टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए

खुशबू भाभी की चूत की खुशबू

Devar bhabhi ki chdai sex story, Hot neighbor sex story:

अन्तर्वासना पर हिंदी सेक्स कहानियों के सभी पाठकों को संजय का नमस्कार।

मैं दिखने में हल्का सांवला हूं और 5 फुट 10 इंच का गठीला तथा छरहरा शरीर वाला हूं। मैं पिछले दो वर्षों से नियमित रूप से कामुकता भरी कहानियां पढ़ रहा हूं।

बात उन दिनों की है जब मैं एमए की पढ़ाई कर रहा था। उस समय मैं किराए पर कमरा लेकर शहर में रहता था और अपनी पढ़ाई में पूरी तरह व्यस्त रहता था।

पास में ही मेरे कमरे के बगल में एक छोटी सी फैमिली रहती थी। वे केवल दो लोग थे, पति-पत्नी, और अभी नए-नए शादीशुदा यानी न्यू कपल लगते थे।

एक दिन मेरे कमरे में पीने का पानी खत्म हो गया। मैंने सोचा पड़ोस में जाकर थोड़ा पानी ले लूं। दरवाजे पर घंटी बजाई तो थोड़ी ही देर में दरवाजा खुल गया।

जैसे ही दरवाजा खुला, मैं सामने खड़ी एक बेहद सुंदर नवविवाहिता को देखकर ठिठक गया। उसकी उम्र शायद 24-25 साल की होगी। गोरा दूधिया रंग, नुकीली नाक, गुलाबी होंठ और बड़ी-बड़ी आंखें। मैं उसे देखता ही रह गया।

तभी उसने मुस्कुराते हुए पूछा, “क्या काम है?”

मुझे तुरंत होश आया। मैंने थोड़ा हकलाते हुए कहा, “भाभी, मेरे कमरे में पानी खत्म हो गया है। क्या आप थोड़ा पीने का पानी दे सकती हैं?”

वह हल्के से हंसी और बोली, “अरे हां-हां, बिल्कुल। अंदर आ जाओ।”

वह मुझे अंदर आने का इशारा करके अंदर चली गई। मैं उसके पीछे-पीछे कमरे में दाखिल हुआ। घर साफ-सुथरा था, हल्की सी सुगंध फैली हुई थी।

वह किचन की तरफ जाती हुई बोली, “तुम क्या करते हो?”

मैंने जवाब दिया, “पढ़ाई कर रहा हूं, एमए फाइनल ईयर है।”

वह गिलास में पानी भरकर लाई और मुझे थमाते हुए बोली, “अच्छा, पढ़ाई में लगे रहो। अच्छा लड़का लगते हो।”

मैं पानी पीकर थोड़ा सहज हुआ। उसी दौरान बातचीत शुरू हो गई। उसने अपना नाम नहीं बताया, लेकिन मैंने उसे भाभी कहना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे हमारी बातचीत बढ़ने लगी। कभी उसे बाजार से कुछ सामान चाहिए होता तो वह मुझे कॉल कर देती। मैं चला जाता, सामान लाकर दे देता या कोई छोटा-मोटा काम कर देता।

बातों-बातों में पता चला कि उसके पति का बिजनेस है और वे अक्सर बाहर ही रहते हैं, हफ्ते-दस दिन तो कम से कम।

कुछ दिनों बाद उसके पति से भी मुलाकात हो गई। उन्होंने भी मुझसे अच्छे से बात की। इस तरह मैं उनके घर का एकदम विश्वस्त और घरेलू सदस्य जैसा बन गया।

अब तो खाली समय में मैं उनके घर टीवी देखने भी चला जाता। मैं उसे सिर्फ भाभी कहता था। उसका असली नाम मुझे अभी तक नहीं पता था।

एक दिन शाम को करीब पांच बजे मेरे फोन की घंटी बजी। भाभी का कॉल था।

उसने पूछा, “संजय, क्या कर रहे हो?”

