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दोस्त की बीवी की सील तोड़ी

Dost ki biwi ki chudai sex story – Bhabhi ki seal todi sex story – Suhagrat sex story: मेरा नाम राहुल है। मैं चंडीगढ़ का रहने वाला हूं। मैं एक रीडर हूं और लोगों की कहानियां पढ़ते-पढ़ते मैं अपना एक रियल इंसिडेंट डालने जा रहा हूं और उम्मीद करता हूं कि आप लोग इसे पसंद करोगे। मेरी हाइट 5-11″ है और लंड 7″ लंबा और 3″ मोटा है। मेरी हिंदी कुछ कमजोर है, कोई गलती हो तो माफ करना। दोस्तो ये मेरी दूसरी सेक्स स्टोरी और दूसरा रियल इंसिडेंट है पर आपके लिए पहला, क्योंकि मेरी पहली स्टोरी शॉर्ट की वजह से एक्सेप्ट नहीं की गई। वो मेरा लकी दिन था। मैंने पहली बार सेक्स किया और वो भी एक 22 साल की लड़की से। शॉर्ट में बता दूं मैं दिल्ली जा रहा था इंटरव्यू के लिए। बस में उससे बात हो गई और वो मुझे घर ले गई। घर पर उसकी बेटी को देखकर मेरी गन फायर करने को तैयार हो गई। मैंने उसकी मां को बेहोश करके उसे खूब चोदा और नजारा लिया। उसके बाद मुझे इंटरव्यू के बाद अपने ही शहर में बैंक में जॉब लग गई।

लो अब मैं रियल स्टोरी पर आता हूं। स्टोरी का 2 पैरा इंट्रोडक्शन है फैमिली की जो स्टोरी लंबी करने को डाली है ताकि जो भी कैंसल न हो जाए। ये स्टोरी मेरे और मेरी दोस्त की बीवी की है जो पहले मेरे साथ ही पढ़ा और बाद में हम एक ही बैंक में काम करने लगे। उसकी शादी को आज दो महीने हो गए हैं और आज ही वो सुहागरात मनाएंगे पर मैं उसकी बीवी के साथ सुहागरात मना चुका हूं वो इस तरह से। वो लोग मेरे घर से दूर रहते थे। यहां हार्दीप 6-7 साल से रहता था। दोस्त का नाम हार्दीप और उसकी बीवी का नाम प्रीति था। उसकी बीवी दूसरी प्रियंका चोपड़ा थी। मैं तो उनकी शादी के दिन से ही उसके नाम की मुठ मारा करता था। एक दिन उसने मकान मालिक को चुपके खिड़की से प्रीति को नंगा नहाते देखा और गुस्से से लाल हो गया पर बोला कुछ नहीं क्योंकि चंडीगढ़ में आसानी से घर नहीं मिलता किराए के लिए। उसने अगले दिन मुझसे बात की मैं तो मौके की तलाश में था। मैंने कहा यार मेरा घर में मैं अकेला रहता हूं तुम वहां रह जाओ पर मैं किराया नहीं लूंगा पर तुम्हें एक काम करना होगा। वो हैरानी से मेरी ओर देखने लगा। मैंने कहा देखो हार्दीप तुम्हें मकान की जरूरत है और मुझे खाने की। तुम मेरे घर रहो और मुझे अपने साथ खाना खिलाया करो। वो बोला इतनी सी बात मैं तो डर गया था पता नहीं क्या मांगोगे।

