College toilet mein chudai, first time pelai, ladies toilet sex: मैं आपको बता दूं कि मैं भी कोई कम ऐयाश नहीं हूं, साली मैंने तो पता नहीं कितनों के साथ मजा लिया है, कितनों से चुदवाया है, कितनों से गांड मरवाई है, हर तरह का स्वाद चखा है मैंने। लेकिन आज मैं आपको अपनी ऐयाशी की वो पहली कहानी सुनाना चाहती हूं, जो मेरी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट थी। मैं देखने में काफी खूबसूरत हूं, गोरी-चिट्टी, साढ़े पांच फीट लंबी, बदन भरा हुआ, मम्मे गोल-मटोल, कमर पतली और गांड उभरी हुई, जो लड़कों को पागल बना देती है।
मैं पल्लवी हूं, और मेरी तीन बड़ी बहनें हैं- मीशा, सुनंदा और प्रिया। हम चारों बहनों में एक-दो साल का फर्क है, सबसे छोटी मैं हूं। ये बात अगस्त 2022 की है, जब मैं अठारह साल की थी, पूरी तरह जवान हो चुकी थी, लेकिन घर में रिवाज ऐसा कि शादी तो लाइन से होती है, पहले बड़ी बहनों की बारी थी। दस-बारह साल पहले ही मैं जवान होने लगी थी, लेकिन असली मजा तो अब शुरू होने वाला था। पापा बड़ी बहनों के लिए लड़के देखने में लगे थे, और मुझे लग रहा था कि अभी पांच-छह साल तो लंड का इंतजार करना पड़ेगा, साली घर में तो कुछ करने की गुंजाइश नहीं थी।
तो मैंने सोचा, खुद ही इंतजाम करो पल्लवी, वरना जिंदगी सूखी रह जाएगी। कॉलेज में जाती थी मैं, वहां लड़के तो घूरते ही रहते थे, मेरी स्कर्ट के नीचे की टांगें देखकर, शर्ट के ऊपर से मम्मों को ताड़कर। मैं भी मन ही मन सोचती, कोई तो लाइन मारे, मैं भी तैयार हूं। और ऐसे ही शुरू हुई मेरी ऐयाशी। कॉलेज में जो लड़का मुझे लाइन देता, मैं हां कर देती, और फिर बाथरूम या टॉयलेट में जाकर चुदवा लेती, क्योंकि घर लाने की हिम्मत नहीं थी, और बाहर घूमने का टाइम भी नहीं मिलता था।
हां, मुझे अच्छे से याद है मेरी पहली चुदाई, वो भी शाहिद नाम के लड़के के साथ, कॉलेज के लेडीज टॉयलेट में। मैं उस वक्त पहले साल की स्टूडेंट थी, उम्र अठारह की, लेकिन बदन ऐसा कि कोई भी देखकर लंड खड़ा कर ले। मेरी क्लास की बाकी लड़कियां तो टॉयलेट में ही अपने यारों से मिलतीं, चुदवातीं, मैं देखती रहती थी। एक दिन मेरी सहेली कुसुम ने मुझे टोका, “अबे पल्लवी, तू हमेशा क्लास में बैठकर सिर्फ पढ़ती रहती है, किताबों में मुंह घुसाए रखती है। उधर देख, बाकी लड़कियां नए-नए लड़कों के साथ मजा ले रही हैं, उनका लंड ट्राई कर रही हैं।”
मैंने हंसकर कहा, “क्या करूं कुसुम, घर से डर लगता है, पकड़ी गई तो मार पड़ेगी।” लेकिन कुसुम ने मुझे समझाया, “अरे यार, जो लड़कियां सिर्फ पढ़ती रह जाती हैं, उनकी लाइफ बड़ी बोरिंग हो जाती है। शादी के बाद पति को खुश नहीं रख पातीं, क्योंकि अनुभव ही नहीं होता। हर जवान लड़की को शादी से पहले कम से कम एक-दो लड़कों से चक्कर चलाना चाहिए, लंड का स्वाद चखना चाहिए, वरना बाद में पछताएगी।” उसकी बात मेरे दिल में उतर गई, साली सही कह रही थी, मैं भी तो जवान हूं, क्यों न मजा लूं।
