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नर्स ने तैयार किया फिर डॉक्टर ने चोदा

प्रिय पाठको, मेरा नाम सोनल है। मैं एक हाउसवाइफ हूं।

मैं बहुत सुंदर हूं। मेरा रंग खिलता गेहुआ है, हाइट पांच फुट सात इंच है और फिगर एकदम किसी हीरोइन जैसा है।

आज मैं आपको बताने वाली हूं कि कैसे मैंने एक गैर मर्द के साथ रात बिताई और मेरा वह अनुभव कैसा था।

मेरे पति राकेश एक बीमा कंपनी में मैनेजर हैं। हमारी शादी को करीब एक साल हो चुका था। हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं।

यह बात करीब एक साल पहले की है। एक दिन राकेश शाम को घर आए तो बहुत खुश थे।

मैंने उनसे पूछा, क्या हुआ, आज बहुत खुश हो।

तो वो बोले, हां, आज मैंने एक बड़ी डील की है। मार्च का महीना चालू है और काम का बहुत प्रेशर है। मेरा एक भी टारगेट नहीं हुआ था, लेकिन आज पचास लाख की पॉलिसी डन होने वाली है। इससे टारगेट भी पूरा हो जाएगा और कमीशन भी मोटा आएगा।

वो बहुत खुश थे।

मुझे उसमें ज्यादा कुछ समझ नहीं आता था, लेकिन वो खुश थे इसलिए मैं भी खुश थी।

रात को हम दोनों ने खाना खाया और सोने चले गए।

तभी राकेश के फोन पर उनके बॉस का कॉल आया।

राकेश को कल मीटिंग के लिए हेड ऑफिस जाना था, इसलिए उन्होंने मुझे एक पता दिया और कहा, जानू, प्लीज तुम कल सुबह यहां चली जाना। ये एक बड़े डॉक्टर हैं। कल जो मैंने बोला था न, पचास लाख की डील का, तो इनसे सिर्फ चेक लाना है। उन्होंने कल सुबह बुलाया है। मुझे बॉस ने एक जरूरी मीटिंग के लिए कह दिया है, तो मैं नहीं जा पाऊंगा।

मैंने हां बोला और हम दोनों सो गए।

राकेश सुबह जल्दी चले गए।

मैं भी डॉक्टर के यहां से बीमा प्रीमियम का चेक लाने के लिए तैयार होने लगी।

मैं जल्दी ही वहां पहुंच गई।

वहां बहुत भीड़ थी, मतलब वो बहुत बड़े डॉक्टर थे।

उधर पेशेंट लोग बहुत थे।

मैंने थोड़ा वेट किया और बाद में मैं उनके केबिन में चली गई।

मैंने कहा, मुझे राकेश जी ने भेजा है और मैं उनकी वाइफ सोनल हूं।

उस डॉक्टर का नाम हर्ष था।

वो करीब चालीस की उम्र का रहा होगा। वो काफी फिट बंदा था और दिखने में एकदम स्मार्ट।

उसको देखकर मुझे भी न जाने क्यों काफी अच्छा लगा।

वो मेरी तरफ देखते ही रह गया। वो मेरे पूरे शरीर को निहार रहा था।

मैंने लाल रंग की साड़ी पहनी थी और मैं उसको यूं अपनी तरफ देखते हुए कुछ समझने की कोशिश कर रही थी।

मैंने डॉक्टर से बोला, हैलो सर, क्या हुआ।

वो बोले, कुछ नहीं।

फिर हंसते हुए बोला, तुम तो बहुत सुंदर हो।

मैंने भी हंसते हुए कहा, थैंक्स।

उनकी नजर मेरे पूरे जिस्म को मानो टटोल रही थी।

मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था।

मैंने चेक के लिए पूछा, तो वो बोले, हां दे देंगे, जल्दी क्या है। आज मेरे कुछ काम बाकी हैं तो मैं जरा बिजी हूं, तुम कल आ जाओ।

मैं हां में सर हिलाती हुई वहां से घर आ गई।

मैंने राकेश को यह बताया तो वो नाराज हो गए, क्योंकि यह बड़ी डील थी।

राकेश शाम को डॉक्टर के पास चले गए।

वो डॉक्टर के यहां से जैसे ही घर वापस आए तो काफी परेशान दिख रहे थे।

मैंने पूछा, क्या हुआ।

लेकिन राकेश ने कुछ नहीं कहा।

दूसरे दिन वो ऑफिस से घर आए तो शराब पीकर आए और रोने लगे।

मैंने पूछा, क्या हुआ।

राकेश ने कहा, मेरा इस महीने कुछ भी नहीं हुआ और शायद कंपनी से मुझे अगले महीने से निकाल दिया जाएगा।

मैंने उनको शांत किया और कहा, आप शांत हो जाओ, और वो डॉक्टर का क्या हुआ।

वो बोले, वो साला बहुत हरामी आदमी है। मैंने तुम्हें वहां भेजकर गलती की। उसे तुम बहुत पसंद आई हो और वो चेक देने के लिए तैयार है, लेकिन बदले में वो तुम्हारे साथ एक रात बिताना चाहता है।

मैं यह सुनकर एकदम शॉक हो गई।

राकेश बहुत टेंशन में थे, क्योंकि वही तो सब कमाते थे। हमारे फ्लैट का लोन भी चल रहा था। उनकी जॉब भी चली गई तो सब कैसे होगा।

