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छोटे भाई से चुदवायी कुंवारी चूत – भाग 6

कहानी का पिछला भाग: छोटे भाई से चुदवायी कुंवारी चूत – भाग 5

बबलू ने अपने कपड़े उतार दिए और मेरे मुँह के सामने अपना लंड लेकर खड़ा हो गया। मैंने उसे शरारती स्माइल दी और कहा, “किसी को मनाना तो कोई तुझसे सीखे। जा, पहले देखकर आ, कहीं दरवाजा खुला तो नहीं है।” वो भागकर गया, दरवाजा चेक किया और लौटकर बोला, “दीदी, दरवाजा लॉक है।”

वो फिर मेरे मुँह के सामने अपना लंड लेकर खड़ा हो गया। मैंने उसका लंड अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगी। उसका लंड अब पूरी तरह खड़ा हो गया था, करीब 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा। मैंने कहा, “देख, मेरे गाल कितने लाल हो गए हैं।” वो बोला, “सॉरी दीदी, आप मेरा जूस पी लो, सब ठीक हो जाएगा।”

मैंने उसका लंड अपने मुँह में लिया और पागलों की तरह चूसने लगी। मेरी जीभ उसके लंड के टॉप पर गोल-गोल घूम रही थी। “आह्ह…” उसके मुँह से सिसकारी निकली। करीब 10 मिनट बाद वो झड़ गया। उसका गर्म, गाढ़ा माल मेरे मुँह में भर गया। मैंने सारा माल पी लिया और उसके लंड को चाट-चाटकर साफ कर दिया। उसका माल आम के रस जैसा स्वादिष्ट था।

मैंने पूछा, “तुझे एक मूवी दिखाऊँ?” वो उत्साह से बोला, “हाँ दीदी!” मैंने अपने मोबाइल में एक पोर्न वीडियो प्ले कर दी। उसमें एक लड़का और लड़की सेक्स कर रहे थे। लड़के ने अपना लंड लड़की की चूत में डालकर अंदर-बाहर कर रहा था। बबलू ने हैरानी से पूछा, “दीदी, ये क्या कर रहे हैं?” मैंने हँसते हुए कहा, “ये लोग सेक्स कर रहे हैं।”

वो बोला, “सेक्स क्या होता है?” मैंने समझाया, “सेक्स उसे कहते हैं जब एक लड़का अपनी लंड को लड़की की चूत में डालता है। बस, इसे ही सेक्स कहते हैं।” वो बोला, “लेकिन वो ऐसा क्यों कर रहे हैं?” मैंने कहा, “ऐसा करने से लड़की को मजा आता है।” वो हैरान होकर बोला, “क्या दीदी?” मैंने कहा, “हाँ।”

उसने मासूमियत से पूछा, “क्या मैं आपके साथ भी सेक्स कर सकता हूँ?” मैंने शरारत से कहा, “हाँ, क्यों नहीं।” वो बोला, “दीदी, मुझे भी ऐसा करना है, अगर आपको ठीक लगे तो।” मैंने कहा, “ठीक है, लेकिन याद रख, किसी को बताना नहीं।” वो बोला, “दीदी, मैं किसी को नहीं बताऊँगा। आप टेंशन मत लो।”

मैंने कहा, “तो फिर ठीक है, तू मेरे साथ सेक्स कर सकता है।” वो बोला, “दीदी, पहले मुझे क्या करना होगा?” मैंने उसे 69 की पोजीशन में मेरे ऊपर लेटने को कहा। वो मेरे ऊपर लेट गया। मैंने कहा, “बबलू, अब तू मेरी चूत चाट, और मैं तेरा लंड चाटती हूँ।”

वो मेरी चूत चाटने लगा, और मैं उसका लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। थोड़ी देर में वो गर्म हो गया, और उसका लंड एकदम सख्त हो गया। मैंने कहा, “बबलू, तू मेरी टाँगों के बीच बैठ जा, और जैसा मैं कहती हूँ, वैसा कर।” वो बोला, “ठीक है दीदी।”

वो मेरी टाँगों के बीच बैठ गया। मैंने कहा, “अब धीरे से अपना लंड मेरी चूत में डाल और अंदर-बाहर कर। लेकिन ध्यान रख, पूरा बाहर मत निकालना। जैसा तूने वीडियो में देखा, वैसा ही कर।” उसने कहा, “ठीक है दीदी।”

