मम्मी चूदी ड्राइवर से

mummy ki chudai dekha ये उन दिनों की बात है जब मैं, राजीव बरनवाल बारहवीं कक्षा में पढ़ता था, उम्र थी मेरी 18 साल। हम लोग एक छोटे से रो हाउस में रहते थे, जो शहर के शांत इलाके में था। मेरे पिताजी एक शुगर मिल में काम करते थे और अक्सर देर रात तक घर लौटते थे। मेरी मम्मी, शीला, 38 साल की थीं, लेकिन उनकी खूबसूरती और बदन ऐसा था कि कोई भी उन्हें देखकर चौंक जाए। गोरा रंग, भरे हुए स्तन, और कूल्हों का वो उभार जो उनकी साड़ी में साफ दिखता था। मैंने कई बार मम्मी को कपड़े बदलते देखा था, जब वो अपने कमरे में दरवाजा खुला छोड़ देती थीं। उनकी गोल-मटोल चूचियाँ और पतली कमर मुझे हमेशा उलझन में डाल देती थी।

एक दिन मैंने पिताजी की अलमारी में कंडोम का पैकेट देखा। मैं समझ गया कि आज रात कुछ होने वाला है। मेरे मन में उत्सुकता थी, लेकिन साथ ही थोड़ा डर भी। रात के 11 बजे, जब हम अपने-अपने कमरे में चले गए, मैंने सोने का नाटक किया। मेरे कमरे का दरवाजा मम्मी-पिताजी के बेडरूम से सटा था, और मैंने जानबूझकर दरवाजा थोड़ा खुला छोड़ दिया। आधे घंटे बाद, मैं चुपके से उठा और उनके बेडरूम की ओर गया। दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं था, और मैंने हल्के से झाँका।

अंदर का नजारा मेरे होश उड़ा देने वाला था। मम्मी बिस्तर पर पूरी तरह नंगी लेटी थीं, उनकी गोरी चूचियाँ चाँदनी में चमक रही थीं। पिताजी उनके ऊपर थे, अपने लंड पर कंडोम चढ़ा रहे थे। उन्होंने मम्मी की चूत पर तेल की मालिश शुरू की, और मम्मी की साँसें तेज हो गईं। “अजी, जल्दी करो ना,” मम्मी ने धीमी आवाज में कहा। पिताजी ने हल्का सा धक्का मारा, और मम्मी की मादक सिसकारी, “आह्ह…” कमरे में गूँज गई। लेकिन दो मिनट बाद ही पिताजी झड़ गए। मम्मी का चेहरा बुझा-बुझा सा हो गया। “क्या हुआ? हर बार यही होता है,” मम्मी ने नाराजगी भरे लहजे में कहा। पिताजी ने बिना जवाब दिए करवट बदल ली और सोने की तैयारी करने लगे।

मम्मी बिस्तर पर अधूरी वासना के साथ लेटी रहीं। मैंने देखा कि वो रात भर बेचैन थीं। एक बार तो उन्होंने अपनी चूत में गाजर डालकर खुद को शांत करने की कोशिश की। उनकी सिसकारियाँ, “उम्म… आह्ह…” मेरे कानों में गूँज रही थीं। मैं चुपके से अपने कमरे में लौट गया, लेकिन नींद नहीं आई।

हमारे पड़ोस में एक घर था, जिसके बेडरूम की खिड़की हमारी किचन की खिड़की के ठीक सामने थी। एक दोपहर, मैंने देखा कि उस बेडरूम में ब्लू फिल्म चल रही थी। तस्वीर साफ नहीं थी, लेकिन औरत की सिसकारियाँ और पुरुष की हरकतें साफ समझ आ रही थीं। मैंने जल्दी से किचन की खिड़की का पर्दा डाल दिया, क्योंकि मम्मी किचन में खाना बना रही थीं। दोपहर के 12:30 बज रहे थे, और मम्मी रोटी बेल रही थीं। लेकिन उनका ध्यान बार-बार सामने वाले घर की खिड़की पर जा रहा था। मैंने गौर किया कि वो बेलन को अपनी चूत पर रगड़ रही थीं, जैसे उनकी प्यास फिर से जाग उठी हो। मैं समझ गया कि मम्मी की चूत अब बेकाबू हो रही थी।

