Gay Sex Story: हाय दोस्तों, मेरा नाम कुछ भी हो, तुम मुझे बस एक अंकल कह सकते हो—वही अंकल जो अपने दोस्त के बेटे, सहिल, के साथ कुछ ऐसा कर बैठा जो शायद कोई सोच भी न सके। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी जिंदगी में ऐसा मोड़ आएगा, पर जब से मैंने सहिल को करीब से देखा, कुछ तो बदल गया। आज मैं तुम्हें वो सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ जो मेरे साथ घटी। उम्मीद है तुम्हें पसंद आएगी। अगर अच्छी लगे तो मुझे जरूर बताना। पहले अपने बारे में बता दूँ—मैं एक आम मर्द हूँ, उम्र में सहिल के पिता का दोस्त, और शायद थोड़ा सख्त मिजाज। पर सहिल को देखकर मुझमें कुछ नरमी सी आ गई थी। वो 5 फीट 6 इंच का, 68 किलो का, गोरा, और मझोले कद का था। सब कहते थे कि वो लड़की जैसा दिखता है, और शायद इसलिए ही मेरे मन में उसके लिए कुछ अलग सा ख्याल आया। ये बात तब की है जब वो 19 साल का था, जब उसकी दाढ़ी-मूंछ भी ठीक से नहीं आई थी।
मैंने सुना कि सहिल बचपन से खुद को लड़की की तरह समझता था। जब घर पर कोई नहीं होता था, वो अपनी दीदी की ड्रेस और गहने पहनकर आईने के सामने खड़ा हो जाता था और खुश होता था। धीरे-धीरे ये उसका शौक बन गया। कभी-कभी वो लिपस्टिक, आईलाइनर और हल्का मेकअप भी करता था। मुझे ये सब बाद में पता चला, पर उसकी ये आदतें मेरे लिए उस घटना का आधार बन गईं। अब उस घटना पर आता हूँ। मैं अपने दोस्त—यानी सहिल के पिता—के घर कभी-कभी जाता था। 2-3 दिन वहाँ रुकता भी था। जब मैं वहाँ रुकता, तो सहिल के साथ एक ही बिस्तर पर सोता था।
घटना से कुछ महीने पहले मैं उनके घर गया था। रात को हम सोने गए। कुछ देर बाद मेरी नींद खुली, और मैंने अपने आप को लुंगी में हाथ डालकर हिलाते हुए पाया। अचानक मुझे एहसास हुआ कि सहिल जाग रहा था और मुझे देख रहा था। वो चुपचाप देखता रहा, और मैं हिलाता रहा। मुझे नहीं पता क्यों, पर उसकी नजरों से मुझे एक अजीब सा उत्साह महसूस हुआ। अगले दिन मैंने सोचा कि शायद वो कुछ करेगा, पर सहिल ने सोने का नाटक किया और आँखें बंद करके लेटा रहा। उस रात कुछ नहीं हुआ। करीब एक घंटे बाद, जब मुझे लगा कि वो सो गया, अचानक उसने नींद में होने का बहाना करते हुए अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया। बाप रे बाप, उस पल मुझे लगा कि मेरा लंड सचमुच बड़ा था। मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, तो उसने मेरा पूरा लंड हाथ में ले लिया और सो गया।
तीसरे दिन, सोने के वक्त जब उसने फिर से हाथ रखा, तो मैं जाग गया। मैंने उसका हाथ अपनी लुंगी के अंदर डाल दिया। वो बिना कुछ बोले उसे पकड़ने लगा, और मैंने भी उसका लंड पकड़ लिया। फिर हम दोनों ने एक-दूसरे के लंड हिलाए, और निकलने के बाद बाथरूम जाकर धोया और सो गए। अगले दिन मैं अपने घर चला गया।
