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Bhabhi ki behen ki chudai – भाभी की बहन की सील तोड़ चुदाई

Bhaiya ki sali ki chudai sex story – नमस्ते दोस्तों। मेरा नाम कार्तिक है। मेरी उम्र इक्कीस वर्ष है और मैं उत्तर प्रदेश के कानपुर का रहने वाला हूं। यह मेरी पहली सेक्स कहानी है जो मेरे भैया की साली के साथ हुई थी।

सबसे पहले मैं आपको भैया की साली के बारे में पूरा विस्तार से बता देता हूं ताकि आप उसकी पूरी खूबसूरती और आकर्षण को महसूस कर सकें। उसका नाम करिश्मा है और उसकी उम्र करीब उन्नीस साल होगी। उसका फिगर अट्ठाईस-छब्बीस-तीस का है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उसकी चूचियां थोड़ी छोटी हैं लेकिन वे पूरी तरह से उभरी हुईं और आकर्षक हैं जो किसी भी मर्द की नजर को अपनी ओर खींच लेती हैं। उसकी कमर पतली और कूल्हे चौड़े थे जो चलते समय लहराते हुए नजर आते थे। उसकी त्वचा चिकनी गोरी और नम थी जो रोशनी में चमक उठती थी। उसकी आंखें बड़ी-बड़ी और गहरी थीं जिनमें एक अनोखा जादू था। उसके होंठ गुलाबी और नरम थे जो मुस्कुराते समय और भी मोहक लगते थे। वह दिखने में गजब की माल थी जिसे देखकर मन में तुरंत गर्मी सी दौड़ जाती थी।

बात शुरू होती है भैया के तिलक से। वह तिलक में आई थी। मैंने उसे पहली बार वहीं देखा। हॉल में फूलों की महक फैली हुई थी और शहनाई की धुन गूंज रही थी। रोशनी की चमक में वह खड़ी थी और उसका लिबास उसके शरीर को पूरी तरह से उभार रहा था। मैंने अपनी एक दूर की रिश्ते की बहन से पूछा कि यह कौन है। उन्होंने बताया कि यह भैया की साली है। मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई थी और मेरी नजरें उसकी ओर बिना रुके चली जा रही थीं।

तिलक चढ़ाने के दौरान वह वहीं बैठी थी और मैं भी। आसपास की भीड़ में लोग शोर कर रहे थे लेकिन मेरी सारी ध्यान उसी पर केंद्रित था। मैं उसे एकटक देखे जा रहा था। उसकी गर्दन की हल्की सी नसें दिख रही थीं और उसकी सांसों की लहर उसके ब्लाउज को हल्का-हल्का हिला रही थी। उसने भी यह नोटिस कर लिया। उसकी आंखों में एक पल के लिए शर्म और उत्सुकता का मिश्रण था। फिर भी मैंने नजर नहीं हटाई। मेरे शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी और मेरी उंगलियां कसकर मुट्ठी में बंद हो गई थीं।

इसके बाद सब कुछ खत्म हुआ और लोग खाना खाने लगे। हवा में तीखी चटनी और गरमागरम खाने की खुशबू फैल रही थी। मैं खाने के स्टॉल पर खड़ा था तभी वह भी वहां आई। उसकी चाल में एक हल्की लचक थी जो उसके कूल्हों को और भी आकर्षक बना रही थी। हम दोनों में थोड़ी हाय हैलो हुई। उसकी आवाज मीठी और नरम थी जो मेरे कानों में गूंज गई। फिर वह अपने लोगों के साथ वापस चली गई। उसके जाते ही मेरी नजर उसके पीछे लगी रही और मैंने महसूस किया कि मेरी सांसें भारी हो गई हैं।

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अब मुझे बस भैया की शादी का इंतजार था। हर दिन मैं उसे याद करके अपनी कल्पना में उसके शरीर को छूने का सपना देखता था। जल्दी ही वह दिन आ गया। मैं उस दिन खूब अच्छे से तैयार हुआ। मैंने अपनी बेस्ट शर्ट और पैंट पहनी थी जिससे मेरी बॉडी अच्छी लग रही थी। बारात लेकर हम भाभी के घर पहुंचे। रास्ते भर ढोल की थाप और गाने की आवाज गूंज रही थी।

वहां पहुंचते ही मेरी नजरें उसे ढूंढने लगीं। भीड़ भरे घर में रोशनी की माला झिलमिला रही थी और फूलों की खुशबू हवा में घुली हुई थी। आखिरकार वह दिख ही गई। लहंगे चुनरी में वह क्या गजब लग रही थी। लहंगे का लाल रंग उसके गोरे रंग पर और भी चमकदार लग रहा था। मैं उसकी खुली कमर देखता ही रह गया। उसकी नाभि गहरी और आकर्षक थी जो हल्के पसीने से चमक रही थी। उसकी त्वचा इतनी नरम और चिकनी दिख रही थी कि मन करता था तुरंत हाथ बढ़ाकर छू लूं।

