मैं वही 19 साल की लड़की हूँ जिसने पहले कबूल किया था कि गलती से भाई का फेक अकाउंट देख लिया, उसके मोटे लौड़े की फोटो देखी, फिर भी गिल्ट के बावजूद खुद का फेक अकाउंट बनाकर उससे गंदी चैटिंग शुरू कर दी, और उस पहली रात हमने इतनी गंदी सेक्सटिंग की कि मेरी चूत फटते-फटते झड़ गई, साँसें तक रुक गईं, मुझे लगा था शर्म से मर जाऊँगी और सब बंद कर दूँगी, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ, उल्टा ये आग और भड़क गई, मेरे मन में वो गंदी इच्छाएँ और ज़्यादा उबलने लगीं।
कहानी का पिछला भाग: भैया का फेक अकाउंट
अगले पूरे दिन मैं बेचैन रही, हर घंटे ऐप चेक करती रही, दिल ऐसे धड़क रहा था जैसे कोई चोर मेरे सीने में घुस आया हो और बाहर निकलने को छटपटा रहा हो, काम पर क्या कर रहा होगा वो, क्या वो भी मेरे बारे में सोचकर अपना लौड़ा सहला रहा होगा, घर में उसके कमरे की महक याद आती रही, वो हल्की पसीने वाली मर्दाना गंध जो कभी-कभी बाथरूम से आती है और मुझे और ज़्यादा उत्तेजित कर देती है, और गिल्ट में डूबते हुए भी मैं सोचती रही कि काश वो जानता कि मैं हूँ तो क्या करेगा, क्या मुझे और गंदी बातें कहेगा या मुझे पकड़कर चोद डालेगा, इंतज़ार की आग मेरी चूत तक पहुँच गई थी, जाँघें आपस में रगड़ती रही, पैंटी में चिपचिपा रस महसूस हो रहा था, वो मीठी-नमकीन गर्म गंध जो सिर्फ रंडीपने की हालत में आती है और मुझे और ज़्यादा पागल बना देती है। शाम डिनर के ठीक बाद, रात नौ बजे के करीब उसका स्टेटस ग्रीन हुआ, दिल की धड़कन कान में गूँजने लगी, साँसें तेज़ हो गईं, सबसे पहले मैसेज आया ‘hi again hotty’, बस इतना पढ़ते ही मेरी चूत में करंट जैसी सनसनी दौड़ी, चुच्चियाँ टाइट हो गईं, निप्पल्स सख्त होकर खड़े हो गए, जैसे कोई हाथ उन्हें मसल रहा हो, हम वहीं से शुरू हो गए जहाँ छोड़ा था, लेकिन इस बार चैटिंग धीरे-धीरे शुरू हुई, पहले वो पूछता रहा कि आज कैसा रहा दिन, मैंने बताया कि कितनी बेचैनी थी, फिर बात गंदी होने लगी, वो कहता ‘क्या पहना है तूने’, मैंने बताया ‘कुछ नहीं, सिर्फ पैंटी’, वो हँसा और बोला ‘उसे भी उतार दे, नंगी हो जा मेरे लिए’, मेरी उँगलियाँ काँप रही थीं टाइप करते हुए, मैंने वैसा ही किया, पैंटी उतारी, चूत पर हवा लगी तो और गर्म हो गई, फिर उसकी बातें पहले से कहीं ज़्यादा गंदी हो गईं, ‘अपनी चूत पर उँगली रख, धीरे-धीरे रगड़, सोच मैं तेरी फूली हुई चुची दबा रहा हूँ और क्लिट चूस रहा हूँ, जीभ से तेरी चूत का रस चाट रहा हूँ’, मैंने वैसा ही किया, उँगलियाँ पहले सूखी थीं लेकिन जैसे ही क्लिट पर घुमाईं, रस बहने लगा, चिपचिपा, गाढ़ा, कमरे में मेरी चूत की मादक गंध फैल गई, जो मुझे और ज़्यादा उत्तेजित कर रही थी, तकिए में मुँह दबाकर आह्ह.. ओह्ह.. उफ्फ.. निकालती रही, उँगलियाँ तेज़ होती गईं, चूत की दीवारें सिकुड़-सिकुड़ कर पकड़ रही थीं, जैसे कोई मोटा लौड़ा अंदर धक्के मार रहा हो, वो और गंदी बातें करता रहा ‘अब उँगली अंदर डाल, सोच मेरा लौड़ा तेरी चूत में घुस रहा है, धीरे-धीरे बाहर-अंदर कर’, मैंने उँगली डाली, चूत की गर्मी महसूस हुई, रस की चपचपाहट की आवाज़ आई, और मैं और ज़्यादा हाँफने लगी, दोनों झड़े, मेरा बदन काँप उठा, रस बिस्तर पर टपक गया, और फिर अपने-अपने कमरे में सोने चले गए, जैसे कुछ हुआ ही न हो, लेकिन मेरी चूत अभी भी फड़फड़ा रही थी, गर्मी कम नहीं हो रही थी।
अगली सुबह यानी कल की बात है, मैं देर से उठी, दस बजे के करीब, भाई काम पर जा चुका था, जैसे ही आँख खुली, रात की चैटिंग और सपनों की वजह से मेरी चूत पहले से ही रस से भरी थी, सपने में वो मुझे चोद रहा था, उसका मोटा लौड़ा मेरी चूत की दीवारें चीरता हुआ, मेरी चुच्चियाँ मसलता हुआ, और मैं चिल्ला रही थी आह्ह.. चोद मुझे.. और तेज़, शरीर में आग लगी थी, तन में जलन थी, फ़ोन उठाया और सीधे पोर्न सर्च किया, एक क्लिप मिली जिसमें लड़का चुपके से बहन की पैंटी चुराता है, उसे नाक से लगाकर गहरी साँस लेता, फिर अपना मोटा सख्त लौड़ा निकालकर उस पर रगड़ता, आह्ह.. उफ्फ.. की आवाज़ें निकालते हुए झड़ जाता है, वो देखते ही मेरी चूत में आग लग गई, क्लिट फूलकर फड़फड़ाने लगी, दिल की धड़कन कानों में बज रही थी, जाँघें आपस में दबा लीं, चुच्चियाँ भारी हो गईं, निप्पल्स पर उत्तेजना की लहर दौड़ गई, ‘बस, यही करना है,’ मन में आया, लेकिन पहले मैंने और देखा, क्लिप में लड़का पैंटी को लौड़े पर रगड़ते हुए धीरे-धीरे सहलाता है, फिर जीभ लगाता है, और मैंने भी कल्पना की कि मैं वैसा ही करूँगी, मेरी चूत और गीली हो गई, रस जाँघों पर बहने लगा, उसके बाद उठी, उसका कमरा खाली था तो मैंने मम्मी से बहाना बनाया कि पावर बैंक ढूँढ रही हूँ, दीवार के हुक पर कल वाली अंडरवियर लटकी मिली, दिल ज़ोर से धड़का, हाथ काँपते हुए झट से उठाई, लोअर की जेब में ठूँसी और कमरे की ओर दौड़ी, जैसे कोई रंडी चोरी कर रही हो, दरवाज़ा लॉक करते ही साँस फूली, दिल की धड़कन तेज़ थी।
पहले सिर्फ़ सूँघा, डिटर्जेंट की खुशबू थी, लेकिन नीचे हल्की पसीने वाली मर्दाना महक, जैसे उसके लौड़े और गांड की गंध अभी भी चिपकी हो, वो गंध मेरी नाक में घुस गई, चूत में आग लग गई, ये सोचते ही मेरी चूत से रस टपकने लगा, गर्म, चिपचिपा, कमरे में वो मिश्रित गंध फैल गई, फिर रुक नहीं पाई, धीरे-धीरे लोअर और पैंटी नीचे सरकाई, हवा लगते ही ठंडक महसूस हुई, लेकिन अंदर जलन और बढ़ गई, चुच्चियाँ उभर आईं, मैंने उन्हें सहलाया धीरे से, निप्पल्स को मसला, आह्ह.. निकल गई, उसकी अंडरवियर पहनी, थोड़ी ढीली, लेकिन जैसे ही चूत से लगी, वो मेरे रस से चिपक गई, हल्का सा चपचप की आवाज़ आई, कुछ ही सेकंड में मैं उसमें पूरी तरह भीग चुकी थी, क्लिट पर वो कपड़ा रगड़ता हुआ, जैसे भैया का लौड़ा छू रहा हो, आह्ह.. इह्ह.. मन में आवाज़ें गूँज रही थीं, उसमें मेरे रस की गंध मिली उसकी मर्दाना महक से, अनजाने में जीभ लगा दी, नमकीन-कड़वा गंदा स्वाद, जैसे उसके लौड़े का वीर्य हो, और गिल्ट में और ज़्यादा रंडी हो गई, मैंने और सहलाया खुद को, उँगली क्लिट पर घुमाई धीरे-धीरे, सोचते हुए कि वो मुझे देख रहा है।