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बाद में मुझे पता चला कि पड़ोस वाले घर के मालिक गाँव गए थे, और उन्होंने अपने ड्राइवर, रमेश, को घर में रुकने की इजाजत दी थी। रमेश 35 साल का था, काला-कलूटा, मगर मजबूत कद-काठी वाला। वो दिन-रात उसी घर में रहता था। एक दिन शाम को, जब मम्मी चाय बना रही थीं, मैंने देखा कि रमेश अपने बेडरूम की बालकनी में सिर्फ़ तौलिया लपेटे कपड़े सुखाने आया। वो बार-बार तौलिया खोलता और बाँधता। जब उसने तौलिया खोला, तो मैंने देखा कि उसका लंड करीब 12 इंच लंबा और 3.5 इंच मोटा था, जो हवा में लटक रहा था। मम्मी की नजर भी उसी पर पड़ी, और वो एकदम स्तब्ध रह गईं। उनकी आँखें उस विशाल लंड पर टिक गईं। मैंने फ्रिज का दरवाजा खोला, जिसकी आवाज से मम्मी ने जल्दी से खिड़की का पर्दा सरका दिया। मैं अपने कमरे में चला गया, लेकिन 5 मिनट बाद चुपके से देखा तो मम्मी ने फिर से पर्दा हटा दिया था। मैं समझ गया कि मम्मी अब रमेश के उस 12 इंच के लंड के बारे में सोच रही थीं।

कुछ दिन बाद, एक शनिवार को, जब मैं कॉलेज से लौट रहा था, मैंने देखा कि रमेश हमारे घर के दरवाजे पर खड़ा था और मम्मी से बात कर रहा था। मम्मी मुस्कुराते हुए उससे बात कर रही थीं, जैसे कोई पुराना दोस्त हो। मैं घर पहुँचा और मम्मी से पूछा, “वो बाहर क्या बात कर रहा था?” मम्मी ने टालते हुए कहा, “कुछ नहीं, बस ऐसे ही।” मैं समझ गया कि रमेश ने मम्मी को धीरे-धीरे अपनी बातों में फँसा लिया था।

उसी शाम पिताजी का फोन आया। मम्मी ने बात की और बताया कि पिताजी को कंपनी ने रात के लिए रुकने को कहा है। मैं खुश हो गया, क्योंकि इसका मतलब था कि मैं रात को ब्लू फिल्म देख सकता था। खाना खाने के बाद, मम्मी और मैं अपने-अपने कमरे में चले गए। मैंने रात को ब्लू फिल्म लगाई, अपने कपड़े उतारे, और तेल लेकर अपने लंड की मालिश शुरू की। फिल्म देखते हुए मेरे दिमाग में रमेश का 12 इंच का लंड घूम रहा था। थोड़ी देर बाद, मैंने सोचा कि पहले पेशाब कर लूँ, फिर मजे को पूरा करूँगा।

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लेकिन जब मैं बाथरूम के लिए बाहर निकला, तो मम्मी के बेडरूम से उनकी और किसी मर्द की आवाज सुनाई दी। मैं चुपके से उनके दरवाजे की ओर गया। दरवाजा थोड़ा खुला था, और अंदर का नजारा देखकर मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। रमेश मम्मी के बेडरूम में था। मम्मी ने अपनी साड़ी और ब्लाउज पहले ही उतार दिया था, और अब वो सिर्फ़ पेटीकोट में थीं। रमेश उनकी चूचियों को जोर-जोर से मसल रहा था। मम्मी की साँसें तेज थीं, और वो सिसकार रही थीं, “आह्ह… रमेश, धीरे… उफ्फ…”