मैंने उसे शांत किया और कहा, ऐसे रोने से क्या होगा। कुछ तो करना पड़ेगा।

वो बोले, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है।

और वो दिन ऐसे ही चला गया।

महीना खत्म होने को आया था और राकेश की कोई भी डील नहीं हो पाई थी।

उन पर ऑफिस से काफी प्रेशर था। मुझसे देखा नहीं जा रहा था।

वो रोज रात शराब पी रहे थे। मुझे यह सब अच्छा नहीं लग रहा था।

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

मैंने सोचा कि डॉक्टर के साथ सेक्स कर लूंगी तो मेरा क्या घिस जाएगा।

फिर उस डॉक्टर की मुस्कान मेरे अंदर एक अजीब सी बेचैनी पैदा करने लगी।

सारा कुछ सोचकर मैंने डॉक्टर से चुदने का मन बना लिया।

उसी दिन मैंने रात को राकेश को बांहों में भर लिया और कहा कि आप टेंशन मत लो। अगर आप चाहते हो, तो मैं उस डॉक्टर के साथ रात बिताने के लिए तैयार हूं।

राकेश मेरी तरफ देखते ही रह गए।

वो बोले, मैं ऐसा कभी नहीं करना चाहता सोनल। पर अभी मुझे और कोई रास्ता भी नहीं दिख रहा है। मैं तुमसे कह भी नहीं पा रहा था।

मैंने कहा, अरे आप इतना मत सोचा करो। मैं आपके लिए सब कुछ कर सकती हूं। आप हां बोल दो उस कमीने को।

दूसरे दिन सुबह राकेश डॉक्टर के पास गए।

दोपहर में उनका कॉल आया और बोले कि वो डॉक्टर आज रात घर आने वाला है। तुम दोपहर में आराम कर लेना, क्योंकि रात में तुम्हें जागना है।

मुझे डर भी लग रहा था और एक्साइटमेंट भी थी कि पहली बार एक गैर से चुदने में क्या होगा और कैसे होगा।

राकेश शाम जल्दी घर आ गए। शाम छह बजे थे। मैं किचन में खड़ी चाय के बर्तन धो रही थी, जब बाहर गेट खुलने की आवाज़ आई। दिल एकदम से धड़क उठा। राकेश की आवाज़ बाहर से आई, फिर वे अंदर आए और बिना ज्यादा बात किए कमरे की तरफ बढ़ गए।

तभी एक लड़की घर आई और बोली, “मुझे डॉक्टर साहब ने आपकी तैयारी करने के लिए भेजा है।”

मैंने सोचा कि मेरी कैसी तैयारी। उसके हाथ में एक बड़ा काला बैग था और वो हल्की सी मुस्कुरा रही थी। मैंने दरवाज़ा और खोला, फिर उसे अंदर आने दिया। वो मेरे साथ बैठक तक आई और बैग मेज़ पर रख दिया।

फिर मैं उसे अपने बेडरूम में ले गई। कमरे में पर्दे आधे बंद थे और बिस्तर पर चादर बिछी हुई थी। मैंने दरवाज़ा बंद किया। अंदर की हवा गर्म लग रही थी और मेरी सांस थोड़ी तेज़ हो रही थी।

उसने कहा कि वो डॉक्टर के यहां नर्स है और ब्यूटी पार्लर का भी काम करती है। उसने बैग खोला और उसके अंदर से कैंची, रेज़र, क्रीम और गर्म पानी की छोटी बोतल निकाली। फिर उसने मुझसे कहा, “मेम, कपड़े उतार दीजिए। तैयारी पूरी करनी है।”

मैं झिझकी, फिर साड़ी और ब्लाउज़ उतारे। पेटीकोट भी खिसका दिया। वो मुझे बिस्तर के किनारे बैठाकर मेरे हाथों पर क्रीम लगाई और बारीकी से बाल साफ करने लगी। ब्लेड ठंडा लग रहा था और हर बार त्वचा खिंचने पर हल्की सिहरन होती थी। पैरों पर भी वही किया। घुटनों से ऊपर जाते-जाते उसकी उंगलियां मेरी जांघों के अंदरूनी हिस्से को छू गईं।

उसने मेरे हाथ पैर के और चूत के बाल निकालकर मुझे एकदम चिकना कर दिया। चूत के ऊपर झाग लगाया, फिर धीरे-धीरे रेज़र चलाया। हर स्ट्रोक के साथ त्वचा नंगी होती गई। जब वो दोनों भगोष्ठों के किनारे साफ कर रही थी, तो उसकी उंगली बार-बार मेरी गीली दरार के पास से गुज़र रही थी। मैंने होंठ भींच लिए। चेहरा भी एकदम साफ कर दिया। उसने मेरे गालों पर क्रीम मलकर रुई से पोंछा और भौंहों को साफ किया। बाल खुले छोड़ दिए। मेरे लंबे बाल कंधों पर बिखर गए और पीठ पर ठंडक देने लगे।

वो जब यह सब कर रही थी तो मेरी चूत से पानी टपकने लगा था। चिकनी हो चुकी चूत की दरार खुलकर चमक रही थी और अंदर से गाढ़ा, गर्म रस रिसकर बिस्तर की चादर पर छोटी-छोटी बूंदें बना रहा था। मेरी सांसें छोटी हो गई थीं और निप्पल अपने आप सख्त होकर खड़े हो गए थे।

मेरी गीली चूत देखकर उस नर्स ने मुझसे कहा, “अरे मेम, आप तो अभी से गर्म हो गई हैं। रात तक का इंतजार तो कर लीजिए।”

मैं झेंप गई। चेहरा गर्म हो गया और मैंने दोनों हाथों से अपनी चूत ढक ली। वो हल्के से हंसी और तौलिया给我 थमा दिया।

फिर हमने खाना खाया। मैंने साड़ी फिर से पहन ली और किचन में जाकर रोटी और सब्जी परोसी। राकेश चुपचाप खा रहे थे। नर्स मेरे सामने बैठी थी और बार-बार मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी। मेरी जांघें अभी भी चिकनी महसूस हो रही थीं और हर बार पैर हिलाने पर चूत की नमी याद आ जाती थी।

