Family group sex story – Dirty incest sex story: दोस्तों, अवनी को बिना कंडोम पेलकर और उसकी चुत में पूरा माल झाड़कर जब मैं दिल्ली वापस गया था तो हर रात बस यही सोचकर मुठ मारता था कि अब आयुषी और अपनी सगी बहन रिचा को भी इसी तरह चोदूंगा, उनकी चुत और गांड दोनों फाड़ूंगा। आखिरकार वीकेंड पर मैं फिर घर भाग आया।
कहानी का पिछला भाग: अवनी दीदी ने पथरी के बहाने चुदवाई
शुक्रवार रात को जब मैं घर पहुंचा तो तीनों की आँखों में वो ही आग थी जो मैंने पहले देखी थी, बस अब शरम की पतली सी चादर बाकी थी जो फटने ही वाली थी। खाना जल्दी निपटाया गया, मम्मी-पापा और दादी अपने कमरों में चले गए और पूरा घर शांत हो गया। मैं ऊपर अपने कमरे में सिर्फ एक पतली फ्रेंची पहनकर लेटा ही था कि दरवाजा धीरे से खुला और तीनों अंदर आ गईं।
अवनी ने गुलाबी रंग का पंजाबी सूट-सलवार पहना था, दुपट्टा ढीला छोड़ा हुआ था ताकि उसके भरे हुए मम्मे बार-बार झलक रहे हों, आयुषी नीले सूट में थी और उसकी टाइट सलवार में गांड का पूरा शेप उभरा हुआ था, मेरी सगी बहन रिचा ने सफेद सूट-सलवार पहना था और जानबूझकर ब्रा नहीं पहनी थी, जिससे उसके निप्पल सूट के ऊपर से साफ़ दिख रहे थे। तीनों ने आते ही दरवाजा अंदर से बंद कर लिया, अवनी ने सीधी लाइट बंद की और मैंने पहले से तैयार रखा हुआ लाल बल्ब जला दिया, कमरे में वो ही लालच भरी रोशनी फैल गई।
अवनी मेरे बिल्कुल पास आई, मेरे कान में गर्म साँसें छोड़ते हुए फुसफुसाई, “तेरी दोनों और बहनें भी आज तेरे लंड की गुलाम बनेंगी, जो मर्जी करना, बस लंड मत रोकना।” उसकी ये बात सुनते ही मेरे लंड ने फ्रेंची फाड़ने की कोशिश शुरू कर दी। मैंने कुछ नहीं बोला, बस आयुषी को खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया और उसकी सलवार का नाड़ा एक झटके में खींच दिया, सलवार घुटनों तक नीचे सरक गई, अंदर एक भी धागा नहीं था। उसने मेरी फ्रेंची नीचे खींची और मेरा छह इंच का मोटा लौड़ा बाहर निकाल लिया, वो पहले से ही पत्थर की तरह खड़ा था, सुपारा लाल और चमक रहा था। आयुषी ने जीभ निकालकर सुपारे को चाटा और फिर पूरा लंड मुंह में ठूंस लिया, ग्ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग्ग… गी गी गों गों गोग… उसका गला भर गया, लार की लंबी धार उसके होंठों से टपकने लगी।
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रिचा अब तक थोड़ी शरमा रही थी, लेकिन मैंने उसे आवाज दी, “आ रिचा, आज अपने भाई का लंड चूसकर देख, कितना स्वाद है।” वो काँपते कदमों से आई, मैंने उसका दुपट्टा फेंका, सूट ऊपर उठाया और उसके गोरे-गोरे मम्मों को दोनों हाथों से जोर से मसलने लगा। निप्पल इतने सख्त थे कि दबाने पर वो सिसक उठी, आह्ह्ह… भाई… दांत गड़ा दे… मैंने सच में उसके निप्पल पर दांत गड़ा दिए तो वो दर्द और मजा दोनों से तड़प गई।
अवनी मेरे अंडों को चाट रही थी, आयुषी डीपथ्रोट कर रही थी, रिचा के मम्मे मेरे मुंह में थे। थोड़ी देर बाद मैंने तीनों को बेड पर घुटनों के बल बिठाया और अपना लंड उनके चेहरों पर रगड़ने लगा। तीनों ने अपनी-अपनी जीभ निकाल दी, एक साथ तीन जीभें मेरे लंड पर, अंडों पर, गांड के छेद तक पहुँच गईं। आयुषी ने मेरी गांड में जीभ डाल दी, आह्ह्ह… साली कितनी गंदी है तू… वो हंसकर और अंदर तक जीभ घुसाने लगी।