रमेश ने मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खींचा, और वो नीचे गिर गया। मम्मी ने पैंटी नहीं पहनी थी। उनकी गुलाबी चूत, जो हल्के-हल्के बालों से सजी थी, मेरे सामने थी। रमेश ने अपनी लुंगी उतारी, और उसका 12 इंच का लंड बाहर निकला। मम्मी ने उसे देखकर सिहर उठीं, उनकी आँखों में डर और चाहत का मिश्रण था। “रमेश, इतना बड़ा… मैं… मैं नहीं ले पाऊँगी,” मम्मी ने हकलाते हुए कहा। रमेश ने हँसते हुए कहा, “शीला जी, बस एक बार ट्राई करो, मजा आएगा।”

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रमेश ने मम्मी को बिस्तर पर लिटाया और उनकी टाँगें चौड़ी कीं। उसने अपनी उंगलियाँ मम्मी की चूत पर फिराईं, जो पहले से गीली थी। मम्मी की सिसकारी निकली, “उम्म… आह्ह… रमेश, ये क्या कर रहे हो?” रमेश ने धीरे से अपनी उंगली अंदर डाली, और मम्मी की कमर उछल गई। “आह्ह… धीरे… उफ्फ…” मम्मी की आवाज में वासना और बेचैनी थी। रमेश ने उनकी चूचियों को चूसना शुरू किया, उनके निप्पल्स को दाँतों से हल्के से काटा। मम्मी की सिसकारियाँ और तेज हो गईं, “आह्ह… रमेश, और जोर से… उफ्फ…”

रमेश ने अब अपने लंड को मम्मी की चूत पर रगड़ा। मम्मी की साँसें रुक सी गईं। “रमेश, धीरे डालना… मैं मर जाऊँगी,” मम्मी ने काँपते हुए कहा। रमेश ने हल्का सा धक्का मारा, और मम्मी चीख पड़ीं, “आआह्ह्ह… रुक जाओ… बहुत दर्द हो रहा है!” लेकिन रमेश नहीं रुका। उसने मम्मी की चूचियों को मसलते हुए एक और जोरदार धक्का मारा। मम्मी की चीख पूरे कमरे में गूँज गई, “आआह्ह्ह… रमेश, फट जाएगी मेरी!”

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रमेश अब धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ मम्मी की चूत से छप-छप की आवाज आ रही थी। उनकी चूत इतनी गीली थी कि पानी लंबी-लंबी बूँदों में बिस्तर पर टपक रहा था। मम्मी की सिसकारियाँ अब सिसकियों में बदल गई थीं, “आह्ह… रमेश, और जोर से… उफ्फ… चोदो मुझे…” रमेश हर 5-6 छोटे धक्कों के बाद एक जोरदार धक्का मारता, जिससे मम्मी का पूरा शरीर काँप जाता। “उम्म… आह्ह… रमेश, तुम्हारा लंड मेरी चूत को फाड़ रहा है…” मम्मी की आवाज में अब शर्म की जगह सिर्फ़ वासना थी।

लगभग 45 मिनट तक रमेश मम्मी को चोदता रहा। छप-छप-छप की आवाज कमरे में गूँज रही थी। मम्मी बार-बार झड़ रही थीं, उनकी चूत से पानी की धार बह रही थी। “आह्ह… रमेश, बस करो… मैं थक गई… उफ्फ…” मम्मी की आवाज कमजोर पड़ रही थी, लेकिन रमेश का लंड अभी भी तना हुआ था। आखिरकार, रमेश ने एक जोरदार धक्का मारा और अपना सारा माल मम्मी की चूत में उड़ेल दिया। मम्मी की चीख, “आआह्ह्ह…” कमरे में गूँज गई।

उसके बाद मम्मी ने अपनी टाँगें फैलाकर लेट गईं। उनकी चूदी हुई चूत लाल और सूजी हुई थी, जैसे किसी ने उसे मोटे मूसल से रौंद दिया हो। रमेश ने मम्मी के माथे पर चूमा और कहा, “शीला जी, मजा आया?” मम्मी ने थकी हुई मुस्कान के साथ कहा, “हाँ… लेकिन अब बस, मैं टूट गई हूँ।”

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