मैंने कहा, “कुछ नहीं भाभी, ऐसे ही पढ़ाई कर रहा हूं। लेकिन अब मन नहीं लग रहा।”

वह हल्के से हंसकर बोली, “अरे मेरा भी तो मन नहीं लग रहा। घर में कोई नहीं है, अकेली हूं। तुम किताब लेकर यहां आ जाओ ना। पढ़ाई भी कर लेना और मैं तुमसे बातें करती रहूंगी। मेरा भी मन लग जाएगा।”

मैंने तुरंत हां कह दी और किताब उठाकर उसके घर की तरफ चल दिया।

जैसे ही मैंने दरवाजे पर पहुंचकर घंटी बजाई और दरवाजा खुला, मेरी सांसें थम सी गईं।

आज भाभी कुछ अलग ही लग रही थीं। उन्होंने सफेद रंग की हल्की पारदर्शी नाइटी पहनी हुई थी। नाइटी इतनी पतली थी कि अंदर की लाल रंग की ब्रा और पैंटी साफ-साफ दिख रही थी।

उसका गोरा दूधिया बदन नाइटी के नीचे से झांक रहा था। गहरी गर्दन वाली नाइटी में उसकी चूचियां उभरी हुई लग रही थीं। होंठ सुर्ख लाल लग रहे थे, जैसे अभी-अभी लिपस्टिक लगाई हो। बाल खुले हुए थे और हल्की सी खुशबू फैली हुई थी। वह सचमुच अप्सरा जैसी दिख रही थी।

मैं उसे देखता ही रह गया। मेरी नजरें उसकी छाती पर, कमर पर, जांघों पर टिक गईं।

तभी भाभी ने मुझे टोका, “क्या हुआ संजय? इतने गौर से क्या देख रहे हो? मुझे पहले कभी नहीं देखा क्या?”

उनकी आवाज में हल्की शरारत थी। मैंने नजरें मिलाते हुए कहा, “आज आप कुछ ज्यादा ही सुंदर दिख रही हैं भाभी।”

वह खुश होकर मुस्कुराई और बोली, “सच में?”

मैंने कहा, “हां भाभी, बिल्कुल सच।”

वह हंसते हुए मुझे अंदर आने को बोली और सोफे पर बैठने को कहा। फिर चाय बनाने के लिए किचन में चली गई।

थोड़ी देर बाद वह चाय लेकर आई। हम दोनों पास-पास सोफे पर बैठ गए। चाय पीते हुए टीवी देखने लगे।

कुछ देर सन्नाटा रहा। फिर उसने पूछा, “आज तुम इतने शांत-शांत क्यों हो?”

मैंने कहा, “कुछ नहीं भाभी। बस आज आप बहुत सुंदर लग रही हैं, मन उसी में लगा हुआ है।”

वह मुस्कुराई और शरारत भरी नजरों से बोली, “तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?”

मैंने कहा, “नहीं भाभी।”

वह बोली, “इतने स्मार्ट और अच्छे दिखते हो, फिर गर्लफ्रेंड क्यों नहीं बनाई?”

मैंने हंसते हुए कहा, “कोई इतनी सुंदर लड़की मिली ही नहीं।”

वह अर्थपूर्ण ढंग से मुस्कुराई और बोली, “तो क्या मैं तुम्हें सुंदर लगती हूं?”

मैंने बिना सोचे कहा, “आप तो बहुत सुंदर हैं भाभी।”

वह और करीब आकर बोली, “ठीक है। तो आज से तुम मुझे ही अपना गर्लफ्रेंड बना लो।”

मैं मुस्कुराया और बोला, “आप मजाक कर रही हैं ना?”

वह गंभीर होकर बोली, “नहीं संजय, मैं मजाक नहीं कर रही। क्या तुम मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाओगे?”

