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भाभी बोली आज से मैं तेरी कुत्तिया

कहानी का पिछला भाग: भाभी बोली आज से मैं तेरी कुत्तिया – Part 1

मैंने उनकी आँखों में देखते हुए कहा, “हाँ भाभी, बिल्कुल समझता हूँ। आपकी हर बात, हर दर्द। और मैं चाहता हूँ कि आप कभी उदास न रहें। आप इतनी खूबसूरत हो, इतनी हसीन… आपको हर खुशी मिलनी चाहिए।”

वो थोड़ी देर चुप रहीं, उनकी साँसें अभी भी भारी थीं। फिर मैंने बहुत धीरे से, लगभग फुसफुसाते हुए कहा, “भाभी… आई लव यू।”

उनकी आँखें चौड़ी हो गईं, लेकिन वो पीछे नहीं हटीं। बस मेरी तरफ देखती रहीं। मैंने धीरे से अपना हाथ उनके गाल पर रखा, अँगूठे से उनके होंठों को छुआ। फिर उनका चेहरा थोड़ा ऊपर उठाया और बहुत नरमी से उनके होंठों पर अपना होंठ रख दिया। पहले वो पूरी तरह फ्रीज हो गईं – होंठ सख्त, साँस रुक सी गई। लेकिन 2-3 सेकंड बाद ही वो पिघल गईं। उनकी आँखें बंद हो गईं, और उन्होंने धीरे से मेरे होंठ दबाए। क्या किस था यार… जैसे सारी दुनिया रुक गई हो। उनकी जीभ ने मेरी जीभ को छुआ, पहले हल्के से, फिर गहराई में घुस गई। मैंने उनकी निचली होंठ को हल्का सा काटा, वो “म्म्म…” करके सिहर उठीं। हम दोनों एक-दूसरे को चूमते रहे – कभी गहरा, कभी सिर्फ होंठ दबाकर, कभी जीभ से खेलते हुए। उनकी साँसें तेज होती गईं, सीना ऊपर-नीचे होने लगा। करीब 15 मिनट तक हम ऐसे ही लिप-लॉक में डूबे रहे। मेरे हाथ उनकी पीठ पर सरक गए, उन्हें और पास खींच लिया।

फिर अचानक वो खुद को पीछे खींचीं, साँसें फूल रही थीं। बिना कुछ कहे उठीं और किचन की तरफ चली गईं। शायद शरम, शायद कंट्रोल करने की कोशिश। मेरा 8 इंच का लंड पहले से ही पत्थर की तरह सख्त था, पैंट में दर्द करने लगा। मैं उनके पीछे चला गया। वो सिंक के सामने खड़ी थीं, दोनों हाथ सिंक पर टिकाए, पीठ मेरी तरफ। मैंने पीछे से उनकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ा, अपनी छाती उनकी पीठ से सटा दी। उनकी गर्दन पर सबसे पहले हल्का सा किस किया। वो “स्स्स…” करके सिहर गईं। मैंने धीरे-धीरे गर्दन को चूमना शुरू किया, जीभ से लाइन खींची। कान के पास पहुँचा, कान की लौ को जीभ से छुआ, फिर एयररिंग्स निकालकर कान के अंदर जीभ डाल दी। वो पूरा शरीर काँप उठी, “आह्ह… निखिल…”

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उन्होंने तुरंत मुड़कर मेरा चेहरा दोनों हाथों में पकड़ा और इतना गहरा किस किया कि लगा जैसे वो मुझे खा जाएँगी। उनकी जीभ मेरे मुँह में घूम रही थी, दाँत हल्के से काट रही थीं। किस करते-करते वो मेरे कान में फुसफुसाईं, “निखिल… फक मी… प्लीज… आज से मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ… मेरी सारी चाहत तुम पूरी करो।”

यह सुनकर मेरा खून उबल पड़ा। मैंने उन्हें गोद में उठा लिया – वो मेरी बाँहों में हल्की सी लगीं। बेडरूम में ले जाकर बेड पर धीरे से लिटाया। उनकी आँखें बंद कर दीं। मैं उनके ऊपर झुक गया। सबसे पहले माथे पर किस, फिर बंद आँखों पर, नाक की नोक पर, दोनों गालों पर। होंठों पर आया, फिर गर्दन पर। गर्दन को चूमते-चूमते कंधों तक पहुँचा। टॉप की स्ट्रैप को धीरे से साइड में सरकाया। कंधों और गर्दन पर किस करते हुए बोला, “भाभी… आपकी स्किन कितनी सॉफ्ट है… कितनी गर्म… मुझे पागल कर रही हो।”

वो आहें भरने लगीं, “आह्ह… निखिल… ह्ह्ह… और चूमो… नीचे जाओ… आह्ह…”

मैंने उनका टॉप धीरे-धीरे ऊपर सरकाया और उतार दिया। ब्रा नहीं थी। 36 के गोरे-गोरे, भरे हुए बूब्स मेरे सामने थे। निप्पल्स गुलाबी और टाइट हो चुके थे। मैंने दोनों हाथों से बूब्स को सहलाया, हल्के से मसलते हुए निप्पल्स को अँगुलियों से दबाया। वो कमर उठा रही थीं। फिर एक निप्पल को मुँह में लिया – जीभ से घुमाया, चूसा, हल्का सा काटा। वो चीखी, “ओह्ह… हाँ… चूस जोर से… आह्ह… दूसरा भी… अच्छा लग रहा है निखिल…”