उसने धीरे से अपना लंड मेरी चूत में डाला और अंदर धकेलने लगा। मैंने पहले कई बार अपनी चूत में गाजर, ककड़ी, मूली डाली थी, इसलिए मुझे ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। लेकिन मजा बहुत आ रहा था। मैंने कहा, “बबलू, अब थोड़ा और तेज कर।”

वो थोड़ा तेज हो गया और मुझे चोदने लगा। मैं सिसकारियाँ ले रही थी, “आह्ह… बबलू… और तेज…” मैंने कहा, “अब तू एकदम तेज अंदर-बाहर कर अपने लंड को मेरी चूत में।” वो जोर-जोर से धक्के मारने लगा। वो ऐसे ही 5 मिनट तक करता रहा। मैंने उसे रुकने को कहा।

मैं डॉगी स्टाइल में आ गई और बोली, “अब तू मेरी चूत में एक ही झटके में अपना लंड घुसा दे।” उसने वैसा ही किया। उसने एक जोरदार धक्का मारा, और उसका पूरा लंड मेरी चूत में चला गया। मेरे मुँह से “आह्ह…” निकल गया। मैंने कहा, “बबलू, अब जोर-जोर से कर।”

मैं सिसकारने लगी, “आह्ह… उह्ह… अब रुक मत, और जोर से चोद मुझे। बबलू, आज मेरी चूत को चोद-चोदकर फाड़ दे।” उसका लंड किसी ड्रिल मशीन की तरह मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। तभी मेरा पानी निकलने वाला था। मैंने कहा, “बबलू, मेरा जूस निकलने वाला है।”

वो बोला, “दीदी, मेरा भी निकलने वाला है।” मैंने कहा, “अपना सारा जूस मेरी चूत में ही निकाल दे। मेरी चूत को अपने माल से भर दे।” वो और जोर से धक्के मारने लगा और झड़ गया। वो बुरी तरह थक गया और मेरे ऊपर ही गिर पड़ा। कुछ देर बाद उसका लंड सिकुड़कर मेरी चूत से बाहर निकल गया।

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मेरी चूत से उसका माल बाहर बहने लगा। मैंने उसे अपने हाथ में लिया और सारा पी गई। मैंने कहा, “बबलू, नीचे हो जा।” वो नीचे लेट गया, लेकिन उसकी आँखें अभी भी बंद थीं। मैंने उसके होंठों पर चूमना शुरू किया। वो थकान के मारे सो गया। मैं भी उसके बगल में सो गई।

सुबह जब मैं उठी, मैं एकदम फ्रेश फील कर रही थी। मैंने बबलू को जगाया और कहा, “चल बबलू, अब नहाते हैं।” हम दोनों बाथरूम में गए। मैंने उसे नहलाना शुरू किया। मैंने पूछा, “रात को मजा आया था?” वो बोला, “हाँ दीदी, बहुत मजा आया।”

मैंने शरारत से कहा, “तुझे इससे भी ज्यादा मजा आएगा, अगर तू अपना लंड मेरी गांड में डाले।” वो उत्साह से बोला, “क्या दीदी, सच में? मुझे और ज्यादा मजा चाहिए। क्या मैं आपकी गांड मार सकता हूँ?” मैंने हँसते हुए कहा, “ये सब तेरा ही तो है। तू जब चाहे, जो मर्जी कर सकता है।”

वो बोला, “दीदी, क्या मैं अभी आपके साथ कर सकता हूँ?” मैंने अपनी गांड खोलकर उसके सामने झुक गई और कहा, “लंड पर थोड़ा साबुन लगा ले, और फिर मेरी गांड में डाल दे।” उसने वैसा ही किया। उसने धीरे-धीरे अपना लंड मेरी गांड में डाला। मुझे बहुत दर्द हो रहा था। मैंने कहा, “बबलू, आराम से कर, मुझे बहुत दर्द हो रहा है।”

वो धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। जब मुझे मजा आने लगा, मैंने कहा, “बबलू, अब थोड़ा जोर लगा।” उसने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। मेरे मुँह से “आह्ह… उह्ह…” की आवाजें निकलने लगीं। वो बिंदास होकर जोर-जोर से मेरी गांड मार रहा था, और मैं जन्नत के मजे ले रही थी।

वो बोला, “दीदी, मेरा निकलने वाला है। कहाँ निकालूँ?” मैंने कहा, “मेरे मुँह में निकाल।” उसने अपना लंड मेरी गांड से निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया। मैंने उसका सारा माल पी लिया और उसके लंड को चाट-चाटकर साफ कर दिया।

