Auto driver blackmail sex story – College girl anal sex story: हैलो दोस्तों, मेरा नाम दीपाली गोयल है, मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ और अभी मेरी उम्र 23 साल है, ये बात दो साल पुरानी है जब मैं 21 साल की थी और फर्स्ट ईयर कॉलेज में पढ़ती थी, मैं अच्छे घर की लड़की हूँ, मेरे बूब्स 34 इंच, कमर 28 और गांड 36 की है, मुझे अकेले में अपनी सेक्सी फोटो खींचने का बहुत शौक था, मेरे फोन में ढेर सारी बोल्ड और हॉट तस्वीरें थीं जिनमें मैं ब्रा-पैंटी में, कभी टॉपलेस भी थी।
उस दिन शनिवार था, मैं नीली शर्ट, काली ब्रा, काली पैंटी और टाइट ब्लैक जींस पहनकर कॉलेज जा रही थी, ऑटो में बैठी तो करीब 40 मिनट बाद कॉलेज पहुँची, गेट पर उतरी ही थी कि याद आया मेरा फोन ऑटो में रह गया, मैं दौड़ी लेकिन ऑटो जा चुका था, फोन गुम होने से ज्यादा डर इस बात का था कि मेरी सारी निजी फोटो उसमें थीं, दिन भर ट्राई किया, घंटी बजती रही पर कोई उठाता नहीं था।
रात नौ बजे फिर कॉल किया तो किसी ने उठाया, आवाज करीब 35 साल के मर्द की थी, उसने कहा, “मोबाइल चाहिए ना?” मैंने हाँ कहा, उसने बोला, “कल दोपहर दो बजे पास के पार्क में आ जाना”, फिर हँसते हुए बोला, “तेरी फोटो बहुत मस्त हैं यार, कमर कितनी लचकती है, गांड भी गजब की है, मजा आ गया देखकर”, मेरे तो होश उड़ गए, पैरों तले जमीन खिसक गई, पूरी रात नींद नहीं आई।
अगले दिन कॉलेज जल्दी छोड़कर पार्क पहुँची, दुकान से अपने नंबर पर कॉल किया, उसने कहा, “आ रही है ना?” मैंने कहा, “हाँ, पार्क में हूँ, कहाँ हो तुम, प्लीज फोन दे दो”, उसने जगह बताई, मैं घबराते हुए वहाँ गई, पार्क में कपल्स एक-दूसरे से चिपके थे, मुझे सब घूर रहे थे, पीछे से आवाज आई, “आ गई तू?” मुड़कर देखा तो वही ऑटो ड्राइवर था, 35 साल का हट्टा-कट्टा, शराब की बू आ रही थी।
मैंने हाथ जोड़कर कहा, “अंकल प्लीज मेरा फोन दे दो”, वो हँसा और बोला, “दे दूँगा, जरा आगे चल”, मैंने मना किया तो उसने मेरा कंधा पकड़कर जोर से धक्का दिया, मैं डर गई, उसके साथ चुपचाप चल पड़ी, काफी दूर एक सुनसान जगह पर ले गया जहाँ घास ही घास थी, वहाँ रुककर बोला, “ये सही जगह है”, मैं बोली, “यहाँ क्यों लाए हो, पैसे चाहिए तो ले लो बस फोन दे दो”।
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वो नजदीक आया और मेरे गाल पर हाथ फेरते हुए बोला, “पैसा ही सब कुछ नहीं होता मेरी जान, तेरी जैसी माल के सामने पैसा क्या चीज है, आज तू कयामत लग रही है”, मैं पीछे हटी तो उसने जोरदार थप्पड़ मारा, गाल लाल हो गया, फिर धमकाया, “साली रंडी, ना सुनने नहीं आया हूँ, ज्यादा नाटक किया तो अभी नंगी करके फोटो खींच लूँगा और सबको भेज दूँगा, फिर बन जाना दिल्ली की रंडी”, मैं रोने लगी, डर के मारे हाँ कर दी।