उनकी शादी को 1 महीना बीता था जब वो मेरे घर रहने आए। मैं दरवाजे पर कान लगा के सुना करता पर कोई आवाज न आती मैं हैरान रहते। ऐसे ही कुछ दिन गुजर गए। एक दिन मैं जल्दी घर आया क्योंकि मुझे शादी पर जाना था बाहर। मैंने रिंग की प्रीति ने दरवाजा खोला और मैं देखकर हैरान रह गया। वो एक ट्रांसपेरेंट नाइटी में थी और वो भी बिना किसी ब्रा या पैंटी के। मैं उसे देखता ही रह गया और उस पर टूट पड़ा। मैंने उसे किस तो किया पर जब तक मैं उसके मम्मे पकड़ता उसने खुद को छुड़ा कर मुझे एक चांटा मारा। मैं डर गया मैंने उनसे माफी मांगी और कहा ऐसे कपड़े पहनने से तो कोई भी पागल हो जाएगा। उसने शर्म महसूस की और रूम में चली गई और दरवाजा लॉक कर लिया। मैंने रिंग होल से देखा उसने नाइटी उतारी और ब्रा पैंटी और नाइटी डाल कर बाहर आ गई। मैं बाथरूम में गया और उसे पहली बार न्यूड देखने पर मुठ मारी और फ्रेश हो के रेडी हो गया। उसने कॉफी का कप मुझे दिया। मैंने कहा भाभी इसे हार्दीप को मत बताना हमारी दोस्ती टूट जाएगी। उसने कहा गलती मेरी थी मुझे इस हालत में तुम्हारे सामने नहीं आना चाहिए था।

2 दिन बाद मैं वापस आया तो माहौल ठीक था। अगले दिन हम इकट्ठे बैंक से आ रहे थे तो हार्दीप परेशान था। पूछने पर बताया कि तुम्हारी भाभी ने अल्टीमेटम दे दिया है। मैंने कहा कैसा अल्टीमेटम। वो मुझे एक पार्क में ले गया। वहां हम दोनों ही थे। उसने कहा मेरा अंग कमजोर है और अभी तक हमारी सुहागरात भी नहीं हुई। मैं तो ये सुन कर भागो-भाग हो गया पर मैंने इस खुशी को छिपाते हुए उसे कहा तुमने पहले क्यों नहीं बताया ये तो बहुत आसान है पर कइयों के लिए बहुत मुश्किल। हार्दीप बोला आसान कैसे मैंने कहा सिर्फ 7 दिन की दवा से और वो बोला मुश्किल कैसे मैंने कहा ये 7 दिन हर औरत से दूर रहना होगा। वो हंसा और बोला मैं 10 दिन की ट्रेनिंग पर जा रहा हूं। मैं बोला 10 दिन में घोड़े की तरह हो जाओगे। भाभी को मायके छोड़ देना वो खुश हो जाएगी। वो बोला खुश तो हो गई थी पर कॉलेज वालों ने छुट्टी नहीं दी उसे यहीं रहना पड़ेगा और तुम उसका खयाल रखना। मेरी तो खुशी का ठिकाना न रहा और कहा ये भी कोई कहने की बात है भाभी मां की तरह रहेगी उसे एयर पोर्ट छोड़ कर मैं बैंक चला गया और शाम को घर गया मैंने रिंग की तो उसने दरवाजा खोला। वो सुहाग के जोड़े में थी। मैं उसे इस तरह देखकर हैरान हो गया। मैं अंदर गया।

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वो जैसे ही दरवाजा बंद करके मुड़ी उसका पल्लू नीचे गिर गया। उसके खड़े बूब्स देखकर मुझे नशा चढ़ गया पर मैं थोड़ा रुका क्योंकि मुझे उस दिन का थप्पड़ याद था। मैंने सिर झुका के कहा पल्लू उठाइए भाभी तो वो बोली उस दिन तो इस पर झपट पड़े थे आज देखने में भी शर्म आती है। मैं ऊपर देखा उसकी आंखों में नशा था और वो अपने होंठों को खा रही थी। मैं उसके नजदीक गया और उसे किस किया और उसके मम्मे मसलने लगा। वो मुझसे लिपट गई। मैंने कुछ देर चूसने के बाद उसे कहा कि मैं फ्रेश होकर आता हूं। मैं अपने कमरे की तरफ मुड़ा तो वो मुझे अपने कमरे में ले गई। रूम एक दम सुहागरात की तरह सजा था। मैंने उसे देखा और पूछा भाभी ये किस लिए। वो बोली भाभी नहीं 10 दिन हम मियां बीवी की तरह ही रहेंगे। क्यों क्या हार्दीप भूखा ही छोड़ गया। वो बोली उसके पास क्या है जो सेक्स करेगा। हमारी तो सुहागरात भी नहीं हुई। मैं चुपचाप बाथरूम गया अंदर नया कुर्ता पजामा था मैं उसे पहन कर आया तो वो घूंघट ओढ़े बैठी थी। मैं उसके पास गया उसने दूध का गिलास आगे किया मैंने कहा हम ये दूध नहीं पीते हम तो यहां से पिएंगे मैंने उसका मम्मा पकड़ते कहा।

