Chacha bhatiji sex story – Kuwari bur fadi sex story – Uncle niece sex story: मेरा नाम रेखा है। मैं वो ही रेखा हूँ जिसने अपनी मम्मी को चाचा का मोटा लंड चूसते देखा था और फिर मम्मी की जोरदार चुदाई भी छुपकर देख ली थी। उसके बाद से मेरा मन भी बार-बार चुदाई के ख्यालों में डूबने लगा था। चाचा तो मुझे भी चोदना चाहते थे, लेकिन मम्मी ने साफ मना कर दिया था।
एक दिन मम्मी बाजार गईं कुछ सामान लेने। मैं घर पर अकेली थी। मम्मी के जाते ही चाचा ने मुझे मम्मी समझ लिया और मेरी सील तोड़ दी। उस दिन के बाद मैं रोज चाचा से चुदने लगी।
सब कुछ ऐसे शुरू हुआ। उस सुबह मम्मी थकी हुई लग रही थीं। रात भर चाचा ने उनकी अच्छी खातिरदारी की थी। दोपहर में फिर चाचा की चुदाई करवानी थी, इसलिए मम्मी ने बहाना बनाया कि तबीयत ठीक नहीं है। उन्होंने मुझे कहा, “रेखा, बाजार से कुछ सामान ले आ, घर का सामान खत्म हो गया है।”
मैं अनजान बनते हुए बाजार चली गई। रास्ते भर दिमाग में बस यही चल रहा था कि इस वक्त मम्मी चाचा के नीचे मजे ले रही होंगी। मेरी चूत में अजीब सी गुदगुदी होने लगी। सोच-सोचकर मेरा बुरा हाल हो रहा था। मन कर रहा था कि किसी का भी लंड अपनी चूत में डलवा लूँ।
बाजार से सामान लेकर घर लौटी तो मम्मी बेड पर पड़ी थीं। उनके कपड़े इधर-उधर बिखरे पड़े थे। मैं तुरंत समझ गई कि मम्मी की जबरदस्त चुदाई हुई है। उनकी चूत अभी भी लाल होगी।
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रात को मैं अपनी चूत में उंगली डालकर सो गई। सुबह उठी तो मम्मी ने आवाज लगाई, “रेखा, मैं अपनी सहेली के घर जा रही हूँ। कल शाम तक वापस आऊँगी। तू अपने और चाचा के लिए खाना बना लेना।”
मम्मी चली गईं। मैंने चाय पी और नहाने बाथरूम में गई। शीशे में देखा तो मेरी चूत के बाल काफी बड़े हो गए थे। मैं उन्हें काटने लगी। बाल काटते वक्त चूत में खुजली सी होने लगी। मन करने लगा कि कोई मर्द का लंड अभी इसी वक्त चूत में घुस जाए।
दिमाग में तरह-तरह के ख्याल आने लगे। एक बार तो सोचा कि दूध वाला अंकल आता है, उसका लंड ले लूँ। लेकिन फिर डर लगा कि अगर उसने किसी को बता दिया तो बेज्जती हो जाएगी।
फिर अचानक चाचा का ख्याल आया। चाचा तो मुझे भी चोदना चाहते हैं। मैंने ठान लिया कि आज घर पर सिर्फ मैं और चाचा हैं, आज अपनी चुदाई करवा ही लूँगी, चाहे कुछ भी हो जाए।
मुझे अच्छे से पता था कि चाचा सुबह-सुबह मम्मी को चाय देने के बहाने चोदते हैं। मैंने चाय बनाई और मम्मी के कपड़े पहन लिए। मम्मी की साड़ी और ब्लाउज में मैं बिल्कुल मम्मी जैसी लग रही थी। चाय का कप लेकर चाचा के कमरे में गई।
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चुपके से पास जाकर उन्हें हिलाया। अगर आवाज देती तो चाचा समझ जाते कि मैं रेखा हूँ। मैंने चाय साइड टेबल पर रखी और मुड़ने लगी। तभी चाचा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे बेड पर खींचकर लिटा लिया। मेरा प्लान कामयाब हो गया।
चाचा ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और गहरा किस करने लगे। एक हाथ से मेरे बूब्स को जोर से दबाने लगे। मुझे भी अब सेक्स का जोश चढ़ने लगा। चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया। लेकिन डर भी लग रहा था कि चाचा का लंड बहुत बड़ा है, मेरी हालत खराब कर देगा।
चाचा नहीं रुके। उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। आज पहली बार मैं किसी मर्द के सामने पूरी नंगी थी, वो भी अपने चाचा के सामने। चाचा को देखकर लग रहा था जैसे मेरे पापा ही मुझे नंगा कर रहे हों।
चाचा नीचे झुके और मेरी चूत पर अपना मुँह सटा दिया। जीभ से चाटने लगे। आह्ह्ह… कितना मजा आ रहा था। मैं सातवें आसमान पर पहुँच गई। पहली बार पता चला कि चूत चटवाने में इतना सुकून है। चाचा की गर्म जीभ मेरी चूत के अंदर तक घुस रही थी। मैं काँप रही थी, आह्ह्ह ओह्ह्ह की आवाजें निकल रही थीं।
चाचा ने मेरी चूत को अच्छे से चूस-चूसकर पूरा गीला कर दिया। फिर उठे और अपने कपड़े उतारे। जब अंडरवियर निकाला तो उनका नाग जैसा मोटा लंड मेरे सामने लहरा रहा था। लंड की नसें उभरी हुई थीं, सुपारा लाल हो रहा था।
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चाचा बोले, “चूस इसे मेरी रानी।”
मैंने कभी लंड नहीं चूसा था, लेकिन मम्मी को बड़े चाव से चूसते देखा था। मैंने मन मारकर लंड मुँह में लिया। चाचा ने मेरे सिर को बालों से पकड़ा और पूरा लंड गले तक पेल दिया। ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… मेरी साँस रुकने लगी। आँखों में पानी आ गया।
कुछ देर बाद चाचा ने मुझे बेड पर लिटाया। अपने लंड पर थूक लगाया और मेरी चूत पर रगड़ने लगे। लंड का गरम सुपारा मेरी चूत की फांक पर फिसल रहा था। फिर सेट करके एक जोरदार झटका मारा। लंड फिसल गया। मैं समझ गई कि अभी कुँवारी हूँ, इसलिए अंदर नहीं जा रहा।
चाचा ने फिर हाथ से पकड़कर जोर से धक्का मारा। आधा लंड चूत में घुस गया। मेरी चीख निकल गई, “आअह्ह्ह्ह!”