उसने भी मुझे देखा और मुस्कुराते हुए पास आई। उसकी मुस्कान में एक शरारत भरा भाव था जो मेरे दिल को छू गया। वह बोली हाय। मैंने भी जवाब दिया हैलो। फिर उसने पूछा कैसे हो आप। मैंने कहा सब मस्त और आप कैसी हो। मेरी आंखें उसकी खुली कमर पर बार-बार जा रही थीं और मैं महसूस कर रहा था कि मेरी पैंट में हल्का सा उभार हो रहा है।

उसने हंसते हुए कहा जैसे आप हो। उसकी हंसी की आवाज इतनी मधुर थी कि मेरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई। फिर मैंने डबल मीनिंग में बोला हां वह तो दिख ही रहा है। हम दोनों हंस पड़े। उसकी हंसी के साथ उसके स्तन हल्के से हिले और मैंने कल्पना की कि वे कितने नरम होंगे।

थोड़ी देर नॉर्मल बातचीत के बाद उसने कहा आप मेरी कुछ अच्छी अच्छी तस्वीरें क्लिक कर दीजिए। मैंने कहा ठीक है आप पोज सेट कीजिए मैं क्लिक करता हूं। वह विभिन्न पोज में खड़ी हुई जहां उसका शरीर और भी आकर्षक लग रहा था। मैंने कैमरा उठाया और हर शॉट में उसके कर्व्स को करीब से देखा। मेरी उंगलियां कैमरे पर कांप रही थीं।

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कुछ फोटोज क्लिक करने के बाद मैंने कहा आप अपना नंबर दे दो मैं फोटोज सेंड कर दूंगा। उसने अपना नंबर दिया और जाते जाते बोली बाद में मैसेज करना ओके। मैंने हां कह दिया। उसका नंबर मिलते ही मेरे मन में खुशी की लहर दौड़ गई और मैंने सोचा कि अब हमारी बातें आगे बढ़ेंगी।

शादी हो गई हम अगले दिन तक रुके लेकिन उससे दोबारा बात नहीं हो पाई। शादी की रात में रोशनी और संगीत के बीच मैं बार-बार उसकी तलाश में रह गया लेकिन भीड़ में वह कहीं छिप गई थी। फिर भाभी घर आ गईं और सब नॉर्मल हो गया। घर की दिनचर्या शुरू हो गई लेकिन मेरे मन में करिश्मा का ख्याल हर पल घूमता रहता था।

दूसरे दिन उसका मैसेज आया। फोन की स्क्रीन पर उसका नाम देखते ही मेरी धड़कन बढ़ गई। हमारी खूब बातें हुईं। चैट में हर मैसेज के साथ मैं उसके चेहरे को कल्पना में देख रहा था। उसने कहा आपसे एक बात पूछूं सही सही बताओगे। मैंने हां कहा। मेरी उंगलियां फोन पर तेजी से चल रही थीं।

उसने पूछा आपकी कोई गर्लफ्रेंड है। मैंने कहा नहीं और आपका कोई बॉयफ्रेंड है। उसने जवाब दिया मेरा भी कोई नहीं है जी। यह कह कर उसने हंसने वाला इमोजी लगा दिया। उसकी इस बात से मेरे मन में एक नई उम्मीद जागी और मैंने महसूस किया कि मेरी सांसें भारी हो रही हैं।

मैंने डबल मीनिंग में कहा तो अपने जीजा के भाई को ही अपना बॉयफ्रेंड बना लो। उसने जवाब दिया चाहती तो हूं पर वे ही नहीं बनना चाहते। उसने फिर से वही हंसने वाला इमोजी भेज दिया। उसके जवाब ने मेरे शरीर में गर्मी भर दी और मैं कल्पना करने लगा कि अगर वह मेरी हो जाए तो क्या होगा।

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मैंने कहा सही में बनोगी। उसने कहा हां। फिर मैंने कहा आई लव यू। उसने जवाब में कहा आई लव यू टू। इन शब्दों को पढ़कर मेरे होंठों पर मुस्कान आ गई और मेरे लिंग में हल्का सा उत्तेजना का एहसास हुआ।

