Virgin Pussy and Anal Sex: हेलो दोस्तो, मेरा नाम अक्षय है। ये कहानी उस वक्त की है जब मैं 18 साल का था और जवानी की दहलीज पर अभी-अभी कदम रखा था। मेरा शरीर हर वक्त एक अजीब सी गर्मी और उत्तेजना से भरा रहता था। चेहरा जवान हो चला था, और आंखों में सपनों की चमक थी। मेरे एक कजिन ब्रदर थे, जिनका नाम राहुल था। राहुल भैया की हमारे मोहल्ले के एक कोने में छोटी सी साइबर कैफे की दुकान थी। दुकान ज्यादा बड़ी नहीं थी—चार पुराने कंप्यूटर, एक काउंटर, और दीवार पर कुछ बॉलीवुड हीरोइनों के पोस्टर। मैं वहां अक्सर जाया करता था, क्योंकि मुझे कंप्यूटर की अच्छी समझ थी। मुझे नए-नए सॉफ्टवेयर चलाने, गेम्स खेलने और इंटरनेट की दुनिया में गोते लगाने का शौक था। राहुल भैया को ये सब ज्यादा समझ नहीं आता था, इसलिए वो दुकान का टेक्निकल काम मेरे भरोसे छोड़ देते थे।
एक दिन की बात है, मई का महीना था। बाहर गर्मी अपने चरम पर थी, और सूरज आग उगल रहा था। उस दोपहर भैया को किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़ा। जाते वक्त उन्होंने मुझे कहा, “अक्षय, दुकान संभाल लेना। मैं शाम तक लौट आऊंगा। कोई कस्टमर आए तो ध्यान रखना।” मैंने हंसते हुए कहा, “भैया, आप टेंशन मत लो। मैं सब संभाल लूंगा।” दुकान में उस वक्त सन्नाटा था। मैं काउंटर पर बैठा एक पुराना पंजाबी गाना “मुंडा कुड़ियां नाल लारा लप्पा” सुन रहा था और अपने फोन पर कुछ वीडियो देख रहा था। तभी दुकान का लकड़ी का दरवाजा चरमराया और दो लड़कियां अंदर दाखिल हुईं।
दोस्तो, क्या बताऊं, वो पल मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं था। दोनों लड़कियां ऐसी थीं जैसे स्वर्ग से उतरकर मेरी इस छोटी सी दुकान में आ गई हों। एक थी मुस्लिम लड़की, जिसने हल्का सा नकाब पहन रखा था। उसके नकाब के पीछे से उसकी काली, गहरी आंखें मुझे देख रही थीं, मानो मेरे दिल को छेद रही हों। दूसरी थी पंजाबन—लंबे, घने काले बाल, गोरी चमकती त्वचा, और कसा हुआ कुर्ता जो उसके शरीर की हर नजाकत को उभार रहा था। मैं उनकी खूबसूरती में खोया हुआ था। उन्होंने मुझसे पूछा, “भैया, इंटरनेट चलेगा ना? हमें कुछ काम करना है।” मैं हड़बड़ाते हुए बोला, “हां-हां, बिल्कुल चलेगा। आप दोनों这边 बैठ जाइए।” मैंने उन्हें दो सिस्टम दिए—एक कोने वाला, जहां हवा अच्छी आती थी।
उनका नाम मैंने उनके आधार कार्ड से नोट किया, जो उन्होंने मुझे पेमेंट के लिए दिया था—जसनूर और जन्नत। जसनूर पंजाबन थी, और जन्नत मुस्लिम। दोनों कंप्यूटर पर बैठ गईं। जसनूर अपने असाइनमेंट में व्यस्त हो गई—उसकी उंगलियां की-बोर्ड पर तेजी से चल रही थीं, और उसकी कलाई पर चूड़ियों की हल्की-हल्की खनक मेरे कानों में मधुर संगीत की तरह गूंज रही थी। जन्नत अपने फोन पर कुछ देख रही थी और बीच-बीच में जसनूर से फुसफुसाकर बात कर रही थी। मैं काउंटर पर बैठा उनकी हर हरकत को चुपके-चुपके देख रहा था। जसनूर का गोरा चेहरा, उसकी बड़ी-बड़ी आंखें, और होंठों पर हल्की सी लिपस्टिक—सब कुछ मुझे अपनी ओर खींच रहा था।
