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दीदी का पति कमजोर था

Didi ka kamzor pati sex story: मेरा नाम सविता है। मैं बीस साल की हूँ। खूबसूरत हूँ। हॉट हूँ। इंस्टाग्राम पर भी काफी फेमस हूँ। मेरी शादी हुए छह महीने हुए हैं। मैं अपने ससुराल में रह रही हूँ।

मेरी गोरी चमकदार त्वचा, भरी हुई गोल मटोल चूचियां, पतली कमर और नीचे की तरफ भरी हुई मोटी गांड लोगों को आकर्षित करती है। शादी के बाद भी मैं अपनी सेक्सी फिगर को बनाए रखती हूं जिसकी वजह से मेरे इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है।

बाबूजी और माँ दोनों तीर्थ यात्रा पर गए हुए थे और मेरे पति देव तीन दिन के लिए बिजनेस टूर पर गए थे। इस बीच मेरा छोटा भाई मुझसे मिलने आया।

मैं भी ज्यादा प्यार दिखाने के चक्कर में उसे गले लगा लिया और फिर गले लगाना पूरी रात चुदाई में बदल गया। कैसे मैं आपको यही बताने जा रही हूँ।

पति देखने में बहुत खूबसूरत है पर चुदाई करने में कमजोर है। कारण है कि वो बाइक से गिर गए थे तभी से उनके कमर में दर्द रहता है। लंड खड़ा तो हो जाता है पर वो झटके नहीं दे पाते हैं।

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उनकी कमर का तेज दर्द उन्हें पूरी ताकत से मुझे चोदने नहीं देता। वो मुश्किल से कुछ झटके ही मार पाते हैं जिससे मेरी चूत की गहरी प्यास कभी पूरी नहीं होती। मैं उनके ऊपर चढ़कर अपनी भारी चूचियां उनके मुंह में देती लेकिन फिर भी मुझे वो तीव्र आनंद नहीं मिल पाता जो मैं चाहती हूं।

आप खुद सोचिए लंड सिर्फ चूत में घुसा देने से ही नहीं होता है। जब तक जोर जोर से झटके नहीं लगे तब तक चुदाई में मजा नहीं आता है। मैं कितनी चूत चटवा लूँ। कितनी चूचियां पिला लूँ पर इन सब से कुछ भी नहीं हो रहा था।

मेरी चूत अंदर से लगातार गीली और तड़पती रहती थी। रात को अकेले लेटकर मैं अपनी उंगलियों से अपनी क्लिट को रगड़ती लेकिन वो राहत भी बहुत कम पड़ती थी। मेरे पूरे जिस्म में एक अनकही आग सुलग रही थी जो बुझने का नाम नहीं ले रही थी।

तभी मैं अपने भाई से गले लगते ही मैं भी बहक गई थी और पूरी रात रंगीन कर डाली।

मायके से मिठाई और कपड़े भेजे थे। दिवाली के दो दिन बाद आया। रात के करीब दस बज रहे थे। मैं अकेली थी जैसा कि आपको पता है।

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उसको देखकर रहा नहीं गया और ज्यादा भाई के प्रति प्यार दिखाने के चक्कर में गले लगा ली।

मेरी चूचियां जैसे ही उसके सीने से टकराईं वो तो पागल हो गया। वो मुझे कस के पकड़ लिया और मेरी पीठ सहलाने लगा। मैं रुई की तरह लिपट गई। वो मेरे कंधे को चूमने लगा।

जैसे ही मेरी भारी, नरम और गर्म चूचियां उसके चौड़े, मजबूत और मांसल सीने से पूरी ताकत से दबकर चिपक गईं तो मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। उसकी मजबूत बाहें मेरी पतली कमर को घेरकर मुझे और भी कसकर अपने से चिपका ले रही थीं। उसकी उंगलियां मेरी पीठ पर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे घूम रही थीं जिससे मेरी रीढ़ की हड्डी में रोमांच भरी सनसनी उठ रही थी। मैं पूरी तरह से उसके सीने से लिपट गई और रुई की तरह नरम होकर उसकी बाहों में समा गई। उसके गर्म और नम होंठ मेरे कंधे की नाजुक त्वचा को बार-बार चूमने लगे जिससे मेरी सांसें भारी और तेज हो गईं।

मैं बोली ये क्या कर रहे हो नितेश। तो वो बोला कुछ नहीं दीदी आज मुझे मत रोको। आपसे इतने दिन तक मिला नहीं इसलिए छोड़ने का मन नहीं कर रहा है।

