Nigro sex kahani नमस्ते दोस्तों, मैं पवन हूँ, और मेरी बीवी का नाम कविता है। मैं एक इंटरनेशनल कंपनी में इंजीनियर के तौर पर काम करता हूँ। मेरी उम्र 34 साल है, और मैं दिखने में ठीक-ठाक हूँ, 5 फीट 10 इंच लंबा, गोरा, और फिट। कविता 32 साल की है, एकदम गोरी, मस्त माल। उसकी फिगर 36-25-36 की है। उसकी चूचियाँ गोल, भारी, और रसीली हैं, कमर पतली, और गांड इतनी मस्त कि चलते वक्त लचकती है। हमारा लव मैरिज था, 26 नवंबर 2010 को हुआ। हमारा एक बेटा है, सात साल का। हमारा सेक्स लाइफ कमाल का है, और कविता को चुदाई में नए-नए एक्सपेरिमेंट पसंद हैं।
एक रात हम घर पर अकेले थे। मेरे मम्मी-पापा बेटे को लेकर गाँव गए थे। हमने बेडरूम में ब्लू फिल्म लगाई। कविता को ब्लू फिल्म देखते हुए चुदाई करना बहुत भाता है। उस रात फिल्म में एक इंडियन लड़की को एक निग्रो ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था। उसका लंड 11 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था। कविता की आँखें फट गईं, और वो गरम होकर बोली, “पवन, देख इसका लंड कितना लंबा-मोटा है! उस लड़की को तो जन्नत मिल रही होगी। कितनी लकी है!” मैंने हँसते हुए कहा, “कविता, अगर मैं तुझे ऐसा मज़ा दिलवाऊँ?” वो शरमाकर बोली, “अरे, कोई मर्द अपनी बीवी को ऐसा करने देगा? मज़ा तो वो खुद लेना चाहेगा।” मैंने कहा, “अगर मैं तुझे ऐसा मौका दूँ, तो पीछे मत हटना।” वो मुस्कुराई, और हम चुदाई में डूब गए। उसकी चूत इतनी गीली थी कि “पच-पच” की आवाज़ें गूँज रही थीं। “आह… पवन… और ज़ोर से…” वो सिसकारियाँ भर रही थी। मैंने देखा कि वो उस निग्रो के लंड के बारे में सोचकर और गरम हो रही थी।
मेरे दिमाग में प्लान बनने लगा। मेरे ऑफिस में साउथ अफ्रीका से एक प्रोजेक्ट चल रहा था। कई इंजीनियर्स वहाँ से आए थे। मेरा दोस्त माइकल, 35 साल का, काला, लंबा, मज़बूत बदन वाला, उनमें से एक था। उसका शरीर जिम में घंटों पसीना बहाने वाला था। हमारी अच्छी दोस्ती थी, और हम अक्सर पार्टी करते थे। एक दिन माइकल ने कहा, “पवन, मेरा काम खत्म हुआ। अगले हफ्ते मैं साउथ अफ्रीका वापस जा रहा हूँ। लेकिन मैं एक इंडियन औरत के साथ रात बिताना चाहता हूँ। कोई कॉल गर्ल नहीं, ढंग की औरत। तेरे पास कोई जान-पहचान?” मैंने कविता की बात याद की और कहा, “मुझे चेक करना पड़ेगा। बताता हूँ।”
उसी रात, चुदाई के दौरान मैंने कविता से कहा, “तुझे उस निग्रो जैसे मज़बूत मर्द के साथ चुदाई का मौका मिल रहा है। माइकल, मेरा दोस्त, वैसा ही है। उसका लंड ताठने पर 11 इंच लंबा और 3 इंच मोटा। तुझे मज़ा आएगा। मैं इजाज़त देता हूँ।” कविता झिझकी, बोली, “नहीं पवन, ये ठीक नहीं।” मैंने कहा, “ये मौका बार-बार नहीं आएगा। गुरुवार तक मुझे माइकल को जवाब देना है। तू सुबह तक सोच ले।” वो चुप रही, और हम फिर चुदाई में खो गए। उसकी चूत से “पच-पच” की आवाज़ें और “आह… उह…” की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं।
बुधवार रात को चुदाई के बाद कविता मेरे सीने से लिपटकर बोली, “पवन, मैं माइकल के साथ सोने को तैयार हूँ। लेकिन दो शर्तें। पहली, तू मेरे साथ रहेगा। दूसरी, जब वो मुझे चोदेगा, तू सामने रहेगा।” मैंने कहा, “ठीक है, मैं माइकल से पूछकर बताता हूँ।” अगली सुबह ऑफिस में मैंने माइकल को बताया। उसने तुरंत कहा, “डन! मैं तैयार हूँ।” मैंने कविता को फोन करके बताया कि माइकल ने शर्तें मान ली हैं।
गुरुवार रात कविता ने अपनी चूत को क्लीन शेव किया। उसने पूछा, “पवन, माइकल को क्या पसंद आएगा?” मैंने कहा, “वो चाहता है तू साड़ी पहनकर आए। कल शाम 7 बजे हमें कोरेगाँव पार्क में उसके फ्लैट पर जाना है।” कविता मुस्कुराई, लेकिन उसकी आँखों में नर्वसनेस और उत्साह दोनों थे।
शुक्रवार शाम कविता ने नहाकर बॉटल ग्रीन साड़ी पहनी। साड़ी में उसकी चूचियाँ और गांड उभरकर दिख रही थीं। उसने हल्का मेकअप, परफ्यूम, और लाल लिपस्टिक लगाई। हम 7:30 बजे माइकल के फ्लैट पर पहुँचे। माइकल ने दरवाजा खोला, सिर्फ़ हाफ पैंट में था। उसका काला, मज़बूत शरीर चमक रहा था। वो कविता को देखता रह गया। मैंने हल्का धक्का देकर कहा, “ये है तेरा फकिंग आइटम!” माइकल हँसा और हमें अंदर बुलाया।
