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होली के बहाने नई-नवेली भाभी की चूत फाड़ी

Devar bhabhi holi sex story – Newly wed bhabhi fucked sex story: मेरी पहली सच्ची कहानी आपने पढ़ी होगी जिसमें मैंने अपनी चाची को पहली बार चोदा था, उसके बाद पिछले तेरह सालों से मैं उन्हें नियमित चोदता आ रहा हूँ, जिसकी वजह से मुझे चुदाई की बुरी तरह लत लग गई, मैं पूरा चुदक्कड़ बन गया था। अब जिस लड़की या औरत को देखता, बस उसकी चूत मारने के ख्याल आते। हमारे बड़े खानदान में मेरी कुल चौदह भाभियाँ थीं और तीन सेक्सी चाचियाँ भी, सब एक से बढ़कर माल थीं। मैं सबको चोदने का मौका ढूंढ़ता रहता था, पर कोई हाथ नहीं आ रही थी। चाची वाला तरीका (रात को साथ सुलाकर गर्म करके चोदना) मुझे बहुत पसंद था, पर बाकी भाभियों के साथ वो मौका नहीं बन पाता था, इसलिए नया तरीका सोच रहा था।

साल 2004 में मैं अमरावती में जॉब करता था, पर कोई भी त्योहार ऐसा नहीं जाता था कि मैं गाँव न आऊँ। इस बार होली पर भी मैं गाँव पहुँच गया। रंगपंचमी के दिन सुबह उठा, मुँह-हाथ धोया और दोस्तों के साथ खेतों में दारू पीने और रंग खेलने निकल गया। दारू चढ़ी तो नशा धीरे-धीरे सर पर चढ़ने लगा, दोस्त चुदाई के किस्से सुना रहे थे, मेरा लंड तन गया, चाची को चोदने की तलब लगी, मैं उठा और सीधा घर की तरफ चल दिया।

चाची के घर गया, उन्हें चूमने-दबाने लगा तो वो बोलीं, “अभी नहीं बेटा, घर में सब हैं, रात को जितना मन करे उतना चोद लेना।” मैं बाहर तो निकल आया, पर लंड अभी भी खड़ा था, बार-बार चोदने की इच्छा सता रही थी। चुपचाप बैठा था कि दिमाग में ख्याल आया, क्यों न भाभियों को रंग लगाने के बहाने छुआ जाए। उठा और एक-एक करके सबके घर रंग लगाने निकल पड़ा, लंड अभी भी हिचकोले मार रहा था।

सबके घर में कोई न कोई था, सास-ससुर या पति, जिससे और जलन हो रही थी। फिर मैं अपने चचेरे भाई के घर पहुँचा, उसकी शादी को अभी सिर्फ तीन महीने हुए थे। उसकी बीवी, मेरी नई भाभी अरुणा, सांवली थी पर बदन देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए, 34-30-36 का फिगर, चूचे तो दीवाना बना देते थे। शादी के दिन से ही मैं उन्हें चोदने को बेताब था। उनके घर में सिर्फ वो दोनों रहते थे, माता-पिता गुजर चुके थे। मैं नशे में था पर होश में भी, मन में बस यही था कि भैया घर पर न हों।

दरवाजे पर पहुँचा और बिना आवाज दिए अंदर घुस गया। भाभी रसोई में खाना बना रही थीं, मुझे देखते ही मुस्कुराईं और समझ गईं कि रंग लगाने आया हूँ। “अरे देवर जी, कब आए अमरावती से?” “कल शाम को भाभी, आज आपको रंग लगाने आया हूँ।” “हाँ-हाँ पता है, पर थोड़ा रुकिए, सब्जी का तड़का लगा लूँ।”

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मैंने भैया के बारे में पूछा तो बोलीं, “आज कंपनी में काम है, नाइट ड्यूटी है, सुबह छह बजे आएँगे।” बस, मेरे दिमाग में बिजली कौंध गई, आज तो भाभी को चोदने का परफेक्ट मौका था। लंड फिर से तनकर बरमूडे से बाहर झाँकने लगा। नशे का बहाना भी था, अगर बुरा मानें भी तो कह दूँगा होली में गलती से हाथ लग गया।