करीब दस बजने वाले थे। बैठक की घड़ी की टिक-टिक साफ सुनाई दे रही थी। बाहर गली शांत थी।

उसने कहा, “डॉक्टर सर अभी आते ही होंगे।”

उसने बैग से कुछ निकाला और बोली कि इसे पहन लो। मैंने देखा तो उस पैकेट पर लिखा था कि बेबीडॉल हनीमून वेयर। पैकेट लाल था और अंदर मुलायम कपड़ा तह किया हुआ था।

उसे मैंने पहन लिया। वो लाल रंग की नाइटी थी। पतला कपड़ा शरीर से चिपक गया। वो ऊपर से पूरी खुली थी और उसमें से मेरे आधे से ज्यादा दूध दिख रहे थे। दोनों चूचियां कपड़े के किनारों से बाहर झांक रही थीं और निप्पल कपड़े से रगड़ खाकर और सख्त हो गए। नीचे भी वो मेरी कमर के थोड़ी सी नीचे थी। नाइटी का घेरा कमर के ठीक नीचे खत्म हो रहा था, जिससे चिकनी जांघें और चूत का ऊपरी हिस्सा साफ दिख रहा था।

साथ में एक छोटी ब्रा भी थी। वो भी उसने मेरी चूचियों के ऊपर पहना दी, जिससे मेरे मम्मे ऊपर उठ गए और दोनों मम्मे एकदम पास आ गए। ब्रा की पतली पट्टी छाती के नीचे दब गई और दोनों स्तन बीच में गहरी दरार बनाकर ऊपर उभरे। मैंने आईने के सामने खड़े होकर सांस छोड़ी। कपड़ा इतना पतला था कि अंदर की त्वचा का रंग बाहर झलक रहा था।

उसने थोड़ा मेकअप और किया। मुझे नेल पॉलिश लगाई, लिपस्टिक वगैरह लगाकर मुझे चुदने के लिए रेडी कर दिया। लाल नेल पॉलिश उंगलियों पर चमक रही थी। होंठों पर गाढ़ी लाल लिपस्टिक लगाई गई और आंखों में काजल खींच दिया गया। गालों पर हल्का ब्लश था। हर बार ब्रश गाल पर फिरा, मेरी पलकें कांप गईं।

मैंने आईने में देखा तो मैं एकदम हीरोइन जैसी काफी खूबसूरत और सेक्सी लग रही थी। खुले बाल, उभरी चूचियां, छोटी लाल नाइटी और चमकते होंठ। नीचे चिकनी चूत का हल्का सा उभार कपड़े के नीचे से झलक रहा था। मैंने अपने आप को घूमाकर देखा और होंठ भींच लिए।

वो बोली, “अब मैं चलती हूं। आप घबराना नहीं मेम। डॉक्टर सर बहुत अच्छे हैं। उन्हें ऐसे सेक्सी लुक बहुत पसंद हैं, इसलिए उन्होंने यह सब करने के लिए मुझसे कहा था। वो बड़े प्यार से सब करेंगे। मुझे भी वो बहुत बार प्यार से चोद चुके हैं। उनके साथ बहुत मजा आता है।”

यह कहकर वो चली गई।

नर्स ने खुद के चुदने की बात कहकर मुझे और भी ज्यादा उत्तेजित कर दिया था। उसके जाते ही कमरे में इत्र और क्रीम की हल्की खुशबू रह गई। मैं आईने के सामने खड़ी रही और अपनी चिकनी जांघों को हल्के से सहलाया। लाल नाइटी कमर के नीचे खिसकी हुई थी और चूत की दरार से फिर से गर्म रस रिसने लगा था। निप्पल ब्रा के अंदर सख्त होकर कपड़े से रगड़ खा रहे थे।

मैं बाहर आ गई। बैठक की रोशनी मंद थी और राकेश सोफे पर बैठा फोन घुमा रहा था। मेरे नंगे पैर फर्श पर धीमी आवाज़ करते हुए उसके सामने रुक गए।

राकेश ने मुझे देखा तो वो बोला, “अरे वाह, तुम बहुत सुंदर दिख रही हो। साला वो डॉक्टर आज अच्छे मजे लेने वाला है।”

मैं मुस्कुराने लगी। होंठों पर लगी लाल लिपस्टिक उसके शब्द सुनकर और खिंच गई। मैंने दोनों हाथों से नाइटी का किनारा थोड़ा नीचे खींचा, पर चूचियां फिर भी ऊपर से आधी खुली रह गईं।

दस मिनट में ही दरवाजे की घंटी बजी। आवाज़ तेज़ और साफ थी। मेरा पेट एकदम सिकुड़ गया और चूत के अंदर हल्की सी ऐंठन हुई।

मैं बेडरूम में ही थी। पर्दे बंद थे और बिस्तर पर चादर बिछी हुई थी। मैं किनारे पर बैठकर अपने चिकने हाथ बार-बार गोद में रख रही थी।

राकेश ने दरवाजा खोला। बाहर से गली की हल्की आवाज़ अंदर आई, फिर दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ हुई।

वो आ गया। जूतों की धीमी आहट बैठक से बेडरूम की तरफ बढ़ रही थी। मेरी सांस रुक-रुक कर चलने लगी।

आते ही उसने एक शराब की बोतल राकेश को दी और बोला, “लो एंजॉय करो।”

