चुदासी आंटी को चोदा

हेलो दोस्तों, मेरा नाम साहिल है, मैं दिल्ली से हूँ और मेरी उम्र 24 साल है। मैं एक जवान, फिट और स्मार्ट लड़का हूँ, 5 फीट 10 इंच का कद, गेहुंआ रंग और ठीक-ठाक बॉडी। मैं ऑटोकैड ऑपरेटर के तौर पर एक कंपनी में काम करता हूँ। आज मैं आपको अपनी ज़िंदगी का एक ऐसा हादसा सुनाने जा रहा हूँ, जो हाल ही में मेरे साथ हुआ। ये कहानी एक ऐसी औरत के साथ मेरे अनुभव की है, जो मेरे लिए एकदम अनजान थी, लेकिन रात के कुछ पल हमारे बीच ऐसे बने कि ज़िंदगी बदल गई। तो चलिए, बिना वक्त ज़ाया किए, सीधे कहानी पर आता हूँ।

पिछले महीने की बात है, मैंने अपना फोन खो दिया था। दोस्तों ने सलाह दी कि ब्लैकबेरी कर्व लो, तो मैंने वही खरीदा। उस फोन में एक ग्रुप था, जिसका नाम था ‘झकास्स्स’। उस ग्रुप का एक गेट-टू-गेदर था, जो दिल्ली में एक रेस्तरां में रखा गया। उस दिन शनिवार की रात थी। कुल 23 लोग आए थे, और वहाँ मैं पहली बार कुलसुम (नाम बदला हुआ) से मिला। कुलसुम दिल्ली में ही रहती थी, उम्र करीब 32-34 साल, शादीशुदा, दो बच्चों की माँ, लेकिन उसका पति दुबई में रहता था। वो देखने में गज़ब की थी—गोरी, भरा हुआ बदन, 5 फीट 5 इंच का कद, और वो टाइट ब्लाउज़ और साड़ी में थी, जो उसके कर्व्स को और उभार रही थी। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो मुझे बाद में समझ आई।

पार्टी में खूब मज़ा हुआ। हमने खाना खाया, हँसी-मज़ाक किया, और रात के 10 बज गए। कुलसुम ने मुझसे कहा, “साहिल, रात हो गई है, हम दोनों साथ चलते हैं।” मैंने हामी भरी। हमने बांद्रा से ऑटो लिया और कुरला स्टेशन पहुँचे। वहाँ से ट्रेन पकड़ी और दिल्ली की ओर चल दिए। रास्ते में हमारी खूब बातें हुईं। कुलसुम ने बताया कि उसका पति दो साल से भारत नहीं आया, और वो अकेले ही बच्चों को संभालती है। मैंने भी बताया कि मैं सिंगल हूँ, कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।

कुलसुम ने मज़ाक में कहा, “झूठ मत बोलो, इतने स्मार्ट हो, और गर्लफ्रेंड नहीं? मैं नहीं मान सकती।”
मैंने हँसते हुए कहा, “साहिल बोल रहा हूँ, सच में!”
बातों-बातों में दिल्ली स्टेशन आ गया। हम प्लेटफॉर्म पर उतरे और ऑटो में बैठ गए। कुलसुम ने पूछा, “तुम कहाँ रहते हो?”
मैंने कहा, “कौसा। और आप?”
कुलसुम ने हँसते हुए कहा, “वो तो मैं नहीं बता सकती, लेकिन मेरी बिल्डिंग तक छोड़ दोगे? वहाँ कुत्ते बहुत हैं, और मुझे उनसे डर लगता है।”
मैंने कहा, “हाँ, क्यों नहीं!”

