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चाचाजी ने अस्पताल में मेरी चुदाई की

Uncle niece sex story, Chacha Bhatiji chudai sex story, Hospital chudai sex story, Mota lund chudai sex story: हाय मेरा नाम ज्योति है। मेरी उम्र 23 साल है। मैं अरितसर की रहने वाली हूं। अभी बी.कॉम थर्ड ईयर में पढ़ती हूं। मुझे पढ़ाई बहुत पसंद है और सेक्स करना तो मुझे और भी ज्यादा अच्छा लगता है। मेरा फिगर 34-28-36 है। मेरे स्तन बहुत टाइट हैं और मेरी गांड भरी-भरी और गोल-गोल है। जब भी मैं चलती हूं तो लोग पीछे मुड़-मुड़ कर देखते रहते हैं। स्कूल के समय से ही मेरे कई अफेयर रहे हैं। लगभग सभी लड़के मेरे पीछे पड़े रहते थे और मैं कई से चुद चुकी थी।

अब असली कहानी पर आती हूं। हम घर में तीन सदस्य हैं – मम्मी, पापा और मैं। मेरे एक चाचाजी हैं जिनका नाम राजू है। उनकी उम्र करीब 33 साल होगी। वो दिखने में बहुत जवान और आकर्षक लगते हैं। वो डॉक्टर हैं और उनका अपना अस्पताल है। हमारे घर उनका बहुत आना-जाना रहता है। घरवाले उन्हें बहुत पसंद करते हैं और मुझे भी। उनकी शादी हो चुकी है लेकिन उनकी वैवाहिक जिंदगी खुश नहीं है।

बात उस दिन की है जब सुबह मैं कॉलेज जाने के लिए तैयार हो रही थी। चाचाजी घर आ गए और मम्मी से बातें करने लगे। जैसे ही मैं ऊपर से नीचे आई और मम्मी को बताने गई कि मैं कॉलेज जा रही हूं, मैंने देखा कि चाचाजी मुझे सिर से पांव तक घूर रहे हैं। उनकी नजर खासकर मेरे स्तनों पर टिकी हुई थी। मैंने लाल रंग की स्लीवलेस टॉप और जींस की कैपरी पहनी हुई थी। मैंने उन्हें गुड मॉर्निंग कहा तो उन्होंने मुस्कुराते हुए गुड मॉर्निंग बोला और मैं वहां से चली गई।

मुझे पहले कभी चाचाजी ने ऐसे नहीं देखा था। सारा दिन मैं कॉलेज में उनके बारे में सोचती रही। इतने में मेरे बॉयफ्रेंड का मैसेज आया कि कॉलेज के बाथरूम में मिलो, कुछ करना है। मैंने लेक्चर बंक करके बाथरूम में जाकर मिली। वहां उसने मुझे पकड़ा और जोर-जोर से किस करने लगा। मैं भी उसका साथ देने लगी। थोड़ी देर बाद उसने मेरी टॉप में हाथ डाला और मेरे 34 के स्तनों को दबाने लगा। मैं गर्म होने लगी थी लेकिन वहां ज्यादा कुछ नहीं कर सकते थे। मैंने उसका लंड निकाला और नीचे बैठकर चूसने लगी। वो सिसकारियां भरने लगा। वो नशे में चूर हो गया और बोला, ज्योति तुम्हारी ये अदा मुझे पागल कर देती है, आह्ह्ह्ह… मैं झड़ने वाला हूं। मैंने कहा, राजा मेरे मुंह में झाड़ दो। उसने पट-पट करके सारा पानी मेरे मुंह में डाल दिया। फिर उसने मुझे फिर से किस किया और हम बाहर निकल गए।

कॉलेज की छुट्टी होने के बाद जब मैं अपनी फ्रेंड्स के साथ बाहर आई तो देखा कि चाचाजी अपनी कार में मेरा इंतजार कर रहे हैं। मैं अनजान बनकर जा रही थी कि पीछे से उनकी आवाज आई, ज्योति कहां जा रही हो? मैंने कहा, घर जा रही हूं। उन्होंने कहा, आओ मैं छोड़ देता हूं, मैं भी उधर ही जा रहा हूं। मुझे थोड़ी गड़बड़ लगी लेकिन मैंने हां कर दी। रास्ते में वो मुझसे फ्रैंक होने की कोशिश करते रहे। उन्होंने पूछा, ज्योति तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है? मैंने कहा नहीं। उन्होंने कहा, शर्मा मत, मुझे फ्रेंड समझो और बेफिक्र होकर बता दो। मैंने फिर भी मना किया। उन्होंने कहा, इतनी खूबसूरत लड़की का कोई बॉयफ्रेंड कैसे नहीं हो सकता। मैं मुस्कुराई और वो भी मुस्कुराए। मुझे समझ आने लगा कि चाचाजी किस चक्कर में हैं। लेकिन मैं भी चालाक हूं। मैंने सोचा अगर सच में चक्कर है तो क्यों न एंजॉय कर लूं, वैसे भी मैं अपने बॉयफ्रेंड से बोर हो चुकी हूं।