अब ये सब हमारा रोज का काम हो गया था। वो मुझे दिन में दो बार चोदता था। लेकिन इसी बीच मेरी शादी हो गई, और मैं अपने ससुराल चली गई। पहले महीने तो मेरे पति ने मुझे जमकर चोदा, लेकिन एक महीने बाद वो हफ्ते में बस 2-3 बार ही मुझे चोदते थे। उनका लंड सिर्फ 4 इंच का था, और वो बहुत जल्दी झड़ जाते थे। इसलिए मैं अपनी चूत को पोर्न वीडियो देखकर ही शांत करती थी।

ससुराल में एक साल से ज्यादा हो गया था। मुझे अपने भाई का लंड बहुत याद आता था। मैंने अपनी सास से कहा, “अम्मी, क्या मैं कुछ दिनों के लिए अपने घर जा सकती हूँ?” सास बोलीं, “क्यों बहू, हमारे प्यार में कोई कमी रह गई थी जो तुझे मायके की याद आ रही है?” मैंने कहा, “नहीं अम्मी, ऐसी बात नहीं है। दरअसल, मुझे मम्मी, बबलू और अब्बू की बहुत याद आ रही है। मैं एक महीने के लिए अपने घर जाना चाहती हूँ। प्लीज, मुझे जाने दो।”

कुछ देर सोचने के बाद सास मान गईं और बोलीं, “ठीक है बेटी, जा। लेकिन याद रख, सिर्फ एक महीने के लिए।” मैं बहुत खुश हो गई और उन्हें गले लगाकर बोली, “आई लव यू, अम्मी।” उन्होंने हँसते हुए कहा, “देखो तो, मायके के नाम से ये लड़की कितनी खुश हो रही है। मैं तेरे पति से कहकर कल की तेरी टिकट करवा देती हूँ।”

शाम को मेरे पति मेरे मायके जाने की टिकट लेकर आए। मैं पूरी रात सो नहीं पाई, ये सोचकर कि कल मैं अपने भाई से फिर चुदवाऊँगी। मैं रात भर बबलू के बारे में सोचती रही। सुबह होने वाली थी, तो मैं उठकर नहा ली और अपना बैग तैयार करने लगी। सास ने कहा, “तुझे तो दोपहर में जाना है, और तू अभी से तैयार होने लगी? तू कितनी एक्साइटेड है अपने मायके जाने के लिए। तू अपना काम कर, मैं आज सबके लिए खाना बनाती हूँ।”

मेरे पति उठे और खाना खाने बैठ गए। उन्होंने मुझे खाने के लिए कहा, लेकिन मैंने मना कर दिया, “जी, मुझे भूख नहीं है।” पति बोले, “देखो अम्मी, ये अपनी मम्मी के घर जाने के लिए कितनी बेचैन हो रही है। मैंने खाना खाने को कहा, तो मना कर रही है।” सास बोलीं, “बेटा, थोड़ा तो खा ले।” मैंने कहा, “आज मन नहीं है खाना खाने का।”

सास ने मुझे जबरदस्ती खाना खिलाया। मैंने थोड़ा-सा खाया और पति से बोली, “चलो, अब जल्दी करो, वरना मेरी बस निकल जाएगी।” पति बोले, “थोड़ा सब्र तो रखो, मुझे खाना तो खाने दे। अभी 11 बजे हैं, और तेरी बस 1 बजे है। बस स्टैंड जाने में सिर्फ 10 मिनट लगते हैं।” मैंने कहा, “जल्दी-जल्दी खाओ ना।”

सास हँसते हुए बोलीं, “बेटा, इसे पहले छोड़कर आ, फिर खाना खा लेना। वरना ये तुझे खाना भी नहीं खाने देगी।” पति बोले, “अम्मी, आपने ही इसे सिर पर चढ़ा रखा है, इसलिए इतना नाटक कर रही है।” सास ने डाँटते हुए कहा, “कुछ मत बोल मेरी बेटी को। वो पहली बार अपने मायके जा रही है। हँसी-खुशी छोड़कर आ जा।”

पति उठे और बोले, “आलिया मेम, चलो अपने मायके।” मैं भागकर बैग लाई और फटाक से कार में बैठ गई। पति बोले, “अगर तू इतनी हड़बड़ी करेगी, तो मैं तुझे जाने नहीं दूँगा।” मैंने कहा, “सॉरी-सॉरी, प्लीज अब चलो ना। आप टाइम पास करने लग गए हो।” वो मेरी बात नहीं मान रहे थे, बस मुझे सता रहे थे।