मैंने तुरंत कहा, “हां भाभी।”

इसके बाद भाभी ने मुझे सोफे पर बैठने को कहा और खुद चाय बनाने के लिए किचन की तरफ चली गईं। मैं सोफे पर बैठकर इंतजार करने लगा। घर में हल्की सी खामोशी थी, सिर्फ किचन से चाय बनाने की आवाजें आ रही थीं। मेरी नजरें बार-बार उसी तरफ जा रही थीं जहां भाभी गई थीं।

थोड़ी ही देर में भाभी दो कप चाय लेकर वापस आईं। उन्होंने ट्रे पर चाय के साथ कुछ बिस्किट भी रखे थे। वह मेरे बगल में सोफे पर बैठ गईं, इतने करीब कि हमारी जांघें हल्के से छू रही थीं। हम दोनों ने चाय के कप हाथ में लिए और टीवी की तरफ देखने लगे। टीवी पर कोई रोमांटिक सीन चल रहा था, लेकिन मेरी सारी तवज्जो भाभी पर ही थी।

कुछ देर तक दोनों चुपचाप चाय पीते रहे। फिर अचानक भाभी ने कप टेबल पर रखा और मेरी तरफ मुड़कर बोली, “आज तुम इतने शांत-शांत क्यों हो संजय? कुछ बात है क्या?” उनकी आवाज में हल्की चिंता और शरारत दोनों थीं।

मैंने भी अपना कप साइड में रखा और थोड़ा झिझकते हुए कहा, “कुछ नहीं भाभी… बस आज आप बहुत ज्यादा सुंदर लग रही हैं। मन उसी में अटका हुआ है।”

भाभी की आंखों में चमक आ गई। वह हल्के से मुस्कुराईं और मेरी तरफ थोड़ा और झुककर बोलीं, “सच में? अच्छा, तो बताओ ना… तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?”

मैंने सिर हिलाकर कहा, “नहीं भाभी, कोई नहीं है।”

वह और करीब आ गईं। उनकी सांसें मेरे गाल पर महसूस हो रही थीं। बोलीं, “अरे वाह! इतने स्मार्ट, इतने अच्छे दिखते हो… फिर गर्लफ्रेंड क्यों नहीं बनाई? कोई वजह?”

मैंने हंसते हुए कहा, “कोई आज तक इतनी सुंदर लड़की मिली ही नहीं भाभी।”

भाभी की मुस्कान गहरी हो गई। उन्होंने अर्थपूर्ण नजरों से मुझे देखा और धीरे से बोलीं, “तो क्या… मैं तुम्हें सुंदर लगती हूं?”

मैंने बिना हिचकिचाहट के कहा, “आप तो बहुत सुंदर हैं भाभी। सच में, आज तो आप अप्सरा जैसी लग रही हैं।”

भाभी ने हल्के से मेरी बांह पर हाथ रखा। उनकी उंगलियां गर्म थीं। फिर अर्थपूर्ण ढंग से मुस्कुराते हुए बोलीं, “ठीक है… तो आज से तुम मुझे ही अपना गर्लफ्रेंड बना लो। क्या कहते हो?”

मैं मुस्कुराया और थोड़ा मजाक में बोला, “आप मजाक कर रही हैं ना भाभी?”

वह गंभीर होकर मेरी आंखों में देखकर बोलीं, “नहीं संजय, मैं बिल्कुल मजाक नहीं कर रही। क्या तुम मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाओगे? हां या ना?”

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने तुरंत कहा, “हां भाभी… हां!”

मेरी हां सुनते ही भाभी की आंखों में चमक बढ़ गई। वह मेरे और करीब सरक आईं, इतने करीब कि उनकी सांसें मेरे होंठों पर लग रही थीं। हम दोनों फिर से चाय पीने लगे, लेकिन अब बातें हल्की-फुल्की और शरारती हो गई थीं।

तभी अचानक भाभी ने चाय का कप साइड में रख दिया और मुझे घूरने लगीं। वह बस मुझे ही देख रही थीं, जैसे कुछ पढ़ रही हों मेरे चेहरे पर। मैं थोड़ा शरमा गया और पूछा, “क्या हुआ? क्या देख रही हैं इतनी ध्यान से?”