उसकी आवाज में गहरी लालसा और गर्मी भरी हुई थी जिसने मेरे दिल की धड़कनें और तेज कर दीं। मैं कुछ पलों के लिए चुप रही और फिर धीरे से अपनी हथेलियां उसकी पीठ पर फेरने लगी।

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मैं मान गई और थोड़ा और सहला दी। इसमें तो वो और भी पागल हो गया।

सच तो ये है दोस्तों मैं खुद ही अपने आप पर काबू नहीं रख पा रही थी क्योंकि मैं खुद भी वासना पूरी नहीं होने के कारण मेरी वासना की आग धधक रही थी मेरे जिस्म में। मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाई और मैंने अपना होठ उसके होठ पर रख दिया।

फिर मेरा भाई मेरे गुलाबी होठ को चूसने लगा। मेरी गाल को काटने लगा। मेरी पीठ को सहलाते सहलाते मेरे गांड पर हाथ फेरने लगा। ऐसा लगा मेरे शरीर में करंट दौड़ गया।

मैं झट से घूम गई। वो मुझे पीछे से पकड़ लिया। मेरे गांड में अपना लौड़ा रगड़ने लगा।

जैसे ही मैं तेजी से घूमी तो मेरी लंबी खुली हुई बालों की लटें उसके चेहरे पर गिर पड़ीं। उसने तुरंत अपनी दोनों मजबूत और मांसल बाहों से मेरी पतली कमर को कसकर जकड़ लिया और मुझे पूरी ताकत से अपनी छाती से चिपका लिया। उसका कठोर और गर्म लौड़ा मेरी भारी और नरम गांड की दरार में जोर जोर से रगड़ने लगा। मैं महसूस कर रही थी कि उसका मोटा और लंबा लंड मेरी गांड के दोनों गोल फलों के बीच में दब रहा है और उसकी गर्मी मेरी पतली साड़ी के कपड़े को पार करके भी मेरी त्वचा को जला रही है। उसकी सांसें मेरे कान के ठीक पास तेज और गर्म होकर मेरे रोएं खड़े कर रही थीं। उसकी उंगलियां मेरी कमर पर दब रही थीं जिससे मेरी पूरी पीठ में सनसनी दौड़ रही थी।

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पीछे से हाथ आगे करके मेरी चूचियों को दबाने लगा और फिर उसने मेरे ब्लाउज का हुक खोल दिया। मैं ब्रा पर आ गई थी। वो अब मेरी पीठ को चूमने लगा। जब भी वो मेरी पीठ पर अपना होठ रखता मेरे रोम रोम खड़े हो जाते। और उफ्फ उफ्फ उफ्फ की आवाज निकलती।

उसने अपनी लंबी उंगलियां आगे बढ़ाकर मेरी भारी और टाइट चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही जोर से दबा लिया। उसकी हथेलियां मेरी चूचियों के नरम और गर्म मांस को पूरी तरह भर ले रही थीं। वह बार बार उन्हें मसल रहा था जिससे मेरी चूचियां उसके हाथों में दबकर और भी भारी हो गईं। फिर उसने मेरे ब्लाउज के हुक एक एक करके खोलने शुरू कर दिए। हर हुक खुलने के साथ मेरी पीठ की गोरी त्वचा हवा से टकरा रही थी। जल्दी ही पूरा ब्लाउज खुल गया और मैं सिर्फ अपनी काली ब्रा पर रह गई। वो अब मेरी पूरी नंगी पीठ पर अपने गर्म और नम होंठों से चूमने लगा। जब भी उसके होंठ मेरी पीठ की नाजुक त्वचा पर लगते तो मेरे पूरे शरीर के रोम रोम खड़े हो जाते थे। मेरे मुंह से अनायास ही उफ्फ उफ्फ उफ्फ की आवाज निकल रही थी। मेरी सांसें तेज हो गई थीं और मेरी चूत अंदर से और भी गीली हो रही थी।

उसके बाद वो पीछे से ब्रा के हुक को खोल दिया। मेरी दोनों चूचियां टाइट हो चुकी थीं। निप्पल भी खड़ा हो गया था। मेरे बाल बिखर गए थे। मैंने उसके लंड को पकड़ लिया।

उसने पीछे से ही ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को मेरे कंधों से नीचे सरका दिया। मेरी दोनों भारी चूचियां एकदम आजाद होकर आगे की तरफ लहरा गईं। मेरी चूचियां पहले से ही टाइट और भरी हुई थीं और अब उनके गुलाबी निप्पल पूरी तरह खड़े हो चुके थे। मेरे लंबे बाल बिखरकर मेरी पीठ और कंधों पर फैल गए थे। मैंने अपना हाथ पीछे की तरफ ले जाकर उसका कठोर और गर्म लंड अपनी हथेली में पकड़ लिया। वह बहुत मोटा और लंबा था और उसकी नसें फूली हुई थीं। मैंने उसे धीरे से सहलाया जिससे वह और भी सख्त हो गया।