इसे भी पीना पहले ये। हमने आधा-आधा गिलास दूध पिया और उसके लिटा के चूमने लगा और मम्मे मसलने लगा। उसका शरीर कांप रहा था। फिर मैंने नीचे सरकते हुए उसका ब्लाउज खोल दिया और ब्रा के ऊपर से एक को चूसने लगा और दूसरा मसलने लगा और ब्रा को किंच दिया और उसे भाड़ कर दो कबूतरों को आजाद कर दिया। उसके मम्मे मस्त थे और मैं उसे चूसने और मसलने लगा। प्रीति की सांसें तेज हो रही थीं, वो हल्के से कराह रही थी, “आह राहुल, धीरे से, उफ्फ…” मैंने उसके निप्पलों को जीभ से चाटा, उन्हें दांतों से हल्का काटा जिससे वो और कांप उठी, “ओह्ह… हां, ऐसे ही चूसो मेरे राजा।” मैंने उसके ब्लाउज को पूरी तरह उतार दिया, ब्रा को पीछे से खोलकर फेंक दिया, अब उसके गोरे मम्मे मेरे सामने नंगे थे, गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैं एक को मुंह में लेकर चूस रहा था, जीभ से घुमा रहा था, जबकि दूसरा हाथ से दबा रहा था, मसल रहा था। प्रीति के मुंह से सीत्कारें निकल रही थीं, “उम्म्म… आह्ह… राहुल, कितना अच्छा लग रहा है, और जोर से चूसो।” मैंने उसके मम्मों को चूसते हुए नीचे हाथ बढ़ाया, उसकी साड़ी को ऊपर सरकाया, उसकी जांघों को सहलाया, वो सिहर उठी, “ओह्ह… राहुल, वहां मत छुओ, मैं शर्मा रही हूं।” लेकिन मैं नहीं रुका, मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट को धीरे-धीरे ऊपर उठाया, उसकी गोरी जांघें नजर आ रही थीं, मैंने उन्हें चूमा, चाटा, ऊपर की तरफ बढ़ते हुए उसकी पैंटी तक पहुंचा।

फिर मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट भी उतार दिया और वो मेरे सामने पैंटी में थी। मैंने अपने कपड़े उतारे और अंडरवियर उसे उतारने को कहा और कहा डरना मत गन लंबी है। वो बोली मैं इसे देख चुकी हूं जब तुमने मुझे नंगा देखकर मुठ मारी थी। मैंने उसकी कच्छी और कच्छा उतारा और 69 की पोजीशन में आ गए। वो मेरा लंड चूस रही थी और मैं उसकी चूत। बीच-बीच में मैं कभी जीभ और कभी उंगली अंदर डाल देता था। प्रीति मेरे लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी, जीभ से टिप को चाट रही थी, “ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… गोग…” की आवाजें निकल रही थीं जैसे वो डीपथ्रोट कर रही हो, वो हल्के से गैग कर रही थी लेकिन रुकी नहीं, “राहुल, तेरा लंड इतना मोटा है, मुंह में मुश्किल से आ रहा है, लेकिन मजा आ रहा है।” मैं नीचे से उसकी चूत को चाट रहा था, जीभ से क्लिट को रगड़ रहा था, उंगली अंदर-बाहर कर रहा था, प्रीति कांप रही थी, “आह… इह्ह… ओह्ह… ओह! आह… ह्ह्ह… इह्ह… राहुल, ऐसे चाटो, उफ्फ… मैं पागल हो रही हूं।” मैंने उसकी चूत के होंठों को अलग किया, जीभ अंदर डाली, उसे चूसा, वो कमर उचका रही थी, “आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह… हां राहुल, और गहराई में डालो जीभ, ओह्ह… मैं झड़ने वाली हूं।” हम दोनों एक-दूसरे को चूसते रहे, मैंने उसकी चूत में दो उंगलियां डालीं, तेजी से अंदर-बाहर की, वो चिल्ला उठी, “आह्ह… ह्ह… आऊ… ऊऊ… ऊउइ… ऊई… उईईई… राहुल, मत रुको, मैं आ रही हूं!” और वो झड़ गई, उसका रस मेरे मुंह पर आ गया, मैंने सब चाट लिया।