उनके घर में दो कमरे थे, मैं अंदर वाले कमरे में चला गया जहाँ बेड था और भाभी खाना बना रही थीं। बेड पर बैठ गया और उनके वक्षस्थल को घूरने लगा। लाल साड़ी, काला ब्लाउज, दो बड़े-बड़े उभारों के बीच गहरी खाई, मन ललचा रहा था। मैं चुपके से अपना लंड दबा रहा था, भाभी की नजर पड़ी तो मैंने फटाक से हाथ हटा लिया, पर वो सब देख चुकी थीं, फिर भी अनदेखा करके काम में लग गईं।

पाँच मिनट बाद बोलीं, “अब लगाइए न रंग।” मैं उनके पीछे गया, दोनों हाथों से गालों पर रंग मलने लगा, अभी दूर था, फिर धीरे से अपना खड़ा लंड उनकी गाँड से सटा दिया और जोर-जोर से रंग मलने लगा ताकि उन्हें धक्के समझ न आए। लंड उनकी मुलायम गाँड पर रगड़ खा रहा था। मैंने मुँह नीचे किया और उनकी गर्दन पर होंठ रखकर चूमने लगा। भाभी एकदम चौंक गईं।

“देवर जी… बस हो गया… छोड़ो ना…” पर मैं कहाँ रुकने वाला था। कसकर पकड़ लिया, गर्दन चूमते हुए पीठ पर किस करने लगा, लंड गाँड में ठोक रहा था। साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया, पूरा ब्लाउज खुल गया। वो ना-नुकुर करने लगीं, “प्लीज छोड़ो… कोई आ जाएगा…” उनकी आवाज में डर था पर विरोध कमजोर, मुझे पता चल गया कि मजा ले रही हैं। मैंने दोनों हाथ ब्लाउज के ऊपर से चूचों पर रख दिए, वाह क्या सख्त, गोल-मटोल चूचे थे, चाची के नरम चूचों से बिलकुल अलग। जोर-जोर से मसलने लगा।

“आ… आह… ह्ह… देवर जी…” उनकी सिसकियाँ शुरू हो गईं, धड़कनें तेज, “आह्ह… ह्ह… आह्ह…” मैंने उनका हाथ पीछे खींचकर अपने लंड पर रख दिया, वो खुद सहलाने और दबाने लगीं। मैंने ब्लाउज के बटन खोल दिए, काली ब्रा बाहर आई, ब्रा के ऊपर से ही निप्पल मसलता रहा। भाभी की साँसें तेज हो रही थीं। अचानक बोलीं, “जो करना है कर लो, पर दरवाजा बंद कर दो।”

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मैं दौड़कर दरवाजा बंद किया, लौटा तो उनकी साड़ी पूरी उतार दी, अपना बरमूडा भी। अब मैं सिर्फ चड्डी और शर्ट में, वो ब्रा, पेटीकोट और पैंटी में। हम एक-दूसरे की बाँहों में भर गए, जीभ से जीभ मिलाकर चूमने लगे, मैं उनकी गर्दन पर जोर-जोर से किस कर रहा था, चाची ने सिखाया था कि औरत की गर्दन चूमो तो जल्दी गर्म होती है। ब्रा के हुक खोलकर फेंक दिया, दो बड़े-बड़े गुलाबी निप्पल वाले चूचे मेरे सीने से चिपट गए।

मैंने उन्हें थोड़ा दूर किया और दोनों चूचों को हाथों से मसलने लगा, निप्पल चुटकी में लेकर खींचा तो वो सिहर उठीं, “आह्ह… देवर जी… ह्ह्ह…” उन्होंने अपना हाथ मेरी चड्डी में डालकर मेरा छ इंच का मोटा लंड पकड़ लिया, सहलाने लगीं। मैंने एक चूची मुँह में लेकर चूसना शुरू किया, जीभ से निप्पल को घुमाया, दूसरी चूची हाथ से मसलता रहा। जितना जोर से चूसता उतना ही वो मेरा लंड दबातीं, “ओह्ह… आह्ह… ह्ह्ह…”