इसके बाद हमारी खूब बातें होने लगीं यहां तक कि सेक्स चैट भी शुरू हो गई थी। हर रात हम घंटों चैट करते और मैं उसके शरीर की हर अंग की कल्पना करता। उसके वर्णन से मेरी कल्पना में उसकी चूचियां उसके नरम होंठ और उसकी टाइट कमर घूमती रहती। एक दिन उसने बताया कि वह मेरे घर आने वाली है। उसकी इस खबर से मेरा पूरा शरीर उत्तेजित हो उठा। मैंने कल्पना की कि जब वह आएगी तो उसके कपड़े उतारकर उसके नंगे शरीर को छूने का एहसास कितना अद्भुत होगा।

मैंने उससे कहा आओगी तो चूत देनी पड़ेगी। उसने जवाब दिया टाइम मिले तो चोद लेना पर सील पैक चूत है थोड़ा आराम से चोदना। मैंने कहा ठीक है।

फिर एक दिन वह आ गई आई तो सबसे मिली। मैं अपने रूम में था। घर में हल्की सी सुबह की धूप खिड़की से आ रही थी और उसकी हल्की सी देसी परफ्यूम की महक हवा में फैल गई थी जो मेरे नथुनों को छूकर तुरंत मेरे शरीर में गर्मी भर रही थी। वह सबसे मिलने के बाद धीरे धीरे मेरे रूम की ओर आई। उसकी चाल में शर्म की लहर और उत्सुकता का कंपन दोनों महसूस हो रहा था। उसकी बड़ी आंखें नीची थीं लेकिन उसके गुलाबी होंठों पर हल्की मुस्कान खेल रही थी। वह वहां आई फिर हमने थोड़ी देर किस किया। मैंने उसे अपनी मजबूत बाहों में कसकर जकड़ लिया। उसके नरम और गर्म होंठ मेरे होंठों से चिपक गए। पहले तो हल्के से चुंबन थे जो धीरे धीरे गहरे और गीले हो गए। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई और उसकी जीभ से लिपटकर खेलने लगी। उसके मुंह का मीठा लार का स्वाद और गर्म सांस मेरे चेहरे पर पड़ रही थी। हम दोनों की सांसें तेज और भारी हो गई थीं। उसके स्तन मेरी छाती से दब रहे थे और मैं महसूस कर रहा था कि उसके निप्पल सख्त हो रहे हैं। इसके बाद वह बाहर चली गई।

ये बात भाभी को पता थी कि हम दोनों के बीच कुछ चल रहा है। भाभी हर बार हमें देखकर मुस्कुराती थीं और उनकी आंखों में समझदारी भरी चमक रहती थी। दो दिन बाद मम्मी पापा को किसी काम से गांव जाना पड़ा। उन्होंने सामान पैक किया और गाड़ी में बैठकर चले गए। अब घर पर सिर्फ भैया और भाभी थे। पूरा घर अचानक शांत और खाली सा लग रहा था। हवा में अकेलेपन की रोमांचक महक फैल गई थी।

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मैंने भाभी से कहा आप भैया के साथ आज कहीं घूम आओ। भाभी मेरी बात सुनकर हंस पड़ीं। उनकी हंसी में एक जानबूझकर वाली शरारत थी। भाभी बोली हां हम समझ रहे हैं कि तुम हमें क्यों घूमने भेज रहे हो। फिर हम दोनों हंसने लगे। हमारी हंसी में एक गुप्त साझेदारी का भाव था जो मुझे और भी ज्यादा उत्साहित कर रहा था।

इसके बाद भाभी ने भैया से बात की और वे भाभी के साथ जाने के लिए तैयार हो गए। भैया ने शर्ट बदल ली और भाभी ने अपना बैग उठाया। जाते जाते भाभी बोली करिश्मा अभी छोटी है तो आराम से बात करना ज्यादा दर्द न देना। उनकी इस बात में स्पष्ट संकेत था कि वे सब समझ चुकी हैं। उन्होंने बात करना कह कर साफ कर दिया था कि चुदाई कर देना। फिर भैया भाभी चले गए। उनकी गाड़ी की आवाज दूर जाते ही घर में पूरी तरह सन्नाटा छा गया।

मैं अंदर गया तो देखा करिश्मा खाना बना रही थी। किचन में गरम मसालों और तेल की तेज खुशबू फैली हुई थी। वह चूल्हे के पास खड़ी थी और उसके कूल्हे हल्के से लहरा रहे थे। उसकी टी शर्ट उसके पसीने से चिपक गई थी जिससे उसके स्तनों की उभान साफ नजर आ रही थी। मैं सीधा किचन में चला गया और उसे पीछे से पकड़ लिया। मेरे हाथ उसकी पतली कमर पर कसकर लग गए और मैंने उसे अपनी छाती से पूरी तरह चिपका लिया। उसकी पीठ मेरे शरीर से सट गई और मैंने उसकी गर्दन पर हल्के दांत गड़ाकर किस किया।