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अब वो चुदने को तैयार थी और मैं चोदने को। मैंने उसके दोनों पैरों को कंधों पर रखकर अच्छे से फैलाया, उसकी चूत पूरी तरह खुल गई थी, गुलाबी होंठों पर मेरे लंड का प्रीकम चमक रहा था। मैंने लंड की टिप उसकी चूत के मुंह पर रगड़ते हुए कहा, “प्रीति, दर्द होगा पहले, लेकिन फिर मजा आएगा।” वो आंखें बंद करके बोली, “इसी दर्द के लिए तो तरप रही हूं राहुल, डाल दे अंदर, मुझे औरत बनाना है आज।”

मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से चिपकाया, जीभ अंदर डालकर चूसी, और ठीक उसी पल एक जोरदार झटका मारा। आधा लंड एकदम अंदर घुस गया। प्रीति का पूरा शरीर सिहर उठा, वो दर्द से कराह उठी, “आह्ह्ह… उफ्फ्फ… राहुल, दर्द हो रहा है… बहुत दर्द… धीरे करो प्लीज!” उसकी आंखों से आंसू छलक आए, लेकिन मैंने उसके होंठ नहीं छोड़े, जीभ से खेलता रहा और एक हाथ से उसके मम्मे मसलने लगा, निप्पल को उंगलियों से पिंच करता रहा। उसकी चूत मेरे लंड को इतनी कसकर पकड़ रही थी कि मुझे भी दर्द महसूस हो रहा था, लेकिन वो टाइटनेस कमाल की थी।

करीब 10 मिनट तक मैं ऐसे ही रुका रहा, हल्के-हल्के कमर हिलाता रहा ताकि वो आदत डाल ले। उसकी सांसें तेज हो रही थीं, कराहें अब दर्द वाली कम और मिश्रित हो रही थीं। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “अब कैसा लग रहा है भाभी?” वो हांफते हुए बोली, “ठीक… ठीक है राहुल… अब थोड़ा अच्छा लग रहा है… लेकिन अभी भी दर्द है।” मैंने मुस्कुराकर कहा, “अब पूरा अंदर जाएगा।” और फिर एक और जोरदार झटका मारा। लंड उसकी कुंवारी चूत को फाड़ता हुआ पूरा अंदर समा गया। प्रीति चिल्ला उठी, “आअह्ह्ह्ह… मर गई राहुल… निकालो इसे… बहुत दर्द हो रहा है… आह्ह्ह… फट जाएगी मेरी चूत!” उसकी चीख कमरे की दीवारों में गूंजी लेकिन बंद दरवाजे की वजह से बाहर नहीं गई। उसकी चूत से गर्म खून बहने लगा, मेरे लंड पर लाल-लाल लग गया, वो रो रही थी, हाथों से मुझे धक्का देने की कोशिश कर रही थी, “निकालो राहुल… प्लीज… मैं सह नहीं पा रही!”

मैंने उसे कसकर पकड़ा, उसके होंठ चूसते हुए हल्के-हल्के शॉट्स लगाने शुरू किए। पहले तो वो रोती रही, लेकिन धीरे-धीरे उसकी चूत ढीली पड़ने लगी, खून के साथ उसका रस भी मिलने लगा। उसकी कराहें बदल गईं, अब दर्द के साथ-साथ सुख भी था। वो नीचे से कमर हिलाने लगी, “ओह्ह… राहुल… अब अच्छा लग रहा है… हां… और जोर से धक्का मारो… आह… ऐसे ही चोदो मुझे… उफ्फ…” मैंने स्पीड बढ़ाई, लंड पूरी तरह अंदर-बाहर होने लगा, चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर दबा रही थीं, हर धक्के पर “पच… पच… थप… थप…” की गीली आवाजें कमरे में भर गईं। प्रीति जोर-जोर से कराह रही थी, “आह… इह्ह… ओह्ह… हां राहुल… फाड़ दो मेरी चूत… उफ्फ… कितना मोटा है तेरा लंड… आह्ह… और गहराई में डालो!”