फिर कुसुम ने बताया, “शाहिद, जो तेरी ही क्लास में है, तुझे बहुत पसंद करता है, फ्रेंडशिप करना चाहता है। वो गोरा-चिट्टा, हैंडसम है, और सुना है लंड भी अच्छा-खासा है।” मैंने मन में सोचा, क्यों न ट्राई करूं। धीरे-धीरे शाहिद से बातें होने लगीं, वो मुस्कुराता, मैं शर्मा जाती। उस वक्त मोबाइल नहीं था मेरे पास, घर वाले नहीं देते थे, तो हम लव लेटर लिखकर बात करते, क्लास में बेंच के नीचे से चिट्ठियां पास करते। वो लिखता, “पल्लवी, तू बहुत सुंदर है, तेरे मम्मे देखकर मन करता है छू लूं।” मैं पढ़कर गर्म हो जाती, जवाब देती, “शाहिद, तू भी अच्छा लगता है, लेकिन डर लगता है।”
एक दिन हिस्ट्री की क्लास चल रही थी, बोरिंग लेक्चर, सब नींद में थे। शाहिद ने बेंच के नीचे चिट्ठी दी, “रिसेस में लेडीज टॉयलेट में आ, मिलना है।” मेरा दिल धड़क गया, पता था क्या होने वाला है, लेकिन उत्सुकता भी थी। रिसेस का बेल बजा, मैं उठी, किताबें रखीं, और टॉयलेट की तरफ चली। लेडीज टॉयलेट में घुसी, मूतने का बहाना था, लेकिन अंदर जाते ही शाहिद ने मुझे खींच लिया, दरवाजा बंद कर लिया।
“शाहिद! क्या कर रहा है, ये लेडीज टॉयलेट है, कोई देख लेगा तो बवाल हो जाएगा, कॉलेज से निकाल देंगे!” मैंने डरते हुए कहा, लेकिन अंदर से गुदगुदी हो रही थी। शाहिद हंसा, “अरे पल्लवी, तू बहुत डरती है रानी, इतना डरेगी तो जिंदगी का मजा कैसे लेगी? देख, मैंने चेक कर लिया, कोई नहीं है बाहर।” और उसने मुझे अपनी बांहों में कस लिया। पहली बार किसी लड़के का स्पर्श, उसकी छाती से मेरी छातियां दब गईं, गर्माहट फैल गई पूरे बदन में। मैं सफेद शर्ट और नीली शॉर्ट स्कर्ट में थी, कॉलेज की यूनिफॉर्म, शर्ट टाइट थी, मम्मे उभरे हुए।
शाहिद ने मेरे चेहरे को ऊपर किया, आंखों में देखा, “पल्लवी, तू कितनी हॉट है, तेरी ये आंखें, ये होंठ, मन करता है चूस लूं।” मैं शर्मा गई, लेकिन विरोध नहीं किया। उसने मेरे नए-नए उभरे मम्मों पर हाथ रख दिया, धीरे से दबाया। आह, मेरा दिल जोर से धड़का, सांसें तेज हो गईं, “शाहिद, क्या कर रहा है, कोई आ जाएगा।” लेकिन वो नहीं रुका, मेरे गोल-गोल ठोस स्तनों को सहलाने लगा, शर्ट के ऊपर से ही महसूस हो रहा था उसका हाथ। मुझे पहली बार एहसास हुआ कि मैं सिर्फ स्टूडेंट नहीं, एक जवान चोदने लायक लड़की हूं, जिसका बदन मर्दों को ललचा सकता है।
मेरा दिल धक-धक कर रहा था, सांसें ऊपर-नीचे हो रही थीं, मैंने कहा, “शाहिद, धीरे से, पहली बार है मेरा।” वो बोला, “चिंता मत कर रानी, मैं संभाल लूंगा, तुझे मजा दूंगा ऐसा कि भूल न पाएगी।” और बिना देर किए उसके होंठ मेरे होंठों पर आ गए, वो चूसने लगा मेरी लाली, जीभ अंदर डाल दी, मैं भी साथ देने लगी, हमारे होंठ आपस में चिपक गए, चुम्बन गहरा होता गया, ग्ग्ग्ग गी गी गों गों, जैसे एक-दूसरे को पी रहे हों। मैंने कभी सोचा नहीं था कि किस इतना नशीला होता है, मेरी चूत गीली होने लगी।