वो मुझे जोर से खींचकर अपने सीने से चिपका लिया, एक हाथ से मेरे बूब्स दबाने लगा, दूसरे हाथ से मेरी चूत को जींस के ऊपर से रगड़ने लगा, बोला, “कुतिया, तेरे बूब्स इतने टाइट कैसे हैं”, फिर मेरी जींस की बटन खोली और नीचे सरका दी, काली पैंटी देखकर आँखें चमक उठीं, पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत चूमने लगा, मैं सिहर उठी, उसने पैंटी भी उतार दी और मेरी गुलाबी चूत पर जीभ फेरने लगा, पागलों की तरह चाटने लगा, चूसने लगा, मैं आह्ह्ह… ओह्ह्ह… करने लगी, मेरी टाँगें काँपने लगीं।
फिर उसने मेरी चूत पर जोर से थप्पड़ मारा, मैं चीखी आह्ह्ह्ह, उसने दो उंगलियाँ मेरी चूत में घुसेड़ दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा, मैं मदहोश होकर आह्ह… इह्ह्ह… ओह्ह्ह्ह्ह कर रही थी, मेरी चूत से पानी बहने लगा, उसने मेरी चूत पर थूक लगाई और अपना पैंट खोलकर मोटा काला लंड बाहर निकाला, मेरी चूत पर रखकर धीरे-धीरे अंदर धकेलने लगा, मुझे दर्द हुआ, मैं चिल्लाई आअह्ह्ह मर गई, उसने मेरा मुँह अपने मुँह से बंद कर दिया और एक जोर का झटका मारा, पूरा लंड अंदर चला गया।
मैं दर्द से उसके बाल खींचने लगी, वो 4-5 मिनट तक वैसे ही रुका रहा, फिर धीरे-धीरे झटके देने लगा, दर्द कम हुआ और मजा चढ़ने लगा, मैं उसके होंठ चूसने लगी, वो मेरे बूब्स जोर-जोर से दबाता हुआ 15 मिनट तक मुझे चोदता रहा, मेरी चूत से चिपचिप आवाजें आ रही थीं, फिर उसने लंड निकाला और मुझे घुमाकर घास पर घुटनों के बल बैठा दिया, मेरी गांड सहलाने लगा, गांड पर थूक लगाया और अपना मोटा लंड मेरे गांड के छेद पर टिका दिया।
मैं डर गई, बोली नहीं प्लीज, पर उसने मेरे बूब्स पीछे से पकड़कर एक जोरदार झटका मारा, आधा लंड अंदर घुस गया, मैं चीखी आआअह्ह्ह्ह माँँँ मर गई, आँखों से आँसू निकल आए, उसने फिर पूरा जोर लगाया और पूरा लंड गांड में उतार दिया, लगा जैसे मेरी गांड फट गई, उसने मेरा मुँह दोनों हाथों से बंद कर दिया, फिर धीरे-धीरे चोदने लगा, पहले दर्द था पर कुछ देर बाद मजा आने लगा, मैं खुद पीछे ठोकने लगी, वो बोला, “साली रंडी मजा आ रहा है ना गांड मारवाने में”, मैं आह्ह्ह… ऊउम्म्म… हाँ… कर रही थी।
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आधे घंटे तक वो मेरी गांड चोदता रहा, मेरी गांड से पचपच-पचपच की आवाजें आ रही थीं, आखिर में उसने मेरी गांड में गर्म वीर्य की पिचकारी छोड़ दी, मेरा भी दो बार झड़ चुका था, हम घास पर लेट गए, वो मेरी पीठ चूम रहा था, मेरी चूत में उंगली डालकर खेल रहा था, मुझे पता चला कि गांड मारवाने में कितना दर्द और कितना मजा दोनों होता है।
फिर उसने मेरा फोन निकाला और मेरी नंगी फोटो खींचने लगा, मैंने कुछ नहीं कहा, उसने मुझे कपड़े पहनने को कहा, फोन लौटाया और फिर मुझे चूमते हुए बूब्स दबाने लगा, बोला, “चल तुझे घर छोड़ देता हूँ”, मैं चल भी नहीं पा रही थी, गांड में जलन थी, वो मुझे सहारा देकर ले गया, चलते वक्त उसका हाथ मेरी गांड पर था, मुझे लगा मैं सच में रंडी बन गई हूँ, ऑटो में बैठाकर घर छोड़ा, मैंने डर और कृतज्ञता दोनों में उसे किस कर दिया और घर चली गई।