मैंने उसके मम्मों को दोनों हाथों से दबाया, निप्पलों को मसलते हुए जोर-जोर से धक्के मारने लगा। वो कमर ऊपर-नीचे करके साथ दे रही थी, उसकी चूत अब पूरी गीली हो चुकी थी, हर धक्के पर रस छलक रहा था। वो चिल्लाई, “आह ह ह ह… ह्हीईई… आअह्ह्ह्ह… और तेज राहुल… मैं फिर झड़ने वाली हूं… ओह्ह… चोदो जोर से!” उसकी चूत सिकुड़ने लगी, मैंने और तेज धक्के मारे, 15 मिनट तक लगातार पेलता रहा। आखिरकार मैं झड़ने लगा, “ओह्ह… प्रीति… ले मेरा रस… भर दूंगा तेरी चूत आज!” और उसके अंदर ही गरम-गरम माल छोड़ दिया। वो भी उसी वक्त झड़ गई, “आअह्ह्ह… राहुल… मैं आ गई… ओह्ह… कितना गर्म है तेरा रस!” उसकी आंखें बंद हो गईं, चेहरा संतुष्टि से चमक रहा था।

वो खुश थी। मैं उठा और उसे गोद में उठाकर बाथरूम ले गया क्योंकि उसे चलने में मुश्किल आ रही थी। बाथरूम में उसका खून और हमारा रस साफ किया, दोनों ने एक-दूसरे को नहलाया। फ्रेश होकर हम बेड पर आए और इस बार मैंने पहले उसकी गांड मारी और मजा लिया।

मैंने उसे डॉगी स्टाइल में घोड़ी बनाया। प्रीति को चारों हाथ-पैरों पर झुकाया, उसकी कमर को नीचे दबाकर गांड को ऊपर उठाया। उसकी गोरी, गोल गांड मेरे सामने तनी हुई थी, चूत अभी भी चुदाई के बाद गीली और लाल थी। मैंने अपने लंड पर अच्छे से थूक लगाया, उसे हाथ से रगड़ा ताकि और चिकना हो जाए। फिर धीरे से लंड की टिप उसके गांड के छोटे, सिकुड़े छेद पर रखी। “प्रीति, अब तेरी गांड की बारी है, तैयार हो?” मैंने पूछा, आवाज में शरारत और उत्सुकता भरी हुई।

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वो घबरा गई, उसकी सांसें तेज हो गईं, शरीर कांपने लगा। “राहुल, वहां मत डालो… दर्द होगा बहुत, मैंने कभी नहीं किया… प्लीज…” उसकी आवाज कांप रही थी, डर और शर्म दोनों मिले हुए। लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था। मैंने उसके कूल्हों को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ा, धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया। लंड की टिप ने उसके टाइट छेद को दबाया, फिर अचानक थोड़ा अंदर सरक गई। प्रीति जोर से चिल्लाई, “आअह्ह्ह… उफ्फ… राहुल, निकालो! फट जाएगी मेरी गांड… आह्ह्ह… बहुत दर्द हो रहा है!”