अब हम दोनों बेडरूम में गए और मैं लेट गई। उसने मेरे कमर पर बंधे साड़ी को उतारा। पेटीकोट का नाड़ा खोला और मेरी रेड कलर की पैंटी को सूंघा और फिर खोल दिया।

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हम दोनों जल्दी से बेडरूम में पहुंच गए और मैं बिस्तर पर लेट गई। उसने मेरी कमर पर बंधी साड़ी की गांठ खोल दी और साड़ी को मेरी टांगों से नीचे उतार दिया। फिर उसने पेटीकोट का नाड़ा खींचकर खोल दिया और उसे भी उतार दिया। अब मैं सिर्फ अपनी रेड कलर की पैंटी में रह गई थी। उसने मेरी पैंटी को अपनी नाक के पास ले जाकर जोर से सूंघा। उसकी आंखें बंद हो गईं और वह मेरी चूत की गंध को गहरी सांस में भर रहा था। फिर उसने पैंटी को मेरी टांगों से नीचे सरका दिया और पूरी तरह उतारकर फेंक दिया। अब मैं पूरी तरह नंगी लेटी थी।

तब तक मेरी चूत काफी गरम हो चुकी थी। वो मेरी चूत को सहलाते हुए कहा काश ये मौका तुम मुझे पहले देते तो मैं तुम्हारे नाम का करीब बीस किलो वीर्य बाथरूम में बर्बाद नहीं करता।

तब तक मेरी चूत अंदर से बहुत गरम और गीली हो चुकी थी। उसने अपनी उंगलियों से मेरी चूत की बाहर वाली पलकों को धीरे से सहलाना शुरू किया। उसकी उंगलियां मेरी क्लिट पर घूम रही थीं जिससे मेरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई। वो धीमी आवाज में बोला काश ये मौका तुम मुझे पहले देते तो मैं तुम्हारे नाम का करीब बीस किलो वीर्य बाथरूम में बर्बाद नहीं करता।

तो मैं बोली कोई बात नहीं अब मत करना बर्बाद। मुझे जरूरत है विक्की डोनर की। तुम्हारे जीजा तो चोद ही नहीं पाते।

तो मैं बोली कोई बात नहीं अब मत करना बर्बाद। मुझे जरूरत है विक्की डोनर की। तुम्हारे जीजा तो चोद ही नहीं पाते। मेरी आवाज में लालसा और तड़प साफ झलक रही थी।

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इतना सुनकर मेरा भाई मेरी चूत को जीभ से चाटने लगा। मैं उसके बाल पकड़कर अपने चूत से सटाती। मेरी सिसकारियां बढ़ रही थीं। मैं पागल हो रही थी। मुझे तो बस अब लौड़ा चाहिए था।

इतना सुनकर मेरा भाई झुक गया और अपनी गर्म जीभ से मेरी चूत को चाटने लगा। उसकी जीभ मेरी क्लिट पर घूम रही थी फिर वह मेरी चूत की पलकों को चूसने लगा। मैंने उसके बाल पकड़कर अपनी चूत को उसके मुंह से और भी सटाकर दबा दिया। मेरी सिसकारियां बढ़ती जा रही थीं और मैं पागल हो रही थी। मेरे शरीर में हर जगह आग लग रही थी। मुझे तो बस अब उसका मोटा लौड़ा चाहिए था।

मैंने कहा देर मत कर अब तो तड़पाना छोड़ दे।

मैंने कहा देर मत कर अब तो तड़पाना छोड़ दे। मेरी आवाज में बेसब्री साफ थी।

उसने तुरंत अपना लौड़ा निकाला और मेरी चूत पर लगाया और जोर से घुसा दिया।

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उसने तुरंत अपना लौड़ा निकाला और मेरी चूत पर लगाया और जोर से घुसा दिया।

मेरी तो जान निकल गई थी जब उसने थोड़ा घुसाया था। पर जब उसने पूरा लौड़ा घुसाकर एक दो बार अंदर बाहर किया तो फिर मुझे मजा आने लगा। मेरी चूत से सफेद क्रीम निकल रहा था और वो जोर जोर से धक्के दे रहा था।

मेरी तो जान निकल गई थी जब उसने थोड़ा सा ही लंड घुसाया था। उसका मोटा सिर मेरी टाइट चूत को फैलाता हुआ अंदर जा रहा था। पर जब उसने पूरा लौड़ा घुसाकर एक दो बार जोरदार अंदर बाहर किया तो फिर मुझे असली मजा आने लगा। मेरी चूत से सफेद क्रीम निकलने लगी थी और वो जोर जोर से धक्के दे रहा था।