अचानक जन्नत की नजर मुझ पर पड़ी। उसने मुझे घूरते हुए देखा और फिर जसनूर के कान में कुछ कहा। दोनों एक-दूसरे को देखकर हंसने लगीं। मेरी तो सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। मैंने सोचा, “लगता है इन्हें मेरा देखना बुरा लगा।” थोड़ी देर बाद दोनों उठीं, पैसे दिए, और बिना कुछ कहे चली गईं। उनके जाने के बाद दुकान में फिर से सन्नाटा छा गया। मेरा दिल टूट गया। मैं सारा दिन उदास रहा। बार-बार सोचता रहा कि शायद मैंने कुछ गलत कर दिया। रात को नींद भी नहीं आई, बस जसनूर का चेहरा मेरी आंखों के सामने घूमता रहा।
अगले दिन सुबह मैंने दुकान खोली। मन उदास था, लेकिन काम तो करना ही था। अभी मैं कुर्सी पर बैठा चाय की चुस्कियां ले रहा था कि जसनूर अकेले दुकान में आई। आज वो लाल रंग का सूट पहने थी, जिसके साथ उसने हल्की सी चुन्नी ओढ़ रखी थी। उसका गोरा रंग उस लाल सूट में और निखर रहा था। उसने मुझसे कहा, “एक सिस्टम दे दो, मुझे असाइनमेंट पूरा करना है।” मैंने उसे सबसे अच्छा सिस्टम दिया—जिसकी स्क्रीन बड़ी थी और की-बोर्ड नया था। वो काम में लग गई, और मैं पास में बैठकर उसे देखने लगा। उसकी उंगलियां की-बोर्ड पर नाच रही थीं, और उसकी सांसों की हल्की सी आवाज मेरे दिल को छू रही थी।
मैंने हिम्मत जुटाई और उसके पास जाकर कहा, “जसनूर, कल के लिए सॉरी।” उसने हैरानी से पूछा, “सॉरी फॉर व्हाट?” मैंने शर्माते हुए कहा, “शायद कल मेरी वजह से आप लोग चले गए। मैं आपको देख रहा था, शायद आपको बुरा लगा हो।” वो जोर से हंस पड़ी। उसकी हंसी इतनी प्यारी थी कि मेरे दिल को सुकून मिल गया। उसने कहा, “अरे, ऐसी कोई बात नहीं है। हमारा काम हो गया था, इसलिए चले गए। तुम टेंशन मत लो।” उसकी बात सुनकर मैं मन ही मन खुश हो गया।
मैंने सोचा कि मौका अच्छा है, कुछ करना चाहिए। मैंने अपने सिस्टम पर एक रोमांटिक पंजाबी गाना “तेरे बिन” चला दिया। गाना शुरू होते ही जसनूर ने मुस्कुराते हुए कहा, “ये मेरा फेवरेट सॉन्ग है। तुम्हें पंजाबी गाने पसंद हैं?” मैंने कहा, “हां, खासकर तब जब तुम जैसी पंजाबन सामने हो।” वो हंस दी। फिर मेरी नजर उससे मिली, और हम दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराने लगे। उस पल में मेरे दिल में एक अजीब सी हलचल हुई।
फिर मैंने उससे उसकी फेसबुक आईडी मांगी। उसने बिना हिचक मुझे दे दी—Jasnoor_Kaur_99। मैंने तुरंत फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी, और उसने कुछ ही मिनटों में एक्सेप्ट कर ली। उस रात हमारी चैट शुरू हुई। मैंने उससे पूछा, “आप क्या करती हो?” उसने बताया कि वो बीडीएस (डेंटिस्ट्री) की स्टूडेंट है और अमृतसर की रहने वाली है। वो एक सिख पंजाबन थी, और उसकी बातों में एक अलग ही मिठास थी। उसने मुझे बताया कि उसे पंजाबी खाना, खासकर मक्के की रोटी और सरसों का साग, बहुत पसंद है। हमारी बातें बढ़ती गईं, और हम अच्छे दोस्त बन गए।
एक रात चैट में मैंने उससे पूछ लिया, “जसनूर, तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?” उसने हंसते हुए कहा, “नहीं, अभी तक तो कोई नहीं मिला।” मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मैंने सोचा, “ये मौका है, इसे हाथ से नहीं जाने देना।” मैंने उसका मोबाइल नंबर मांगा और कहा, “शाम को कॉल करूंगा।” उसने नंबर दे दिया और चली गई। शाम को जैसे ही घड़ी ने 7 बजे, उसकी मिसकॉल आई। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैंने कॉल बैक किया और हिम्मत करके बोल दिया, “जसनूर, आई लव यू।”
