राजू की शादी हुई और पहली बार पूरे एक माह बाद अपनी पत्नी को अपने मामा के घर घुमाने के लिए वो उसे ट्रेन में बैठा कर सफर कर रहा था। उसकी पत्नी इतनी सुंदर, इतनी गोरी थी कि जो एक बार देख ले, उसे पाने के लिए तड़प जाए। और राजू पतला दुबला सिंगल हड्डी का था आदमी सोलह आने अच्छा। मगर उसकी जोड़ी जम नहीं रही थी। जब वो उसके साथ चलता तो उसे अलग निगाहों से सामना करना पड़ता। इसलिए उसकी लाइफ में कोई अहम परिवर्तन नहीं हुआ।
मगर क्या करे।
यात्रा शुरू हुई। ट्रेन खचाखच भरी थी। ले दे के एक सीट मिली और कभी वो बैठती तो कभी राजू। ले देकर 2 घंटे ही बीते थे। लोग सोने के लिए अपनी सीटें लगा कर कंबल आदि ले सोने लगे।
राजू को नींद सताने लगी तो उसे झपकी मारते देख पत्नी ने उसे बैठा दिया और खुद खड़ी हो गई।
और लोग चढ़े और धक्का मुक्की होने लगी। मेरी किस्मत अच्छी कि मैं उसके पीछे खड़ा हुआ था और खड़े खड़े मेरे पैरों और हाथों की हरकतें बढ़ने लगीं।
मुझे पीछे वाले ने धक्का मारा और मैं उससे चिपकने लगा। वो पहले तो आगे बढ़ गई मगर फिर पीछे होने लगी और मेरा पूरा बदन उससे टच होने लगा। मेरी और उसकी हाइट एक बराबर थी। धीरे धीरे मेरा बदन उससे चिपक गया। लंड टच होते ही कड़ा होने लगा। उसको इसका अहसास होने लगा था और मेरे लंड से बराबर उसकी गांड रगड़ना शुरू हो गई थी।
मैंने मौके का फायदा उठाया और पूरी मस्ती में उसे गर्म करने लगा। उसके कूल्हों को हल्के से दबाते हुए मैंने अपनी कमर आगे की। उसके नरम नितंबों में मेरा सख्त लंड और गहराई से रगड़ने लगा। साड़ी का पतला कपड़ा दोनों के बीच में दब गया था। मैंने अपनी सांसें उसके कान के पास छोड़ीं। उसने मुड़ कर मेरी ओर देखा।
मैंने कहा। क्या ठंड है और लोग इतने भर चुके हैं कि ठंड का अहसास नहीं हो रहा है।
वह फिर और पीछे सटने लगी। अब तो मैं उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा। उसकी पीठ की हड्डी से लेकर कमर तक मैंने हथेली फिराई। उसने अपना हाथ आगे संकल को पकड़ लिया।
हाथ के ऊपर होते ही उसकी चुची मेरे हाथ में आ गई। मैंने उंगलियों से उसके ब्लाउज के ऊपर से चुची के निप्पल को महसूस किया। वह सख्त हो चुका था। मैं ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चुची पर हाथ फेरने लगा। उसे धीरे-धीरे मसलते हुए मैंने अपनी कमर को आगे-पीछे किया।
वो मस्त होकर लंड में अपनी गांड की दरार में रगड़ने लगी।
रात काफी हो चुकी थी। सब नींद में सोने की ललक में थे। मैंने अपने पैर से उसके पैर को रगड़ा। उसने अपने पैर थोड़ा फैला दिए। लंड अब साड़ी के सहारे चूतड़ों में घुसने लगा। साड़ी का कपड़ा उसके नितंबों की दरार में दब गया। मेरा सख्त लंड उसके नरम चूतड़ों के बीच में रगड़ रहा था। वो गर्म आहें भरने लगी और हिलने लगी।
मैंने अपनी पूरी हथेली से ब्लाउज के ऊपर से उसके मम्मे दबाना शुरू कर दिए। उसके मम्मे मेरे हाथ में भर गए। मैंने उन्हें कसकर मसला। वो मस्त होकर अपने शरीर का बोझ मेरे ऊपर डाल चुकी थी। उसकी कमर मेरे लंड पर और जोर से दबने लगी।
मैं अब उसकी गांड में हाथ फेरने लगा। साड़ी के ऊपर से मैंने उसके नितंबों को दबाया और उन्हें अलग-अलग किया। वो कांपने लगी। कांपते हुए अपना एक हाथ पीछे कर दिया। मैंने अपना लंड निकाल कर उसके हाथ में थमा दिया। उसका हाथ गर्म था। वो उसे सहलाने लगी। उंगलियों से उसके सिरे को छूती हुई उसने ऊपर-नीचे किया।
थोड़ी देर बाद उसने मेरे लंड को जोर से दबा दिया और मुझसे अलग हो गई। मैंने देखा कि वो हिल हिल कर शांत हो चुकी थी। मैंने लंड अंदर किया और बाथरूम की ओर भागा।