राकेश ने कुछ नहीं बोला और वो डॉक्टर को बेडरूम में ले आए। डॉक्टर लंबा था, शर्ट के बटन ऊपर तक बंद थे और उसके हाथ में हल्की सी कोलोन की खुशबू थी। वो दरवाज़े पर रुककर मुझे ऊपर से नीचे तक घूरने लगा।

डॉक्टर मुझे देखकर एकदम से बोला, “वाह क्या आइटम दिख रही हो। आज तो बहुत मजा आएगा।”

राकेश ने उससे कहा, “सर, प्लीज इसे ज्यादा तकलीफ मत देना। मैं जा रहा हूं, आप एंजॉय करो।”

डॉक्टर बोला, “अरे तुम टेंशन मत लो। तुम्हारी बीवी तो मेरी बीवी जैसी ही है। तुम्हें कोई टेंशन हो तो मैं दरवाजा खुला ही रख देता हूं। तुम चाहो तो हमें सब करते हुए देख सकते हो।”

राकेश कुछ नहीं बोले और वो चले गए। उसकी पीठ बैठक की तरफ मुड़ गई और पैरों की आवाज़ धीमी होकर गायब हो गई।

डॉक्टर ने सच में दरवाजा खुला रखा था। दरवाज़े की पट्टी पूरी नहीं जुड़ी थी और बाहर से बैठक की रोशनी की पतली लकीर अंदर आ रही थी।

जबकि मैं नहीं चाहती थी कि राकेश यह सब देखें। मेरे गाल गर्म हो गए और मैंने नाइटी का घेरा दोनों हाथों से जांघों पर दबा लिया। फिर भी चिकनी चूत का ऊपरी हिस्सा कपड़े के नीचे से झलक रहा था।

खैर, मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, क्योंकि कैसे भी मेरी चुदाई होने ही वाली थी। दिल जोर से धड़क रहा था और जांघों के बीच पहले से जमा रस और फैलने लगा था।

डॉक्टर ने अपनी शर्ट उतारी और मेरे पास आकर बैठ गया। उसकी छाती पर हल्के बाल थे और त्वचा गर्म लग रही थी। वो इतना करीब बैठा कि उसकी जांघ मेरी नंगी जांघ से छू गई।

वो बोला, “ऐसा लगता है कि जन्नत से कोई हूर आज नीचे आई है। क्या नाम है तुम्हारा।”

मैं बोली, “सोनल।”

वो बोला, “वाह बहुत अच्छा नाम है। तुम मेरी सोना हो।”

उसने मुझे नीचे लिटा दिया और मुझे होंठों पर किस करने लगा और ऊपर से ही मेरी चूचियां दबाने लगा। उसके होंठ मेरे लाल लिपस्टिक वाले होंठों पर दब गए और गर्म सांस मेरी नाक पर टकरा रही थी। ऊपर से उसकी हथेली दोनों उभरे स्तनों को नाइटी के ऊपर से मसल रही थी। निप्पल उसकी उंगलियों के बीच सख्त होकर चुभ रहे थे।

तभी मैंने देखा कि राकेश भी शराब लेकर कमरे में आ गए और वहीं चेयर पर बैठ गए। गिलास में शराब हिल रही थी और उसकी नजर सीधे बिस्तर पर टिकी थी। दरवाज़ा अभी भी अधखुला था।

मुझे उनके सामने यह सब करने में शर्म आ रही थी। मैंने चेहरा एक तरफ घुमा लिया, पर डॉक्टर के हाथ मेरी छाती छोड़ नहीं रहे थे। जांघें अपने आप सिकुड़ गईं और चूत के अंदर पहले से जमा रस और गर्म हो गया।

डॉक्टर ने मेरे बदन से बेबीडॉल ड्रेस को निकाल दिया और मैं ब्रा और पैंटी में रह गई थी। पतली लाल नाइटी सिर की तरफ सरकाकर उसने एक तरफ फेंक दी। ठंडी हवा चिकनी त्वचा पर लगी और छोटी ब्रा में कसे स्तन ऊपर उभरे रह गए। पैंटी पहले से गीली होकर चूत की दरार से चिपक गई थी।

उसने ब्रा के ऊपर से ही जोर जोर से मेरी चूचियां दबाना शुरू किया। दोनों हथेलियां कपड़ों के ऊपर स्तनों को भींच रही थीं और हर दबाव पर मांस बाहर की तरफ फूल रहा था।

मुझे थोड़ा दर्द हुआ तो मैंने कहा, “थोड़ा धीरे।”

राकेश भी बोला, “सर थोड़ा धीरे करो न।”

फिर डॉक्टर ने मेरी ब्रा उतार दी और वो अपने एक हाथ से मेरे दूध जोर जोर से दबाने लगा। दूसरे दूध को मुंह में लेकर चूस रहा था। ब्रा के हुक खुलते ही दोनों स्तन भारी होकर बगलों की तरफ हिल गए। उसने बायां स्तन मुट्ठी में भरकर दबाया और दायां निप्पल होंठों में लेकर खींचा। गर्म जीभ निप्पल के चारों तरफ घूम रही थी और चूसने की आवाज़ कमरे में साफ सुनाई दे रही थी।

“वाह क्या मस्त चूचियां हैं तुम्हारी।”

कई मिनट तक वो वही सब करता रहा। मेरी चूत में चींटियां रेंगने लगी थीं। कभी एक स्तन को मुंह में भरता, कभी दूसरे को उंगलियों से मसलता। निप्पल सूजकर चमकने लगे और मेरी कमर बिस्तर पर हल्के हल्के उठने लगी। पैंटी के अंदर रस इतना भर गया कि जांघों तक फैलने लगा।

फिर उसने मेरी पैंटी उतार दी और एक उंगली मेरी चूत के अंदर डाल दी। गीला कपड़ा टखनों तक खिसका और चिकनी, खुली चूत उसके सामने आ गई। बीच की उंगली फिसलती हुई दरार में गई और अंदर की गर्म, तंग दीवारों से टकराई।