वो जोर से हंस पड़ी और बोली, “अक्षय, बकवास मत करो। इतनी जल्दी क्या है?” फिर उसने मजाक में कहा, “अगर कोई लड़की ना पटे तो मुझे बता देना। मैं बात करवाऊंगी। मेरी टॉकिंग से वो अपने आप फंस जाएगी।” उसकी इस बात ने मुझे और जोश दिलाया। मैंने कहा, “मुझे किसी और की नहीं, बस तुम्हारी जरूरत है।” पहले उसने मना किया, लेकिन मेरे बार-बार कहने पर वो मान गई।
फिर मैंने उससे कहा, “जसनूर, मैं तुमसे अकेले में मिलना चाहता हूं।” उसने 2 दिन बाद मिलने का वादा किया। मैंने अपने रूम को तैयार किया। मेरा रूम मेरे घर के पीछे एक अलग कोने में था—एक छोटा सा कमरा, जिसमें एक बेड, एक टेबल, और कुछ कुर्सियां थीं। वहां कोई नहीं आता था, सिर्फ मैं ही रहता था। उस दिन सुबह से ही मैंने रूम को साफ किया, बेडशीट बदली, और हल्की सी अगरबत्ती जलाई ताकि माहौल अच्छा लगे। शाम को उसका फोन आया। मैंने कहा, “सीधे ऊपर आ जाना, नीचे किसी से मत बोलना।” उसने वैसा ही किया।
जब वो मेरे रूम में आई, तो मैं उसे देखता रह गया। वो ब्लैक सूट सलवार में थी, जिसके साथ उसने लंबी चुन्नी ओढ़ रखी थी। उसका गोरा चेहरा, काजल से सजी आंखें, और गुलाबी होंठ—सब कुछ परफेक्ट था। उसने अपने बाल खुले छोड़ रखे थे, जो हवा में हल्के-हल्के लहरा रहे थे। मैंने उसका स्वागत किया और कहा, “जसनूर, तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो।” उसने शर्माते हुए हल्की सी स्माइल दी। उसकी वो स्माइल मेरे दिल में आग लगा गई। मैंने उसके गाल हल्के से खींचे, तो उसने मजाक में मेरे हाथ पर चपत मार दी।
मैंने उसे सोफे पर बिठाया और ठंडा पानी का ग्लास दिया। फिर मैंने उसके लिए कॉफी बनाई। मैंने कॉफी में हल्की सी इलायची डाली थी, जिसकी खुशबू पूरे कमरे में फैल गई। हम दोनों कॉफी पी रहे थे कि अचानक लाइट चली गई। इनवर्टर भी खराब था, और गर्मी बहुत ज्यादा थी। पसीने से मेरी शर्ट चिपकने लगी। मैंने अपनी शर्ट उतार दी और बनियान में बैठ गया। जसनूर ने कहा, “तुम्हें शर्म नहीं आती? मेरे सामने शर्ट उतार दी!”
मैंने हंसते हुए कहा, “एक तो गर्मी से हालत खराब है, ऊपर से तुम्हें ये सब दिख रहा है। अगर तुम्हें गर्मी लग रही हो तो तुम भी उतार सकती हो, मुझे कोई दिक्कत नहीं।” वो जोर से हंस पड़ी और बोली, “बदमाश, रुक जा, तुझे नहीं छोडूंगी।” मैंने कहा, “मैं चाहता ही नहीं कि तुम मुझे छोड़ो।” ये सुनते ही वो मेरे ऊपर चढ़ गई। हम दोनों हंसी-मजाक करने लगे। उसका नरम शरीर मेरे शरीर से टकरा रहा था, और मेरे हाथ उसकी कमर पर चले गए।
हंसी-मजाक में मेरा लंड अकड़ने लगा। मेरा लोअर फटने को तैयार था। उसकी सलवार का नरम कपड़ा मेरे हाथों को छू रहा था, और उसकी सांसें मेरे चेहरे पर गर्म हवा की तरह लग रही थीं। मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसके होंठों पर जबरदस्ती एक लंबी सी किस कर दी। उसके होंठों का स्वाद शहद की तरह था। उसने कहा, “अक्षय, तुम बहुत बदमाश हो।” मैंने कहा, “थैंक यू, ये मेरे लिए कॉम्प्लिमेंट है।”
फिर मैं उसकी गोद में लेट गया। उसकी सांसों की गर्माहट और उसके परफ्यूम की खुशबू मुझे पागल कर रही थी। मैंने उसे स्मूच करना शुरू किया। उसकी सांसें तेज हो गईं, और उसने मेरे बालों में उंगलियां फिरानी शुरू कर दीं। मुझसे रहा नहीं गया। मैंने एक झटके में उसका सूट ऊपर उठाया। उसने ब्लैक कलर की ब्रा पहनी थी, जो उसकी गोरी त्वचा पर आग की तरह लग रही थी। मैंने उसकी ब्रा के हुक खोले और उसे उतार दिया। उसके गोल-गोल, नरम स्तन मेरे सामने थे—गोरे, सख्त, और ऊपर से गुलाबी निप्पल। मैंने उन्हें अपने हाथों में लिया और धीरे-धीरे दबाया। वो सिसक उठी।