थोड़ी देर बाद ऐसा लगा जैसे कोई सामने वाले टॉयलेट का दरवाजा खोल कर अंदर गया है।
मैं कुछ देर बाद बाहर निकला तो वो भी सामने वाले टॉयलेट से निकल रही थी। हम दोनों एक साथ निकले। वो अपनी निगाहें झुका कर मुस्कुराने लगी।
तभी ट्रेन रुकी और काफी सवारियां उतरीं। बहुत सीटें खाली हुईं तो उसे उसके पति के साथ जगह मिल गई। मुझे उसके सामने की सीट मिल चुकी थी।
अब फिर लोग सोने लगे।
मगर हम दोनों की नींद उड़ चुकी थी। वो मुझे देखे और मैं उसे। ऐसा लगता था वो कह रही हो कि एक बार ही सही चुदाई हो जाए।
मैंने देखा रात को 2.30 बज चुके थे। उसके पैर अकड़ रहे थे तो उसने अपने पैर सामने मेरी सीट पर फैला दिए।
मैंने अपनी शॉल निकाल कर अपनी टांगों पर डाल ली जिससे उसके पैरों का काफी हिस्सा शॉल से ढक गया। कुछ देर बाद वो अपने पैर से मेरी टांग को कुरेदने लगी और मैंने देखा कि उसने अपना चेहरा अपने पल्लू से ढक लिया।
मैंने अपनी पैंट की चेन खोल कर लंड बाहर निकाला। उसका एक पैर शॉल के अंदर अपनी दोनों टांगों के बीच में ले लिया। वो अपने पैर से मेरे लंड को सहलाने लगी। उसके पंजे मेरे लंड के सिरे पर धीरे-धीरे रगड़ रहे थे। मैंने अपनी सांसें रोकीं।
काफी देर तक मैं बर्दाश्त करता रहा मगर मैं गर्म होने लगा। फिर उठ कर बाथरूम गया।
जब मैं वापस आया तो उसे खिड़की के पास बैठा पाया। उसका पति मुंह के ऊपर कंबल डाले सो रहा था। मैं गया तो उसने थोड़ा खिसक कर मुझे अपने साथ जगह दे दी। मैंने अपनी शॉल को आधी ओढ़ कर आधी उसकी तरफ कर दी। उसने मेरी शॉल को अपने बदन पर ले लिया।
अब हम दोनों साथ साथ बैठे सफर करने लगे।
मैंने देखा कि वो मुझे ही देख रही थी। मैं थोड़ा खिसक गया उसकी तरफ और हाथ उसकी चुची पर ले गया।
यह क्या। उसका ब्लाउज खुला हुआ था और मस्त चौंसा आम की तरह फूली चुची टाइट थी। मैं उसकी चुची हाथ से पकड़ कर मसलने लगा और वो मस्त होकर खिड़की की तरफ देख रही थी।
मैंने अपनी चेन खोल कर लंड बाहर निकाल लिया और उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया। वो उसे ऊपर नीचे करने लगी।
कुछ समय बाद सवेरा होने लगा और सवारियों का आना जाना बढ़ गया और हम अब अलग अलग हो कर बैठ गए।
हमारा स्टेशन भी आ गया और हम अलग अलग होते गए। मैंने पलट कर कई बार देखा उसे। मुझे शायद उससे प्यार सा हो गया था।
मैं अपने किराए के कमरे में पहुंचा। अभी लेटा ही था कि मकान मालिक का छोटा बच्चा आया। उसने कुछ रुपये देते हुए कहा कि हमारे घर मेहमान आए हैं। पापा ने कहा है कि आप बाजार थोड़ा खाने पीने का सामान ला दो।
मैं एकदम उठ कर बाजार चला गया।
सामान लेकर वापस आया और दरवाजे से सामान पकड़ा कर अपने कमरे में आ गया।
थोड़ी देर में मैं पानी लेकर मुंह हाथ धोने के लिए बाथरूम में गया और जैसे ही बाहर आया तो सामने उसी को देख कर बहुत खुश हो गया। भगवान ने मेरे प्यार को इसी घर में भेज रखा था।
मैं उसे देख कर और वो मुझे देख कर दंग रह गई। हम कुछ ना बोले। अजनबी की तरह मिले ताकि किसी को भनक भी ना लगे।
तभी मामी ने मेरा और उसका परिचय करवाया। ये फैक्ट्री में काम करते हैं। बड़ा साहब है। हमारी छत पर जो कमरा है, उसमें रहते हैं।
और मुझे बताया कि उनका भांजा और उसकी दुल्हन आए हैं। ये दुल्हन है।
फिर मामी ने कहा। चलो बहू, कुछ नाश्ता कर लो। फिर मुझे इनका कमरा भी ठीक करना है।
मैं ऊपर अपने कमरे में आ गया। थोड़ी देर बाद देखा तो वो मेरे कमरे के बाहर आई। बोली। मैं आपका कमरा ठीक करने के लिए आई हूं।
