दोस्तों, मेरी ये कहानी मेरी बीवी स्वाति के बारे में है, जो धीरे-धीरे मेरे ऑफिस की सबसे बड़ी रंडी बन गई। हमारी शादी को तीन साल हो चुके थे, और मैं समीर एक छोटी सी आईटी कंपनी में काम करता हूं। स्वाति 28 साल की है, गोरी-चिट्टी, बड़े-बड़े बोबे, पतली कमर और भरी हुई गांड वाली। वो घर पर रहती है, लेकिन उसकी आंखों में हमेशा वो चालाकी भरी चमक रहती है जो बताती है कि वो शांत पानी की तरह गहरी है। मैं जानता था कि शादी के बाद भी वो मेरे पीछे कुछ गैर मर्दों के साथ मजा ले चुकी है, लेकिन मैंने कभी कुछ कहा नहीं, क्योंकि मैं खुद उसे ठीक से संतुष्ट नहीं कर पाता था। लेकिन अब ये सब मेरे सामने होने वाला था, और वो भी ऐसे तरीके से कि मेरी जिंदगी बदल जाए।
कहानी का पिछला भाग: बॉलीवुड के लालच में बीवी बन गई सस्ती रंडी
एक दिन ऑफिस में स्वास्थ्य बीमा का प्रोग्राम था। सब कर्मचारियों को अपने परिवार वालों को बुलाना था, ताकि फॉर्म पर हस्ताक्षर हो सकें। मैंने स्वाति को फोन किया और कहा कि बस दस मिनट के लिए आ जाए। वो तैयार होकर आई, लेकिन क्या तैयार! लाल साड़ी, जो इतनी पतली थी कि उसके कर्व्स साफ नजर आ रहे थे। ब्लाउज डीप कट का, जिसमें से उसके बोबे आधे बाहर झांक रहे थे। बाल खुले, लिपस्टिक चटक लाल, और वो इठलाती हुई चली आ रही थी। ऑफिस के गेट पर ही सबकी नजरें उस पर टिक गईं। मेरा बॉस विजय सर, जो 45 साल के थे, मोटे-तगड़े, बालों में सफेदी, लेकिन आंखों में शरारत भरी। उन्होंने स्वाति को देखा तो मुंह खुला रह गया, जैसे कोई भूखा शेर मांस देख रहा हो।
विजय सर ने तुरंत मुझे बुलाया और बोले, “समीर, ये कौन है? इंट्रोड्यूस तो करो।” मैंने मजबूरी में कहा, “सर, ये मेरी बीवी स्वाति है।” स्वाति ने मुस्कुराकर हाथ मिलाया, और उसका हाथ विजय सर के हाथ में थोड़ा ज्यादा देर तक रहा। दीपक, जो विजय सर का चेला था, 30 साल का जवान लड़का, वो पानी लाने के बहाने आ गया। वो स्वाति के पास खड़ा हो गया और बोला, “भाभी, पानी पिएंगी?” स्वाति ने हंसकर कहा, “हां दीपक जी, क्यों नहीं।” मैं अंदर रूम में चला गया कुछ पेपर्स लेने, लेकिन खिड़की से चुपके से देख रहा था। स्वाति ने जानबूझकर पेन गिरा दिया और झुककर उठाने लगी। उसके ब्लाउज से बोबे पूरी तरह बाहर आ गए, निप्पल तक दिख गए। विजय सर की आंखें चमक उठीं, उन्होंने पैंट के ऊपर से अपना लंड मसला। दीपक ने पीछे से स्वाति की गांड पर अपना लंड सटा दिया और हल्का सा रगड़ा। स्वाति ने मुड़कर देखा और मुस्कुरा दी, जैसे कह रही हो कि और करो।
फिर स्वाति बोली, “सर, आपकी पैंट पर कुछ फंसा लग रहा है, थोड़ा हल्का कर लीजिए ना।” ये सुनकर विजय सर और दीपक दोनों समझ गए कि ग्रीन सिग्नल है। मैं गुस्से से बाहर जाने लगा, लेकिन तभी रवि, मेरा ऑफिस का साथी, अंदर आ गया और बोला, “समीर, वो डॉक्यूमेंट कहां हैं?” मैं जानता था कि वो मुझे रोकने आया है, क्योंकि बाद में पता चला कि वो भी विजय सर का आदमी था। पांच मिनट बाद मैं बाहर निकला तो वो तीनों गायब। मैंने हर जगह ढूंढा, बाथरूम भी