुसा दिया, कपड़ों के ऊपर से ही जब बल्लू का लंड भाभी की गांड पर लगा तो भाभी मचल सी गई, “उई… बल्लू, ये क्या कर रहे हो… इतना गर्म लग रहा है,” उसकी गांड की गर्मी और नरमी बल्लू को पागल कर रही थी, उसने पलट कर बल्लू के होंठों को चूसना शुरू कर दिया, दोनों की जीभें आपस में लड़ने लगीं, बल्लू के हाथ भाभी की पीठ पर फिसलते हुए नीचे की तरफ गए और उसकी गांड को जोर से दबा दिया, जीभ की चूसन में लार का स्वाद मिश्रित हो रहा था, जो दोनों को और उत्तेजित कर रहा था.

बल्लू ने भाभी की कमर पर अपनी बांहों का घेरा बना दिया और उसको अपने आगोश में जकड़ लिया, उसकी कमर की पकड़ इतनी मजबूत थी कि भाभी को अपनी चूत में गीलापन महसूस होने लगा, उसके बाद उसने भाभी को फिर से पलटा और अपना खड़ा हुआ लंड भाभी की गांड में घुसाने लगा और आगे की तरफ हाथ ले जाकर भाभी के मोटे चूचों को दबाने लगा, चूचे इतने मुलायम थे कि बल्लू के हाथों में दबते हुए उछल रहे थे, भाभी के मुंह से सिसकारी बाहर आना चाहती थी लेकिन साथ में ही पति सो रहा था, इसलिए भाभी बड़ी मुश्किल से खुद को रोक कर रखे हुए थी, “आह्ह… बल्लू, धीरे… वो जाग जाएगा,” बल्लू जोर से भाभी के चूचों को दबा रहा था, उसके निप्पल्स को उंगलियों से मसल रहा था, भाभी की सांसें और तेज हो गईं, निप्पल्स सख्त हो चुके थे और दर्द के साथ मजा दे रहे थे.

उसका लंड अपने पूरे आकार में आ गया था, मोटा और लंबा, जो पैंट में कैद होकर दर्द कर रहा था, जब भाभी से रहा न गया तो भाभी ने पीछे हाथ ले जाकर बल्लू के लंड को उसकी पैंट के ऊपर से पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी, लंड की गर्मी उसके हाथ में फैल गई, भाभी के हाथ में लंड आते ही बल्लू की हवस और ज्यादा भड़क गई और वो भाभी को बुरी तरह से काटने लगा, उसके गले पर, कंधे पर दांत गड़ा दिए, भाभी सिहर उठी, “उई मां… बल्लू, दर्द हो रहा है… लेकिन अच्छा लग रहा है,” काटने के निशान लाल हो रहे थे जो बाद में याद दिलाते.

भाभी ने कहा, “चलो अंदर चलते हैं. ये शराबी तो अभी नहीं उठने वाला. बहुत दिनों से तुम्हारे लंड के लिए तड़प रही हूं.” उसकी आंखों में प्यास साफ दिख रही थी.

बल्लू ने भाभी को अपनी गोद में उठा लिया और फिर कमरे में अंदर ले गया, भाभी का वजन उसके लिए कुछ नहीं था, लेकिन उसकी बॉडी की गर्मी उसे महसूस हो रही थी, लेकिन चुदाई की जल्दबाजी में वो लोग कमरे को अंदर से लॉक करना भूल गये, लाइट भी नहीं थी इसलिए सोचा होगा कि वैसे भी अंधेरे में क्या कुछ पता लगने वाला है, बेडरूम का दरवाजा बंद किये बिना ही वो चूमा-चाटी में लग गये, अंधेरे में सिर्फ उनकी सांसों की आवाज और छुअन महसूस हो रही थी.

