Mama bhanji sex story – Practical reproduction sex story – Sex Teacher Sex Story: नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम रियांशी है। उम्र 22 साल। मैं दिल्ली में रहती हूँ और एम.एससी बायोलॉजी की स्टूडेंट हूँ। गर्मियों की छुट्टियाँ थीं, इसलिए मैं अपने ननिहाल गई थी, जो उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में है। वहाँ मेरे विक्रम मामा रहते हैं – मम्मी के छोटे भाई, उम्र करीब 38 साल। वो खेती करते हैं, लेकिन पढ़ाई में बहुत तेज थे। शहर के अच्छे कॉलेज से बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया हुआ है। उनकी बॉडी मजबूत है, चौड़ा सीना, मोटी-मोटी बाजुएँ, धूप से साँवला रंग, घुंघराले काले बाल और चेहरे पर हल्की दाढ़ी। घर पुरानी हवेली जैसा है – मिट्टी की दीवारें, टिन की छत, और चारों तरफ दूर-दूर तक खेत फैले हुए।
इस बार गर्मी सचमुच असहनीय थी। दिन में अक्सर लाइट चली जाती, पंखा रुक जाता और कमरे में पसीना बहता रहता। मैं हल्के गुलाबी रंग के कुर्ते और सफेद सलवार में रहती थी, नीचे काली लेस वाली ब्रा और सफेद कॉटन की पैंटी पहने हुए। मेरे बाल खुले रहते, जो कंधों तक लहराते हुए आते थे।
उन दिनों मैं ज्यादातर समय अकेले अपने कमरे में बिताती। एम.एससी का रिप्रोडक्शन चैप्टर मेरे लिए बहुत मुश्किल हो रहा था। मैं घंटों किताब के सामने बैठी रहती, डायग्राम को घूरती रहती, लेकिन कुछ भी समझ नहीं आता था। स्पर्म कहाँ से आता है, ओवम से कैसे मिलता है, फर्टिलाइजेशन असल में होता कैसे है – सब कुछ दिमाग में उलझा रहता। किताब में सिर्फ़ काले-सफेद लाइन ड्रॉइंग थे, जिनसे कोई रियल एहसास नहीं होता था। मैं कभी माथा पकड़ लेती, कभी किताब बंद करके आँखें मूंद लेती और सोचती कि ये सब असल जिंदगी में होता कैसे होगा। मैंने कभी किसी लड़के का हाथ तक नहीं थामा था, बॉयफ्रेंड तो दूर की बात। बस किताबों और पढ़ाई में डूबी रहती थी। गाँव में भी यही सिलसिला जारी था – दिन भर कमरे में बंद।
एक दोपहर मैं फिर उसी किताब को गोद में लेकर चारपाई पर बैठी थी। दरवाजा खुला हुआ था, बाहर से खेतों की गरम हवा धीरे-धीरे कमरे में आ रही थी। मैं इतनी तल्लीन थी कि बाहर के कदमों की आवाज भी नहीं सुन पाई। अचानक मामा कमरे में खड़े थे – खेत से अभी-अभी लौटे थे, पसीने से पूरी तरह तरबतर, सिर्फ लुंगी बाँधी हुई थी और ऊपर काली बनियान जो उनके शरीर से चिपक गई थी। उनकी चौड़ी और मांसल छाती साफ-साफ दिख रही थी, पसीने की बूंदें उस पर चमक रही थीं।
मैं घबरा कर जल्दी से किताब बंद करने लगी, लेकिन मामा ने किताब के कवर पर एक नजर डाली और होंठों पर गहरी मुस्कराहट के साथ बोले, “रियांशी, अभी भी वही चैप्टर अटका हुआ है ना? रिप्रोडक्शन वाला। मैंने बाहर से देखा था, पिछले दो-तीन दिनों से तू इसी किताब में डूबी रहती है, खिड़की से झाँककर।”
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मैं शर्मा कर सिर झुका लिया। मुझे हैरानी हुई कि उन्हें कैसे पता, लेकिन शायद सच में देखा होगा – घर में मैं अकेली इतना पढ़ती थी। मैंने धीमी आवाज में कहा, “हाँ मामा… समझ ही नहीं आ रहा। डायग्राम देखती हूँ, लेकिन कुछ भी क्लियर नहीं होता।”
मामा कमरे में पूरी तरह आ गए और दरवाजे की चौखट पर हाथ टिकाकर खड़े हो गए। उनकी आवाज में गहरा आत्मविश्वास और अधिकार था। “किताब से कभी नहीं समझ आएगा बेटी। ये सब प्रैक्टिकल सब्जेक्ट है। मैं बायोलॉजी ग्रेजुएट हूँ, इसी चैप्टर में सबसे ज्यादा नंबर लाया था कॉलेज में। खेती ने भी यही सिखाया है – बीज बोना, पानी देना, फसल पैदा करना। इंसान का सिस्टम भी बिल्कुल वैसा ही है।”
मैंने आश्चर्य से ऊपर देखा। “मामा, आप सिखाएँगे?”
