Housewife chudai sex story, Home sex with lover sex story, Freedom chudai sex story: दोस्तो कैसे हैं आप सब, मैं उम्मीद करती हूं कि आप सभी ठीक होंगे. सभी फैली हुई चूत और खड़े लंड को मेरा सलाम.
मेरा नाम सिमरन है. मैं पुणे में रहती हूं. आप सबने मेरी पिछली कहानी “चलती बस में रात भर चुदी” को बहुत प्यार दिया, इसलिए मैं आप सभी का दिल से धन्यवाद करती हूं.
अपने नए पाठकों को बता दूं कि मैं एक हाउसवाइफ हूं. मेरे मम्मों का साइज 32B है और मेरे चूतड़ों का आकार 36 इंच का है. मैं एक भरे पूरे बदन की मालकिन हूं, जो भी मुझे देखता है बस देखता ही रह जाता है. बड़े हों या बूढ़े, सब मुझ पर लाइन मारते रहते हैं. जिसे देखकर मुझे अंदर से बहुत खुशी होती है.
जैसे कि आपको पता है मेरे पति का मॉल में होटल का बिजनेस है, जिसमें वो पूरा दिन बिजी रहते हैं. इसी के चलते मैंने अमन से रिश्ता बना लिया था. अमन मुझे स्लीपर बस में मिला था.
जब हम लोग हैदराबाद से छुट्टी मनाकर वापस आए, तब मैंने और अमन ने अपने नंबर ले दिए थे. अब हमारी रोज फोन पर बात होने लगी थी और सारे दिन मैसेज से बात होती रहती थी. मैं भी धीरे धीरे अपने दिल ही दिल में अमन को प्यार करने लगी थी और वो भी मुझसे बहुत प्यार करता था.
पर समाज के डर से मैं अमन से बाहर सिर्फ एक बार ही रेस्टोरेंट में मिली थी और उसके बाद हमारी ज्यादातर बातें फोन पर ही होती थीं. अमन मुझे वापस चुदाई के लिए बुलाया करता था, पर मैं एक घरेलू औरत हूं, तो मुझे सब कुछ देखकर ही करना था.
मैं अमन से बार बार चुदना चाहती थी लेकिन मुझे समाज का डर था और मैं उसके साथ सब कुछ खुल्लम खुल्ला नहीं कर सकती थी. पर कहते हैं न जहां चाह है, वहां राह भी होती है. मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ. हमारा 26 जनवरी को मिलना तय हो गया.
हुआ ये कि मेरे हसबैंड को होटल के काम के सिलसिले में 10 दिनों के लिए दिल्ली जाना था. जब उन्होंने मुझे ये बताया तो उस वक्त मैंने झूठा नाटक करके ये दिखाया कि मुझे बहुत बुरा लगा कि वो अकेले ही जा रहे हैं.
मैंने अपने हसबैंड से कहा, “ये क्या आप मुझे अकेला छोड़ कर दिल्ली जा रहे हो और मैं यहां कैसे समय पास करूंगी.”
हसबैंड ने मुझे समझाया और मैं कुछ नखरे करने के बाद मान गई. फिर उसी समय मेरे बेटे ने भी उनके साथ जाने की जिद की, तो वो उसे साथ ले जाने के लिए मान गए. मैंने उस समय कोई हील हुज्जत नहीं की, क्योंकि ये मौका मुझे अमन के साथ बिताने का एक सुनहरा अवसर सा दिख रहा था.
मैंने रात को ये बात अमन को बताई, जिसे सुनकर वो बहुत खुश हो गया. पति के जाने के प्लान बन जाने के बाद वो दिन भी आ गया.
मेरे हसबैंड की शाम को फ्लाइट थी. मैं उन्हें शाम को एयरपोर्ट पर छोड़ने गई. एयरपोर्ट से मैं सीधा पार्लर गई और वहां मैंने अपनी पूरी बॉडी की वैक्सिंग करवाई.
मेरी चूत पर बहुत बड़ी बड़ी झांटें आ गई थीं तो अपनी चूत पर मैंने एक दिल के आकार में बाल कटवाए, जिसकी नोक मेरी चूत की फांकों के ठीक ऊपर थी. उस दिल के ऊपर नाभि से नीचे मैंने अमन का नाम लिखवाया. मैं अमन को एक सरप्राइज देना चाहती थी ताकि उसे पता चले कि मैं उससे कितना प्यार करती हूं.
मैंने अपने हाथों और पैरों पर मेहंदी लगवाई और मेहंदी की डिजाइन में अमन का नाम भी लिखवाया.