अंदर जाते ही भाभी ने बल्लू की शर्ट और पैंट उतरवा दी और फिर सोफे पर उसको बिठा दिया, शर्ट उतारते हुए उसके सीने की बालों वाली त्वचा को छुआ, जो गर्म थी, बल्लू का लंड उसके अंडरवियर में तना हुआ था, बल्लू ने अपना अंडरवियर भी उतार दिया और वो सोफे पर बैठा हुआ नंगा हो गया, उसका लंड उसकी जांघों के बीच में ऐसे तना हुआ था जैसे बिल से निकल कर सांप फन उठाये खड़ा हो, भाभी की आंखें चमक उठीं, वो घुटनों के बल बैठ गई और धीरे से लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी, “आह्ह… बल्लू, कितना मोटा और गर्म है ये… मैं इसे चूसना चाहती हूं पहले,” लंड की नसें फूल रही थीं, बल्लू ने उसके बाल पकड़े और बोला, “चूसो मेरी रानी, इसे अपना बना लो,” भाभी ने अपना मुंह खोला और लंड के सुपारे को जीभ से चाटना शुरू किया, गीला करते हुए, “म्म्म… कितना स्वादिष्ट है,” जीभ की गर्मी और गीलापन लंड पर फैल रहा था, फिर धीरे-धीरे मुंह में लेने लगी, बल्लू के मुंह से सिसकारी निकली, “आह्ह… भाभी, ऐसे ही… गहराई तक लो,” भाभी ने कोशिश की, लंड को गले तक धकेला, गग्ग… गग्ग… की आवाज आने लगी, उसकी आंखों में पानी आ गया लेकिन वो रुकी नहीं, ऊपर-नीचे करती रही, बल्लू की जांघें कांपने लगीं, वो उसके बालों को जोर से पकड़कर मुंह में धक्के देने लगा, भाभी की लार लंड पर बह रही थी, जो और चिकना बना रही थी, कुछ देर बाद बल्लू ने उसे रोका और उसके चूचों को चाटना शुरू किया, जीभ से निप्पल्स को घुमाया, भाभी की चूत से रस टपकने लगा, बल्लू ने अपनी उंगली से भाभी की चूत को छुआ, वो गीली और गर्म थी, उंगली अंदर डाली तो भाभी सिसक उठी, “आह्ह… बल्लू, उंगली से चोदो पहले… म्म्म… हां ऐसे,” बल्लू ने दो उंगलियां डालीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा, पच-पच की आवाज आने लगी, भाभी की कमर उछलने लगी.

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कुछ देर बाद भाभी ने अपने कपड़े उतार लिये और नंगी होकर बल्लू की गोद में आकर बैठ गई, उसके कपड़े उतारते हुए हवा में उसकी बॉडी की खुशबू फैल गई, बल्लू का तना हुआ लौड़ा भाभी की गांड के नीचे दब गया, गोद में बैठी हुई भाभी के चूचों को मुंह लगा कर ऐसे पीने लगा जैसे बहुत दिनों से किसी को पानी नसीब नहीं हुआ हो, लेकिन यहां पर दूध निकालने की कोशिश की जा रही थी, वो जोर से भाभी के चूचों को पीने में लगा हुआ था भाभी के मुंह से सीत्कार फूट रहे थे, “आह्ह… बल्लू, काटो मत इतना… उई… हां ऐसे चूसो… म्म्म…” बल्लू ने एक चूचे को मुंह में भरा और दूसरे को हाथ से मसलने लगा, निप्पल को उंगलियों से खींचा, भाभी की चूत गीली हो चुकी थी, वो अपनी गांड हिलाकर लंड पर रगड़ रही थी, लंड की गर्मी उसकी चूत तक पहुंच रही थी.

बल्लू का लंड भाभी की गांड के नीचे उसकी चूत में जाने के तड़प रहा था, इधर भाभी की गांड भी बल्लू के लंड पर उछलने के लिए बेताब हुई जा रही थी, भाभी ने अपनी चूत को उंगलियों से छुआ, वो पूरी तर हो चुकी थी, “बल्लू, देखो कितना पानी निकल रहा है… ये तुम्हारे लिए है,” बल्लू ने उसकी उंगली चाटी और बोला, “स्वादिष्ट है मेरी जान… अब अंदर डालो इसे,” लेकिन पहले बल्लू ने भाभी को सोफे पर लिटाया और उसकी चूत को चाटना शुरू किया, जीभ से क्लिट को चूसा, भाभी की टांगें कांपने लगीं, “आह्ह… बल्लू, जीभ अंदर डालो… उई… हां ऐसे खाओ मेरी चूत को… म्म्म… ओह्ह,” बल्लू की जीभ अंदर-बाहर हो रही थी, चूत का रस उसके मुंह में आ रहा था, जो नमकीन और मीठा था, भाभी के हाथ उसके सिर पर थे जो दबा रही थी.