मैं हल्की सी आह कर उठी।

वो अपनी उंगली को मेरी चूत में अंदर बाहर करने लगा। हर बार अंदर जाते हुए गीली आवाज़ होती और बाहर आते हुए उंगली पर गाढ़ा रस चमकता। मेरे घुटने अपने आप थोड़े फैल गए और सांसें छोटी हो गईं।

“वाह क्या मस्त माल हो तुम। एकदम टाइट छेद है तुम्हारी। आज तो बहुत मजा आने वाला है।”

उसने उंगली चूत से बाहर निकाली तो वो पूरी गीली हो चुकी थी। उंगली पर चिपचिपा, पारदर्शी रस लटका हुआ था और रोशनी में चमक रहा था।

वो हंसते हुए बोला, “देख राकेश, तेरी बीवी की चूत कैसे पानी छोड़ रही है। तू टेंशन मत ले, आज यह भी बहुत मजा लेने वाली है।”

मेरा शर्म से बुरा हाल था। मैंने एक हाथ से चेहरा ढक लिया और दूसरी जांघ को सिकोड़ने की कोशिश की, पर डॉक्टर ने घुटना थाम रखा था। राकेश की तरफ नजर नहीं उठ रही थी।

राकेश ने भी कुछ नहीं कहा। गिलास उसके हाथ में रुका रहा और वो चुपचाप देखता रहा।

फिर डॉक्टर ने मेरी टांगें फैला दीं और मेरी चूत पर अपना मुंह रखकर चूत चाटने लगा। दोनों घुटने उसके कंधों पर टिक गए। गर्म सांस पहले दरार पर पड़ी, फिर चौड़ी जीभ नीचे से ऊपर तक फिरी। भगोष्ठों को होंठों में लेकर चूसा और रस की नमकीन-मीठी गीली परत उसकी जीभ पर लग गई।

वो जीभ अंदर तक डालने लगे। मुझे बहुत मस्त लग रहा था और गुदगुदी भी हो रही थी। जीभ की नोक छेद के मुंह पर दबाव देकर अंदर घुस रही थी और अंदर की दीवारें सिकुड़कर उसे भींच रही थीं। मेरी उंगलियां चादर भींच गईं और पेट के अंदर हल्की ऐंठन होने लगी।

मैंने कहा, “आह सर, धीरे कीजिए।”

मगर वो अपनी धुन में मेरी चूत चाटता रहा। गर्म जीभ भगोष्ठों को अलग करके अंदर तक जाती रही और रस की गीली आवाज़ उसके होंठों से आती रही। मेरी कमर हल्के हल्के बिस्तर से उठ रही थी और जांघें उसके कंधों पर कांप रही थीं।

फिर चूत चाटकर मन भरने के बाद उसने कहा, “चलो, अब तुम मेरे कपड़े उतारो।”

मैंने उसकी पैंट निकाली। बेल्ट खोलकर बटन खोला और जिपर नीचे खिसकाया। पैंट घुटनों तक सरक गई। उसके अंदर की गर्मी मेरे हाथों पर लग रही थी और कमरे में उसकी कोलोन के साथ पसीने की हल्की गंध भी आ रही थी।

अंडरवियर में उसका तना हुआ लंड एकदम बड़ा सा दिख रहा था। कपड़ा आगे से तनकर उभार बना रहा था और सिरे पर गीला धब्बा लग चुका था। मैंने एक पल उसे देखा, फिर कमर के इलास्टिक को दोनों हाथों से पकड़ा।

मैंने उसकी अंडरवियर निकाली, तो उसका लंड एकदम खड़ा था और एकदम तना हुआ व मोटा। अंडरवियर टखनों तक गिरी और मोटा, गरम लंड मेरे चेहरे के सामने झूलकर सीधा हो गया। नसें ऊपर तक उभरी हुई थीं और टोपा फूलकर चमक रहा था। उसके छेद से थोड़ा चिपचिपा रस पहले से रिस रहा था।

मैं तो उसका लौड़ा देखकर दंग रह गई और सोचने लगी कि पता नहीं अब क्या होगा। मोटाई मेरी मुट्ठी से ज्यादा लग रही थी और लंबाई देखकर पेट के अंदर डर और गर्मी एक साथ दौड़ गई। राकेश चेयर पर बैठा यह सब देख रहा था, इसलिए शर्म और तेज़ हो गई।

वो लंड को मेरे मुंह के पास लाया और इशारा किया। गर्म टोपा मेरे होंठों को छू गया और उस पर लगा रस मेरी लिपस्टिक पर लग गया। उसकी उंगलियां मेरे खुले बालों में फंस गईं।

मैं समझ गई कि मुझे उसका लंड चूसना है। मैंने होंठ थोड़े खोले और जीभ से टोपे को एक बार चाटा। नमकीन स्वाद मुंह में फैल गया।

मैंने भी मुंह में लंड लेकर चूसना शुरू कर दिया। पहले सिर्फ टोपा अंदर लिया, फिर धीरे-धीरे और अंदर सरकाया। होंठ उसकी मोटाई पर कस गए और जीभ नीचे की नस पर फिरने लगी। हर चूसने पर गीली आवाज़ होती और मेरी लार लंड पर चमकने लगती। कुछ देर बाद मैंने हाथ से जड़ पकड़कर मुंह आगे-पीछे किया। गाल अंदर खिंच रहे थे और सांस नाक से तेज़ चल रही थी।

कुछ मिनट तक लंड चूसने के बाद वो बोला, “चलो, अभी कंट्रोल नहीं हो रहा। अब तुम्हारी चूत का मजा लेना है।”