चेक किया, लेकिन कहीं नहीं। फोन किया स्वाति को, दो-तीन बार रिंग गई लेकिन नहीं उठाया। विजय सर को भी फोन किया, वो भी नहीं। आधे घंटे बाद वो तीनों टेरेस की सीढ़ियों से नीचे आते दिखे। स्वाति की लिपस्टिक पूरी उड़ी हुई थी, होंठ सूजे हुए, बाल बिखरे। विजय सर की पैंट की जिप हल्की खुली थी, और दीपक मुस्कुरा रहा था। उन्होंने कहा, “अरे समीर, हम तो खुली हवा खाने टेरेस गए थे।” लेकिन मुझे पता था कि ऊपर क्या हुआ होगा। स्वाति ने शायद दोनों के लंड चूसे होंगे, क्योंकि उसके मुंह से थोड़ी सी बदबू आ रही थी।
मैंने स्वाति को घर जाते वक्त डांटा, “क्या कर रही थी तू? उनसे दूर रह।” स्वाति भड़क गई, “तू क्या करता है मेरे लिए? हाथ भी नहीं लगाता। अब मैं जो करूं, वो करूं।” और बदला लेने के लिए उसने विजय सर को अपना फोन नंबर दे दिया। अगले दो-तीन दिन विजय सर मुझसे बहुत अच्छे से पेश आने लगे। काम कम देते, मेरे साथ घूमते, और सैलरी बढ़ाने की बात की। मैं खुश हो गया, सोचा कि शायद मेरा अच्छा टाइम आ गया। लेकिन पीछे से विजय सर स्वाति से फोन पर बातें करने लगे। धीरे-धीरे वो उसे होटल में बुलाने लगे। एक दिन मैंने स्वाति के फोन में मैसेज देखा, विजय सर का था, “आज शाम होटल में आना, तेरी चूत की प्यास बुझाऊंगा।” लेकिन मैं चुप रहा, क्योंकि प्रमोशन की बात चल रही थी।
विजय सर ने स्वाति का एक एमएमएस बनाया, जिसमें वो होटल के बेड पर नंगी लेटी थी, और विजय सर उसकी चूत चाट रहे थे। वो वीडियो ऑफिस में अपने दोस्तों को दिखाया। रवि, दीपक, केतन सबने देखा। केतन, जो ऑफिस का सबसे हट्टा-कट्टा था, 35 साल का, बोला, “सर, ये तो कमाल की माल है। हमें भी चखाओ।” धीरे-धीरे पूरी कंपनी में स्वाति के बारे में बातें होने लगीं। लोग मुझे देखकर मुस्कुराते, लेकिन मैं अंजान बना रहा।
फिर एक दिन स्वाति बोली, “समीर, ऑफिस वालों को घर पर दावत दे।” मुझे शक हुआ, लेकिन सोचा घर में मैं हूं, क्या होगा। मैंने विजय सर, दीपक, रवि और केतन को शनिवार शाम बुला लिया। रात आठ बजे वो आए। विजय सर व्हिस्की लाए, दीपक वोदका, रवि बियर। सब बैठकर पीने लगे। स्वाति ने नीली साड़ी पहनी थी, ब्लाउज टाइट, जिसमें उसके बोबे उभरे हुए थे। वो सबको सर्व करती, झुकती तो बोबे दिख जाते। विजय सर बोले, “भाभी, क्या माल लग रही हो आज।” स्वाति हंसकर बोली, “सर, आप भी कम नहीं।” उन्होंने मुझे पैग पर पैग पिलाया। मैं नशे में आ गया, खाना खाकर बेडरूम में सो गया। स्वाति किचन में गई।
पंद्रह मिनट बाद पेशाब लगा, मैं उठा। हॉल से आवाजें आईं। मैं चुपके से देखा तो सन्न रह गया। सोफे पर विजय, दीपक, रवि बैठे थे, पैंट खुली, लंड बाहर। केतन शर्ट उतारकर खड़ा था। स्वाति घुटनों पर बैठी, अपनी साड़ी ऊपर उठाई हुई, ब्लाउज खुला, बोबे बाहर। वो दीपक का लंड मुंह में लेकर चूस रही थी, ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गों.. गों.. गोग.. उसका मुंह पूरा भरा हुआ था। दोनों हाथों से विजय और रवि के लंड हिला रही थी। विजय बोला, “साली रंडी, कितना अच्छा चूसती है। होटल में तो सिर्फ चूत दी थी, आज मुंह भी।”