उसने कहा छोड़ो न खाना बना लेने दो। उसकी आवाज में शर्म थी लेकिन उसका शरीर पहले से ही हल्का कांप रहा था। मैंने कहा खाना नहीं आज तो तुम्हारी चूत मारनी है। वह शर्मा गई। उसके गाल लाल हो गए और वह नजरें नीचे कर लीं लेकिन उसके शरीर से निकलती गर्मी मुझे और उत्तेजित कर रही थी।

मैंने पीछे से पकड़कर उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए। मेरी हथेलियां उसके नरम गोल स्तनों पर पूरी तरह फैल गईं। मैं उन्हें जोर जोर से मसलने लगा। उसके स्तन मेरी उंगलियों के दबाव से दब रहे थे और फिर उछल रहे थे। उसके निप्पल मेरी उंगलियों के बीच सख्त होकर खड़े हो गए। वह भी गर्म होने लगी। उसकी सांसें तेज और भारी हो गईं और वह हल्के हल्के कराहने लगी। मैंने उसे सीधा किया और किस करने लगा। हमारे होंठ फिर से जुड़ गए और मैं खूब तेज तेज उसके बूब्स दबा रहा था। मेरी उंगलियां उसके स्तनों को निचोड़ रही थीं और वह अपने निचले होंठ को काट रही थी।

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फिर मैंने उसकी टी शर्ट निकाल दी और लोअर भी नीचे करके उतार दिया। अब वह मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। उसकी गोरी त्वचा रोशनी में चमक रही थी। उसकी पैंटी पर हल्का सा गीला धब्बा दिख रहा था जो उसकी बढ़ती उत्तेजना का प्रमाण था। उसकी जांघें चिकनी और नम थीं।

मैं फिर से किस करने लगा और उसके दूध बेतहाशा दबाने लगा। मेरी उंगलियां ब्रा के कपड़े के ऊपर से उसके निप्पल को नोच रही थीं। फिर उसे उठाकर अपने बेडरूम में ले गया। मैंने उसे गोद में उठा लिया। उसके शरीर का नरम वजन मेरी बाहों में महसूस हो रहा था और उसकी गर्म सांस मेरी गर्दन पर पड़ रही थी।

वहां पहुंचते ही उसकी ब्रा और पैंटी निकाल दी। मैंने ब्रा का हुक खोला और उसके नरम बूब्स को पूरी तरह आजाद कर दिया। फिर पैंटी को उसके चौड़े कूल्हों से नीचे सरकाया। अब वह बेड पर पूरी नंगी पड़ी थी। उसकी चूत गुलाबी और थोड़ी सूजी हुई थी। उसके स्तन हल्के हल्के हिल रहे थे और उसकी सांसें तेज थीं। मैं भी नंगा हो गया और अपना लंड सीधे उसके मुंह में ठूस दिया। मेरा सात इंच का मोटा और गर्म लंड उसके नरम होंठों को फैलाते हुए अंदर चला गया।

पहले वह मुंह में ले नहीं रही थी लेकिन मैंने अपनी कसम देकर उसके मुंह में घुसेड़ दिया। मेरे लंड की नसें उसके जीभ से टकरा रही थीं। फिर वह भी चूसने लगी और मैं उसके मुंह को चोदने लगा। उसकी गर्म और गीली जीभ मेरे लंड के सिरे को चाट रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर जोर जोर से आगे पीछे हिलना शुरू कर दिया।

कुछ देर बाद हम दोनों सिक्स्टी नाइन की पोजीशन में आ गए उसके मुंह में मेरा लंड था और मेरा मुंह उसकी चूत पर। मैं उसकी चूत चाट रहा था अपने होंठों से उसके चूत के दाने को खींच रहा था। मेरी जीभ उसके क्लिटोरिस पर तेजी से घूम रही थी। उसकी चूत से मीठा गाढ़ा और गर्म रस निकल रहा था जिसका स्वाद मुझे पागल कर रहा था। वह बहुत गर्म हो गई थी।

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अह्ह्ह्ह की आवाजें निकालती हुई वह झड़ गई। उसकी चूत मेरे मुंह पर सिकुड़ सिकुड़कर कांप रही थी और उसका गर्म पानी मेरे मुंह में भर गया। मैंने उसका सारा पानी पी लिया। फिर मेरा लंड भी झड़ने लगा। वह लंड मुंह से बाहर निकालने लगी लेकिन मैंने जोर देकर दबा दिया। मेरा सात इंच का लंबा लंड उसके गले तक चला गया। फिर वह मेरा गर्म पानी गटक गई।

इसके बाद हम दोनों लेट गए और फिर से किस करने लगे। किस करते करते मैं उसकी चूत में धीरे धीरे उंगली घुसा रहा था। उसकी चूत इतनी कसी थी कि मेरी एक उंगली भी नहीं जा रही थी। उसके अंदरूनी दीवारें मेरी उंगली को जकड़ रही थीं।