भाभी ने तिरछी नजरों से मुस्कुराते हुए कहा, “तुम कितने मासूम हो… कितने सीधे-सादे हो… लेकिन बहुत सेक्सी भी हो संजय।” उनकी आवाज में एक अजीब सी मादकता थी।

मैं समझ गया कि अब माहौल बदल रहा है। मैंने भी हिम्मत करके कहा, “आप भी तो कम सेक्सी नहीं हैं भाभी।”

यह सुनकर हम दोनों जोर से हंस पड़े। हंसी में ही भाभी ने मेरी बांह पर हल्का सा थप्पड़ मारा।

फिर अचानक माहौल शांत हो गया। मैंने देखा कि रास्ता साफ है। धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उनकी बांह पर रख दिया। मेरी उंगलियां उनकी मुलायम त्वचा पर फिसलने लगीं। मैंने धीरे-धीरे उनकी बांह को ऊपर से नीचे तक सहलाना शुरू किया। पहले कंधे से कोहनी तक, फिर कोहनी से कलाई तक। उनकी त्वचा इतनी नरम थी कि छूते ही सिहरन हो रही थी।

भाभी की सांसें तेज हो गईं। उनकी आंखें आधी बंद हो गईं। वह मदहोश होती जा रही थीं। फिर धीरे-धीरे उन्होंने अपना चेहरा मेरे चेहरे के करीब लाया। उनके होंठ मेरे होंठों के इतने पास थे कि मैं उनकी गर्म सांस महसूस कर रहा था।

मैंने भी हिम्मत की और अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए। पहले हल्का सा स्पर्श, फिर धीरे-धीरे हम एक-दूसरे के होंठ चूसने लगे। उनका होंठ बहुत नरम और गर्म था। मैंने उनके निचले होंठ को हल्के से दांतों से दबाया, फिर चूसा। भाभी ने भी मेरे ऊपरी होंठ को चूसा और अपनी जीभ से मेरे होंठों को सहलाया।

होंठ चूसते हुए मेरा एक हाथ उनकी पीठ पर चला गया। मैंने उनकी पीठ को धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया, ऊपर से नीचे तक। उनकी नाइटी के ऊपर से भी उनकी कमर की गर्मी महसूस हो रही थी। भाभी ने अपना हाथ मेरे सिर पर रख दिया। उनकी उंगलियां मेरे बालों में फिसल रही थीं, कभी हल्के से खींच रही थीं, कभी सहला रही थीं।

कुछ ही पलों में हमारा चुंबन और गहरा हो गया। अब हम पूरे जोश और उत्साह के साथ एक-दूसरे के होंठ चूस रहे थे। मेरी जीभ उनकी जीभ से टकरा रही थी, फिर लिपट रही थी। मैं उनकी जीभ को हल्के से चूसता, सहलाता, और वे भी मेरी जीभ को अपनी जीभ से घेरकर खेल रही थीं। यह स्पर्श इतना कामुक था कि दोनों के शरीर में सिहरन दौड़ रही थी। हम दोनों को इसमें इतना मजा आ रहा था कि समय का पता ही नहीं चल रहा था।

यह सिलसिला करीब दस मिनट तक चलता रहा। हमारे होंठ अलग नहीं हो रहे थे, सांसें तेज हो चुकी थीं, और शरीर गर्माहट से भर चुके थे। अब हम दोनों पूरी तरह उत्तेजित हो चुके थे। मेरे हाथ उनकी पीठ पर तेजी से घूम रहे थे, और उनकी उंगलियां मेरे बालों को मजबूती से पकड़ रही थीं।

