गर्लफ्रेंड के धोखे का बदला उसकी छोटी बहन की कुंवारी चूत फाड़कर लिया

Revenge sex story – College girl rough sex story: हैलो दोस्तों, मेरा नाम विनोद है, मैं गुजरात का रहने वाला हूँ और अभी मेरी उम्र 25 साल है। कुछ दिनों से मैं सेक्सी कहानियाँ पढ़कर मज़ा ले रहा था, तभी मन में आया कि अपनी उस सच्ची घटना को आप सबसे शेयर करूँ। ये मेरा पहला सेक्स अनुभव है और आज पहली बार लिख रहा हूँ, उम्मीद है आपको पसंद आएगी।

ये बात 2017-18 की है, जब मैं कॉलेज फर्स्ट ईयर में था, उम्र 18 साल। हमारे पड़ोस में एक बड़ा परिवार रहता था, चार बहनें, दो भाई और मम्मी-पापा। सबसे बड़ी राधा 25 साल की, मयूरी 23 की, जयश्री 19 साल की और सबसे छोटी विमला उस समय 18 साल की थी, कॉलेज में ही थी। उनका एक भाई मेरी उम्र का था और दूसरा छोटा।

हमारे दोनों घरों के रिश्ते बहुत अच्छे थे, सब घुलमिल कर रहते थे। जयश्री बहुत खूबसूरत थी, कॉलेज में हम दोनों की हैंडराइटिंग एक जैसी थी, इसलिए एक-दूसरे का असाइनमेंट कर दिया करते थे। यही सिलसिला चलता रहा और एक दिन हमने एक-दूसरे से प्यार का इज़हार कर दिया। अब असाइनमेंट के बहाने प्यार भरी बातें, एक-दूसरे को देखे बिना रहा नहीं जाता था। कहीं न कहीं मिलते, घंटों साथ बिताते।

फिर एक दिन जयश्री के नाना के घर से खत आया कि नानी बहुत बीमार हैं, किसी बेटी को भेज दो। राधा की शादी हो चुकी थी, मयूरी नहीं जाना चाहती थी, विमला अभी-अभी कॉलेज जॉइन की थी, इसलिए जयश्री को जाना पड़ा। हम अलग होकर बहुत रोए, पर मजबूरी थी। एक महीने तक चिट्ठियाँ लिखीं, फिर उसके जवाब बंद हो गए। मैं बहुत परेशान रहने लगा।

दो महीने बाद जब वो वापस आई तो उसका व्यवहार पूरी तरह बदल चुका था। मुझसे दूर-दूर रहती। मैंने कई बार पूछा, कुछ नहीं बताया। फिर देखा कि वो अपनी छोटी बहन विमला से सारी बातें शेयर करती है। मुझे गुस्सा आया, मन में ठान लिया कि बदला तो लेना ही है।

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अब दो साल बीत चुके थे। मैं कॉलेज थर्ड ईयर में था और विमला कॉलेज फर्स्ट ईयर में आ चुकी थी, यानी अब वो पूरी 18 साल की हो चुकी थी। उसके सेमेस्टर एग्जाम के दिनों में उसके पापा ने मुझसे कहा कि पढ़ाई में मदद कर दो। मैं रोज़ एक-दो घंटे उसके साथ पढ़ाने लगा। धीरे-धीरे मैंने उसे भी पटा लिया और वो मेरी दीवानी बन गई।

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एक दिन अच्छा मूड देखकर मैंने विमला से जयश्री के बारे में पूछा। पहले चुप रही, फिर दबाव डालने पर सब बता दिया। पता चला नाना के घर परेश नाम का उसका मामा का साला आया था, दोनों प्यार में पड़ गए। बस इसी वजह से जयश्री ने मुझे छोड़ दिया। मुझे बहुत दुख हुआ, लेकिन बदला लेने का पूरा प्लान बना लिया।

एक साल बाद मयूरी और जयश्री दोनों की शादी हो गई। अब घर में सिर्फ मम्मी-पापा, दो भाई और विमला रह गए। विमला मेरे बिना रह नहीं पाती थी। वो कॉलेज के साथ-साथ प्रोफेशनल मेहंदी कोर्स भी कर रही थी और दो महीने में इतनी अच्छी हो गई कि शादियों में मेहंदी लगाने जाने लगी। हर हफ्ते हम बाहर मिलते, तीन-चार घंटे साथ घूमते।

एक दिन मैंने पूछा, “तू मुझे क्या दे सकती है?” वो बोली, “जान भी दे दूँगी, बोलो क्या चाहिए?” मैंने कहा, “जान नहीं, कुछ और चाहिए।” वो बोली, “अब तो मैं पूरी तुम्हारी हूँ, बिना पूछे ले लो।” मैंने कहा, “चलो होटल चलते हैं।” वो तुरंत तैयार हो गई।

दो दिन बाद उसने पापा से कहा कि बड़ा मेहंदी का ऑर्डर है, रात भी लग सकती है। हम एक अच्छे होटल में मिले। वाह क्या लग रही थी, लाल चोली में जैसे दुल्हन सजकर आई हो, उसके छोटे-छोटे बूब्स उभरे हुए थे। मैंने मन ही मन सोचा, आज जयश्री का पूरा बदला ले लूँगा।