फिर बल्लू ही बोल पड़ा, “बस भाभी बस … अब और क्यूं तड़पा रही हो. इस पर उछलो ना …” उसकी आवाज में बेचैनी थी.

भाभी बोली, “आह्ह बल्लू … तुम मेरे मन की बात कैसे जान लेते हो. मैं तो खुद तुमसे कहने वाली थी कि अब अंदर डाल दो. मेरी चूत ने पानी निकाल कर पूरी तैयारी कर ली है.” वो उठी और बल्लू की गोद में वापस आ गई.

फिर भाभी ने अपनी टांगों को फैलाते हुए बल्लू के तने हुए लौड़े पर अपनी चूत को सेट किया उसके तगड़े लंड को अपनी चूत में लेते हुए बैठती चली गई, भाभी की गीली चिकनी चूत में बल्लू का लंड उतरने लगा, पहले सुपारा अंदर गया तो भाभी सिहर उठी, “उई… बल्लू, धीरे… कितना मोटा है,” फिर धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर सरकता गया, पच… पच… की आवाज आने लगी, चूत की दीवारें लंड को निचोड़ रही थीं, पूरा का पूरा लंड उतरते ही भाभी और बल्लू के मुंह से एक साथ आह्ह … निकल गई, लंड की गर्मी चूत में फैल रही थी.

लंड पूरा का पूरा चूत में उतर गया था और भाभी अब बल्लू के लंड पर उछलने की तैयारी कर रही थी, भाभी ने बल्लू के गले में बांहें डाल दीं और बल्लू के लंड पर उछलना शुरू हो गई, बल्लू ने भाभी के चूचों को मुंह में भर लिया, “उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मेरी जान … मेरी रानी … तुम्हारी गर्म चूत में लंड देकर तो मैं दुनिया ही भूल जाता हूं,” भाभी ऊपर-नीचे होती रही, हर उछाल पर चूत लंड को निचोड़ती, “स्सस् … मेरे राजा … तुम्हारा लंड मेरी चूत की प्यास और बढ़ा देता है. मैं इसको खा जाऊंगी … आह्ह् … चोदो मुझे मेरे राजा … आह्हह …” बल्लू नीचे से धक्के मारने लगा, उसके हाथ भाभी की गांड पकड़कर ऊपर-नीचे कर रहे थे, पच-पच… थप-थप की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं, दोनों के शरीर पसीने से चिपक रहे थे, पसीने की महक कामुकता बढ़ा रही थी.

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दोनों ही मस्ती में सेक्स का मजा लेने लगे, उछलने के कारण भाभी की चूड़ियां खन-खन कर रही थीं, भाभी की चूत पच-पच कर रही थी और दोनों की जुबान आह् … आह … कर रही थी, अपने मजे में वो ये भी भूल गये कि घर में कोई और मर्द भी सो रहा है, वो दोनों चुदाई में खोये हुए थे, भाभी की चूत से रस टपक रहा था, बल्लू का लंड पूरी तरह गीला हो चुका था, वो बोला, “भाभी, तुम्हारी चूत कितनी टाइट है… हर धक्के पर निचोड़ती है,” भाभी ने गति बढ़ाई, “हां बल्लू… जोर से… आह्ह… उई… मैं झड़ने वाली हूं…” बल्लू ने उसके चूचों को जोर से दबाया, दोनों के शरीर पसीने से तर हो चुके थे, भाभी की कमर मचल रही थी, झड़ते हुए उसकी चूत ने लंड को कस लिया, “आह्ह… ओह्ह… हां… निकल रहा है… म्म्म…”

लेकिन इसी बीच भाभी का पति वीजू नींद से उठ गया, भाभी की चूड़ियों की खन-खन सुन कर उसको शक हो गया ये आवाज कहां से आ रही है, साथ में ही वंदना भाभी के मुंह से जो सीत्कार निकल रहे थे उनकी आवाज भी वीजू ने झट से पहचान ली, उसका दिल धड़क उठा गुस्से से.