तभी मैंने फैसला किया कि अब और इंतजार नहीं। मैंने धीरे से उनके शरीर को गोद में उठा लिया। भाभी हल्के से चीखीं लेकिन मुस्कुरा भी दीं। उनकी बाहें मेरी गर्दन में लिपट गईं। मैं उन्हें गोद में लेकर बेडरूम की तरफ चल पड़ा। बेडरूम में पहुंचते ही मैंने उन्हें धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया। खुद भी उनके बगल में लेट गया और फिर से चुंबन शुरू कर दिया।

भाभी भी पूरी जोश में थीं। वे मुझे वापस किस कर रही थीं। मैंने पहले उनके होंठों को फिर से चूमा, फिर धीरे-धीरे उनकी आंखों पर, बंद पलकों पर, गालों पर, ठोड़ी पर। हर चुंबन के साथ वे सिसकारी भर रही थीं। मैं उनके गालों को चूमता, हल्के से दांतों से काटता, और वे मेरी गर्दन, कानों को चूम रही थीं।

चुंबन करते-करते मैंने धीरे-धीरे उनके कपड़े उतारने शुरू किए। पहले उनकी नाइटी को ऊपर से खींचा और सिर से निकाल दिया। फिर अपनी शर्ट उतारी, पैंट उतारी। अब वे केवल लाल ब्रा और पैंटी में थीं, और मैं केवल अंडरवियर में। हम दोनों एक-दूसरे के नंगे बदन को महसूस कर रहे थे। उनकी त्वचा इतनी मुलायम और गर्म थी कि छूते ही मन और उत्तेजित हो जाता।

मैंने फिर से चुंबन शुरू किया। अब नीचे की तरफ बढ़ते हुए उनके गले पर पहुंचा। मैंने उनके गले को चूमा, हल्के से चाटा, और फिर ब्रा के ऊपर से ही उनके दोनों मम्मों को किस करने लगा। ब्रा के कपड़े के ऊपर से भी उनकी चूचियां सख्त और उभरी हुई महसूस हो रही थीं। मैंने ब्रा के ऊपर से ही निप्पल को होंठों से दबाया, हल्के से चूसा। भाभी की आंखें अब पूरी तरह बंद हो चुकी थीं। वे आनंद में हल्की-हल्की सिसकारियां भर रही थीं, “आह… संजय… उफ्फ…”

फिर मैंने उन्हें हल्का सा करवट दिया और ब्रा की हुक खोल दी। ब्रा धीरे से निकालकर फेंक दी। अब उनके उरोज पूरी तरह नंगे थे। मैं पहली बार किसी लड़की के नंगे मम्मों को इतने करीब से देख रहा था। उनकी चूचियां गोल, भरी हुई और बेहद सुंदर थीं। गुलाबी निप्पल तने हुए और नुकीले हो चुके थे। वे इतनी कामुक लग रही थीं कि किसी भी आदमी का लंड खड़ा हो जाए, चाहे वह कितना भी बुजुर्ग क्यों न हो।

मैंने धीरे से एक स्तन पर होंठ रखे। पहले हल्का सा चुंबन किया, फिर निप्पल को होंठों के बीच में लेकर हल्के से दबाया और खींचा। भाभी चिहुंक पड़ीं, “आह्ह…!” उनकी पीठ थोड़ी ऊपर उठ गई। वे अपने निप्पल को और ज्यादा मेरे मुंह में देने के लिए आतुर हो उठीं। मैंने भी जोश में आकर उसे चूसना शुरू कर दिया। एक तरफ चूसता, दूसरी तरफ हाथ से सहलाता। कभी हल्के से दांतों से काटता, कभी जीभ से घुमाता। भाभी की सिसकारियां बढ़ती जा रही थीं।

कुछ मिनट तक दोनों मम्मों को बारी-बारी चूसने के बाद मैं नीचे की तरफ बढ़ा। उनकी गहरी नाभि पर पहुंचा। जीभ डालकर नाभि को चाटा, चूमा। भाभी की उंगलियां मेरे बालों में फंस गईं। वे मेरे सिर को सहला रही थीं, कभी हल्के से दबा रही थीं। मुझे भी बहुत मजा आ रहा था।