फिर हम बेड पर लुट गए, 69 की पोजीशन में। मैंने उनका पेटीकोट ऊपर उठाया, जाँघों को चूमते हुए चूत तक पहुँचा। पैंटी के ऊपर से ही चूत सहलाने लगा तो वो पाँव सिकोड़ने लगीं। जबरदस्ती पैर फैलाए, पैंटी पर मुँह रखकर चूमा तो वो मुझे धक्का देने लगीं। मैंने पैंटी नीचे सरका दी, वाह क्या चिकनी गुलाबी चूत थी, एक भी बाल नहीं।

मैं उनके ऊपर चढ़ गया, जीभ से चूत चाटने लगा, रस से पूरी तर हो गई थी। वो मेरी चड्डी से लंड हिला रही थीं। मैंने एक उंगली चूत में डाली और अंदर-बाहर करने लगा, चूत बहुत कसी थी पर गीली होने से आसानी से जा रही थी। “आह्ह… इह्ह… ओह्ह… देवर जी… गुदगुदी हो रही है…” मैंने कहा, “भाभी आप भी मेरा लंड चूसो ना।” पहले मना किया, फिर मेरी चड्डी उतारी और लंड देखकर चौंक गईं, “वाह देवर जी, आपका तो भैया से बहुत बड़ा और मोटा है।” पेटीकोट से लंड पोंछा और चूमने लगीं, धीरे-धीरे मुँह में लेकर चूसने की कोशिश की, “ग्ग्ग… ग्ग्ग… गी… गी…”

मैंने दो उंगलियाँ चूत में डालकर तेजी से अंदर-बाहर करने लगा, जीभ से क्लिट चाटता रहा, वो तड़पने लगीं, “आह्ह… ह्हा… आअह्ह… बस… अब नहीं सहन होता… जल्दी डाल दो…” मैंने पूछा, “कौन सी पोजीशन पसंद है भाभी?” “जो तुम्हारी मर्जी, बस चोदो अब…”

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मैं लेट गया, उन्हें अपने ऊपर बिठाया, लंड का सुपारा चूत पर रखा और एक जोर का झटका दिया, पूरा लंड अंदर चला गया। वो चीख पड़ीं, “ओह्ह्ह… माँ… बहुत दर्द… निकालो… फट जाएगी…” मैंने कमर पकड़कर रखा, कुछ सेकंड रुका, फिर धीरे-धीरे चोदने लगा। दर्द कम हुआ तो वो भी अपनी गाँड हिलाने लगीं, “आह… ह्ह… अब मजा आ रहा है…” मैंने स्पीड बढ़ाई, पाँच मिनट तक ऊपर से चुदाई की।

फिर उन्हें घोड़ी बनाया, पीछे से पूरा लंड एक झटके में पेल दिया, “आह्ह्ह… बाप रे… मार डालोगे क्या…” मैंने दोनों चूचे पकड़कर जोर-जोर से ठोका, गाँड से चट-चट की आवाज आने लगी। वो झड़ गईं, चूत से रस की बौछार, मैंने और तेज चोदा और दो मिनट बाद अपनी सारी वीर्य उनकी चूत में उड़ेल दी।

चेहरे पर संतुष्टि साफ दिख रही थी। कपड़े पहने, दरवाजा खोला। मैंने बताया कि दस दिन की छुट्टी पर हूँ, उन्होंने बताया कि भैया के अगले सात दिन नाइट ड्यूटी है। हमने तय किया कि हर रात 11 बजे से सुबह 4 बजे तक चुदाई होगी। एक लंबा चुम्बन लेकर मैं निकल गया।

अगले सात दिन हमने रात भर चुदाई की, कभी मिशनरी, कभी घोड़ी, कभी 69, तीन-चार राउंड रोज। दस दिन बाद मैं ड्यूटी चला गया। भाभी को सिर्फ मेरी चाची को पता है। कुछ महीने बाद फोन आया कि वो माँ बनने वाली हैं, जनवरी 2005 में बेटी हुई।

अब जब भी गाँव जाता हूँ, मौका मिलते ही भाभी को चोदता हूँ, अब वो बिना हिचक पूरा लंड मुँह में लेकर गले तक चूसती हैं, “ग्ग्ग्ग्ग… गों… गों… गोग…” और मैं उनकी चूत में अपना रंग भर देता हूँ।

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