उसने मुझे नीचे लिटा दिया और टांगें फैलाकर मेरे ऊपर चढ़ गया। पीठ चादर पर लगी और दोनों घुटने उसके हाथों ने और खोल दिए। उसका भारी बदन मेरे ऊपर छा गया और तना हुआ लंड मेरी गीली जांघों के बीच सट गया। छाती पर उसके छाती के बाल रगड़ खा रहे थे।

लंड का टोपा मेरी चूत की फांकों में रख दिया और बोला, “सोना रेडी हो न।”

मैं कुछ नहीं बोली और उसके बाद ही उसने एक धक्का दे दिया। मोटा टोपा गीली दरार को चीरता हुआ अंदर घुसा। तंग दीवारें एकदम खिंच गईं और गर्म, भरा हुआ दबाव पेट तक चला गया। मेरी उंगलियां उसकी बांहों में गड़ गईं।

मैं एकदम से चिल्लाई, “आई, मर गई।”

वो रुक गया और मेरे गाल चूमते हुए बोला, “सोना डार्लिंग, कुछ नहीं होगा, थोड़ा सा सह लेना।”

उसके होंठ मेरे गर्म गाल पर टिके रहे और उसकी सांस मेरी गर्दन पर पड़ रही थी। अंदर भरा हुआ लंड हिला नहीं। मैंने दोनों हाथों से उसकी बांहें पकड़ रखी थीं और सांस टुकड़ों में निकल रही थी।

मैंने थोड़ा ऊपर उठकर देखा तो डॉक्टर का आधा लंड मेरी चूत में था। बाकी मोटा हिस्सा बाहर चमक रहा था और जड़ तक गीले रस से सना हुआ था। मेरी फांके उसके चारों तरफ खिंची हुई थीं और हल्की लाल हो गई थीं।

एक मिनट तक उसने मेरे दूध चूसे और बदन सहलाया। गर्म मुंह एक निप्पल पर लगा और जीभ उसे धीरे चाटती रही। दूसरा हाथ मेरी कमर से जांघ तक फिरा। उसकी हथेली चिकनी त्वचा पर रुक-रुककर सहला रही थी और चुम्बन गाल से होंठों तक आ गए। धीरे-धीरे मेरी जकड़ी हुई जांघें ढीली पड़ने लगीं।

मेरे शांत होते ही उसने फिर से एक धक्का लगा दिया। कमर आगे बढ़ी और बाकी लंड एक ही दबाव में अंदर समा गया। जड़ मेरी फांकों से सट गई और पेट के अंदर गहरा, भरा हुआ खिंचाव चला गया।

मुझे और ज्यादा दर्द हुआ। अंदर की दीवारें एकदम सिकुड़ गईं और मैंने उसकी पीठ पर नाखून गड़ा दिए। आंखें भींच लीं और होंठ कांपने लगे।

मैं समझ गई कि अब पूरा लंड अंदर चला गया है। मैं “आंह, आई, आई, दर्द हो रहा है” कर रही थी। आवाज़ टूटी हुई निकल रही थी और सांस छाती में अटक रही थी।

डॉक्टर थोड़ा रुक गया और मैं शांत हो गई। वो मेरे माथे पर हाथ रखकर रुका रहा। अंदर लंड गर्म और सख्त भरा हुआ था, पर अब हिल नहीं रहा था। कुछ सांसों के बाद पेट की ऐंठन हल्की पड़ गई।

वो धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा। पहले सिर्फ थोड़ा बाहर खींचा, फिर धीरे अंदर भरा। हर बार गीली दीवारें उसके साथ खिंचतीं और वापस सिकुड़तीं। गति छोटी और नियंत्रित थी।

मेरा दर्द भी अब काफी कम हो चुका था। खिंचाव के साथ अंदर गर्मी फैलने लगी और चूत अपने आप उसके लंड पर कसने लगी। जांघों के बीच रस और बढ़ गया।

वो अब धीरे धीरे स्पीड बढ़ा रहा था। कमर का झटका लंबा होने लगा और हर अंदर आते समय जड़ मेरी फांकों से टकराने लगी। बिस्तर हल्के हल्के हिलने लगा।

मुझे भी अब अच्छा लगने लगा था। दर्द की जगह अंदर रगड़ का मजा आने लगा और निप्पल फिर से सख्त हो गए। मैंने उसकी कमर पर टांगें थोड़ी और खोल दीं।

पांच मिनट में ही उसने मुझे जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया और अपने आप ही मैं मादक सिसकारियां लेने लगी। उसकी कमर तेज़ उठ-गिर रही थी और हर धक्के पर मेरे दूध हिल रहे थे। मुंह से बिना रोके आवाज़ निकल रही थी।

मेरी आह आह की आवाज से बेडरूम गूंजने लगा। “आह, आह, सर” की टूटी सिसकारियां दीवारों से टकरा रही थीं और मेरी सांसें उसी लय में चल रही थीं।

मेरी टाइट चूत भी काफी पानी छोड़ रही थी। गाढ़ा रस उसके लंड पर चढ़कर जड़ तक फैल गया था और जांघों के जोड़ गीले हो रहे थे।

जैसे ही लंड अंदर जा रहा था तो स्लॉप स्लॉप स्लॉप फच फच की आवाज आ रही थी। हर धक्के के साथ गीली, चिपचिपी आवाज़ साफ सुनाई दे रही थी और चूत की दीवारें उसे भींचकर छोड़ रही थीं।

राकेश चुपचाप शराब पीते पीते यह सब देख रहे थे। गिलास उसके होंठों तक जा रहा था और नजर बिस्तर से नहीं हट रही थी।