कुछ दिनों बाद सहिल के एग्जाम खत्म हुए। उसका पिता मेरा दोस्त था, तो मैंने उसे कहा कि सहिल को मेरे घर भेज दे। मुझे नहीं पता क्यों, पर उस रात के बाद से मैं सहिल के साथ वक्त बिताने के सपने देखने लगा था। सहिल फट से तैयार हो गया और मेरे घर आ गया। जब वो पहुँचा, तो पता चला कि मेरी बीवी घर पर नहीं थी। मैं अकेला था, और ये बात जानकर सहिल और भी खुश हो गया। उस रात सोने के वक्त हमने कुछ देर बात की। बात करते-करते मैंने उसका लंड पकड़ लिया और सहलाने लगा। उसके चेहरे पर वो अजीब सा भाव आया, जैसे उसे ऐसा मजा पहले कभी नहीं मिला हो।
उस रात सहिल के साथ वो एहसास कुछ ऐसा था कि मैं बयान नहीं कर सकता। हमने पूरी रात में दो बार एक-दूसरे को हिलाया और फिर सो गए। घर में कोई और नहीं था, तो सहिल कुछ ज्यादा ही आजाद हो गया था। अगले दिन सुबह जब मैं उठा, तो मैंने सोचा कि आज छुट्टी ले लूँ। सहिल को बोला कि मैं थोड़ी देर के लिए बाहर जा रहा हूँ। ये कहकर मैं उसके पास जाकर बैठ गया और उसे kiss करने लगा। वो बहुत excited हो गया। फिर मैंने उसका लंड पकड़ा, उसे kiss किया, और मुँह में लेकर चूसने लगा। सहिल ने मेरा सिर पकड़ लिया और आगे-पीछे करने लगा। ऐसा कुछ देर चला।
फिर मैं उसके मुँह में ही झड़ गया। बिना कुछ बोले मैंने उसे एक स्माइल दी, तैयार हुआ, और बाहर निकल गया। जब मैं गया, तो सहिल नहाने चला गया। मुझे नहीं पता उसके दिमाग में क्या चल रहा था, पर जब मैं वापस आया, तो जो देखा, वो मेरे लिए हैरानी भरा था। सहिल बेडरूम में नंगा होकर आईने के सामने खड़ा था। उसने मेरी बीवी की अलमारी खोली और कुछ कपड़े पहन लिए। पहले उसने पैंटी पहनी, फिर ब्रा, फिर ब्लाउज़ और पेटीकोट। इसके बाद उसने एक लाल साड़ी निकाली और उसे पहन लिया। उसने हल्का मेकअप किया—लिपस्टिक, आईलाइनर, लिपलाइनर लगाया। कुछ गहने जैसे चूड़ियाँ, पायल सब पहन लिया।
जब वो पूरी तरह सज-धजकर आईने के सामने खड़ा हुआ, तो खुद को देखकर इतना excited हो गया कि बस रुक ही नहीं पा रहा था। मैं ठीक उसी वक्त घर लौटा। दरवाजा खोलने की आवाज़ हुई, और सहिल डर गया। वो बेड पर बैठ गया। मैं अंदर आया और उसे उस हाल में देखकर चौंक गया। मैंने कहा, “क्या बात है? आज मूड कुछ अलग लग रहा है।” सहिल खुद को रोक नहीं पाया और एक नई दुल्हन की तरह शरमा गया। मैं उसके पास जाकर बैठ गया और उसे घूरने लगा। फिर बोला, “तुझे पता है मैंने तेरे पापा से कहकर तुझे यहाँ क्यों बुलाया?” उसने ना में सिर हिलाया। मैंने कहा, “मैं तुझे चोदना चाहता था, इसलिए। क्या तूने भी इसलिए ये सब किया?” उसने हाँ में सिर हिलाया।
मैंने स्माइल की और उसके गले पर kiss किया। फिर थोड़ा अलग हो गया। सहिल कुछ समझ नहीं पाया। मैंने कहा, “मैं अकेला नहीं हूँ। मेरा एक दोस्त भी है मेरे साथ। तू कहे तो उसे भी हमारे काम में शामिल करें, वरना मैं उसे जाने को बोल दूँ।” ये सुनकर सहिल और excited हो गया और हाँ में सिर हिलाया। मैंने अपने दोस्त को अंदर बुलाया। वो आया, पर सहिल उससे नज़र नहीं मिला पा रहा था। हम दोनों दिखने में काफी handsome थे। सहिल को शायद डर भी लग रहा था और excitement भी हो रहा था। हमने एक-दूसरे को कुछ इशारे किए और सोफे पर बैठ गए।