दूसरे दिन यानी 26 जनवरी को मैंने अमन को मेरे घर बुलाया. अमन के आने से पहले मैंने घर बहुत अच्छे से सजाया था. जिस पलंग पर रात को अमन के साथ मेरी चुदाई होने वाली थी, उस पलंग और रूम को मैंने सुहागरात जैसा सजाया था. खुशबू वाली कैंडल, फूल और परफ्यूम से महकता हुआ मेरा रूम बहुत सुंदर लग रहा था.
दूसरे दिन 26 जनवरी को जब अमन सुबह मेरे घर आया, तब मैंने एक ब्लैक कलर की जाली वाली नेट की साड़ी पहनी थी. उस पर ब्लैक कलर टाइट ब्लाउज पहना था, जिसे देख अमन 2 मिनट के लिए मुझे देखता ही रह गया.
फिर मैंने उसे अंदर बुलाया और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया. मैंने अमन को सोफे पर बिठाया और उसके लिए नाश्ता लाने किचन में चली गई.
पर अमन को सब्र कहां हो रहा था, वो पीछे पीछे मेरे साथ किचन में आया और वहीं पर मुझे पकड़ कर मुझे किस करने लगा. मैं भी गर्म थी तो मैं उसका साथ देने लगी.
वो मेरी गर्दन को चूमते हुए बोला, “जान, तुम्हारा आज तो जान लेने का इरादा दिख रहा है.”
मैंने उसके गालों पर हाथ फेरते हुए कहा, “अमन तुम्हारी जान में तो मेरी जान बस्ती है, बस आज के दिन मुझे इतना प्यार करो कि मैं तृप्त हो जाऊं.”
अमन बोला, “तुम चिंता मत करो मेरी जान. मुझे भी आज तुमको कच्चा खा जाने का दिल कर रहा है.”
मैंने कहा, “खा जाओ, रोका किसने है!”
अमन ने मेरी चूचियों को मसला और कहा, “सच में कच्चा ही खा जाने का दिल कर रहा है.”
अब तक अमन का कड़क होता लंड मेरी गांड की दरार में दस्तक देने लगा था. मेरी वासना अपने शिखर पर चढ़ने लगी और मैंने हाथ पीछे करके उसके लंड को पकड़ कर कहा, “बड़ी जल्दी टाइट हो गया.”
अमन ने मेरी साड़ी के ऊपर से ही मेरी चूत को टटोला और मेरे कान में बोला, “हां जान, आज लंड कुछ ज्यादा ही बेचैन हो रहा है.”
मैंने कहा, “बेचैनी तो मुझे भी है जान, मगर आज सब कुछ आजादी से होगा. कोई जल्दबाजी की जरूरत नहीं है.”
अमन ने फिर से मेरी चूचियों को मसला और बोला, “जी बेगम मलिका आलिया के हुक्म की ताबेदारी होगी.”
मैं अमन के इस अंदाज पर हंस पड़ी और पलट कर उसकी बांहों में चली गई. सच में आज अमन के सीने से लग कर मुझे एक ऐसा सुकून मिल रहा था कि न जाने कब से अपने प्रेमी से मेरा बिछोह हुआ पड़ा था.
वो भी मेरी बांहों में खुद को समर्पित किए हुए मेरी गर्दन पर अपनी गर्म सांसें छोड़ रहा था. हम दोनों एक दूसरे से कई मिनट तक यूँ ही लिपटे खड़े रहे. उसका लंड मुझे मेरी नाभि पर गड़ रहा था.
मैंने कहा, “अमन, तुम्हारा बाबूलाल कुछ ज्यादा ही परेशान लग रहा है.”
वो बोला, “हां जान, अभी तुम इसे मुंह से एक बार शांत कर दो ताकि मुझे चैन आ जाए और हम दोनों अपनी आज की आजादी का जश्न ढंग से मना सकें.”
मेरा खुद का मन भी उसका लंड चूसने का कर रहा था. मैंने उसकी बांहों से फिसल कर खुद को नीचे किया और घुटनों पर आ गई. मैंने अमन की पैंट का बटन और चेन खोल कर उसके अंडरवियर में हाथ डाल दिया.
अमन के लंड पर जैसे ही मैंने अपना हाथ लगाया, वो काला नाग फनफना उठा. मैंने भी उसका जहर निकालने का मन बना लिया था. झट से लौड़े को बाहर निकाला और मुंह में ले लिया.
आह मुझे तो मानो तरन्नुम आ गई थी और कमोवेश यही हाल अमन का भी था. वो मेरे सर को अपने हाथ से पकड़े हुए मेरे मुंह को चोदने लगा. ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… मैंने गहराई से चूसा, गों… गों… उसकी सिसकारियां निकलने लगीं, “आह सिमरन… ऐसे ही… ओह्ह…”
कुछ सात आठ मिनट की लंड चुसाई के बाद अमन ने अपना रस मेरे मुंह में ही छोड़ दिया और मैंने अपने अमन के नमकीन अमृत को अपने हलक के नीचे उतार लिया.
अमन ने झड़ जाने के बाद बहुत देर तक मुझे किस किया. फिर हम दोनों अलग हो गए.
मैंने अमन को नाश्ता करवाया और हम दोनों मेरी कार में बाहर घूमने चले गए. हम दोनों ने दिन घूमा, मूवी देखी, शॉपिंग की और रेस्टोरेंट में खाना भी खाया.
अमन ने पूरे दिन बहुत अच्छे से मेरा ख्याल रखा और शाम को आते वक्त अमन ने चार बियर की कैन भी ले लीं.
हम दोनों घर वापस आ गए. अमन मुझे छोड़ने का नाम नहीं ले रहा था. मैंने घर आने पर अमन को फ्रेश होने भेज दिया और मैं खाना बनाने चली गई.
अमन फ्रेश होकर हॉल में आकर टीवी देखने लगा. मैं फ्रेश होने चली गई और अमन से कहा कि जब मैं आवाज दूं तभी तुम रूम में आना.
अमन ने ओके बोल दिया.
मैं बाथरूम में फ्रेश होने चली गई. फ्रेश होने के बाद मैंने 30 साइज की नेट ब्रा पैंटी पहनी, जिसने मेरे 32 के दूध और ज्यादा टाइट दिखने लगे.
उसके बाद मैंने दुल्हन की ड्रेस और ज्वेलरी पहनी, मेकअप किया और बेड पर आकर बेड के बीचों बीच बैठ गई. सब कुछ मेरे मुताबिक हो गया था.
अब मैंने अमन को अंदर आने के लिए आवाज दे दी.
अमन जैसे ही अंदर आया, मेरा सरप्राइज देख कर वो बहुत खुश हुआ. अमन मेरे पास आया और मेरा घूंघट उठाया. मैंने दुल्हन के जैसे शर्म से नजर नीचे कर ली. उसने दोनों हाथों से मेरे चेहरे को पकड़ के ऊपर किया और मेरे नर्म होंठों पर अपने गर्म होंठ रख दिए. मैं एकदम से सिहर गई. वो मुझे किस करने लगा. मैं भी उसका साथ देने लगी.
अमन ने बहुत देर तक मुझे किस किया. फिर मेरा घूंघट हटा कर साड़ी के पल्लू को साइड में कर दिया.
मैं ऊपर अपने ब्लाउज में उसे रिझा रही थी. उसने मुझे लिटा दिया और मेरे बदन पर किस करने लगा. मेरे पूरे बदन पर किस करते हुए ही वह सारी ज्वेलरी एक एक करके उतारने लगा.
मेरे हाथ से एक एक चूड़ी छोड़ कर सारी चूड़ियां उतार दीं. मेरे गले से हार उतारे. नाक से नथ, कान से बाले… यानी मैंने जितनी भी ज्वेलरी पहनी थी, उसने मुझे किस करते हुए एक एक करके मेरी सारी ज्वेलरी उतार दी.
अमन जहां जहां मुझे चूम रहा था, वहां अपनी गर्म सांस भी छोड़ रहा था. जिससे मैं जल बिन मछली की तरह तड़पते हुए उसकी बांहों में पिघल रही थी.
फिर अमन ने मुझे उल्टा लिटा दिया और पीछे से मेरे ब्लाउज के हुक को किस करते हुए खोलने लगा. जल्द ही उसने अपनी गर्म सांसों की सिहरन में मेरा ब्लाउज खोल कर अलग कर दिया.
ऐसे ही अमन ने मेरे सारे कपड़े एक एक करके उतारे और मुझे नंगी कर दिया. उसने मेरे तन पर सिर्फ पैंटी को छोड़ दिया था.
फिर उसने उठ कर अपने सारे कपड़े उतारे और मेरे पास आ गया.
वो मेरे करीब आकर मुझे किस करने लगा. तब तक मैं उसका लंड पकड़ कर आगे पीछे करने लगी और अमन मेरी पैंटी के अंदर हाथ डाल कर मेरी चूत को मसलने लगा.
इससे मैं और भी ज्यादा गर्म हो गई. अमन ने मेरी पैंटी से हाथ निकाला और वो मेरे मम्मों पर टूट पड़ा.
दोस्तो, मैं अपनी इंडियन हाउसवाइफ सेक्स कहानी लिखना जारी रखूंगी. तब तक के लिए बाय.
मेरी ये सेक्स कहानी आपको कैसी लगी, अपनी राय आप मुझे अवश्य दें, कमेंट के द्वारा जरूर बताएं.
कहानी का अगला भाग: पति फोन पर, यार का लण्ड चुत में
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