करिश्मा फिर से गर्म होने लगी। उसकी चूत फिर से बहने लगी थी और उसके मुंह से अहह अहह की आवाजें निकल रही थीं।

मैंने किस करना छोड़ दिया और उसकी दोनों टांगें फैलाकर उसकी चूत चाटने लगा। वह अह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह करती रही और कहने लगी अब न तड़पाओ जल्दी से पेल दो फाड़ दो मेरी चूत का भोसड़ा बना दो अहह फाड़ दो।

मैं उठा और वैसलीन ले आया क्योंकि मुझे पता था कि उसका पहली बार है तो सील टूटेगी और दर्द होगा। मैंने खूब सारी वैसलीन उसकी चूत के अंदर तक लगा दी और अपने लंड पर भी लगाई।

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अब मैं लंड को उसकी चूत पर ऊपर नीचे करने लगा। वह और तेज तेज आहें भर रही थी और चिल्ला रही थी आह बाबू अब और न तड़पाओ पेल दो जल्दी से।

मैंने उसके दूध पकड़े और एक धक्का दे मारा। मेरे लंड का सिर्फ टोपा ही अभी अंदर गया था कि वह चिल्लाने लगी आह निकाल लो फट गई मेरी चुत।

मैंने देखा कि उसकी चुत से खून आने लगा था। अभी तो पूरा गया भी नहीं था। वह रोने लगी। उसकी आंखों से आंसू आ रहे थे।

मैंने फिर से किस करना शुरू किया तो वह दर्द को थोड़ा भूल गई और किस का मजा लेने लगी। उसकी गांड उठने लगी अब वह भी मजे लेने लगी थी।

मैंने किस करना बंद किया और फिर से एक जोरदार शॉट मारा। इस बार आधा लंड उसकी चूत में चला गया। उसकी सील अब टूट चुकी थी। वह बहुत तेज तेज चिल्लाने लगी। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे।

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वह बार बार छोड़ने की रिक्वेस्ट कर रही थी और चीख रही थी छोड़ दो छोड़ दो। मैंने उसका मुंह नहीं बंद किया क्योंकि पूरे घर में सिर्फ हम दोनों ही थे तो कोई सुनने का डर तो था ही नहीं।

फिर मैं वैसे ही रुका रहा उसके बूब्स सहलाता रहा। उसे धीरे धीरे थोड़ा आराम मिला। वह फिर से गांड उठाने लगी।

मैंने धीरे से उसके कान में बोला जान एक बार और झेल लो फिर मजा आएगा। उसने मेरे माथे पर किस किया और बोली जान यह सब आपका ही है मैं सह लूंगी आप फाड़ लो मैं आपकी ही हूं।

फिर मैं मिशनरी पोज में सीधा हुआ और उसकी कमर पकड़कर कस कर हचक के पेल दिया। मेरी दोनों मजबूत हथेलियां उसकी नाजुक पतली कमर को पूरी ताकत से जकड़ लीं। मैंने अपने घुटनों को बेड पर मजबूती से टिकाया और कमर में पूरा जोर लगाकर एक भारी हचका मारा। मेरा सात इंच लंबा मोटा और नसों से फूला हुआ लंड उसकी अभी भी सूजी और खून से गीली चूत के मुंह को फैलाता हुआ एक ही झटके में पूरी लंबाई तक अंदर घुस गया। उसके लंड का गोल और गर्म सिरा सीधे उसके सबसे गहरे हिस्से बच्चेदानी की दीवार से जोरदार टकराया। वह एकदम से बहुत तेज चिल्लाई आह्ह। उसकी पूरी देह अकड़ गई आंखें ऊपर उलट गईं और वह बेहोश हो गई।

इससे मैं भी थोड़ा डर गया और वैसे ही रुक गया। मेरे मन में पल भर के लिए चिंता दौड़ गई क्योंकि उसका पूरा शरीर अचानक ढीला पड़ गया था और सांसें रुक सी गई थीं। मैं उसके ऊपर ही जमा रहा मेरा लंड अभी भी उसकी चूत के अंदर पूरी तरह दबा और जकड़ा हुआ था। थोड़ी देर में उसे होश आया तो वह बोली बाबू अभी छोड़ दो बाद में कर लेना नहीं तो मैं मर जाऊंगी। उसकी आवाज बहुत कमजोर और दर्द से भरपूर थी उसके गालों पर आंसू बह रहे थे और चेहरा पसीने से तर हो गया था।