मैंने हैरानी से पूछा। तुम क्यों।
उसने कहा। मामी आ रही थी लेकिन मैं ही जिद करके आ गई।
उसने मेरे कमरे को साफ किया। इधर उधर बिखरा सामान जगह पर रखा और बोली। लो जी साफ हो गया कमरा। ठीक है अब मैं जाऊं।
मैं अपने और उसको देखने लगा।
वो दरवाजे के पास खड़ी थी।
मैंने अपनी बाहें फैला दीं और वो दरवाजा उड़का कर दौड़ कर आ गई मेरी बाहों में और हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे।
वो मेरे लंड को और मैं उसकी चुची को हाथ से सहलाने लगा और दोनों जम कर एक दूसरे को चूम चाट रहे थे।
मैं बोला। अब तो हम दोनों के अरमान पूरे होंगे।
क्यों ना होंगे। जैसे आप कहें मैं आपके लिए कुछ भी कर सकती हूं। केवल इशारा कर देना और मुझे अपने पास अपनी बांहों में पाओगे।
हम दोनों एक होने लगे थे कि तभी मामी ने आवाज लगाई और हम अलग हो गए। वो बाहर जाने लगी। मैंने कहा। आज रात को दरवाजा खुला रखूंगा।
वो मेरे पास आई और जोर से मेरे लंड को हाथ से खींच गई। उसकी उंगलियां मेरे पजामे के ऊपर से लंड की मोटाई को पकड़ कर जोर से दबा गईं। मैंने हल्की आह भरी और वो मुस्कुरा कर बाहर निकल गई।
रात को मैं उसकी इंतजार कर रहा था। कमरे में सन्नाटा था। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ बार-बार दरवाजे की तरफ देख रहा था। वो करीब 2 बजे आई। दरवाजा धीरे से खुला और वो अंदर आ गई। मैंने दरवाजे की चिटकनी लगाई और लाइट ऑफ कर दी। अंधेरे में सिर्फ बाहर की हल्की रोशनी अंदर आ रही थी। वो मेरे बिस्तर पर बैठी थी। उसकी सांसें तेज चल रही थीं। मैं कूद पड़ा उसके ऊपर। मेरा शरीर उसके शरीर से टकराया। मैंने और उसने एक एक करके एक दूसरे के कपड़े उतार फेंके। उसकी साड़ी का पल्लू खिसका। ब्लाउज के हुक खुले। मेरा कुर्ता और पजामा फर्श पर गिरे। दोनों नंगे बदन को सहलाने लगे। मेरी हथेलियां उसके नंगे कंधों से नीचे फिसलीं। उसके हाथ मेरे सीने और पेट पर घूमे।
और तभी मैंने उसकी चूत में अपना मुंह रख दिया। उसने शरमा कर अपनी आंखें बंद कर लीं। उसके होंठ कांपे। मैं उसकी चूत को अपनी जीभ लगा कर चाटने लगा। जीभ की नोक से क्लिट को हल्के से छुआ। फिर पूरी जीभ उसकी गीली दरार पर घुमाई। उसकी जांघें कांप उठीं। वो धीमी आवाज में “आह… उम्म…” करने लगी।
वो इतनी गर्म हो गई कि उसने मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया। उसकी उंगलियां लंड की त्वचा पर फिसलीं। और झुक कर मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। उसके होंठ लंड के सिरे पर कस गए। जीभ नीचे से ऊपर चली। हम दोनों इइइ उम्म्ह अहह हय याह हहह की आवाज करने लगे। उसके मुंह से गीली आवाजें निकल रही थीं। मैं भी हांफते हुए “आह… हां…” कर रहा था।
मेरी उंगली उसकी चूत में अंदर बाहर होने लगी। दो उंगलियां उसकी गीली चूत में घुसीं। अंदर की दीवारें उंगलियों को कस रही थीं। पूरी चूत पानी पानी हो चुकी थी। उसके रस से मेरी उंगलियां भीग गईं। अब मेरा लंड मुझे बेचैन करने लगा। मैंने सीधा होकर उसकी चूत पर लंड टिका कर धक्का मारा। लंड का सिरे उसकी दरार को खोलता हुआ अंदर घुसा। और लंड सीधा उसकी कसी चूत में उतार दिया। वो कराह उठी “आह… हाय… धीरे…”।
वो मेरे इतने लंबे और तगड़े लंड की चुदाई से और मस्त होने लगी। हर धक्के पर उसके नितंब ऊपर उठे। उसकी सांसें टूटने लगीं। वो “उम्म… आह… हां… और जोर से…” कहती रही।
उस रात काफी देर तक हम दोनों ने चुदाई का मजा लिया जो आज तक अविस्मरणीय है।
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