उसने कहा, “अक्षय, ये क्या कर रहे हो?” मैंने कहा, “प्लीज, मुझे मत रोको। आज मुझे सब चाहिए।” मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला, जो जल्दबाजी में टूट गया। उसकी गोरी जांघें मेरे सामने थीं। उसने भी अब मेरा साथ देना शुरू कर दिया। मैंने उसकी पिंक पैंटी नीचे खींची। उसकी चूत गुलाबी, चिकनी और हल्की गीली थी। मैंने अपनी उंगली अंदर डाली, तो वो चिल्ला उठी, “धीरे करो, दर्द हो रहा है।” मैंने कहा, “अब धीरे कहां हो सकता है, जसनूर?”
उसने मेरा लंड पकड़ लिया और उसे जोर-जोर से हिलाने लगी। उसकी नरम हथेलियों का स्पर्श मुझे जन्नत की सैर करा रहा था। मैंने टेबल से कोल्ड क्रीम उठाई, अपने लंड पर लगाई और उसकी चूत में धीरे से पेल दिया।
मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसकी चूत में लंड डाल दिया। उसकी आंखें फैल गईं और उसने अपनी सांसें रोक लीं। मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। उसकी नरम और गर्म चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी, और हर धक्के के साथ उसका शरीर हल्का-हल्का कांप रहा था। उसने अपने हाथ मेरी पीठ पर रखे और अपनी उंगलियां मेरी त्वचा में गड़ा दीं। उसकी सांसें तेज हो रही थीं, और उसका चेहरा लाल हो गया था। मैंने उसकी आंखों में देखा—उसकी पुतलियां फैल रही थीं, और उसकी सिसकियां मेरे कानों में मधुर संगीत की तरह गूंज रही थीं।
मैंने अपने हाथ उसके स्तनों पर रखे और उन्हें जोर-जोर से दबाना शुरू किया। उसके निप्पल सख्त हो गए थे, और मैंने उन्हें अपनी उंगलियों से हल्के से मसला। वो सिहर उठी और बोली, “अक्षय, थोड़ा धीरे करो, मुझे अजीब सा लग रहा है।” मैंने उसकी बात अनसुनी कर दी और अपने धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी। उसकी चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी, और हर धक्के के साथ एक हल्की सी चप-चप की आवाज कमरे में गूंज रही थी। उसका शरीर मेरे नीचे तड़प रहा था, और उसकी सांसें मेरे चेहरे पर गर्म हवा की तरह टकरा रही थीं।
मैंने उसकी टांगें और चौड़ी कीं और अपने लंड को और गहराई तक पेल दिया। उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और अपने होंठों को दांतों से काट लिया। मैंने देखा कि उसके माथे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं। मैंने अपने हाथ उसके कूल्हों के नीचे ले जाकर उसे थोड़ा ऊपर उठाया ताकि मेरा लंड उसकी चूत के सबसे गहरे हिस्से तक पहुंच सके। उसकी सिसकियां अब तेज हो गई थीं, और वो मेरे कंधों को जोर से पकड़ रही थी। मैंने उससे कहा, “जसनूर, तुम्हें मजा आ रहा है ना?” उसने आंखें खोलीं और शर्माते हुए हल्का सा सिर हिलाया।
थोड़ी देर बाद उसका शरीर अकड़ने लगा। उसने अपनी कमर ऊपर उठाई और एक लंबी सांस के साथ झड़ गई। उसकी चूत से गर्म-गर्म रस बहने लगा, जो मेरे लंड को और चिकना कर रहा था। मैं अभी भी रुका नहीं। मैंने अपने धक्के जारी रखे। वो थक चुकी थी, लेकिन मैं अपने चरम पर पहुंचना चाहता था। उसने कहा, “अक्षय, बस करो, मैं थक गई हूं।” मैंने कहा, “थोड़ा और, जसनूर, अभी मेरा मन नहीं भरा।” उसने हल्की सी मुस्कान दी और मेरे गाल पर एक चपत मार दी।