अब मैं और नीचे गया। पैंटी के पास पहुंचते ही भाभी की चूत की मदहोश करने वाली खुशबू मेरी नाक में घुसी। वह इतनी मादक थी कि मेरा सिर चकरा गया। मैंने पैंटी पर ही होंठ रख दिए। पैंटी पूरी गीली थी। चूतरस से सराबोर कपड़े पर जीभ फेरने लगा। स्वाद मीठा-नमकीन था, जो मुझे और मदहोश कर रहा था।

भाभी अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थीं। वे मेरे सिर को अपनी चूत की तरफ जोर-जोर से दबा रही थीं। लेकिन मैं उन्हें और तड़पाना चाहता था। इसलिए मैंने उनकी जांघों को चूमना-चाटना शुरू किया। अंदरूनी जांघों पर जीभ फेरता, हल्के से काटता। फिर धीरे-धीरे नीचे पैरों की तरफ गया और उनके तलवों को भी चूमा। भाभी अब आंखें खोलकर मुझे प्यासी नजरों से देख रही थीं। उनकी आंखों में बस यही लिखा था – अब तड़पाओ मत संजय, मुझे चोद डालो।

मैंने उनकी पैंटी को धीरे-धीरे नीचे खींचना शुरू किया। पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत की उभार साफ दिख रही थी। जैसे ही पैंटी नीचे खींची, एक लिसलिसा तार बनकर खिंचा – उनका चूतरस। यह देखकर पता चल गया कि वे पहले ही एक बार झड़ चुकी थीं।

पैंटी पूरी निकालकर फेंक दी। अब उनकी चूत पूरी नंगी थी। मैंने ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा था। उनकी चूत गुलाबी, क्लीन शेव, चिकनी और रस से चमक रही थी। मादक खुशबू से मैं मदहोश हो रहा था। मैं कुछ देर बस उसे देखता रहा।

फिर धीरे-धीरे अपनी जीभ उनकी चूत पर फेरी। जैसे ही जीभ लगी, भाभी उछल पड़ीं। “आह्ह… संजय…!” मैंने पूछा, “क्या हुआ?” वे बोलीं, “कुछ नहीं… बस… जारी रखो…” और मेरे सिर को फिर से दबाने लगीं।

मैंने दोनों अंगूठों से उनकी चूत के होंठ खोले और जीभ अंदर तक घुसाई। जहां तक जीभ जा सकती थी, चाटता रहा। उनका रस मेरे मुंह में भर रहा था। मैं उसके क्लिटोरिस पर जीभ घुमाता, चूसता। भाभी की सिसकारियां अब जोरदार हो गई थीं। उनके पैर मेरे दोनों तरफ फैले थे, और मैं उनके बीच में मुंह लगाए पड़ा था।

कुछ मिनट तक चूत चूसने के बाद उनका शरीर अकड़ने लगा। उनकी कमर ऊपर उठी, पैर कांपने लगे। थोड़े ही पलों में वे मेरे मुंह में ही जोर से झड़ गईं। गर्म रस की पिचकारी मेरे मुंह में आई। मैंने उसे मजे से पी लिया।

भाभी निढाल होकर लेट गईं। उनकी सांसें तेज थीं। मैं उनके पास आया, उन्हें होंठों पर किस किया। थोड़ी ही देर में वे फिर से तैयार हो गईं।

अब मेरा भी मन बिल्कुल नहीं मान रहा था। लंड पहले से ही पूरी तरह खड़ा और सख्त हो चुका था। अब बस एक ही इच्छा थी – भाभी को पूरी तरह चोद डालूं। मैंने धीरे से उनके नीचे की तरफ अपना शरीर सरकाया। उनकी दोनों टांगों को पकड़ा और धीरे-धीरे अपने कंधों पर रख लिया। अब उनकी चूत मेरे लंड के बिल्कुल सामने थी, गीली, चमकती हुई और तैयार।