कुछ देर बाद हम दोनों सांसें भरते हुए अलग हुए, लेकिन शाहिद रुका नहीं, उसने मेरी टाई निकाली, शर्ट के ऊपरी बटन खोले, मेरे गले पर चूमने लगा, कान के पीछे, बालों के नीचे, जहां हल्के-हल्के रेशे थे, वहां जीभ फेरने लगा। आह्ह ह्ह्ह इह्ह, गुदगुदी के साथ मजा आ रहा था, मैं सिसकार रही थी, “शाहिद, ओह्ह, क्या कर रहा है, बड़ा अच्छा लग रहा है।” वो बोला, “रानी, ये तो शुरुआत है, अभी तेरी चूत का स्वाद चखूंगा।” मैं अब तक किताबों, पेन, कॉपी से ही खेली थी, लेकिन आज विपरीत लिंग का स्पर्श महसूस कर रही थी, बदन में आग लग गई थी।
शाहिद ने शर्ट के और बटन खोले, पीठ पर हाथ फेरने लगा, मैं उत्तेजित हो गई, चुदासी बन गई। मैंने खुद ही टॉयलेट की कुंडी दोबारा चेक की, अच्छे से बंद कर ली, कोई लड़की अचानक न आ जाए। टॉयलेट छोटी थी, सिर्फ एक सीट, वॉश बेसिन, और थोड़ी बू आ रही थी, लेकिन उस वक्त कुछ नहीं सूझ रहा था। शाहिद ने मेरी ब्रा ऊपर उठाई, मम्मे बाहर निकाल लिए, जैसे कोई खजाना मिल गया हो। आह इह्ह ओह्ह मां, मैं सिसकार उठी, “शाहिद, धीरे से, दर्द हो रहा है।” लेकिन वो मेरे दूध से खेलने लगा, निप्पल को उंगलियों से मसलने लगा, फिर मुंह में ले लिया, चूसने लगा, ग्ग्ग्ग गी गी गों गों गोग, जीभ से चाट रहा था, दांतों से हल्का काट रहा था।
मैं आह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह, ओह्ह प्लीज शाहिद, और चूस, बड़ा मजा आ रहा है, सिसकार रही थी। उसके लिए मेरे मम्मे ट्रॉफी जैसे थे, वो जी भर के पी रहा था, एक को चूसता, दूसरे को दबाता। मैंने कहा, “शाहिद, तू कितना अच्छा चूसता है, लगता है अनुभव है तेरा।” वो हंसा, “हां रानी, लेकिन तेरे जैसे मम्मे पहली बार मिले, इतने टाइट, इतने रसीले।” बाहर लड़कियों के आने-जाने की आवाजें आ रही थीं, चें चें दरवाजे की, पदचाप, मैं डर रही थी, “शाहिद, जल्दी कर, कोई पकड़ लेगा, कॉलेज में बदनामी हो जाएगी।” लेकिन वो बोला, “चिंता मत कर, मैं हूं न, मजा ले।” लड़के तो बिंदास होते हैं, टेंशन लड़कियां ही लेती हैं।
मेरे दोनों मम्मों को अच्छे से पीने के बाद, निप्पल से सारा रस निचोड़ने के बाद, शाहिद नीचे आया, मेरी स्कर्ट ऊपर उठाई, जगह की कमी थी, इसलिए पूरा नंगा नहीं किया, बस पैंटी उतार दी। मेरी महरून जाली वाली सेक्सी पैंटी देखकर बोला, “वाह पल्लवी, क्या माल है तू, ये पैंटी तो तेरी चूत को और हॉट बना रही है।” मैं शर्मा गई, लेकिन बोली, “उतार न साले, देख क्या रहा है।” उसने पैंटी उतारी, मेरी चूत देखी, हल्की झांटें थीं, बोला, “अरे पल्लवी, कॉलेज में ही तेरी झांटें निकल आईं, कितनी सेक्सी लग रही है तेरी बुर।”
मैंने मजाक में कहा, “भोसड़ीके, जब तेरी मां कॉलेज में थी तब उसकी भी निकली होंगी, पूछ लेना। अब चाट न, इंतजार नहीं होता।” शाहिद हंसा और मेरी चूत पर मुंह लगा दिया, जीभ से चाटने लगा, क्लिटोरिस को चूसा, आह्ह ऊउइ ऊईईई ऊउइ, मैं कमर उछाल रही थी, “ओह्ह शाहिद, आअह्ह्ह ह्ह्ह इह्ह, क्या कर रहा है, बड़ा नशीला है ये, और चाट, गहराई तक जीभ डाल।” वो बोला, “रानी, तेरी चूत का स्वाद अमृत जैसा है, गीली हो गई है पूरी, तैयार है लंड के लिए।” मैं मजा ले रही थी, मेरी छातियां कड़ी हो गईं, पत्थर जैसी, आज पता चला कि किताबों के अलावा एक रंगीली, चुदाई वाली दुनिया भी है।