कुछ देर बाद हम दोनों ने अपने कपड़े उतार दिए और नंगे हो गए। मेरा दोस्त का लंड मुझसे भी बड़ा और मोटा था। हमने सहिल को बुलाया और पूछा, “तुझे कोई दिक्कत तो नहीं?” उसने कहा, “नहीं,” पर थोड़ा हिचकिचाया। बोला, “कुछ हुआ तो क्या, क्योंकि मैंने पहले कभी किसी से सेक्स नहीं किया।” मैंने कहा, “डर मत, कुछ नहीं होगा। मिलकर मज़े करेंगे।” फिर मैंने उससे कहा, “तू बहुत cute, beautiful और sexy लग रहा है। मैं खुद को रोक नहीं पा रहा। आज से तू हमारे लिए सलिनी है। जब भी मन करे, बोलना, हम मिलकर enjoy करेंगे।”
फिर मैंने उससे पूछा, “शुरू करें?” उसने हाँ में सिर हिलाया। मैंने उसका हाथ लिया और अपने लंड पर रख दिया। उसके दोनों हाथों में दो लंड थे। वो धीरे-धीरे सहलाने लगा। कुछ देर बाद हम दोनों का लंड एकदम tight हो गया, जैसे स्टील की गरम छड़ हो। मैंने उसका सिर पकड़ा और अपने लंड के पास खींच लिया। वो बिना कुछ बोले उसे मुँह में लेकर चूसने लगा। कभी मेरा, कभी मेरे दोस्त का। करीब 20 मिनट बाद हम दोनों झड़ गए।
फिर हम तीनों ने खाना खाया। इसके बाद हम उसे बेडरूम में ले गए। हम दोनों ने मिलकर उसे सिर से पाँव तक चूमा और चाटा। मैं उसके गले पर kiss कर रहा था, और मेरा दोस्त उसकी जाँघों पर। फिर हमने उसकी पैंटी उतार दी और साड़ी-पेटीकोट ऊपर उठा दिया। उसके पैर ऊपर करके मैंने उसके ass hole पर kiss किया। उसकी आँखें बंद हो गई थीं, पर मुझे लग रहा था कि वो हर touch को महसूस कर रहा था।
फिर मैंने सहिल की गांड को जीभ से चाटना शुरू किया, और मेरा दोस्त ने अपना लंड उसके मुँह में दे दिया। वो चूस रहा था। कुछ देर बाद मैंने उसकी गांड में उंगली डालने की कोशिश की, पर उंगली अंदर नहीं जा रही थी। मैंने थोड़ी देर कोशिश की, फिर कुछ क्रीम लाकर लगा दी—शायद कोई ठंडी क्रीम थी, क्योंकि उसे ठंडक महसूस हुई होगी। इसके बाद मैंने एक उंगली अंदर डाली। उसे बहुत दर्द हो रहा था, पर मुँह में लंड होने की वजह से वो कुछ बोल नहीं पा रहा था। मैंने और क्रीम लगाई और एक उंगली पूरी अंदर-बाहर करने लगा।
दर्द और मज़े के मिक्स में वो खो गया था। फिर मैंने एक और उंगली डाल दी। 5 मिनट बाद मैंने अपने लंड का टिप उसके होल पर टिकाया और हल्के-हल्के से दबाव दिया। लंड अंदर नहीं जा रहा था। थोड़ी देर कोशिश करने के बाद सिर्फ लंड का सुपाड़ा ही अंदर गया। उसे इतना दर्द हुआ कि वो रो पड़ा। मुझे लगा जैसे मैंने उसकी गांड में गरम लोहा डाल दिया हो। उसकी गांड फट रही थी। फिर मैंने पूरा लंड बाहर निकाला और जोर से एक झटका दिया। उसने मुँह से लंड निकाला और चीखने लगा। उसने मुझे धक्का देकर अलग करने की कोशिश की।
