Papa ne mausi ko choda: मेरा नाम रीमा है, 20 साल की हूँ, और आज मैं तुम्हें एक ऐसी गंदी चुदाई की कहानी सुनाऊँगी कि लंड सलामी देगा और चूत टपकने लगेगी। 5 साल पहले की बात है, जब मम्मी हॉस्पिटल में थीं। उनका बेबी होने वाला था, तो घर संभालने के लिए मौसी को बुलाया गया। मौसी मीरा, 28 साल की, गोरी, चिकनी, चूचे मोटे, गांड भारी—ऐसा माल कि देखते ही लंड फुंफकार मारने लगे। वो आई और काम में जुट गई।
पहला दिन चला गया। अगली रात वो काम निपटाकर मेरे पास सोने आ गई। पीछे पापा लेटे थे, आगे मौसी। मैं हमेशा किनारे सोती हूँ, तो मैंने कहा, “मौसी, बीच में लेटो, वरना मुझे नींद नहीं आएगी।” वो हल्का सा हँसी और बीच में सरक गई। बिस्तर टाइट था, और मौसी पापा से सट गई।
थोड़ी देर बाद मौसी उठी और जब लौटी तो मम्मी की चिकनी मैक्सी में थी—टाइट, चूचों को दबाकर बाहर निकालती, गांड को चमकाती। वो लेट गई। मैं सोने की कोशिश कर रही थी कि मौसी की सिसकारी सुनाई पड़ी, “हटाइये, हाथ हटाइये।” मैंने आँखें बंद रखीं, पर चुपके से देखा। पापा का हाथ उनकी कमर पर था। पापा ने हाथ हटाया, पर थोड़ी देर बाद मौसी फिर बोलीं, “जीजाजी, ये क्या कर रहे हो?”
पापा ने उनकी टांग पकड़कर जकड़ लिया। मौसी छटपटाईं। वो पापा की तरफ मुड़ीं, और पापा ने उनके गुलाबी होंठ चूस लिए। मौसी धक्का देने लगीं, पर पापा ने मैक्सी ऊपर खींच दी। मौसी उनका हाथ रोकने लगीं। पापा बोले, “मीरा, दो महीने से चूत का सूखा पड़ा है। तुम्हारी दीदी ने लंड को तरसा दिया। आज चोदने दे।” मौसी बोलीं, “नहीं, ये गलत है।” पापा हँसे, “गलत क्या, साली? चूत में लंड डालने का मौका है। रोज़ थोड़े चोदूंगा।”
मौसी बोलीं, “समझो…” पर पापा ने कहा, “समझ गया, तभी तो तेरी चूत माँग रहा हूँ।” वो मौसी के ऊपर चढ़ गए और उनके होंठ चूसने लगे। मौसी मुँह फेरने लगीं, फिर चुप। अचानक मौसी ने पापा को चूमना शुरू कर दिया। पापा ने मैक्सी ऊपर सरकाई और पैंटी फाड़कर फेंक दी। मौसी नीचे नंगी हो गई। पापा ने उनकी चूत पर हाथ फेरा। मौसी उनका हाथ पकड़ने लगीं। पापा बोले, “हाथ हटा, मीरा। तेरी चूत तो चुदाई के लिए तरस रही है।” मौसी बोलीं, “तेरा लंड भी तो गधे जैसा मोटा है।”
पापा हँसे, “चल, साली। इस मोटे लंड का मज़ा ले।” वो मौसी को बाँहों में भरकर उठे और बोले, “यहाँ नहीं, दूसरी कमरे में चल।” मौसी नंगी ही उनके साथ उठी। दोनों बाहर निकल गए। मैं चुपके से बिस्तर से उठी और खिड़की की तरफ भागी। बाहर का कमरा साफ दिख रहा था। पापा ने मौसी को दीवार से सटाया और उनकी मैक्सी पूरा फाड़ डाला। मौसी के मोटे चूचे बाहर लटक पड़े। पापा उनके चूचों को मसलने लगे, और मौसी सिसकारियाँ भरने लगी।
मैं खिड़की के पास खड़ी थी, आँखें फाड़े सब देख रही थी। पापा ने मौसी को दीवार से सटाया हुआ था। उनकी मैक्सी फट चुकी थी, मोटे-मोटे चूचे नंगे लटक रहे थे। पापा ने दोनों हाथों से चूचों को पकड़ा और ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगे। मौसी की सिसकारियाँ बाहर तक आ रही थीं, “आह… जीजाजी… धीरे…” पर पापा कहाँ रुकने वाले थे। वो बोले, “साली, तेरे चूचे तो रंडी जैसे हैं। आज इनका दूध निकाल दूँगा।” मौसी की चूत नीचे नंगी चमक रही थी।