उन्होंने सिर हिलाया, जैसे कोई बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुना रहे हों। “हाँ। आज मैं तेरा टीचर बनता हूँ। असली ज्ञान दूंगा, जो किताबें कभी नहीं दे सकतीं। चल पुराने कमरे में – वहाँ पूरा एकांत है, कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा।”
उनकी आवाज में इतना दम था कि मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। मुझे लगा कि शायद सच में सिर्फ पढ़ाई का मामला है। मैंने कोई सवाल नहीं किया, बस किताब गोद में दबाई और चुपचाप उनके पीछे-पीछे चल पड़ी। रास्ते में मुझे खुद पर थोड़ा अजीब सा लगा – मैं इतनी जल्दी कैसे मान गई? लेकिन मामा की बातों में इतना यकीन था और मेरे मन में इतने दिन से डाउट्स भरे थे कि मैं रुक नहीं पाई। मुझे कभी खयाल भी नहीं आया था कि प्रजनन को इस तरह कोई सिखा सकता है – मेरे लिए तो ये हमेशा सिर्फ किताबी और थ्योरेटिकल चीज थी।
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पुराना कमरा घर के सबसे पीछे था, खेतों से सटा हुआ। अंदर पुरानी लकड़ी की चारपाई पड़ी थी, उसके ऊपर पतला गद्दा और धूल से भरी सफेद चादर बिछी हुई थी। छोटी सी खिड़की से पतली धूप की किरणें आ रही थीं और हवा में मिट्टी और पुरानी लकड़ी की खुशबू फैली हुई थी। मामा ने दरवाजा बंद किया, कुंडी लगा दी और दृढ़, गहरी आवाज में बोले, “चारपाई पर बैठ। अब पाठ शुरू होता है।”
मैं चुपचाप बैठ गई। मामा मेरे ठीक सामने खड़े हो गए। उनकी नजरें मेरी आँखों में थीं। वे बोले, “पहला पाठ – पुरुष प्रजनन अंग। किताब खोलकर डायग्राम देख ले। लेकिन असली ज्ञान तो रियल चीज से ही मिलता है।”
उन्होंने मेरी उंगली पकड़ी और उसे अपनी लुंगी के ऊपर दृढ़ता से रख दिया। मैंने तुरंत महसूस किया – नीचे कुछ सख्त और बहुत गरम था, जो मेरी हथेली के स्पर्श से तेजी से और ज्यादा कठोर होता जा रहा था। उनकी बॉडी की गर्मी कपड़े के आर-पार मेरी हथेली में फैल रही थी। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा, नीचे एक अजीब सी गुदगुदी और हल्की नमी शुरू हो गई।
मामा ने गहरी साँस ली और बोले, “इसे अच्छे से फील कर। ये इरेक्शन की प्रक्रिया है। प्रजनन के लिए पेनिस का पूरी तरह कठोर होना बहुत जरूरी है।”
मैंने डरते-डरते हल्के से दबाया। मामा के मुँह से हल्की आह निकली। फिर उन्होंने खुद लुंगी की गांठ खोली। लुंगी नीचे गिर गई। उनका लंड पूरी तरह बाहर आ गया – मोटा, करीब सात इंच लंबा, नीली नसें उभरी हुईं, सुपारा गहरा गुलाबी और पसीने से चमकदार, उस पर हल्का सा चिपचिपा प्री-कम लगा हुआ था। नीचे अंडकोष लटक रहे थे, घने काले बालों से घिरे हुए, पसीने की बूंदें उन पर चमक रही थीं। एक मर्दाना, मिट्टी मिली हुई खारिश खुशबू कमरे में फैल गई।
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मामा ने मेरी आँखों में देखते हुए कहा, “डरना बिल्कुल मत। ये पुरुष का लंड है। किताबी नाम पेनिस है, लेकिन आम बोलचाल में लंड या लौड़ा कहते हैं। ये ऊपर की स्किन फोरस्किन है – देख, मैं पीछे खींचता हूँ, ताकि तू अच्छे से समझ सके।”
उन्होंने खुद फोरस्किन धीरे से पीछे खींची। सुपारा पूरी तरह नंगा और चमकदार हो गया। “ये ग्लैंस हिस्सा है – सबसे ज्यादा संवेदनशील, जहाँ से प्लेजर की लहरें दौड़ती हैं। और नीचे ये टेस्टिकल्स या अंडकोष हैं – यहीं लाखों-करोड़ों स्पर्म बनते हैं, जैसे फैक्ट्री में बीज तैयार होते हैं।”