शाहिद मेरी बुर को अच्छे से चाटता रहा, उंगली भी डाली, अंदर-बाहर की, मैं आह इह्ह ओह्ह ओह, ह्ह्ह आऊ ऊउइ, चिल्ला रही थी धीरे-धीरे, कहीं कोई सुन न ले। फिर उसने अपनी बेल्ट खोली, पैंट नीचे की, लंड बाहर निकाला, गोरा, मोटा, फूला हुआ। बोला, “ऐ पल्लवी, लौड़ा चूसेगी? देख कितना तना है तेरे लिए।” मैंने कहा, “दे न भोसड़ीके, मैं भी ट्राई करूं।” मैं टॉयलेट सीट पर बैठ गई, उसने इंग्लिश सीट का ढक्कन बंद किया, मुझे पीठ टिकाने को जगह दी, मैंने उसका लंड मुंह में लिया, ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग गों गों गोग, गले तक डीपथ्रोट कर रही थी, सिर आगे-पीछे, लार से गीला कर दिया। शाहिद आंखें बंद कर बोला, “आह पल्लवी, तू तो प्रो है, कितना अच्छा चूस रही है, और चूस, पूरा मुंह में ले।”
मैंने देर तक चूसा, उसके लंड की मांसपेशियां फूल गईं, और मोटा लग रहा था, मैं बोली, “शाहिद, तेरा लंड कितना गोरा और मोटा है, मजा आ रहा है चूसने में।” वो बोला, “रानी, अब चोदने का टाइम है, तैयार है?” मैंने हां में सिर हिलाया। उसने मुझे पीछे किया, चूत सामने आई, लंड सेट किया, धक्का मारा, आह्ह्ह ओह्ह, लंड बुर फाड़ता हुआ अंदर घुस गया, थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन मजा भी। धीरे-धीरे वो अंदर-बाहर करने लगा, मैं सिसकार रही थी, “शाहिद, धीरे से, पहली बार है, लेकिन अच्छा लग रहा है, और जोर से।”
कुछ देर बाद मेरी चूत रवां हो गई, गीली पूरी, शाहिद अब सट सट करके पेल रहा था, खप खप की आवाज, मैं आह इह्ह ओह्ह ओह, ह्ह्ह आऊ ऊउइ ऊईईई, मजा ले रही थी, उसके हाथ पकड़ लिए, कहीं गिर न जाऊं। बाहर लड़कियां आ-जा रही थीं, बातें कर रही थीं, मैं डर रही थी, “शाहिद, धीरे कर, कोई सुन लेगा।” लेकिन वो बोला, “रानी, मजा ले, मैं हूं न।” उसने रफ्तार बढ़ाई, जोर-जोर से धक्के, पूरी सीट हिल रही थी, वॉश बेसिन भी, खप खप खप खप, मैं धीरे-धीरे सिसकार रही थी, आह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह, “शाहिद, पेल मुझे, तेरी हूं मैं, और जोर से।”
शाहिद ने बैलेंस बनाया, मुझे गिरने नहीं दिया, उसकी लंड की रगड़ नशीली थी, मैं जैसे स्वर्ग में थी, बोली, “ओह्ह शाहिद, कितना अच्छा है ये, रोज करवाऊंगी तुझसे।” काफी देर तक चोदा, हर धक्के में मजा दोगुना होता गया, फिर उसने मेरी चूत में गरम-गरम माल छोड़ दिया, मैं धन्य हो गई, आह्ह ऊउइ, पूरा भर गया। हम दोनों हांफ रहे थे, मैं बोली, “शाहिद, आज मैं पूरी औरत बन गई।”
फिर हमने कपड़े ठीक किए, मैंने ब्रा नीचे की, शर्ट के बटन बंद किए, टाई लगाई, स्कर्ट नीचे की, धूल झाड़ी। शाहिद ने पैंट ऊपर की, बेल्ट बांधी, शर्ट इन की। उसने दरवाजा खोलकर देखा, कोई नहीं था, वो निकल गया। कुछ देर बाद मैं भी निकली, जैसे कुछ हुआ ही न हो। रिसेस खत्म हुआ, मैथ्स की क्लास शुरू, शाहिद मेरे बगल में बैठा, चिट्ठी दी, “चुदाई की क्लास कैसी लगी?” मैंने लिखा, “बहुत मस्त, फिर कब?” उसके बाद हम कई बार टॉयलेट में मिले, चुदाई की, लेकिन वो पहली बार हमेशा याद रहेगी।