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मैंने नीचे देखा तो बहुत सारा खून निकल रहा था जो बेडशीट पर लग गया था। उसकी चूत से गाढ़ा लाल खून मेरे लंड के साथ मिलकर रिस रहा था और सफेद चादर पर बड़ा गहरा धब्बा बना रहा था। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि मेरे लंड पर ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उस पर बहुत सारी रबर चढ़ा दी हो। उसके अंदरूनी मांसपेशियां मेरे लंड को हर पल इतनी जोर से दबा रही थीं कि हर छोटी सी हलचल पर भी तीखा दर्द भरा आनंद मिल रहा था।

मैं वैसे ही उसके ऊपर पड़ा रहा। उसे किस करता चूमता चाटता रहा। मेरे गर्म और गीले होंठ उसके गालों गर्दन और नरम होंठों पर बार बार घूम रहे थे। मैं उसकी पसीने से नम त्वचा को चाट रहा था और उसके छोटे लेकिन उभरे हुए स्तनों को हथेलियों से हल्के से निचोड़ रहा था। वह कह रही थी ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने लोहे की रॉड पेल दी हो। उसकी आवाज में दर्द की कसक थी लेकिन उसका शरीर धीरे धीरे फिर से गर्म होने लग रहा था।

धीरे धीरे उसे थोड़ा आराम मिलने लगा। वह सिसकारियां लेने लगी। उसकी सांसें अब थोड़ी धीमी और नियमित हो रही थीं। थोड़ी देर बाद वह बोली अह्ह्ह जान फाड़ दो मेरी चूत इसका चोद चोद के भोसड़ा बना दो और मुझे अपनी रंडी बना लो। उसके शब्द सुनकर मेरे लंड में नई उत्तेजना की लहर दौड़ गई और मैंने महसूस किया कि उसकी चूत फिर से गीली होने लगी है।

बस फिर क्या मैं भी हचक हचक कर वर्जिन लड़की चुदाई करके लंड पेलने लगा। मैं जितने धक्के लगाता वह आगे पीछे होने लगी। उसके मुंह से सिर्फ अह्ह्ह अह्ह्ह की आवाजें निकल रही थीं। मैंने अपनी कमर को तेजी से ऊपर नीचे हिलाना शुरू कर दिया। हर जोरदार धक्के पर उसके नरम स्तन जोर जोर से हिल रहे थे और उसके कूल्हे बेड पर दब रहे थे।

मेरा हर शॉट उसकी बच्चेदानी तक जा रहा था। फिर उसका शरीर अकड़ने लगा और वह अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ाती हुई झड़ गई। अब उसका पानी निकलने लगा। उसकी चूत मेरे लंड के चारों ओर तेजी से सिकुड़ सिकुड़कर कांप रही थी और गर्म चिपचिपा रस मेरे लंड पर बह रहा था।

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चूत चिकनी हो गई थी तो अब पट पट की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। हर धक्के पर उसके गीले और चिकने मांस से टकराने की आवाज साफ सुनाई दे रही थी। अब वह झड़ चुकी थी तो उसकी चूत में जलन होने लगी। वह बार बार कह रही थी अब निकाल लो अब बस अब और नहीं। उसकी आवाज रोने जैसी हो गई थी और आंखों से फिर आंसू निकल रहे थे।

पर मैंने उसकी एक न सुनी और बराबर पेलता रहा। थोड़ी देर में वह फिर गर्म हो गई और चुदवाने लगी। करीब बीस मिनट बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए। मेरे लंड से गर्म मोटा वीर्य उसकी चूत के अंदर फुहार की तरह छूटा और उसकी बच्चेदानी को पूरी तरह भिगोने लगा।

इस धुंधार चुदाई से हम दोनों बहुत थक गए थे। मैं तो उसी पर गिर पड़ा था। मेरी छाती उसके नरम स्तनों पर पूरी तरह दब रही थी और हम दोनों की पसीने से तर देह एक दूसरे से चिपकी हुई थी। थोड़ी देर बाद जब सांसें थोड़ी सामान्य हुईं तो मैंने उसकी तरफ देखा। वह हल्का हल्का मुस्कुरा रही थी।

मैंने पूछा मजा आया। उसने कहा हां बहुत पर आपने बहुत बेदर्दी से चोदा है तो दर्द भी बहुत हुआ है। मैंने उसे किस किया और कहा अगली बार से दर्द नहीं होगा। उसने हां में सिर हिलाया।

थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैंने उससे कहा एक बार और पेल लूं। उसने कहा बाबू अब रहने दो रात में आ जाऊंगी तब चोद लेना अभी बहुत दर्द हो रहा है।

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मैंने कहा मेरा लंड खड़ा है लाओ मुंह ही चोद लेने दो। वह बोली ठीक है पर माल अंदर न निकालना। मैंने कहा ठीक है।