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कमरे में घुसते ही मैंने उसे बाहों में कसकर दबोच लिया, गोद में उठाया, उसके बूब्स मेरी छाती से सट गए। हम इतने चिपके कि हवा भी न गुजर सके। मैंने जोश में और ज़ोर से दबाया तो वो चिल्लाई, “ऊऊह्ह माँ, दम घुट रहा है डार्लिंग, छोड़ो ना।” मैंने छोड़ा और बेड पर लिटा दिया। चुनरी हटाई, चोली में उसके गोरे बूब्स दिख रहे थे। मैंने उसे किस करना शुरू किया, वो आँखें बंद करके आनंद लेने लगी, आह्ह्ह.. ह्हा..। धीरे-धीरे मैंने उसे पूरा नंगा कर दिया और खुद भी।

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वाह क्या मस्त लग रही थी विमला, उसके छोटे गोरे गोल बूब्स, सख्त निप्पल्स, गोरी चिकनी कुंवारी चूत देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया। बदले की आग में मैं जानबूझकर उस पर पूरी ताकत से गिर पड़ा, वो चिल्लाई, “ऊई माँ, ऐसे भी कोई छलांग लगाता है क्या?” मैं बोला, “ये तो ट्रेलर है, आगे देखो।” वो घबरा गई, “प्लीज कुछ ऐसा मत करना कि मैं मुँह दिखाने लायक न रहूँ।” मैंने कहा, “तूने ही कहा था सब कुछ दे दूँगी।” वो बोली, “हाँ दूँगी, लेकिन प्यार से लो ना।”

मैंने उसके गाल पर ज़ोर से काट लिया, दाँतों के निशान पड़ गए। फिर भूखे शेर की तरह उसके बूब्स पर टूट पड़ा, दोनों हाथों से इतना मसलने लगा कि वो तड़प उठी, “आह्ह्ह माँ मर गई, प्लीज छोड़ो, बहुत दर्द हो रहा है ऊऊह्ह्ह्..” आँखों से आँसू बहने लगे। वो रोने लगी, “मैंने आपका क्या बिगाड़ा जो ऐसा कर रहे हो?” मैं बोला, “तूने नहीं, तेरी दीदी जयश्री ने मेरा दिल तोड़ा, आज उसकी सज़ा तुझे मिलेगी।” वो बोली, “इसमें मेरा क्या कसूर, मैं तो आपको जान से ज्यादा चाहती हूँ।” मैं बोला, “मुझे तुझसे प्यार नहीं, सिर्फ बदला चाहिए।”

वो और घबरा गई, मैंने उसके होंठ चूसने शुरू किए, ज़ोर-ज़ोर से काटा, बीस मिनट बाद जब छोड़ा तो होंठ सूजकर फूल गए। फिर बूब्स चाटने-काटने लगा, वो चीख रही थी, “आह्ह्ह.. ऊईईई दर्द से मर जाऊँगी..” मैंने पूरा बदन चाटा, फिर नीचे उसकी चूत पर जीभ फेरने लगा। पहले तो वो मचली, “आह्ह्ह आम्मा मज़ा आ गया.. ऐसे ही चाटो..” फिर मैंने अचानक ज़ोर से काट लिया, वो चीखी, “ऊईईई माँ मार डाला..” और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी।

आधे घंटे तक चूत चाटता रहा, फिर अपना पाँच इंच का मोटा लंड उसके मुँह पर रख दिया। मना किया तो जबरदस्ती ठूँस दिया, ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गों गों गोग.. वो घुट रही थी। थोड़ी देर बाद निकाला, वो नीचे बैठकर रोने लगी।

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फिर मैंने उसे लेटाया, तकिया उसकी गांड के नीचे लगाया, चूत पूरी खुल गई और गीली हो चुकी थी। लंड चूत पर रखते ही वो बोली, “पहली बार है, प्लीज धीरे..” मैंने ज़ोरदार झटका मारा, फिसला। दूसरी बार थोड़ा अंदर गया, वो पीछे हटने लगी। मैंने जयश्री को चोदने का ख्याल करके सबसे ज़ोर का धक्का मारा, पूरा लंड अंदर, वो चीखकर बेहोश हो गई, चूत से खून बहने लगा।

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मुझे भी दर्द हुआ, उसकी चूत बहुत टाइट थी। मैं रुका, फिर लंड निकाल लिया। एक घंटे तक वो होश में नहीं आई। मैं उसे गोद में उठाकर बाथरूम ले गया, नहलाया, दस मिनट बाद होश आया। उसने मुझे धक्का दिया, लेकिन मैंने फिर उठाया और बेड पर लिटाया। इस बार दो धक्कों में पूरा लंड अंदर, वो रो रही थी पर बोल नहीं पा रही थी। बीस मिनट चोदने के बाद वो दर्द भूलकर मुझे कसकर पकड़ने लगी, “आह्ह.. ह्हा.. अब मज़ा आ रहा है..” 8:30 तक चुदाई चलती रही।

फिर नहलाया, खाना खाया। उसके बाद फिर चुदाई शुरू, इस बार वो भी पूरा साथ दे रही थी, “आह्ह्ह और ज़ोर से..” रात भर सुबह छह बजे तक चार बार चोदा, उसकी चूत का भोसड़ा बना दिया। अब लंड आसानी से अंदर-बाहर होने लगा। सुबह उसने देखा तो चूत बहुत सूज गई थी। दो घंटे आराम के बाद हम अलग-अलग घर चले गए।

उस रात मैंने जयश्री का पूरा बदला ले लिया था। उसके बाद भी हम कई बार मिले, अब मैं उसे बहुत प्यार से चोदता, घोड़ी बनाकर, ऊपर बैठाकर, खड़े होकर, हर पोज़ में। वो भी पूरा मज़ा लेती, अब दर्द बिल्कुल नहीं होता था। हम दोनों बहुत खुश थे।

धन्यवाद।

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