मैंने अपना लंड हाथ में लिया और धीरे-धीरे उसकी चूत पर घिसना शुरू किया। पहले चूत के दाने यानी क्लिटोरिस पर लंड का सुपारा रगड़ता रहा। भाभी की सिसकारियां फिर से शुरू हो गईं। “आह… संजय… कितना अच्छा लग रहा है…” मैंने कुछ पल इसी तरह रगड़ा। उनका रस मेरे लंड पर लग रहा था, गर्म और चिपचिपा। हर रगड़ के साथ भाभी की कमर थोड़ी ऊपर उठ रही थी।

फिर मैंने लंड को चूत के मुंह पर सेट किया और हल्का सा धक्का दिया। लेकिन उनकी चूत इतनी टाइट थी कि सिर्फ सुपारा ही अंदर गया और आगे नहीं बढ़ रहा था। भाभी ने हल्की सी कराह की, “उफ्फ… धीरे… बहुत टाइट है…” मैंने फिर कोशिश की, लेकिन पूरा नहीं जा रहा था।

तब मैंने उनसे पूछा, “भाभी, कोई क्रीम है क्या? इससे आसान हो जाएगा।”

भाभी मेरी तरफ देखकर जोर से हंस पड़ीं। हंसते हुए बोलीं, “अरे संजय, इतनी जल्दी में हो? पहली बार है क्या? हाहा… लगता है तुम्हें बहुत तड़प रही है मेरी चूत।” वे ताने मार रही थीं, लेकिन उनकी आंखों में शरारत और प्यार दोनों थे।

थोड़ी देर बाद उन्होंने बगल की टेबल की दराज की तरफ इशारा किया और बोलीं, “वहां दराज में वेसलीन की डिब्बी है। ले आओ।”

मैंने जल्दी से दराज खोला, डिब्बी निकाली और ढेर सारी क्रीम अपने लंड पर लगा ली। फिर उनकी चूत के मुंह पर भी अच्छे से क्रीम फैलाई। अंगूठे से थोड़ी क्रीम अंदर भी डाली ताकि आसानी हो। भाभी की चूत अब चमक रही थी और रस के साथ क्रीम मिलकर और ज्यादा लिसलिसी हो गई थी।

अब मैंने फिर से उनकी दोनों टांगों को उठाया और कंधों पर रख लिया। लंड को चूत पर सेट किया और इस बार धीरे लेकिन मजबूती से धक्का दिया। पहले धक्के में सुपारा आसानी से अंदर चला गया। भाभी ने आह भरी, “आह्ह… हां… ऐसे ही…”

दूसरे धक्के में आधा लंड अंदर घुस गया। उनका चूत का खिंचाव महसूस हो रहा था। तीसरे जोरदार झटके में मैंने पूरा लौड़ा जड़ तक घुसा दिया। अब मेरा पूरा लंड उनकी चूत में था। अंदर का गर्माहट, टाइट खिंचाव और नमी – यह सब इतना आनंददायक था कि शब्दों में बयान नहीं कर सकता।

मैंने कुछ पल ऐसे ही रहने दिया। लंड अंदर रखकर बस महसूस करता रहा। भाभी की चूत मेरे लंड को चारों तरफ से जकड़े हुए थी। उनकी दीवारें लंड पर दबाव डाल रही थीं। मैंने धीरे से अंदर-बाहर करना शुरू किया।

उधर भाभी भी रुक नहीं रही थीं। वे अपनी चूतड़ों को जोर-जोर से ऊपर उठा-उठाकर धक्के दे रही थीं। मैंने भी उनके साथ ताल मिलाई। अब हम दोनों की चुदाई का रिदम बन गया था।