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घर पहुंचकर मैं कार से उतरी। कार के शीशे पर कोहनी रखकर झुकी तो मेरी टॉप से स्तनों का क्लिवेज साफ दिख रहा था। मैंने सेक्सी अंदाज में कहा, बाय चाचाजी। उन्होंने मेरे स्तनों को देखते हुए कहा, बाय ज्योति। अब मेरा पक्का इरादा हो गया था कि चाचाजी से चुदाई करवानी है। मैं मौके का इंतजार करने लगी। मैंने तय किया कि अब मैं उन्हें तड़पाऊंगी और वो खुद मेरे पास आएंगे।

अगले दिन सुबह चाचाजी फिर घर आए। मैंने आज बहुत सेक्सी ड्रेस पहनी थी। व्हाइट सैंडो और जींस की छोटी शॉर्ट्स। मैं कैटवॉक करते हुए उनके पास आई। चाचाजी मुझे देखते रह गए। मैंने मुस्कुराकर कहा, गुड मॉर्निंग चाचाजी। उन्होंने कहा, सेम टू यू ज्योति। जैसे ही मैं पीछे मुड़ी तो वो मेरी गांड को घूरने लगे। मैं तिरछी नजर से देख रही थी और मन ही मन खुश हो रही थी।

कॉलेज में सारे लड़के मुझे घूर रहे थे लेकिन मैं उन्हें इग्नोर कर रही थी। सारा दिन चाचाजी के बारे में सोचती रही। छुट्टी के बाद बाहर आई तो चाचाजी फिर इंतजार कर रहे थे। मैं जान-बूझकर कैटवॉक करती हुई गई। उन्होंने कहा, आओ ज्योति मैं छोड़ देता हूं। मैंने पूछा, क्या आप स्पेशल मेरे लिए आते हैं? उन्होंने कहा, नहीं काम के सिलसिले में आता हूं। रास्ते में गियर बदलते वक्त उनकी नजर मेरी टाइट्स पर जाती। मैंने कहा, चाचाजी बहुत गर्मी लग रही है। मैंने अपनी टांगें कार में फैला लीं, टांगें खोलकर बैठ गई जैसे अभी मेरी चूत में लंड आने वाला हो। चाचाजी हैरान हो गए। उन्होंने कहा, क्या बात है ज्योति? मैंने कहा, कुछ नहीं चाचाजी, गर्मी लग रही है। वो बार-बार मेरी चूत की तरफ देखने की कोशिश करते। घर पहुंचकर मैंने फिर स्तन दिखाकर बाय बोला।

उस दिन मैंने प्लान बनाया कि पेट दर्द का बहाना करके चाचाजी के अस्पताल जाऊंगी। शाम को मैं जोर-जोर से रोने लगी कि पेट में बहुत दर्द हो रहा है। मम्मी ने पापा को कॉल किया और पापा मुझे अस्पताल ले गए। मैं वही ड्रेस पहने थी। चाचाजी के केबिन में बैठे थे। चाचाजी ने मुझे चेकअप रूम में जाने को कहा। पापा भी आने लगे तो चाचाजी ने मना किया कि घबराने की कोई बात नहीं, आप यहीं रहिए।

चाचाजी मेरे पास आए और बोले, ज्योति यहां लेट जाओ। मैं लेट गई। उन्होंने पूछा, कहां दर्द हो रहा है? मैंने कहा, यहां पेट में। मैंने टॉप ऊपर कर दी जहां स्तन शुरू होते हैं। मेरी ब्लैक ब्रा की पट्टी दिखने लगी। उन्होंने हाथ मेरे पेट पर रखा। मैं जान-बूझकर सिसकारी भरने लगी। उन्होंने पूछा, क्या हुआ? मैंने कहा, चाचाजी यहां नहीं, थोड़ा ऊपर हो रहा है। उन्होंने हाथ ऊपर किया। मैंने कहा, थोड़ा और ऊपर। उनका हाथ मेरे स्तनों के नीचे पहुंचा। मैंने कहा, थोड़ा और ऊपर। उन्होंने पूछा, कहां हो रहा है ज्योति? मैंने उनका हाथ पकड़ा और अपने स्तनों पर रख दिया। बोली, यहां हो रहा है चाचाजी। उनका हाथ कांप रहा था। मैं मन ही मन खुश थी। मेरा प्लान काम कर रहा था।