इसके बाद वह बेड पर बैठ गई और मैं खड़ा हो गया। मैंने अपना लंड उसके मुंह में पेल दिया। अब हचक हचक कर मुंह में पेलने लगा। लंड उसके गले तक जा रहा था जिससे उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी।

करीब बीस मिनट बाद मैं उसके आधे गले में घुसा कर झड़ गया। उसे न चाहते हुए भी मेरा माल पीना पड़ा। जब मैंने लंड निकाला तो वह गुस्सा करने लगी।

मैंने कहा अब माल पीने की आदत डाल लो क्योंकि अब पीना तो पड़ेगा ही। फिर हम दोनों हंसने लगे।

इसके बाद एक दूसरे को पकड़ के नंगे ही सो गए। हम दोनों की नंगी देहें एक-दूसरे से पूरी तरह चिपकी हुई थीं। करिश्मा की नरम और गर्म छातियां मेरी छाती पर दब रही थीं। उसकी सांसें मेरे गले पर पड़ रही थीं और मेरे लंड की हल्की सिकन उसकी जांघों के बीच आराम से महसूस हो रही थी। हम थकान के मारे गहरी नींद में चले गए थे।

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शाम करीब पांच बजे फोन बजा। देखा तो भाभी का कॉल था। मैंने फोन उठाया तो वे बोलीं मैं दस मिनट में घर पहुंच रही हूं दोनों लोग सही मिलना भैया को कुछ पता नहीं चलना चाहिए। मैंने कहा ओके आ जाओ।

मैंने जल्दी से करिश्मा को उठाया और बताया भैया भाभी दस मिनट में आ रहे हैं जल्दी उठ जाओ। वह उठी और बाथरूम की तरफ जाने लगी लेकिन वह चल ही नहीं पा रही थी। उसकी टांगें कांप रही थीं और वह लड़खड़ा कर चल रही थी। पिछले चुदाई के कारण उसकी चूत में अभी भी तेज दर्द और सूजन थी। मैंने तुरंत उसका एक हाथ अपने गले में डाल दिया। दूसरे हाथ से उसकी कमर को मजबूती से पकड़ लिया और उसे सहारा देकर बाथरूम तक ले गया।

वहां उसने बाथरूम यूज किया तब भी वह नंगी ही थी। उसकी नंगी देह बाथरूम की रोशनी में चमक रही थी। मैं उसे सहारा दिए खड़ा था।

फिर मैंने उसे उठाया और अपनी दो उंगलियां उसकी चूत में घुसा दीं। दोनों उंगलियां आराम से अंदर चली गईं। मैंने पूछा अब कैसा लग रहा है मजा आया। उसकी चूत अब भी गीली और नरम थी। उंगलियां आसानी से अंदर बाहर होने लगीं। उसकी सांसें तेज हो गई थीं और चेहरे पर हल्की मुस्कान आई थी।

उसने कहा हां मजा तो बहुत आया पर अब पूरा शरीर टूट रहा है। फिर मैं उसे बाहर लाया कपड़े पहनाए और एक दर्द की गोली दी। मैंने कहा तुम कमरे में जाकर लेट जाओ और सोने का नाटक करती रहना नहीं तो भैया पूछेंगे कि क्या हुआ चल क्यों नहीं पा रही हो। उसने कहा हां ठीक है।

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फिर मैंने उसे कमरे में लिटा दिया और वापस आकर टीवी देखने लगा। तब तक भैया भाभी भी आ गए। भाभी ने आते ही इशारे में पूछा काम हो गया। मैंने भी हां में सिर हिला दिया। वह पूरी रात नहीं उठी।

अगले दिन सुबह छह बजे भैया जिम चले गए। भाभी नहा रही थीं और करिश्मा चाय बना रही थी। मैं उठा तो सीधा किचन में चला गया। करिश्मा को पीछे से पकड़ लिया और उसके दूध दबाने लगा। मैंने उसकी चूत के दर्द के बारे में पूछा और दूध दबाते हुए उसकी गर्दन पर किस करने लगा।

इतने में भाभी आ गईं। वे बोलीं यह क्या हो रहा है। करिश्मा डर गई और मैं भी डर गया। तभी भाभी बोल पड़ीं कर लो कर लो मैं रूम में जा रही हूं। वे चली गईं।

फिर मैंने करिश्मा को वहीं घोड़ी बनाया और लंड पेल दिया। वह थोड़ा चिल्लाई फिर चुदने लगी। कुछ बीस मिनट बाद मैं झड़ गया और वह भी झड़ गई। मैंने उससे कहा चाय लेकर भाभी के पास जाओ। मैं भाभी के रूम में चला गया। वहां भाभी बाल बांध रही थीं।