कुछ मिनट तक ऐसे ही चलता रहा। फिर हमारी रफ्तार बढ़ गई। मैं तेज-तेज धक्के मारने लगा। हर धक्के में पूरा लंड अंदर-बाहर हो रहा था। भाभी की सिसकारियां अब जोरदार हो गईं – “आह… संजय… जोर से… चोदो मुझे… हां… ऐसे ही…”

तभी मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूं। मैंने रुकते हुए कहा, “भाभी… अब मैं झड़ने वाला हूं…”

भाभी ने मेरी कमर को पैरों से जकड़ लिया और बोलीं, “अंदर ही झड़ना… काफ़ी मजा आ रहा है… अपने छोटू को बाहर मत निकालना मेरी जान… अंदर ही भर दो…”

यह सुनकर मेरा जोश और बढ़ गया। कुछ ही पलों में मेरी छूट शुरू हो गई। गर्म वीर्य की धारें उनकी चूत में जा रही थीं। साथ ही भाभी भी झड़ गईं। उनकी चूत सिकुड़ रही थी, मेरे लंड को दबा रही थी। अंदर गीलापन और गर्मी महसूस हुई। हम दोनों एक साथ खल्लास हो गए।

कुछ देर हम दोनों बेसुध पड़े रहे। सांसें तेज थीं, शरीर पसीने से तर। फिर होश आया तो मैंने हंसते हुए कहा, “अब नंगे ही किचन में जाओ और चाय बनाकर पिलाओ।”

भाभी हंस पड़ीं। बोलीं, “अच्छा जी, जैसा तुम कहो।” वे मेरी आंखों के सामने उठीं, नंगी ही बाथरूम की तरफ गईं। फ्रेश होकर सीधे रसोई में चली गईं।

दोस्तो, उन्हें पूरी तरह नंगी देखकर बहुत अच्छा लग रहा था। उनकी गोरी देह, चमकती चूत, हिलते मम्मे – पहली बार कोई लड़की मेरे सामने ऐसे बिना किसी शर्म के नंगी घूम रही थी। यह नजारा देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा।

थोड़ी देर में भाभी सैंडविच और चाय लेकर वापस आईं। मुझे लंड खड़ा देखकर वे मुस्कुराईं और बोलीं, “फिर से तैयार हो गए?”

हम दोनों सोफे पर बैठ गए। चाय पीते हुए मैंने पहले सैंडविच उन्हें खिलाया, फिर उनका झूठा मैंने खाया।

मैंने पूछा, “मजा आया भाभी जी?”

भाभी ने मेरी तरफ देखकर कहा, “क्या बार-बार भाभी-भाभी बोल रहे हो? अब मुझे मेरे नाम से बुलाओ। मुझे अच्छा लगेगा।”

मैंने पूछा, “किस नाम से पुकारूं तुमको?”

उन्होंने मुस्कुराकर कहा, “खुशबू।”

अब हम दोनों एक-दूसरे को नाम लेकर बुलाने लगे – संजय और खुशबू।

मैंने पूछा, “तुमने अपने पति के होते हुए मुझसे सेक्स क्यों किया?”

खुशबू बोलीं, “मैं तुम्हें अपना दिल दे बैठी थी संजय। तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो। तुम मुझसे वादा करो कि जब भी मैं बुलाऊंगी, तुम आओगे और मुझसे ऐसे ही प्यार करते रहोगे।”

मैंने तुरंत वादा किया। फिर कपड़े पहनने लगा।

तभी खुशबू बोलीं, “कहां जा रहे हो?”

मैंने कहा, “अपने कमरे में।”

वे बोलीं, “नहीं… आज यहीं रह जाओ। मेरे पति 4-5 दिन के लिए बाहर गए हैं।”

मैं वहीं रुक गया। उस रात हमने खूब मस्ती की।

इसके आगे क्या हुआ, वह आगे की कहानी में लिखूंगा।

दोस्तो आपको मेरी सच्ची सेक्स कहानी कैसी लगी अपनी प्रतिक्रिया ज़रूर दें।

टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए