भीड़ के हाथों से लुट गई दो बहनों की इज्जत

Bus groping sex story – Molestation sex story: मेरा नाम कनिका है और हम लोग असम के एक छोटे से गांव से हैं, लेकिन मैं कभी वहाँ ज्यादा रही नहीं क्योंकि मेरे पापा आयकर विभाग में काम करते हैं और उनका ट्रांसफर अक्सर होता रहता था, जिसकी वजह से हमारा गांव जाना बहुत कम ही होता था। मैं पहाड़ी होने की वजह से बहुत गोरी हूँ और मेरी हाइट पांच फुट पांच इंच है जबकि मेरा फिगर छत्तीस सत्ताईस अड़तीस का है, जो मुझे देखने वाले हर किसी की आँखों को आकर्षित करता था। मेरी एक छोटी बहन भी है जो मुझसे भी अधिक सुंदर है और उसका नाम रितिका है, उसकी हाइट पांच फुट तीन इंच है और उसका फिगर चौंतीस पच्चीस छत्तीस का है, जिसकी वजह से उसके गोरे बदन पर हर चीज चमकती हुई लगती थी। मैंने अब तक किसी एक शहर में तीन क्लास से अधिक नहीं पढ़ी थी और अलग-अलग शहरों में रहने की वजह से मेरे दोस्त बहुत कम थे, ज्यादातर समय मैं अपनी फैमिली के साथ ही बिताती थी और मेरी माँ तथा बहन के साथ मेरी बहुत अच्छी बनती थी, जबकि पापा से भी मेरी गहरी दोस्ती थी लेकिन वो ज्यादातर अपने काम में व्यस्त रहते थे। हम लोग आखिरी बार मुंबई में थे लेकिन कुछ ही दिन पहले पापा का ट्रांसफर दिल्ली हो गया था और मैंने अब तक अपनी जिंदगी का ज्यादातर समय महाराष्ट्र तथा गुजरात में ही गुजारा था जहाँ लड़कियाँ काफी सुरक्षित महसूस करती थीं, हम रात देर तक बाहर घूमतीं और इंजॉय करतीं लेकिन अब दिल्ली की जिंदगी बिल्कुल अलग थी क्योंकि यहाँ लड़कियाँ उतनी सुरक्षित नहीं होतीं जितनी गुजरात और महाराष्ट्र की शहरों में होती हैं। पापा ने हमें पहले ही बता दिया था कि अब हमें बहुत सावधानी से रहना होगा क्योंकि दिल्ली की जिंदगी लड़कियों के लिए इतनी सुरक्षित नहीं है और जब हम ट्रांसफर होकर दिल्ली पहुँचे तो पापा को एक दो मंजिला घर मिला जिसमें नीचे का फ्लोर एक बेडरूम और अटैच्ड लेट-बाथ, किचन तथा डाइनिंग रूम और ड्राइंग रूम था जबकि ऊपर का फ्लोर भी एक बेडरूम और अटैच्ड लेट-बाथ वाला था। पापा और मम्मी ने आते ही नीचे का बेडरूम ले लिया और हमें कहा कि तुम दोनों ऊपर के कमरे में शिफ्ट हो जाओ, तो हम दोनों ऊपर गए और वो कमरा हमें बहुत पसंद आया क्योंकि उसमें काफी जगह थी और आराम से दो बेड आ सकते थे इसलिए हमने भी हामी भर दी।

यहाँ आए कुछ दिन ही हुए थे और मेरा मन घर में बैठे-बैठे बिल्कुल नहीं लग रहा था इसलिए मैंने और रितिका ने सोचा कि थोड़ा घूम आएँ तो मम्मी ने भी कहा कि दिन का समय है तुम घूमकर आ सकती हो लेकिन रात होने से पहले लौट आना और पापा ने भी हाँ कर दी। फिर मैंने एक पीले रंग का टाइट टॉप पहना जो मेरी चुचियों को उभारकर दिखा रहा था और नीचे गुलाबी रंग की कॉटन कैप्री डाली जो मेरे चूतड़ों को कसकर पकड़ रही थी जबकि रितिका ने काले रंग की छोटी फ्रॉक पहनी जो उसके गोरे जांघों को आधे से ज्यादा दिखा रही थी और हम दिल्ली घूमने निकल गए, मेट्रो का टिकट लिया और सबसे पहले कुतुब मीनार देखने चले गए। हमने मेट्रो में लेडीज कम्पार्टमेंट का इस्तेमाल किया और स्टेशन से उतरकर ऑटो लिया तो कुतुब मीनार पहुँच गए, वहाँ घूमते हुए हमें कुछ छिछोरे लड़के घूरने लगे और हमें देखकर सीटी बजाने लगे तथा आँख मारने लगे लेकिन हमने उन पर ध्यान नहीं दिया और कुतुब मीनार की फोटो खींचने लगे। फिर हम वहाँ से इंडिया गेट घूमने निकल गए और फिर से मेट्रो से सफर किया, इंडिया गेट घूमने के बाद हम दिल्ली के पुराने किले में घूमने चले गए लेकिन तब तक शाम हो गई थी और मम्मी लगातार फोन करके वापस आने को कह रही थीं तो हमने झूठ बोल दिया कि हम घर के लिए निकल गए हैं लेकिन फिर भी पुराने किले घूमने चले गए। वहाँ घूमते हुए हमें वही छिछोरे लड़के फिर मिले जो कुतुब मीनार पर हमें छेड़ रहे थे और उन्होंने फिर से गंदे इशारे करने शुरू कर दिए लेकिन हमने पहले की तरह इग्नोर किया और भीड़-भाड़ वाले इलाके में ही घूमते रहे ताकि वो हमें परेशान न कर सकें लेकिन घूमते-घूमते अंधेरा होने लगा तो रितिका भी हल्का घबराने लगी और मैंने उसे कहा कि चिंता मत कर हम अच्छी तरह घर पहुँच जाएँगे। फिर हम पूरा किला घूमकर मेट्रो स्टेशन के लिए निकल गए लेकिन वहाँ हमें कोई ऑटो नहीं मिला और बस स्टॉप पूरी तरह सुनसान पड़ा था, रितिका बहुत घबरा गई और तभी वे बदमाश लड़के बस स्टॉप पर आ गए तथा हमारे पीछे आकर खड़े हो गए।

हम दोनों अब बहुत डर गए थे और मैं तो वहाँ से भागने की सोचने लगी लेकिन किसी तरह हिम्मत करके खड़ी रही जबकि पीछे से वे लड़के कमेंट करने लगे कि हाय क्या माल है कपड़ों में बाहर से इतने सुंदर लग रहे हैं तो सोचो बिना कपड़ों के कितने अच्छे लगेंगे, और तभी दूसरा लड़का बोला हाँ भाई ऊपर के तो हैं ही सुंदर लेकिन नीचे तो देखो कितने मोटे-मोटे हैं मन करता है कि अभी चूस लूँ। तभी बस आ गई और मुझे बहुत राहत मिली लेकिन वो बस पूरी तरह भरी हुई थी फिर भी हम इतने डर चुके थे कि हमने कंडक्टर से कुछ नहीं पूछा और बस में चढ़ गए, हमें नहीं पता था कि वो बस कहाँ जा रही है लेकिन मैंने सोचा कि अगले स्टॉप पर उतर जाएँगे और वहाँ से ऑटो कर लेंगे। कंडक्टर ने हमें अंदर घुसने को कहा तो मैंने कहा भैया हमें अगले स्टॉप पर उतरना है लेकिन कंडक्टर बोला मैडम अभी अगला स्टॉप आने में समय है जब तक अंदर घुस जाओ, अब हम क्या करते हम अंदर घुस गए और वो बस आदमियों से बुरी तरह भरी हुई थी जिसमें कोई लड़की या औरत दिख ही नहीं रही थी लेकिन वहाँ हम दोनों अपने आपको काफी सुरक्षित महसूस कर रहे थे। तभी पता नहीं क्या हुआ बस रुक गई और थोड़ी देर में पता चला कि बस का टायर पंचर हो गया है तथा उसे बदलने में पंद्रह मिनट लगेंगे, बस के अंदर बहुत गर्मी थी और हम दोनों पूरे पसीने में नहा गए थे, मेरा टॉप पूरा गीला हो गया था तथा वहाँ हर आदमी पसीने में नहा रहा था जिसकी वजह से पूरी बस में पसीने की तीखी गंध फैल गई थी जो नाक में चुभ रही थी।

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धीरे-धीरे भीड़ में हलचल बढ़ने लगी और मुझे मेरे बूब्स पर कुछ महसूस हुआ, मैंने नीचे देखा तो एक बूढ़ा आदमी लगभग पचपन साल का होगा अपनी कोहनी से मेरे बूब्स को धीरे-धीरे रगड़ रहा था जैसे वो जानबूझकर कर रहा हो, मैं थोड़ा सरक गई लेकिन गर्मी और पसीने से चिपचिपी त्वचा की वजह से सरकना मुश्किल था। थोड़ी देर बाद वही बूढ़ा मेरी बहन रितिका के बूब्स को अपनी कोहनी से छूने लगा और वो अजीब महसूस कर रही थी जैसे उसके बदन में करंट दौड़ रहा हो, मैंने थोड़ी जगह बनाई और उसे उस आदमी से दूर अपने पास खींच लिया लेकिन थोड़ी देर ही हुई होगी तभी कोई दूसरा आदमी मेरे कूल्हों पर हाथ फेरने लगा, पहले हल्के से जैसे गलती से छू लिया हो लेकिन फिर धीरे-धीरे दबाव बढ़ाने लगा और उसकी उंगलियाँ मेरी कैप्री के ऊपर से मेरे चूतड़ों को सहला रही थीं जिससे मेरी साँसें तेज हो गईं। मैं परेशान हो गई और सोचने लगी कि अगर इधर जाऊँ तो वो बूढ़ा मेरे बूब्स को दबाता है और उधर ये हाथ मेरे चूतड़ पर फेर रहे हैं, अब जब तक मैं कुछ सोचती उससे पहले अब दूसरा हाथ भी मेरे चूतड़ पर आ गया जो कोई तीसरा आदमी था और उसकी हथेली मेरे चूतड़ों को कसकर दबा रही थी जैसे वो उनका रस निचोड़ना चाहता हो। मैं समझ गई कि हम गलत फँस गए हैं और वहाँ मेरी बहन के पास फिर वो बूढ़ा आकर खड़ा हो गया तथा उसकी चुचियों को अपनी कोहनी से छूने लगा जो अब ज्यादा जोर से रगड़ रहा था, यहाँ मैं उन हाथों से दूर हटने की कोशिश कर रही थी कि तभी उसमें से एक आदमी ने हाथ मेरे बूब्स पर रख दिया और धीरे-धीरे दबाने लगा जैसे पहले टेस्ट कर रहा हो कि कितने नरम हैं।

मैं एकदम हैरान हो गई और हेल्प के लिए चिल्लाना चाहती थी लेकिन तभी एक आदमी ने मेरे कान में फुसफुसाया कि सुन लड़की इस बस में सभी मर्द हैं अगर तू चिल्लाई तो सब तेरा रेप कर देंगे इसलिए चुपचाप जो हो रहा है होने दे और अगले स्टॉप पर उतर जाना, मैं उसकी बात सुनकर चुप हो गई लेकिन मेरी साँसें तेज चल रही थीं और पसीने की वजह से मेरा टॉप मेरी त्वचा से चिपक गया था। फिर मेरी बहन की चुचियाँ भी उस आदमी ने अब पूरी तरह से दबानी शुरू कर दीं और एक और आदमी उसके चूतड़ मसलने लगा, वो मेरी ओर देखकर हेल्प माँग रही थी तथा चिल्लाने वाली थी लेकिन मैंने उसे चुप रहने का इशारा किया और वो शांत हो गई। अब लोगों के हाथ मेरे टॉप के अंदर जाने लगे थे और ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स को मसलने लगे, मुझे दर्द बहुत हो रहा था लेकिन मैं क्या करती बस के सही होकर चलने का इंतजार कर रही थी और भगवान से दुआ कर रही थी कि अगला स्टॉप जल्दी आए, तभी एक आदमी ने मेरा टॉप ऊपर कर दिया जिससे मेरी ब्रा सब भूखे लोगों के सामने आ गई और सबके मुँह में पानी आ गया। फिर तो मुझे पता नहीं चला कि किस-किसने मेरे बूब्स दबाए होंगे और फिर उसमें से कब किस आदमी ने ब्रा खींचकर उतार दी पता ही नहीं चला तथा मेरे नंगे बूब्स सबके सामने आ गए जो गोरे और गुलाबी निप्पल वाले थे, फिर क्या था जो-जो आदमी मेरे पीछे था वो मेरे निप्पल और बूब्स को नोचने या मसलने में लग गया था, कुछ तो मेरे बूब्स को चाट रहे थे उनकी गर्म जीभ मेरी त्वचा पर फिसल रही थी तो कुछ निप्पल को चूसने की कोशिश में थे और उनकी साँसों की गर्मी मुझे महसूस हो रही थी। वहाँ मेरी बहन की तो लोगों ने पूरी फ्रॉक ही ऊपर उठा दी थी और वो बेचारी मेरे सामने ब्रा पैंटी में खड़ी थी जबकि बहुत सारे हाथ उसके हर अंग को छू रहे थे, इतने में बस सही हो गई और चल पड़ी तो मुझे कुछ राहत मिली लेकिन तब तक मेरी बहन की ब्रा पैंटी लोगों ने फाड़ दी और वो बिल्कुल नंगी हो गई।

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एक आदमी तो उसके निप्पल को अपनी उंगलियों के बीच में दबाकर बुरी तरह मसल रहा था जबकि कई आदमी उसके चूतड़ों को मसलने में लगे थे और उसकी गांड को खोज रहे थे तो कई लोग उसकी चुचियाँ मसलने में लगे थे तथा कई हाथ उसकी चूत पर थे, ऐसा लग रहा था जिसको जो अंग मिल रहा था वो उसे छूकर महसूस करना चाहता था और उसकी काली फ्रॉक तो पैरों के नीचे पड़ी थी, अब मेरी परेशानी यह थी कि इस हालत में हम उतरेंगे कैसे। मैंने अपनी बहन से फ्रॉक उठाने को कहा तो वो बेचारी किसी तरह झुकी और नीचे से अपनी फ्रॉक उठाने लगी लेकिन इतने में एक आदमी ने उसके झुकने का फायदा उठाकर उसके झुकने से खुली हुई उसकी चूत में अपनी उंगली डाल दी, वो वर्जिन होने की वजह से दर्द से तिलमिला उठी और सिसकारी निकली आह्ह ह्ह्ह नहीं प्लीज। तब एक आदमी ने उसे फ्रॉक उठाकर दे दी और उसे सीधा खड़ा कर दिया तथा उसकी चूत में उंगली देने वाले आदमी को पीछे धक्का दे दिया, यह वो ही आदमी था जिसने मुझे कुछ न बोलने की सलाह दी थी और किसी तरह मेरी बहन ने वापस फ्रॉक पहन ली लेकिन अंदर कुछ न होने की वजह से अभी लोग उसकी चुचियाँ और चूत को टच कर रहे थे, यहाँ लोग मेरी कैप्री के अंदर हाथ डालकर मेरे कूल्हों को बुरी तरह मसलने लगे और एक आदमी तो मेरी कैप्री का बटन खोलकर उसे उतारने की कोशिश करने लगा लेकिन मैंने किसी तरह उसे रोका। तभी बस रुकी और कंडक्टर ने लोगों को उतरने को बोला तो हम दोनों तेजी से गेट की ओर लपके लेकिन लोग हमें बाहर नहीं निकलने दे रहे थे, तभी वो आदमी आया और उसने हम दोनों के लिए जगह बनाई तथा किसी तरह हम दोनों को उस बस से बाहर धकेला। फिर हम दोनों नीचे उतरे तो बड़ा सुरक्षित सा महसूस हुआ और बस के जाते ही हम एक दूसरे से लिपट कर रोने लगे, ऐसा गंदा एहसास हो रहा था कि क्या बताऊँ हम दोनों तो किसी मांस के टुकड़े की तरह नोचे गए थे लेकिन मैंने अपने आपको संभाला और आस-पास देखा तथा फिर अपनी बहन की ड्रेस पर लगी धूल साफ की और फिर मैंने ऑटो रोका तथा सीधे उसे अपने घर चलने को कहा, ऑटो में बैठे-बैठे हर पल वो ही हाथ अपने बदन पर महसूस हो रहे थे और मैंने आदमियों का इतना जानवरपन आज तक नहीं देखा था।

मैं अपनी रोती हुई बहन को चुप करने की कोशिश करने लगी और उसे दिलासा देने लगी जबकि वो बेचारी बहुत बुरी तरह से घबरा गई थी, उसकी तो लगभग इज्जत लूट गई थी लेकिन भला हो उस आदमी का जिसने हमें उस हवसी भीड़ से बचाया और मैं उसे धन्यवाद भी नहीं कह पाई। काफी रात को हम घर पहुँचे और हमारी खराब हालत देख मम्मी और पापा को एक मिनट भी नहीं लगा यह समझते हुए कि हमारे साथ क्या हुआ है तथा फिर मैंने उन्हें सब घटना बताई, मम्मी और पापा को जब पता चला तो पापा तो एकदम गुस्से में आग बबूला हो गए और मुझसे बस का नंबर पूछने लगे। फिर मम्मी ने उन्हें समझाया कि अब बात आगे बढ़ाने का कोई फायदा नहीं क्योंकि बदनामी तो अब हम लोगों की होगी और लड़कियाँ कम से कम सही सलामत घर पर तो आ गईं तथा मम्मी ने हम दोनों को अपने सीने से लगा लिया और हमें समझाने लगी कि जो हुआ उसे एक बुरा सपना समझकर भूल जाओ। फिर भी भूलना इतना आसान नहीं था और हम दोनों को संभलने में काफी समय लग गया जबकि मेरी बहन तो काफी दिनों तक सदमे में रही, उसने तो दो दिनों तक खाना तक नहीं खाया और रात में घबराकर उठ जाती फिर सो भी नहीं पाती थी तथा मैं खुद भी सदमे में थी तो उसे कहाँ संभाल पाती। लेकिन कुछ दिनों में मैं तो नॉर्मल होने लगी और जो हुआ था उसे भूलने की कोशिश करने लगी लेकिन रितिका अभी तक सदमे में थी, कभी-कभी तो वो मुझसे लिपटकर रोने लगती और मैं उसे किसी तरह संभालती तथा कहती कि अब उस घटना को भूल जा लेकिन वो कहती कि मैं क्या करूँ मैं उस दिन को भुला ही नहीं पा रही हूँ, उनके हाथ अभी तक मुझे मेरे बदन पर महसूस होते हैं। मैंने कहा जो तेरे साथ हुआ वो ही मेरे साथ भी तो हुआ है लेकिन मैं तो उस बात को भूल चुकी हूँ और देख मैं नॉर्मल हो गई हूँ, वो बोली कि कनिका ऐसा नहीं है कि मैं उस दिन को भूलना नहीं चाहती हूँ लेकिन मैं क्या करूँ मैं भुला नहीं पा रही हूँ अब बता मैं क्या करूँ।