चाचा बोले, “ऐसे नहीं करते रेखा बेटा।”
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मैं चौंक गई, “आपको पता है मैं मम्मी नहीं रेखा हूँ?”
चाचा हँसे, “हर रोज तेरी माँ की चुदाई करता हूँ, मुझे नहीं पता होगा कि तेरी चूत कैसी है और तेरी माँ की कैसी?”
मैं अनजान बनते हुए बोली, “प्लीज चाचा मुझे छोड़ दो।”
चाचा बोले, “नखरे मत कर रांडी, मुझे अच्छे से पता है तेरी चूत में भी खुजली हो रही है।”
चाचा रुके रहे, फिर एक और जोरदार झटका। पूरा लंड मेरी छोटी सी चूत में समा गया। मेरी आँखों से आँसू छलक आए। मैं रोने लगी। चूत में जलन और दर्द हो रहा था।
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चाचा कुछ देर रुके। मेरे बूब्स चूसने लगे। एक हाथ से दूसरे बूब को मसल रहे थे। धीरे-धीरे दर्द कम हुआ और मजा आने लगा। मैं भी चाचा को किस करने लगी।
चाचा समझ गए कि मैं तैयार हूँ। उन्होंने झटके मारना शुरू किया। थपथप… थपथप… की आवाजें आने लगीं। पंद्रह मिनट तक मेरी चुदाई की। मेरी चूत चपचप कर रही थी।
फिर चाचा बोले, “अब घोड़ी बन जा।”
मैं समझ गई कि अब गांड मारने वाले हैं। चूत में अभी जलन थी, हिम्मत नहीं हो रही थी। लेकिन चाचा नहीं माने। मुझे घोड़ी बना दिया। मेरी गांड पर ढेर सारा थूक लगाया और लंड सेट करके धीरे-धीरे पेल दिया।
आह्ह्ह्ह… मेरी गांड फट रही थी। चाचा ने कोई रहम नहीं किया। स्पीड बढ़ा दी। दस मिनट गांड मारने के बाद चाचा ने मुझे फिर लिटाया। टाँगें कंधों पर रखीं और लंड चूत में पेल दिया। मैंने नीचे देखा तो चूत से खून निकल रहा था।
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चाचा फिर चोदने लगे। पाँच मिनट बाद अपना गर्म माल मेरी चूत में छोड़ दिया और मेरे ऊपर लेट गए।
कुछ देर बाद मैं उठी। बाथरूम में जाकर चूत साफ की। चलने में दिक्कत हो रही थी। लेट्रिन करते वक्त जलन, पेशाब करते वक्त जलन। सोचा लंड लेना महंगा पड़ गया।
फिर भी खाना बनाया। चाचा को बुलाया। वे खाना खाकर मेरे कमरे में आ गए। मैंने पूछा, “कुछ चाहिए?”
चाचा बोले, “मुझे तो तेरी चूत चाहिए।”
मैंने कहा, “चाचा मेरी क्या हालत कर दी, अभी खून निकल रहा है।”
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चाचा हँसे, “तेरे जैसे में ही ऐसा होता है। शादी के बाद पति रात भर चूत-गांड मारेगा तब क्या करेगी?”
चाचा ने मुझे फिर लिटाया। मैंने मना किया लेकिन वे नहीं माने। फिर से चूत से खून निकाल दिया। उस दिन चाचा ने दिन में तीन बार चूत और दो बार गांड मारी। रात को तो गिनती ही भूल गई कि कितनी बार चुदी।
शाम तक मैं खुद चाचा से चुदवाने को तरस रही थी। मुझे लग रहा था कि मैं रंडी बन गई हूँ। अब रोज चाचा से चूत चुदवाने लगी। चाचा के लिए दोनों हाथों में लड्डू थे, रात में मम्मी और दिन में मैं।
ये थी मेरी सच्ची चुदाई की कहानी।
एक दिन मैं चाचा से घोड़ी बनकर गांड मरवा रही थी। शाम को जब हम बाहर घूमने गए तो मीनाक्षी ने मुझे देखकर कहा, “साली, तुझे गांड मरवाने के लिए मेरे पापा ही मिले? कोई लड़का ढूंढ लेती।”
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अगली कहानी में बताऊँगी कि मैंने कैसे तरकीब लगाकर चाचा से उनकी अपनी बेटी की गांड मरवा दी।
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