मैं चिल्लाया, “ये क्या हो रहा है?” केतन ने मुझे पकड़कर धक्का मारा, मैं गिर गया। बोला, “चुप साले, तेरी बीवी हमारी रंडी है। ऑफिस की बाजारू माल। ये पहली बार नहीं, हफ्ते में तीन-चार बार चोदते हैं हम इसे।” मैं नशे में उठ नहीं पाया। स्वाति लंड चूसते हुए बोली, “हां साले गांडू, तू सो जा। तू तो मुझे छूता भी नहीं। तेरी सैलरी मेरी चूत की वजह से बढ़ी है।” वो घोड़ी बन गई, साड़ी कमर तक उठी, पैंटी नीचे। विजय बोला, “मैं बॉस हूं, पहले मैं।” उसने पीछे से लंड स्वाति की चूत में पेल दिया, धक्के मारने लगा। आह्ह.. ह्ह्ह.. इह्ह.. स्वाति कराह उठी, “आह सर, कितना मोटा है आपका.. पेलो जोर से..” दीपक ने मुंह में लंड डाला, गले तक ठूंस दिया, ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. स्वाति की आंखों से पानी आ गया।
रवि बोबे दबा रहा था, “साली, तेरे बोबे कितने रसीले हैं।” केतन हाथ से अपना लंड हिला रहा था। दीपक ने जल्दी झड़ दिया, स्वाति के मुंह में माल डाल दिया। स्वाति ने सब चाट लिया, “उम्म.. कितना टेस्टी है..” रवि ने मुंह में लिया, स्वाति चूसने लगी। विजय ने स्पीड बढ़ाई, “साली, तेरी चूत को भोसड़ा बना दिया है हमने। अब गांड मारूंगा।” उसने लंड निकाला, स्वाति के मुंह में डाला, “चूसकर गीला कर।” स्वाति ने चूसा, फिर विजय ने गांड में पेला। आह्ह्ह.. ऊईई.. ऊउइ.. स्वाति चिल्लाई, “आह्ह.. फट जाएगी सर.. धीरे..” लेकिन विजय जोर-जोर से पेलता रहा। रवि ने मुंह बंद कर दिया लंड से। पांच मिनट बाद विजय ने गांड में माल डाला, “साली, मजा आ गया। घर जाकर बीवी को चोदने का मन नहीं करता तेरे बाद।”
स्वाति बोली, “सर, मेरी चूत चोदकर आपका लंड थक जाता है, बीवी को कैसे चोदोगे?” सब हंस पड़े। केतन बोला, “साले समीर, आ इधर, मुझे कंडोम पहना।” उसने जबरदस्ती मेरे हाथ से कंडोम लगवाया, फिर स्वाति की चूत में पेल दिया। “आह्ह.. केतन, तू तो भैंसा है.. जोर से पेल..” स्वाति कराह रही थी। रवि को दांत लग गया, वो गुस्से में थप्पड़ मारा, “साली रंडी, चूसना है, काटना नहीं।” फिर उसने मुंह में माल डाला। केतन ने चूत चोदी, फिर दीपक ने लिटाकर चोदा। विजय मुंह पर बैठकर हिलाने लगा, मुझे गाली देता रहा, “साले, तेरी बीवी हमारी रखैल है।”
सबने बारी-बारी चोदा, मुंह, चूत, गांड सब भरा। आखिर में स्वाति को बीच में बिठाकर सबने माल से नहलाया। स्वाति थककर फर्श पर लेट गई। केतन ने उसे उठाया, बाथरूम में नहलाया, फिर बेडरूम में लाकर फिर चोदा। रात भर रुक-रुक कर चोदते रहे। सुबह मैं उठा, स्वाति चारों के बीच नंगी सो रही थी। रवि ने वीडियो दिखाए, “देख चूतिए, अब तू भी इसमें है।” मैं समझ गया, अब ये रुकने वाला नहीं। अब हफ्ते में दो बार दावत होती है, स्वाति सबकी सेवा करती है। चौकीदार भी आता है। मुझे फायदा, काम कम, सैलरी ज्यादा। जिंदगी ऐसे ही चल रही है।
कहानी का अगला भाग: पति के घर में छुपकर पुराने यार से चुदाई की
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