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हम ऑटो से उसकी बिल्डिंग पहुँचे। रात के करीब 11:30 बज रहे थे। कुलसुम ने कहा, “चलो, ऊपर आ जाओ। फ्रेश होकर चले जाना। बच्चे भी नहीं हैं, अपनी नानी के घर गए हैं।” ये सुनकर मेरे दिमाग में बिजली सी कौंध गई। मैंने सोचा, आज तो ये चुदने वाली है, इसका पूरा मज़ा लूँगा। मैंने कहा, “ठीक है, चलो।”

हम ऊपर पहुँचे। उसका फ्लैट छोटा लेकिन सजा हुआ था। कुलसुम ने कहा, “बताओ, अपने बारे में कुछ और।”
मैंने मज़ाक में कहा, “कुछ खास नहीं, बस आप के सामने ये बंदा हाज़िर है।” वो हँस पड़ी और बोली, “बड़े खुशमिजाज़ हो तुम!”
फिर उसने कहा, “रुको, मैं चेंज करके आती हूँ। और हाँ, तुम भी रात यहाँ रुक जाओ, सुबह चले जाना।”
मैंने मना किया, “नहीं, मैं चला जाऊँगा।”
वो ज़िद करने लगी, “अरे, रुक जाओ ना!”
मैंने कहा, “ठीक है।” उसने मुझे एक ट्रैक पैंट दी और कहा, “चेंज कर लो।”

मैं बाथरूम में गया। वहाँ एक पिंक पैंटी और व्हाइट ब्रा टँगी थी। उसे देखकर मेरा लंड तन गया। मैंने पैंटी को हाथ में लिया, सूँघा, और लंड हिलाने लगा। कुछ ही मिनट में मेरा माल निकल गया। मैं फ्रेश होकर बाहर आया। बाहर निकला तो कुलसुम को देखकर दंग रह गया। वो एक टाइट नाइटी में थी, जो उसके बदन से चिपकी हुई थी। उसकी गोल-मटोल गांड और भारी चूचियाँ साफ दिख रही थीं। मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया।

उसने मेरे लंड की तरफ देखा और हल्की सी स्माइल दी। मुझे थोड़ा शर्मिंदगी हुई, मैंने लंड को एडजस्ट करने की कोशिश की। उसने फिर देखा और मुस्कुराई। मैं समझ गया कि इसके दिल में भी आग लगी है। मैंने पूछा, “क्या मैं स्मोक कर सकता हूँ, अगर आपको बुरा न लगे?”
उसने कहा, “हाँ, क्यों नहीं! मैं भी एक पी लूँगी।”
मैं हैरान रह गया। उसने बताया, “मैं कभी-कभी पीती हूँ। मैं बांद्रा के फ्र. एग्नल्स कॉलेज से थी, वहाँ तो सब चलता था।”

हमने एक-एक सिगरेट पी और बेड पर लेट गए। थकान की वजह से मुझे नींद आ गई, लेकिन मेरी नींद हल्की थी। रात के करीब 2 बजे मेरी आँख खुली। कुलसुम गहरी नींद में सो रही थी। उसकी नाइटी का पहला बटन खुला था, और उसकी चूचियाँ आधी बाहर झाँक रही थीं। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी चूची पर रखा। कोई हलचल नहीं हुई। मैंने हल्के-हल्के उसकी चूची दबानी शुरू की। कुछ देर बाद उसने करवट बदली, और उसकी चूचियाँ मेरे सामने आ गईं।

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मैंने हिम्मत करके उसका दूसरा बटन खोला। अब उसकी चूचियाँ पूरी तरह दिख रही थीं। उसके निप्पल्स तन गए थे। मैं समझ गया कि वो जाग रही है, बस सोने का नाटक कर रही है। मैंने हिम्मत की और उसके निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा। वो हल्के से सिसकारी, “आह्ह…” उसका हाथ मेरे सिर पर आ गया और वो मेरे सिर को अपनी चूचियों पर दबाने लगी। मैंने उसकी नाइटी के बाकी बटन खोल दिए और उसकी चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा।

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“साहिल… आह्ह… कितना मज़ा आ रहा है,” उसने सिसकारी भरी। मैंने उसकी नाइटी को पूरी तरह उतार दिया। अब वो सिर्फ़ पैंटी में थी। मैंने उसके होंठों पर किस करना शुरू किया। उसने भी गज़ब का रिस्पॉन्स दिया। हमारी जीभें एक-दूसरे से मिल रही थीं। मैंने धीरे-धीरे उसकी पैंटी में हाथ डाला। उसकी चूत पूरी गीली थी। मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरू किया, और वो सिसकने लगी, “आह्ह… साहिल… और करो…”