मैंने दूसरा निप्पल भी वैसा ही ट्रीटमेंट दिया। एक हाथ से दूसरे बूब को दबाता रहा। वो “ह्म्म्म… आह्ह…” करती रहीं। फिर मैं नीचे सरका – पेट पर किस की लाइन खींची, नाभि के चारों तरफ जीभ घुमाई, नाभि में जीभ डालकर चाटा। वो सिहर रही थीं। कमर की हड्डियों को चाटा, दोनों तरफ। फिर स्कर्ट की साइड ज़िप खोली, धीरे-धीरे स्कर्ट नीचे सरकाई और उतार दिया। अब सिर्फ लाल पेंटी में थीं। पेंटी का बीच का हिस्सा गीला था, चूत की आउटलाइन साफ दिख रही थी।

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मैंने पूछा, “काजोल… सॉफ्ट से शुरू करें या सीधे वाइल्ड?”

वो बोलीं, “सॉफ्ट से… लेकिन जल्दी वाइल्ड हो जाओ… आज मुझे सब चाहिए… पूरी तरह चोद दो मुझे।”

मैंने उनकी जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर किस शुरू किए – बहुत धीरे, जीभ से लाइन खींचते हुए ऊपर की तरफ। वो पैर फैला रही थीं, कमर उठा रही थीं। अचानक वो उठ बैठीं, मेरे बाल पकड़े और मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा दिया। “निखिल… बस… अब मत तड़पाओ… चाटो मेरी चूत… प्लीज… मैं जल रही हूँ।”

मैंने पेंटी को साइड किया, फिर उतार दिया। चूत गीली, सूजी हुई, क्लिट बाहर। मैंने पहले क्लिट पर हल्की जीभ लगाई। वो चीखी, “आआह्ह… ओह्ह…” फिर पूरी चूत पर जीभ फेरी, अंदर डाली। क्लिट को चूसना शुरू किया, एक उँगली अंदर डाली और अंदर-बाहर करने लगा। वो पागल हो गईं, “आह्ह… और अंदर… जोर से चाटो… ओह्ह… निखिल… मैं मर जाऊँगी… आआह्ह…”

फिर वो मुझे पीछे धकेला, मेरे चेहरे पर चढ़ गईं। चूत मेरे मुँह पर रखकर रगड़ने लगीं – कमर आगे-पीछे, सर्कुलर मोशन में। “ऊँ… ह्ह्ह… हाँ… ऐसे ही… मेरी चूत खा जाओ… आह्ह…”

करीब 10 मिनट बाद वो नीचे उतरीं। मेरी जींस की बटन खोली, ज़िपर नीचे की, जींस और अंडरवियर साथ उतारे। लंड बाहर आया – 8 इंच, मोटा, नसें फूली हुईं। उन्होंने हाथ में पकड़ा, सहलाया, सिर को जीभ से घुमाया। फिर मुँह में लिया – पहले सिर चूसा, फिर धीरे-धीरे गहरा लिया। ग्ग्ग्ग… गी… गों… गोग… गले तक ले जा रही थीं। मैं कराह रहा था, “आह्ह… भाभी… क्या मुँह है तुम्हारा…” 20 मिनट तक चूसती रहीं – कभी तेज, कभी धीरे, कभी गेंदों को चाटतीं।

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फिर वो बोलीं, “अब डाल दो… सह नहीं होता।”

मैंने कंडोम निकाला। उन्होंने लगाया, लूब्रिकेंट लगाया। वो लेट गईं, घुटने मोड़े, पैर फैलाए। मैं ऊपर आया। लंड को चूत पर रगड़ा – गीला-गीला फील हो रहा था। फिर धीरे से सिर अंदर किया। वो “आह्ह…” बोलीं। फिर पूरा 8 इंच एक झटके में। वो चीखीं, “ओह्ह… पूरा… फाड़ दो…”

मैंने धीरे स्ट्रोक शुरू किए – बाहर- अंदर। वो बोलीं, “चोदो अपनी रंडी को… कुत्तिया बनाकर चोदो… जोर से…”

स्पीड बढ़ाई। पचक-पचक… चूत गीली होने से आवाजें तेज। वो कराह रही थीं, “आह्ह… हाँ… और जोर से… हम्म्म… फक मी… ओह्ह…” फिर पलटा – डॉगी स्टाइल। कमर पकड़ी, पीछे से जोर-जोर से ठोका। वो तकिए में मुँह दबाकर चीख रही थीं, “आआह्ह… गहरा… फाड़ दो… ओह्ह… मैं झड़ रही हूँ…” वो तीन बार झड़ीं – हर बार चूत सिकुड़कर लंड दबाती रही।

20 मिनट बाद मैं बोला, “भाभी… आने वाला है…”

वो बोलीं, “कंडोम निकालो… मेरे ऊपर…” मैंने निकाला। वो मुड़कर बैठ गईं। मैंने हाथ चलाया और सारा गर्म पानी उनके बूब्स, चेहरे और होंठों पर छोड़ दिया। वो उँगली से ले जाकर चाटीं, मुस्कुराईं।

फिर हमने साफ किया, कपड़े पहने। चाय बनाई, पीते ही थे कि बेल बज गई, भैया आ गए, हम बच गए।

अब दो साल से महीने में 12-15 बार चुदाई करते हैं। खूब एंजॉय करते हैं।

दोस्तों, यह कहानी कैसी लगी?

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