मैंने डरते-डरते हाथ बढ़ाया और उसे छुआ। बहुत गरम था, स्टील जैसा सख्त था और हल्का-हल्का धड़क रहा था। मामा की साँसें तेज हो गईं।
वे बोले, “अब इसे अच्छे से पकड़ और ऊपर-नीचे कर। इसे मुठ मारना कहते हैं। इससे उत्तेजना कई गुना बढ़ जाती है, जैसे इंजन में तेल डालकर स्पीड बढ़ती है।”
मैंने दोनों उंगलियों से पकड़ा और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी। लंड और ज्यादा कठोर हो गया, नसें और फूल गईं, सुपारे से चिपचिपा तरल और निकलने लगा। मेरी हथेली पूरी गीली हो गई।
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मामा गहरी, अधिकार भरी आवाज में बोले, “अब स्त्री प्रजनन तंत्र की बारी है। अपना गुलाबी कुर्ता ऊपर चढ़ा, ताकि मैं तुझे फीमेल बॉडी के पार्ट्स दिखा सकूँ।”
मैंने कुर्ता ऊपर उठा दिया। नीचे काली लेस वाली ब्रा साफ दिखने लगी।
मामा ने आदेश दिया, “अब ब्रा खोल, बेटी। ये जरूरी है असली समझ के लिए।”
मैंने पीठ पर हाथ ले जाकर हुक खोला और ब्रा उतारकर साइड में रख दी। मेरे गोरे, गोल-मटोल स्तन पूरी तरह बाहर आ गए। निप्पल्स पहले से ही हल्के कड़े और ब्राउन हो रहे थे।
मामा ने उन्हें ध्यान से देखा और बोले, “ये स्तन हैं, जिन्हें मैमरी ग्लैंड्स भी कहते हैं। आम भाषा में चुची या मम्मे। इनका मुख्य काम बच्चे को दूध पिलाना है, लेकिन सेक्सुअल उत्तेजना में ये बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जैसे प्लेजर के सेंटर पॉइंट्स। देख, तेरे निप्पल्स पहले से ही इरेक्शन की हालत में आ गए हैं – ये शरीर के प्लेजर का सीधा संकेत है, जैसे बॉडी कह रही हो कि तैयार है।”
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उन्होंने दोनों बड़े हाथों से मेरे स्तनों को दृढ़ता से पकड़ा और धीरे-धीरे मसलने लगे। उनकी उंगलियाँ पसीने से चिकनी होकर मेरी नरम त्वचा पर फिसल रही थीं। फिर अंगूठों से निप्पल्स पर गोल-गोल घुमाया।
मेरे शरीर में तेज करंट सा दौड़ गया, मैं सिहर उठी और हल्की सी आह निकल गई।
मामा बोले, “ये इरेक्शन प्लेजर को कई गुना बढ़ा देता है। अब मैं चूसकर दिखाता हूँ कि ये हिस्सा कितना संवेदनशील होता है, जैसे जीभ से मालिश करूंगा।”
उन्होंने झुककर एक निप्पल अपने गरम मुँह में लिया, जीभ से चारों तरफ घुमाया और जोर से चूसा। चप्प-चप्प की हल्की आवाज कमरे में गूँजी। नमकीन पसीने का स्वाद था, उनकी गीली और गरम जीभ मेरे निप्पल पर नाच रही थी। फिर दाँतों से बहुत हल्का सा काटा।
मैं काँप उठी, नीचे चूत में तीव्र खुजली सी होने लगी और पैंटी पूरी तरह भीग गई।
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मामा ने दूसरा निप्पल भी बिल्कुल वैसा ही चूसा, दोनों हाथों से स्तनों को कभी जोर से दबाया, कभी धीरे मसला। उनकी हल्की दाढ़ी मेरी नाजुक त्वचा पर रगड़ खा रही थी, गरम-गरम साँसें मेरे सीने पर पड़ रही थीं। फिर जीभ से स्तनों को चाटते-चाटते ऊपर गले तक आए।
मैंने आँखें बंद कर लीं, सिर पीछे टिका लिया और मेरी कमर खुद-ब-खुद ऊपर की तरफ उठने लगी।
मामा बोले, “अब नीचे का हिस्सा देखते हैं। सलवार का नाड़ा खोल, ताकि मैं तुझे वैजाइना की पूरी एनाटॉमी समझा सकूँ।”