ठीक उसी वक़्त बॉयफ्रेंड का कॉल आ गया, मेरी आवाज़ काँप रही थी, इतनी हॉर्नी थी मैं कि साँसें हाँफ रही थीं, ‘ह..हैलो? हाँ, सुन, 2-3 दिन फैमिली फंक्शन में हूँ, बात करना रिस्की है, कॉल मत करना, ठीक?’ कॉल पर हल्की आह निकल गई, मैंने खाँसी का बहाना बनाया, लेकिन मन में सोच रही थी कि अगर भैया का कॉल होता तो क्या करती, क्या उसे अपनी आह सुनाती, सच तो ये था कि मुझे डर था कहीं सेक्सटिंग करते वक़्त गलती से ‘भैया’ न बोल दूँ, या अपनी उत्तेजना की आवाज़ें निकल जाएँ।
तो न्यू ईयर ऐसा ही शुरू हुआ, अपने सगे भाई की अंडरवियर पहने हुए, पूरे दिन उसका एहसास चूत पर महसूस करते हुए, हर कदम पर वो रगड़ती, मेरे रस से लथपथ, जैसे वो मुझे छेड़ रही हो, दिन भर मैं घर में घूमती रही, हर बार बैठते-उठते वो अंडरवियर मेरी क्लिट से रगड़ती, रस बहता रहता, चुच्चियाँ भारी लगतीं, मैंने कई बार खुद को सहलाया छुप-छुपकर, बाथरूम में जाकर उँगली की धीरे-धीरे, सोचते हुए कि रात को क्या होगा, और ये जानते हुए कि रात को फिर उससे चैट करूँगी जबकि वो अभी भी मेरे बदन से चिपकी होगी, रात की सेक्सटिंग बिल्कुल अलग थी, पहले वो बातें करता रहा सामान्य, फिर गंदी होने लगी, ‘आज क्या किया तूने, कोई नॉटी बात?’, मैंने बताया ‘तेरे बारे में सोचकर खुद को छुआ’, वो उत्तेजित हो गया, ‘बता कैसे, डिटेल में’, मैंने बताया ‘धीरे से चुच्चियाँ दबाईं, फिर चूत पर उँगली घुमाई’, उसकी हर गंदी बात पढ़ते हुए अंडरवियर मेरी क्लिट पर दबाव डालती, जैसे वो सच में मुझे चोद रहा हो, रस बहता रहता, कमरा मेरी चूत की गंध से भर गया, आह्ह.. ओह्ह.. उफ्फ.. निकलती रही, हर मैसेज दस गुना ज़्यादा लग रहा था, उसने लिखा ‘अपनी चूत में उँगली डाल, धीरे से अंदर-बाहर कर, सोच मेरा मोटा लौड़ा तेरी चूत मार रहा है, कितना रस निकल रहा है तेरी रंडी चूत से?’, मैंने वैसा किया, उँगली डाली, चूत की गर्मी महसूस हुई, दीवारें कस रही थीं, मैंने रिप्लाई किया ‘हाँ, बहुत रस निकल रहा है, तेरे लौड़े की कल्पना से चूत फट रही है, चोद मुझे ज़ोर से’, वो बोला ‘तेज़ कर, चुच्चियाँ दबा अपने आप, मैं तेरी चूत फाड़ दूँगा, रंडी बना दूँगा’, मैं वैसा ही करती गई, साँसें हाँफतीं, ‘उफ्फ.. हाँ, चोद मुझे… भैया…’ लगभग टाइप हो ही गया था, लेकिन रुक गई, और झड़ गई इतनी ज़ोर से कि बदन थरथरा उठा।
मैं जानती हूँ कि मैं और गहरे डूब रही हूँ, ये गलत है, लेकिन अभी रुकना नामुमकिन लग रहा है, ये उत्तेजना मुझे खाए जा रही है।
हैप्पी न्यू ईयर सबको। शायद मुझे लक की ज़रूरत है।
मैं बस लड़कों से पूछना चाहती हूँ: अगर तुम मेरे भाई की जगह होते, तो क्या तुम्हें यह अच्छा लगता? या लड़कियों, मुझे बताओ, क्या तुम ऐसा कुछ करतीं? या गलती मेरी ही है?
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