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उन्होंने पूछा, कैसे दर्द है? मैंने कहा, पता नहीं कुछ अजीब-सा दर्द हो रहा है। उन्होंने मेरी टॉप ऊपर कर दी और स्तनों को दबाने लगे। मैं नाटक करने लगी और बोली, चाचाजी ये आप क्या कर रहे हैं, आपको शर्म नहीं आ रही? उन्होंने कहा, ज्योति मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूं, प्लीज किसी को मत बताना। मैंने कहा, हां बोलो। उन्होंने कहा, मैं तुमसे प्यार करता हूं, तुम्हारे बिना एक पल नहीं रह सकता, आई लव यू। मैंने गुस्से से कहा, चाचाजी मैं आपकी लड़की की उम्र की हूं। उन्होंने कहा, मुझे पता है लेकिन प्यार तो हो जाता है। अब मेरी बारी थी। मैंने कहा, कोई बात नहीं, मैं आपकी फीलिंग्स की कद्र करती हूं। मैं मुस्कुराई। चाचाजी समझ गए कि मैं हां कर रही हूं।

उन्होंने मेरी ब्रा ऊपर की और स्तनों को दबाने लगे। मेरे होंठ चूसने लगे। मैं मजा ले रही थी। अचानक याद आया कि पापा बाहर हैं। मैंने कहा, पापा वेट कर रहे होंगे। उन्होंने कहा, अब क्या करें? मैंने कहा, आप पापा से कहना कि मेरी प्रॉब्लम बहुत बड़ी है, ऑपरेशन होगा। कल का टाइम दे दो। जब हम आएं तो किसी ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर जो मर्जी कर लेना। चाचाजी बहुत खुश हो गए और बोले, मान गई तुझे ज्योति। मैंने कहा, कोई बात नहीं राजू।

हम कपड़े ठीक करके बाहर गए। पापा ने पूछा, क्या हुआ? चाचाजी ने कहा, प्रॉब्लम बहुत बड़ी है, कल इसका ऑपरेशन करवा लीजिए। पापा मान गए। मैंने जान-बूझकर मना किया ताकि शक न हो। आखिर में मैंने हां कर दी। रात को मैं सोच-सोचकर अपनी चूत में उंगली करती रही कि चाचाजी का लंड कैसा होगा, कितना बड़ा होगा। मैंने रात में पांच बार झड़ गई।

सुबह चाचाजी का कॉल आया और हम फोन से सेक्सी बातें करने लगे। अगली सुबह मैंने कॉलेज बंक किया। चाचाजी ने 10 बजे का टाइम दिया था। मैंने मिनी स्कर्ट और ऊपर शर्ट पहनी जिसके ऊपरी दो बटन खुले थे। 9:30 बजे पापा मुझे लेने आए। हम अस्पताल पहुंचे। चाचाजी के केबिन में गए। चाचाजी ने मुझे देखते ही रह गए। मैंने गुड मॉर्निंग कहा। उन्होंने मुस्कुराकर रिप्लाई किया। पापा ने कहा, मुझे काम है, ऑपरेशन खत्म होने पर कॉल करना, मैं लेने आ जाऊंगा। चाचाजी ने कहा, ठीक है। पापा चले गए।

केबिन में कुछ नहीं कर सकते थे। मैं चाचाजी के पास बैठ गई। उन्होंने कहा, ज्योति आज तुम बहुत सेक्सी लग रही हो। मैं शरमा कर हंस पड़ी। उन्होंने कहा, ऑपरेशन शुरू करें? मैंने कहा, जैसे आपकी मर्जी। उन्होंने कॉल करके पूछा कि कौन सा थिएटर खाली है। किस्मत से थिएटर 2 खाली था। सर्वेंट को सेटिंग करने को कहा। सर्वेंट ने कहा, काम हो गया, आप अंदर जाइए, मैं बाहर से लॉक कर दूंगा और किसी को अंदर नहीं आने दूंगा। चाचाजी ने उसे 100 रुपये दिए और मुझे अंदर भेज दिया।

थोड़ी देर बाद चाचाजी आए और दरवाजा बाहर से लॉक हो गया। उन्होंने आते ही मेरे होंठों पर किस करना शुरू किया। एक हाथ से मेरे स्तनों को दबाने लगे। मैं पूरा साथ दे रही थी। उन्होंने मेरी शर्ट के बटन खोल दिए। अपना कोट उतारा। मेरी शर्ट उतारी और ब्रा का हुक खोला। अब मैं उनके सामने अपने 34 के स्तनों के साथ खड़ी थी। उन्होंने मेरे एक स्तन को मुंह में भर लिया। मैंने उनका सिर पकड़ा और स्तनों की तरफ दबाया। मैंने अपना हाथ उनके लंड पर फेरना शुरू किया।