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मैंने उससे बोला देख रितिका तू जितना उस दिन के बारे में सोचेगी उतना तुझे खराब महसूस होगा इसलिए उस दिन को अपनी जिंदगी से निकाल दे और सोच कि कभी ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था, उसने बोला पता नहीं तू यह कैसे कर लेती है लेकिन मुझको तो वो दिन अपनी जिंदगी से निकालकर फेंकना बड़ा मुश्किल लग रहा है। फिर इसी बात पर हममें काफी बहस हुई लेकिन मैं उसे समझाने में नाकामयाब रही, फिर मैंने भी यह सोचा कि सब बात वक्त पर छोड़ देते हैं शायद कुछ दिनों में वो अपने आप नॉर्मल हो जाए। रितिका मेरे साथ ही सोती थी और एक रात प्यास लगने की वजह से मेरी नींद टूट गई तथा मैं उठी तो मैंने देखा कि रितिका बेड पर नहीं थी, मैंने सोचा शायद टॉयलेट गई होगी क्योंकि बाथरूम की लाइट भी जल रही थी। मैं उठी और फ्रिज से पानी की बोतल निकालकर पानी पीने लगी तभी मुझे बाथरूम से सिसकारियाँ भरने की आवाजें आने लगीं, मैं एकदम चौंक गई कि क्या हुआ और एकदम भागकर बाथरूम के गेट तक पहुँची लेकिन जैसे ही मैंने अंदर देखा तो रितिका का टॉप बाथरूम के गेट पर ही पड़ा था और थोड़े आगे उसके शॉर्ट्स पड़े थे तथा फिर ब्रा पैंटी पड़ी थी। फिर मैं समझ गई कि कुछ तो गड़बड़ है और धीरे-धीरे गेट के अंदर गई तथा गेट के बगल में बनी दीवार के पीछे खड़ी हो गई और मैंने अंदर देखा तो रितिका बिल्कुल नंगी खड़ी थी तथा अपने एक हाथ से अपनी चूत रगड़ रही थी जबकि उसकी चूत पर झांटें नहीं थीं जो बिल्कुल चिकनी और गुलाबी दिख रही थी, जबकि मेरी चूत पर बाल आ चुके थे और वो दूसरे हाथ से अपने निप्पल को मसल रही थी। ऐसा नहीं था कि मैंने रितिका को नंगा नहीं देखा हो बल्कि रोज ही हम दोनों एक दूसरे के सामने कपड़े बदलते थे और एक दूसरे को आधा नंगा यानी टॉपलेस तो रोज ही देखते थे तथा बचपन में तो एक साथ ही नहाते थे और आज भी कभी-कभी हम जब लेट उठते हैं तो एक ब्रश कर रहा होता है तो दूसरा नहा रहा होता है लेकिन यह सीन कुछ अलग था वो नंगी तो थी ही लेकिन आज मैं उसके बदन को पहली बार इस तरह मचलता देख रही थी जैसे उसकी त्वचा पर हर स्पर्श से बिजली दौड़ रही हो। थोड़ी देर तक उसे यह करता देख मैं भी गर्म हो गई और अपने शॉर्ट्स के ऊपर से ही अपनी चूत रगड़ने लगी जबकि वहाँ रितिका ने एक उंगली अपनी चूत में डाली और बड़े हल्के-हल्के से उसे अंदर बाहर करने लगी, उसकी चूत से चपचप की आवाज आने लगी और उसकी साँसें तेज हो गईं।

धीरे-धीरे वो अपनी उंगली की स्पीड बढ़ाने लगी और उसके बदन पर पसीना छूटने लगा जो उसकी गोरी त्वचा पर चमक रहा था, उसकी चुचियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं और वो सिसकारियाँ भर रही थी आह्ह ह्ह्ह और जोर से जैसे बस में उन हाथों की याद कर रही हो, उसकी चूत गीली हो गई थी और वो पस्त होकर वही अपने चूतड़ के बल बैठ गई तथा अपनी दोनों टाँगें खोलकर अपनी चूत हल्के-हल्के सहलाने लगी जिससे मुझे उसकी चूत पूरी दिखाई देने लगी और मुझे पता नहीं उसे नंगा देखकर क्या हो रहा था जो मैं इतना गर्म हो गई थी कि मेरी चूत में खुजली होने लगी और मैं अपनी उंगलियाँ शॉर्ट्स के अंदर डालकर रगड़ने लगी। फिर वो थोड़ी देर में उठी और गेट की तरफ आने लगी तब मैं फटाफट बेड पर आकर लेट गई तथा उसके आते ही सोने का नाटक करने लगी, फिर उसने मुझे देखा कि कहीं मैं जाग तो नहीं रही और फिर धीरे से मेरे बगल में लेट गई तथा कुछ देर में शायद सो गई लेकिन मुझे नींद कहाँ आने वाली थी। मैं पूरी रात करवटें बदलती रही और सोचती रही कि शायद यही बात थी जो रितिका उस दिन को भूल नहीं पा रही थी, उसे उस दिन मजा आया था न कि बुरा लगा था लेकिन मुझे क्या हुआ था रितिका को नंगा देखकर, मैं क्यों इतना गर्म हो गई थी उसे देखकर, कहीं मुझे भी सेक्स की इच्छा तो नहीं हो रही थी और यह सोचते-सोचते पूरी रात गुजर गई तथा कब मेरी आँख लग गई मुझे पता भी नहीं चला। आगे की कहानी अगले भाग में।

कहानी का अगला भाग: बहनों की लेस्बियन चुदाई और लंड की तलब

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