पता नहीं वो क्या सोच रहे होंगे। मैंने एक बार उसकी तरफ देखा, फिर शर्म से आंखें बंद कर लीं। डॉक्टर का बदन मेरे ऊपर झूल रहा था और उसकी कमर रुक नहीं रही थी।

डॉक्टर की स्पीड बढ़ती ही जा रही थी। धक्के गहरे और लगातार हो गए थे। उसका पेट मेरी चिकनी चूत से बार-बार टकरा रहा था और बिस्तर की चरमराहट तेज़ हो गई थी।

मेरी सिसकारियां सुनकर शायद उसे और जोश आ रहा था। हर “आह” पर उसकी पकड़ मेरी कमर पर और कस जाती थी और अगला धक्का पहले से गहरा पड़ता था।

जैसे जैसे डॉक्टर की स्पीड बढ़ रही थी, मेरी आ आ की आवाज बढ़ रही थी और मुझे काफी मजा आने लगा था। उसकी जांघें मेरी फैली जांघों से बार-बार टकरा रही थीं और हर अंदर आते धक्के पर पेट के अंदर गर्मी की लहर दौड़ जाती थी। चूत की दीवारें उसके मोटे लंड पर कसकर छोड़ रही थीं।

करीब बीस मिनट तक उसने ऐसे ही जोर जोर से चोदा। लय कभी तेज़ होती, कभी थोड़ी लंबी हो जाती, पर लंड चूत से बाहर नहीं निकला। मेरे दूध उसके हर झटके पर हिल रहे थे और निप्पल उसकी छाती से रगड़ खाकर सूज गए थे। चादर कमर के नीचे मुड़ गई थी और बिस्तर की चरमराहट कमरे में गूंज रही थी। पसीना दोनों के पेट के बीच फिसल रहा था।

मैं भी अब थक गई थी और डॉक्टर भी अब आहें भरने लगा था। मेरी टांगें कांप रही थीं और सांस टूटी हुई निकल रही थी। उसकी कमर के झटके अब अनियमित हो गए थे और गले से दबी हुई “आह” बार-बार फूट रही थी।

मैं समझ गई कि वो अब पानी छोड़ने वाला है। उसका लंड अंदर और सख्त होकर फूल गया था और जड़ मेरी फांकों से चिपकी रह गई थी। उसकी उंगलियां मेरी कमर में गड़ गईं।

अगले ही पल मुझे अपनी चूत में उसका गर्म पानी छूटता सा महसूस हुआ। गहरा धक्का देकर वो रुक गया और अंदर गर्म, गाढ़ी धारें छूटने लगीं। हर झटके के साथ पेट के अंदर गर्मी फैलती गई और चूत की दीवारें अपने आप सिकुड़कर उसे निचोड़ने लगीं।

वाह क्या आनंद था वो। भरा हुआ, गर्म बहाव अंदर टकरा रहा था और मेरी सिसकी उसके कंधे में दब गई। आंखें बंद थीं और पूरा बदन ढीला पड़ गया था।

फिर वो डॉक्टर झड़कर मेरे ऊपर ही लेट गया और उसने मुझे कसके पकड़ लिया। उसका भारी सीना मेरे दूधों पर दबा हुआ था और सांसें मेरी गर्दन पर तेज़ पड़ रही थीं। अंदर आधा ढीला लंड अभी भी गीली चूत में फंसा हुआ था। उसकी बाहें मेरी पीठ के नीचे सिमट गई थीं।

एक मिनट बाद वो बोला, “सोना रानी, तुम बहुत अच्छी हो, ऐसा मजा आज पहली बार आया है।”

मैंने देखा तो मेरी चूत से उसके लंड का पानी बाहर निकल रहा था और बेड पर गिर रहा था। जब वो थोड़ा हटा, तो सफेद, गाढ़ा रस फांकों से रिसकर चादर पर छोटी धार बना गया। जांघों का अंदरूनी हिस्सा चिपचिपा हो चुका था और छेद हल्का खुला कांप रहा था।

कुछ देर तक हम दोनों वैसे ही पड़े रहे। उसकी सांस धीमी हुई और मेरा हाथ उसकी पीठ पर रुका रहा। कमरे में सिर्फ घड़ी और राकेश के गिलास की हल्की आवाज़ थी। चिकनी त्वचा पर पसीना ठंडा होने लगा था।

फिर डॉक्टर ने फिर से मुझे लंड चूसने को कहा। वो करवट लेकर बैठ गया और गीला, आधा झुका लंड मेरे होंठों के पास लाया। उस पर मेरी चूत का रस और उसका अपना पानी मिला हुआ चमक रहा था।

मैंने लंड चूसकर खड़ा कर दिया। होंठ उसकी मोटाई पर कस गए और जीभ नीचे की नस पर फिरने लगी। कुछ देर की चूसने और हाथ की पकड़ से वो फिर तनकर मेरे मुंह में सख्त हो गया। टोपा मेरे तालू से टकरा रहा था और लार उसके जड़ तक चमकने लगी थी।

इस बार उसने मुझे घोड़ी बनाया और फिर से मेरी जोरदार चुदाई चालू हो गई। मैं घुटनों और हथेलियों के बल बिस्तर पर झुक गई। उसने कमर पकड़कर तना हुआ लंड पीछे से गीली चूत में एक ही धक्के में भर दिया। हर झटके पर मेरे दूध नीचे झूल रहे थे और फच फच की आवाज़ फिर से कमरे में गूंजने लगी।