माइकल ने स्नैक्स दिए, फिर ड्रिंक्स लाया। मुझे कोक, कविता को 60% रम और 40% कोक का कॉकटेल, और खुद के लिए रम। उसने कहा, “ये हमारे यहाँ का स्पेशल ड्रिंक।” कविता मेरे बगल में थी, माइकल सामने। वो कविता को घूर रहा था। उसका लंड पैंट में तन गया था, और शेप साफ दिख रही थी। कविता ने उसका लंड देखा, और उसकी साँसें तेज़ हो गईं। उसने कॉकटेल जल्दी-जल्दी पी लिया। ड्रिंक का असर हुआ, और वो नशे में हल्का डोलने लगी। मैंने माइकल को इशारा किया, “संभाल अपने फकिंग आइटम को।” मैं साइड में बैठ गया।
माइकल कविता के पास आया और उसे बाहों में लिया। उसने कविता के गुलाबी होंठों पर अपने काले, मोटे होंठ रखे और चूमने लगा। कविता की सिसकारियाँ निकलीं, “उम्म… आह…” माइकल ने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा, धीरे-धीरे साड़ी उतारी। कविता का पेटीकोट और ब्लाउज़ दिखने लगा। उसने ब्लाउज़ खोला, फिर ब्रा उतारी। कविता की चूचियाँ मस्त, गोल, और भारी थीं। माइकल ने कहा, “व्हाट ए ब्यूटी!” उसने एक चूची मुँह में ली और चूसने लगा, दूसरी को अपने राकट हथेली से दबाने लगा। कविता सिसकारी, “आह… माइकल… उह…” उसने कविता की पैंटी में हाथ डाला और चूत कुरेदने लगा। कविता की चूत गीली हो चुकी थी। वो बोली, “आह… और करो… मजा आ रहा है…”
माइकल ने कविता की पैंटी उतारी। कविता ने भी माइकल की पैंट खींची और उसका 11 इंच का काला, मोटा लंड बाहर निकाला। वो देखकर दंग रह गई, बोली, “इतना बड़ा… ओह…” उसने लंड को सहलाया, फिर मुँह में लिया। “उम्म… म्म…” वो चूसने लगी। माइकल की सिसकारियाँ निकलीं, “ओह कविता… चूस… और ज़ोर से…” कविता ने लंड को गले तक लिया, और “ग्लप-ग्लप” की आवाज़ें कमरे में गूँजी। माइकल ने कविता को सोफे पर लिटाया और उसकी गुलाबी चूत चाटने लगा। कविता की सिसकारियाँ तेज़ हुईं, “आह… माइकल… और चाटो… ओह…” उसकी चूत से रस टपक रहा था।
माइकल ने कविता को बेडरूम में ले जाकर बेड पर लिटाया। उसने मसाज ऑयल लिया और कविता के पूरे शरीर पर मालिश की। उसकी चूचियाँ, पेट, जाँघें, और चूत को तेल से चमकाया। कविता सिसकारी, “आह… कितना अच्छा लग रहा है…” माइकल ने उसकी गांड के छेद पर भी तेल लगाया, जोर-जोर से मसाज की। कविता को समझ नहीं आया कि वो इतना ध्यान क्यों दे रहा है, लेकिन वो मजे में थी।
माइकल ने कविता को पलटा, उसके पैर ऊपर किए, और अपने काले, मोटे लंड को उसकी चूत पर रखा। उसने एक जोरदार धक्का मारा। “आह… उई… माइकल…” कविता चीखी। उसका आधा लंड चूत में घुस गया। माइकल ने फिर जोर लगाया, और पूरा 11 इंच का लंड चूत में गडप हो गया। “पच-पच” की आवाज़ें शुरू हुईं। कविता चिल्लाई, “आह… कितना बड़ा है… फाड़ दो मेरी चूत…” माइकल ने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। कविता की चूचियाँ उछल रही थीं। वो बोली, “और ज़ोर से… चोदो मुझे… आह…” माइकल ने एक चूची दबाई, दूसरी को चूसा, और धक्के मारता रहा। आधा घंटा ये चुदाई चली। कविता की चूत रस से लबालब थी।
माइकल ने कविता को कुत्तिया बनाया। उसने उसकी गांड के छेद पर फिर तेल लगाया, अपने लंड पर भी। उसने लंड का टोप्पा गांड पर रखा और एक दमदार धक्का मारा। “आउच… माइकल… धीरे…” कविता चीखी। उसका लंड गांड में गडप हो गया। माइकल ने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। कविता की सिसकारियाँ, “आह… उह… कितना मोटा है…” माइकल बोला, “तेरी गांड कितनी टाइट है… मजा आ रहा है…” बीस मिनट तक उसने कविता की गांड मारी। “पट-पट” की आवाज़ें गूँज रही थीं।
अंत में माइकल ने अपना लंड कविता के मुँह में डाला और वीर्य छोड़ा। कविता ने सारा वीर्य पिया, फिर लंड को चाटकर साफ किया। दोनों थककर बेड पर नंगे पड़े रहे। रातभर माइकल ने कविता को चार बार चोदा। सुबह हम माइकल को बाय करके घर लौट आए।
आपको ये कहानी कैसी लगी? क्या कविता को फिर से माइकल से चुदवाना चाहिए? कमेंट में बताएँ।