मुझे देखते ही उनके मुंह से निकला बजा दिया मेरी बहन को सुबह सुबह। हमने भी कहा हां। उसके बाद करिश्मा चाय लेकर आ गई। हम तीनों चाय पीते पीते बात करने लगे। भाभी ने करिश्मा से कहा मेरे देवर से चुदवाकर कैसा लगा।

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करिश्मा ने बिना किसी शर्म के जवाब दिया दीदी आपका देवर बहुत अच्छा चोदता है मेरी चूत एकदम फूल गई है। भाभी ने कहा दिखा तो जरा। करिश्मा ने अपनी चूत दिखाई जो सचमुच डबल रोटी की तरह फूली हुई थी। भाभी ने उसकी चूत पर हाथ लगाया तो उसमें से पानी निकलने लगा।

भाभी बोली देवर जी करिश्मा तो गर्म हो रही है इसे फिर से चोदो। उनकी आवाज में साफ लालसा भरी हुई थी और उनकी आंखें चमक रही थीं जैसे वे खुद भी इस नजारे का मजा ले रही हों।

इस पर करिश्मा चिल्लाई नहीं दीदी अभी नहीं बहुत दर्द हो रहा है। उसकी आवाज में तेज दर्द और थकान दोनों महसूस हो रही थी। उसकी सूजी हुई चूत अभी भी पिछले चुदाई से लाल और फूली हुई थी और हर हल्की हवा के झोंके पर भी दर्द का तीखा अहसास हो रहा था। फिर उसने मेरी तरफ देखकर कहा आप अपनी जीभ से चाटकर मेरा पानी निकाल दो। उसकी आंखों में विनती थी पर चेहरे पर शर्म नाम की कोई चीज नहीं बची थी। मैंने उसकी चूत चाटना शुरू किया।

मैं तुरंत उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया। करिश्मा ने अपनी दोनों टांगें चौड़ी करके फैला दीं ताकि मैं आसानी से पहुंच सकूं। उसकी चूत अब पूरी तरह खुली हुई थी। बाहरी होंठ सूजे हुए और चमकदार गीले थे जबकि अंदर का गुलाबी हिस्सा थोड़ा लाल हो रहा था। हवा में उसकी चूत की मुश्किल से मीठी और नमकीन गंध फैली हुई थी। मैंने अपनी जीभ पूरी तरह बाहर निकाली और सबसे पहले उसके फूले हुए बाहरी होंठों पर धीरे-धीरे ऊपर से नीचे तक चाटा। गर्म और चिपचिपा रस मेरी जीभ पर फैल गया जिसका स्वाद मीठा-खारा और बेहद उत्तेजक था। फिर मैंने जीभ की नोक को उसके क्लिटोरिस पर रखा और तेजी से ऊपर-नीचे घुमाने लगा। करिश्मा की कमर तुरंत उठ गई और वह जोर-जोर से कराहने लगी। उसकी सांसें फूल रही थीं और दोनों हाथों से उसने मेरे बाल पकड़कर मेरे सिर को अपनी चूत पर और जोर से दबा दिया। मैंने अपनी जीभ को उसके अंदर तक घुसा दिया और अंदर बाहर करने लगा। कभी-कभी मैं पूरा मुंह लगा कर उसके क्लिट को चूसने लगा। उसके गीले रस मेरे मुंह और ठुड्डी पर बहने लगे। करिश्मा की टांगें कांप रही थीं और उसकी चूत के अंदर की मांसपेशियां मेरी जीभ के इर्द-गिर्द सिकुड़ रही थीं।

इधर यह सब देखकर भाभी भी गर्म होने लगीं। उनकी सांसें तेज हो गई थीं। उन्होंने अपनी एक हाथ अपनी जांघों पर फेरना शुरू कर दिया था और उनकी छातियां ऊपर-नीचे हो रही थीं। तब तक करिश्मा की चूत ने पानी छोड़ दिया था। उसका पूरा शरीर अचानक सख्त हो गया। उसकी चूत की दीवारें जोर-जोर से सिकुड़ीं और फिर एक गर्म लहर के साथ उसका पतला और गाढ़ा पानी मेरे मुंह पर छूट गया। मैंने उसे चाट-चाट कर पूरा निगल लिया। करिश्मा जोर से चीखी और फिर थकान से लहराती हुई सांस लेने लगी।

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मैंने भाभी को देखा और मजाक में कहा भाभी आपतो बह गई आपको ठोक लूं क्या। इस पर भाभी बोलीं हां जल्दी से मेरी भी पेल दो। उसके बाद मैंने भाभी को भी चोदा।

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1 thought on “Bhabhi ki behen ki chudai – भाभी की बहन की सील तोड़ चुदाई”

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