मैंने उसकी पैंटी उतारी और उसकी चूत को चाटना शुरू किया। उसकी चूत से एक मादक ख़ुशबू आ रही थी। मैंने उसकी चूत के दाने को जीभ से छेड़ा, और वो पागल सी हो गई। “आह्ह… साहिल… उफ्फ… चूसो इसे… और ज़ोर से…” वो मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा रही थी। मैंने करीब 20 मिनट तक उसकी चूत चाटी। उसका पानी दो बार निकल चुका था।

फिर वो बोली, “साहिल, अब और मत तड़पाओ। चोद दो मुझे… जमकर चोदो… दो साल से प्यासी हूँ… मेरी आग बुझा दो।”
मैंने कहा, “पहले मेरा लंड चूसो।” वो थोड़ा हिचकिचाई, लेकिन फिर मान गई। उसने मेरी ट्रैक पैंट उतारी और मेरे लंड को हाथ में लिया। मेरा लंड करीब 6 इंच का है, मोटा और कड़क। उसने मेरे लंड के बालों को सहलाया और मुझे स्मूच करने लगी। मैं एक हाथ से उसकी चूचियाँ दबा रहा था और दूसरे से उसकी चूत मसल रहा था।

वो बोली, “साहिल, तुम्हारा लंड बड़ा नहीं है, मीडियम है। मुझे ऐसा ही चाहिए था, जो धीरे-धीरे मज़ा दे।” उसने मेरा लंड मुँह में लिया और चूसने लगी। मैं तो सातवें आसमान पर था। उसकी जीभ मेरे लंड के टोपे पर घूम रही थी। मैं झड़ने वाला था। मैंने कहा, “कुलसुम, मैं झड़ने वाला हूँ।” उसने मेरा लंड बाहर निकाला, लेकिन मैं झड़ा नहीं।

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वो बोली, “प्लीज़, जल्दी से चोदो मुझे!” मैंने उसकी नाइटी पूरी तरह उतार दी। अब वो मेरे सामने पूरी नंगी थी। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और स्मूच करने लगा। जैसे ही मैंने पहला झटका मारा, वो चीखी, “आह्ह… साहिल… धीरे… कई महीनों से चुदवाया नहीं है।” मैंने दूसरा झटका मारा, और मेरा लंड पूरा उसकी चूत में समा गया।

मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। उसकी चूत टाइट थी, और हर धक्के के साथ वो सिसक रही थी, “आह्ह… उफ्फ… और ज़ोर से… मज़ा आ रहा है…” मैंने स्पीड बढ़ा दी। उसकी चूचियाँ मेरे हर धक्के के साथ उछल रही थीं। “थप-थप-थप” की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। वो चिल्ला रही थी, “साहिल… और ज़ोर से… चोदो… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह…”

कुछ देर बाद मैं झड़ने वाला था। मैंने पूछा, “क्या करूँ?”
वो बोली, “अंदर ही डाल दो। टेंशन मत लो, मेरा ऑपरेशन हो चुका है।”
मैंने सारा माल उसकी चूत में डाल दिया। मैं उसके ऊपर ही लेट गया। हम दोनों पसीने से तर थे। थोड़ी देर बाद हमने फिर शुरू किया। मैंने वेसलीन लगाकर उसकी गांड भी मारी। वो दर्द से चीखी, लेकिन मज़ा भी ले रही थी। हमने बाथरूम में भी सेक्स किया, शावर के नीचे एक-दूसरे को चूमते और चोदते रहे।

पूरी रात हमने मज़े किए। सुबह जब मैं जाने लगा, कुलसुम ने कहा, “साहिल, ये रात मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत रात थी।”
मैंने कहा, “मेरे लिए भी।”

दोस्तों, आपको मेरी कहानी कैसी लगी? प्लीज़ मुझे बताएँ।

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