मैंने कहा, “प्लीज जी, अब चलो, वरना बस निकल जाएगी।” वो बोले, “निकल जाने दे, तब तो और अच्छा होगा।” ये सुनकर मैं रोने लगी। पति बोले, “क्या हुआ, क्यों रो रही है आलिया?” वो हँसने लगे और बोले, “पागल, रो मत। मैं मजाक कर रहा था। चल, अपने आँसू पोंछ ले, वरना मैं ड्राइव नहीं करूँगा।”

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मैंने आँसू पोंछे और खुश होकर बैठ गई। पति ने स्माइल दी और बोले, “आलिया, तू रोते हुए बहुत अच्छी लगती है। प्लीज एक बार और रो ना।” मैं बस में बैठ गई और अपने घर की ओर निकल पड़ी। रात 10 बजे मैं घर पहुँची। मम्मी ने दरवाजा खोला और बोलीं, “आजा मेरी बच्ची, बहुत दिनों बाद घर आई है।”

हम हॉल में बैठकर बातें करने लगे। आधे घंटे बाद मैंने पूछा, “मम्मी, बबलू कहाँ है? वो दिख नहीं रहा।” मम्मी बोलीं, “बेटा, वो पिकनिक पर गया है। 2 दिन बाद आएगा।” ये सुनकर मेरा मूड खराब हो गया। हमने खाना खाया, और मैं अपने कमरे में चली गई। मैं सोने की कोशिश करने लगी, लेकिन नींद नहीं आई।

रात के 1 बजे मैं किचन में गई और दो केले ले आई। मैंने सारे कपड़े उतारे, एक केले पर तेल लगाया और अपनी चूत में डाल लिया। दूसरा केला मैंने अपनी गांड में डाला और सो गई। सुबह उठी तो दोनों केले बाहर निकल चुके थे। मैं नहाने चली गई।

वो दिन मैंने बहुत मुश्किल से गुजारा। आज बबलू आने वाला था, तो मैं बहुत खुश थी। वो दोपहर 12 बजे तक आने वाला था। मैंने आज खूब सज-संवरकर उसका इंतजार किया, जैसे आज मेरी सुहागरात हो। जैसे ही डोरबेल बजी, मैं भागकर दरवाजा खोला। बबलू था। मैंने उसे जोर से गले लगाया। मम्मी बोलीं, “देखो तो, इन भाई-बहन में कितना प्यार है।”

मैंने कहा, “मम्मी, हम दोनों कमरे में हैं। कुछ बातें कर रहे हैं।” मम्मी बोलीं, “खाना तो खा लो।” बबलू बोला, “मम्मी, मैंने बाहर खा लिया था।” मैंने कहा, “और मम्मी, मैं बाद में खा लूँगी।”

मैंने बबलू का हाथ पकड़ा और उसे कमरे में ले गई। मैंने दरवाजा लॉक किया और कहा, “चल, अब और मत तड़पा अपनी दीदी को। जल्दी से मुझे अपना जूस पिला दे।” वो बोला, “दीदी, मैं फ्रेश होकर आता हूँ।” मैंने उसे अपनी ओर खींचा और उसके होंठों पर चूमते हुए कहा, “बाद में फ्रेश होना, पहले मुझे अपना जूस पिला।”

मैंने उसकी शर्ट के बटन खोले और उसकी पैंट उतार दी। मैं पागलों की तरह उसके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। वो बोला, “दीदी, आराम से, आपके दाँत चुभ रहे हैं। प्लीज धीरे करो।” लेकिन मैं कहाँ मानने वाली थी? मैं उसी तरह चूसती रही। 10 मिनट बाद उसने मेरा सिर कसकर पकड़ा, और उसके लंड से माल की पिचकारी मेरे मुँह में मारी। मैंने सारा माल गटक लिया और उसके लंड को चाट-चाटकर साफ कर दिया।

मैंने कहा, “अब जाकर मेरी दीदी का गला गीला हुआ।” फिर मैं उसे पागलों की तरह चूमने लगी। वो बोला, “थोड़ा आराम से दीदी, मैं कहीं जाने वाला नहीं हूँ। प्लीज थोड़ा धीरे करो।”

दोस्तो, आगे की कहानी में बताऊँगी कि कैसे मेरे भाई ने मम्मी को मुझे समझकर चोद दिया। मेरी इस मस्ती भरी कहानी के साथ बने रहिए। जल्दी ही अगले भाग में मिलते हैं!

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।

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