मुझे तो बस ऐसे ही धक्के का इंतजार था जो मेरे पति से मुझे नहीं मिल रहा था।

उसने मेरी टांगों को ऊपर कर दिया और फिर चौड़ी गांड के बीच में पतली सी खाई जो मेरी चूत थी उसमें अपना लौड़ा पेलने लगा। वो जोर जोर से धक्के देता मेरी चूचियां हिलतीं।

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जैसे ही उसने मेरी दोनों टांगों को उठाकर अपने कंधों पर रख दिया मेरी पूरी गांड ऊपर की तरफ उठ गई और मेरी चूत पूरी तरह खुलकर उसके सामने आ गई। उसकी चौड़ी गांड के बीच में बनी पतली सी गीली खाई अब पूरी तरह उजागर और चमकती हुई थी। उसने अपना मोटा लंबा और नसों से फूला हुआ लौड़ा मेरी चूत के मुंह पर कई बार रगड़ा फिर एक जोरदार धक्के के साथ आधा लंड अंदर धकेल दिया। मेरी टाइट चूत का छेद उसके मोटे सिर के दबाव से फैल रहा था और अंदर की गर्मी उसे और भी उत्तेजित कर रही थी। फिर उसने अपनी कमर को पीछे खींचा और पूरे जोर से दूसरा धक्का मारा। इस बार उसका पूरा मोटा लौड़ा मेरी चूत के सबसे गहरे हिस्से तक चला गया और मैं महसूस कर रही थी कि उसका लंड मेरी अंदर की दीवारों को दबा रहा है।

वो अब जोर जोर से तेज धक्के देने लगा। हर धक्के के साथ उसके भारी गोले मेरी गांड से जोर से टकरा रहे थे और पच पच पच की तेज आवाज पूरे बेडरूम में गूंज रही थी। मेरी भारी और नरम चूचियां हर झटके के साथ ऊपर नीचे जोर जोर से हिल रही थीं। हर धक्के पर मेरी चूत से सफेद गाढ़ी क्रीम निकलकर उसके लंड पर चढ़ रही थी और दोनों की जांघों तक बह रही थी। मेरी सांसें पूरी तरह फूल गई थीं और मुंह से लगातार उफ्फ उफ्फ आह आह की सिसकारियां अनियंत्रित रूप से निकल रही थीं। मेरी आंखें बंद हो गई थीं और चेहरा आनंद से लाल हो रहा था।

फिर वो पकड़ता अपनी दांतों से निप्पल को पकड़ता मुंह में लेता मेरी होठ चूसता और फिर जोर से मेरी चूत में झटके देता।

फिर उसने झुककर मेरी एक चूची को मजबूती से पकड़ लिया। उसने अपने दांतों से मेरे खड़े और संवेदनशील निप्पल को हल्के से काटा और फिर पूरा निप्पल मुंह में ले लिया। वो जोर जोर से चूसने लगा जिससे मेरे निप्पल में मीठी सी जलन और आनंद दोनों एक साथ महसूस हो रहे थे। उसके मुंह की गर्मी और जीभ की नमी मेरे निप्पल को और भी ज्यादा संवेदनशील बना रही थी। फिर वो मेरी दूसरी चूची पर भी वैसा ही करने लगा। बीच बीच में वो मेरा मुंह चूमने लगता। उसके गर्म और नम होंठ मेरे होंठों को चूसते जीभ मेरी जीभ से लड़ती और फिर अचानक वो अपनी कमर को और तेजी से हिलाकर मेरी चूत में गहरे गहरे झटके मारने लगता। हर झटके के साथ मुझे लगता था जैसे उसका लंड मेरी चूत को पूरी तरह फाड़ देगा लेकिन यही दर्द भरा आनंद मुझे और भी पागल बना रहा था।

क्या बताऊं दोस्तों आज मुझे लगा कि चुदाई में कितना मजा है और मैं इस मजे से अभी भी दूर थी पर आज मेरा भाई ने मुझे खुश कर दिया चोद कर।

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उसने मुझे करीब अलग अलग स्टाइल में एक घंटे तक चोदा। फिर हम दोनों ने खाना खाया फिर साथ ही सोये। यहां तक कि वो सुबह ही जाने वाला था पर वो तीन दिन तक नहीं गया जब तक मेरे पति और सास ससुर नहीं आ गए। आप खुद ही सोचिए उसने तीन दिन तक मेरे साथ सारे चुदाई के तरीके आजमा लिए।

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