पापा ने एक हाथ नीचे सरकाया और मौसी की चूत पर जोर से थप्पड़ मारा। मौसी उछल पड़ी, “उई… ये क्या कर रहे हो?” पापा हँसे, “तेरी चूत को गरम कर रहा हूँ, रंडी। देख, कितना रस टपक रहा है।” वो अपनी उंगलियाँ मौसी की चूत में घुसा दीं और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगे। मौसी की टाँगें काँपने लगीं, वो दीवार से चिपककर सिसक रही थी, “आह… ऊह… जीजाजी…” पापा ने उंगलियाँ निकालीं और मौसी के मुँह में ठूंस दीं, “चाट, अपनी चूत का स्वाद ले।” मौसी ने उनकी उंगलियाँ चूस लीं।
फिर पापा ने मौसी को घुमाया और उनकी भारी गांड पर ज़ोर का चमाट मारा। गांड लाल हो गई। मौसी चिल्लाई, “आह… मत मारो…” पर पापा बोले, “साली, तेरी गांड तो चोदने के लिए बनी है।” वो नीचे झुके और मौसी की गांड को चाटने लगे। उनकी जीभ गांड के छेद में घूम रही थी। मौसी कसमसा रही थी, “ये क्या गंदा काम कर रहे हो?” पापा हँसे, “गंदा नहीं, मज़ा है। तेरी गांड का स्वाद लंड को पागल कर देगा।” वो उठे और अपना पजामा खोल दिया। उनका लंड बाहर निकला—मोटा, लंबा, नसों से भरा। मौसी देखकर डर गई, “अरे, ये तो बहुत बड़ा है!”
पापा बोले, “बड़ा ही मज़ा देगा, साली। मुँह खोल।” मौसी पीछे हटी, “नहीं, ये मुँह में नहीं लूँगी।” पापा ने उनका सिर पकड़ा और लंड उनके होंठों पर रगड़ दिया, “चूस, रंडी। तेरी दीदी तो पूरा गले तक लेती है।” मौसी ने मुँह बंद रखा, पर पापा ने ज़ोर से सिर दबाया। लंड का सुपारा मौसी के मुँह में घुस गया। मौसी खाँसने लगी, पर पापा ने धक्के मारने शुरू कर दिए। मौसी की आँखों में पानी आ गया, फिर वो धीरे-धीरे चूसने लगी। पापा बोले, “हाँ, ऐसे ही, साली। मुँह को चूत बना दे।”
कुछ देर बाद पापा ने लंड निकाला और मौसी को ज़मीन पर लिटा दिया। उनकी टाँगें फैलाईं और चूत पर लंड रगड़ने लगे। मौसी सिसकारी, “आह… धीरे डालना…” पापा हँसे, “धीरे क्या, साली। तेरी चूत को फाड़ दूँगा।” और एक ज़ोरदार धक्के में आधा लंड अंदर पेल दिया। मौसी चीख पड़ी, “आईई… मर गई!” पापा ने दूसरा झटका मारा और पूरा लंड चूत में ठूंस दिया। मौसी की चीख बाहर तक गूँजी। पापा दनादन चोदने लगे। तप-तप-तप की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। मौसी सिसक रही थी, “आह… ऊह… और करो…”
पापा ने मौसी को पलट दिया। उनकी मोटी गांड ऊपर उठाई और बीच में थूक दिया। लंड को गांड पर सटाया और बोले, “अब तेरी गांड की बारी, रंडी।” मौसी घबरा गई, “नहीं, बहुत बड़ा है। फट जाएगी।” पापा हँसे, “फटने दे, साली। लंड के लिए गांड बनी है।” वो धीरे-धीरे दबाने लगे। मौसी चिल्लाई, “आईई… नहीं…” पर पापा ने एक जोरदार धक्का मारा। लंड आधा गांड में घुस गया। मौसी का मुँह खुला रह गया, और पापा पूरा लंड पेलकर चोदने लगे।