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उन्होंने मुझे ऑपरेशन टेबल पर लिटाया। मेरी स्कर्ट ऊपर की। मेरी टांगों पर जीभ फेरने लगे। मुझे नशा चढ़ रहा था। मैं मस्त हो रही थी। धीरे-धीरे वो ऊपर की तरफ बढ़े। मेरी जांघों पर पहुंचे। मैं गर्म हो रही थी। उन्होंने मेरी पैंटी पर चूत वाली जगह पर किस किया। मेरी बॉडी में करंट दौड़ गया। मैं पागल सी हो गई। उन्होंने धीरे से पैंटी नीचे की और मेरी चूत पर मुंह रख दिया। चाटने लगे। मेरी सिसकारियां निकल रही थीं। आह्ह्ह… चाचाजी… ओह्ह्ह… और जोर से… मैंने उनका सिर पकड़ा और कसकर चटवाने लगी। वो लगातार चाटते रहे। थोड़ी देर में मैं झड़ गई। उन्होंने सारा रस पी लिया।

फिर वो खड़े हुए। पैंट उतारी। मैंने उन्हें बिठाया और उनका लंड हाथ में लिया। ओह माय गॉड, इतना बड़ा और मोटा लंड मैंने आज तक नहीं देखा था। मुझे डर लगा कि ये मेरी चूत फाड़ देगा। फिर मैंने उस लंबे-मोटे लंड को मुंह में लिया। मम्मम्म… मैं आराम से चूस रही थी। लंड इतना मोटा था कि मुंह में पूरा नहीं आ रहा था। मैं जोर-जोर से चूसने लगी। चाचाजी सिसकारियां भरने लगे। आह्ह्ह… ओह्ह्ह… ज्योति… मजा आ रहा है… आह्ह्ह…

5 मिनट बाद चाचाजी खड़े हुए। मुझे लिटाया और बोले, असली ऑपरेशन अब होगा। उन्होंने दो उंगलियां मेरी चूत में डालीं। मैं तड़प उठी। आह्ह्ह… चाचाजी… फिर उन्होंने 69 पोजिशन बनाई। उनका लंड मेरी चूत के मुंह पर रगड़ा। मुझे सुकून मिल रहा था। मैं लंड अंदर लेने को तड़प रही थी। उन्होंने टॉप पर अपनी टॉप मेरी चूत में डाली। मेरी आह्ह्ह्ह… निकल गई। फिर एक जोरदार झटका मारा। आधा लंड अंदर चला गया। मैं चीखी। उन्होंने निकाला। मैंने कहा, रहने दो चाचाजी, आप मेरी चूत फाड़ देंगे। उन्होंने कहा, फिक्र मत कर, एक बार चला गया तो दोबारा दर्द नहीं होगा।

फिर वो दोबारा लगे। धीरे-धीरे चोदने लगे। मुझे मजा आने लगा। मैं सिसकारियां ले रही थी। आह्ह… ओह्ह… चाचाजी… फिर उन्होंने स्पीड बढ़ाई। जोर-जोर से झटके मारने लगे। मैं पूरी गर्म हो चुकी थी। मैं अपनी चूत ऊपर-ऊपर करके साथ दे रही थी। आह्ह्ह… ओह्ह्ह… उफ्फ्फ… चाचाजी… और जोर से… उन्होंने और स्पीड बढ़ाई। मैं चिल्लाने लगी, ओह्ह फक… ओह्ह फक… चाचाजी… उन्होंने कहा, ज्योति मैं झड़ने वाला हूं। मैंने कहा, चाचाजी चूत में मत झाड़ना, मेरे मुंह में झाड़ दो। उन्होंने फटाफट लंड निकाला और मेरे मुंह में डाल दिया। गरम-गरम माल की पिचकारी मेरे मुंह में डाली। मैंने सब पी लिया। वाह क्या स्वाद था।

हम एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे। फिर चाचाजी उठे। मेरे पेट पर एक छोटा कट लगाया और टांके लगा दिए ताकि पता चले कि ऑपरेशन हुआ है। मैंने कपड़े पहने। जाने की तैयारी की। चाचाजी बोले, मजा आया ज्योति? मैंने कहा, बहुत ज्यादा चाचाजी। उन्होंने कहा, अगली बार कब करना है? मैंने कहा, जब आप बुलाओगे। वो खुश हो गए। पापा का कॉल आया। मैं एक्टिंग करती हुई पापा के साथ चली गई।

उस दिन के बाद मैंने अपने बॉयफ्रेंड से सेक्स छोड़ दिया और चाचाजी के साथ करना शुरू कर दिया। मैं कॉलेज से बंक मारती और अस्पताल जाकर अपनी चूत चुदवाती।

दोस्तों कैसी लगी मेरी कहानी? प्लीज कमेंट करके बताना।

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