मुझे गुस्सा आ गया। मैंने उसे जोर से एक थप्पड़ मारा और कहा, “रंडी साले, लंड पर आग लगाई और अब ना-ना नाटक कर रहा है।” मैंने उसे पकड़ लिया और उसके हाथ पीछे करके बाँध दिए। फिर उसे कुत्ते जैसा बनाकर उसकी गांड में लंड डालने लगा। मुझे लगा कि उसकी गांड से खून निकल गया। कुछ देर मैंने अपना लंड उसकी गांड के अंदर डालकर रुक रखा। फिर थोड़ा तेल डाला और लंड धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। इधर मेरा दोस्त उसके मुँह में अपना लंड डाले हुए था, और वो उसे चूस रहा था।
थोड़ी देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा, और वो हमारे साथ देने लगा। कुछ देर बाद मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई और जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगा। फिर हम दोनों ने अपनी पोजीशन बदल ली। उस दिन हमने उसे करीब एक घंटे से ज्यादा चोदा। सब खत्म होने के बाद वो बिस्तर पर लेट गया, और उसे पता ही नहीं चला कि वो कब सो गया।
जब उसकी आँख खुली, तो मैं और मेरा दोस्त बैठकर पी रहे थे। वो उठकर बाथरूम जाने लगा, पर ठीक से चल नहीं पा रहा था। किसी तरह वो बाथरूम से आया और फिर सो गया। रात को मैंने उसे उठाया और खाना खिलाया। खाना खाने के बाद मैंने उसका लंड मुँह में लेकर चूसना शुरू किया और पूछा, “मज़ा आया कि नहीं?” उसने स्माइल दी और मज़े लेने लगा। उस रात हम दोनों फिर से प्यासे बन गए। हमने उसका पूरा कपड़ा निकाल दिया और उसे एक रंडी की तरह चोदने लगे। करीब एक घंटे बाद जब हम दोनों झड़ने वाले थे, तो पहले मैंने अपना सारा माल उसके अंदर छोड़ दिया और उसकी गांड को दबाए रखा। फिर मेरे दोस्त ने अपना लंड अंदर डाला और चोदने लगा।
पहले से अंदर मेरा माल था, तो पच-पच की आवाज़ से पूरा कमरा गूंज रहा था। वो मज़े में सिसकारियाँ भर रहा था—आह्ह्ह… ह्म्म्म… और-और… आआआह्ह्ह…। ये आवाज़ें अपने आप उसके मुँह से निकल रही थीं। करीब 15 मिनट बाद मेरे दोस्त ने भी अपना सारा माल अंदर निकाल दिया। फिर उसने लंड बाहर निकाला और उसकी गांड को टाइट से पकड़कर रखा। झट से निकोप्लास्ट लगा दी। वो कुछ समझ नहीं पाया। हम दोनों का सारा माल उसके अंदर था, और निकोप्लास्ट की वजह से बाहर भी नहीं आ पा रहा था। मैंने उसे कमरे में चलने को कहा। उसे अजीब सा लग रहा था। हल्का-हल्का माल साइड से निकल रहा था, और अंदर उसे बहुत दर्द हो रहा था।
कुछ देर बाद जब उसने निकोप्लास्ट खोलने की बात की, तो हमने उसे खोलने नहीं दिया। करीब एक घंटे बाद वो और सहन नहीं कर पाया और बाथरूम में जाकर खोल दिया। उसे बहुत हल्का महसूस हुआ। उसने सब साफ किया और आकर सो गया। अगले दिन सुबह खाना खाने के बाद मैंने उसे दो टैबलेट दीं, और उसने ले लीं। दोपहर को वो पूरा सोता रहा। शाम को उसे पूरी तरह आज़ादी महसूस हुई। रात को हम दोनों फिर से शुरू हो गए। इस बार उसका दर्द भी दोगुना था और मज़ा भी दोगुना था।
पर वो मैं तुम्हें अगली कहानी में बताऊँगा। अगर ये मेरी ये आपबीती तुम्हें अच्छी लगे, तो कहानी पढ़ने के बाद अपने विचार नीचे कमेंट्स में ज़रूर लिखें, ताकि हम आपके लिए रोज़ और बेहतर कामुक कहानियाँ पेश कर सकें।