मैं खिड़की से सब देख रही थी। पापा ने मौसी की गांड में पूरा लंड पेल रखा था और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहे थे। मौसी की चीखें कमरे से बाहर तक आ रही थीं, “आह… ऊह… जीजाजी… बस करो…” पर पापा कहाँ रुकने वाले थे। वो बोले, “साली, तेरी गांड तो चूत से भी टाइट है। चोदने में मज़ा आ रहा है।” उनकी कमर तेज़ी से हिल रही थी, और तप-तप-तप की आवाज़ हवा में गूँज रही थी। मौसी के मोटे कूल्हे लाल हो गए थे, और वो ज़मीन पर हाथ मारकर सिसक रही थी।
पापा ने लंड बाहर खींचा और मौसी को उठाकर टेबल पर पटक दिया। उनकी टाँगें हवा में लटक रही थीं। पापा ने उनकी चूत पर फिर से लंड रगड़ा और बोले, “अब तेरी चूत को रगड़ दूँगा, रंडी।” मौसी सिसकारी, “आह… जीजाजी… और चोदो…” पापा ने एक झटके में पूरा लंड चूत में ठूंस दिया। मौसी की आँखें उलट गईं, और वो चिल्लाई, “आईई… मज़ा आ रहा है!” पापा दनादन चोदने लगे। चूत से च्प-च्प-च्प की गीली आवाज़ें आने लगीं। मौसी टेबल पर उछल रही थी, उनके चूचे हवा में लटककर हिल रहे थे।
पापा ने मौसी के चूचों को पकड़ा और ज़ोर से दबाया। निप्पल मसलते हुए बोले, “साली, तेरे चूचे तो दूध से भरे लगते हैं। चूस लूँ क्या?” मौसी हाँफते हुए बोली, “चूस लो… सब तुम्हारा है।” पापा झुके और उनके निप्पल मुँह में भर लिए। ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे, और साथ में चूत चोदते रहे। मौसी की सिसकारियाँ तेज़ हो गईं, “आह… ऊह… और चूसो… और चोदो…” पापा ने एक चूचा छोड़ा और दूसरे को मुँह में लिया, फिर लंड को और तेज़ी से पेलने लगे।
कुछ देर बाद पापा उठे और मौसी को नीचे घुटनों पर बिठा दिया। उनका लंड चूत के रस से चमक रहा था। पापा बोले, “चूस, साली। अपनी चूत का स्वाद चख।” मौसी ने मुँह खोला और लंड को गले तक ले लिया। पापा ने उनके सिर को पकड़कर धक्के मारे। मौसी की आँखें लाल हो गईं, मुँह से लार टपक रही थी। वो गों-गों की आवाज़ निकाल रही थी। पापा हँसे, “हाँ, रंडी। ऐसे चूस जैसे भूखी हो।” मौसी ने लंड को चाटा, चूसा, और फिर सुपारे को होंठों से दबाया।
पापा ने मौसी को फिर से उठाया और टेबल पर उल्टा लिटा दिया। उनकी गांड ऊपर उठी थी। पापा ने लंड पर थूक लगाया और गांड के छेद पर सटाया। मौसी घबरा गई, “नहीं… अब नहीं… फट गई है।” पापा बोले, “चुप, साली। गांड चोदने का मज़ा ही अलग है।” वो ज़ोर से दबाए और लंड पूरा गांड में पेल दिया। मौसी चीख पड़ी, “आईई… मर गई!” पापा ने उनकी कमर पकड़ी और तेज़ी से चोदने लगे। गांड से फच-फच की आवाज़ें आने लगीं। मौसी सिसक रही थी, “आह… ऊह… और करो…”
पापा ने चोदते-चोदते मौसी के कूल्हों पर चमाट मारे। गांड और लाल हो गई। वो बोले, “साली, तेरी गांड तो रंडी की तरह चुदवाती है।” मौसी हाँफते हुए बोली, “हाँ… चोदो… मुझे रंडी बना दो।” पापा ने लंड निकाला और फिर से चूत में डाल दिया। अब वो चूत और गांड बारी-बारी चोद रहे थे। मौसी की सिसकारियाँ चीखों में बदल गईं, “आह… ऊह… जीजाजी… मज़ा आ गया…” पापा दनादन पेलते रहे। कमरा उनकी चुदाई की आवाज़ों से भर गया था।