मैंने नाड़ा खींचा, सलवार मेरी टांगों से होती हुई नीचे गिर गई। सफेद पैंटी पर बड़े-बड़े गीले धब्बे साफ नजर आ रहे थे।
मामा ने आदेश दिया, “पैंटी उतार और टांगें अच्छे से फैला, जैसे किताब के डायग्राम में दिखता है।”
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मैंने पैंटी नीचे खींचकर उतार दी और दोनों टांगें चौड़ी करके फैला लीं।
मामा ने मेरी चूत को ध्यान से देखा और बोले, “ये वैजाइना है, आम भाषा में चूत। ऊपर प्यूबिक हेयर हैं, जो प्रोटेक्शन देते हैं। बाहर के मोटे होंठ लेबिया मेजोरा हैं, अंदर के नरम गुलाबी होंठ लेबिया मिनोरा। और ये छोटा सा बटन क्लिटोरिस है – स्त्री तंत्र का सबसे संवेदनशील हिस्सा, इसे डाना या भगत कहते हैं, जैसे प्लेजर का मुख्य स्विच।”
उन्होंने अपनी मोटी उंगली क्लिटोरिस पर रखी और धीरे-धीरे गोल-गोल रगड़ने लगे।
मेरे मुँह से जोर की चीख निकल गई – पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई, टांगें खुद और चौड़ी हो गईं।
मामा बोले, “ये फोरप्ले है। चूत को पूरी तरह तैयार करना बहुत जरूरी है, जैसे इंजन को गर्म करना। देख, लुब्रिकेशन कितनी तेजी से बह रहा है, जैसे नदी की धारा। अब उंगली अंदर जाती है। ये वैजाइनल कैनाल है – तेरी बहुत टाइट है, जैसे पहली बार खुल रही हो।”
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उन्होंने एक उंगली धीरे से अंदर सरकाई, फिर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगे। कुछ देर बाद दूसरी उंगली भी जोड़ दी। थप-थप-थप की गीली आवाज कमरे में गूँजने लगी, मेरी चूत की tangy खुशबू चारों तरफ फैल गई।
मैं कमर ऊपर-ऊपर उठाकर जोर-जोर से कराह रही थी।
फिर मामा ने अपना मुँह नीचे किया। जीभ से क्लिटोरिस को चाटा, चूत के होंठों को मुँह में लेकर चूसा, जीभ अंदर घुसाकर दीवारों को छुआ और घुमाया। tangy और नमकीन स्वाद था। मैं पूरी तरह पागल हो रही थी, उनके घुंघराले बालों को दोनों हाथों से खींच रही थी, जांघें उनके कंधों पर कसकर दबा रही थीं। वो मेरी जांघों के अंदरूनी नरम हिस्से को चूमते, जीभ फेरते, हल्का दाँतों से काटते, फिर वापस क्लिटोरिस को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसते।
मैं लगातार चीख रही थी, अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
मामा उठे। उन्होंने अपना थूक मुट्ठी में लिया और लंड पर अच्छे से मला, लंड पूरी तरह चमकने लगा। बोले, “ये नेचुरल लुब्रिकेंट है। गाँव में थूक लगाकर चुदाई सबसे स्मूथ और मजेदार होती है, जैसे स्लिपरी रोड पर गाड़ी चलाना।”
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फिर बोले, “अब असली इंटरकोर्स शुरू होता है। लेट जा। टांगें कंधों तक उठाकर अच्छे से फैला। मिशनरी पोजीशन में पहले रगड़ता हूँ, ताकि तू फील कर सके।”
उन्होंने अपना सुपारा मेरी चूत पर रगड़ा, बार-बार क्लिटोरिस को छूता हुआ। मैं सिहर-सिहर कर कमर ऊपर उठा रही थी, थप-थप की हल्की आवाज आ रही थी।
मामा बोले, “अब एंट्री होती है। धीरे-धीरे। वैजाइना स्ट्रेच हो रही है, जैसे टाइट दरवाजा खुल रहा हो।”
सुपारा अंदर घुसा। दर्द इतना तेज था कि मेरी आँखों से आँसू छलक आए। मैं रोने लगी, “मामा… बहुत दर्द हो रहा है…!”