फिर मैंने आयुषी को घोड़ी बना दिया, उसकी सलवार घुटनों पर लटक रही थी, सूट पीठ तक ऊपर चढ़ा हुआ था। मैंने उसकी गोरी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारे, लाल निशान पड़ गए। लंड का सुपारा उसकी चुत पर रखा और एक ही झटके में पूरा अंदर पेल दिया। आयुषी की चीख निकल गई, आह्ह्ह्ह्ह… मादरचोद… फाड़ दी… लेकिन खुद ही गांड पीछे धकेलने लगी। फच-फच-फच-फच… कमरे में सिर्फ ये आवाज और आयुषी की चीखें, और जोर से अमन… फाड़ दे… आज से तेरी रंडी हूँ… मैंने उसके बाल पकड़कर खींचे और दस मिनट तक लगातार ठोका, आखिर में उसकी चुत में ही सारा माल झाड़ दिया।
आयुषी हांफते हुए साइड हटी तो मेरी सगी बहन रिचा खुद आगे आई, उसने अपनी सलवार पूरी उतार दी और टांगें कंधे तक उठा लीं, बोली, “भाई… आज अपनी सगी बहन की चुत और गांड दोनों ले ले, मैं तेरी गुलाम बनकर रहूंगी।” मैंने पहले उसकी चुत को जीभ से चाटा, फिर दो उंगलियाँ गांड में डालीं। वो तड़प उठी, आह्ह्ह… भाई… गांड में भी डाल… मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और उसकी गांड पर रखकर धीरे-धीरे दबाया। रिचा की चीख निकल गई, आअह्ह्ह्ह्ह… मर गई… फट गई गांड… लेकिन वो खुद गांड पीछे धकेलने लगी। आधा घुसा तो मैंने एक जोर का धक्का मारा, पूरा लौड़ा गांड में समा गया। फिर शुरू हुआ गांड मारने का असली खेल। रिचा रो रही थी और चिल्ला भी रही थी, और तेज भाई… अपनी बहन की गांड फाड़ दे…
अवनी और आयुषी मेरे निप्पल चूस रही थीं, मेरे मुँह पर अपनी चुत रगड़ रही थीं। मैंने अवनी की चुत पर मुठ मारकर उसका रस उसके ही मुँह में छोड़ा, वो चाटकर पी गई। आयुषी बोली, “मुझे अपना पेशाब पिला…” मैंने खड़े होकर उसके मुंह में गरम धार छोड़ दी, वो गटगट पी गई। रिचा ने भी मांगा, मैंने उसकी चुत पर पेशाब किया, वो उछल पड़ी और हंसने लगी।
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फिर तीनों ने मिलकर मेरा लंड फिर से खड़ा किया। इस बार रिचा मेरे ऊपर चढ़ी और खुद लंड अपनी चुत में लेकर उछलने लगी, अवनी मेरी गांड चाट रही थी, आयुषी मेरे मुँह पर बैठकर चुत रगड़ रही थी। रिचा की चुत से फच-फच की आवाजें आ रही थीं, वो बोली, “भाई… आज से रोज चुत-गांड दोनों मारना, मैं तेरी रंडी हूँ।” मैंने उसकी चुत में दूसरी बार पूरा माल झाड़ दिया।
रात भर हम चारों नंगे लिपटकर सोए, सूट-सलवार बेड के नीचे बिखरे पड़े थे, कमरे में वीर्य, पेशाब और चुत के रस की मिली-जुली गंध थी। सुबह उठे तो तीनों ने फिर लंड चूसा और नाश्ते से पहले एक-एक राउंड और मारा।
दोस्तों, अब तो घर में हर कोने में चुदाई का खेल चलने लगा था। तीसरा पार्ट जल्द लिखूंगा, जिसमें छत पर खुली हवा में ग्रुप सेक्स और और भी गंदे खेल होंगे। कमेन्ट करके बताओ कितना मजा आया।
कहानी का अगला भाग: भाभी ने ननद को सुनाई अपनी सील टूटने की पूरी रात
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