मैं खिड़की से देख रही थी। पापा मौसी की चूत और गांड बारी-बारी चोद रहे थे। टेबल हिल रहा था, और मौसी की चीखें कमरे में गूँज रही थीं, “आह… ऊह… जीजाजी… और पेलो…” पापा का मोटा लंड चूत से निकलता, फिर गांड में घुसता। उनकी कमर तेज़ी से चल रही थी। मौसी के चूचे टेबल पर रगड़ खा रहे थे, और वो सिसकते हुए बोली, “हाँ… चोदो… मेरी चूत फाड़ दो।” पापा हँसे, “साली, तेरी चूत तो रंडी जैसी चुदक्कड़ है।” वो और ज़ोर से धक्के मारने लगे। च्प-च्प-च्प और फच-फच की आवाज़ें हवा में तैर रही थीं।
पापा ने मौसी को टेबल से उठाया और दीवार से सटा दिया। उनकी एक टाँग ऊपर उठाई और चूत में लंड ठूंस दिया। मौसी दीवार पर चिपक गई, “आईई… मज़ा आ रहा है!” पापा ने उनके चूचों को मुँह में भरा और चूसते हुए चोदने लगे। मौसी की सिसकारियाँ तेज़ हो गईं, “आह… चूसो… और चोदो…” पापा ने निप्पल को दाँतों से काटा और लंड को पूरा अंदर-बाहर करने लगे। मौसी की टाँगें काँप रही थीं, और उनकी चूत से रस टपक रहा था।
फिर पापा ने मौसी को ज़मीन पर घुटनों के बल बिठाया। उनका लंड चूत के रस और थूक से गीला चमक रहा था। पापा बोले, “मुँह खोल, साली। लंड का माल चख।” मौसी ने मुँह खोला, और पापा ने लंड उनके गले तक ठूंस दिया। मौसी खाँस पड़ी, पर पापा ने सिर पकड़कर धक्के मारे। मौसी की लार लंड से टपक रही थी। वो बोली, “आह… कितना मोटा है…” पापा हँसे, “चूस, रंडी। पूरा मुँह में ले।” मौसी ने लंड को चाटा, सुपारे को चूसा, और फिर गले तक लिया।
पापा ने लंड निकाला और मौसी को फिर से टेबल पर पटका। उनकी गांड ऊपर उठाई और लंड को गांड में पेल दिया। मौसी चिल्लाई, “आईई… फट गई!” पापा बोले, “चुप, साली। गांड चोदने का मज़ा ले।” वो तेज़ी से धक्के मारने लगे। मौसी की गांड लाल हो गई, और वो सिसक रही थी, “आह… ऊह… और करो…” पापा ने उनकी कमर पकड़ी और लंड को पूरा अंदर-बाहर किया। कमरे में फच-फच की आवाज़ गूँज रही थी।
अचानक पापा ने लंड निकाला और मौसी की चूत में डालकर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगे। मौसी चीख रही थी, “आह… मज़ा आ गया… और पेलो…” पापा दनादन धक्के मार रहे थे। कुछ देर बाद वो मौसी से लिपट गए। दोनों हाँफ रहे थे। पापा का लंड चूत से निकला, और माल बाहर टपकने लगा। मौसी ने टेबल से उठकर अपनी चूत को कपड़े से पोंछा। पापा बोले, “साली, मज़ा आ गया।” मौसी हँसी, “हाँ, जीजाजी। चुदाई तो तुम मस्त करते हो।” दोनों कपड़े पहनकर लेट गए। लाइट बंद हो गई।
मैं चुपके से खिड़की से हटी और बाथरूम में भागी। दरवाज़ा बंद किया और पैंटी नीचे खींच दी। मेरी चूत पहले से गीली थी। मैंने उंगलियाँ अंदर डालीं और तेज़ी से हिलाने लगी। पापा और मौसी की चुदाई मेरे दिमाग में घूम रही थी—वो मोटा लंड, मौसी की चीखें, चूत और गांड की पेलाई। मैं सिसक रही थी, “आह… ऊह…” उंगलियाँ और गहराई तक गईं। कुछ ही पल में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। मैं हाँफते हुए वहीं बैठ गई।
ये थी पापा और मौसी की गंदी चुदाई की कहानी। अगर मज़ा आया तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करो।