फिर मैंने उसे पलट दिया। अब वो अपने घुटनों और हाथों के बल बेड पर थी। उसकी गोरी, गोल गांड मेरे सामने थी, जो किसी संगमरमर की मूर्ति की तरह चमक रही थी। मैंने उसकी गांड पर हल्के से थप्पड़ मारा, तो वो हंस पड़ी और बोली, “तुम सच में बहुत बदमाश हो।” मैंने टेबल से क्रीम की डिब्बी उठाई और अपने लंड पर अच्छे से लगाई। फिर मैंने उसकी गांड के छेद पर भी क्रीम लगाई। उसका शरीर ठंडक से सिहर उठा। मैंने अपने लंड का सुपारा उसकी गांड के छेद पर रखा और धीरे से दबाव डाला।
वो थोड़ा पीछे हटी और बोली, “अक्षय, ये बहुत टाइट है, दर्द होगा।” मैंने कहा, “जसनूर, थोड़ा बर्दाश्त करो, बाद में मजा आएगा।” मैंने उसकी कमर पकड़ी और एक जोरदार धक्का मारा। मेरा लंड उसकी गांड में आधा घुस गया। वो जोर से सिसक उठी और अपने नाखून मेरे हाथों में गड़ा दिए। मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। उसकी गांड इतनी टाइट थी कि मेरा लंड हर बार अंदर-बाहर होने में मुश्किल हो रही थी। लेकिन धीरे-धीरे वो ढीली पड़ने लगी, और मुझे रास्ता मिल गया।
मैंने अपनी रफ्तार बढ़ाई। उसकी गांड के गोल-गोल कूल्हे मेरे हर धक्के के साथ हिल रहे थे, और उसकी सिसकियां अब कमरे में गूंज रही थीं। मैंने उसके बाल पकड़े और हल्के से खींचे, जिससे उसका सिर पीछे की ओर झुक गया। उसकी गोरी गर्दन मेरे सामने थी, और मैंने उसे चूम लिया। उसका पसीना मेरे होंठों पर नमकीन स्वाद छोड़ रहा था। मैंने अपने धक्के तेज कर दिए। उसने कहा, “अक्षय, अब और नहीं, प्लीज रुक जाओ।” लेकिन मेरा जोश अपने चरम पर था। मैंने कहा, “बस 2 मिनट और, जसनूर।”
मैंने पूरी ताकत से धक्के मारे, और आखिरकार मेरा शरीर कांपने लगा। मैंने सारा माल उसकी गांड में छोड़ दिया। गर्म-गर्म रस उसकी गांड में भर गया, और वो थक कर बेड पर लेट गई। मैं भी उसके बगल में लेट गया। हम दोनों के शरीर पसीने से तर थे। हमारी सांसें तेज चल रही थीं, और कमरे में सिर्फ हमारी सांसों की आवाज गूंज रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने उससे कहा, “चलो, साथ में नहाते हैं।” उसने हल्की सी मुस्कान दी और हां कह दिया।
हम दोनों बाथरूम में गए। मैंने शावर ऑन किया, और ठंडा पानी हमारे शरीर पर गिरने लगा। मैंने उसके शरीर पर साबुन लगाया—उसकी पीठ, उसकी कमर, और उसकी गांड पर। वो हंस रही थी और मुझ पर पानी उछाल रही थी। मैंने उसे अपनी बांहों में लिया और एक लंबी सी स्मूच की। उसका गीला शरीर मेरे शरीर से चिपक रहा था, और मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा।
नहाने के बाद मैंने उसे तौलिया से पोंछा और उसके कपड़े पहनाए। उसने ब्लैक सूट को फिर से पहना, और अपने बालों को संवारा। जाने से पहले उसने मेरे गाल पर एक किस की और कहा, “अक्षय, आज बहुत मजा आया, लेकिन अब और नहीं हो पाएगा। समझो ना, माय बेबी।” मैंने कहा, “ठीक है, जसनूर।” वो चली गई। उसके जाने के बाद मैं बेड पर लेट गया। मेरा लंड फिर से अकड़ रहा था। मैंने एक बार मुठ मारी और उसकी याद में सो गया।
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