वो तुरंत उठ कर रसोई में गया और लैम्प जला कर दूसरे बेड रूम की ओर जाने लगा, लैम्प की रोशनी धीमी थी लेकिन काफी थी देखने के लिए, जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो देखा कि उसकी बीवी किसी और के लौड़े की सवारी कर रही है, दृश्य देखकर उसका खून खौल उठा.

जैसे ही लैम्प की रोशनी कमरे में पहुंची तो वंदना भाभी और बल्लू की गांड फट गई, दोनों को ही उसके पति ने चुदाई करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था, वो हक्का-बक्का होकर वीजू को देखते ही रह गये, उनके चेहरे पर डर और शॉक मिश्रित था.

उनको अंदाजा नहीं था कि वीजू नींद से जाग भी सकता है, मगर वीजू ने नंगी भाभी को गैर मर्द के लौड़े के ऊपर देख लिया था, उसकी आंखें लाल हो गईं.

वीजू बोला, “साली तू यहां पर किसी और के लंड से ठुकवा रही है. साली रांड. मेरी मां ने सही कहा था तेरे बारे में. वो मुझे बोल कर गई थी कि अपनी बीवी का ध्यान रखना. उस वक्त मैं मां की बात को हल्के में ले गया. लेकिन तू साली चुदक्कड़ यहां दूसरे के लंड के साथ रंगरेलियां मना रही है.” उसकी आवाज में गुस्सा और दर्द दोनों थे.

भले ही वीजू ने उन दोनों को देख लिया था लेकिन अभी भी बल्लू का लंड वंदना भाभी की चूत में ही था और उसने अपनी मलाई वंदना भाभी की चूत में गिरा दी थी, लेकिन बस वीजू के आने के कारण धक्के बंद हो गये थे, मलाई की गर्मी चूत में फैल रही थी.

वंदना भाभी को भी अहसास हो गया था कि बल्लू का माल चूत में निकल चुका है इसलिए उसको एक अलग ही नशा सा चढ़ा हुआ था, वीजू की बातों का उस पर कोई खास असर नहीं हो रहा था, वो अभी भी उत्तेजना में थी.

इधर वीजू वंदना को गालियां दे रहा था, साली, तेरी इतनी हिम्मत हो गई कि तू गैर मर्द को मेरे ही घर में बिस्तर पर ले आई, उसका चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था.

वंदना भाभी बोली, “तो क्या करती मैं? तुम्हारे लंड से मेरी चूत की प्यास नहीं बुझती है. तुम तो दो धक्के लगा कर एक तरफ हो जाते हो.” उसकी आवाज में चुनौती थी.

वीजू बोला, “तो साली, सांड का लंड क्यूं नहीं ले लेती.” वो चिल्ला रहा था.

भाभी बोली, “मैं तो बल्लू का ही लूंगी. तुमको जो करना है कर लो.” वो बेफिक्र लग रही थी.

वन्दना भाभी ने बल्लू की तरफ देख कर कहा, “तुम रुक क्यों गये. इस नामर्द से डरने की जरूरत नहीं है. तुम चुदाई चालू रखो.” उसकी आंखों में अभी भी हवस थी.

बल्लू बोला, “लेकिन मेरे लंड का माल चूत में निकल चुका है.” वो डरते हुए बोला.

भाभी ने बल्लू के मुंह पर एक तमाचा मारा और उठ कर झल्लाती हुई नंगी ही कमरे से बाहर निकल गई, तमाचे की आवाज गूंजी, बल्लू भी उठ कर अपने कपड़े लेकर दरवाजे की तरफ भागा तो वीजू ने लैम्प बल्लू की गांड पर फेंक कर मारा, बल्लू की गांड पर गर्म लैम्प लगा लेकिन वो गांड को मलते हुए घर से बाहर भाग गया, दर्द से कराहते हुए.

उसके बाद वीजू वंदना के कमरे की तरफ गया लेकिन वंदना भाभी ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया था, वीजू अपना सिर पीटते हुए दूसरे कमरे में जाकर लेट गया, उसका मन उदास और गुस्से से भरा था.

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