पूरी रात में डॉक्टर ने मेरी पांच बार अलग अलग पोज में घमासान चुदाई की। कभी मैं उसके ऊपर सवार रही, कभी टांगें उसके कंधों पर रही, और कभी वो मुझे किनारे लिटाकर पीछे से भरता रहा। हर बार चूत पानी छोड़ती रही और वो अंदर या मेरे पेट पर झड़ता रहा। राकेश चेयर पर शराब घूंटता रहा और बिस्तर से नजर नहीं हटाई।

मुझे भी उसके लौड़े से चुदने में बहुत मजा आया। शुरू का खिंचाव बाद में गहरी रगड़ में बदल गया था और हर पोज़ में उसकी मोटाई अंदर की दीवारों को अलग तरह से भर रही थी।

सुबह तक मैं बहुत थक गई थी। छह बज गए थे। डॉक्टर का भी मन अब भर चुका था। बाहर हल्की रोशनी पर्दों से अंदर आ रही थी। मेरी जांघें चिपचिपी थीं और चूत हल्की सूजी हुई कांप रही थी।

डॉक्टर मुझसे बोला, “रानी मजा आया न।”

मैंने शर्माते हुए हां में सर हिलाया। आवाज़ नहीं निकली। गाल गर्म थे और मैं चादर से अपने उघड़े बदन को ढक रही थी।

उसने अपने कपड़े पहने और अपनी जेब से चेक निकालकर राकेश को दिया और बोला, “सच में तुम्हें मस्त बीवी मिली है। पहली बार ऐसा मजा आया है।”

राकेश कुछ नहीं बोले। चेक उसके हाथ में रहा और वो बस सिर झुकाए खड़ा रहा।

डॉक्टर ने मुझसे कहा, “हमारे हॉस्पिटल में नर्स की जरूरत है। तुम चाहो तो जॉइन कर सकती हो।”

मैं कुछ नहीं बोली। नजर चादर पर टिकी रही और होंठ भींच लिए।

वो चला गया। दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ के बाद कमरा एकदम शांत हो गया। बिस्तर पर उसकी खुशबू और गीली चादर रह गई थी।

मैं राकेश से नजर नहीं मिला पा रही थी, क्योंकि मुझे पता था कि मैं भी मदहोश होकर एक गैर मर्द से चुदवा रही थी। उसकी आंखों के सामने मेरी सिसकारियां और खुली टांगें अब याद आ-आकर शर्मिंदगी बढ़ा रही थीं।

फिर मैंने राकेश को अपनी बांहों में लेकर रोना शुरू कर दिया और बोली, “प्लीज मुझे माफ कर देना, मैं यह सब उसे मजा देने के लिए कर रही थी ताकि उससे हमें चेक मिल जाए।”

राकेश भी मुझे कसके पकड़कर बोले, “हां ठीक है जानू, थैंक्यू।”

फिर कई दिनों बाद मैंने डॉक्टर के यहां हॉस्पिटल जॉइन कर लिया, क्योंकि हर महीना राकेश की जॉब में कुछ न कुछ प्रॉब्लम होती ही रहती थी। सफेद यूनिफॉर्म में वार्ड की ड्यूटी करने लगी और डॉक्टर की नजर हर राउंड में मुझ पर ठहर जाती थी।

मुझे भी डॉक्टर का लंड पसंद आ गया था। उसकी मोटाई और देर तक चलने वाली रफ्तार अब शरीर को याद रहने लगी थी।

अब तो डॉक्टर मेरा दीवाना हो चुका था। ड्यूटी के बाद वो बहाना बनाकर मुझे अंदर बुला लेता और दरवाज़ा बंद करके मेरे यूनिफॉर्म के नीचे हाथ डाल देता।

हफ्ते में एक बार वो मेरे घर आकर ही मुझे रात भर चोदता है। मुझे भी उसके लंड से चुदवाने में बहुत मजा आता है।

साथ ही डॉक्टर मुझे बहुत ज्यादा सैलरी, गिफ्ट्स वगैरह सब देता रहता है। लिफाफे में नकद आता है, कभी साड़ी, कभी इत्र, और कभी गहने। उसके हाथ की गर्म पकड़ और देर तक चलने वाली चुदाई अब मेरी हफ्ते की राह बन चुकी है। बिस्तर पर उसकी खुशबू रह जाती है और सुबह जांघों के बीच हल्की मीठी दर्द याद दिलाती रहती है।

राकेश को भी इस पैसे वाली रात से कोई प्रॉब्लम नहीं है, क्योंकि मैं इतनी कमाई करने लगी हूं कि हमारी सारी जरूरतें पूरी होने लगी थीं। किराया समय पर भरने लगा, राकेश की पुरानी टेंशन हल्की पड़ गई, और घर में सामान भी बढ़ने लगा। वो अब उन रातों में बाहर चला जाता है या दूसरे कमरे में शराब लेकर बैठ जाता है।

अगले महीने अमेरिका से डॉक्टर साहब के गेस्ट आने वाले हैं और उसने उन सबका ख्याल मुझे ही रखने को बोला है। डॉक्टर ने अस्पताल के केबिन में धीमी आवाज़ में कहा कि मेहमान उसके पुराने साथी हैं और उनका पूरा इंतजाम मुझे देखना होगा। उसकी उंगलियां बात करते हुए मेरी कमर पर टिक गई थीं।

डॉक्टर ने उन्हें मेरे बारे में बताया है और वो सब भी मेरा मजा लेना चाहते हैं। फोन पर उनकी हंसी सुनाई दी थी और डॉक्टर ने मुझसे कहा कि वे मेरी तस्वीर देखकर पहले ही गर्म हो चुके हैं। मेरी चूत उस बात पर अपने आप सिकुड़ गई और डर के साथ वही पुरानी उत्तेजना लौट आई।

अगली कहानी में मैं आपको उसके बारे में भी बताऊंगी।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।