मामा तुरंत रुक गए, मेरे होंठ अपने मुँह में लेकर चूसे और बोले, “हाइमन टूट गया है। पहली बार हर लड़की को ऐसा तेज दर्द होता है, जैसे कुछ फट रहा हो। गहरी साँस ले, थोड़ा रुकता हूँ, धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा।”
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कुछ देर बाद दर्द धीरे-धीरे कम हुआ। मामा बहुत धीरे मूव करने लगे – पहले बहुत स्लो, फिर थोड़ा तेज। दर्द के साथ-साथ एक अजीब सी भरावट और गहरा सुख महसूस होने लगा। मैंने खुद कमर हिलानी शुरू कर दी।
मामा बोले, “अब प्लेजर आ रहा है ना? ये लंड का असली मजा है, जैसे पूरा बॉडी जुड़ गया हो।”
झटके तेज और जोरदार होते गए। थप-थप-थप की तेज आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी। उनका पसीना मेरे स्तनों और पेट पर टपक रहा था। मैं जोर-जोर से चीख और कराह रही थी।
फिर मामा बोले, “पोजीशन चेंज करते हैं। घोड़ी बन जा। डॉगी स्टाइल में बहुत गहरी पेनिट्रेशन होती है, जैसे और अंदर तक पहुँचता है।”
मैं चारपाई पर घुटनों और हाथों के बल झुक गई। मामा ने पीछे से लंड एक झटके में घुसाया, मेरे बालों को मुट्ठी में पकड़कर पीछे खींचा और बोले, “अब लंड तेरी बच्चेदानी तक पहुँच रहा है। टेस्टिकल्स तेरी चूत पर जोर-जोर से स्लैप कर रहे हैं। मैं पूरी ताकत से पेल रहा हूँ। इसे घोड़ी बनाकर चोदना कहते हैं, जैसे जानवरों की तरह।”
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मैं चीख रही थी, “हाँ मामा… जोर से पेलो… आपका मोटा लंड फाड़ रहा है… स्पर्म चाहिए…”
अचानक मेरी चूत जोर-जोर से सिकुड़ने लगी। एक गरम फुहार सी निकली।
मामा बोले, “स्क्वर्टिंग हो गई। फीमेल ऑर्गेज्म पूरा हुआ। अब मेरा नंबर है। इजैकुलेशन। यूटरस में पूरा गरम वीर्य डालता हूँ। इसे माल छोड़ना या वीर्य भरना कहते हैं, जैसे बीज बोना।”
गरम-गरम वीर्य की तेज धारें अंदर महसूस हुईं। मामा मेरे ऊपर पूरी तरह गिर पड़े। हम दोनों पसीने से तरबतर, हाँफते हुए एक-दूसरे से चिपके लेटे रहे। बाहर टिन की छत पर हवा की खटखट और दूर से गायों की आवाज आ रही थी।
कुछ देर बाद हमारी साँसें सामान्य हुईं। मामा मेरे माथे पर प्यार से किस किए और बोले, “पाठ पूरा हुआ। अब तू इस सब्जेक्ट में पूरी एक्सपर्ट है।”
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मैंने उन्हें कसकर गले लगा लिया, उनके लंड को धीरे-धीरे सहलाते हुए बोली, “मामा… रोज ऐसे पढ़ाओ ना… कल खेत में नेक्स्ट चैप्टर सिखाओगे ना…”
लेकिन तभी मेरे दिमाग में एक डर सा आया। मैंने घबराकर पूछा, “मामा… क्या मुझे बच्चा हो जाएगा? मेरा दिल तेज धड़क रहा है सोचकर।”
मामा ने मेरी आँखों में देखा, मुस्कुराए और शांत लेकिन अधिकार भरी आवाज में बोले, “हाँ बेटी, लगभग चांस तो है ही, क्योंकि स्पर्म अंदर गया है और फर्टिलाइजेशन हो सकता है। लेकिन कभी-कभी बच्चा करने के लिए तो कई बार स्पर्म डालना पड़ता है, जैसे खेती में बीज अच्छे से जमाने के लिए पानी और समय लगता है। लेकिन तुझे तो अभी बच्चा नहीं करना है, इसलिए शाम को मैं दवा दूँगा – वो एक गोली है जो प्रेग्नेंसी रोकती है, बस वो खा लेना। अगली बार पढ़ाई कंडोम लगाकर करेंगे, ताकि कोई रिस्क न रहे और मजा भी पूरा आए।”
फिर उन्होंने मेरे गाल पर हाथ फेरा और गंभीर होकर बोले, “और ये बात किसी को मत बताना – कि मैंने तुझे कैसे पढ़ाया। ये सिर्फ हम दोनों का राज है, वरना लोग गलत समझेंगे।”
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