मैंने रुककर उसके मम्मों को पीछे से पकड़ा, हल्के से दबाया और कहा, “आराम से प्रीति, पहले थोड़ा सा अंदर जाने दो… फिर मजा आएगा, बस सांस ले और रिलैक्स कर।” मैंने फिर हल्के-हल्के धक्के देने शुरू किए। हर धक्के के साथ लंड थोड़ा-थोड़ा अंदर जा रहा था। प्रीति दांत पीस रही थी, आंसू आ गए थे उसके गालों पर, लेकिन वो भाग नहीं रही थी। “उफ्फ… राहुल… धीरे… आह्ह… ओह्ह…” धीरे-धीरे आधा लंड अंदर चला गया। मैंने रुककर उसे सांस लेने दिया, फिर एक और धीमा धक्का। अब पूरा लंड उसके टाइट गांड के अंदर था, गर्मी और कसाव से मेरे लंड को ऐसा लगा जैसे कोई नया स्वर्ग मिल गया हो।

“थप… थप… पच… पच…” धीमे-धीमे धक्कों की आवाजें शुरू हो गईं। प्रीति पहले रो रही थी, दर्द से कराह रही थी, “आह्ह… दर्द… बहुत दर्द… निकालो…” लेकिन जैसे-जैसे मैं धीरे-धीरे रिदम बनाता गया, उसके कराहने में बदलाव आने लगा। दर्द के साथ-साथ अब एक अजीब सा मजा भी महसूस हो रहा था उसे। “ओह्ह… राहुल… अब… अब अच्छा लग रहा है… उफ्फ… हां… चोदो मेरी गांड… आह… ह्ह्ह… इह्ह…” वो खुद कमर हिलाने लगी, पीछे की तरफ धक्का देने लगी।

मैंने स्पीड बढ़ाई। अब जोर-जोर से धक्के मार रहा था, उसके मम्मों को पीछे से पकड़कर खींच रहा था जैसे लगाम हो। “ले प्रीति, ले मेरी पूरी गांड… कितनी टाइट है तेरी… आह… मजा आ रहा है!” मैं भी कराह रहा था। प्रीति अब पूरी तरह में डूब चुकी थी, “हां राहुल… और जोर से… फाड़ दो मेरी गांड… ओह्ह… आह्ह… इह्ह… कितना गहरा जा रहा है… उफ्फ…” उसके मुंह से लगातार कराहें निकल रही थीं, शरीर पसीने से तर था, गांड लाल हो गई थी लेकिन वो रुक नहीं रही थी।

10 मिनट बाद मैंने और जोर से धक्के मारे, लंड को पूरी तरह अंदर तक दबाया और उसके अंदर ही झड़ गया। “आह्ह… प्रीति… ले मेरा रस… तेरी गांड में भर रहा हूं!” गर्म रस उसके अंदर गया तो वो भी सिहर उठी, “ओह्ह… राहुल… गर्म… कितना गर्म… आह्ह…” मैंने लंड निकाला तो उसकी गांड थोड़ी खुली हुई थी, रस बाहर निकल रहा था। वो थककर बिस्तर पर लेट गई, सांसें तेज चल रही थीं।

उस रात मैंने उसे कुल 4 बार चोदा, हर बार नई पोजीशन में। पहले मिशनरी में, जहां मैं उसके ऊपर था, उसके होंठ चूसते हुए चोदा। फिर दोबारा डॉगी में, जहां मैंने उसकी चूत और गांड दोनों बारी-बारी से ली। फिर रिवर्स काउगर्ल में, जहां वो मेरे लंड पर उछल रही थी, मम्मे हिल रहे थे, “आह… ओह्ह… राहुल, तेरे लंड पर कितना मजा आ रहा है… उफ्फ… मैं थक गई लेकिन रुकना नहीं… और चोदो मुझे!” वो खुद स्पीड बढ़ा रही थी, कमर घुमा-घुमा कर लंड को अंदर ले रही थी।

अगले दिन वो कॉलेज नहीं गई। वो 5 दिन हमने मेरे ऑफिस से आते ही खूब मजे लिए, हर शाम नहाकर, नंगे होकर एक-दूसरे को छूते, चूमते, चाटते रहे। बाकी दिन हम नंगे ही रहते थे, लेकिन सेक्स नहीं किया। मैंने उसे जानबूझकर हार्दीप के लिए तैयार किया, ताकि जब वो आए तो प्रीति पूरी तरह सेक्सी और तैयार हो। और आज वो आया है, आज उनकी असली सुहागरात है।

तो दोस्तो कैसे लगी मेरी स्टोरी कमेंट जरूर करना।

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